लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने एक्साइज कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए कुल 32,891 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। प्रारंभिक परीक्षा के आधार पर हुआ चयन UPSSSC ने एक्साइज कांस्टेबल भर्ती के लिए आयोजित प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (Eligibility Test) का परिणाम घोषित किया है। जिन उम्मीदवारों ने कटऑफ के अनुसार अंक हासिल किए हैं, उन्हें अब भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण यानी मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा। 722 पदों के लिए चल रही है भर्ती प्रक्रिया इस भर्ती अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में एक्साइज कांस्टेबल के 722 पदों को भरा जाना है। आयोग ने पहले ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी की थी, जिसके बाद परीक्षा और रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। उम्मीदवार ऐसे चेक कर सकते हैं रिजल्ट उम्मीदवार UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। रिजल्ट चेक करने के लिए उन्हें अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। आगे क्या होगा? मुख्य परीक्षा के लिए चयनित उम्मीदवारों को अब अगले चरण की तैयारी शुरू करनी होगी। Mains परीक्षा के बाद आगे की चयन प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन और अन्य निर्धारित चरण शामिल हो सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। मानसून के सक्रिय होने के कारण देश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) ने महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कई इलाकों में जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थिति को देखते हुए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। महाराष्ट्र और गुजरात में तेज बारिश का अनुमान महाराष्ट्र के कई जिलों में लगातार बारिश के चलते प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। मुंबई समेत कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ क्षेत्रों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। गुजरात में भी मानसूनी गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भरने और बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने राहत और बचाव टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत में अलर्ट उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों में कई इलाकों में तेज बारिश और आंधी की संभावना है। बारिश के कारण नदियों के जलस्तर बढ़ने, सड़कों पर जलभराव और ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने कई जिलों में अलर्ट जारी किया है और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बढ़ी बारिश की गतिविधि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी सिस्टम और सक्रिय मानसून के कारण देश के कई हिस्सों में बारिश की तीव्रता बढ़ी है। इसके प्रभाव से पूर्वी, मध्य और पश्चिमी भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है। प्रशासन ने जारी की सावधानी बरतने की अपील भारी बारिश की संभावना को देखते हुए राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रखा है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें तथा मौसम विभाग के अपडेट पर नजर बनाए रखें। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता बनी रह सकती है, जिससे कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
वाराणसी, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को आधिकारिक रूप से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची (UNESCO World Heritage List) में शामिल कर लिया गया है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही सारनाथ भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया गर्व का क्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने पर खुशी जताते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारत की समृद्ध सभ्यता, आध्यात्मिक विरासत और भगवान बुद्ध के शांति व करुणा के संदेश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश का साक्षी है सारनाथ सारनाथ वह ऐतिहासिक स्थल है जहां भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन) दिया था। यह बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। यहां स्थित धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप, अशोक स्तंभ और प्राचीन विहारों के अवशेष बौद्ध इतिहास और भारतीय पुरातत्व की अमूल्य धरोहर हैं। यूनेस्को ने इन्हीं ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के आधार पर सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। पर्यटन और संरक्षण को मिलेगा बड़ा बढ़ावा विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद सारनाथ में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण, शोध और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। इस उपलब्धि के साथ भारत विश्व में सबसे अधिक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों वाले देशों की सूची में छठे स्थान पर पहुंच गया है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उसकी स्थिति और मजबूत हुई है।
