टेक न्यूज़

Zoho Arattai ऐप में आधार आधारित वेरिफिकेशन फीचर और ग्रीन बैज
Arattai में आधार आधारित वेरिफिकेशन फीचर लॉन्च, पहचान सत्यापित होते ही मिलेगा परमानेंट ग्रीन बैज

हैदराबाद, एजेंसियां। Zoho Corporation के मैसेजिंग और VoIP कॉलिंग ऐप Arattai ने यूज़र्स के लिए नया आधार-आधारित वैकल्पिक पहचान सत्यापन (Identity Verification) फीचर लॉन्च किया है। कंपनी का कहना है कि इस सुविधा का उद्देश्य फर्जी अकाउंट, पहचान की धोखाधड़ी और इंपर्सोनेशन पर रोक लगाना है। पहचान सत्यापित होने के बाद यूज़र्स को उनके प्रोफाइल पर परमानेंट ग्रीन बैज मिलेगा, जिससे अन्य लोग उनकी प्रोफाइल की विश्वसनीयता आसानी से पहचान सकेंगे।   प्रोफाइल सेटिंग्स से होगा आधार वेरिफिकेशन   यूज़र्स ऐप की प्रोफाइल सेटिंग्स में जाकर 'Get Verified' विकल्प के माध्यम से आधार ऐप का उपयोग कर अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक है और Arattai किसी भी यूज़र का आधार डेटा अपने सर्वर पर स्टोर नहीं करता।   सिर्फ वेरिफाइड यूज़र्स से मैसेज लेने का विकल्प   नए फीचर के तहत यूज़र्स यह भी तय कर सकेंगे कि उन्हें केवल सत्यापित (Verified) प्रोफाइल से ही संदेश प्राप्त हों। इससे स्पैम और फर्जी मैसेजों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। यह सुविधा Android, iOS, Windows और Mac सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई है।   नए प्राइवेसी और सिक्योरिटी फीचर्स भी शामिल   आधार वेरिफिकेशन के साथ Arattai ने कई नए सुरक्षा फीचर्स भी पेश किए हैं। इनमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, Google Drive और iCloud पर एन्क्रिप्टेड क्लाउड चैट बैकअप तथा पब्लिक ग्रुप्स में फोन नंबर छिपाने (Hide Phone Number) की सुविधा शामिल है।   ब्लू और ग्रे बैज सिस्टम रहेगा जारी   कंपनी ने बताया कि Arattai में पहले से मौजूद वेरिफिकेशन सिस्टम भी जारी रहेगा, जिसमें सामान्य सत्यापित प्रोफाइल को ब्लू बैज और सरकारी संस्थाओं के आधिकारिक अकाउंट्स को ग्रे बैज दिया जाता है। नया आधार-आधारित ग्रीन बैज सिस्टम प्लेटफॉर्म पर भरोसा और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
ऐप्पल का नया अपग्रेड लीजिंग प्रोग्राम, अब किराए पर मिलेंगे आईफोन और मैक
Apple ने लॉन्च किया नया Upgrade Leasing Program, अब मासिक किराए पर ले सकेंगे iPhone और अन्य डिवाइस

नई दिल्ली, एजेंसियां। Apple ने अमेरिका में अपने ग्राहकों के लिए नया Apple Upgrade Leasing Program लॉन्च किया है। इस योजना के तहत ग्राहक iPhone, Apple Watch, iPad और Mac जैसे Apple डिवाइस खरीदने के बजाय मासिक शुल्क देकर लीज़ (किराए) पर ले सकेंगे। कंपनी का कहना है कि इस प्रोग्राम के जरिए ग्राहक बिना अतिरिक्त डाउन पेमेंट के हर साल नए डिवाइस में अपग्रेड करने का विकल्प भी चुन सकेंगे।   हर साल मिलेगा नए डिवाइस में अपग्रेड का विकल्प   Apple Upgrade Program के तहत ग्राहक लीज़ अवधि पूरी होने पर नवीनतम मॉडल में अपग्रेड कर सकते हैं, डिवाइस को एकमुश्त भुगतान कर अपने पास रख सकते हैं या फिर उसे वापस कर सकते हैं। कंपनी ने इस नए प्रोग्राम के साथ अमेरिका में अपने पुराने iPhone Upgrade Program और iPhone Payments को बंद करने का फैसला किया है।   Klarna के साथ साझेदारी   यह प्रोग्राम फिनटेक कंपनी Klarna के सहयोग से संचालित किया जाएगा। आवेदन के दौरान ग्राहकों का सॉफ्ट क्रेडिट चेक किया जाएगा, जिससे उनके क्रेडिट स्कोर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। Apple का दावा है कि पात्र ग्राहकों को मंजूरी की प्रक्रिया तेज और आसान होगी।   मासिक शुल्क से मिलेंगे Apple डिवाइस   इस योजना के तहत ग्राहक iPhone और Apple Watch के लिए 12 या 24 महीने, जबकि Mac और iPad के लिए 24 या 36 महीने की लीज़ चुन सकते हैं। शुरुआती मासिक शुल्क iPhone 17e के लिए 17.99 डॉलर, iPhone 17 के लिए 22.99 डॉलर, iPhone 17 Pro के लिए 31.99 डॉलर और MacBook Pro के लिए 38.99 डॉलर रखा गया है।   कीमतें बढ़ने के बीच नई पहल   Apple ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब बढ़ती उत्पादन लागत और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के कारण कंपनी ने अपने कई उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। माना जा रहा है कि यदि अमेरिका में यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य देशों में भी शुरू किया जा सकता है।   भारत में पहले आ चुका है ऐसा मॉडल   भारत में इससे पहले Samsung और Flipkart ने Galaxy स्मार्टफोन्स के लिए Smart Upgrade Plan पेश किया था। हालांकि, आसान EMI विकल्पों की उपलब्धता के कारण यह योजना ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो सकी। अब Apple का नया लीज़िंग मॉडल ग्राहकों को प्रीमियम डिवाइस इस्तेमाल करने का एक नया विकल्प उपलब्ध कराएगा।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
Zoho Arattai ऐप में Aadhaar आधारित पहचान सत्यापन फीचर लॉन्च
Zoho के Arattai ऐप में Aadhaar आधारित पहचान सत्यापन फीचर लॉन्च

मुंबई, एजेंसियां। भारत के मैसेजिंग ऐप मार्केट में अपनी जगह मजबूत करने के लिए Zoho के Arattai ऐप ने पहचान सत्यापन और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए नए फीचर्स पेश किए हैं। कंपनी का फोकस फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन धोखाधड़ी को कम करने पर है।   Aadhaar आधारित पहचान सत्यापन से बढ़ेगी सुरक्षा   Zoho के Arattai ऐप में Aadhaar आधारित पहचान सत्यापन फीचर जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स की पहचान को अधिक भरोसेमंद बनाना और नकली प्रोफाइल की संख्या कम करना है। Aadhaar वेरिफिकेशन के जरिए यूजर अपनी डिजिटल पहचान को प्रमाणित कर सकेंगे।   प्राइवेसी और सिक्योरिटी पर कंपनी का फोकस   Arattai ऐप को Zoho ने प्राइवेसी-केंद्रित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है। ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, सिक्योर चैट और कॉलिंग जैसे फीचर्स उपलब्ध हैं। कंपनी का कहना है कि यूजर्स की सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी उसकी प्राथमिकता है।   फर्जी अकाउंट और साइबर फ्रॉड पर लगेगी रोक   मैसेजिंग ऐप्स पर बढ़ते फर्जी अकाउंट, स्कैम और पहचान चोरी के मामलों को देखते हुए पहचान सत्यापन फीचर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Aadhaar आधारित वेरिफिकेशन से सही यूजर की पहचान करने में मदद मिल सकती है और प्लेटफॉर्म पर भरोसा बढ़ सकता है।   WhatsApp को टक्कर देने की तैयारी   Zoho का Arattai ऐप भारतीय मैसेजिंग मार्केट में WhatsApp जैसे बड़े प्लेटफॉर्म को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। कंपनी लगातार नए फीचर्स जोड़कर ऐप को ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी बनाने पर काम कर रही है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
सैमसंग गैलेक्सी S27 सीरीज़ में नया कैमरा डिजाइन और 200MP सेंसर लीक्स
Samsung Galaxy S27 सीरीज में मिल सकता है नया कैमरा डिजाइन, बड़े अपग्रेड की तैयारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। Samsung की आने वाली Galaxy S27 सीरीज को लेकर लीक्स सामने आने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Galaxy S27 Ultra में नया कैमरा सेटअप और बेहतर सेंसर टेक्नोलॉजी देखने को मिल सकती है। हालांकि Samsung ने अभी तक इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।   कैमरा डिजाइन में बदलाव की उम्मीद   लीक्स के अनुसार Samsung Galaxy S27 Ultra के रियर कैमरा डिजाइन में बदलाव पर काम कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कंपनी पुराने फ्लोटिंग कैमरा रिंग डिजाइन की जगह नए कैमरा लेआउट को टेस्ट कर रही है। हालांकि अभी डिजाइन फाइनल नहीं माना जा रहा है।   200MP कैमरा और नए सेंसर की चर्चा   Galaxy S27 Ultra में 200MP का मुख्य कैमरा सेंसर मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा अल्ट्रा-वाइड कैमरा और टेलीफोटो कैमरा में भी अपग्रेड की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें बेहतर लो-लाइट फोटोग्राफी और ज्यादा डिटेल वाली तस्वीरों के लिए नए सेंसर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।   AI फोटोग्राफी पर बढ़ेगा फोकस   Samsung अपनी नई Galaxy S सीरीज में AI फीचर्स को और मजबूत कर सकता है। Galaxy S27 सीरीज में फोटो एडिटिंग, ऑब्जेक्ट रिमूवल और वीडियो प्रोसेसिंग जैसे AI फीचर्स को बेहतर किए जाने की उम्मीद है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
iPhone 18 Pro Max के लीक्स और संभावित फीचर्स की जानकारी
iPhone 18 Pro Max को लेकर नई जानकारी सामने आई, सितंबर लॉन्च की उम्मीद

