फुटबॉल

FIFA World Cup 2026 halftime show featuring BTS and global artists during the final, sparking debate over the extended break.
फीफा विश्व कप 2026 फाइनल का हाफटाइम शो बना बहस का मुद्दा, 27 मिनट के ब्रेक पर उठे सवाल

फीफा विश्व कप 2026 का फाइनल मुकाबला सिर्फ मैदान पर हुए रोमांच के लिए ही नहीं, बल्कि अपने भव्य हाफटाइम शो को लेकर भी चर्चा में है। पहली बार विश्व कप फाइनल के दौरान आधिकारिक हाफटाइम एंटरटेनमेंट शो आयोजित किया गया, जिसमें दुनिया के कई मशहूर कलाकारों ने प्रस्तुति दी। हालांकि शानदार प्रदर्शन के बावजूद 27 मिनट से अधिक लंबे हाफटाइम ब्रेक ने फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है। पूर्व खिलाड़ियों और प्रशंसकों का एक वर्ग इसे फुटबॉल की परंपरा के खिलाफ मान रहा है, जबकि कई लोग इसे खेल और मनोरंजन के आधुनिक मेल के रूप में देख रहे हैं। BTS की वापसी ने लूटी महफिल हाफटाइम शो का सबसे बड़ा आकर्षण दक्षिण कोरिया के लोकप्रिय के-पॉप ग्रुप BTS की वापसी रही। सैन्य सेवा पूरी करने के बाद समूह पहली बार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक साथ नजर आया। सातों सदस्यों ने अपने लोकप्रिय गीत 'Dynamite' पर ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुति दी। वर्ल्ड कप थीम वाली लाल पोशाकों में सजे कलाकारों ने स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों और दुनियाभर के करोड़ों फुटबॉल प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कई अंतरराष्ट्रीय सितारों ने बढ़ाई शो की चमक हाफटाइम शो में मैडोना, जस्टिन बीबर, शकीरा, बर्ना बॉय समेत कई वैश्विक कलाकारों ने भी प्रस्तुति दी। फाइनल मुकाबले की शुरुआत अमेरिकी गायिका जेनिफर हडसन द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत करने से हुई। इसके बाद हॉलीवुड अभिनेता टॉम क्रूज ने दर्शकों को संबोधित करते हुए फुटबॉल को दुनिया को जोड़ने वाला खेल बताया। इटली की मशहूर गायिका लौरा पॉसिनी ने भी इस आयोजन को अपने करियर के सबसे यादगार अनुभवों में से एक बताया। उन्होंने रॉबी विलियम्स के साथ मंच साझा करने को बेहद खास पल बताया। 27 मिनट का ब्रेक बना विवाद की वजह जहां हाफटाइम शो की भव्यता की सराहना हुई, वहीं इसका लंबा समय विवाद का कारण बन गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फाइनल मैच के दौरान हाफटाइम ब्रेक 27 मिनट 22 सेकंड तक चला, जबकि इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (IFAB) के नियमों के अनुसार सामान्य तौर पर हाफटाइम इंटरवल 15 मिनट का होता है। लंबे ब्रेक को लेकर कई फुटबॉल विशेषज्ञों ने सवाल उठाए कि इससे खिलाड़ियों की लय और मैच की गति प्रभावित हो सकती है। वेन रूनी ने जताई नाराजगी इंग्लैंड के पूर्व कप्तान वेन रूनी ने हाफटाइम शो के प्रारूप पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें प्रस्तुति देने वाले कई कलाकार पसंद हैं, लेकिन विश्व कप फाइनल का मुख्य आकर्षण फुटबॉल होना चाहिए। रूनी की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ प्रशंसकों का मानना है कि विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में खेल को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जबकि अन्य लोगों ने इस तरह के शो को वैश्विक दर्शकों को जोड़ने और आयोजन को अधिक आकर्षक बनाने वाला कदम बताया। खेल और मनोरंजन के बीच संतुलन पर चर्चा फीफा विश्व कप 2026 का यह हाफटाइम शो खेल आयोजनों में मनोरंजन की बढ़ती भूमिका का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, लंबे इंटरवल को लेकर उठे सवाल यह भी दिखाते हैं कि भविष्य में फीफा को दर्शकों के मनोरंजन और खेल की मूल भावना के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।  

surbhi जुलाई 20, 2026 0
Argentina football team and Lionel Messi facing intense competition as fans debate their FIFA World Cup 2026 journey.