बहराइच, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित गतिविधियों से जुड़े संगठन 'वारिस पंजाब दे' के वांछित आरोपी बिक्रमजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। उसके साथ एक अमेरिकी नागरिक को भी पकड़ा गया, जो बिना वैध दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। दोनों को सशस्त्र सीमा बल (SSB) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पकड़ा गया। नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल होने की कोशिश नाकाम जांच एजेंसियों के अनुसार, बिक्रमजीत सिंह लंबे समय से पुलिस की नजर में था और उसके खिलाफ पहले से मामले दर्ज थे। सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि वह नेपाल सीमा के रास्ते आवाजाही कर सकता है। इसके बाद रूपईडीहा बॉर्डर क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई और कार्रवाई कर उसे पकड़ लिया गया। अमेरिकी नागरिक से पूछताछ, सुरक्षा एजेंसियां जुटीं जांच में कार्रवाई के दौरान पकड़े गए अमेरिकी नागरिक के पास भारत में प्रवेश से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं मिले। सुरक्षा एजेंसियां अब उसकी पहचान, भारत आने के उद्देश्य और अन्य संपर्कों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और पूछताछ जारी है। सीमा सुरक्षा को लेकर एजेंसियां सतर्क भारत-नेपाल सीमा पर हाल के दिनों में संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि अवैध प्रवेश, संगठित अपराध और देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े किसी भी नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
वृंदावन, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। दोनों ने उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचकर उनसे मुलाकात की और आशीर्वाद लिया। इस दौरान कपल बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आये। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। आश्रम में कुछ समय बिताया, आध्यात्मिक चर्चा में हुए शामिल जानकारी के अनुसार, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और कुछ समय उनके साथ आध्यात्मिक चर्चा में बिताया। दोनों ने महाराज के सामने बैठकर उनकी बातें सुनीं और जीवन, आध्यात्मिकता तथा सकारात्मक सोच से जुड़े संदेशों को ग्रहण किया। इस दौरान दोनों काफी शांत और श्रद्धा भाव में नजर आए। सादगी भरे अंदाज की हो रही चर्चा वृंदावन पहुंचने के दौरान विराट और अनुष्का का सादा पहनावा भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। दोनों ने बिना किसी बड़े तामझाम के आश्रम पहुंचकर दर्शन किए। सोशल मीडिया पर फैंस उनकी इस सादगी की तारीफ कर रहे हैं और इसे उनकी निजी आस्था से जुड़ा कदम बता रहे हैं। पहले भी प्रेमानंद महाराज से मिल चुके हैं विराट-अनुष्का यह पहली बार नहीं है जब विराट कोहली और अनुष्का शर्मा प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने पहुंचे हैं। इससे पहले भी दोनों कई बार वृंदावन आकर महाराज से आशीर्वाद ले चुके हैं। दोनों की धार्मिक और आध्यात्मिक यात्राएं पहले भी सुर्खियों में रही हैं। विराट और अनुष्का ने इससे पहले भी कई धार्मिक स्थलों का दौरा किया है। वे उत्तराखंड के मंदिरों, बाबा नीम करोली आश्रम और अन्य आध्यात्मिक स्थानों पर भी नजर आ चुके हैं। आईपीएल सफलता के बाद भी पहुंचे थे वृंदावन इससे पहले विराट कोहली और अनुष्का शर्मा आईपीएल में आरसीबी की सफलता के बाद भी वृंदावन पहुंचे थे। उस समय भी दोनों ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की थी। महाराज ने उन्हें जीवन में विनम्रता, धैर्य और ईश्वर के प्रति विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया था। फैंस ने सोशल मीडिया पर दी सकारात्मक प्रतिक्रिया विराट और अनुष्का की इस यात्रा के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने उनकी आस्था और सादगी की प्रशंसा की, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे परिवार और व्यक्तिगत जीवन में आध्यात्मिक जुड़ाव का उदाहरण बताया। प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचते हैं कई बड़े चेहरे वृंदावन के प्रेमानंद महाराज देशभर में प्रसिद्ध संतों में से एक हैं। उनसे मिलने के लिए खेल, फिल्म और उद्योग जगत की कई बड़ी हस्तियां समय-समय पर पहुंचती रही हैं। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की यह मुलाकात भी इसी कारण चर्चा का विषय बनी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हरियाली तीज का पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और यह विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए निर्जला या फलाहार व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता बनी रहती है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6:46 बजे से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे तक रहेगी। चूंकि व्रत और पर्व उदयातिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, इसलिए हरियाली तीज 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। जानें शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम हरियाली तीज के दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:50 से 5:35 बजे तक, अभिजित मुहूर्त 12:17 से 1:08 बजे तक और विजय मुहूर्त 2:51 से 3:42 बजे तक रहेगा। वहीं गोधूलि मुहूर्त 7:06 से 7:29 बजे और अमृत काल रात 8:18 से 9:53 बजे तक रहेगा। चौघड़िया के अनुसार शुभ, लाभ और अमृत काल भी पूजा के लिए अनुकूल माने गए हैं। इस दिन महिलाओं को क्या पहना चाहिए ? इस दिन महिलाओं को हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनने, सोलह श्रृंगार करने और हाथों में मेहंदी रचाने की परंपरा है। पूजा में मायके से प्राप्त श्रृंगार सामग्री का उपयोग शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान विवाद और नकारात्मकता से दूर रहने, शुभ मुहूर्त से पहले पारण न करने तथा रात्रि में भजन-कीर्तन और शिव-पार्वती के जागरण का विशेष महत्व बताया गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में हरियाली तीज बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर मायके से विवाहित बेटियों को वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, घेवर, मिठाइयां और उपहार भेजने की परंपरा भी निभाई जाती है, जो पारिवारिक स्नेह और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक मानी जाती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) ने राजनीति के साथ-साथ खेल जगत में भी अपनी पहचान मजबूत की है। उन्होंने 49वीं उत्तर प्रदेश स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज (कांस्य) मेडल अपने नाम किया। प्रतियोगिता में उनकी सफलता के बाद समर्थकों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी। दिल्ली में आयोजित हुई प्रतियोगिता 49वीं यूपी स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप का आयोजन दिल्ली में किया गया, जिसमें प्रदेश के कई अनुभवी और उभरते निशानेबाजों ने हिस्सा लिया। राजा भैया ने कड़े मुकाबले के बीच बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। समर्थकों में खुशी की लहर राजा भैया की इस उपलब्धि के बाद प्रतापगढ़ और कुंडा क्षेत्र में उनके समर्थकों ने खुशी जताई। सोशल मीडिया पर भी उन्हें लगातार बधाइयां दी जा रही हैं और उनके खेल कौशल की सराहना की जा रही है। शूटिंग के प्रति पुराना लगाव राजा भैया की शूटिंग खेल में लंबे समय से रुचि रही है। राजनीतिक व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। राजनीति के साथ खेल में भी बनाई पहचान राजा भैया की इस सफलता को उनके समर्थक राजनीति के साथ खेल के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह पदक युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा और सार्वजनिक जीवन के साथ खेलों में सक्रिय रहने का सकारात्मक संदेश देगा।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "2017 से पहले उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं था, बल्कि उस समय की सरकार की सोच और कार्यशैली बीमार थी।" उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की नीतियों और निर्णयों के कारण प्रदेश विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। '2017 से पहले न नीति थी, न नियत' मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सरकार के पास न स्पष्ट नीति थी और न ही जनहित में काम करने की नियत। उनके अनुसार, भ्रष्टाचार, अपराध और माफिया का प्रभाव शासन व्यवस्था पर हावी था, जबकि मौजूदा सरकार ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देकर निवेश और विकास का माहौल बनाया हुआ है। विपक्ष पर साधा निशाना योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले की सरकारों ने प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाया, जबकि वर्तमान सरकार ने बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, एयरपोर्ट और औद्योगिक निवेश के जरिए उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाने का प्रयास किया है। विकास कार्यों का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज उत्तर प्रदेश निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बेहतर कानून-व्यवस्था और सुशासन के कारण देश-विदेश की कंपनियां निवेश के लिए आगे आ रही हैं। सदन में बयान पर छिड़ी राजनीतिक बहस योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए इसे प्रदेश के विकास का वास्तविक चित्र बताया।
महाप्रसाद में मालपुआ का क्यों है विशेष महत्व? ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी प्राचीन परंपराओं, भव्य रथ यात्रा और दिव्य महाप्रसाद के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ को प्रतिदिन छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनमें 'मालपुआ', जिसे स्थानीय भाषा में 'आमलु' कहा जाता है, विशेष स्थान रखता है। यह केवल स्वादिष्ट प्रसाद नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और सात्विक भोजन संस्कृति का प्रतीक भी माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग में शुद्ध और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है, इसलिए इसमें रिफाइंड चीनी या मैदा की बजाय गुड़ और गेहूं के आटे का प्रयोग किया जाता है। महाप्रसाद में गुड़ का ही क्यों होता है इस्तेमाल? जगन्नाथ मंदिर की रसोई में भोजन बनाने के नियम सदियों से चले आ रहे हैं। इन्हीं परंपराओं के अनुसार महाप्रसाद में रिफाइंड चीनी की जगह गुड़ का उपयोग किया जाता है। गुड़ मालपुए को प्राकृतिक मिठास, गहरा सुनहरा-भूरा रंग और सोंधी खुशबू देता है। इसके साथ बड़ी इलायची, सौंफ, काली मिर्च, केसर और खाने वाला कपूर मिलाकर इसका स्वाद और भी विशेष बनाया जाता है। यही वजह है कि मंदिर के मालपुए का स्वाद सामान्य मालपुए से अलग माना जाता है। मालपुआ बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 1 कप गुड़ (बारीक कटा या कुचला हुआ) 1.5–2 कप गेहूं का आटा 2 छोटे चम्मच दूध 4–5 केसर के रेशे 1 छोटा टुकड़ा खाने वाला कपूर 1 बड़ी इलायची 1 बड़ा चम्मच सौंफ 8–10 काली मिर्च आवश्यकतानुसार पानी तलने के लिए घी या तेल ऐसे बनाएं पारंपरिक मालपुआ सबसे पहले गुड़ को पानी में भिगोकर पूरी तरह घुलने दें। बड़ी इलायची, सौंफ और काली मिर्च को दरदरा कूट लें। अब गुड़ के घोल में थोड़ा-सा खाने वाला कपूर, दूध और धीरे-धीरे गेहूं