जंतर-मंतर

जंतर-मंतर आंदोलन में घायल नूतन टोप्पो से मिले मंत्री योगेंद्र प्रसाद और दीपिका पांडेय सिंह
जंतर-मंतर आंदोलन में घायल नूतन टोप्पो से मिले मंत्री योगेंद्र प्रसाद और दीपिका पांडेय सिंह, जाना हाल

झारखंड की छात्रा को इलाज और हरसंभव मदद का भरोसा, घटना को लेकर सरकार ने लिया संज्ञान   नई दिल्ली, एजेंसियां। जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुईं झारखंड की छात्रा नूतन टोप्पो से झारखंड सरकार के मंत्री योगेंद्र प्रसाद और दीपिका पांडेय सिंह ने मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने छात्रा का हालचाल जाना और उनके स्वास्थ्य, इलाज तथा आगे की सहायता को लेकर जानकारी ली।   नूतन टोप्पो के स्वास्थ्य की ली जानकारी   मुलाकात के दौरान मंत्रियों ने नूतन टोप्पो और उनके परिवार से बातचीत की। उन्होंने घटना के बारे में जानकारी ली और भरोसा दिलाया कि सरकार घायल छात्रा के साथ है। इलाज में किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।   जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान घायल हुई थीं छात्रा   नूतन टोप्पो जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर आयोजित छात्र आंदोलन में शामिल थीं। प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई में वह घायल हो गई थीं। घटना के बाद झारखंड के छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने मामले को लेकर चिंता जताई थी।   मंत्रियों ने दिया हरसंभव सहायता का आश्वासन   मंत्री योगेंद्र प्रसाद और दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सरकार गंभीरता से ले रही है। उन्होंने नूतन टोप्पो को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।   मामले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज   नूतन टोप्पो से मंत्रियों की मुलाकात के बाद मामला झारखंड में चर्चा का विषय बन गया है। छात्र संगठनों ने भी घायल छात्रा के समर्थन में आवाज उठाई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधारों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन में शामिल होने जा रहीं ममता बनर्जी
ममता बनर्जी 27 जुलाई को दिल्ली जाएंगी, NEET पेपर लीक और छात्र मुद्दे पर प्रदर्शन में होंगी शामिल

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 27 जुलाई को दिल्ली जाएंगी और राजधानी के जंतर-मंतर पर होने वाले छात्र प्रदर्शन में शामिल होंगी। यह प्रदर्शन NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है।   छात्रों के समर्थन में उतरेंगी ममता बनर्जी   ममता बनर्जी ने छात्र आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा है कि वह छात्रों की मांगों के साथ खड़ी हैं। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता जताई है।   जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन   ममता बनर्जी दिल्ली में CJP के नेतृत्व वाले प्रदर्शन में हिस्सा लेंगी। इस प्रदर्शन में NEET पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई जाएगी।   केंद्र सरकार पर पहले भी साध चुकी हैं निशाना   ममता बनर्जी ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।   दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई   प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।   राजनीतिक नजरिए से भी अहम दौरा   ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छात्र मुद्दे पर विपक्षी दलों के नेताओं की सक्रियता बढ़ रही है और इस प्रदर्शन के जरिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
टाइफाइड से पीड़ित होने के बावजूद छात्र आंदोलन जारी रखने का ऐलान करते CJP संस्थापक अभिजीत दिपके
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को हुआ टाइफाइड, बीमारी के बावजूद आंदोलन जारी रखने का ऐलान

नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके टाइफाइड से संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को अपनी तबीयत की जानकारी देते हुए बताया कि उनका इलाज चल रहा है और उन्हें रोजाना IV ड्रिप दी जा रही है। इसके बावजूद उन्होंने छात्र मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन को जारी रखने की बात कही है।   बीमारी के बीच भी प्रदर्शन जारी रखने का फैसला   अभिजीत दिपके ने कहा कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उनका संघर्ष नहीं रुकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।   धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन   CJP की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। अभिजीत दिपके ने कहा कि बीमारी उनके आंदोलन के रास्ते में बाधा नहीं बनेगी और वे अपनी मांगों को लेकर मजबूती से खड़े रहेंगे।   सोशल मीडिया पर साझा की थी तबीयत की जानकारी   इससे पहले अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर IV ड्रिप लगी तस्वीर साझा की थी और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने समर्थकों से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।   CJP प्रदर्शन पहले भी रहा चर्चा में   CJP का आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई जगहों पर चर्चा में रहा है। इससे पहले अभिजीत दिपके ने आंदोलन के दौरान अनशन भी किया था और बाद में प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली थी।   फर्जी मौत की खबर पर दिल्ली पुलिस ने किया था खंडन   इससे पहले सोशल मीडिया पर अभिजीत दिपके की मौत से जुड़ी एक फर्जी खबर भी वायरल हुई थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने गलत बताते हुए कहा था कि वह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
Central Delhi Liquor Shop Timings
दिल्ली में छात्र संगठनों के प्रदर्शन के बीच सुरक्षा कड़ी, वीकेंड में शराब की दुकानें रात 8 बजे तक ही खुलेंगी

नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में छात्र संगठनों के जारी प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है। एहतियात के तौर पर वीकेंड (शनिवार और रविवार) को दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को सामान्य समय से दो घंटे पहले यानी रात 8 बजे बंद करने का आदेश दिया गया है। यह फैसला दिल्ली पुलिस की सुरक्षा संबंधी सिफारिश के बाद लिया गया है।   प्रदर्शन वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई   प्रशासन ने जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है तथा संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त बढ़ा दी गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।   वीकेंड में रात 8 बजे तक ही खुलेंगी शराब की दुकानें   सुरक्षा कारणों से वीकेंड के दौरान दिल्ली की सभी लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानों को रात 8 बजे तक ही संचालन की अनुमति दी गई है। सामान्य दिनों में ये दुकानें देर रात तक खुली रहती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए समय में अस्थायी बदलाव किया गया है।   यातायात और मेट्रो सेवाओं पर भी असर   प्रदर्शन के मद्देनज़र मध्य दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात डायवर्ट किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई मेट्रो स्टेशनों पर विशेष निगरानी रखी गई है और यात्रियों को यात्रा से पहले ट्रैफिक एवं मेट्रो एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है।   स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर   दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने कहा है कि सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालात की लगातार समीक्षा की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
CJI Suryakant
छात्र प्रदर्शन मामले में CJI सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्टों को बताया गलत, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल दखल से किया इनकार

नई दिल्ली, एजेंसियां। जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कुछ मीडिया रिपोर्टों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि अदालत के रुख और टिप्पणियों को सही संदर्भ में पेश किया जाना चाहिए।   वीडियो देखने और स्वत: संज्ञान लेने की मांग पर कोर्ट का रुख   सुनवाई के दौरान एक वकील ने प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की थी। इस पर CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि केवल वीडियो के आधार पर तुरंत कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।   "समय बर्बाद न करें" टिप्पणी पर विवाद   कुछ रिपोर्टों में CJI की टिप्पणी को अलग तरीके से पेश किए जाने पर विवाद हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के पास हर वायरल वीडियो देखने का समय नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया के तहत उचित तरीके से मामला लाया जाना चाहिए।   छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मामला   CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके साथ सख्ती हुई, जबकि प्रशासन का पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है। इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।   CJI ने मीडिया रिपोर्टिंग में सावधानी की बात कही   CJI सूर्यकांत ने इससे पहले भी कहा है कि न्यायिक टिप्पणियों को संदर्भ से हटाकर पेश करने से गलत धारणा बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों के नाम से चलने वाली गलत सूचनाओं से भी सावधान रहने की अपील की है।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
CJP Protest
जंतर-मंतर पर संसद मार्च से पहले हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने

नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित संसद मार्च से पहले सोमवार सुबह जंतर-मंतर पर भारी हंगामा देखने को मिला। पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए इलाके में कड़ी बैरिकेडिंग की थी और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके विरोध में भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मौके पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।   पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा CJP का संसद मार्च सुबह नौ बजे शुरू होना था, लेकिन बैरिकेडिंग के कारण इसमें देरी हुई। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्हें कोई नहीं रोक सकता और वे हर हाल में संसद तक पहुंचेंगे। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया।   इसी बीच, 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की जिम्मेदारी तय करने, CJP प्रतिनिधिमंडल को संसद जाने की अनुमति देने तथा सांसदों से मुद्दा उठाने का आश्वासन मांगा है। स्वास्थ्य कारणों से ऐसा संभव न होने पर उन्होंने सांसदों से सफदरजंग अस्पताल आकर आश्वासन देने की मांग की है।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Sonam Wangchuk
भूख हड़ताल के बीच अस्पताल पहुंचे सोनम वांगचुक, पत्नी ने उठाए इलाज पर सवाल