FIFA World Cup 2026: आखिर क्यों अब अर्जेंटीना की हार देखना चाहता है फुटबॉल जगत? जानिए बदलती सोच की वजह

एक समय था जब पूरी दुनिया लियोनेल मेसी को विश्व कप जीतते देखना चाहती थी। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना के मैदान पर उतरते ही बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रशंसक उसकी हार की कामना करते नजर आते हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि अर्जेंटीना के खिलाफ बढ़ती आलोचना का सबसे बड़ा कारण उसकी लगातार मिल रही सफलता है। फुटबॉल में अक्सर अंडरडॉग टीमों को समर्थन मिलता है, लेकिन जब वही टीम लगातार खिताब जीतने लगती है तो उसके विरोधियों की संख्या भी बढ़ जाती है। मेसी की अधूरी कहानी से विश्व विजेता बनने तक कई वर्षों तक लियोनेल मेसी को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी माना गया, लेकिन उनके नाम विश्व कप नहीं होने की बात हमेशा चर्चा में रहती थी। 2014 विश्व कप फाइनल में जर्मनी से हार, फिर 2015 और 2016 कोपा अमेरिका फाइनल में लगातार हार ने मेसी और अर्जेंटीना के प्रति दुनिया की सहानुभूति और बढ़ा दी थी। यहां तक कि जब मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने का फैसला किया था, तब विरोधी टीमों के प्रशंसकों ने भी उनकी वापसी की अपील की थी। लेकिन इसके बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 2021 में कोपा अमेरिका 2022 में फाइनलिसिमा 2022 फीफा विश्व कप जैसे बड़े खिताब जीतकर अर्जेंटीना ने दुनिया की सबसे सफल टीमों में फिर से अपनी जगह बना ली। सफलता के साथ बढ़ी आलोचना विश्व कप जीतने के बाद अर्जेंटीना की हर बड़ी जीत पर सवाल उठने लगे। कतर विश्व कप के दौरान मिले पेनल्टी फैसलों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस होती रही। कई लोगों ने रेफरी के फैसलों पर सवाल उठाए और VAR से जुड़े निर्णयों को लेकर भी विवाद खड़े किए। हालांकि फुटबॉल इतिहास में लगभग हर विश्व चैंपियन टीम किसी न किसी विवाद का हिस्सा रही है, लेकिन अर्जेंटीना की जीतों पर अपेक्षाकृत अधिक चर्चा देखने को मिली। एमिलियानो मार्टिनेज भी बने विवादों का केंद्र अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज भी अक्सर अपने जश्न और व्यवहार को लेकर चर्चा में रहते हैं। उनका आत्मविश्वास और विरोधी खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की शैली कई प्रशंसकों को पसंद आती है, जबकि कई लोग इसे खेल भावना के खिलाफ मानते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि फुटबॉल में पहले भी कई बड़े खिलाड़ियों और कोचों ने इसी तरह का आक्रामक रवैया अपनाया है, लेकिन अर्जेंटीना के खिलाड़ियों को लेकर प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत अधिक तीखी दिखाई देती है। आलोचना और जिम्मेदारी दोनों जरूरी हालांकि अर्जेंटीना पूरी तरह आलोचना से परे नहीं है। 2024 कोपा अमेरिका के बाद कुछ खिलाड़ियों पर नस्लभेदी नारे लगाने के आरोप लगे थे, जिसकी दुनिया भर में आलोचना हुई थी। इस मामले में जांच भी शुरू की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी विशेष घटना में शामिल खिलाड़ियों की आलोचना होना उचित है, लेकिन पूरी टीम या उसके समर्थकों को उसी नजरिए से देखना सही नहीं माना जा सकता। अब अंडरडॉग नहीं, सबसे बड़ी चुनौती है अर्जेंटीना फुटबॉल में प्रशंसक अक्सर उन टीमों का समर्थन करते हैं जो लंबे समय से खिताब जीतने का इंतजार कर रही हों। लेकिन अर्जेंटीना अब उस श्रेणी में नहीं आता। मौजूदा विश्व चैंपियन होने के कारण वह हर टूर्नामेंट में सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल रहता है। इंग्लैंड, फ्रांस और स्पेन जैसी टीमें अपना सपना पूरा करना चाहती हैं, लेकिन उनके रास्ते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक अर्जेंटीना है। यही वजह है कि अब कई फुटबॉल प्रेमी अर्जेंटीना को हराने वाली टीम का समर्थन करते दिखाई देते हैं। चैंपियन बनने की यही है कीमत खेल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी टीम के लिए लगातार सफलता अपने साथ नई चुनौतियां भी लेकर आती है। जब कोई टीम संघर्ष कर रही होती है तो उसे सहानुभूति मिलती है, लेकिन जब वही टीम बार-बार ट्रॉफी जीतने लगती है तो उस पर सवाल भी बढ़ने लगते हैं। अर्जेंटीना की मौजूदा स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। कभी जिसे पूरी दुनिया मेसी के लिए विश्व कप जीतते देखना चाहती थी, आज उसी टीम को हराने की उम्मीद कई प्रशंसक कर रहे हैं। यही सफल चैंपियन बनने की सबसे बड़ी कीमत भी मानी जाती है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Lamine Yamal speaking at FIFA World Cup 2026 press conference with a message against racism and for football unity.
