बीसीसीआई ने किया बड़ा बदलाव नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में बड़ा बदलाव करते हुए शुभदीप घोष को नया फील्डिंग कोच नियुक्त किया गया है। वह टी. दिलीप की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगे। हाल के महीनों में टीम इंडिया की फील्डिंग पर उठे सवालों के बीच बीसीसीआई ने यह फैसला लिया है। शुभदीप घोष श्रीलंका दौरे से टीम के साथ अपनी नई भूमिका की शुरुआत करेंगे। घरेलू क्रिकेट में रहा शानदार अनुभव शुभदीप घोष लंबे समय से भारतीय क्रिकेट के घरेलू ढांचे में काम कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA), भारत-ए और विभिन्न आयु वर्ग की टीमों के साथ फील्डिंग कोच के रूप में काम किया है। खिलाड़ियों की फील्डिंग तकनीक और फिटनेस सुधारने में उनकी विशेष पहचान रही है। फील्डिंग सुधारना होगी सबसे बड़ी चुनौती हाल के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारतीय टीम ने कई आसान कैच छोड़े और मैदान पर फील्डिंग का स्तर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ऐसे में शुभदीप घोष के सामने खिलाड़ियों की कैचिंग, ग्राउंड फील्डिंग और थ्रोइंग को बेहतर बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि उनके अनुभव का फायदा खिलाड़ियों को मिलेगा। श्रीलंका दौरे से होगी नई शुरुआत शुभदीप घोष अब मुख्य कोच गौतम गंभीर और बाकी सपोर्ट स्टाफ के साथ मिलकर टीम इंडिया की तैयारियों को आगे बढ़ाएंगे। आगामी श्रीलंका दौरे और उसके बाद होने वाली अंतरराष्ट्रीय सीरीज में उनकी भूमिका पर सभी की नजर रहेगी। बीसीसीआई को उम्मीद है कि इस बदलाव से टीम की फील्डिंग में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर को बड़ा झटका लगा है। उनके सबसे करीबी सहयोगियों में शामिल सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इंग्लैंड दौरे के बाद उन्होंने बीसीसीआई को अपना फैसला बता दिया था और अब उनके इस्तीफे पर मुहर लग गई है। दो साल बाद खत्म हुआ कार्यकाल रयान टेन डोशेट जुलाई 2024 में गौतम गंभीर के साथ टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ में शामिल हुए थे। उन्होंने बल्लेबाजी रणनीति और खिलाड़ियों के विकास में अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने निजी कारणों और नई पेशेवर जिम्मेदारियों पर ध्यान देने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया है। सपोर्ट स्टाफ में बड़े फेरबदल रयान टेन डोशेट के जाने के साथ ही टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ में बदलाव का दौर जारी है। हाल ही में फील्डिंग कोच टी. दिलीप का कार्यकाल भी आगे नहीं बढ़ाया गया और उनकी जगह शुभदीप घोष को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीसीसीआई आगामी सीरीज को ध्यान में रखते हुए सपोर्ट स्टाफ को नए सिरे से तैयार कर रहा है। श्रीलंका दौरे से पहले नई शुरुआत श्रीलंका दौरे से पहले हुए इन बदलावों को टीम इंडिया के लिए नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि बीसीसीआई सहायक कोच के पद पर किसे जिम्मेदारी सौंपता है और नए सपोर्ट स्टाफ के साथ टीम का प्रदर्शन कैसा रहता है।
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के हालिया प्रदर्शन को लेकर पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने कड़ी नाराजगी जताई है। आयरलैंड, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे दौरों पर खराब फील्डिंग और लगातार हार के बाद उन्होंने टीम प्रबंधन से सख्त फैसला लेने की अपील की है। गावस्कर का कहना है कि आधुनिक क्रिकेट में कमजोर फील्डिंग की कोई जगह नहीं है और औसत स्तर के फील्डरों को टीम से बाहर किया जाना चाहिए। लगातार हार से बढ़ी चिंता हालिया विदेशी दौरों पर भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार, आयरलैंड, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे दौरे पर भारत ने 12 मैचों में से 8 मुकाबले गंवाए, जबकि केवल 4 मैचों में जीत दर्ज की। सबसे ज्यादा आलोचना जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में हुई, जहां भारतीय खिलाड़ियों ने तीन मैचों में 10 आसान कैच छोड़ दिए। खराब फील्डिंग ने टीम की हार में अहम भूमिका निभाई और इसके बाद कोचिंग स्टाफ पर भी सवाल उठने लगे। गावस्कर ने क्या कहा? अपने कॉलम में सुनील गावस्कर ने लिखा कि अब समय आ गया है कि टीम चयन में फील्डिंग को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा, "यह अनिवार्य होना चाहिए कि यदि कोई खिलाड़ी औसत दर्जे का फील्डर है, तो उसे