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि हाई कोर्ट के निर्देश और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के बाद उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह कदम उठाया गया। लंबे समय से उपवास और डिहाइड्रेशन के कारण उनकी स्थिति कमजोर हो गई थी।   सफदरजंग अस्पताल के अनुसार सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, सोनम वांगचुक को सुबह करीब 7:40 बजे भर्ती किया गया। अस्पताल ने बताया कि उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। शरीर में पानी की कमी और लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है।   गीतांजलि डी. अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखा  इस बीच, उनकी पत्नी गीतांजलि डी. अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक का पोटेशियम स्तर 17 जुलाई की शाम 4.3 से घटकर 18 जुलाई की सुबह 2.9 हो गया है। गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह अस्पताल नहीं, बल्कि "जेल" जैसा माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे आंदोलन का संचालन प्रभावित हो रहा है।   गीतांजलि ने यह भी घोषणा की गीतांजलि ने यह भी घोषणा की कि अब यह आंदोलन पूरे देश में यात्रा के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सोनम वांगचुक स्वास्थ्य कारणों से इसमें शामिल नहीं हो पाए, तो वह स्वयं उनका प्रतिनिधित्व करेंगी। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था सहित विभिन्न संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उधर, जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे तीन अन्य छात्र कार्यकर्ताओं की भी तबीयत बिगड़ने की खबर है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की।   इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी और सांसद चंद्रशेखर आजाद सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई के बजाय सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था। विपक्ष ने इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध की भावना के लिए चिंताजनक बताया।

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Abhijeet Dipke
सोनम वांगचुक अस्पताल पहुंचे तो आंदोलन ने पकड़ी नई रफ्तार, अभिजीत दिपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे

नई दिल्ली, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उनका आंदोलन और तेज हो गया है। उनके सहयोगी और Coackroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शनिवार को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि वांगचुक को अस्पताल ले जाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा और उनकी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।   'आंदोलन नहीं रुकेगा'   भूख हड़ताल शुरू करने के बाद अभिजीत दिपके ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और नागरिकों की आवाज़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।   जंतर-मंतर पर बढ़ा तनाव   शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को बिगड़ती सेहत के चलते जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई। दिपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई और शांतिपूर्ण आंदोलन को बाधित करने की कोशिश हुई।   20 जुलाई का 'चलो संसद' मार्च रहेगा जारी   अभिजीत दिपके ने कहा कि सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा। उन्होंने समर्थकों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की।   सरकार से बातचीत की मांग   आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार को जल्द संवाद शुरू करना चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि सोनम वांगचुक को केवल चिकित्सकीय सलाह और अदालत के निर्देश के आधार पर अस्पताल ले जाया गया है। फिलहाल सभी की निगाहें आंदोलन के अगले चरण और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Sonam Wangchuk Safdarjung Hospital
21वें दिन बिगड़ी सोनम वांगचुक की तबीयत, दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में कराया भर्ती

नई दिल्ली, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की तबीयत अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने शनिवार तड़के उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के उस निर्देश के बाद की गई, जिसमें उनकी सेहत पर लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप करने को कहा गया था।   जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाया गया   शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस और मेडिकल टीम जंतर-मंतर पहुंची, जहां वांगचुक पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट और डॉक्टरों की सलाह के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान कुछ समर्थकों ने विरोध भी किया और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।   हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई   दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में प्रशासन को निर्देश दिया था कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित जांच कराई जाए और हालत गंभीर होने पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पुलिस का कहना है कि अस्पताल ले जाने का फैसला पूरी तरह मेडिकल सलाह के आधार पर लिया गया।   पत्नी ने इलाज को लेकर रखी शर्त   अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा कि उनकी स्पष्ट सहमति के बिना कोई चिकित्सा प्रक्रिया या उपचार शुरू नहीं किया जाए। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल ले जाने से पहले परिवार को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।   समर्थकों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया   वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद उनके समर्थकों ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रहेगा और आगामी दिनों में विरोध कार्यक्रमों को और तेज किया जाएगा।

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Sonam Wangchuk
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 20वें दिन भी जारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई। वह 28 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।   डॉक्टरों के अनुसार डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय से भोजन न करने के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। उनका वजन अब 56.55 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम कम हुआ है। बीते 20 दिनों में उनका वजन नौ किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 mg/dL और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज किया गया है। शरीर में हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने से पहले शरीर की चर्बी, फिर मांसपेशियां प्रभावित हुई हैं और अब आंतरिक अंगों पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।   सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि वह हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे ताकि संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ तो "मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।"   आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Pawan Khera
सोनम वांगचुक के अनशन के समर्थन में पहुंचे पवन खेड़ा, पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार को घेरा