नई दिल्ली, एजेंसियां।  Apple के अपकमिंग फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 18 Pro Max को लेकर लीक और रिपोर्ट्स सामने आने लगी हैं। माना जा रहा है कि कंपनी इसे सितंबर 2026 में लॉन्च कर सकती है। हालांकि Apple ने अभी तक आधिकारिक तौर पर लॉन्च डेट या फीचर्स की पुष्टि नहीं की है।   A20 Pro चिप और बेहतर परफॉर्मेंस मिलने की उम्मीद   रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 18 Pro Max में नया A20 Pro चिपसेट दिया जा सकता है, जो 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर आधारित हो सकता है। इससे फोन की स्पीड, AI प्रोसेसिंग और बैटरी एफिशिएंसी में सुधार होने की उम्मीद है।   कैमरा सिस्टम में हो सकता है बड़ा अपग्रेड   iPhone 18 Pro Max में कैमरा फीचर्स को लेकर भी कई दावे सामने आए हैं। इसमें बेहतर लो-लाइट फोटोग्राफी, अपग्रेडेड सेंसर और नई कैमरा टेक्नोलॉजी मिलने की संभावना जताई जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में वैरिएबल अपर्चर कैमरा की भी चर्चा है।   छोटा Dynamic Island और नया डिजाइन   लीक्स के मुताबिक नए iPhone में Dynamic Island का आकार छोटा हो सकता है। इसके अलावा डिस्प्ले टेक्नोलॉजी और डिजाइन में हल्के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।   बड़ी बैटरी और नई कनेक्टिविटी   iPhone 18 Pro Max में पहले से बड़ी बैटरी और बेहतर 5G कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। कुछ रिपोर्ट्स में Apple के अपने मॉडेम पर काम करने की भी बात कही गई है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
Google Gemini AI logo with coding interface, highlighting the delayed launch of Gemini 3.5 Pro amid growing AI competition.
Gemini 3.5 Pro लॉन्च में देरी, AI रेस में Google को झटका; कोडिंग प्रदर्शन बना बड़ी चुनौती

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच Google को बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने अगली पीढ़ी के AI मॉडल Gemini 3.5 Pro के लॉन्च में देरी कर दी है। बताया जा रहा है कि मॉडल कंपनी के आंतरिक प्रदर्शन मानकों पर खरा नहीं उतर पाया, खासकर कोडिंग क्षमता के मामले में। ऐसे समय में यह देरी Google के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि OpenAI और Anthropic अपने नए AI मॉडल लगातार पेश कर रहे हैं। जून में लॉन्च होना था Gemini 3.5 Pro रिपोर्ट के अनुसार, Google के CEO सुंदर पिचाई ने मई में आयोजित Google I/O इवेंट के दौरान Gemini 3.5 Pro की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने बताया था कि कंपनी इस मॉडल का आंतरिक रूप से इस्तेमाल भी शुरू कर चुकी है और इसे जून में लॉन्च किए जाने की योजना थी। हालांकि, विकास प्रक्रिया के दौरान मॉडल अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया, जिसके चलते लॉन्च को फिलहाल टाल दिया गया। कोडिंग क्षमता में नहीं मिले संतोषजनक नतीजे मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google ने पिछले महीने Gemini 3.5 Pro की कोडिंग क्षमता बेहतर बनाने के लिए उसके प्रशिक्षण डेटा में बदलाव भी किए थे। इसके बावजूद मॉडल से उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले। बताया जा रहा है कि कंपनी के इंजीनियर और AI शोधकर्ता मॉडल के प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। विशेष रूप से कोड जनरेशन और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में Gemini 3.5 Pro अभी प्रतिस्पर्धी मॉडल्स से पीछे माना जा रहा है। OpenAI और Anthropic से बढ़ा दबाव Gemini 3.5 Pro की देरी ऐसे समय हुई है जब AI क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। हाल के महीनों में OpenAI ने अपना नया AI मॉडल पेश किया है, जबकि Anthropic भी लगातार अपने उन्नत मॉडल लॉन्च कर रही है। इन कंपनियों की तेज प्रगति ने Google पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के बाद Alphabet के शेयरों में गिरावट Gemini 3.5 Pro के लॉन्च में देरी की खबर सामने आने के बाद Google की मूल कंपनी Alphabet के शेयरों पर भी असर पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ समय के लिए यह गिरावट 4 प्रतिशत तक पहुंच गई। Google ने कहा- टेस्टिंग जारी है Google की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कंपनी लगातार नए AI मॉडल विकसित कर रही है और उन्हें लागत के लिहाज से प्रभावी बनाए रखने पर भी काम कर रही है। कंपनी के अनुसार, Gemini 3.5 Pro, उन्नत Flash मॉडल और अन्य AI सिस्टम फिलहाल चुनिंदा साझेदारों के साथ परीक्षण के चरण में हैं। साथ ही Google अमेरिकी अधिकारियों के साथ भी AI सुरक्षा और नियामकीय पहलुओं पर सहयोग कर रही है। AI रेस से बाहर नहीं हुआ Google हालांकि Gemini 3.5 Pro की लॉन्चिंग में देरी हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि Google अभी भी AI क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। Google की सबसे बड़ी ताकत उसके विशाल सर्च डेटा, टेक्स्ट, इमेज और वीडियो प्रोसेसिंग क्षमताओं के साथ-साथ ऐसे AI मॉडल विकसित करना है, जो वास्तविक दुनिया के वातावरण को समझने और उसका अनुकरण करने में सक्षम हैं। कंपनी AI आधारित कोडिंग टूल्स, क्लाउड सेवाओं और अन्य डिजिटल उत्पादों पर भी लगातार काम कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि Gemini 3.5 Pro को बेहतर प्रदर्शन के साथ लॉन्च करने के लिए Google अतिरिक्त समय ले रहा है, ताकि वह बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी उत्पाद पेश कर सके।  

surbhi जुलाई 20, 2026 0
Semiconductor chips, silicon wafers, and advanced fabrication facilities representing India's ₹1.27 lakh crore Semicon 2.0 mission.
सेमिकॉन 2.0: भारत का ₹1.27 लाख करोड़ का सबसे बड़ा चिप मिशन, जानिए कैसे बदलेगी देश की टेक्नोलॉजी और अर्थव्यवस्था

भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (Semicon 2.0) को मंजूरी देते हुए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस नई योजना का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, रिसर्च, पैकेजिंग, मशीनरी, कच्चे माल और कुशल मानव संसाधन सहित पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि यह पहल भारत को आयातित चिप्स पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेगी। सेमिकॉन 1.0 के बाद अब दूसरा बड़ा कदम दिसंबर 2021 में शुरू किए गए Semicon 1.0 के तहत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की नींव रखने का प्रयास किया था। इस चरण में सिलिकॉन फैब, पैकेजिंग यूनिट और चिप डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दिए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिली, जिनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें सिलिकॉन फैब्रिकेशन प्लांट, कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और कई पैकेजिंग परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा कई भारतीय स्टार्टअप और एमएसएमई को चिप डिजाइन विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता और अत्याधुनिक डिजाइन टूल्स उपलब्ध कराए गए। Semicon 2.0 किन क्षेत्रों पर करेगा फोकस? नई योजना को छह प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है, जिनके जरिए भारत पूरे सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को विकसित करना चाहता है। इनमें शामिल हैं– चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर आईपी मशीनरी, उपकरण और कच्चा माल नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट एटीएमपी (ATMP) और ओसैट (OSAT) यूनिट अनुसंधान एवं विकास (R&D) कुशल मानव संसाधन और प्रशिक्षण सरकार का लक्ष्य केवल चिप बनाना नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर उत्पादन और पैकेजिंग तक पूरी प्रक्रिया को भारत में विकसित करना है। रिसर्च और नई तकनीक पर रहेगा विशेष जोर Semicon 2.0 के तहत अत्याधुनिक चिप तकनीकों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भविष्य की उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों पर काम करने के साथ-साथ भारतीय इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग उपलब्ध कराना है। युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर नई योजना के तहत कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में सेमीकंडक्टर डिजाइन एवं निर्माण से जुड़ी ट्रेनिंग को और मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा क्लीनरूम ऑपरेशन, फैब निर्माण, चिप डिजाइन और अन्य विशेष तकनीकी क्षेत्रों में उद्योग आधारित प्रशिक्षण भी बढ़ाया जाएगा। इससे आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। आयात पर निर्भरता होगी कम विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अभी तक चिप निर्माण के लिए गैस, केमिकल, मशीनरी और कई अन्य जरूरी संसाधनों के लिए विदेशों पर निर्भर है। Semicon 2.0 के तहत इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे आयात कम होगा और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा और औद्योगिक उपकरण जैसे क्षेत्रों को स्थिर आपूर्ति मिल सकेगी। वैश्विक निवेश आकर्षित करने की तैयारी सरकार को उम्मीद है कि नई नीति के बाद अमेरिका, यूरोप, जापान, सिंगापुर, नीदरलैंड और जर्मनी सहित कई देशों की प्रमुख टेक कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो भारत आने वाले वर्षों में केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली हब ही नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजाइन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना सकता है। लंबी अवधि की रणनीति पर आधारित है योजना सेमीकंडक्टर उद्योग में किसी भी परियोजना को पूरी तरह विकसित होने में कई वर्ष लगते हैं। ऐसे में Semicon 2.0 को दीर्घकालिक रणनीति के तहत तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के वास्तविक परिणाम अगले कुछ वर्षों में दिखाई देंगे। यदि निवेश, अनुसंधान और निजी क्षेत्र की भागीदारी लगातार बढ़ती रही, तो भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है।  

surbhi जुलाई 20, 2026 0
Claude AI interface highlighting new Claude Fable 5 access rules for Free, Pro, and Max subscription plans from July 20.
Claude AI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट: 20 जुलाई से बदले Claude Fable 5 के एक्सेस नियम, जानें Free, Pro और Max प्लान में क्या बदला