टीम से बाहर कर दिया जाए। कोई भी कप्तान तीन या चार खिलाड़ियों को मैदान में छिपाकर नहीं खेल सकता और यह उम्मीद नहीं कर सकता कि गेंद उनके पास नहीं जाएगी।" गावस्कर का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कमजोर फील्डिंग का खामियाजा पूरी टीम को भुगतना पड़ता है। फील्डिंग कोचिंग पर भी उठे सवाल भारतीय टीम के फील्डिंग कोच टी. दिलीप हैं, लेकिन हाल के प्रदर्शन के बाद उनके कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, सहायक कोच रयान टेन डोएशेट को भी फील्डिंग विशेषज्ञ माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों की भूमिकाओं को लेकर स्पष्टता की कमी का असर खिलाड़ियों की फील्डिंग पर भी दिखाई दे रहा है। समीक्षा बैठक पर भी दी सलाह अगस्त में प्रस्तावित बीसीसीआई की समीक्षा बैठक को लेकर गावस्कर ने कहा कि टीम को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि ईमानदारी से अपनी कमियों का विश्लेषण करना चाहिए। उन्होंने बल्लेबाजों को सलाह देते हुए कहा कि शॉट चयन पर विशेष ध्यान देना होगा और खिलाड़ियों को अपने अहंकार से ऊपर उठकर मैच की परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करनी चाहिए। सुधार की जरूरत गावस्कर का मानना है कि यदि टीम इंडिया को आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में सफल होना है, तो बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ-साथ फील्डिंग के स्तर में भी बड़ा सुधार करना होगा। उनके अनुसार, आधुनिक क्रिकेट में बेहतरीन फील्डिंग किसी भी मैच का परिणाम बदल सकती है।
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान कर दिया है। टीम की कमान शुभमन गिल को सौंपी गई है, जबकि केएल राहुल को उपकप्तान बनाया गया है। इस टीम की सबसे बड़ी खबर रविंद्र जडेजा की 262 दिनों बाद टेस्ट टीम में वापसी है। वहीं, तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और बल्लेबाज साई सुदर्शन का खेलना उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा। 262 दिन बाद टेस्ट टीम में लौटे रविंद्र जडेजा रविंद्र जडेजा ने अपना पिछला टेस्ट मैच 26 नवंबर 2025 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था। इसके बाद वह लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम से बाहर रहे। अब श्रीलंका दौरे के लिए उनकी वापसी हुई है। यदि वह 15 अगस्त को गाले में होने वाले पहले टेस्ट में उतरते हैं, तो यह उनकी 262 दिनों बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी होगी। बुमराह की फिटनेस पर रहेगा अंतिम फैसला बीसीसीआई ने टीम में जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन को शामिल किया है, लेकिन दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धता फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर करेगी। इंग्लैंड के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज के दौरान बुमराह के घुटने में चोट लगी थी, जिसके कारण वह निर्णायक मुकाबले से बाहर हो गए थे। अब दोनों खिलाड़ियों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से फिटनेस प्रमाण मिलने के बाद ही अंतिम एकादश में शामिल किया जाएगा। वहीं, बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑलराउंडर वॉशिंग्टन सुंदर चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश जैन को पहली बार मिला मौका इस टीम में युवा स्पिनर सारांश जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। उनके चयन को भविष्य के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया शुभमन गिल (कप्तान) केएल राहुल (उपकप्तान) यशस्वी जायसवाल ऋषभ पंत (विकेटकीपर) साई सुदर्शन* ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर) रविंद्र जडेजा कुलदीप यादव मानव सुथार जसप्रीत बुमराह* मोहम्मद सिराज प्रसिद्ध कृष्णा गुरनूर बराड़ देवदत्त पडिक्कल सारांश जैन * चयन फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर। IND vs SL टेस्ट सीरीज का शेड्यूल पहला टेस्ट: 15–19 अगस्त 2026, गाले दूसरा टेस्ट: 23–27 अगस्त 2026, कोलंबो दोनों मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 10:00 बजे शुरू होंगे। सीरीज पर रहेंगी सभी की नजरें शुभमन गिल की कप्तानी में यह सीरीज टीम इंडिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी, नए चेहरों को मौका और बुमराह की फिटनेस जैसे कई पहलू इस दौरे को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं।