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आज दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक लंबे समय से जारी अनशन के जरिए परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं।   पवन खेड़ा ने सरकार पर साधा निशाना   सोनम वांगचुक से मुलाकात के बाद पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई और सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की।   अनशन में उठाए जा रहे हैं छात्रों से जुड़े मुद्दे   सोनम वांगचुक का यह आंदोलन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर कार्रवाई और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। उनके अनशन को लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने समर्थन जताया है।   स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता   लंबे समय से अनशन पर रहने के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार उनका वजन भी काफी कम हुआ है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।   लद्दाख के मुद्दों से भी जुड़े रहे हैं वांगचुक   सोनम वांगचुक इससे पहले लद्दाख को राज्य का दर्जा देने, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और स्थानीय अधिकारों की मांग को लेकर भी आंदोलन कर चुके हैं। लेकिन वर्तमान अनशन का मुख्य मुद्दा परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़ी मांगें हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Swara Bhasker
सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचीं स्वरा भास्कर, अनशन को बताया बच्चों के भविष्य की लड़ाई

नई दिल्ली, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचीं, जहां उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का समर्थन किया। वांगचुक कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से अनशन पर बैठे हैं।   'बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं'   स्वरा भास्कर ने वांगचुक से मुलाकात के बाद कहा कि वह देश के बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने उनके समर्थन में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।   कई हस्तियों ने भी जताया समर्थन   स्वरा भास्कर के अलावा अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, जीनत अमान समेत कई कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में सामने आए हैं। कुछ हस्तियों ने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की भी अपील की है।   20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी   आंदोलन से जुड़े लोगों ने घोषणा की है कि 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Yogendra Yadav Anjali Bhardwaj
पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर आंदोलन तेज, योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज ने दिया समर्थन

नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी के जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज का समर्थन मिला। दोनों नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों और युवाओं से मुलाकात की तथा परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई। आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।   अंजलि भारद्वाज ने कहा अंजलि भारद्वाज ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्रों और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए भूख हड़ताल का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र केवल अपने भविष्य के लिए नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।   उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2002 से 2026 के बीच देशभर में 45 बड़े पेपर लीक के मामले सामने आए, लेकिन केवल दो मामलों में ही दोषियों को सजा मिल सकी। उनके अनुसार, जब तक दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।   योगेंद्र यादव ने कहा वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि जंतर-मंतर का सीमित होता प्रदर्शन स्थल लोकतांत्रिक अधिकारों के सिकुड़ने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक स्थान लगातार कम होते जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आंदोलन को जनता की आवाज बताते हुए छात्रों और सामाजिक संगठनों की सराहना की।   सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है इस बीच भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है। मेडिकल अपडेट के अनुसार उनका ब्लड शुगर घटकर 61 तक पहुंच गया है और पिछले तीन दिनों में उनका करीब 2.4 किलोग्राम वजन कम हुआ है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को चिंताजनक बताया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक रोकने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Sonam Wangchuk
भूख हड़ताल के तीसरे दिन सोनम वांगचुक का शुगर लेवल घटा

नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन मंगलवार को अपने 11वें दिन में पहुंच गया। यह आंदोलन शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। इसी प्रदर्शन के तहत पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है। लगातार उपवास के चलते उनका ब्लड शुगर लेवल घटकर 66 तक पहुंच गया है, जो सामान्य स्तर से काफी नीचे है। इससे उनके समर्थकों और डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के अनुसार, वांगचुक पिछले तीन दिनों से सिर्फ पानी और नमक के सहारे भूख हड़ताल पर हैं, और डॉक्टर नियमित रूप से उनकी नाड़ी, ब्लड प्रेशर तथा अन्य स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो मामला गंभीर हो सकता है।   छात्र, शिक्षक, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता आंदोलन के 11वें दिन भी बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता धरना स्थल पर पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से नारेबाजी करते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की। आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि देश के छात्रों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है।   प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता   प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और सरकारी भर्तियों में जवाबदेही की मांग के साथ-साथ पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अच्छी शिक्षा और सुरक्षित पर्यावरण दोनों देश के विकास के लिए जरूरी हैं। धरना स्थल पर रोज विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचकर समर्थन दे रहे हैं, कुछ सांकेतिक उपवास रख रहे हैं तो कुछ कई दिनों से डटे हुए हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।

abhishek singh जून 30, 2026 0
Shekhar Suman
'लू में औंधा हो गया कॉकरोच का मुखिया', शेखर सुमन के व्यंग्य ने बटोरी सुर्खियां

