डेंगू  

Swara Bhasker
स्वरा भास्कर डेंगू से संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती, सोशल मीडिया पर दिया हेल्थ अपडेट

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने अपनी सेहत को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की है। रिपोर्टों के मुताबिक, अभिनेत्री डेंगू से संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती हुई हैं। उन्होंने अपने स्वास्थ्य से जुड़ा अपडेट साझा करते हुए प्रशंसकों और शुभचिंतकों को अपनी स्थिति के बारे में बताया।   अस्पताल से स्वरा ने दिया हेल्थ अपडेट   स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी तबीयत की जानकारी दी। उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आने के बाद प्रशंसकों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।अभिनेत्री की ओर से साझा किए गए अपडेट के बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट हुई है। हालांकि, उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।   डेंगू के कारण हुई परेशानी   रिपोर्टों के अनुसार, स्वरा को डेंगू संक्रमण के बाद चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। डेंगू मच्छरों से फैलने वाला वायरल संक्रमण है, जिसमें तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी और अन्य लक्षण हो सकते हैं। अस्पताल में भर्ती किए जाने का फैसला डॉक्टरों की निगरानी और इलाज की जरूरत को देखते हुए किया गया है। अभिनेत्री के स्वास्थ्य में सुधार को लेकर प्रशंसकों की नजर उनके अगले अपडेट पर है।   प्रशंसकों ने जल्द स्वस्थ होने की कामना की   स्वरा भास्कर के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों ने उनके जल्द ठीक होने की दुआ की। अभिनेत्री के स्वास्थ्य को लेकर किसी भी नए अपडेट की जानकारी उनके आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट या विश्वसनीय रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगी। फिलहाल प्रशंसक उनके जल्द स्वस्थ होकर घर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
Bihar Dengue Alert
बिहार में डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, जांच और रोकथाम की तैयारी तेज

पटना, एजेंसियां। मानसून के बीच बिहार में डेंगू के संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और रोकथाम की तैयारियां जारी हैं। राज्य में डेंगू की जांच और बीमारी की निगरानी के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है। केंद्र सरकार की ओर से 2026 के लिए बिहार को डेंगू जांच हेतु 240 IgM किट आवंटित की गई हैं।   डेंगू की जांच के लिए व्यवस्था मजबूत   बिहार में डेंगू और चिकनगुनिया की निगरानी के लिए कई प्रमुख सरकारी अस्पतालों को निगरानी केंद्र के रूप में शामिल किया गया है। इनमें पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, IGIMS पटना, AIIMS पटना, NMCH, SKMCH मुजफ्फरपुर और अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थान शामिल हैं। इन केंद्रों के जरिए संदिग्ध मरीजों की जांच और बीमारी की निगरानी की जाती है।   मानसून में बढ़ता है मच्छरों का खतरा   बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी जाती है। कूलर, गमले, टायर, छत और अन्य ऐसे स्थानों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है जहां बारिश का पानी कई दिनों तक जमा रह सकता है।   स्वास्थ्य विभाग की रोकथाम पर नजर   बिहार के स्वास्थ्य विभाग की 2025-26 की कार्ययोजना में डेंगू और चिकनगुनिया के लिए महामारी-तैयारी, निगरानी, प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों के लिए बजट का प्रावधान किया गया था। इससे राज्य में बीमारी की निगरानी और समय पर कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य है।   फिलहाल उपलब्ध ताजा जानकारी के आधार पर बिहार में बड़े पैमाने पर डेंगू के प्रकोप की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, मानसून के दौरान संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।

abhishek singh अगस्त 6, 2026 0
मानसून में हर बुखार को वायरल समझने की गलती न करें! जानें किस गंभीर बीमारी का हो सकता है खतरा

