आईटी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार को मिला जोरदार सहारा मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार ने बुधवार को शानदार बढ़त के साथ कारोबार का समापन किया। बीएसई सेंसेक्स 889 अंक की छलांग लगाकर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 24,250 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। आईटी, बैंकिंग और चुनिंदा ब्लूचिप शेयरों में मजबूत खरीदारी के चलते बाजार में पूरे दिन सकारात्मक माहौल बना रहा। निवेशकों की संपत्ति में बड़ा इजाफा बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹4 लाख करोड़ का इजाफा हुआ। मजबूत तिमाही नतीजों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। आईटी सेक्टर ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती दिनभर के कारोबार में आईटी कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा चमके। इसके अलावा बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और एफएमसीजी सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियों के बेहतर वित्तीय नतीजों और विदेशी निवेश के कारण बाजार में तेजी बनी रही। आगे निवेशकों की नजर इन संकेतों पर बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले, वैश्विक आर्थिक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि विदेशी निवेश और कॉर्पोरेट आय मजबूत बनी रहती है, तो बाजार में सकारात्मक रुख जारी रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 360 अंक से अधिक टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी गिरावट के साथ 23,869.60 के स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर घरेलू बाजार पर साफ देखने को मिला। बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयरों में बिकवाली रही हावी कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी, ऑटो, फार्मा और मेटल सेक्टर के शेयरों में दबाव बना रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की सतर्क रणनीति और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। हालांकि कुछ चुनिंदा एफएमसीजी और डिफेंस शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, लेकिन इससे बाजार को बड़ी राहत नहीं मिल सकी। कच्चे तेल और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी बाजार की नजर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव निकट भविष्य में निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक आर्थिक संकेत अगले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय करेंगे। विश्लेषकों के अनुसार फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में 21 जुलाई को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली के दबाव के चलते बीएसई सेंसेक्स 238 अंक गिरकर 77,470 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 51 अंक फिसलकर 24,188 के स्तर पर आ गया। दिनभर के कारोबार में सरकारी बैंक और आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांकों की चाल कमजोर रही। SBI फंड्स मैनेजमेंट की मजबूत बाजार में एंट्री कमजोर बाजार के बावजूद SBI फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों ने शानदार शुरुआत की। कंपनी का शेयर ₹574 के आईपीओ प्राइस के मुकाबले एनएसई पर 6.85% की बढ़त के साथ ₹613.30 पर सूचीबद्ध हुआ। वहीं, बीएसई पर यह ₹610 के स्तर पर लिस्ट हुआ, जो इश्यू प्राइस से 6.27% अधिक था। निवेशकों की मजबूत प्रतिक्रिया ने कंपनी की बाजार में सकारात्मक शुरुआत को दर्शाया। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख, अमेरिकी बाजार दबाव में एशियाई बाजारों में सोमवार को मिश्रित कारोबार देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 3.56% और जापान का निक्केई 3.26% की तेजी के साथ बंद हुआ, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग मामूली 0.04% की गिरावट में रहा। दूसरी ओर, 20 जुलाई को अमेरिकी शेयर बाजारों में कमजोरी रही। डाउ जोन्स 307 अंक यानी 0.59% गिरा, जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी बीते सात दिनों में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने शुद्ध रूप से ₹6,021 करोड़ के शेयर खरीदे, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) ने ₹6,439 करोड़ की बिकवाली की। पिछले 30 दिनों में भी डीआईआई की खरीदारी मजबूत रही, जबकि एफआईआई लगातार शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की खरीदारी बाजार को बड़ा सहारा दे रही है। हालांकि, निकट भविष्य में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और आगामी कॉरपोरेट नतीजों पर निर्भर रहेगी।
मुंबई, एजेंसियां। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार के बाद लगभग सपाट बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 1 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,186 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 5 अंक फिसलकर 24,072 पर आ गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंत में प्रमुख सूचकांकों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल्टी शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली दर्ज की गई, जबकि अन्य सेक्टरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। वैश्विक बाजारों का हाल वैश्विक बाजारों का असर भी घरेलू बाजार पर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में कारोबार मिश्रित रहा। हांगकांग का हैंगसेंग 1.