Claude AI का इस्तेमाल करने वाले लाखों यूजर्स के लिए 20 जुलाई से महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं। AI कंपनी Anthropic ने अपने नए Claude Fable 5 मॉडल के एक्सेस सिस्टम में बदलाव करते हुए अलग-अलग सब्सक्रिप्शन प्लान के अनुसार नई उपयोग सीमा (Usage Limits) और प्राथमिकता (Priority Access) तय की है। यदि आप Claude AI का उपयोग पढ़ाई, कंटेंट राइटिंग, कोडिंग, रिसर्च या ऑफिस के कामों के लिए करते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि नए बदलावों का आपके अनुभव पर क्या असर पड़ेगा। Claude Fable 5 में क्या हुए नए बदलाव? Anthropic ने बताया कि बढ़ती AI मांग और सर्वर लोड को संतुलित करने के लिए एक्सेस सिस्टम को अपडेट किया गया है। अब Free, Pro और Max प्लान के यूजर्स को उनके सब्सक्रिप्शन के अनुसार अलग-अलग सुविधाएं मिलेंगी। कंपनी का कहना है कि इस नई व्यवस्था से अधिक उपयोग करने वाले प्रोफेशनल यूजर्स को बेहतर प्रदर्शन मिलेगा, जबकि सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। Free प्लान यूजर्स पर क्या होगा असर? Free प्लान का उपयोग करने वाले यूजर्स पहले की तरह Claude Fable 5 का इस्तेमाल कर सकेंगे, लेकिन अधिक ट्रैफिक या सर्वर लोड के समय उन्हें कुछ सीमाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में– रिक्वेस्ट की संख्या सीमित हो सकती है। जवाब मिलने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है। सामान्य AI कार्य, जैसे नोट्स बनाना, ईमेल लिखना और बेसिक कंटेंट तैयार करना, पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। Pro और Max प्लान यूजर्स को मिलेगा प्रायोरिटी एक्सेस Anthropic ने अपने Pro और Max सब्सक्रिप्शन यूजर्स के लिए प्राथमिकता वाला एक्सेस उपलब्ध कराया है। इन प्लान्स के तहत यूजर्स को– लंबे चैट सेशन बड़े दस्तावेज़ों का विश्लेषण जटिल कोडिंग कार्य रिसर्च और प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स जैसे कार्यों के दौरान बेहतर स्पीड और कम व्यवधान का अनुभव मिलेगा। कंपनी ने क्यों किया यह बदलाव? Anthropic के अनुसार, आधुनिक AI मॉडल पहले की तुलना में कहीं अधिक कंप्यूटिंग संसाधनों का उपयोग करते हैं। लगातार बढ़ते उपयोग के कारण सभी यूजर्स को समान अनुभव देना चुनौतीपूर्ण हो रहा था। नई एक्सेस नीति का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना और पेड सब्सक्राइबर्स को उनकी आवश्यकता के अनुसार अधिक स्थिर सेवा उपलब्ध कराना है। किस यूजर के लिए कौन-सा प्लान बेहतर? यदि आप Claude AI का उपयोग केवल कभी-कभार जानकारी खोजने, पढ़ाई, ईमेल लिखने या सामान्य कार्यों के लिए करते हैं, तो Free प्लान पर्याप्त हो सकता है। वहीं यदि आप– कंटेंट क्रिएटर सॉफ्टवेयर डेवलपर रिसर्चर बिजनेस प्रोफेशनल या रोजाना AI का व्यापक उपयोग करने वाले यूजर हैं, तो Pro या Max प्लान बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं, क्योंकि इनमें अधिक उपयोग सीमा और प्राथमिकता वाला एक्सेस मिलता है। कितनी है कीमत? Anthropic के नए एक्सेस नियम 20 जुलाई 2026 से लागू हो चुके हैं। वर्तमान में कंपनी के सब्सक्रिप्शन प्लान इस प्रकार हैं– Pro Plan: 20 डॉलर (लगभग ₹1,700 प्रति माह) Max Plan: 100 डॉलर (लगभग ₹8,500 प्रति माह) Max Premium Plan: 200 डॉलर (लगभग ₹17,000 प्रति माह) अलग-अलग देशों में टैक्स और स्थानीय मुद्रा के अनुसार कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।  

surbhi जुलाई 20, 2026 0
: Instagram app with Meta AI branding illustrating removal of the controversial AI image generation feature over privacy concerns.
Instagram पर Meta ने हटाया विवादित AI फीचर, यूजर्स की तस्वीरों से इमेज बनाने का विकल्प किया बंद

सोशल मीडिया कंपनी Meta ने यूजर्स की कड़ी आलोचना के बाद Instagram से जुड़ा अपना विवादित AI इमेज जनरेशन फीचर हटा दिया है। यह फीचर किसी भी सार्वजनिक (Public) Instagram अकाउंट को टैग करके उसकी AI तस्वीर बनाने की अनुमति देता था, जिसे लेकर गोपनीयता (Privacy) और सहमति (Consent) को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। कंपनी ने स्वीकार किया कि इस फीचर को लॉन्च करने का फैसला सही नहीं था और यूजर्स की प्रतिक्रिया के बाद इसे बंद कर दिया गया है। क्या था विवादित AI फीचर? Meta ने हाल ही में Muse Image नाम का AI इमेज जनरेशन टूल लॉन्च किया था। इस फीचर की मदद से कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक Instagram अकाउंट को प्रॉम्प्ट में टैग करके उसकी AI-जनरेटेड तस्वीर बना सकता था। इसके लिए संबंधित व्यक्ति की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, यह सुविधा केवल Public Accounts तक सीमित थी। निजी (Private) अकाउंट और 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स इस फीचर से बाहर रखे गए थे। क्यों हुआ विरोध? इस फीचर को लेकर सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि सभी सार्वजनिक Instagram अकाउंट डिफॉल्ट रूप से (Opt-in) इसमें शामिल थे। यदि कोई यूजर अपनी तस्वीरों का AI उपयोग नहीं चाहता था, तो उसे स्वयं जाकर सेटिंग्स बदलनी पड़ती थीं। इसके अलावा Meta यूजर्स को यह भी नहीं बताता था कि किसी ने उनकी प्रोफाइल का उपयोग कर AI इमेज बनाई है या नहीं। इस वजह से लोगों ने आशंका जताई कि उनकी तस्वीरों का बिना अनुमति दुरुपयोग हो सकता है। Meta ने क्या कहा? Meta ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में कहा कि कंपनी का उद्देश्य लोगों को एक उपयोगी रचनात्मक (Creative) टूल उपलब्ध कराना था और उन्हें अपने कंटेंट पर नियंत्रण देना था। हालांकि, कंपनी ने माना कि यूजर्स की प्रतिक्रिया के बाद उसे एहसास हुआ कि यह फीचर अपेक्षित मानकों पर खरा नहीं उतरा। Meta ने कहा कि इस सुविधा को अब पूरी तरह हटा दिया गया है, जबकि Muse Image का बाकी AI इमेज जनरेशन प्लेटफॉर्म पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। अब क्या बदला? फीचर हटाए जाने के बाद अब यदि कोई यूजर Meta AI में किसी Instagram अकाउंट को टैग करके उसकी AI तस्वीर बनाने की कोशिश करता है, तो AI ऐसा करने से इनकार कर देता है। इसके अलावा Meta ने Instagram सेटिंग्स से वह विकल्प भी हटा दिया है, जिसके जरिए Public Account यूजर अपने कंटेंट को AI फीचर्स में इस्तेमाल करने की अनुमति देते थे। हॉलीवुड से भी उठी थी आपत्ति इस फीचर का विरोध केवल आम यूजर्स तक सीमित नहीं रहा। हॉलीवुड की प्रमुख टैलेंट एजेंसी Creative Artists Agency (CAA), जो टॉम क्रूज़, ज़ेंडाया और मेरिल स्ट्रीप जैसे कलाकारों का प्रतिनिधित्व करती है, ने भी Meta से डिफॉल्ट सुरक्षा लागू करने की मांग की थी। एजेंसी का कहना था कि AI उपयोग के लिए लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल Opt-in यानी स्पष्ट अनुमति के बाद ही होना चाहिए, न कि डिफॉल्ट रूप से। AI फीचर्स को लेकर बढ़ रही हैं चुनौतियां Meta पहली कंपनी नहीं है जिसे AI फीचर को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले OpenAI और xAI जैसी कंपनियां भी अपने AI इमेज और वीडियो जनरेशन टूल्स को लेकर गोपनीयता और दुरुपयोग से जुड़े विवादों में घिर चुकी हैं। AI तकनीक के तेजी से विस्तार के साथ कंपनियों पर यूजर्स की निजता और सहमति की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
BSNL satellite phone designed for communication in remote areas without mobile network connectivity.
BSNL Satellite Phone: iPhone 17 Pro से भी महंगा है BSNL का सैटेलाइट फोन, आखिर इसकी कीमत ₹1.34 लाख क्यों?

भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने भारत में ₹1,34,166 कीमत वाला नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। इसकी कीमत Apple के iPhone 17 Pro से भी अधिक है। हालांकि, यह फोन प्रीमियम स्मार्टफोन से मुकाबला करने के लिए नहीं बनाया गया है। इसका उद्देश्य उन जगहों पर संचार सुविधा उपलब्ध कराना है, जहां मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल नहीं पहुंचता। यह फोन खास तौर पर रक्षा बलों, आपदा राहत एजेंसियों, समुद्री क्षेत्रों, खनन उद्योग और दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले लोगों के लिए तैयार किया गया है। क्या है BSNL का सैटेलाइट फोन? BSNL का यह डिवाइस Global Satellite Phone Service (GSPS) का हिस्सा है। सामान्य मोबाइल फोन जहां नजदीकी मोबाइल टावर से जुड़ते हैं, वहीं यह फोन सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट होता है। इसके जरिए ऐसे क्षेत्रों में भी वॉयस कॉल और SMS किए जा सकते हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता। फोन में मजबूत (Rugged) डिजाइन, लंबी बैटरी लाइफ और SOS इमरजेंसी फीचर भी दिया गया है, जिससे कठिन परिस्थितियों में भी इसका उपयोग किया जा सके। इतनी ज्यादा कीमत क्यों है? BSNL के सैटेलाइट फोन की ऊंची कीमत की सबसे बड़ी वजह इसकी विशेष तकनीक है। यह डिवाइस सामान्य मोबाइल टावर के बजाय Inmarsat जैसे वैश्विक सैटेलाइट नेटवर्क से सीधे जुड़ता है। इसके लिए विशेष एंटीना, सैटेलाइट कम्युनिकेशन हार्डवेयर और उन्नत तकनीक की जरूरत होती है, जिसकी लागत सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में काफी अधिक होती है। इसके अलावा, सैटेलाइट फोन सीमित संख्या में बनाए जाते हैं, जिससे उनकी निर्माण लागत भी बढ़ जाती है। केवल फोन खरीदना ही काफी नहीं इस फोन का उपयोग करने के लिए केवल डिवाइस खरीदना पर्याप्त नहीं है। उपयोगकर्ताओं को BSNL की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवा का प्लान भी लेना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार— व्यावसायिक (Commercial) प्लान लगभग ₹5,835 प्रति माह से शुरू होते हैं। सरकारी उपयोगकर्ताओं के लिए प्लान ₹3,500 प्रति माह से उपलब्ध हैं। तय फ्री टॉकटाइम के बाद कॉल और SMS के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा। iPhone के Satellite फीचर से कैसे अलग है? Apple के iPhone में उपलब्ध Emergency SOS via Satellite फीचर केवल आपातकालीन स्थिति के लिए बनाया गया है। जब मोबाइल नेटवर्क और Wi-Fi उपलब्ध नहीं होता, तब उपयोगकर्ता इसके जरिए इमरजेंसी सेवाओं से संपर्क कर सकते हैं या अपनी लोकेशन साझा कर सकते हैं। वहीं BSNL का सैटेलाइट फोन एक पूर्ण सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस है। इसकी मदद से उपयोगकर्ता बिना किसी मोबाइल टावर के नियमित रूप से— वॉयस कॉल कर सकते हैं। SMS भेज सकते हैं। दूरस्थ इलाकों में लगातार संचार बनाए रख सकते हैं। यानी iPhone का सैटेलाइट फीचर केवल आपात स्थिति के लिए है, जबकि BSNL का फोन रोजमर्रा के सैटेलाइट संचार के लिए तैयार किया गया है। किन लोगों के लिए उपयोगी है यह फोन? BSNL के अनुसार यह फोन विशेष रूप से इन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है— रक्षा बल आपदा प्रबंधन एजेंसियां समुद्री जहाज और तटीय संचालन खनन उद्योग दूरदराज के औद्योगिक क्षेत्र तीर्थयात्री एडवेंचर ट्रैवलर ऐसे क्षेत्र जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है क्या कोई भी खरीद सकता है? नहीं। भारत में सैटेलाइट फोन का उपयोग कड़े नियमों के तहत होता है। इसे खरीदने और इस्तेमाल करने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। बिना वैध अनुमति के सैटेलाइट फोन का उपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। क्यों है यह फोन खास? हालांकि इसकी कीमत किसी फ्लैगशिप स्मार्टफोन से अधिक है, लेकिन BSNL का सैटेलाइट फोन मनोरंजन या कैमरा फीचर्स के लिए नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों के लिए बनाया गया है जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह विफल हो जाता है। यही वजह है कि यह डिवाइस सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और दूरस्थ क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संचार उपकरण माना जा रहा है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Meta Muse Image AI tool generating realistic images from text prompts while raising concerns over user privacy and digital identity.
Meta का नया AI टूल 'Muse Image' लॉन्च, मिनटों में बनाएगा रियल जैसी तस्वीरें, लेकिन प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में Meta ने एक नया इमेज जनरेशन मॉडल Muse Image पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह टूल केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर कुछ ही सेकंड में बेहद वास्तविक (Realistic) तस्वीरें तैयार कर सकता है। इतना ही नहीं, यह मौजूदा तस्वीरों को एडिट करने और कई इमेज को मिलाकर नया विजुअल बनाने की भी क्षमता रखता है। हालांकि, इस नई तकनीक के साथ प्राइवेसी और यूजर डेटा के इस्तेमाल को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। क्या है Meta का Muse Image? Muse Image एक AI आधारित इमेज जनरेशन मॉडल है, जो यूजर द्वारा दिए गए टेक्स्ट निर्देशों (Prompt) को समझकर नई तस्वीरें तैयार करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई यूजर समुद्र किनारे बने आधुनिक घर की तस्वीर चाहता है, तो उसे केवल उसका विवरण लिखना होगा। इसके बाद AI उसी आधार पर नई इमेज तैयार कर देगा। इसकी खास बात यह है कि यह सिर्फ नई तस्वीरें ही नहीं बनाता, बल्कि कई रेफरेंस इमेज को मिलाकर नया डिजाइन तैयार करने और पहले से मौजूद तस्वीरों में बदलाव करने की सुविधा भी देता है। किन प्लेटफॉर्म पर मिलेगा यह फीचर? Meta ने Muse Image को अपने AI इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। फिलहाल यह फीचर Meta AI ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जा रहा है। अमेरिका में इसे Instagram Stories के साथ भी जोड़ा गया है, जबकि कुछ देशों में WhatsApp पर इसकी सीमित सुविधा शुरू की गई है। कंपनी भविष्य में इसे Facebook और Marketplace जैसे अन्य प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। अभी यूजर इस सुविधा का मुफ्त उपयोग कर सकते हैं, हालांकि भविष्य में सीमित उपयोग के बाद सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू किया जा सकता है। क्यों बढ़ा प्राइवेसी को लेकर विवाद? Muse Image का सबसे चर्चित फीचर वह है, जिसमें किसी व्यक्ति के Instagram यूजरनेम के आधार पर उसकी सार्वजनिक (Public) प्रोफाइल पर मौजूद तस्वीरों से नई AI इमेज तैयार की जा सकती है। यही सुविधा अब विवाद का कारण बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी सार्वजनिक तस्वीरों का इस्तेमाल AI इमेज बनाने में किया जाता है, तो इससे प्राइवेसी और डिजिटल पहचान से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। क्या हो सकता है गलत इस्तेमाल? तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह की सुविधा पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखा गया तो इसका गलत उपयोग भी संभव है। AI की मदद से तैयार होने वाली तस्वीरें अब पहले से कहीं अधिक वास्तविक दिखाई देती हैं। ऐसे में भविष्य में असली और AI से बनी तस्वीरों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। इससे फर्जी तस्वीरें, गलत जानकारी और डिजिटल पहचान से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। 'ऑप्ट-आउट' सिस्टम पर भी उठे सवाल Muse Image को लेकर एक और चिंता इसका ऑप्ट-आउट सिस्टम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस व्यवस्था में यदि कोई यूजर नहीं चाहता कि उसका सार्वजनिक कंटेंट AI मॉडल के लिए इस्तेमाल हो, तो उसे स्वयं सेटिंग्स में जाकर यह विकल्प बंद करना होगा। ऐसे में कई लोगों को यह जानकारी भी नहीं होगी कि उनकी सार्वजनिक तस्वीरों का उपयोग AI प्रशिक्षण या इमेज जनरेशन के लिए किया जा सकता है। AI के साथ बढ़ रही जिम्मेदारी भी AI आधारित इमेज जनरेशन तकनीक क्रिएटिविटी के नए अवसर जरूर खोल रही है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा, यूजर की सहमति और डिजिटल पहचान की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के विस्तार के साथ कंपनियों को पारदर्शी नीतियां अपनानी होंगी, ताकि नई सुविधाओं का लाभ भी मिलता रहे और यूजर्स की निजता भी सुरक्षित रह सके।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Google Maps app displaying AI-powered restaurant suggestions and food ordering options on a smartphone.
Google Maps में आएगा AI फूड ऑर्डर फीचर? पसंदीदा डिश ढूंढने से लेकर ऑर्डर तक करेगा मदद, जानिए पूरी जानकारी