Monsoon Fever Alert: बारिश के मौसम में होने वाला हर बुखार सामान्य वायरल नहीं होता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड या अन्य संक्रमण का संकेत भी हो सकता है। सही समय पर जांच और इलाज गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। मानसून के मौसम में तापमान में गिरावट और बढ़ी हुई नमी के कारण वायरस, बैक्टीरिया और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे समय में तेज बुखार, बदन दर्द, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हर बुखार को सामान्य वायरल फीवर मान लेना सुरक्षित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान कई लोग बिना जांच कराए खुद ही दवा लेना शुरू कर देते हैं, जिससे गंभीर बीमारियों की पहचान में देरी हो सकती है। यदि बुखार के साथ कुछ खास लक्षण दिखाई दें, तो यह डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड या लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में समय पर जांच और सही इलाज बेहद जरूरी है। वायरल और गंभीर बुखार में कैसे करें पहचान? सामान्य वायरल फीवर में 3 से 5 दिन तक हल्का बुखार, नाक बहना, गले में खराश और हल्की कमजोरी हो सकती है। लेकिन यदि बुखार लगातार बढ़ रहा हो या उसके साथ अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डेंगू के संभावित लक्षण आंखों के पीछे तेज दर्द हड्डियों और जोड़ों में दर्द शरीर पर लाल चकत्ते मसूड़ों या नाक से खून आना तेज बुखार मलेरिया के संभावित लक्षण तेज ठंड लगना तेज बुखार कुछ समय बाद अत्यधिक पसीना आना कमजोरी और थकान टाइफाइड के संभावित लक्षण लगातार बढ़ता हुआ बुखार पेट दर्द कब्ज या दस्त भूख कम लगना सूखी खांसी इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें यदि निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं— 103°F या उससे अधिक बुखार तीन दिन से अधिक लगातार बुखार लगातार उल्टी या तेज पेट दर्द अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी त्वचा पर लाल धब्बे या किसी भी प्रकार की ब्लीडिंग सांस लेने में परेशानी चक्कर आना या लो ब्लड प्रेशर मानसून में ऐसे रखें अपना बचाव घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, पुराने टायर और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें। मच्छरों से बचाव के लिए रिपेलेंट, पूरी बांह के कपड़े और मच्छरदानी का उपयोग करें। केवल साफ, उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं। कटे फल, खुले खाद्य पदार्थ और स्ट्रीट फूड खाने से बचें। तेज बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचें। जरूरत पड़ने पर CBC, डेंगू और मलेरिया जैसी जांच समय पर कराएं। ध्यान रखें :-  मानसून में होने वाला हर बुखार साधारण वायरल नहीं होता। यदि लक्षण लगातार बने रहें या गंभीर होते जाएं, तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। समय पर जांच और उपचार से गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचा जा सकता है।

anmol जुलाई 21, 2026 0
Doctor examining a patient with fever while explaining differences between dengue, typhoid, and seasonal viral infections.
बारिश के मौसम में बुखार को न लें हल्के में! जानें सर्दी, डेंगू और टायफाइड में कैसे करें फर्क, डॉक्टरों ने बताए अहम संकेत

मानसून के दौरान बुखार के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। बारिश, जलभराव, बढ़ी हुई नमी और दूषित पानी के कारण वायरल संक्रमण, डेंगू और टायफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। चूंकि इन तीनों बीमारियों में बुखार एक सामान्य लक्षण है, इसलिए कई बार लोग इन्हें सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर बीमारी की पहचान और इलाज गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। मानसून में क्यों बढ़ते हैं बुखार के मामले? बारिश के मौसम में कई जगहों पर पानी जमा हो जाता है, जिससे मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, दूषित भोजन और पीने का पानी टायफाइड जैसी बैक्टीरियल बीमारियों का जोखिम बढ़ाते हैं। अधिक नमी और बंद वातावरण में वायरल संक्रमण भी तेजी से फैलते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार: डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। टायफाइड दूषित भोजन और पानी के सेवन से होता है। सामान्य सर्दी-जुकाम संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और बंद जगहों में आसानी से फैल सकता है। सामान्य सर्दी-जुकाम के लक्षण अगर बुखार के साथ नाक बहना, छींक आना, गले में हल्का दर्द और खांसी जैसी समस्याएं हैं, तो यह सामान्य वायरल संक्रमण हो सकता है। इसके सामान्य लक्षण हैं: हल्का या कम बुखार नाक बहना या बंद होना छींक आना गले में खराश हल्की खांसी ऐसे संक्रमण आमतौर पर 3 से 7 दिनों में ठीक हो जाते हैं। डेंगू के लक्षण कैसे अलग होते हैं? डेंगू में बुखार अचानक तेज़ होता है और शरीर पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है। मुख्य लक्षण: अचानक 39–40 डिग्री सेल्सियस तक तेज बुखार तेज सिरदर्द आंखों के पीछे दर्द मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द अत्यधिक कमजोरी त्वचा पर लाल चकत्ते मतली या उल्टी डेंगू के खतरे के संकेत यदि निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें: मसूड़ों या नाक से खून आना लगातार उल्टी पेट में तेज दर्द चक्कर आना अत्यधिक कमजोरी टायफाइड के लक्षण क्या हैं? टायफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। इसके लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकते हैं। मुख्य लक्षण: लगातार बना रहने वाला तेज बुखार कमजोरी भूख कम लगना पेट दर्द कब्ज या दस्त सिरदर्द थकान विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में दूषित पानी पीने से टायफाइड का खतरा काफी बढ़ जाता है। सर्दी, डेंगू और टायफाइड में क्या है अंतर? बीमारी बुखार प्रमुख लक्षण सामान्य सर्दी हल्का नाक बहना, छींक, खांसी, गले में खराश डेंगू अचानक बहुत तेज शरीर और जोड़ों में दर्द, चकत्ते, कमजोरी टायफाइड लगातार बढ़ने वाला पेट संबंधी समस्याएं, भूख कम लगना, लगातार बुखार कब करानी चाहिए जांच? डॉक्टरों के अनुसार, निम्न स्थितियों में तुरंत जांच करानी चाहिए: बुखार 2–3 दिन से अधिक बना रहे। अचानक बहुत तेज बुखार आए। शरीर और जोड़ों में असहनीय दर्द हो। भूख लगातार कम हो जाए। पेट दर्द, दस्त या कब्ज की शिकायत हो। त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दें। नाक या मसूड़ों से खून आने लगे। डॉक्टर कैसे करते हैं बीमारी की पुष्टि? डेंगू की जांच NS1 एंटीजन टेस्ट डेंगू IgM/IgG टेस्ट कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) टायफाइड की जांच ब्लड कल्चर टायफाइड एंटीबॉडी टेस्ट CBC और अन्य जांच वायरल सर्दी-जुकाम लक्षणों का मूल्यांकन शारीरिक जांच जरूरत पड़ने पर अन्य जांच मानसून में इन 7 उपायों से करें बचाव घर के आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरों से बचाव के लिए रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। पूरे बाजू के कपड़े पहनें। केवल साफ और सुरक्षित पानी पिएं। ताजा और स्वच्छ भोजन करें। खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं। बुखार होने पर स्वयं दवा लेने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें। निष्कर्ष मानसून के दौरान होने वाले हर बुखार को सामान्य वायरल मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। यदि तेज बुखार, शरीर में असहनीय दर्द, पेट संबंधी परेशानी या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। समय पर सही निदान और उपचार से डेंगू और टायफाइड जैसी गंभीर बीमारियों से होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है। नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार के बुखार या गंभीर लक्षण होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Monsoon Diseases
बरसात में होने वाली 10 आम बीमारियां, लक्षण और बचाव के आसान उपाय