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। वहीं, एक दिन पहले अमेरिकी बाजारों में मजबूती रही थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सभी बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। विदेशी निवेशकों (FII/FPI) ने गुरुवार को करीब 740 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 2,928 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को सहारा दिया। पिछले सात दिनों में डीआईआई ने 9,177 करोड़ रुपये और पिछले 30 दिनों में 41,028 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इसके मुकाबले एफआईआई लगातार बिकवाली करते रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर अब आगामी तिमाही नतीजों, वैश्विक आर्थिक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार ने आज मजबूत शुरुआत की। कारोबार के शुरुआती सत्र में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक चढ़कर 77,500 के ऊपर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 24,200 के स्तर को पार कर गया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में देखने को मिली। वित्तीय शेयरों ने दिखाई मजबूती बाजार की तेजी में HDFC Life, ICICI Prudential Life, ICICI Lombard और अन्य वित्तीय कंपनियों के शेयरों ने अहम भूमिका निभाई। पहली तिमाही के नतीजों की उम्मीद में निवेशकों ने इन शेयरों में जमकर खरीदारी की, जिससे बैंकिंग और फाइनेंशियल इंडेक्स में अच्छी बढ़त दर्ज हुई। वैश्विक संकेतों से मिला समर्थन विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में उम्मीद से कम महंगाई के आंकड़े आने के बाद वैश्विक बाजारों का माहौल सकारात्मक हुआ। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की आशंकाएं कम हुईं और भारतीय बाजार को भी मजबूती मिली। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर बनी हुई है। आईटी शेयरों पर रहा दबाव जहां बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में तेजी रही, वहीं कुछ आईटी शेयरों पर दबाव देखा गया। विदेशी टेक कंपनियों के कमजोर आउटलुक का असर भारतीय आईटी सेक्टर पर भी दिखाई दिया। इसके बावजूद व्यापक बाजार में खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते रहे।
मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। तीन कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद घरेलू बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 फीसदी टूटकर 77,054.94 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 158.95 अंक यानी 0.66 फीसदी की गिरावट के साथ 24,052.05 के स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 614.92 अंक तक फिसलकर 77,001.48 के निचले स्तर पर पहुंच गया। वित्तीय, ऑटो और आईटी शेयरों में बिकवाली दिनभर के कारोबार में वित्तीय, ऑटो, रियल एस्टेट और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। सेंसेक्स में शामिल एचसीएल टेक के शेयर 4.42 फीसदी तक टूटे। इसके अलावा बजाज फिनसर्व, इंटरग्लोब एविएशन, भारतीय स्टेट बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा तथा लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), सन फार्मा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स और इटरनल के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। सुरक्षित माने जाने वाले हेल्थकेयर, फार्मा, एफएमसीजी और चुनिंदा मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। कच्चा तेल महंगा, रुपया कमजोर वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.26 फीसदी बढ़कर 86.85 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया 54 पैसे टूटकर 96.22 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और आयात लागत बढ़ने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही जून में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई बढ़कर 9.87 फीसदी होने से भी बाजार का निवेशक भाव कमजोर रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 3,062.27 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रहा।
मुंबई, एजेंसियां। पिछले कारोबारी सत्र की भारी बिकवाली के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 550 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों का भरोसा लौटता नजर आया। एक दिन पहले आई थी बड़ी गिरावट बुधवार को वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली हुई थी। सेंसेक्स और निफ्टी में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा था। आज क्यों लौटी बाजार में तेजी? विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और निचले स्तरों पर निवेशकों की खरीदारी के चलते बाजार में रिकवरी देखने को मिली। अधिकांश सेक्टरों में खरीदारी रही, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। आईटी शेयरों पर बना दबाव हालांकि बाजार में तेजी रही, लेकिन आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया। तिमाही नतीजों से पहले कुछ प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला, जिससे आईटी इंडेक्स पर असर पड़ा। निवेशकों की नजर इन कारकों पर बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी। यही कारक बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं। आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रही, तो बाजार में रिकवरी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि, निवेशकों को उतार-चढ़ाव के बीच सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा और कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,677 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 581 अंक टूटकर 23,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए। बैंकिंग, एफएमसीजी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब दो प्रतिशत तक लुढ़क गए। प्रमुख कंपनियों में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोटक महिंद्रा बैंक और भारती एयरटेल के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट रही। निवेशकों को भारी नुकसान बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 470 लाख करोड़ रुपये रह गया। वहीं, बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स सूचकांक 27 प्रतिशत उछल गया, जो निवेशकों के बीच बढ़ी अनिश्चितता और डर को दर्शाता है। गिरावट की प्रमुख वजहें विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। साथ ही यूरोप और एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। विशेषज्ञों की सलाह बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकाल में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। हालांकि, भारत के मजबूत आर्थिक आधार और दीर्घकालिक निवेश संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों को घबराकर निर्णय लेने के बजाय सतर्कता के साथ लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