का आटा मिलाकर बिना गांठ वाला बैटर तैयार करें। इसमें तैयार मसाला और केसर का पानी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। एक कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। बैटर को कलछी से डालें और धीमी से मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें। अतिरिक्त तेल निकालकर केले के पत्ते पर सजाएं और ऊपर तुलसी दल रखकर भगवान जगन्नाथ को भोग अर्पित करें। बनाने में कितना समय लगेगा? तैयारी का समय: 15 मिनट पकाने का समय: 20–25 मिनट कुल समय: लगभग 35–40 मिनट प्रति मालपुआ अनुमानित पोषण कैलोरी: 180–220 kcal कार्बोहाइड्रेट: 28–32 ग्राम प्रोटीन: 3–4 ग्राम फैट: 6–8 ग्राम महाप्रसाद की खास बातें गुड़ और गेहूं के आटे से तैयार पारंपरिक सात्विक प्रसाद। रिफाइंड चीनी और मैदे का उपयोग नहीं किया जाता। प्राकृतिक मसाले स्वाद और सुगंध बढ़ाते हैं। भगवान जगन्नाथ के छप्पन भोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक परंपराओं और शुद्धता के नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। ध्यान दें: मंदिर में बनने वाले महाप्रसाद की विधि और परंपराएं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। घर पर तैयार की गई रेसिपी स्वाद और सामग्री में कुछ भिन्न हो सकती है।
कौशांबी, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में 26 जून को हुए भीषण एलपीजी टैंकर हादसे का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद घटना एक बार फिर चर्चा में है। वायरल फुटेज में साफ दिखाई देता है कि एलपीजी गैस से भरा एक टैंकर तेज रफ्तार में टोल प्लाजा की ओर बढ़ता है और अचानक नियंत्रण खोकर डिवाइडर से टकराते हुए सीधे टोल बूथ में घुस जाता है। टक्कर के कुछ ही क्षण बाद टैंकर से गैस का रिसाव शुरू हो जाता है और फिर जोरदार विस्फोट से पूरा इलाका आग और धुएं की चपेट में आ जाता है। 24 सेकेंड के वीडियो में कैद हुआ खौफनाक मंजर करीब 24 सेकेंड के सीसीटीवी फुटेज में दो टैंकर टोल प्लाजा की ओर आते दिखाई देते हैं। इसी दौरान एक टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर टोल बूथ से टकरा जाता है। टक्कर के बाद हुए गैस रिसाव ने कुछ ही सेकेंड में भयावह रूप ले लिया और भीषण धमाके के साथ आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास का पूरा इलाका धुएं से भर गया। पांच लोगों की मौत, राहत-बचाव में जुटा प्रशासन इस दर्दनाक हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। विस्फोट के बाद लगी आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें करीब दो किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रही थीं। आग पर काबू पाने के लिए जिले की सभी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल ने तत्काल अभियान चलाकर घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो हादसे का सीसीटीवी वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोगों ने इसे साझा करते हुए सड़क सुरक्षा और खतरनाक ज्वलनशील पदार्थों के सुरक्षित परिवहन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि टैंकर के अनियंत्रित होने के पीछे तकनीकी खराबी, चालक की लापरवाही या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था। यह हादसा भारी वाहनों के संचालन और सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार ने पद छोड़ने के एक दिन बाद शुक्रवार को अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो गए। रवाना होने से पहले उन्होंने संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारियां नव नियुक्त प्रभारी निदेशक डॉ. दीपेंद्र कुमार (डीके) सिन्हा को सौंप दीं। हाल ही में सीआईडी जांच और प्रशासनिक विवादों के बीच उनके इस्तीफे के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। प्रभारी निदेशक को सौंपा कार्यभार, खाली किया सरकारी आवास शुक्रवार सुबह डॉ. राजकुमार रिम्स निदेशक कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने सभी प्रशासनिक दस्तावेज और कार्यभार डॉ. डीके सिन्हा को विधिवत हस्तांतरित किया। इसके बाद उन्होंने निदेशक आवास भी खाली कर उसकी चाबी संबंधित अधिकारियों को सौंप दी। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। कार्यभार सौंपने के बाद वे लखनऊ के लिए रवाना हो गए। बेटे को भी साथ ले गए, इस्तीफे की चर्चा तेज डॉ. राजकुमार अपने बेटे को भी अपने साथ ले गए, जिनकी रिम्स में ट्यूटर पद पर नियुक्ति को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, संभावना है कि वे अपने बेटे से भी रिम्स की नौकरी से इस्तीफा दिला सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। गुरुवार को दिया था इस्तीफा डॉ. राजकुमार ने गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को अपना इस्तीफा सौंपा था। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने तत्काल प्रभाव से उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए अधिसूचना जारी की और रिम्स के सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को अगले आदेश तक संस्थान का प्रभारी निदेशक नियुक्त कर दिया। रिम्स में हाल में हुई सीआईडी जांच और प्रशासनिक मामलों के बीच हुए इस बदलाव को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फिरोजाबाद जिले को 658 करोड़ रुपये की 81 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और डबल इंजन की सरकार पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों का लाभ अब सीधे जनता के बैंक खातों में पहुंच रहा है, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। 