नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने की तैयारी कर रही है, लेकिन इससे छात्रों के सवाल और परीक्षा व्यवस्था की खामियां खत्म नहीं होंगी। राहुल गांधी ने कहा कि केवल मंत्रालय बदलने से जिम्मेदारी तय नहीं होगी, बल्कि छात्रों को न्याय और परीक्षा प्रणाली में सुधार चाहिए। "मंत्रालय बदलना समाधान नहीं" राहुल गांधी ने कहा कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बदलाव की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। NEET और पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरा राहुल गांधी लगातार NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के विश्वास को कमजोर करती हैं और सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई कांग्रेस नेता ने इससे पहले भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने के लिए शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया गया है और परीक्षा सुधारों को लेकर उठाए गए कदमों का हवाला दिया गया है। राजनीतिक हलचल बढ़ी राहुल गांधी के इस बयान के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिक्षा मंत्रालय में संभावित बदलाव को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक धर्मेंद्र प्रधान को किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
देहरादून, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। कांग्रेस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य देशभर के छात्रों की समस्याओं को सुनकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। पेपर लीक को लेकर सरकार पर हमला कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि "यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की चोरी है।" उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। छात्रों से सीधे संवाद करेंगे राहुल कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी कार्यक्रम के दौरान छात्रों के सवालों का जवाब देंगे और भर्ती परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनके सुझाव भी सुनेंगे। अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में ऐसे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जा सके। राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा कार्यक्रम विश्लेषकों के अनुसार, उत्तराखंड में आयोजित यह कार्यक्रम केवल छात्र संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस के युवा संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संसद के मानसून सत्र से पहले यह कार्यक्रम युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बुधवार को मुजफ्फराबाद तक 'लॉन्ग मार्च' का आह्वान किया है। संभावित प्रदर्शन को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सरकार के खिलाफ जारी है आंदोलन JAAC लंबे समय से अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, सुरक्षा बलों की कार्रवाई रोकने, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बहाल करने तथा बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता जैसी मांगों को लेकर आंदोलन चला रही है। संगठन का कहना है कि सरकार को पहले ही अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई जिलों से मुजफ्फराबाद पहुंचेंगे प्रदर्शनकारी सूत्रों के मुताबिक रावलकोट, मीरपुर, कोटली, बाग समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग मुजफ्फराबाद पहुंच सकते हैं। प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रहने और कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की भी संभावना जताई गई है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की है। प्रमुख मार्गों और सरकारी प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर है। JAAC की प्रमुख मांगें गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर रोक इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं की बहाली बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता शासन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सुधार आंदोलन और तेज होने की चेतावनी JAAC ने कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन का दावा है कि मौजूदा आंदोलन केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक सुधारों की मांग भी प्रमुख मुद्दा बनेगी। राजनीतिक असर पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होता है, तो इससे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की सख्ती या बल प्रयोग की स्थिति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी.
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने 16 जुलाई को अपने शीर्ष नेताओं और सांसदों की अहम रणनीतिक बैठक बुलाई है, जिसमें सत्र के दौरान सरकार को किन मुद्दों पर घेरा जाएगा, इस पर चर्चा होगी। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को सभी राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है। सरकार और विपक्ष दोनों कर रहे तैयारी कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी, कृषि, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य प्रमुख मुद्दों को संसद में उठाने की तैयारी कर रही है। वहीं सरकार भी मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की रणनीति बना रही है। संविधान संशोधन विधेयक पर हो सकता है हंगामा सूत्रों के अनुसार, इस सत्र में प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष पहले से ही इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है। 20 जुलाई से शुरू होगा मॉनसून सत्र संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है। इससे पहले होने वाली कांग्रेस की रणनीति बैठक और सर्वदलीय बैठक को सत्र की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने स्पष्ट कहा है कि कांग्रेस आगामी यूपी चुनाव में राम मंदिर को चुनावी मुद्दा नहीं बनाएगी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है और इसे राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। विकास और जनसरोकार के मुद्दों पर रहेगा फोकस सलमान खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस का ध्यान रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करती है, लेकिन चुनाव विकास और जनता की वास्तविक समस्याओं के आधार पर लड़ा जाएगा। कांग्रेस का मानना है कि मतदाताओं के सामने रोजमर्रा के मुद्दों को प्रमुखता से रखा जाना चाहिए। राम मंदिर पर सियासत से दूरी का संकेत कांग्रेस नेता ने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा अब न्यायिक प्रक्रिया और निर्माण के बाद एक अलग चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में इसे चुनावी हथियार बनाने के बजाय जनता के जीवन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले कांग्रेस की बदली हुई राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
