मुंबई, एजेंसियां। फिल्म निर्माता और निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी नातिन राहा कपूर को लेकर बड़ी उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि राहा में आगे चलकर अपने पिता और अभिनेता रणबीर कपूर से भी आगे निकलने की क्षमता हो सकती है। महेश भट्ट की इस टिप्पणी के बाद कपूर परिवार के प्रशंसकों के बीच यह बयान चर्चा में आ गया है। राहा को लेकर महेश भट्ट ने क्या कहा? महेश भट्ट ने राहा कपूर की भविष्य की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक बात कही। उनका मानना है कि नई पीढ़ी के बच्चों के सामने आज पहले से कहीं ज्यादा अवसर हैं और राहा भी भविष्य में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। उनकी टिप्पणी को राहा के संभावित भविष्य को लेकर एक व्यक्तिगत राय के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल राहा बहुत छोटी हैं और उनके अभिनय या फिल्मी करियर को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। रणबीर कपूर से तुलना क्यों हुई? राहा कपूर अभिनेता रणबीर कपूर और अभिनेत्री आलिया भट्ट की बेटी हैं। रणबीर बॉलीवुड के सफल अभिनेताओं में शामिल हैं और उन्होंने ‘रॉकस्टार’, ‘बर्फी!’, ‘संजू’, ‘ब्रह्मास्त्र’ और ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों में काम किया है। महेश भट्ट की टिप्पणी में राहा की तुलना उनके पिता रणबीर से किए जाने के कारण यह बयान खास तौर पर चर्चा में आया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि राहा ने अभी फिल्मी दुनिया में कोई उपलब्धि हासिल की है। कपूर परिवार की नई पीढ़ी पर नजर कपूर परिवार की अगली पीढ़ी में राहा कपूर को लेकर प्रशंसकों की दिलचस्पी पहले से ही काफी है। आलिया और रणबीर दोनों ही अपनी बेटी को मीडिया की लगातार सुर्खियों से दूर रखने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में महेश भट्ट का यह बयान राहा के भविष्य को लेकर एक नाना की उम्मीद और उत्साह के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में राहा फिल्मों में आती हैं या किसी दूसरे क्षेत्र में अपनी पहचान बनाती हैं, यह अभी पूरी तरह उनके भविष्य के फैसलों पर निर्भर करेगा।
मुंबई, एजेंसियां। संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘लव एंड वॉर’ को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। फिल्म में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल पहली बार एक साथ नजर आएंगे। अब फिल्म के फर्स्ट लुक को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं और रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि इसे 15 अगस्त के आसपास जारी किया जा सकता है। हालांकि, इस तारीख की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। भंसाली की फिल्म में पहली बार साथ दिखेगी तिकड़ी ‘लव एंड वॉर’ में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन संजय लीला भंसाली कर रहे हैं। रणबीर और आलिया इससे पहले ‘ब्रह्मास्त्र’ में साथ काम कर चुके हैं, लेकिन विक्की कौशल के साथ यह उनकी पहली फिल्म होगी। फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी स्टारकास्ट और भंसाली की भव्य कहानी कहने की शैली को लेकर है। फर्स्ट लुक को लेकर बढ़ी उत्सुकता फिल्म के फर्स्ट लुक को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार अटकलें चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में 15 अगस्त 2026 को फर्स्ट लुक सामने आने की संभावना जताई गई है। हालांकि, निर्माताओं की ओर से फिलहाल इस तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए 15 अगस्त को फर्स्ट लुक जारी होने की खबर को अभी संभावित तारीख