'अब क्लर्क और दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को क्लर्कों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब व्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा, "डबल इंजन सरकार की सबसे बड़ी पहचान पारदर्शिता है। किसानों, महिलाओं और गरीबों को योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है। अब किसी को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।" पीएम किसान सम्मान निधि का किया जिक्र सीएम योगी ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4,300 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। 'नीयत साफ हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं' मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार की नीयत साफ होती है तो नीतियां और फैसले स्वतः जनता के हित में परिणाम देने लगते हैं। उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से विकास योजनाएं तेजी से धरातल पर उतर रही हैं और समाज के हर वर्ग को उनका लाभ मिल रहा है।" विकास परियोजनाओं से क्षेत्र को मिलेगी नई गति सीएम योगी ने कहा कि फिरोजाबाद में शुरू की गई नई विकास परियोजनाएं क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा देंगी। इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। 'एक जिला, एक उत्पाद' से यूपी को मिली वैश्विक पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा, "जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मिलते हैं, तो उन्हें उत्तर प्रदेश के उत्पाद उपहार स्वरूप भेंट करते हैं। यह प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता और वैश्विक पहचान का प्रमाण है।" विकास और सुशासन के मॉडल को आगे बढ़ा रही सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सुशासन और विकास साथ-साथ चल रहे हैं। डबल इंजन सरकार का लक्ष्य हर जिले को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और जनता तक योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुंचाना है।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम ने शहर को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ और सुगम बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। इस निर्णय के तहत शहर के भीतर संचालित सभी मीट और फिश मार्केट को चरणबद्ध तरीके से बाहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा। नगर निगम की बैठक में लिया गया फैसला वाराणसी नगर निगम की बैठक शनिवार को मैदागिन स्थित टाउन हॉल में महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में शहर के विकास और शहरी प्रबंधन से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें मांस और मछली बाजारों को शहर के बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव प्रमुख रहा। नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस योजना को लागू करने के लिए प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर पांच स्थानों की पहचान कर ली है। इन क्षेत्रों में बनेंगे नए मीट मार्केट नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, पहले चरण में जिन स्थानों को चिन्हित किया गया है, उनमें शामिल हैं— रामनगर शुजाबाद गणेशपुर अवलेशपुर शिवपुर प्रशासन का कहना है कि ये सभी क्षेत्र शहर की बाहरी सीमा के निकट हैं, जिससे आम नागरिकों को खरीदारी में अधिक परेशानी नहीं होगी। शहर में हैं करीब 400 दुकानें नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी शहर में वर्तमान में लगभग 350 से 400 मांस और मछली की दुकानें संचालित हो रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन दुकानों को निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। एक साल पहले उठा था प्रस्ताव नगर निगम के पार्षद गुलशन अली ने बैठक के दौरान कहा कि मांस और मछली की दुकानों को शहर के बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव लगभग एक वर्ष पहले भी लाया गया था, लेकिन अब तक उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी थी। उन्होंने यह भी कहा कि श्रावण माह के दौरान मांस की दुकानों के बंद रहने से इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय प्रभावित होती है, इसलिए प्रशासन को व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। प्रशासन ने जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सदन को आश्वस्त किया कि नई मीट मार्केट के लिए भूमि चिन्हित की जा चुकी है और प्रस्ताव को जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम शहर के बेहतर प्रबंधन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। फैसले से नाराज हैं दुकानदार नगर निगम के इस निर्णय का कई व्यापारियों ने विरोध किया है। दुकानदारों का कहना है कि शहर से बाहर दुकानें स्थानांतरित होने पर उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि ग्राहकों को मांस और मछली खरीदने के लिए शहर से बाहर जाना पड़ेगा, जिससे समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कोई ऐसा व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, जिससे व्यापार और उपभोक्ताओं दोनों की सुविधा बनी रहे। शहर के विकास और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन की चुनौती नगर निगम का मानना है कि यह कदम शहर की स्वच्छता, यातायात व्यवस्था और शहरी सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक है। वहीं दूसरी ओर व्यापारियों और स्थानीय निवासियों की चिंताओं को देखते हुए प्रशासन के सामने विकास और आजीविका के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी होगी।