Google Maps आने वाले समय में सिर्फ रास्ता दिखाने वाला ऐप नहीं रहेगा, बल्कि यह आपके लिए खाना ऑर्डर करने में भी मददगार बन सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google Maps के एंड्रॉयड ऐप के नए बैकएंड कोड में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि कंपनी एक नए AI आधारित फूड ऑर्डरिंग फीचर पर काम कर रही है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस फीचर की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 'Ask Maps to Order Food' फीचर के मिले संकेत रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google Maps Android ऐप के वर्जन 26.27.00 में "Ask Maps to Order Food" नाम से एक संभावित फीचर के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि यह सुविधा यूजर को सिर्फ आसपास के रेस्टोरेंट दिखाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी पसंद के अनुसार डिश चुनने और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाने में भी मदद करेगी। यह फीचर Google के Agentic AI विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल सुझाव नहीं देता बल्कि यूजर के लिए कई जरूरी काम भी पूरा करने में सहायता करता है। कैसे काम कर सकता है नया AI फीचर? फिलहाल Google ने इस फीचर के काम करने के तरीके का खुलासा नहीं किया है। लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार, यूजर अपनी पसंद, जैसे किसी खास डिश या खाने की कैटेगरी, AI को बताएगा। इसके बाद सिस्टम आसपास उपलब्ध रेस्टोरेंट्स, उनकी रेटिंग और अन्य जानकारी के आधार पर सबसे उपयुक्त विकल्प सुझा सकता है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि AI ऑर्डर तैयार करने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इसके लिए Google का Gemini AI मॉडल इस्तेमाल होगा या स्मार्टफोन की ऑन-डिवाइस AI तकनीक। ऑर्डर का अंतिम फैसला रहेगा यूजर के पास अगर यह फीचर लॉन्च होता है, तो AI केवल सुझाव देने और ऑर्डर तैयार करने में मदद करेगा। ऑर्डर को अंतिम रूप देने और भुगतान करने से पहले पूरी जानकारी यूजर के सामने दिखाई जा सकती है। इससे गलत डिश, गलत मात्रा या अनचाहे ऑर्डर जैसी समस्याओं से बचने में आसानी होगी। प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर भी रहेगा ध्यान AI आधारित इस सुविधा के साथ डेटा प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। बेहतर सुझाव देने के लिए सिस्टम को यूजर की पसंद, पहले किए गए सर्च और अन्य गतिविधियों का विश्लेषण करना पड़ सकता है। हालांकि, Google ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कौन-सा डेटा इस्तेमाल किया जाएगा और उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखना दिलचस्प होगा कि AI रेस्टोरेंट्स की सिफारिश पूरी तरह यूजर की पसंद के आधार पर करेगा या प्रमोटेड विकल्प भी शामिल होंगे। Google Maps बन सकता है स्मार्ट AI असिस्टेंट यदि यह फीचर भविष्य में लॉन्च होता है, तो Google Maps केवल नेविगेशन और लोकेशन खोजने तक सीमित नहीं रहेगा। AI की मदद से यह यूजर्स के रोजमर्रा के कई काम, जैसे पसंदीदा खाना ढूंढना, सही रेस्टोरेंट चुनना और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाना, एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा सकता है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Nothing Phone (4b) with Glyph Bar design, AMOLED display, and 6000mAh battery launched in India.
Nothing Phone (4b) भारत में लॉन्च: ₹34,999 की शुरुआती कीमत, 6000mAh बैटरी और नया Glyph Bar डिजाइन बना खास

Nothing ने भारतीय बाजार में अपनी नई B-सीरीज का पहला स्मार्टफोन Nothing Phone (4b) लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे मिड-रेंज सेगमेंट में पेश किया है। स्मार्टफोन में 6000mAh की बड़ी बैटरी, Snapdragon 6 Gen 4 चिपसेट, 120Hz AMOLED डिस्प्ले और नया Glyph Bar डिजाइन दिया गया है। इसके अलावा कंपनी 3 साल तक Android अपडेट और 6 साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा कर रही है। Nothing Phone (4b) की कीमत और उपलब्धता Nothing Phone (4b) को भारत में दो स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च किया गया है। 8GB RAM + 128GB स्टोरेज: ₹34,999 8GB RAM + 256GB स्टोरेज: ₹38,999 कंपनी चुनिंदा बैंक कार्ड पर 7.5% इंस्टेंट डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस भी दे रही है। फोन की बिक्री 14 जुलाई 2026 से शुरू होगी। ग्राहक इसे Flipkart, Croma, Reliance Digital और Vijay Sales के साथ अन्य रिटेल स्टोर्स से खरीद सकेंगे। यह Black, Blue और White रंगों में उपलब्ध होगा। Glyph Bar डिजाइन बना सबसे बड़ा आकर्षण Nothing Phone (4b) में कंपनी ने अपने सिग्नेचर डिजाइन को नया रूप देते हुए Glyph Bar दिया है। इसमें 45 मिनी LED लाइट्स लगी हैं, जो कॉल, नोटिफिकेशन, कैमरा काउंटडाउन, वॉल्यूम, रिकॉर्डिंग और टाइमर जैसी गतिविधियों के अनुसार अलग-अलग लाइट इफेक्ट दिखाती हैं। Nothing Phone (4b) के फीचर्स शानदार AMOLED डिस्प्ले फोन में 6.77 इंच का Full HD+ Samsung Super AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। मुख्य फीचर्स: 120Hz रिफ्रेश रेट 2000 निट्स तक पीक ब्राइटनेस AGC DT-Star 2 प्रोटेक्शन IP64 रेटिंग (धूल और पानी की हल्की छींटों से सुरक्षा) 50MP कैमरा सेटअप फोटोग्राफी के लिए फोन में डुअल रियर कैमरा मिलता है। 50MP प्राइमरी कैमरा (OIS सपोर्ट) 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा 16MP फ्रंट कैमरा फ्रंट कैमरा 4K 30fps तक वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है। Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर Nothing Phone (4b) में Qualcomm Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो 4nm प्रोसेस पर आधारित है। इसके साथ मिलते हैं: 8GB LPDDR4X RAM 128GB और 256GB UFS 2.2 स्टोरेज वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम Android 16 आधारित Nothing OS 4.1 कंपनी के अनुसार फोन को 3 साल के Android OS अपडेट और 6 साल के सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगे। 6000mAh बैटरी और फास्ट चार्जिंग फोन में 6000mAh की बैटरी दी गई है। चार्जिंग फीचर्स: 33W फास्ट चार्जिंग 7.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग कंपनी का दावा है कि यह फोन लगभग 80 मिनट में 0 से 100 प्रतिशत तक चार्ज हो सकता है। कनेक्टिविटी फीचर्स Nothing Phone (4b) में आधुनिक कनेक्टिविटी विकल्प दिए गए हैं। 5G सपोर्ट Wi-Fi 6 Bluetooth 6.0 USB Type-C GPS इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर क्या यह फोन खरीदने लायक है? करीब ₹35,000 के बजट में Nothing Phone (4b) उन ग्राहकों के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकता है, जो अलग डिजाइन, लंबी बैटरी लाइफ, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट और संतुलित परफॉर्मेंस वाला स्मार्टफोन चाहते हैं। खास तौर पर Glyph Bar डिजाइन और 6000mAh बैटरी इसे इस प्राइस सेगमेंट में अलग पहचान देते हैं।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Nothing smartphones, earbuds, smartwatch and chargers showcased with Flipkart GOAT Sale 2026 discount offers.
Nothing GOAT Sale 2026: Phone से लेकर Earbuds तक भारी छूट, Flipkart सेल में मिल रहे दमदार ऑफर्स

Nothing के स्मार्टफोन और ऑडियो प्रोडक्ट्स खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। Flipkart GOAT Sale 2026 के दौरान कंपनी अपने स्मार्टफोन्स, ईयरबड्स, स्मार्टवॉच, हेडफोन और चार्जर्स पर आकर्षक ऑफर्स दे रही है। यह सेल 3 जुलाई से 9 जुलाई 2026 तक चलेगी, जिसमें बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज बोनस के साथ कई प्रोडक्ट्स कम कीमत पर उपलब्ध हैं। Nothing Phone (4a) पर मिल रहा शानदार ऑफर सेल के दौरान Nothing Phone (4a) की शुरुआती कीमत 32,999 रुपये रखी गई है। पात्र बैंक कार्ड से EMI ट्रांजैक्शन करने पर ग्राहकों को 4,000 रुपये का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट मिलेगा। इसके अलावा पुराने स्मार्टफोन के एक्सचेंज पर 3,000 रुपये तक का एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है। फोन में Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर, 50MP OIS प्राइमरी कैमरा, 50MP पेरिस्कोप कैमरा, 1.5K AMOLED डिस्प्ले, Nothing OS 4.1 और AI आधारित फीचर्स दिए गए हैं। Nothing Phone (4a) Pro पर भी बड़ा डिस्काउंट Nothing Phone (4a) Pro की शुरुआती कीमत 41,999 रुपये है। इस मॉडल पर पात्र बैंक कार्ड से EMI खरीदने पर 5,000 रुपये का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा, जबकि एक्सचेंज करने पर 3,000 रुपये तक का अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा। फोन में Snapdragon 7 Gen 4 प्रोसेसर, 144Hz रिफ्रेश रेट वाला 1.5K AMOLED डिस्प्ले, Glyph Matrix डिजाइन, 140x तक जूम सपोर्ट वाला कैमरा सिस्टम और मेटल यूनिबॉडी डिजाइन जैसे प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं। Nothing Earbuds और Headphone पर भी ऑफर्स स्मार्टफोन के अलावा Nothing के ऑडियो प्रोडक्ट्स पर भी आकर्षक कीमतें मिल रही हैं। Nothing Ear (a) – ₹4,999 Nothing Ear – ₹7,999 Nothing Ear (Open) – ₹9,999 वहीं Nothing Headphone (1) की कीमत 3 से 5 जुलाई तक ₹16,999 रहेगी। इसके बाद 6 से 9 जुलाई के बीच इसकी कीमत बढ़कर ₹17,999 हो जाएगी। CMF के प्रोडक्ट्स भी हुए सस्ते Nothing के सब-ब्रांड CMF के कई प्रोडक्ट्स भी सेल में डिस्काउंट पर उपलब्ध हैं। CMF Buds 2A – ₹1,699 CMF Buds 2+ – शुरुआती दिनों में ₹2,399, बाद में ₹2,499 CMF Buds Pro 2 – ₹3,399 CMF Headphone Pro – ₹5,999 CMF Watch Pro 2 – शुरुआती तीन दिनों तक ₹3,999, बाद में ₹4,199 CMF Watch 3 Pro – ₹5,999 चार्जर्स पर भी मिल रही है बचत सेल के दौरान चार्जर्स पर भी विशेष ऑफर दिए जा रहे हैं। CMF 33W Charger – ₹899 CMF 65W Charger – ₹2,499 Nothing 45W Charger – ₹2,299 अगर आप Nothing या CMF के किसी नए डिवाइस की खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो Flipkart GOAT Sale 2026 के दौरान बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज बोनस का लाभ उठाकर अच्छी बचत कर सकते हैं।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Microsoft logo representing the company's announcement of 4,800 job cuts amid rising AI investments and cost optimization efforts.
Microsoft में 4,800 कर्मचारियों की छंटनी, AI पर बढ़ते खर्च के बीच कंपनी ने लिया बड़ा फैसला