हरारे, एजेंसियां। भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला आज (26 जुलाई) हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। भारतीय टीम पहले दो मुकाबले जीतकर सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना चुकी है। अब कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम इंडिया की नजर जिम्बाब्वे का 3-0 से क्लीन स्वीप करने पर होगी, जबकि मेजबान टीम सम्मान बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। सीरीज जीत के बाद बेंच स्ट्रेंथ को मिल सकता है मौका दूसरे टी20 के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने संकेत दिए थे कि अंतिम मुकाबले में टीम संयोजन में बदलाव हो सकता है। तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की हैमस्ट्रिंग चोट के कारण उनकी उपलब्धता पर संशय बना हुआ है। ऐसे में भारतीय टीम कुछ युवा खिलाड़ियों को मौका देकर अपनी बेंच स्ट्रेंथ भी आजमा सकती है। हालांकि टीम का लक्ष्य जीत का सिलसिला जारी रखते हुए सीरीज में क्लीन स्वीप करने का होगा। युवा खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहें भारत के लिए इस सीरीज में ईशान किशन, तिलक वर्मा, वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ने शानदार प्रदर्शन किया है। गेंदबाजी में भी युवा खिलाड़ियों ने प्रभावित किया है। तीसरे मुकाबले में भी इन खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी, जबकि जिम्बाब्वे अपने घरेलू मैदान पर आखिरी मैच जीतकर सीरीज का अंत सकारात्मक तरीके से करना चाहेगा।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर और 2011 विश्व कप विजेता युवराज सिंह ने रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच टीम मैनेजमेंट को अहम सलाह दी है। युवराज का कहना है कि बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए केवल युवा खिलाड़ियों पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं होगी। उनका मानना है कि टीम में युवा जोश और अनुभवी खिलाड़ियों के अनुभव का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत के दौरान युवराज ने कहा कि यदि टीम का लक्ष्य आगामी विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट हैं, तो वरिष्ठ खिलाड़ियों की भूमिका को लेकर समय रहते स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। रोहित और विराट के योगदान को बताया बेमिसाल युवराज सिंह ने कहा कि रोहित शर्मा और विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। दोनों खिलाड़ियों ने वर्षों तक लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए कई मैच जिताए और कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। उन्होंने कहा कि ऐसे खिलाड़ियों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। टीम प्रबंधन को उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट संवाद बनाए रखना चाहिए, ताकि खिलाड़ी भी अपनी योजनाएं उसी अनुसार बना सकें। युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का संतुलन जरूरी युवराज के मुताबिक, किसी भी सफल टीम की पहचान उसका संतुलन होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ युवा खिलाड़ियों के भरोसे बड़े टूर्नामेंट नहीं जीते जा सकते और केवल अनुभवी खिलाड़ियों से भी टीम नहीं बनती। उन्होंने सलाह दी कि यदि टीम को विश्व कप जीतने की तैयारी करनी है, तो खिलाड़ियों को पहले से भरोसा और स्पष्ट भूमिका दी जानी चाहिए। इससे टीम का माहौल बेहतर रहता है और खिलाड़ी बिना किसी अनिश्चितता के प्रदर्शन कर पाते हैं। रोहित शर्मा के भविष्य पर लगातार हो रही चर्चा हाल के दिनों में रोहित शर्मा के वनडे करियर को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्हें भविष्य की वनडे योजनाओं का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। हालांकि, इस संबंध में भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। रोहित की फिटनेस और फॉर्म को लेकर भी चर्चा होती रही है। वहीं, वनडे टीम की कप्तानी शुभमन गिल को सौंपे जाने के बाद उनके भविष्य को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। अपने करियर का अनुभव भी किया साझा युवराज सिंह ने कहा कि वह खुद भी अपने करियर में ऐसे दौर से गुजर चुके हैं। 2017 में उन्हें वनडे टीम से बाहर कर दिया गया था और 2019 विश्व कप टीम में भी जगह नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन और उम्र को लेकर मीडिया और बाहरी चर्चाएं हमेशा होती रहेंगी, लेकिन टीम प्रबंधन को अपने फैसलों और योजनाओं को लेकर स्पष्ट रहना चाहिए। टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं रोहित रोहित शर्मा ने 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर सभी को चौंका दिया था। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद उन्होंने इस प्रारूप को अलविदा कह दिया। हालांकि, उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी कर अपनी फिटनेस और खेल के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखाई थी। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर है कि आगामी बड़े टूर्नामेंटों में रोहित शर्मा और विराट कोहली की भूमिका क्या होगी और टीम प्रबंधन इस पर क्या फैसला लेता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा का आक्रामक अंदाज लंबे समय से टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत रहा है, लेकिन 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद वनडे क्रिकेट के पावरप्ले में उनका प्रदर्शन लगातार सवालों के घेरे में है। इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में भी रोहित सस्ती पारी खेलकर आउट हो गए, जिसके बाद उनकी फॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पावरप्ले में कम हुआ असर आंकड़ों के अनुसार, चैंपियंस ट्रॉफी से पहले रोहित शर्मा शुरुआती 10 ओवरों में तेज रन बनाने और विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाने के लिए जाने जाते थे। लेकिन उसके बाद से पावरप्ले में उनका औसत और स्ट्राइक रेट दोनों में गिरावट देखने को मिली है। साथ ही जल्दी विकेट गंवाने की घटनाएं भी बढ़ी हैं। आंकड़े दे रहे गवाही आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी 2023 से लेकर चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दौरान रोहित शर्मा 36 पारियों में 935 गेंदों का सामना कर 1146 रन बनाए थे। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 67.41 का था और पावरप्ले में उनका स्ट्राइक रेट 122.57 का आसमान छू रहा था, जहां वे विपक्षी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते थे। वहीं पिछले कुछ महीनों में खेली गई 13 पारियों में रोहित ने 310 गेंदों का सामना करके केवल 267 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत घटकर 44.50 पर आ गया है। उनके पावरप्ले के स्ट्राइक रेट में भी गिरावट आई है, जो 122.57 से सीधे नीचे गिरकर महज 86.13 रह गया है, जो उनके स्वाभाविक हिटमैन अंदाज के बिल्कुल विपरीत है। टीम प्रबंधन को होगी चिंता रोहित शर्मा भारत के सबसे अनुभवी बल्लेबाजों में शामिल हैं। ऐसे में आगामी मुकाबलों और बड़े टूर्नामेंटों से पहले उनका फॉर्म में लौटना टीम इंडिया के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोहित पावरप्ले में फिर से आक्रामक शुरुआत देने लगते हैं तो भारतीय बल्लेबाजी और मजबूत हो जाएगी। दूसरे वनडे में होगी निगाहें अब सभी की नजर भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे वनडे पर रहेगी। क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि रोहित शर्मा अपनी पुरानी लय हासिल करते हुए टीम इंडिया को मजबूत शुरुआत दिलाएंगे और आलोचकों को बल्ले से जवाब देंगे।
इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टी20 टीम का निराशाजनक प्रदर्शन अब टीम प्रबंधन और मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर बहस का विषय बन गया है। लगातार खराब नतीजों के बाद क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों ने टीम की रणनीति, खिलाड़ियों की भूमिका और मैच परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। भारत को इस दौरे पर छह मुकाबलों में पांच हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 श्रृंखला में टीम पूरी तरह संघर्ष करती नजर आई और निर्णायक मुकाबलों में एकतरफा हार झेलनी पड़ी। इंग्लैंड में नहीं चला भारत का खेल दौरे की शुरुआत आयरलैंड के खिलाफ हार से हुई। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ टीम की मुश्किलें और बढ़ गईं। ट्रेंट ब्रिज में भारत मात्र 76 रन पर सिमट गया, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसका दूसरा सबसे कम स्कोर है। इसके बाद ब्रिस्टल में इंग्लैंड ने 159 रनों का लक्ष्य केवल 13.5 ओवर में हासिल कर भारत को एक और करारी शिकस्त दी। रणनीति और तैयारी पर उठे सवाल पूरे दौरे में भारतीय बल्लेबाज लगभग एक जैसी रणनीति अपनाते रहे। स्विंग और सीम गेंदबाजी के सामने बल्लेबाजी क्रम लगातार दबाव में दिखा, लेकिन टीम अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव नहीं कर सकी। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी परिस्थितियों के अनुसार टीम की तैयारी और योजनाओं में कमी साफ दिखाई दी। टीम चयन भी चर्चा का विषय भारत की प्लेइंग इलेवन और बल्लेबाजी क्रम को लेकर भी कई सवाल उठे। शानदार रिकॉर्ड रखने वाले तिलक वर्मा को उनके पसंदीदा नंबर-3 की बजाय निचले क्रम में बल्लेबाजी कराई गई। शिवम दुबे की भूमिका पूरे दौरे में स्पष्ट नजर नहीं आई। बाएं हाथ के बल्लेबाजों को लगातार प्राथमिकता दिए जाने पर भी सवाल खड़े हुए। गेंदबाजी संयोजन लगभग हर मैच में बदलता रहा, जिससे टीम को स्थिरता नहीं मिल सकी। वॉशिंगटन सुंदर को लगातार मौके दिए जाने के फैसले पर भी चर्चा हुई। पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि किसी नई टीम के लिए स्पष्ट रणनीति और स्थिर संयोजन बेहद जरूरी होता है। श्रेयस अय्यर ने कहा- टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है श्रृंखला के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि टीम अभी संक्रमण (Transition) के दौर में है और खिलाड़ियों को नई भूमिका में ढलने के लिए समय चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी और गलतियों से सीख लेकर मजबूत वापसी करेगी। गौतम गंभीर पर बढ़ा दबाव मुख्य कोच गौतम गंभीर की नियुक्ति के बाद यह पहला बड़ा विदेशी दौरा रहा, जिसमें टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। लगातार हार के बाद अब टीम प्रबंधन की रणनीति और कोचिंग फैसलों पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए कोच और कप्तान को अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। वहीं यह भी माना जा रहा है कि भविष्य में विदेशी परिस्थितियों के अनुसार बेहतर तैयारी और स्पष्ट रणनीति अपनाना टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। आने वाले महीनों में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर सभी की नजरें रहेंगी कि क्या यह युवा टीम अपनी कमजोरियों को दूर कर मजबूत वापसी कर पाती है या नहीं।
ब्रिस्टल, एजेंसियां। इंग्लैंड दौरे पर लगातार खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम गुरुवार को ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेले जाने वाले चौथे टी20 मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड से भिड़ेगी। पांच मैचों की सीरीज में भारत अब तक जीत दर्ज नहीं कर सका है। पहला मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया था, जबकि दूसरे और तीसरे टी20 में इंग्लैंड ने जीत हासिल कर सीरीज में बढ़त बना ली है। ऐसे में टीम इंडिया के लिए यह मुकाबला 'करो या मरो' जैसा माना जा रहा है। सीरीज बचाने के लिए जीत जरूरी यदि भारत चौथा टी20 हार जाता है तो इंग्लैंड सीरीज अपने नाम कर लेगा। ऐसे में भारतीय टीम के सामने सीरीज में बने रहने के लिए यह मैच जीतना बेहद जरूरी है। कप्तान और टीम प्रबंधन पर सही प्लेइंग इलेवन चुनने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। तीसरे टी20 की हार भुलाना होगी चुनौती नॉटिंघम में खेले गए तीसरे टी20 में भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई थी। टीम केवल 76 रन पर सिमट गई और इंग्लैंड ने 125 रन से बड़ी जीत दर्ज की। यह भारत की टी20 क्रिकेट में सबसे बड़ी हारों में से एक रही, जिसके बाद टीम की बल्लेबाजी और रणनीति पर सवाल उठे हैं। बल्लेबाजों पर होगी सबसे बड़ी जिम्मेदारी चौथे मुकाबले में भारत को शीर्ष क्रम से मजबूत शुरुआत की उम्मीद होगी। पिछले मैच में बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सके थे। वहीं गेंदबाजों को भी पावरप्ले और डेथ ओवरों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा ताकि इंग्लैंड के आक्रामक बल्लेबाजों पर अंकुश लगाया जा सके। ब्रिस्टल की पिच पर हाई-स्कोरिंग मुकाबले की उम्मीद ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड की पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। हालांकि शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को कुछ स्विंग मिल सकती है। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम परिस्थितियों को देखते हुए पहले गेंदबाजी का फैसला ले सकती है। भारतीय टीम पर होगी वापसी की नजर लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम पर दबाव बढ़ गया है। क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि टीम चौथे टी20 में बेहतर खेल दिखाकर सीरीज में वापसी करेगी और मुकाबले को निर्णायक पांचवें मैच तक ले जाएगी।
भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा। ट्रेंट ब्रिज में खेले गए मैच में 202 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया केवल 76 रन पर सिमट गई। इंग्लैंड ने यह मुकाबला 125 रन से जीतकर पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। यह भारत के टी20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास की सबसे बड़ी हार (रनों के अंतर से) मानी जा रही है। साथ ही 76 रन टीम इंडिया का टी20 इंटरनेशनल में दूसरा सबसे कम स्कोर भी है। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने बनाए 201 रन टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 20 ओवर में 201/7 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। ओपनर फिल सॉल्ट ने 44 गेंदों में 70 रन की शानदार पारी खेली, जबकि सैम करन ने नाबाद 41 रन बनाकर टीम को 200 के पार पहुंचाया। भारत की ओर से प्रिंस यादव ने शुरुआती झटके देकर मैच में वापसी की कोशिश की, जबकि हर्षित राणा ने लगातार दो विकेट लेकर इंग्लैंड पर दबाव बनाया। हालांकि अंतिम ओवरों में इंग्लैंड ने तेजी से रन जोड़ते हुए बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया। 202 रन के जवाब में 76 पर सिमटी टीम इंडिया लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। पावरप्ले में ही टीम ने पांच विकेट गंवा दिए और मैच पूरी तरह इंग्लैंड के पक्ष में चला गया। डेब्यू कर रहे वैभव सूर्यवंशी ने दो शानदार छक्कों के साथ कुछ उम्मीद जगाई, लेकिन उनकी पारी 13 रन पर समाप्त हो गई। इसके बाद कोई भी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सका और पूरी टीम सिर्फ 11.4 ओवर में 76 रन पर ऑलआउट हो गई। आर्चर और टंग ने मचाई तबाही इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। जोफ्रा आर्चर – 3 विकेट जॉश टंग – 4 विकेट दोनों गेंदबाजों की तेज और सटीक गेंदबाजी के सामने भारतीय बल्लेबाज पूरी तरह असहाय नजर आए। सीरीज जीतने के करीब पहुंचा इंग्लैंड पहला मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया था। इसके बाद इंग्लैंड ने लगातार दो मैच जीतकर सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है। अब शेष दो मुकाबलों में जीत मिलने पर भी भारत सीरीज अपने नाम नहीं कर सकता। भारतीय टीम के लिए यह हार बल्लेबाजी और रणनीति दोनों मोर्चों पर कई सवाल खड़े करती है। अब टीम अगले मुकाबलों में सम्मान बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।
रांची। भारतीय क्रिकेट के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इन दिनों लगातार सुर्ख़ियों में हैं। वैभव ने टीम इंडिया में मौका मिलने के बाद अपने भविष्य को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। युवा खिलाड़ी ने अपने अंदाज में साफ तौर पर कहा कि उनका लक्ष्य भारत के लिए सिर्फ एक फॉर्मेट खेलना यानि T20 तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत के लिए तीनों फॉर्मेट यानि टेस्ट, वनडे और T20 में खेलना चाहते हैं। टीम इंडिया के लिए खेलना सबसे बड़ा सपना वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि भारतीय टीम की जर्सी पहनना हर युवा क्रिकेटर का सपना होता है और उन्हें मौका मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि वह लगातार मेहनत कर खुद को हर फॉर्मेट के लिए तैयार करना चाहते हैं। कम उम्र में मिली बड़ी जिम्मेदारी कम उम्र में टीम इंडिया तक पहुंचने वाले वैभव पर अब बड़ी जिम्मेदारी भी होगी। हाल के प्रदर्शन ने उन्हें क्रिकेट जगत में अलग पहचान दिलाई है और चयनकर्ताओं का भरोसा भी बढ़ाया है। परिवार और कोच को दिया श्रेय युवा बल्लेबाज ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, कोच और सपोर्ट स्टाफ को दिया। उन्होंने कहा कि बिना उनके सहयोग के यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स की नजरें टिकीं वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी उन्हें लेकर चर्चा तेज है और फैंस आगामी मुकाबलों में उनके प्रदर्शन का इंतजार कर रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने पहली पारी में मजबूत पकड़ बना ली है। भारतीय बल्लेबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत टीम इंडिया बड़ा स्कोर खड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर और मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी से खेलते हुए टीम को बड़े स्कोर की ओर पहुंचा दिया है। भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही संभलकर खेलते हुए रन गति को बनाए रखा और धीरे-धीरे पारी को आगे बढ़ाते रहें। दूसरे दिन के लंच तक भारतीय टीम ने 6 विकेट खोकर 475 रन बना लिए हैं। वाशिंगटन सुंदर 14 और मानव सुथर 9 रन बनाकर क्रीज़ पर डटे हुए हैं। अफगानिस्तान के तरफ से सलीम सफी 4 विकेट लेकर अभी तक सबसे सफल गेंदबाज हैं। भारत का लक्ष्य पहली पारी में 500 रन से अधिक का स्कोर खड़ा करना मैच के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत का लक्ष्य अब पहली पारी में 500 रन या उससे अधिक का स्कोर खड़ा करना है, जिससे गेंदबाजों को बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिल सके। शुभमन गिल खेले कप्तानी पारी टीम इंडिया के टेस्ट टीम के कप्तान शुभमन गिल ने 177 गेंद खेलकर 126 रनों की कप्तानी पारी खेली जिसके बदौलत टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी है।
मुंबई, एजेंसियां। Vaibhav Suryavanshi : वैभव सूर्यवंशी को भारत के टी-20 टीम में जगह मिल गई है। यह खबर तब सामने आई जब बीसीसीआई ने इंग्लैंड और आयरलैंड के दौरे पर जाने के लिए टीम इंडिया की घोषणा की। वैभव सूर्यवंशी को पहली बार टीम इंडिया में जगह मिली है, जो उनके आईपीएल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन का इनाम है। वैभव सूर्यवंशी अभी श्रीलंका में इंडिया ए की टीम के साथ हैं। IPL 2026 में किया शानदार प्रदर्शन वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन किया था। वे आईपीएल में सबसे अधिक रन (776) बनाने वाले खिलाड़ी बने थे। उनका स्ट्राइक रेट (237.30) भी सबसे ज्यादा था और उन्होंने छक्के (72) भी सबसे अधिक मारे थे। वैभव सूर्यवंशी अभी महज 15 साल के हैं। उनके प्रदर्शन पर क्रिकेट के दिग्गजों की नजर थी और सभी एक सुर में यह मांग कर रहे थे कि वैभव को टीम इंडिया में जगह दी जाए। बिहार के रहने वाले हैं वैभव सूर्यवंशी वैभव सूर्यवंशी बिहार के समस्तीपुर के जिले के रहने वाले हैं। उन्हें अपने पिता से क्रिकेट की कोंचिंग मिली है। वे बचपन से ही क्रिकेट में रुचि लेते हैं और अभी उनकी शिक्षा भी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने 10वीं का बोर्ड भी नहीं दिया है।
सेंट पीटर्सबर्ग: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 में भारत की विदेश नीति और रणनीतिक स्वतंत्रता की सराहना करते हुए कहा कि भारत एक संप्रभु देश है और अपने फैसले स्वयं करता है। पुतिन ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है और किसी बाहरी दबाव या निर्देश के आधार पर नीतियां नहीं बनाई हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस के साथ भारत के ऊर्जा और आर्थिक संबंधों को लेकर पश्चिमी देशों में लगातार चर्चा हो रही है। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का किया उल्लेख फोरम के दौरान बोलते हुए पुतिन ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्वतंत्र निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र के निर्णय लेने के अधिकार और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का सम्मान किया जाना चाहिए। रूसी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में देशों को अपने हितों के अनुसार नीतियां तय करने का अधिकार है और इस सिद्धांत पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। रूस-भारत संबंधों को बताया मजबूत पुतिन ने भारत को रूस का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग जारी है और यह संबंध आपसी हितों तथा विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूस और भारत के बीच सहयोग को प्रभावित करने के लिए किसी प्रकार का बाहरी दबाव प्रभावी नहीं होगा। रूसी तेल खरीद को लेकर चर्चा में रहे थे भारत-अमेरिका संबंध पिछले कुछ वर्षों में रूस से तेल आयात को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कई बार चर्चा हुई है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जबकि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखी। भारत सरकार लगातार यह कहती रही है कि उसकी विदेश नीति और आर्थिक फैसले राष्ट्रीय हितों तथा ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकताओं के आधार पर तय किए जाते हैं। वैश्विक मंच पर फिर चर्चा में भारत की विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को आगे बढ़ा रहा है। रूस, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखने की भारत की नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।