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक हनुमान मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और जांच शुरू कर दी है। मजदूरी के दौरान मंदिर परिसर में पहुंचे थे लोग पुलिस के अनुसार, 31 मई को असर मोहम्मद अपने साथी नजर मोहम्मद और अन्य लोगों के साथ औरंगाबाद थाना क्षेत्र के औलीना गांव में राजमिस्त्री का काम करने पहुंचे थे। वे राजकुमार नामक व्यक्ति के घर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। काम के दौरान दोपहर में भोजन और आराम के लिए विराम लिया गया। इसी दौरान कथित तौर पर असर मोहम्मद ने हल्की बारिश से बचने के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश किया और वहां नमाज अदा की। उस समय नजर मोहम्मद भी मौके पर मौजूद था। वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया मामला घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गांव में इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने मामले पर आपत्ति जताई, जिसके बाद पुलिस ने वीडियो और अन्य तथ्यों की जांच शुरू की। पुलिस ने दर्ज की एफआईआर प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का क्या कहना है? औरंगाबाद थाना प्रभारी मोहम्मद असलम ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस वीडियो की सत्यता, घटना की परिस्थितियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Yogi Adityanath सरकार ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। रविवार को राजभवन में आयोजित समारोह में 8 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। यह मंत्रिमंडल विस्तार 10 मई को तय किया गया था, जिसके बाद से विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज थीं। अब शपथ ग्रहण के साथ ही नए मंत्रियों को विभाग भी सौंप दिए गए हैं। राजनीतिक जानकार इस फेरबदल को आगामी चुनावों की रणनीति और सामाजिक-संगठनात्मक संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं। समारोह में राज्यपाल Anandiben Patel ने सभी मंत्रियों को शपथ दिलाई। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने विभागों की घोषणा की। भूपेंद्र चौधरी को MSME, मनोज पाण्डेय को खाद्य विभाग मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे चर्चित नाम Bhupendra Chaudhary का रहा। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री बनाकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं भाजपा नेता Manoj Kumar Pandey को खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग का प्रभार दिया गया है। स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को नई जिम्मेदारियां सरकार ने स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया है। अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सौंपा गया। सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल विभाग की जिम्मेदारी मिली। सरकार का कहना है कि इन विभागों में नए चेहरों के आने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी और बेहतर समन्वय देखने को मिलेगा। राज्य मंत्रियों को विकास से जुड़े विभाग राज्य मंत्रियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं: कृष्णा पासवान को पशुधन एवं डेयरी विकास विभाग कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग हंस राज विश्वकर्मा को MSME मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया है, जहां वे भूपेंद्र चौधरी के साथ काम करेंगे। चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा विस्तार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का हिस्सा है। भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी इस फेरबदल में दिखाई दे रही है। योगी सरकार के इस कदम को प्रशासनिक मजबूती और चुनावी तैयारी दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
"मेरे शव को पिता छूएं नहीं"– मौत से पहले WhatsApp स्टेटस पर लिखा दर्द उत्तर प्रदेश के कानपुर से बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। 24 वर्षीय युवा वकील ने कोर्ट परिसर की इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद पूरे न्यायालय परिसर में हड़कंप मच गया। मृतक ने आत्महत्या से पहले दो पन्नों का सुसाइड नोट अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने पिता पर बचपन से मानसिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाए। पांचवीं मंजिल से कूदकर दी जान पुलिस के अनुसार, युवा वकील प्रियंशु श्रीवास्तव ने गुरुवार को कानपुर कोर्ट की पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। गंभीर हालत में उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुसाइड नोट में छलका वर्षों का दर्द प्रियंशु ने अपने नोट में बचपन की कई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि छह साल की उम्र में आम का जूस पीने पर उनके पिता ने उन्हें निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया था। इस घटना ने उनके मन पर गहरा असर छोड़ा और जीवनभर हीन भावना से जूझते रहे। "मेरे शव को पिता हाथ न लगाएं" सुसाइड नोट की सबसे मार्मिक पंक्ति थी– "मेरे शव को मेरे पिता छूएं नहीं।" यह पंक्ति उनके भीतर वर्षों से जमा पीड़ा और मानसिक संघर्ष को बयां करती है। पढ़ाई को लेकर भी लगाया दबाव का आरोप प्रियंशु ने 2016 की एक घटना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि वह फिजिकल एजुकेशन पढ़ना चाहते थे, लेकिन पिता ने उन्हें जबरन कंप्यूटर साइंस लेने के लिए मजबूर किया। मां को परेशान न करने की अपील अपने अंतिम संदेश में प्रियंशु ने पुलिस और परिवार से अनुरोध किया कि उनकी मां को किसी प्रकार की परेशानी न दी जाए। उन्होंने यह भी लिखा कि अपने इस फैसले के लिए वह किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहराते। पुलिस जांच में जुटी पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। कोर्ट परिसर के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