AI निवेश बढ़ा, लागत कम करने के लिए Microsoft का बड़ा कदम दिग्गज टेक कंपनी Microsoft ने अपने वैश्विक कर्मचारियों की संख्या में कटौती करते हुए करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया है। यह कंपनी के कुल वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1% है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब Microsoft कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी तकनीकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है तथा साथ ही परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने विभिन्न विभागों में दक्षता बढ़ाने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से यह बदलाव कर रही है। AI पर अरबों डॉलर का दांव, लेकिन बढ़ रहा है वित्तीय दबाव पूरे टेक उद्योग में इस समय AI को लेकर निवेश की होड़ मची हुई है। Microsoft के अलावा Amazon और Meta Platforms जैसी कंपनियां भी इस वर्ष हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2026 में बड़ी टेक कंपनियों का AI संबंधी निवेश 700 अरब डॉलर से अधिक पहुंच सकता है। ऐसे में कंपनियों पर यह दबाव भी बढ़ गया है कि वे इन भारी निवेशों से बेहतर वित्तीय परिणाम हासिल करें। शेयरों में गिरावट के बाद बढ़ी चिंता Microsoft के लिए वर्ष 2026 की पहली छमाही आसान नहीं रही। कंपनी के शेयरों में जनवरी से जून के बीच लगभग 23% की गिरावट दर्ज की गई, जो 2022 के बाद उसका सबसे कमजोर पहला छह महीने का प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले भी कंपनी अमेरिका में लगभग 9,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेपरेशन पैकेज (Voluntary Buyout) की पेशकश कर चुकी थी, जो उसके अमेरिकी कर्मचारियों का करीब 7% था। Microsoft हर वर्ष जून में अपना वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद नए वित्तीय वर्ष की योजना के तहत कर्मचारियों और खर्चों की समीक्षा भी करती है। Azure की मजबूत मांग, लेकिन डेटा सेंटर का बढ़ता खर्च AI सेवाओं की बढ़ती मांग का सबसे अधिक फायदा Microsoft के Azure क्लाउड प्लेटफॉर्म को मिला है। अप्रैल तक Azure, OpenAI के AI मॉडल्स का विशेष क्लाउड प्रदाता था, जिससे कंपनी को AI सेवाओं की बढ़ती मांग का लाभ मिला। हालांकि, AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने और उनका विस्तार करने में भारी पूंजी खर्च हो रही है। इससे कंपनी के नकदी प्रवाह (Cash Flow) पर दबाव बढ़ा है। Microsoft ने पहले ही 2026 के लिए लगभग 190 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान जताया था, जो बाजार की उम्मीदों से कहीं अधिक माना गया। Gaming कारोबार भी चुनौतियों से जूझ रहा AI पर बढ़ते खर्च का असर Microsoft के गेमिंग कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। AI डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे हार्डवेयर निर्माण की लागत में इजाफा हुआ है। इसी कारण कंपनी को अपने Xbox कंसोल की कीमतें भी बढ़ानी पड़ीं, जबकि बाजार में इसकी मांग पहले से ही कमजोर बनी हुई है। हाल ही में Microsoft के गेमिंग डिवीजन की प्रमुख Asha Sharma ने कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में कहा कि कंपनी के गेमिंग व्यवसाय को "रीसेट" की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस डिवीजन का लाभ मार्जिन घटकर केवल 3% रह गया है, जिसके चलते पुनर्गठन जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में विलय और अधिग्रहण (M&A) जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। शर्मा के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने कंटेंट, प्लेटफॉर्म और हार्डवेयर सब्सिडी पर 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया, लेकिन इस दौरान वार्षिक राजस्व में लगभग 50 करोड़ डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। उनका कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
TCS faces major setback after US Supreme Court declines appeal in trade secrets dispute
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका, TCS को 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त नुकसान; कुल देनदारी 220 मिलियन डॉलर पहुंची

ट्रेड सीक्रेट्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज की भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक Tata Consultancy Services (TCS) को अमेरिका में चल रहे ट्रेड सीक्रेट्स विवाद में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की अपील सुनने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद TCS को 70 मिलियन डॉलर (करीब 590 करोड़ रुपये) का अतिरिक्त एकमुश्त खर्च दर्ज करना पड़ेगा। इस फैसले के बाद मामले में कंपनी की कुल वित्तीय देनदारी लगभग 220 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। पहली तिमाही में दर्ज होगा विशेष खर्च TCS ने अपने बयान में कहा कि वह वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त "एक्सेप्शनल चार्ज" दर्ज करेगी। इसमें हर्जाना, ब्याज और कानूनी खर्च शामिल होंगे। कंपनी पहले ही इस मामले के लिए 150 मिलियन डॉलर का प्रावधान कर चुकी थी। अब नए प्रावधान के साथ कुल राशि 220 मिलियन डॉलर हो जाएगी। DXC टेक्नोलॉजी के पक्ष में रहा फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 15 जून को DXC Technology के पक्ष में दिए गए 168 मिलियन डॉलर के हर्जाने के फैसले को बरकरार रखा। यह मामला DXC की पूर्ववर्ती कंपनी Computer Sciences Corporation (CSC) द्वारा 2019 में दायर किए गए मुकदमे से जुड़ा है। क्या है पूरा विवाद? मुकदमे के अनुसार, TCS पर आरोप लगाया गया था कि उसने बीमा कंपनी Transamerica के लगभग 2,200 कर्मचारियों को नियुक्त किया और उनके आंतरिक सिस्टम तक पहुंच का उपयोग करते हुए जीवन बीमा प्रबंधन के लिए एक प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म विकसित किया। DXC का दावा था कि इस प्रक्रिया में उसके ट्रेड सीक्रेट्स और गोपनीय व्यावसायिक जानकारियों का अनुचित इस्तेमाल किया गया। 2023 में जूरी ने लगाया था 210 मिलियन डॉलर का जुर्माना साल 2023 में अमेरिकी जूरी ने TCS को जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट्स चोरी करने का दोषी मानते हुए 210 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने की सिफारिश की थी। हालांकि बाद में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ने इस राशि को घटाकर 168 मिलियन डॉलर कर दिया था। इसमें: 56 मिलियन डॉलर क्षतिपूर्ति (Compensatory Damages) 112 मिलियन डॉलर दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages) शामिल था। इसके बाद 2025 में अमेरिकी अपीलीय अदालत ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट में क्या थी TCS की दलील? TCS का कहना था कि DXC ने वास्तविक वित्तीय नुकसान साबित नहीं किया है, इसलिए उसे अनुचित लाभ (Unjust Enrichment) के आधार पर हर्जाना नहीं मिलना चाहिए। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि दंडात्मक हर्जाने की राशि अत्यधिक है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया, जिससे निचली अदालतों का फैसला प्रभावी हो गया। मुनाफे पर कितना असर? TCS का जनवरी-मार्च तिमाही का शुद्ध लाभ 137.18 अरब रुपये (लगभग 1.45 अरब डॉलर) रहा था। विश्लेषकों के अनुसार 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त प्रावधान कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति के मुकाबले सीमित प्रभाव डालेगा, लेकिन यह एक बार का बड़ा खर्च जरूर माना जाएगा। निवेशकों की नजर अगले नतीजों पर अब निवेशकों की निगाह TCS के आगामी तिमाही परिणामों पर रहेगी, जहां यह विशेष खर्च कंपनी की आय और लाभ पर असर डालता दिखाई देगा। हालांकि कंपनी का मुख्य व्यवसाय और परिचालन प्रदर्शन फिलहाल मजबूत बना हुआ है।  