FIFA World Cup 2026: 19वें जन्मदिन पर Lamine Yamal का नस्लवाद के खिलाफ बड़ा संदेश, कहा- 'फुटबॉल लोगों को जोड़ने के लिए है'

स्पेन के युवा फुटबॉल स्टार लामिन यामाल ने अपने 19वें जन्मदिन पर सिर्फ हीरों से जड़ा नेकलेस पहनकर ही सुर्खियां नहीं बटोरीं, बल्कि नस्लवाद और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एक मजबूत संदेश देकर भी सबका ध्यान खींचा। फ्रांस के खिलाफ फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यामाल ने कहा कि फुटबॉल का असली उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि उन्हें बांटना। जन्मदिन पर खुद को दिया खास तोहफा सेमीफाइनल मुकाबले से एक दिन पहले टेक्सास में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यामाल व्हाइट गोल्ड और डायमंड से बने शानदार नेकलेस के साथ पहुंचे। जब उनसे पूछा गया कि यह जन्मदिन का उपहार किसने दिया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह किसी और का नहीं, बल्कि खुद का दिया हुआ गिफ्ट है। यामाल ने कहा, "यह मुझे किसी ने गिफ्ट नहीं किया। मैंने इसे खुद खरीदा है। यह मेरी तरफ से मेरे लिए तोहफा है।" उनका यह जवाब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। नस्लवाद पर दिया एकता का संदेश प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यामाल से हाल ही में फ्रांस की बहुसांस्कृतिक टीम को लेकर उठे राजनीतिक विवाद पर सवाल पूछा गया। हाल ही में स्पेन के पूर्व प्रधानमंत्री मारियानो राजोय की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें फ्रांस की टीम की विविधता पर सवाल उठाए गए थे। इस पर यामाल ने बिना किसी विवाद को बढ़ाए बेहद संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल का मकसद लोगों को एकजुट करना है। फ्रांस और स्पेन दोनों अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों के एकीकरण की मिसाल हैं। ऐसे में किसी की टिप्पणी पर चर्चा करने से ज्यादा जरूरी यह है कि खेल लोगों को जोड़ने का काम करे। विविधता की मिसाल हैं यामाल लामिन यामाल खुद भी विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता मोरक्को से हैं, जबकि उनकी मां इक्वेटोरियल गिनी मूल की हैं। ऐसे में उनका बयान आधुनिक और समावेशी समाज की सोच को दर्शाता है। छोटे भाई की वायरल लोकप्रियता पर भी बोले यामाल ने अपने छोटे भाई केयने का भी जिक्र किया, जो स्पेन के मैचों के दौरान स्टेडियम में अपनी मस्तीभरी हरकतों की वजह से सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि उनके भाई को खुद भी नहीं पता कि वह इंटरनेट पर वायरल हो चुके हैं। कैमरा देखते ही वह वही शरारतें करते हैं जो घर पर करते हैं और उन्हें टीवी पर देखकर उन्हें भी खुशी होती है। गोल नहीं, टीम की जीत ज्यादा अहम पूरे टूर्नामेंट में अब तक सिर्फ एक गोल करने को लेकर पूछे गए सवाल पर भी यामाल बिल्कुल शांत नजर आए। उन्होंने कहा कि हर टूर्नामेंट अलग होता है और उनके लिए व्यक्तिगत आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण टीम की सफलता है। यामाल का कहना था कि जब तक स्पेन जीत रहा है, उन्हें अपने गोलों की संख्या की चिंता नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम आगे बढ़ेगी और उन्हें गोल करने के और अवसर मिलेंगे। फ्रांस के खिलाफ रोमांचक मुकाबले की उम्मीद स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाले सेमीफाइनल को लेकर यामाल ने कहा कि दोनों टीमें आक्रमण और बचाव में मजबूत हैं, इसलिए मुकाबला बेहद संतुलित और रोमांचक रहने वाला है। उनके अनुसार यह वही मैच है जिसका दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। मैदान के बाहर भी दिखी परिपक्व सोच महज 19 साल की उम्र में यामाल ने जिस आत्मविश्वास और परिपक्वता के साथ नस्लवाद, राजनीति और खेल की भूमिका पर अपनी बात रखी, उसने यह साफ कर दिया कि वह केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि मैदान के बाहर भी नई पीढ़ी के प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
SSB personnel detain an American citizen near the India-Nepal border in Maharajganj after he was allegedly found attempting to cross without a valid passport or travel documents.
7 महीने बिना पासपोर्ट भारत में रहा अमेरिकी नागरिक, नेपाल भागने की कोशिश में SSB ने पकड़ा

महराजगंज: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने एक अमेरिकी नागरिक को बिना वैध पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों के नेपाल में प्रवेश करने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह पिछले करीब सात महीने से बिना पासपोर्ट के भारत में रह रहा था। सुरक्षा एजेंसियां अब उसके भारत आने के पूरे घटनाक्रम और गतिविधियों की जांच कर रही हैं। नेपाल सीमा पार करने की कोशिश में पकड़ा गया एसएसबी की 22वीं बटालियन रविवार को नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान सोनौली थाना क्षेत्र के मैनिहवा इलाके में सीमा स्तंभ संख्या 516 के पास एक विदेशी नागरिक नेपाल की ओर बढ़ता दिखाई दिया। जवानों ने उसे रोककर दस्तावेज मांगे, लेकिन उसके पास कोई वैध पासपोर्ट या यात्रा संबंधी दस्तावेज नहीं मिला। पूछताछ में उसने अपना नाम जॉर्डन ब्राउन (36) बताया और खुद को अमेरिका के कैलिफोर्निया का निवासी बताया। जवानों को देखकर भागने लगा महराजगंज के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के अनुसार, जब एसएसबी जवानों ने उससे पूछताछ शुरू की तो वह मौके से भागने का प्रयास करने लगा। हालांकि, जवानों ने तुरंत उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। थाईलैंड में पासपोर्ट खोने का दावा पुलिस पूछताछ में जॉर्डन ब्राउन ने बताया कि वह टूरिस्ट वीजा पर थाईलैंड गया था, जहां उसका पासपोर्ट खो गया। उसने यह भी दावा किया कि वह पहले अमेरिकी नौसेना (US Navy) में अधिकारी के रूप में कार्य कर चुका है। हालांकि, पुलिस उसके सभी दावों का सत्यापन कर रही है। समुद्र के रास्ते भारत पहुंचने का दावा पूछताछ में ब्राउन ने बताया कि वह थाईलैंड से समुद्री मार्ग के जरिए श्रीलंका पहुंचा और वहां से 2 नवंबर 2025 को समुद्र के रास्ते भारत आया। इसके बाद वह लंबे समय तक गोवा में रहा। बाद में वह गोवा से बेंगलुरु और फिर उत्तर प्रदेश के सोनौली बॉर्डर पहुंचा, जहां से वह नेपाल में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। सात महीने तक बिना पासपोर्ट कैसे रहा? जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जॉर्डन ब्राउन करीब सात महीने तक बिना वैध पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों के भारत में कैसे रहा और विभिन्न राज्यों में आवाजाही कैसे करता रहा। पुलिस अब उसके संपर्कों, यात्रा मार्ग और भारत में रहने की पूरी अवधि की जांच कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं पूछताछ फिलहाल अमेरिकी नागरिक को हिरासत में रखकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके दावे कितने सही हैं और भारत में उसके रहने का वास्तविक उद्देश्य क्या था। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Kylian Mbappe and Lamine Yamal ahead of the FIFA World Cup 2026 semifinal between France and Spain.