चाईबासा। झारखंड में कोषागार (ट्रेजरी) से अवैध निकासी के मामलों की कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है। इस बार मामला चाईबासा से जुड़ा है, जहां पुलिस विभाग के खातों से करीब 45 लाख रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। घटना सामने आते ही जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, यह गड़बड़ी आंतरिक ऑडिट के दौरान पकड़ी गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुलिस विभाग के नाम पर फर्जी तरीके से अलग-अलग ट्रांजैक्शन कर रकम निकाली गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। विशेष जांच टीम का गठन पूरे मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने विशेष टीम का गठन किया है, जिसमें कोषागार, ऑडिट और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं। रांची मुख्यालय से भी ऑडिट टीम को जांच में लगाया गया है, जो पिछले महीनों के वाउचर, चेकबुक और ऑनलाइन लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है। एक सिपाही हिरासत में, जांच तेज मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गोइलकेरा से एक सिपाही को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि उसी के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन हुए। हालांकि, अभी तक पूरी राशि और जिम्मेदार व्यक्तियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इतनी बड़ी राशि बिना उचित सत्यापन के कैसे निकाली गई। प्रशासन ने सभी बड़े भुगतानों पर अस्थायी रोक लगा दी है और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घोटाले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
चित्रकूट में दर्दनाक घटना, दोनों लड़कियां गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां यमुना नदी में स्नान के दौरान कुछ युवकों द्वारा वीडियो बनाए जाने के बाद मानसिक तनाव में आई दो किशोरियों ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। यमुना में नहाते समय बनाया गया वीडियो पुलिस के मुताबिक, दोनों किशोरियां गुरुवार को यमुना नदी में स्नान करने गई थीं। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनकी तस्वीरें खींचीं और वीडियो बना लिया। इस घटना की जानकारी जब घरवालों को मिली तो उन्होंने लड़कियों को डांट-फटकार लगाई। मानसिक तनाव में उठाया खौफनाक कदम परिवार की डांट से आहत होकर दोनों किशोरियों ने शुक्रवार को जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत पहाड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। बेहतर इलाज के लिए बांदा रेफर प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को पहले कर्वी जिला अस्पताल भेजा गया। वहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा रेफर कर दिया गया। फिलहाल दोनों का इलाज जारी है। तीन टीमों का गठन, आरोपियों की तलाश तेज चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन अलग-अलग पुलिस टीमें बनाई गई हैं। पहली टीम अस्पताल में इलाज पर नजर रख रही है। दूसरी टीम पीड़ित परिवार के संपर्क में है। तीसरी टीम वीडियो बनाने वालों की पहचान कर उनकी तलाश में जुटी है। पुलिस ने शुरू की गहन जांच पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वीडियो बनाने वाले लोगों की तलाश के लिए आसपास के क्षेत्रों में छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
रांची। झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्यपाल सचिवालय ने सरकार द्वारा भेजे गए नामों पर आपत्ति जताते हुए पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर नए सिरे से प्रस्ताव भेजने को कहा है। प्रस्तावित नामों पर आपत्ति, FIR का मामला सामने आया जांच में सामने आया है कि जिन चार नामों को नियुक्ति के लिए भेजा गया था, उनमें से दो व्यक्तियों के खिलाफ पहले से प्राथमिकी दर्ज है। अमूल्य नीरज खलखो पर छह और तनुज खत्री पर एक प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई है। नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा का निर्देश इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाते हुए राज्यपाल सचिवालय ने सरकार को पूरी चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने और पारदर्शी तरीके से नए नाम भेजने का अनुरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला सचिवालय ने फाइल लौटाते समय सुप्रीम कोर्ट के ‘नमित शर्मा बनाम केंद्र सरकार’ मामले का भी उल्लेख किया है। इस फैसले में कहा गया है कि सूचना आयुक्त का कार्य अर्द्ध-न्यायिक प्रकृति का होता है, इसलिए नियुक्ति में योग्य और समझ रखने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है। साथ ही विज्ञान, तकनीक, प्रबंधन, पत्रकारिता और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी इस पद के लिए चुना जा सकता है। कानूनी प्रावधानों की समीक्षा की भी मांग राज्यपाल सचिवालय ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 15(6) की समीक्षा करने का सुझाव भी दिया है, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और अधिक स्पष्ट बनाया जा सके।