नई दिल्ली, एजेंसियां। मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान पानी जमा होने, नमी बढ़ने और दूषित भोजन एवं पानी के कारण संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं कि बरसात में कौन-कौन सी बीमारियां सबसे ज्यादा होती हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है।   1. डेंगू   लक्षण   तेज बुखार सिरदर्द आंखों के पीछे दर्द शरीर और जोड़ों में तेज दर्द त्वचा पर लाल चकत्ते बचाव   घर के आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करें। पूरे बाजू के कपड़े पहनें। 2. मलेरिया  लक्षण   तेज बुखार ठंड लगना कंपकंपी पसीना आना कमजोरी बचाव   साफ-सफाई रखें। मच्छरों से बचाव करें। पानी जमा न होने दें। 3. चिकनगुनिया  लक्षण   तेज बुखार जोड़ों में असहनीय दर्द सिरदर्द शरीर पर दाने बचाव   मच्छरों से बचें। घर और आसपास सफाई रखें। 4. वायरल फीवर लक्षण   बुखार गले में दर्द खांसी सिरदर्द कमजोरी बचाव   भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदलें। पर्याप्त आराम करें। गर्म पानी पिएं। 5. टाइफाइड  लक्षण   लगातार बुखार पेट दर्द भूख कम लगना कमजोरी बचाव   केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं। बाहर का दूषित भोजन खाने से बचें। हाथ धोने की आदत रखें। 6. हैजा  लक्षण   बार-बार दस्त उल्टी शरीर में पानी की कमी कमजोरी बचाव   स्वच्छ पानी पिएं। साफ-सुथरा भोजन करें। ORS का उपयोग करें और समय पर डॉक्टर से मिलें। 7. फूड पॉइजनिंग लक्षण   उल्टी दस्त पेट दर्द बुखार बचाव   बासी भोजन न खाएं। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें। फल और सब्जियां अच्छी तरह धोकर खाएं। 8. त्वचा संक्रमण  लक्षण   खुजली लाल चकत्ते फंगल इंफेक्शन दाद बचाव   शरीर को सूखा रखें। भीगे कपड़े तुरंत बदलें। साफ कपड़े पहनें। 9. आंखों का संक्रमण  लक्षण   आंख लाल होना पानी आना जलन खुजली बचाव   आंखों को बार-बार न छुएं। साफ तौलिया इस्तेमाल करें। संक्रमित व्यक्ति की चीजें साझा न करें। 10. सर्दी-खांसी और फ्लू लक्षण   नाक बहना खांसी गले में दर्द हल्का बुखार बचाव   बारिश में भीगने से बचें। गर्म पेय पदार्थ लें। हाथों की सफाई का ध्यान रखें। बरसात में स्वस्थ रहने के 10 जरूरी टिप्स केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं। बाहर का कटा हुआ फल और स्ट्रीट फूड कम खाएं। बारिश में भीगने के बाद तुरंत नहाकर सूखे कपड़े पहनें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। ताजा और गर्म भोजन करें। हाथों को साबुन से बार-बार धोएं। पर्याप्त नींद लें और नियमित व्यायाम करें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। बुखार, लगातार दस्त, सांस लेने में तकलीफ या अन्य गंभीर लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।   किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?   छोटे बच्चे गर्भवती महिलाएं बुजुर्ग मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज हृदय रोगी कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग

abhishek singh जून 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0