FIFA World Cup 2026: फ्रांस और स्पेन के बीच सेमीफाइनल महामुकाबला आज, Mbappe और Yamal पर रहेंगी सबकी नजरें

FIFA World Cup 2026 का पहला सेमीफाइनल फुटबॉल प्रशंसकों के लिए किसी महायुद्ध से कम नहीं होने वाला है। मौजूदा टूर्नामेंट की दो सबसे मजबूत टीमों फ्रांस और स्पेन का आमना-सामना आज अमेरिका के टेक्सास स्थित डलास स्टेडियम में होगा। इस मुकाबले की विजेता टीम सीधे विश्व कप फाइनल में अपनी जगह पक्की करेगी। यह मुकाबला केवल दो टीमों के बीच नहीं, बल्कि दो अलग-अलग फुटबॉल शैलियों की भी टक्कर माना जा रहा है। एक ओर फ्रांस की तेज़ और आक्रामक खेल शैली है, तो दूसरी ओर स्पेन का गेंद पर नियंत्रण और संयमित खेल। Mbappe बनाम Yamal पर टिकी रहेंगी निगाहें सेमीफाइनल का सबसे बड़ा आकर्षण फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे और स्पेन के युवा सनसनी लामिन यामाल होंगे। एम्बाप्पे इस विश्व कप में शानदार फॉर्म में हैं और अब तक 8 गोल और 3 असिस्ट के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। वहीं 18 वर्षीय यामाल अपने शानदार प्रदर्शन से स्पेन को लगातार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। फुटबॉल विशेषज्ञ इस मुकाबले को मौजूदा दौर के सुपरस्टार और भविष्य के सबसे बड़े सितारे के बीच की भिड़ंत भी मान रहे हैं। फ्रांस की ताकत है तेज़ आक्रमण कोच डिडिएर डेशां की टीम पूरे टूर्नामेंट में अपनी तेज़ काउंटर अटैक रणनीति के लिए जानी गई है। टीम के पास एम्बाप्पे के अलावा- उस्मान डेम्बेले माइकल ओलिसे डिज़िरे डुए जैसे आक्रामक खिलाड़ी मौजूद हैं, जो कुछ ही मिनटों में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। फ्रांस गेंद पर लंबे समय तक कब्जा रखने की बजाय मौके मिलने पर तेज़ हमले करना पसंद करता है। स्पेन का मजबूत डिफेंस और मिडफील्ड दूसरी ओर स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में संतुलित प्रदर्शन किया है। टीम के मिडफील्ड में- रोड्री पेड्री ने खेल की गति को नियंत्रित किया है, जबकि डिफेंस में- आयमेरिक लापोर्ट पाउ कुबार्सी मार्क कुकुरेला की तिकड़ी विपक्षी टीमों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक केवल एक गोल ही खाया है। हेड-टू-हेड रिकॉर्ड अब तक दोनों टीमों के बीच कुल 38 मुकाबले खेले गए हैं। स्पेन की जीत: 18 फ्रांस की जीत: 13 ड्रॉ: 7 हाल के वर्षों में स्पेन का पलड़ा भारी रहा है। उसने फ्रांस को यूरो 2024 और पिछले वर्ष UEFA Nations League सेमीफाइनल में भी हराया था। मैच का फैसला कहां हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि मुकाबले का परिणाम केवल एम्बाप्पे या यामाल के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करेगा। यदि स्पेन के रोड्री और पेड्री मिडफील्ड पर नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो मैच उनकी गति के अनुसार आगे बढ़ सकता है। वहीं यदि फ्रांस गेंद छीनकर तेज़ काउंटर अटैक करने में सफल रहता है, तो एम्बाप्पे और उनके साथी खिलाड़ी स्पेन के डिफेंस को मुश्किल में डाल सकते हैं। दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग इलेवन फ्रांस (4-2-3-1) माइक मेग्नां; जूल्स कुंडे, दायो उपामेकानो, विलियम सलीबा, लुकास डिग्ने; औरेलियन त्चौमेनी, एड्रियन राबियो; उस्मान डेम्बेले, माइकल ओलिसे, डिज़िरे डुए; किलियन एम्बाप्पे। स्पेन (4-3-3) उनाई सिमोन; पेड्रो पोरो, आयमेरिक लापोर्ट, पाउ कुबार्सी, मार्क कुकुरेला; मार्टिन जुबिमेंडी, रोड्री, पेड्री; लामिन यामाल, मिकेल ओयारजाबाल, निको विलियम्स। भारत में कब और कहां देखें मैच? फ्रांस और स्पेन के बीच FIFA World Cup 2026 का पहला सेमीफाइनल भारतीय समयानुसार 15 जुलाई को रात 12:30 बजे शुरू होगा। मैच का सीधा प्रसारण Unite8 Sports पर देखा जा सकेगा, जबकि लाइव स्ट्रीमिंग ZEE5 ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। फाइनल की दौड़ में कौन मारेगा बाजी? फ्रांस लगातार तीसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने का इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेगा। वहीं स्पेन 2010 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल में जगह बनाने की कोशिश करेगा। ऐसे में दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला टूर्नामेंट का सबसे रोमांचक मैच साबित हो सकता है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Brazil football players use smart tracking technology to monitor fitness and performance before FIFA World Cup 2026
FIFA World Cup 2026: खिलाड़ियों की फिटनेस पर ब्राजील की पैनी नजर, स्मार्ट टेक्नोलॉजी से बना रही जीत की रणनीति

विश्व कप अभियान से पहले तकनीक का सहारा ले रही है ब्राजील टीम पांच बार की विश्व चैंपियन टीम Brazil national football team शनिवार को न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में अपने पहले मुकाबले में Morocco national football team का सामना करेगी। लंबे समय से विश्व कप खिताब का इंतजार कर रही ब्राजील टीम इस बार मैदान के साथ-साथ आधुनिक तकनीक पर भी बड़ा भरोसा जता रही है। टीम के मुख्य कोच Carlo Ancelotti और उनका सपोर्ट स्टाफ खिलाड़ियों की फिटनेस, प्रदर्शन और रिकवरी पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक प्लेयर ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। क्लबों से भी लगातार जुटाया जाता है खिलाड़ियों का डेटा ब्राजील टीम के स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख Guilherme Passos के अनुसार, जब खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के साथ नहीं होते, तब भी उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के क्लब नियमित रूप से ट्रैकिंग सिस्टम से जुड़ी जानकारी साझा करते हैं। इस डेटा को राष्ट्रीय टीम के डेटाबेस में जोड़ा जाता है, जिससे कोचिंग स्टाफ खिलाड़ियों की फिटनेस और मैच तैयारी का लगातार आकलन कर सकता है। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि खिलाड़ी किस स्थिति में हैं और उनकी शारीरिक तैयारी का स्तर क्या है। स्मार्ट वेस्ट से मिलती है खिलाड़ियों की हर गतिविधि की जानकारी ब्राजील के खिलाड़ी विशेष "स्मार्ट वेस्ट" पहनते हैं, जिनमें कई सेंसर लगे होते हैं। ये सेंसर खिलाड़ियों की स्प्रिंट गति, हृदय गति, थकान के स्तर, रिकवरी प्रक्रिया और मैदान पर उनकी गतिविधियों से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करते हैं। इस जानकारी का विश्लेषण स्पोर्ट्स साइंस टीम करती है और फिर कोचिंग स्टाफ को खिलाड़ियों की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया जाता है। इससे खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और मैच रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है। तेज खिलाड़ियों के लिए अलग रणनीति बनाते हैं कोच पासोस के मुताबिक, यदि कोई खिलाड़ी बेहद तेज गति से दौड़ने वाला है, तो उसकी मांसपेशियों की रिकवरी पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है। ऐसे खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग और आराम की योजना अलग बनाई जाती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी खिलाड़ी की स्पीड उसकी सबसे बड़ी ताकत है, तो कोच उसे ऐसी रणनीति में इस्तेमाल कर सकते हैं जहां जवाबी हमले (काउंटर अटैक) अधिक प्रभावी हों। इस तरह डेटा केवल फिटनेस नहीं बल्कि खेल की रणनीति तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। केवल आंकड़े नहीं, खिलाड़ियों की भूमिका भी होती है अहम पासोस ने एक दिलचस्प उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि एक खिलाड़ी मैच में केवल छह किलोमीटर दौड़ रहा था, जबकि बाकी खिलाड़ी लगभग दोगुनी दूरी तय कर रहे थे। शुरुआती नजर में ऐसा लग सकता था कि वह खिलाड़ी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर रहा है। हालांकि, जब कोचिंग स्टाफ ने वीडियो फुटेज और सामरिक स्थिति का विश्लेषण किया तो पता चला कि वह खिलाड़ी हमेशा सही स्थान पर मौजूद रहता था और टीम की रणनीति के अनुसार बेहद प्रभावी भूमिका निभा रहा था। इससे स्पष्ट हुआ कि केवल दौड़ने की दूरी ही किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन का सही पैमाना नहीं होती। अंतिम फैसला डेटा नहीं, कोच की सोच तय करती है स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख ने यह भी कहा कि कई बार किसी खिलाड़ी का शारीरिक डेटा बेहद शानदार होता है, लेकिन इसके बावजूद कोच उसे टीम में शामिल नहीं करते। इसका कारण यह होता है कि तकनीकी क्षमता, मानसिक मजबूती और टीम की खेल शैली में फिट बैठना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक खिलाड़ियों से जुड़ी अहम जानकारी उपलब्ध कराती है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण काम उस डेटा को समझना और उसे मैदान पर उपयोगी फैसलों में बदलना होता है। यही वजह है कि विश्लेषकों और कोचों की भूमिका आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi playing football with children during his Gangtok visit in Sikkim
गंगटोक में बच्चों संग फुटबॉल खेलते नज़र आए पीएम मोदी, सिक्किम दौरे की तस्वीरें हुईं वायरल

सिक्किम की सुबह में दिखा पीएम मोदी का अलग अंदाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों दो दिवसीय सिक्किम दौरे पर हैं। मंगलवार सुबह राजधानी गंगटोक में उनका एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। पीएम मोदी ने स्थानीय बच्चों और युवाओं के साथ फुटबॉल खेला। इस दौरान उन्होंने मैदान में जमकर मस्ती की और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने इस खास पल की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कीं, जो देखते ही देखते वायरल हो गईं। सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरें पीएम मोदी ने तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, "गंगटोक की एक खूबसूरत सुबह, सिक्किम में अपने नन्हे दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलने का आनंद ही अलग है।" एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, "इन ऊर्जावान युवाओं के साथ फुटबॉल का शानदार सत्र रहा।" प्रधानमंत्री की इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर लोगों का खूब प्यार मिल रहा है। सोमवार शाम गंगटोक पहुंचे थे प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार शाम गंगटोक पहुंचे थे। हेलीपैड से लोकभवन तक उनका भव्य रोड शो आयोजित किया गया। सड़क के दोनों ओर हजारों लोग पीएम मोदी की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। पूरे शहर में उत्साह और उत्सव का माहौल देखने को मिला। आज इन कार्यक्रमों में होंगे शामिल मंगलवार को प्रधानमंत्री गंगटोक स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा करेंगे। यहां सिक्किम की समृद्ध जैव विविधता और पुष्प विरासत को प्रदर्शित करने के लिए 'स्वर्ण जयंती मैत्री मंजरी पार्क' विकसित किया गया है। इसके बाद पीएम मोदी पालजोर स्टेडियम में सिक्किम के 50वें स्थापना दिवस के समापन समारोह में शामिल होंगे। 4 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का करेंगे शुभारंभ अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन योजनाओं से राज्य के बुनियादी ढांचे, पर्यटन और कनेक्टिविटी को नई गति मिलने की उम्मीद है। पिछले वर्ष मौसम बना था बाधा सिक्किम ने पिछले वर्ष अपने स्थापना के 50 वर्ष पूरे किए थे। उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी को शामिल होना था, लेकिन खराब मौसम के कारण वह गंगटोक नहीं पहुंच सके थे। उस समय उन्होंने पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों को संबोधित किया था।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0