surbhi जून 16, 2026 0
Zoho founder Sridhar Vembu speaking about AI’s impact on student learning and critical thinking skills
AI आपको स्मार्ट भी बना सकता है और मूर्ख भी! छात्रों को Zoho के श्रीधर वेम्बु की बड़ी चेतावनी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज शिक्षा और सीखने के तरीके को तेजी से बदल रहा है। छात्र असाइनमेंट तैयार करने, कोडिंग सीखने, प्रोजेक्ट पूरा करने और परीक्षाओं की तैयारी के लिए ChatGPT, Gemini और Claude जैसे AI टूल्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इसी बढ़ती निर्भरता को लेकर Sridhar Vembu ने छात्रों को गंभीर चेतावनी दी है। Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बु का कहना है कि AI जहां लोगों को तेज़ी से सीखने और समस्याएं हल करने में मदद कर सकता है, वहीं इसका अत्यधिक उपयोग छात्रों की बुनियादी समझ और सोचने की क्षमता को भी कमजोर कर सकता है। "AI आपको तेजी से स्मार्ट बना सकता है, लेकिन मूर्ख भी" सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वेम्बु ने कहा कि AI एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल नुकसानदायक साबित हो सकता है। उनका मानना है कि अगर छात्र हर सवाल का जवाब AI से लेने लगेंगे, तो वे खुद समस्या को समझने, विश्लेषण करने और समाधान खोजने की क्षमता खो सकते हैं। यही कौशल किसी भी क्षेत्र में सफलता की असली नींव होते हैं। पहले मजबूत करें बुनियाद वेम्बु का कहना है कि छात्रों को AI का उपयोग करने से पहले अपने विषय की बुनियादी समझ विकसित करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक स्कूल और कॉलेज के छात्र मूलभूत अवधारणाओं को अच्छी तरह नहीं सीख लेते, तब तक उन्हें AI पर अत्यधिक निर्भर नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार AI सीखने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है, लेकिन सीखने की जगह नहीं ले सकता। UC Berkeley की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता यह बयान उस समय आया है जब University of California, Berkeley में कंप्यूटर साइंस कोर्सेज में असामान्य रूप से अधिक छात्रों के फेल होने की खबरें सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार: CS 10 कोर्स में लगभग 35.3% छात्र फेल हुए। CS 61A कोर्स में 10.6% छात्रों को सफलता नहीं मिली। ये आंकड़े पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक बताए जा रहे हैं, जहां फेल होने की दर आमतौर पर 10 प्रतिशत से कम रहती थी। हालांकि रिपोर्ट ने सीधे तौर पर AI को इसका कारण नहीं बताया, लेकिन वेम्बु का मानना है कि AI पर अत्यधिक निर्भरता छात्रों की वास्तविक समझ को प्रभावित कर सकती है। पहले भी जता चुके हैं चिंता यह पहली बार नहीं है जब श्रीधर वेम्बु ने AI को लेकर चेतावनी दी हो। इससे पहले भी उन्होंने कई शोधों का हवाला देते हुए कहा था कि AI अल्पकालिक प्रदर्शन (Short-Term Performance) को बेहतर बना सकता है, लेकिन लंबे समय में सीखने और कौशल विकास (Long-Term Learning) पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। उनका मानना है कि छात्रों को AI का इस्तेमाल सहायक उपकरण (Assistant Tool) की तरह करना चाहिए, न कि अपने दिमाग की जगह लेने वाले विकल्प के रूप में। AI का सही उपयोग क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार AI का उपयोग इन कार्यों में फायदेमंद हो सकता है: किसी विषय को समझने के लिए अतिरिक्त जानकारी लेना कोडिंग या प्रोजेक्ट में सहायता प्राप्त करना रिसर्च और डेटा विश्लेषण करना भाषा और लेखन कौशल में सुधार करना लेकिन यदि छात्र बिना समझे सीधे AI के उत्तरों पर निर्भर हो जाते हैं, तो उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता और समस्या समाधान कौशल कमजोर पड़ सकते हैं। AI भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन वेम्बु की चेतावनी यही बताती है कि तकनीक का लाभ तभी मिलता है जब उसके साथ मानवीय समझ और सीखने की इच्छा भी बनी रहे।  

surbhi जून 5, 2026 0
Clean Android smartphones Motorola Edge 70, Edge 60 Pro and Nothing Phone 3a Lite in 2026
2026 में ₹30,000 के बजट में बेस्ट क्लीन एंड्रॉयड स्मार्टफोन, गेमिंग और कैमरा के लिए शानदार विकल्प

आज के समय में स्मार्टफोन खरीदते वक्त केवल कैमरा, प्रोसेसर या बैटरी ही मायने नहीं रखते, बल्कि यूजर्स एक साफ-सुथरे और बिना विज्ञापनों वाले सॉफ्टवेयर अनुभव को भी प्राथमिकता देने लगे हैं। कई कंपनियां अपने फोन्स में भारी कस्टम UI, प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स और प्रमोशनल नोटिफिकेशन देती हैं, जिससे फोन का अनुभव प्रभावित होता है। ऐसे में क्लीन एंड्रॉयड या नियर-स्टॉक एंड्रॉयड वाले स्मार्टफोन तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। अगर आपका बजट करीब ₹30,000 है और आप गेमिंग, कैमरा तथा स्मूद परफॉर्मेंस के साथ क्लीन सॉफ्टवेयर चाहते हैं, तो Motorola और Nothing के कुछ स्मार्टफोन बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। क्लीन एंड्रॉयड फोन की बढ़ती मांग क्लीन एंड्रॉयड वाले स्मार्टफोन कम सिस्टम संसाधनों का उपयोग करते हैं, जिससे डिवाइस तेज चलता है और बैटरी की खपत भी कम होती है। इसके अलावा ऐसे फोन्स में सॉफ्टवेयर अपडेट अपेक्षाकृत जल्दी मिलते हैं और यूजर इंटरफेस अधिक सरल व सहज होता है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में यूजर्स बिना ब्लोटवेयर वाले स्मार्टफोन की तलाश कर रहे हैं। Motorola Edge 70: परफॉर्मेंस और कैमरा का संतुलित पैकेज ₹30,000 के आसपास की कीमत में Motorola Edge 70 एक मजबूत ऑलराउंडर विकल्प बनकर सामने आता है। इसमें Snapdragon 7 Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो BGMI, Call of Duty Mobile और अन्य लोकप्रिय गेम्स को आसानी से संभाल सकता है। फोन में 50MP + 50MP डुअल रियर कैमरा सेटअप और 50MP फ्रंट कैमरा मिलता है, जिससे फोटोग्राफी और वीडियो कॉलिंग का अनुभव बेहतर होता है। 5000mAh बैटरी पूरे दिन का बैकअप देने में सक्षम है। Motorola का Hello UI लगभग स्टॉक एंड्रॉयड जैसा अनुभव देता है, जिसमें अनावश्यक ऐप्स और विज्ञापनों की समस्या नहीं होती। Motorola Edge 60 Pro: बड़ी बैटरी और बेहतर जूम कैमरा यदि आपकी प्राथमिकता लंबी बैटरी लाइफ और कैमरा वर्सेटिलिटी है, तो Motorola Edge 60 Pro एक आकर्षक विकल्प हो सकता है। इसमें 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो सामान्य उपयोग में दो दिन तक का बैकअप देने में सक्षम है। फोन 90W फास्ट चार्जिंग और 15W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट के साथ आता है। कैमरा विभाग में 50MP मुख्य सेंसर के साथ 3X ऑप्टिकल जूम टेलीफोटो लेंस मिलता है, जो इस प्राइस रेंज में इसे खास बनाता है। साफ-सुथरा सॉफ्टवेयर अनुभव इसे और भी बेहतर विकल्प बनाता है। Nothing Phone (3a) Lite: यूनिक डिजाइन और मिनिमलिस्ट अनुभव जो यूजर्स भीड़ से अलग दिखने वाला स्मार्टफोन चाहते हैं, उनके लिए Nothing Phone (3a) Lite एक शानदार विकल्प हो सकता है। कंपनी का Nothing OS अपने मिनिमलिस्ट इंटरफेस और क्लीन डिजाइन के लिए जाना जाता है। फोन में MediaTek Dimensity 7300 Pro प्रोसेसर दिया गया है, जो रोजमर्रा के कामों के साथ गेमिंग को भी सहजता से संभाल सकता है। 50MP कैमरा और 5000mAh बैटरी इसे युवा यूजर्स के बीच खास बनाते हैं। इसका अलग डिजाइन और साफ सॉफ्टवेयर अनुभव इसे प्रतिस्पर्धियों से अलग पहचान दिलाता है। कौन सा फोन खरीदना रहेगा बेहतर? अगर आप गेमिंग, कैमरा और संतुलित परफॉर्मेंस वाला फोन चाहते हैं, तो Motorola Edge 70 सबसे उपयुक्त विकल्प हो सकता है। वहीं, लंबी बैटरी लाइफ और टेलीफोटो कैमरे की जरूरत रखने वाले यूजर्स Motorola Edge 60 Pro को प्राथमिकता दे सकते हैं। दूसरी ओर, स्टाइलिश डिजाइन और अलग सॉफ्टवेयर अनुभव पसंद करने वालों के लिए Nothing Phone (3a) Lite बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। तीनों स्मार्टफोन उन चुनिंदा डिवाइसेज में शामिल हैं जो क्लीन एंड्रॉयड अनुभव के साथ दमदार हार्डवेयर भी उपलब्ध कराते हैं।  

surbhi जून 5, 2026 0
Sridhar Vembu reacts to Delhi High Court ruling against Google in Hindware trademark advertising dispute
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर श्रीधर वेम्बु का बड़ा बयान, बोले- “गूगल का तरीका पूरी तरह अनैतिक था”