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने अपने यूट्यूब शो 'शेखर टुनाइट' के नए एपिसोड में अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज में राजनीति और समसामयिक घटनाओं पर तीखे तंज कसे। इस दौरान उन्होंने कथित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP), उसके प्रमुख अभिजीत दीपके, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी व्यंग्य किया। शो के कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।   शेखर सुमन ने शेखर सुमन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी ने लोगों के बीच उम्मीदें तो जगा दी हैं, लेकिन अब उन्हें जंतर-मंतर से "छूमंतर" नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर का "पलटने" का पुराना इतिहास रहा है और इसी संदर्भ में अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए दावा किया कि उन्होंने राजनीति में नहीं आने, सरकारी मकान और सरकारी गाड़ी नहीं लेने जैसी बातें कही थीं, लेकिन बाद में अपने फैसले बदल दिए।   अपने व्यंग्य को आगे बढ़ाते हुए शेखर ने कहा कि असली कॉकरोच अगर एक बार पलट जाए तो अपने आप सीधा नहीं हो पाता। उन्होंने इसे लोकतंत्र से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज हमेशा जीवित रहनी चाहिए, अन्यथा हालात ऐसे हो सकते हैं कि "झाड़ू भी कुछ नहीं कर पाएगा।"   शो में उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि दिल्ली की भीषण गर्मी के कारण कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके बेहोश हो गए। इस टिप्पणी के बहाने उन्होंने केंद्र सरकार पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि "अमेरिका से आए कॉकरोच दिल्ली की गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं, और दिल्ली भी अमेरिका की गर्मी नहीं झेल पा रही है।"   शेखर सुमन के इन राजनीतिक व्यंग्यों को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स उनके बेबाक अंदाज की सराहना कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

abhishek singh जून 16, 2026 0
Sanjay Raut CJP
जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच’ आंदोलन को संजय राउत का समर्थन, बोले- ये देश के भविष्य की आवाज हैं

नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित विरोध प्रदर्शन ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा पेशेवर और अभिभावक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। संजय राउत ने किया समर्थन शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि जिन युवाओं को देश का भविष्य और भाग्य-विधाता कहा जाता है, वे आज अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने लिखा कि आंदोलनकारियों को "कॉकरोच" कहकर कमतर आंकना उचित नहीं है और सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। NEET विवाद बना आंदोलन की पृष्ठभूमि राउत ने अपने पोस्ट में NEET परीक्षा पेपर लीक मामले का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि इस विवाद ने लाखों छात्रों के सपनों और भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि परेशान और निराश युवा अब “कॉकरोच” की पहचान के साथ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर जुटी बड़ी भीड़ प्रदर्शन में शामिल कई लोग तिलचट्टे (कॉकरोच) के मुखौटे पहनकर पहुंचे। उनके हाथों में फूल और विरोध संबंधी पोस्टर दिखाई दिए। बड़ी संख्या में स्कूली छात्र अपने अभिभावकों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए। आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तथा अनुशासित तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की। सरकार से कार्रवाई की मांग प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया। फिलहाल इस आंदोलन ने युवाओं के मुद्दों और शिक्षा संबंधी चिंताओं को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

Unknown जून 7, 2026 0
CJP Protest
CJP आंदोलन की 5 बड़ी मांगें, जानिए आखिर युवाओं का गुस्सा किस बात पर है ?

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों, युवाओं, अभिभावकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों ने बड़ा प्रदर्शन किया। आंदोलन का नेतृत्व पार्टी के संस्थापक Abhijeet Dipke ने किया, जो अमेरिका से लौटने के बाद सीधे प्रदर्शन में शामिल हुए। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच हुए इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग सबसे प्रमुख प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। उनका आरोप है कि नीट पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों और विभिन्न परीक्षा प्रणालियों में लगातार सामने आ रही समस्याओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। जंतर-मंतर पर युवाओं ने "परीक्षा में पारदर्शिता" और "जवाबदेही तय करने" की मांग को जोरदार ढंग से उठाया। ये हैं आंदोलन की पांच प्रमुख मांगें CJP ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, NEET, CUET, CBSE और SSC जैसी परीक्षाओं में निष्पक्ष एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना, डिजिटल शिक्षा प्रणाली को लागू करने से पहले उसकी सुरक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत करना, मणिपुर में सामान्य शैक्षणिक माहौल बहाल करना तथा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सहायता तंत्र विकसित करना शामिल है। मणिपुर और मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठा प्रदर्शन में मणिपुर के छात्रों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिभागियों का कहना था कि अशांत क्षेत्रों में पढ़ाई प्रभावित होने से हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। वहीं छात्रों में बढ़ते तनाव और आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान कई लोग कॉकरोच मास्क पहनकर पहुंचे। अभिजीत दीपके ने आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में रखने की अपील की। इस प्रदर्शन ने संकेत दिया कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं की नाराजगी अब सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुकी है।

Unknown जून 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
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US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0