के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 2026 में रिलीज होने की तैयारी ‘लव एंड वॉर’ को लेकर मेकर्स बड़े स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बन रही यह फिल्म रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की जोड़ी को दोबारा पर्दे पर लेकर आएगी, जबकि विक्की कौशल कहानी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आएंगे। फिल्म की कहानी और किरदारों से जुड़ी ज्यादातर जानकारियां अभी गोपनीय रखी गई हैं। ऐसे में फर्स्ट लुक सामने आने के बाद फिल्म के किरदारों और उनके लुक को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री आकांक्षा रंजन कपूर ने फिल्म निर्देशक शरण शर्मा के साथ शादी कर ली है। दोनों ने 11 जुलाई को मुंबई में बेहद निजी सिविल मैरिज की, जिसमें सिर्फ परिवार और करीबी दोस्त शामिल हुए। शादी के बाद आकांक्षा ने सोशल मीडिया पर अपनी वेडिंग फोटोज साझा कर इस खुशखबरी की आधिकारिक घोषणा की। तस्वीरें सामने आते ही फैंस और फिल्मी सितारों ने नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं देना शुरू कर दिया। सादगी भरी शादी ने जीता दिल आकांक्षा और शरण ने पारंपरिक भव्य समारोह की बजाय सादगी से शादी करने का फैसला किया। दोनों ने कोर्ट मैरिज के बाद करीबी दोस्तों और परिवार के बीच छोटा-सा समारोह रखा। शादी की तस्वीरों में दोनों बेहद खुश नजर आए और उनकी केमिस्ट्री ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा। आलिया भट्ट समेत सितारों ने दी बधाई आकांक्षा की करीबी दोस्त आलिया भट्ट, अनन्या पांडे, वाणी कपूर और कई अन्य बॉलीवुड सितारों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दीं। शादी से पहले संगीत समारोह में आलिया भट्ट का डांस वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। चार साल की दोस्ती के बाद लिया बड़ा फैसला आकांक्षा रंजन कपूर और शरण शर्मा पिछले करीब चार वर्षों से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। दोनों ने हमेशा अपने रिश्ते को निजी रखा और अब शादी के साथ अपने रिश्ते को नया नाम दे दिया है। शादी के बाद साझा की गई तस्वीरों को फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है।
मुंबई में आयोजित अंशुला कपूर और रोहन ठक्कर के वेडिंग रिसेप्शन में बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपने शाही अंदाज से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मशहूर फैशन डिजाइनर अनिता डोंगरे के Rewild 2026 कलेक्शन का एमराल्ड ग्रीन बनारसी ब्रोकेड आउटफिट पहना, जिसमें पारंपरिक भारतीय शिल्प और आधुनिक फैशन का खूबसूरत मेल देखने को मिला। बनारसी ब्रोकेड को मिला मॉडर्न ट्विस्ट आलिया भट्ट का यह आउटफिट पारंपरिक लहंगे से अलग था। इसमें स्ट्रक्चर्ड ब्रोकेड ब्रालेट के साथ हाई-वेस्ट फ्लोर-लेंथ स्कर्ट शामिल थी, जिसकी सिल्हूट किसी एलिगेंट गाउन जैसी दिखाई दे रही थी। इस डिजाइन ने पारंपरिक बनारसी बुनाई को आधुनिक अंदाज में पेश किया। वाराणसी के कारीगरों की बुनाई ने बढ़ाई खूबसूरती इस खास आउटफिट की सबसे बड़ी खासियत इसकी बनारसी ब्रोकेड बुनाई रही। वाराणसी के कारीगरों द्वारा तैयार किए गए इस फैब्रिक में सुनहरे रेशमी धागों से बाघ, शाही पक्षियों और वनस्पति प्रेरित डिज़ाइन बुने गए हैं। यही बारीक कारीगरी इस परिधान को अलग पहचान देती है। Rewild 2026 कलेक्शन से लिया गया लुक यह ड्रेस अनिता डोंगरे के Rewild 2026 कलेक्शन का हिस्सा है। इस कलेक्शन की प्रेरणा भारत की पारंपरिक बुनाई कला और प्रकृति से ली गई है। डिजाइनर का उद्देश्य पारंपरिक शिल्प को आधुनिक फैशन के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। मिनिमल स्टाइलिंग ने बढ़ाई रॉयल अपील आलिया के इस लुक को बेहद सादगी के साथ स्टाइल किया गया। उन्होंने जगदीश ज्वेलर्स, चंडीगढ़ के स्टेटमेंट झुमके पहने, जिनमें अनकट डायमंड, पर्ल, एमराल्ड, रूबी और फिरोज़ा बीड्स का खूबसूरत संयोजन था। मेकअप को भी सॉफ्ट और नेचुरल रखा गया। काजल लगी आंखें, न्यूड पिंक लिप्स और सॉफ्ट बीच वेव्स हेयरस्टाइल ने उनके पूरे लुक को और आकर्षक बना दिया। शादी के अलावा भी पहन सकते हैं ऐसा आउटफिट इस आउटफिट की खास बात इसकी बहुउपयोगिता भी है। इसे पारंपरिक शादी समारोह के अलावा कॉकटेल पार्टी या फॉर्मल इवेंट में भी अलग अंदाज में स्टाइल किया जा सकता है। दुपट्टे की जगह हल्के एक्सेसरीज़ और मॉडर्न ज्वेलरी के साथ यह एक स्टाइलिश ईवनिंग लुक भी बन सकता है।
आलिया भट्ट और शरवरी अभिनीत स्पाई एक्शन फिल्म 'Alpha' बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है। ट्रेड अनुमानों के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के पांचवें दिन यानी पहले डिस्काउंटेड मंगलवार को करीब ₹4 करोड़ (नेट) का कारोबार किया। इसके साथ ही फिल्म का कुल भारतीय नेट कलेक्शन लगभग ₹40.5 करोड़ पहुंच गया है। हालांकि, मंगलवार को सोमवार के मुकाबले लगभग 15 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली, लेकिन ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि सस्ते टिकटों के बावजूद फिल्म को उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं मिला। 5 दिनों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (ट्रेड अनुमान) दिन नेट कलेक्शन शुक्रवार ₹9.00 करोड़ शनिवार ₹11.50 करोड़ रविवार ₹12.50 करोड़ सोमवार ₹3.50 करोड़ मंगलवार* ₹4.00 करोड़ कुल ₹40.50 करोड़ *मंगलवार का आंकड़ा ट्रेड अनुमान पर आधारित है। पहले हफ्ते में ₹46-48 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म पहले सप्ताह में ₹46 से ₹48 करोड़ के बीच नेट कलेक्शन कर सकती है। इसके बाद दूसरे शुक्रवार तक इसके ₹50 करोड़ क्लब में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, दूसरे वीकेंड में नई रिलीज 'Dhamaal 4' से फिल्म को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल सकती है, जिसका असर इसके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर पड़ सकता है। वर्ड ऑफ माउथ बना चुनौती फिल्म को शुरुआती दिनों में ठीक-ठाक ओपनिंग मिली, लेकिन दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया के कारण इसकी कमाई की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। ट्रेड जानकारों का मानना है कि सकारात्मक वर्ड ऑफ माउथ की कमी फिल्म की कमाई को प्रभावित कर रही है। महिला-प्रधान एक्शन फिल्मों के लिए चुनौतीपूर्ण बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय बॉक्स ऑफिस पर महिला-प्रधान एक्शन फिल्मों के लिए दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में 'Alpha' का प्रदर्शन इसी चुनौती के बीच देखा जा रहा है। नोट: बॉक्स ऑफिस के सभी आंकड़े विभिन्न ट्रेड रिपोर्ट्स और शुरुआती अनुमानों पर आधारित हैं। आधिकारिक कलेक्शन में बदलाव संभव है।
मुंबई, एजेंसियां। फिल्म निर्माता करन जौहर ने फिल्म 'Alpha' की शानदार शुरुआत के बाद अभिनेत्री आलिया भट्ट की जमकर सराहना की है। करन ने कहा कि आलिया ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बॉलीवुड की सबसे भरोसेमंद और दमदार अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महिला प्रधान फिल्मों को लेकर बनी कई धारणाओं को आलिया ने अपने प्रदर्शन और बॉक्स ऑफिस सफलता से गलत साबित किया है। 'आलिया की स्टार पावर पर कोई सवाल नहीं' करन जौहर ने सोशल मीडिया पर फिल्म की सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि "आलिया भट्ट की स्टार पावर पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने हर बार अपनी मेहनत और अभिनय से खुद को साबित किया है।" उन्होंने फिल्म की पूरी टीम को बधाई देते हुए दर्शकों का भी आभार जताया। 