उत्तर प्रदेश के Mathura में यमुना नदी में हुए दर्दनाक बोट हादसे ने कई परिवारों की खुशियां पल भर में छीन लीं। श्रद्धालुओं से भरी मोटरबोट के पलटने से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 लोग अब भी लापता हैं। हादसे के बाद दूसरे दिन भी राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं। हादसे से पहले खुशी, फिर अचानक मातम हादसे में शामिल अधिकतर लोग Ludhiana समेत पंजाब के अलग-अलग इलाकों से तीर्थ यात्रा पर आए थे। परिवार वालों के मुताबिक, गुरुवार शाम को सभी खुशी-खुशी Vrindavan के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए अपनों से बात हो रही थी। लेकिन कुछ ही घंटों बाद अचानक एक फोन आया - “बोट पलट गई है… सबके फोन डूब गए…” “कल तक सब ठीक थे…” - परिजनों की आपबीती पीड़ित परिवारों की बातें दिल को झकझोर देने वाली हैं। एक महिला ने बताया, “सुबह 9 बजे बात हुई थी, सब खुश थे, वीडियो भेज रहे थे… आधे घंटे बाद खबर आई कि नाव पलट गई।” वहीं एक अन्य रिश्तेदार ने रोते हुए कहा, “कल तक बच्चे हंसते-खेलते गए थे, अब पता नहीं कौन कहां है… बस लापता होने की खबर आ रही है।” कैसे हुआ हादसा? अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के वक्त नाव में करीब 37 लोग सवार थे। तेज हवाओं के कारण नाव असंतुलित हो गई और गहरे पानी में एक तैरते पोंटून से टकरा गई, जिससे वह पलट गई। बताया जा रहा है कि हाल ही में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण पीपा पुल हटाया गया था, लेकिन उसके कुछ हिस्से पानी में ही रह गए थे जो इस हादसे की बड़ी वजह बने। राहत-बचाव अभियान जारी घटना के बाद से State Disaster Response Force, फायर ब्रिगेड और सेना की टीमें मौके पर लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। करीब 50 स्थानीय गोताखोर भी सर्च ऑपरेशन में शामिल हैं। अब तक 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन लापता लोगों की तलाश जारी है। सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए वीडियो में देखा गया कि नाव में सवार किसी भी यात्री ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। हादसे से ठीक पहले सभी श्रद्धालु ‘राधे-राधे’ का जाप करते हुए खुश नजर आ रहे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पल में सब कुछ बदल जाएगा। सरकार ने जताया दुख Yogi Adityanath ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है और अधिकारियों को राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।
नई दिल्ली: चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने देश की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव ला दिया है। अब तक करीब 5.58 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 9.55% है। यह अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक मतदाता पुनरीक्षण अभियान माना जा रहा है। दूसरे चरण में सबसे ज्यादा नाम हटे SIR के दूसरे चरण में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया था, जिसकी प्रक्रिया अक्टूबर 2025 से शुरू होकर हाल ही में पूरी हुई। इस चरण में ही करीब 5.37 करोड़ वोटर लिस्ट से हटाए गए, जो लगभग 10.55% के बराबर है। अगर पहले चरण (जिसमें बिहार शामिल था) को भी जोड़ दें, तो कुल मतदाताओं की संख्या 58.87 करोड़ से घटकर 53.28 करोड़ रह गई है। किन राज्यों में चला अभियान दूसरे चरण में जिन प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया, उनमें राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़, गोवा के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुड्डुचेरी और लक्षद्वीप शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कुल मतदाता संख्या 50.97 करोड़ से घटकर 45.59 करोड़ हो गई है। गुजरात टॉप, यूपी दूसरे नंबर पर नाम कटने के प्रतिशत के हिसाब से गुजरात सबसे ऊपर है, जहां 13.39% वोटर सूची से बाहर हुए। दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है, जहां 13.23% नाम हटे। तीसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ (11.77%) रहा। वहीं, पश्चिम बंगाल में 11.63% और तमिलनाडु में 11.55% नाम हटाए गए। सबसे ज्यादा गिरावट केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दर्ज हुई, जहां 16.86% मतदाता कम हुए। संख्या के हिसाब से यूपी सबसे आगे हालांकि प्रतिशत के मामले में गुजरात आगे है, लेकिन कुल संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नाम हटे। यहां मतदाता संख्या 15.44 करोड़ से घटकर 13.39 करोड़ रह गई। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आयोग ने राज्य को अतिरिक्त समय भी दिया था। क्यों चलाया गया SIR अभियान चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को यह फैसला लिया था। करीब 20 साल बाद इतनी व्यापक समीक्षा की गई। तेजी से हो रहे शहरीकरण, पलायन और डुप्लीकेट या निष्क्रिय मतदाताओं को हटाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया, ताकि वोटर लिस्ट को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सके। क्या है SIR की प्रक्रिया सामान्य पुनरीक्षण (SSR) के विपरीत, SIR में पूरी वोटर लिस्ट नए सिरे से तैयार की जाती है। इस बार सभी मतदाताओं को एक तय समय सीमा के भीतर फॉर्म जमा करना अनिवार्य किया गया था। जो लोग ऐसा नहीं कर पाए, उनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हट गए। कई मामलों में नागरिकता से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए, जिस पर विवाद हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।