देश में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने 25 जून को ‘छात्रों की गूंज’ नाम से राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस अभियान के तहत पार्टी के 28 वरिष्ठ नेता देश के अलग-अलग शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। कांग्रेस ने इस अभियान के माध्यम से केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की है। शिक्षा सुधार पर राष्ट्रीय बहस शुरू करने की कोशिश अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अभियान का उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बनाना है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों पर गंभीर चर्चा और नीतिगत बदलाव की जरूरत है। कांग्रेस के अनुसार, यह अभियान छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े सभी हितधारकों की आवाज को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का प्रयास है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति के लिए केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा क्षेत्र को प्रभावी दिशा देने में असफल रहे हैं। पार्टी ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की शुरुआत जवाबदेही तय करने से होनी चाहिए और इसी कारण शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है। केंद्र सरकार पर निजीकरण और केंद्रीकरण को बढ़ावा देने का आरोप कांग्रेस ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण, केंद्रीकरण और वैचारिक हस्तक्षेप को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। कांग्रेस के अनुसार, देश के सामने केवल बेरोजगारी का संकट नहीं है, बल्कि युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। 28 शहरों में आयोजित होंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत देशभर के 28 शहरों में कांग्रेस नेताओं को प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी शिक्षा नीति, रोजगार, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखेगी। इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी कांग्रेस ने विभिन्न शहरों के लिए अपने नेताओं की जिम्मेदारी तय की है। इसके तहत अहमदाबाद में सतेज पाटिल, बेंगलुरु में वर्षा गायकवाड़, भोपाल में इमरान मसूद, भुवनेश्वर में पवन खेड़ा, दिल्ली में गौरव गोगोई, चेन्नई में प्रियंक खड़गे, कोलकाता में सुप्रिया श्रीनेत और पुणे में कन्हैया कुमार प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। इसके अलावा अन्य शहरों में भी पार्टी के वरिष्ठ नेता अभियान का नेतृत्व करेंगे। छात्रों और नागरिकों से जुड़ने की कोशिश कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान केवल राजनीतिक आलोचना तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के भविष्य को लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय संवाद शुरू करने का प्रयास है। पार्टी ने छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस चर्चा का हिस्सा बनने की अपील की है। कांग्रेस के अनुसार, एक आधुनिक, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए सभी पक्षों की भागीदारी आवश्यक है। ऐसे में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को शिक्षा सुधार के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के 56वें जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित किया गया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। वाराणसी में अनोखे अंदाज में मनाया गया जन्मदिन वाराणसी में गंगा घाट पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जन्मदिन प्रतीकात्मक हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मनाया। इस दौरान उनकी एक तस्वीर प्रदर्शित की गई, जिसमें उन्हें भगवान परशुराम के स्वरूप में दिखाया गया था। तस्वीर में राहुल गांधी के एक हाथ में फरसा और दूसरे हाथ में भारतीय संविधान की प्रति दिखाई गई। कार्यकर्ताओं ने तस्वीर पर दूध अर्पित कर जन्मदिन मनाया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। BJP ने जताई कड़ी आपत्ति भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे हिंदू धर्म और उसकी आस्थाओं का अपमान बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कांग्रेस के लिए राहुल गांधी भगवान हो सकते हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित करना हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हिंदू परंपराओं का लगातार अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने समय-समय पर हिंदू परंपराओं, धार्मिक प्रतीकों और मान्यताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में "हिंदू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और कई अवसरों पर हिंदू धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं। कांग्रेस की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस विवाद पर समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने का उद्देश्य सामाजिक न्याय, संविधान और समानता के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करना था। राजनीतिक बहस तेज राहुल गांधी के जन्मदिन समारोह के दौरान सामने आई इस तस्वीर ने एक बार फिर धर्म और राजनीति के संबंधों पर बहस छेड़ दी है। भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे प्रतीकात्मक राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश में विभिन्न दल धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर एक-दूसरे पर लगातार निशाना साध रहे हैं।
कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। 7 सीटों में से 5 पर कांग्रेस की जीत ने जहां पार्टी की स्थिति मजबूत की है, वहीं एनडीए खेमे में हुई क्रॉस-वोटिंग ने बीजेपी और जेडी(एस) के भीतर गंभीर मतभेदों को उजागर कर दिया है। क्रॉस-वोटिंग से बीजेपी में नाराजगी चुनाव में एनडीए के 11 विधायकों द्वारा पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान किए जाने की पुष्टि के बाद बीजेपी नेतृत्व नाराज है। इस क्रॉस-वोटिंग के चलते कांग्रेस को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला और उसने 5 सीटों पर जीत दर्ज की। बीजेपी के भीतर इस घटनाक्रम को अनुशासनहीनता और संगठनात्मक विफलता के रूप में देखा जा रहा है। बीवाई विजयेंद्र को दिल्ली तलब स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को दिल्ली बुलाया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और क्रॉस-वोटिंग के कारणों की जांच के निर्देश दिए हैं। विजयेंद्र ने स्वीकार किया है कि बीजेपी और जेडी(एस) के कुछ विधायकों ने पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर मतदान किया है। उन्होंने साफ किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को माफ नहीं किया जाएगा। 11 विधायकों ने तोड़ा पार्टी अनुशासन सूत्रों के अनुसार कुल 11 विधायकों ने एनडीए उम्मीदवार के खिलाफ वोटिंग की, जिनमें बीजेपी और जेडी(एस) दोनों के विधायक शामिल हैं। जेडी(एस) के उम्मीदवार गोविंदराजू की हार इस चुनाव का सबसे बड़ा झटका मानी जा रही है। पार्टी के 18 विधायकों के बावजूद उन्हें केवल 14 वोट मिले, जिससे कम से कम चार विधायकों के क्रॉस-वोटिंग करने की पुष्टि होती है। कांग्रेस की सीटों में बढ़ोतरी 75 सदस्यीय विधान परिषद में अब कांग्रेस की स्थिति और मजबूत हो गई है। कांग्रेस: 34 से बढ़कर 39 सीटें बीजेपी: 29 सीटें जेडी(एस): 6 सीटें कांग्रेस ने इस नतीजे को एनडीए के भीतर असंतोष और नेतृत्व संकट का संकेत बताया है। सदन में आरोप-प्रत्यारोप तेज बीजेपी ने क्रॉस-वोटिंग के पीछे कांग्रेस की रणनीति का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस ने इसे विपक्षी गठबंधन में गहरी दरार का परिणाम बताया है। विपक्षी नेता चालावाड़ी नारायणस्वामी ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने वाला वोट लोकतांत्रिक है, तो विपक्षी वोटिंग को असंवैधानिक कैसे कहा जा सकता है। राजनीतिक असर कर्नाटक एमएलसी चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में नए समीकरण खड़े कर दिए हैं। बीजेपी जहां आंतरिक अनुशासन को लेकर दबाव में है, वहीं कांग्रेस इस परिणाम को अपनी बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देख रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक सियासी सरगर्मी और बढ़ने की संभावना है।
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शुक्रवार (19 जून, 2026) को 56 वर्ष के हो गए। उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी। प्रधानमंत्री ने लिखा, "लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं।" 56 साल के हुए राहुल गांधी राहुल गांधी का जन्म 19 जून, 1970 को नई दिल्ली में हुआ था। वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्र हैं। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद हैं और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राहुल गांधी पिछले 22 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं और कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया प्रेरणास्रोत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने X पर पोस्ट कर राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि संविधान के आदर्शों के प्रति राहुल गांधी की अटूट निष्ठा और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। खरगे ने कहा कि समावेशिता, सामाजिक न्याय, सद्भाव और करुणा की कांग्रेस पार्टी की परंपरा राहुल गांधी के सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच निरंतर संवाद और सत्ता के सामने निर्भीक होकर सच बोलने के कारण राहुल गांधी ने समाज के कमजोर और हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज को मजबूती से उठाया है। पवन खेड़ा ने राहुल गांधी के संघर्ष को सराहा कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने कहा कि बहुत कम नेताओं ने लंबे समय तक इतनी तीखी आलोचना और लगातार सार्वजनिक जांच-परख का सामना किया है। पवन खेड़ा ने कहा, "ऐसी परिस्थितियों में अधिकांश लोग सार्वजनिक जीवन से पीछे हट जाते हैं, लेकिन राहुल गांधी को कमजोर करने का हर प्रयास उनके संकल्प को और मजबूत करता गया, उनकी राजनीति को और परिपक्व बनाता गया तथा जनता से उनके संबंध को और गहरा करता गया।" राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके लंबे एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।
नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) की महत्वपूर्ण बैठक में एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर गठबंधन के भीतर मौजूद कुछ पुराने मतभेद भी सामने आए। बैठक में शामिल नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ संयुक्त रूप से संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही भविष्य की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर भी चर्चा की। बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रभावी मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट रहना आवश्यक है। उन्होंने नागरिक समाज के आंदोलनों से जुड़ाव बढ़ाने और गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया। कांग्रेस से ‘बड़ा दिल’ दिखाने की अपील समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी दल को समर्थन देने के लिए कांग्रेस को उदार रवैया अपनाना चाहिए। अखिलेश ने यह भी कहा कि किसी चुनावी हार या जीत के आधार पर जल्दबाजी में राजनीतिक निष्कर्ष नहीं निकाले जाने चाहिए। 