भारत में ऑनलाइन विज्ञापन और ट्रेडमार्क अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसले के बाद टेक जगत में नई बहस छिड़ गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सैनिटरीवेयर ब्रांड Hindware से जुड़े मामले में Google को ट्रेडमार्क उल्लंघन का दोषी माना है। इस फैसले के बाद Sridhar Vembu ने खुलकर प्रतिक्रिया दी और Nikhil Kamath के पुराने रुख का समर्थन किया। “मैं निखिल के साथ हूं” – श्रीधर वेम्बु Sridhar Vembu ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि गूगल का विज्ञापन मॉडल नैतिक रूप से गलत था। उन्होंने लिखा कि इस मामले में वह निखिल कामथ के पक्ष में हैं और गूगल जिस तरीके से दूसरे ब्रांडों के नामों का इस्तेमाल अपने विज्ञापन कारोबार में कर रहा था, वह पूरी तरह अनैतिक था। वेम्बु ने कहा कि ऐसे व्यावसायिक व्यवहार के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। क्या था पूरा विवाद? मामला गूगल के उस विज्ञापन सिस्टम से जुड़ा है, जिसमें कंपनियां किसी अन्य ब्रांड या ट्रेडमार्क वाले नाम को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में खरीद सकती थीं। आरोप था कि जब कोई यूजर “HINDWARE” सर्च करता था, तो उसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों के विज्ञापन भी दिखाए जा सकते थे, क्योंकि उन्होंने उस ट्रेडमार्क शब्द पर विज्ञापन बोली (bidding) लगाई हुई थी। Hindware ने इसे अपने ट्रेडमार्क अधिकारों का उल्लंघन बताया और अदालत का दरवाजा खटखटाया। दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा? दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि “HINDWARE” कोई सामान्य शब्द नहीं है, बल्कि एक विशिष्ट और विशिष्ट पहचान वाला पंजीकृत ट्रेडमार्क है। अदालत ने कहा कि: इस ट्रेडमार्क को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में उपयोग करने की अनुमति देना गलत था। गूगल इस ट्रेडमार्क की व्यावसायिक पहचान से अप्रत्यक्ष रूप से लाभ कमा रहा था। इससे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की संभावना बढ़ती है। कोर्ट ने गूगल को “HINDWARE” और उससे मिलते-जुलते शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से रोक दिया। इसके अलावा अदालत ने गूगल को 30 लाख रुपये का हर्जाना देने का भी निर्देश दिया। क्यों अहम है यह फैसला? यह फैसला सिर्फ एक कंपनी और गूगल के बीच का विवाद नहीं माना जा रहा, बल्कि डिजिटल विज्ञापन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। यदि भविष्य में अन्य ब्रांड भी इसी तरह के मामलों में अदालत का रुख करते हैं, तो सर्च इंजन विज्ञापन मॉडल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ट्रेडमार्क अधिकारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। टेक इंडस्ट्री में बढ़ सकती है बहस Sridhar Vembu की टिप्पणी ने इस मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। लंबे समय से कुछ भारतीय उद्यमी बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स की विज्ञापन और डेटा नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब अदालत के फैसले के बाद यह बहस और तेज हो सकती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ब्रांड नामों और ट्रेडमार्क के उपयोग को लेकर कितनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।  

surbhi मई 30, 2026 0
Realme Watch S5 smartwatch featuring AMOLED display, Bluetooth calling and up to 20 days battery life
Realme Watch S5 भारत में लॉन्च, ब्लूटूथ कॉलिंग और 20 दिन की बैटरी के साथ मिले कई दमदार फीचर्स

Realme ने भारतीय बाजार में अपनी नई स्मार्टवॉच Realme Watch S5 लॉन्च कर दी है। यह स्मार्टवॉच स्टाइलिश डिजाइन, बड़ी AMOLED डिस्प्ले, Bluetooth Calling और लंबी बैटरी लाइफ जैसे कई प्रीमियम फीचर्स के साथ आती है। कंपनी ने इसे खास तौर पर फिटनेस और डेली यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है। बड़ी AMOLED डिस्प्ले और प्रीमियम डिजाइन Realme Watch S5 में 1.97 इंच का बड़ा AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 1500 nits ब्राइटनेस के साथ आता है। इसमें 60Hz रिफ्रेश रेट और Always-On Display का सपोर्ट भी मिलता है, जिससे स्क्रीन स्मूद और साफ नजर आती है। स्मार्टवॉच का राउंड डायल डिजाइन इसे प्रीमियम लुक देता है। साथ ही इसमें Smart Night Vision फीचर भी दिया गया है, जो कम रोशनी में बेहतर विजिबिलिटी देने में मदद करता है। Bluetooth Calling और 110+ स्पोर्ट्स मोड्स इस स्मार्टवॉच में Bluetooth Calling का फीचर दिया गया है, जिससे यूजर्स सीधे अपनी कलाई से कॉल रिसीव और डायल कर सकते हैं। इसके लिए वॉच को स्मार्टफोन से कनेक्ट करना होगा। फिटनेस पसंद करने वालों के लिए इसमें 110 से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड्स दिए गए हैं, जिनमें रनिंग, साइक्लिंग, योगा और बैडमिंटन जैसे एक्टिविटी मोड शामिल हैं। हेल्थ ट्रैकिंग के कई स्मार्ट फीचर्स Realme Watch S5 में SpO2 मॉनिटरिंग, हार्ट रेट ट्रैकिंग, स्लीप मॉनिटरिंग और स्ट्रेस ट्रैकिंग जैसे हेल्थ फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा यह आसपास के शोर को भी मॉनिटर कर सकती है। महिला यूजर्स के लिए इसमें Menstrual Cycle Tracking का फीचर भी शामिल किया गया है, जिससे हेल्थ ट्रैकिंग और आसान हो जाती है। GPS और वॉटर रेसिस्टेंस सपोर्ट नेविगेशन के लिए इस स्मार्टवॉच में GPS के साथ 5-Star GNSS सिस्टम दिया गया है, जिससे लोकेशन ट्रैकिंग ज्यादा सटीक बनती है। यह 5ATM Water Resistant रेटिंग के साथ आती है, यानी हल्की बारिश और पानी के छींटों से इसे नुकसान नहीं होगा। कंपनी ने इसमें Wet Touch Control फीचर भी दिया है, जिससे गीले हाथों से भी स्क्रीन इस्तेमाल की जा सकती है। 20 दिन तक की बैटरी लाइफ कंपनी का दावा है कि Realme Watch S5 एक बार फुल चार्ज होने पर करीब 20 दिन तक चल सकती है। इसका वजन लगभग 32 ग्राम है और मोटाई सिर्फ 11.8mm रखी गई है, जिससे इसे लंबे समय तक पहनना आरामदायक रहता है। कीमत और उपलब्धता Realme Watch S5 की भारत में कीमत ₹7,999 रखी गई है। यह दो कलर ऑप्शन - Rock Grey और Sand White में उपलब्ध होगी। स्मार्टवॉच की बिक्री 5 जून दोपहर 12 बजे से शुरू होगी।  

surbhi मई 23, 2026 0
OnePlus Nord 6 smartphone displayed with updated pricing after major price hike in India smartphone market.
₹5000 तक महंगा हुआ OnePlus Nord 6, अब खरीदना फायदे का सौदा या नहीं?

स्मार्टफोन बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों के बीच अब OnePlus ने अपने प्रीमियम मिड-रेंज स्मार्टफोन OnePlus Nord 6 की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया है। कंपनी ने इस फोन की कीमत में सीधे ₹5,000 तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें अब OnePlus India और Amazon India पर भी अपडेट हो चुकी हैं। दिलचस्प बात यह है कि फोन को लॉन्च हुए अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ है और इतनी जल्दी कीमत बढ़ने से यूजर्स हैरान हैं। इससे पहले भी OnePlus 15R की कीमत में कंपनी ने ₹7,000 तक का इजाफा किया था। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि बढ़ी कीमत के बाद भी क्या OnePlus Nord 6 वैल्यू-फॉर-मनी डिवाइस बना हुआ है? OnePlus Nord 6 की नई कीमत नई कीमतों के मुताबिक: 8GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट अब ₹38,999 की जगह ₹41,999 में मिलेगा। 12GB RAM + 256GB वेरिएंट की कीमत ₹41,999 से बढ़कर ₹46,999 हो गई है। यानी दोनों वेरिएंट्स पर कंपनी ने भारी प्राइस हाइक किया है। नई कीमत के बाद अब यह फोन प्रीमियम मिड-रेंज कैटेगरी में पहुंच चुका है, जहां इसका सीधा मुकाबला POCO X8 Pro Max और iQOO 15R जैसे स्मार्टफोन्स से होगा। क्यों बढ़ रही हैं स्मार्टफोन की कीमतें? विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में मेमोरी चिप्स, प्रोसेसर और अन्य कंपोनेंट्स की लागत लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में संशोधन कर रही हैं। OnePlus का यह फैसला भी उसी ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है। क्या अब भी खरीदना चाहिए OnePlus Nord 6? कीमत बढ़ने के बावजूद OnePlus Nord 6 कई दमदार फीचर्स के साथ आता है। फोन में Snapdragon 8s Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग के लिए शानदार माना जा रहा है। इसके अलावा बड़ी 9000mAh बैटरी लंबे बैकअप का दावा करती है और IP69K रेटिंग इसे बेहतर ड्यूरेबिलिटी देती है। कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें टेलीफोटो लेंस नहीं मिलता, लेकिन फिर भी फोन नेचुरल और एक्यूरेट फोटो क्लिक करने में सक्षम माना जा रहा है। वहीं बैटरी बैकअप लगभग दो दिन तक चल सकता है, जो हेवी यूजर्स के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है। अगर आपकी प्राथमिकता टेलीफोटो कैमरा या ज्यादा फ्लैगशिप कैमरा एक्सपीरियंस है, तो आप दूसरे विकल्प देख सकते हैं। लेकिन यदि आप दमदार परफॉर्मेंस, लंबी बैटरी लाइफ और भरोसेमंद यूजर एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो OnePlus Nord 6 अब भी एक मजबूत विकल्प माना जा सकता है। पूरा अपडेट पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।  

surbhi मई 21, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0