'Alpha' को मिल रहा दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स रिलीज के बाद से 'Alpha' को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। फिल्म ने पहले दो दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर मजबूत कमाई दर्ज की है। एक्शन, कहानी और आलिया भट्ट के प्रदर्शन की खास तौर पर सराहना की जा रही है। ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो फिल्म पहले वीकेंड में शानदार कारोबार कर सकती है। महिला प्रधान फिल्मों को मिला नया भरोसा फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि 'Alpha' की सफलता महिला-केंद्रित फिल्मों के लिए सकारात्मक संकेत है। करन जौहर ने भी कहा कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के दम पर ऐसी फिल्में दर्शकों का भरोसा जीत रही हैं और बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री आलिया भट्ट की बहुप्रतीक्षित एक्शन फिल्म 'अल्फा' 3 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म की रिलीज से ठीक एक दिन पहले आलिया की मां और अभिनेत्री सोनी राजदान ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया, जिसने फैंस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस पोस्ट में उन्होंने अपने परिवार की चार पीढ़ियों की एक खूबसूरत तस्वीर साझा की और अपनी 97 वर्षीय मां को असली 'OG अल्फा वुमन' बताया। कौन है तस्वीर में ? तस्वीर में सोनी राजदान की मां, स्वयं सोनी, आलिया भट्ट और आलिया की बेटी राहा कपूर एक साथ नजर आ रही हैं। इस खास तस्वीर के जरिए सोनी ने अपनी मां के संघर्ष और साहस की कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी मां महज छह साल की थीं, जब उन्हें नाजी जर्मनी छोड़ना पड़ा। उनके नाना हिटलर की नीतियों के विरोधी थे, जिसके कारण पूरे परिवार को देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। सोनी ने लिखा कि उनका परिवार चेकोस्लोवाकिया के रास्ते ट्रेन से ब्रिटेन पहुंचा, जहां उनकी मां की मुलाकात एन.एन. राजदान से हुई। शादी के बाद वह भारत आईं और यहां नई जिंदगी की शुरुआत की। सोनी ने अपनी मां के संघर्ष, हिम्मत और सकारात्मक सोच को ही असली 'अल्फा' की पहचान बताया। पोस्ट के अंत में सोनी राजदान ने कहा अपने पोस्ट के अंत में सोनी राजदान ने कहा कि हर परिवार में ऐसी मजबूत और प्रेरणादायक महिलाएं होती हैं, जो कठिन परिस्थितियों का सामना कर अपने परिवार की ताकत बनती हैं। उन्होंने प्रशंसकों से भी अपने जीवन की ऐसी 'अल्फा वुमन' की कहानियां साझा करने की अपील की। वहीं, आलिया भट्ट और शरवरी वाघ अभिनीत 'अल्फा' का निर्देशन शिव रवैल ने किया है। यह YRF स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला-केंद्रित फिल्म है, जिसमें दोनों अभिनेत्रियां दमदार एक्शन अवतार में नजर आएंगी। फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है और इसकी रिलीज का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।
फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने एक हालिया इंटरव्यू में बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर चल रही बहस पर खुलकर अपनी राय रखी। रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के साथ काम कर चुके निर्देशक का मानना है कि फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को भी अपनी पहचान बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है और कई बार उन्हें बाहरी लोगों से भी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। 