2029 के लिए अभी से तैयारी का सुझाव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने बैठक में कहा कि विपक्ष को केवल वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अभी से व्यापक रणनीति बनाने और लगातार जनसंपर्क अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। नियमित समन्वय बैठकों की मांग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन सहयोगियों के बीच नियमित बैठकों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हालिया चुनावी अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ है कि बेहतर समन्वय विपक्ष की सबसे बड़ी आवश्यकता है। CJP अभियान पर भी हुई चर्चा बैठक के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अभियान का भी उल्लेख हुआ। सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस अभियान के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि यदि कोई जन-अभियान लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है तो उससे संवाद किया जाना चाहिए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस अभियान के अचानक उभार और इसकी वैचारिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से इस विषय पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई। DMK ने गठबंधन से दूरी बनाई बैठक से पहले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने स्पष्ट कर दिया कि वह अब INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। पार्टी प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और कांग्रेस के साथ मतभेदों के चलते पार्टी ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्व सहयोगी दल अब अलग राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, ऐसे में DMK स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक दिशा तय करेगी। उन्होंने भविष्य में किसी व्यापक धर्मनिरपेक्ष और भाजपा-विरोधी मंच की संभावना से इनकार नहीं किया। आम आदमी पार्टी ने भी दोहराई दूरी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी पहले ही गठबंधन से अलग होने का निर्णय सार्वजनिक कर चुकी है। AAP की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की बजाय अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाना रहा है। उन्होंने कांग्रेस के साथ भविष्य में किसी संभावित गठबंधन की संभावना को भी खारिज कर दिया। केरल को लेकर कांग्रेस-वाम दलों में तकरार बैठक में वाम दलों ने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर नाराजगी व्यक्त की। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी होने के बावजूद वाम दलों पर सार्वजनिक हमले उचित नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि केरल में उठाए गए विषय राज्य कांग्रेस की चुनावी रणनीति का हिस्सा थे। बैठक में मौजूद कई नेताओं ने सुझाव दिया कि पुराने विवादों को पीछे छोड़कर भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर जोर बैठक का समापन विपक्षी एकता और समन्वय को मजबूत करने के संदेश के साथ हुआ। नेताओं ने माना कि भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों के बीच विश्वास, संवाद और साझा रणनीति पहले से कहीं अधिक जरूरी है।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। Bharatiya Janata Party (बीजेपी) द्वारा तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है, वहीं Indian National Congress (कांग्रेस) में क्रॉस वोटिंग और टूट के डर को लेकर हलचल तेज हो गई है। डिनर मीटिंग से कांग्रेस ने साधे विधायकों के सुर भोपाल में कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक के साथ डिनर का आयोजन किया गया, जिसकी अगुवाई नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने की। इस बैठक में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई और विधायकों की एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया गया। उमंग सिंघार ने कहा कि पार्टी को अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है और सभी मिलकर चुनावी रणनीति के तहत काम करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि कांग्रेस अपने विधायकों को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जा सकती है ताकि क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके। बीजेपी ने उतारा तीसरा उम्मीदवार, मुकाबला हुआ और दिलचस्प बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने राज्यसभा चुनाव के लिए तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट के नाम की घोषणा की है। इससे पहले पार्टी दो उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित कर चुकी थी। कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया गया है, जिन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। पार्टी ने दावा किया है कि उनके पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। मध्य प्रदेश का सियासी गणित बना चर्चा का विषय मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं, जिनमें से वर्तमान में 228 विधायकों का प्रभावी वोट माना जा रहा है। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास प्रभावी रूप से 62 विधायक बचे हैं। राज्यसभा सीट जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में बीजेपी के पास दो सीटों पर आसान जीत का रास्ता दिख रहा है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ी बीजेपी द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने के बाद कांग्रेस की रणनीति पर दबाव बढ़ गया है। पार्टी को अपने सभी विधायकों को एकजुट रखना और क्रॉस वोटिंग से बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। बीना विधायक निर्मला सप्रे के रुख को लेकर भी अटकलें हैं कि वे बीजेपी के पक्ष में जा सकती हैं, जबकि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर रोक लगी हुई है। इससे कांग्रेस का गणित और कमजोर हुआ है। सियासी डिनर के बाद बढ़ी रणनीतिक गतिविधियां कांग्रेस ने अपने विधायकों के साथ डिनर और बैठक के जरिए एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है, जबकि बीजेपी अपने संख्याबल के आधार पर तीसरी सीट पर भी रणनीति बना रही है। राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दल अब अपने-अपने विधायकों को साधने में जुट गए हैं और आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।
नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को महंगाई के मुद्दे पर घेरा और कई सवाल उठाए। रविवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। इसी बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। महंगाई पर बीजेपी की चुप्पी पर उठाए सवाल मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान महंगाई के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने वाले भाजपा नेता अब चुप क्यों हैं। उन्होंने पूछा कि जो नेता पहले गैस सिलेंडर लेकर सड़कों पर बैठते थे, वे आज बढ़ती कीमतों के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं। खरगे ने कहा कि घरेलू एलपीजी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ रहा है और इससे मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है। प्रधानमंत्री के दावों पर उठाया सवाल कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें पश्चिम एशिया संकट के दौरान कई देशों से ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि ईंधन आपूर्ति के पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं, तो फिर घरेलू गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि क्यों हो रही है। साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उज्ज्वला योजना को लेकर भी घेरा खरगे ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लाभार्थी परिवार उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने के बावजूद नियमित रूप से सिलेंडर रिफिल नहीं करवा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों परिवार गैस सिलेंडर दोबारा भरवाने में सक्षम नहीं हैं, तो यह बढ़ती कीमतों और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का संकेत है। कांग्रेस ने उठाए तीन प्रमुख सवाल अपने बयान में कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से तीन प्रमुख सवाल पूछे— पश्चिम एशिया संकट के बावजूद ईंधन आपूर्ति के दावों के बाद भी गैस की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? बड़ी संख्या में उज्ज्वला लाभार्थी सिलेंडर रिफिल क्यों नहीं करा पा रहे हैं? महंगाई के मुद्दे पर पहले विरोध करने वाले भाजपा नेता अब चुप क्यों हैं? चार महीनों में 89 रुपये महंगा हुआ सिलेंडर एलपीजी कीमतों में यह वृद्धि पिछले चार महीनों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। मार्च 2026 में भी घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे। ताजा बढ़ोतरी के बाद चार महीनों के भीतर घरेलू सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये बढ़ चुकी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि बढ़ती गैस कीमतें आम लोगों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा रही हैं, जबकि सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों का असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
रांची। झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक के भीतर शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर सहमति नहीं बन पाई है, जिससे गठबंधन में खींचतान तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने जहां अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा का कहना है कि यह फैसला बिना आपसी सहमति के लिया गया है, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ी है। JMM दोनों राज्यसभा सीटों पर उतार सकती है प्रत्याशी वहीं JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोनों राज्यसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकती है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो सकते हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास मजबूत बल संख्या है, जिससे एक सीट पर उसकी जीत लगभग पक्की मानी जा रही है। लेकिन दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस और JMM के बीच सीधा टकराव देखा जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बातचीत और समाधान की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है और टकराव के संकेत बने हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि जल्द सहमति नहीं बनी तो इसका असर राज्यसभा चुनाव परिणाम और गठबंधन की एकजुटता पर भी पड़ सकता है। इस विवाद ने झारखंड की सियासत में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलों को भी जन्म दे दिया है।
बेंगलुरु: आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 18 जून को होने वाले इस चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के साथ पवन खेड़ा और मंसूर अली खान शामिल हैं। राहुल गांधी की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, रणदीप सिंह सुरजेवाला और के.सी. वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। खरगे ने कर्नाटक विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन विधानसभा सचिव एम.के. विशालाक्षी को सौंपा। ‘कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत पक्की करने के लिए एकजुट रहें’ नामांकन के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों और नेताओं ने एकमत से उनके नाम का समर्थन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में सभी कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी पूरी तरह एकजुट रहेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव 18 जून को होना है और कांग्रेस संगठन को मजबूत एकता के साथ मैदान में उतरना होगा। 25 जून को समाप्त हो रहा है खरगे का कार्यकाल मल्लिकार्जुन खरगे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। इसी कारण पार्टी ने उन्हें एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने घोषित किए तीन उम्मीदवार कांग्रेस ने कर्नाटक से राज्यसभा के लिए तीन उम्मीदवार उतारे हैं। खरगे के अलावा पार्टी ने पवन खेड़ा, जो कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख हैं, और मंसूर अली खान, जो राष्ट्रीय सचिव हैं, को भी उम्मीदवार बनाया है। नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून तय की गई है। पवन खेड़ा और मंसूर अली खान अपने नामांकन बाद में दाखिल करेंगे।
तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने राज्यसभा की रिक्त सीट अपने सहयोगी दल कांग्रेस को देने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आगामी राज्यसभा उपचुनाव में गठबंधन की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया जाएगा। सरकार गठन में कांग्रेस ने निभाई थी अहम भूमिका हालिया विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या से पीछे रहने के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों का समर्थन देकर विजय के नेतृत्व वाली सरकार के गठन का रास्ता साफ किया था। इसके बाद अन्य सहयोगी दलों ने भी समर्थन देकर गठबंधन को मजबूत किया। इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट यह उपचुनाव ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के वरिष्ठ नेता सी. वी. शनमुगम के इस्तीफे के कारण कराया जा रहा है। विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते यह सीट रिक्त हो गई और उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी। 18 जून को होगा मतदान निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, इस सीट के लिए मतदान 18 जून को कराया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार निर्धारित तिथि तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद नामांकन की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। गठबंधन राजनीति को मिलेगा नया संदेश राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस को राज्यसभा सीट देने का निर्णय टीवीके और कांग्रेस के बीच मजबूत होते राजनीतिक संबंधों का संकेत है। यह कदम न केवल गठबंधन सहयोगियों के बीच विश्वास बढ़ाने वाला माना जा रहा है, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस की स्थिति मजबूत करने की कोशिश कांग्रेस को यह सीट मिलने से उच्च सदन में उसकी उपस्थिति को मजबूती मिल सकती है। वहीं, टीवीके ने इस फैसले के जरिए सहयोगी दलों के साथ सामंजस्य और साझेदारी की राजनीति को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस इस सीट के लिए किस उम्मीदवार को मैदान में उतारती है और चुनावी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। 2026 विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Mamata Banerjee अब विपक्षी INDIA गठबंधन को फिर से सक्रिय करने की कोशिश में जुट गई हैं। खबर है कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने विपक्षी दलों की एक अहम बैठक बुलाने की पहल की है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। भवानीपुर में हार ने बढ़ाई मुश्किल करीब 15 साल तक West Bengal की सत्ता पर काबिज रहीं ममता बनर्जी इस बार न सिर्फ सरकार गंवा बैठीं, बल्कि अपने पारंपरिक गढ़ भवानीपुर सीट से भी चुनाव हार गईं। उन्हें बीजेपी नेता Suvendu Adhikari ने मात दी। 2021 में 215 सीटें जीतने वाली टीएमसी 2026 में महज 80 सीटों तक सिमट गई। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस हार के बाद ममता अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए विपक्षी दलों से रिश्ते सुधारना चाहती हैं। कांग्रेस ने क्या कहा? पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के महासचिव Ashutosh Chatterjee ने कहा कि INDIA गठबंधन को लेकर कोई भी अंतिम फैसला All India Congress Committee यानी AICC लेगी। उन्होंने साफ कहा कि प्रदेश स्तर पर निर्णय कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार की राय से होगा। हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी पर तीखा हमला भी बोला। चटर्जी ने आरोप लगाया कि टीएमसी शासन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया और पंचायत चुनावों में हिंसा हुई। उन्होंने कहा कि विपक्षी एकता की बात करने से पहले ममता बनर्जी को इन सवालों का जवाब देना होगा। INDIA गठबंधन में बढ़ी उलझन ममता बनर्जी की बैठक की अपील के बावजूद गठबंधन के भीतर तालमेल की कमी साफ दिखाई दे रही है। कांग्रेस और Samajwadi Party दोनों ने फिलहाल इस बैठक की जानकारी से इनकार किया है। सूत्रों के मुताबिक, अगर ममता सीधे Akhilesh Yadav से बात करती हैं, तभी जून में बैठक संभव हो सकती है। उधर, चुनाव के दौरान Rahul Gandhi ने ममता पर तीखे हमले किए थे, लेकिन हार के बाद उन्होंने चुनाव नतीजों को बीजेपी और चुनाव आयोग की “वोट चोरी” से जोड़ते हुए ममता के प्रति नरम रुख दिखाया। DMK की नाराजगी ने बढ़ाई टेंशन INDIA गठबंधन के सामने सिर्फ बंगाल की चुनौती नहीं है। दक्षिण भारत से भी गठबंधन के लिए परेशान करने वाली खबर आई है। तमिलनाडु में Dravida Munnetra Kazhagam यानी DMK कांग्रेस से नाराज बताई जा रही है। वजह यह है कि कांग्रेस ने अभिनेता विजय की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam को समर्थन दिया है। इसके बाद DMK ने संसद में कांग्रेस से अलग बैठने की मांग तक कर दी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या DMK आगे भी INDIA गठबंधन का हिस्सा बनी रहेगी? बीजेपी का डर या विपक्षी मजबूरी? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों के बीच भले ही मतभेद बढ़ रहे हों, लेकिन बीजेपी के खिलाफ एकजुट रहने की मजबूरी उन्हें साथ बनाए हुए है। ममता बनर्जी भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ती दिख रही हैं। बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद अब उनके लिए संसद और राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत उपस्थिति बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का समर्थन उनके लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री Siddaramaiah और डिप्टी सीएम D. K. Shivakumar को दिल्ली बुलाया है, जिसके बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं। हालांकि कांग्रेस ने इसे सामान्य राजनीतिक बैठक बताया है, लेकिन पार्टी सूत्रों का दावा है कि अंदरखाने सत्ता परिवर्तन को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है। कांग्रेस ने क्या कहा? कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि यह बैठक आगामी राज्यसभा चुनाव और विधान परिषद चुनाव को लेकर रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई है। लेकिन दोनों बड़े नेताओं के अचानक दिल्ली पहुंचने से राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी हाईकमान अब मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय से जारी खींचतान को खत्म करना चाहता है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के सामने एक नया फॉर्मूला रख सकता है। सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने की चर्चा पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं के अनुसार, कांग्रेस सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने का प्रस्ताव दे सकती है। इसके बदले उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को राज्य कैबिनेट में जगह देने पर भी विचार हो सकता है। इस पूरे मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। खरगे, वेणुगोपाल और सुरजेवाला की क्या भूमिका? सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, संगठन महासचिव K. C. Venugopal और कर्नाटक प्रभारी Randeep Singh Surjewala नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताए जा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार दोनों को संतुलित करना जरूरी है। क्या डीके शिवकुमार बनेंगे अगले सीएम? 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। माना जाता है कि सत्ता गठन के समय ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर सहमति बनी थी, जिसके तहत बाद में डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता था। शिवकुमार को कांग्रेस का मजबूत संगठनकर्ता और संकटमोचक माना जाता है। चुनावी रणनीति से लेकर पार्टी फंडिंग और विधायकों को एकजुट रखने तक उनकी भूमिका अहम रही है। ऐसे में अब यह चर्चा तेज है कि पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंप सकती है। राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है पूरा गणित जून में कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सीट भी शामिल है। कांग्रेस को इनमें से तीन सीटें जीतने की उम्मीद है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व सत्ता और संगठन दोनों में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। अब सभी की नजर दिल्ली में होने वाली बैठकों और कांग्रेस हाईकमान के अगले फैसले पर टिकी हुई है। अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है तो यह कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर गुरुवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर नरेंद्र मोदी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें याद किया और उनके योगदान को नमन किया। राजधानी दिल्ली स्थित ‘वीर भूमि’ में आयोजित प्रार्थना सभा में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने किया नमन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राजीव गांधी को याद किया। उन्होंने लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन।” प्रधानमंत्री के संदेश के बाद कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। वीर भूमि पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सोनिया गांधी भी मौजूद रहीं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने पिता की समाधि पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी ने साझा किया भावुक संदेश राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राजीव गांधी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा। आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।” उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में रहा। 1984 में बने थे प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 31 अक्टूबर 1984 से 2 दिसंबर 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल में सूचना प्रौद्योगिकी, टेलीकॉम और आधुनिक भारत की नींव रखने वाले कई कदम उठाए गए। 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार आज अपने मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार करने जा रही है। गुरुवार सुबह चेन्नई में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 23 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राज्यपाल ने सभी नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। यह शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10 बजे चेन्नई के लोक भवन में आयोजित होगा। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नए मंत्रियों के शामिल होने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस की सरकार में वापसी इस कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी राजनीतिक खासियत कांग्रेस की सरकार में एंट्री मानी जा रही है। लंबे समय बाद तमिलनाडु में किसी क्षेत्रीय दल के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस को प्रतिनिधित्व मिला है। कांग्रेस के दो विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं। ये विधायक बनेंगे मंत्री नई कैबिनेट में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। मंत्री पद की शपथ लेने वालों में थूथुकुडी से श्रीनाथ, अविनाशी से कमाली एस, कुमारपालयम से सी विजयलक्ष्मी और कांचीपुरम से आरवी रंजीतकुमार शामिल हैं। इसके अलावा कुंभकोणम से विनोद, तिरुवदानई से राजीव, कडलूर से बी राजकुमार, अरक्कोनम से वी गांधीराज और ओट्टापिडारम से मथन राजा पी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। सूची में राजपालयम से जगदेश्वरी के, किल्लियूर से कांग्रेस विधायक राजेश कुमार एस, ईरोड ईस्ट से एम विजय बालाजी, रासीपुरम से लोगेश तमिलसेल्वन डी और सेलम साउथ से विजय तमिलन पार्थिबन ए के नाम भी शामिल हैं। इसके साथ ही श्रीरंगम से रमेश, मेलूर से कांग्रेस विधायक पी विश्वनाथन, वेलाचेरी से कुमार आर, श्रीपेरंबदूर से थेन्नारासु के और कोयंबटूर नॉर्थ से वी संपत कुमार भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। अंतिम सूची में अरंथांगी से मोहम्मद फरवास जे, तांबरम से डी सरथकुमार, डॉ. राधाकृष्णन नगर से एन मैरी विल्सन और किनाथुकादावु से विग्नेश के को भी शामिल किया गया है। सरकार को मिलेगी नई ऊर्जा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विस्तार के जरिए विजय सरकार संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति इस कैबिनेट विस्तार में साफ दिखाई दे रही है।
VD Satheesan ने सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज किया। कांग्रेस नीत United Democratic Front ने 2026 विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल कर दस साल बाद सत्ता में वापसी की है। Rajendra Vishwanath Arlekar ने सतीशन और उनके 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। राहुल गांधी ने गले लगाकर दी बधाई समारोह में Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra और KC Venugopal शामिल हुए। इसके अलावा Siddaramaiah, DK Shivakumar, Revanth Reddy और Sukhvinder Singh Sukhu भी कार्यक्रम में पहुंचे। शपथ लेने के बाद राहुल गांधी ने वीडी सतीशन को गले लगाकर बधाई दी। दोनों नेताओं की बातचीत की तस्वीरें और वीडियो सोशल Media पर भी चर्चा का विषय बने रहे। छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री तक का सफर 1964 में कोच्चि के पास नेट्टूर में जन्मे वीडी सतीशन पेशे से वकील हैं। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और बाद में यूथ कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई। 2021 विधानसभा चुनाव के बाद वे केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने और लेफ्ट सरकार के खिलाफ UDF के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। 2026 विधानसभा चुनाव में उन्होंने परावुर सीट से लगातार छठी बार जीत हासिल की। उन्होंने CPI उम्मीदवार ईटी टायसन मास्टर को 20,600 वोटों से हराया। “24 घंटे में सरकार गठन ऐतिहासिक” शपथ ग्रहण के बाद सतीशन ने कहा कि केरल के इतिहास में पहली बार इतनी तेजी से सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी हुई है। उन्होंने बताया कि सहयोगी दलों के साथ चर्चा के बाद 24 घंटे के भीतर मंत्रिमंडल का गठन कर लिया गया। सतीशन ने कहा कि कैबिनेट गठन में क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व, महिलाओं और अनुसूचित जाति समुदाय को विशेष महत्व दिया गया है। 20 सदस्यीय कैबिनेट ने ली शपथ नई सरकार में कांग्रेस और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई है। मंत्रिमंडल में Ramesh Chennithala, K Muraleedharan और Sunny Joseph जैसे नेताओं को शामिल किया गया है। वहीं Indian Union Muslim League के नेताओं पीके कुन्हालिकुट्टी, पीके बशीर, एन समसुद्दीन और केएम शाजी को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। विधानसभा अध्यक्ष और डिप्टी स्पीकर के नाम तय मुख्यमंत्री सतीशन ने घोषणा की कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता Thiruvanchoor Radhakrishnan विधानसभा अध्यक्ष होंगे, जबकि Shanimol Usman को उपाध्यक्ष बनाया जाएगा। सरकार ने विधायक अपू जॉन जोसेफ को मुख्य सचेतक (Chief Whip) नियुक्त किया है। कांग्रेस की 5 गारंटी लागू करने का दावा शपथ ग्रहण से पहले रमेश चेन्निथला ने कहा कि नई सरकार चुनाव के दौरान किए गए सभी प्रमुख वादों को पूरा करेगी। कांग्रेस की प्रमुख गारंटी में शामिल हैं: महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा कॉलेज छात्राओं को हर महीने 1000 रुपये सहायता 3000 रुपये सामाजिक पेंशन हर परिवार को 25 लाख रुपये तक स्वास्थ्य बीमा छोटे कारोबारियों को 5 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण
VD Satheesan सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह से पहले उन्होंने अपनी कैबिनेट मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है और यह सूची राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar को सौंप दी गई है। रविवार को मीडिया से बातचीत में वीडी सतीशन ने कहा कि गठबंधन सहयोगियों के साथ चर्चा के बाद मंत्रिमंडल के नाम तय किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे पूरी UDF सरकार शपथ लेगी। सतीशन ने कहा, “करीब 60 साल बाद पूरी UDF कैबिनेट एक साथ शपथ लेने जा रही है। हमने 24 घंटे के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी की, जो केरल के राजनीतिक इतिहास में अभूतपूर्व है। यह संभव इसलिए हो पाया क्योंकि चुनाव के बाद भी UDF एकजुट रही।” कांग्रेस का रहेगा दबदबा नई कैबिनेट में कांग्रेस का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलेगा। कांग्रेस कोटे से कुल 11 मंत्रियों को जगह दी गई है। सतीशन ने बताया कि वरिष्ठ नेता Ramesh Chennithala, K Muraleedharan और Sunny Joseph को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी को 63 सीटें मिलने के बावजूद कई योग्य नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी। सतीशन ने इसे राज्य में कांग्रेस की सबसे बड़ी जीतों में से एक बताया। सोमवार को शपथ लेने वाले मंत्री सोमवार को मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के साथ जिन नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी, उनमें शामिल हैं: वीई अब्दुल गफूरपीके कुन्हालीकुट्टी रमेश चेन्निथला के मुरलीधरन सनी जोसेफ मॉन्स जोसेफ शिबू बेबी जॉन अनूप जैकब सीपी जॉन एपी अनिल कुमार एन समसुधीन पीसी विष्णुनाथ रोजी एम जॉन बिंदु कृष्ण एम लिजू केएम शाजी पीके बशीर टी सिद्दीकी केए तुलसी ओ जे जनीश राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई UDF सरकार के सामने राज्य की आर्थिक चुनौतियों और विकास परियोजनाओं को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। सोमवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह केरल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।