'अपने परिवार की सफलता से होती है तुलना' Zoom को दिए इंटरव्यू में इम्तियाज अली ने कहा कि आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकारों के सामने अलग तरह की चुनौतियां होती हैं। उन्होंने कहा कि इन कलाकारों के सामने अपने ही परिवार के सफल सदस्यों जैसा प्रदर्शन करने का दबाव रहता है और वे अपनी सफलता की तुलना अपने घर के लोगों से करते हैं। इम्तियाज अली के मुताबिक, एक बाहरी व्यक्ति के तौर पर उन्हें चीजें अपेक्षाकृत आसान लगीं, लेकिन उनके अनुसार फिल्मी परिवार में जन्म लेने वालों पर लगातार खुद को साबित करने का अतिरिक्त दबाव होता है। रणबीर कपूर की जमकर की तारीफ इम्तियाज अली ने कहा कि आज रणबीर कपूर इंडस्ट्री के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं और उन्हें सिर्फ "नेपो किड" कहकर उनकी प्रतिभा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि रणबीर हर किरदार में खुद को पूरी तरह ढाल लेते हैं। इम्तियाज ने कहा कि रणबीर में एक गिरगिट जैसी क्षमता है, जिसके कारण दर्शक स्क्रीन पर रणबीर कपूर को नहीं बल्कि उनके किरदार को देखते हैं। 'Lord Ram के रूप में देखने का इंतजार' नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभाने जा रहे हैं। इस पर इम्तियाज अली ने कहा कि वह बेहद उत्साहित हैं और देखना चाहते हैं कि रणबीर इस किरदार को किस तरह निभाते हैं। उनके अनुसार, रणबीर पहले भी 'रॉकस्टार' के जॉर्डन, 'बर्फी' और कई अलग-अलग किरदारों में खुद को साबित कर चुके हैं। आलिया भट्ट के लिए कही बड़ी बात आलिया भट्ट की तारीफ करते हुए इम्तियाज अली ने कहा कि वह इतनी शानदार अभिनेत्री हैं कि लोग उनसे ईर्ष्या करने के बजाय उन्हें और अधिक मौके मिलते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए लगातार अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
दूसरे रेड कार्पेट लुक ने जीता फैंस का दिल Alia Bhatt ने Cannes Film Festival 2026 में अपने दूसरे रेड कार्पेट अपीयरेंस से एक बार फिर फैशन जगत का ध्यान खींच लिया। इस बार अभिनेत्री ने सिंड्रेला-इंस्पायर्ड लुक अपनाया, जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं। यह कान्स 2026 में उनका चौथा लुक था और फैंस के साथ-साथ फैशन एक्सपर्ट्स ने भी उनकी जमकर तारीफ की। ब्लू गाउन में दिखा रॉयल अंदाज आलिया ने डिजाइनर Danielle Frankel का कस्टम स्टील-ब्लू गाउन पहना था। इस ड्रेस में सिल्क साटन और हनीकॉम्ब लेस का खूबसूरत मिश्रण देखने को मिला। गाउन का कॉर्सेट-स्टाइल फिटेड बॉडीस और लंबा फ्लोई स्कर्ट उनके लुक को बेहद रॉयल बना रहा था। वहीं हाई लेस कॉलर ने उनके आउटफिट में विंटेज और क्लासिक टच जोड़ दिया। रिया कपूर ने किया स्टाइल आलिया के इस लुक को मशहूर स्टाइलिस्ट Rhea Kapoor ने स्टाइल किया। उन्होंने इस आउटफिट के साथ मिनिमल लेकिन बेहद लग्जरी ज्वेलरी चुनी। अभिनेत्री ने डायमंड चोकर के बीच टीयरड्रॉप पेंडेंट कैरी किया, साथ ही डायमंड इयररिंग्स और रिंग्स से अपने लुक को पूरा किया। मेकअप और हेयरस्टाइल ने बढ़ाई खूबसूरती आलिया ने सॉफ्ट ग्लैम मेकअप चुना जिसमें रोजी चीक्स और ग्लॉसी न्यूड लिप्स शामिल थे। उनका हल्का मेसी अपडू और फेस-फ्रेमिंग हेयर स्ट्रैंड्स पूरे लुक को फेयरीटेल फिनिश दे रहे थे। कान्स में लगातार छा रही हैं आलिया इससे पहले भी आलिया भट्ट अपने हैंड-पेंटेड गाउन, पीच दुपट्टा लुक और साड़ी-गाउन स्टाइल से कान्स में चर्चा बटोर चुकी हैं। अभिनेत्री का यह नया सिंड्रेला-कोर लुक अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस का कहना है कि आलिया इस बार सिर्फ कान्स में शामिल नहीं हुई हैं, बल्कि अपने फैशन स्टेटमेंट से पूरे इवेंट पर छा गई हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।