America-Pakistan News: अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) में पाकिस्तान की संभावित भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्लामाबाद की तीखी आलोचना की है। उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद और धार्मिक उत्पीड़न से जोड़ते हुए कहा कि दुनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान का अतीत क्या रहा है। शहबाज शरीफ की ईरान यात्रा पर उठाए सवाल सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में शहबाज शरीफ खामेनेई को एक महान नेता बताते दिखाई देते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्कॉट ने कहा कि पाकिस्तान की यह भूमिका केवल दिखावा है और इसे शांति प्रक्रिया का विश्वसनीय मध्यस्थ नहीं माना जा सकता। "दुनिया याद रखे पाकिस्तान की असली पहचान" रिक स्कॉट ने कहा कि दुनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान वही देश है, जहां अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन वर्षों तक छिपा रहा। उन्होंने पाकिस्तान पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाइयों के खिलाफ ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड वाला देश क्षेत्रीय शांति का नेतृत्व करने का दावा नहीं कर सकता। मध्यस्थता की भूमिका पर भी सवाल अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने के योग्य नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस्लामाबाद की नीतियां उसे निष्पक्ष भूमिका निभाने से रोकती हैं। स्कॉट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और उसके हर कदम का आकलन किया जा रहा है। ईरान के घटनाक्रम के बीच आया बयान रिक स्कॉट का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव तथा क्षेत्रीय कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। निवेशकों की सतर्कता और मेटल तथा रियल्टी सेक्टर में हुई बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 104 अंक गिरकर 78,181 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 32 अंक कमजोर होकर 24,399 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंतिम कारोबारी घंटों में बिकवाली का दबाव बढ़ने से बाजार संभल नहीं सका। मेटल और रियल्टी शेयरों पर दबाव मंगलवार के कारोबार में मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत और मुनाफावसूली के चलते निवेशकों ने इन सेक्टरों में बिकवाली की। इसके विपरीत IT और कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बनी रही, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला। आईटी शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ने से इस सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में दिनभर रहा उतार-चढ़ाव कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में कई बार तेजी और गिरावट का दौर देखने को मिला। हालांकि दिन के अंत में बाजार मामूली नुकसान के साथ बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आगामी कॉर्पोरेट तिमाही नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं। इसी कारण बाजार में सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल रहा है। एक दिन पहले बाजार में रही थी जोरदार तेजी गौरतलब है कि सोमवार, 6 जुलाई को शेयर बाजार ने शानदार बढ़त दर्ज की थी। उस दिन सेंसेक्स 521 अंक चढ़कर 78,285 और निफ्टी 160 अंक की तेजी के साथ 24,430 पर बंद हुआ था। लेकिन मंगलवार को मुनाफावसूली और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली के चलते बाजार की रफ्तार थम गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को लगातार दो दिनों की गिरावट के बाद मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 150 अंकों से अधिक उछलकर 76,600 के ऊपर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 23,900 के स्तर के पार कारोबार करता दिखा। ऑटो, फार्मा और मिडकैप शेयरों में खरीदारी से बाजार को समर्थन मिला। ऑटो और फार्मा शेयरों में जोरदार खरीदारी बाजार में सबसे अधिक तेजी ऑटो और फार्मा सेक्टर में देखने को मिली। जून महीने के वाहन बिक्री आंकड़ों की उम्मीद में ऑटो शेयरों में खरीदारी बढ़ी, जबकि फार्मा कंपनियों के शेयर भी मजबूती के साथ कारोबार करते रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी शुरुआती बढ़त दर्ज की गई। वैश्विक संकेतों पर निवेशकों की नजर विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और जुलाई महीने के मानसून का प्रदर्शन निवेशकों की चिंता का विषय बने हुए हैं। हालांकि बाजार में घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने सकारात्मक माहौल बनाए रखा। विशेषज्ञों की राय बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, कॉरपोरेट नतीजों और आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया है । बीएसई सेंसेक्स 200 अंकों से अधिक चढ़कर 77,000 के ऊपर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 ने 24,000 का स्तर पार कर लिया है। पिछले कारोबारी सत्र में हुई गिरावट के बाद आज बाजार में रिकवरी देखने को मिली है। बैंकिंग और ऑटो शेयरों में खरीदारी आज के कारोबार में HDFC Bank, Maruti Suzuki और अन्य बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HDFC Bank में प्रबंधन स्तर पर हुए बदलाव और Maruti Suzuki के शेयरों में करीब 3% की तेजी ने बाजार को मजबूती दी है। बैंकिंग इंडेक्स भी हरे निशान में कारोबार करता रहा। वैश्विक संकेतों से मिला सहारा एशियाई बाजारों में मजबूती, अमेरिकी टेक शेयरों में रिकवरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ। ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इन शेयरों पर रही खास नजर आज के कारोबार में HDFC Bank, Bajaj Auto, BPCL, Hindustan Unilever, Tata Motors, JSW Energy, Biocon, BHEL और City Union Bank जैसे शेयर निवेशकों के फोकस में रहे। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले सत्रों में इन शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर आगे क्या? विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों (FII) के निवेश और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि सकारात्मक माहौल बना रहा तो बाजार में तेजी आगे भी जारी रह सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शानदार वापसी दर्ज की। शुरुआती गिरावट के बाद मजबूत खरीदारी के दम पर बाजार लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक (0.32%) की बढ़त के साथ 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 82.30 अंक (0.34%) चढ़कर 24,168 के स्तर के पार पहुंच गया। सुबह दबाव में खुला बाजार, दिन में हुई तेज रिकवरी कारोबार की शुरुआत में बाजार लाल निशान में खुला था, जिसका कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणियां और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका रही। हालांकि, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों की चौतरफा खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी और शुरुआती दबाव पूरी तरह खत्म हो गया। सेक्टोरल प्रदर्शन रहा मिश्रित लेकिन मजबूत बाजार में अधिकतर सेक्टर हरे निशान में बंद हुए। रियल्टी, हेल्थकेयर, केमिकल्स और फार्मा सेक्टर ने तेजी को सबसे अधिक सपोर्ट दिया। बैंकिंग सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को स्थिरता प्रदान की। हालांकि, आईटी सेक्टर आज सबसे बड़ा पिछड़ने वाला क्षेत्र रहा, जहां भारी बिकवाली के कारण दबाव बना रहा। इन स्टॉक्स ने दिखाया दम कुछ प्रमुख शेयरों ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया। मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में करीब 6% की तेजी देखी गई, जबकि इंडिगो के शेयरों में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई। कच्चे तेल में गिरावट से मिला सपोर्ट बाजार की मजबूती का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी रहा। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को राहत मिली और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। सस्ते तेल और चुनिंदा खरीदारी ने बाजार को वैश्विक दबाव से बचाने में अहम भूमिका निभाई। लगातार पांचवें दिन की तेजी इस बात का संकेत है कि घरेलू बाजार की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और निवेशक अभी भी भारतीय इक्विटी में भरोसा बनाए हुए हैं।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ शुरुआत की। सकारात्मक वैश्विक संकेतों और ईरान-अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 300.03 अंक (0.39%) की बढ़त के साथ 76,564.36 अंक पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 75.15 अंक (0.32%) चढ़कर 23,929.05 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से रुपया भी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे मजबूत होकर 94.53 पर पहुंच गया। आईटी और फाइनेंस शेयरों ने दिखाई मजबूती बाजार की तेजी में आईटी और वित्तीय कंपनियों की अहम भूमिका रही। शुरुआती कारोबार में एचसीएल टेक और बजाज फाइनेंस के शेयरों में करीब दो-दो फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इन दिग्गज कंपनियों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली और निवेशकों का उत्साह बढ़ा। वेदांता डिमर्जर से खुली नई वैल्यू कॉर्पोरेट जगत में वेदांता समूह का डिमर्जर भी चर्चा का केंद्र रहा। समूह ने अपने कारोबार को अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित कर निवेशकों के लिए लगभग 20 प्रतिशत अतिरिक्त वैल्यू अनलॉक करने का दावा किया है। हालांकि, डिमर्जर के बाद सूचीबद्ध हुई नई कंपनियों के शेयर शुरुआती बढ़त बरकरार नहीं रख सके और कारोबार के दौरान उनमें कुछ गिरावट देखने को मिली। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्गठन की यह रणनीति लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बेहतर मूल्य सृजित कर सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में और कमी आती है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को शानदार शुरुआत करते हुए निवेशकों को राहत दी। वैश्विक स्तर पर सकारात्मक माहौल, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद तथा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। कारोबार के शुरुआती घंटों में बीएसई सेंसेक्स 850 अंकों से अधिक उछलकर करीब 74,700 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी लगभग 23,400 के स्तर के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की तेजी ने निवेशकों के मजबूत भरोसे का संकेत दिया। किन सेक्टर्स ने सबसे ज्यादा दम दिखाया? बाजार की इस रैली में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। रियल्टी सेक्टर सबसे बड़ा गेनर रहा, जबकि ऑटो, मीडिया और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। बैंकिंग शेयरों ने बाजार को मजबूत सहारा दिया, वहीं एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टरों में भी लगातार बढ़त बनी रही। हालांकि, आईटी सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा और इसमें केवल मामूली तेजी देखने को मिली। दुनियाभर के बाजारों का क्या है हाल ? वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने भी भारतीय बाजार की तेजी को बल दिया। एशियाई बाजारों में जापान का टोपिक्स इंडेक्स और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 उल्लेखनीय बढ़त के साथ कारोबार करते रहे। वहीं, हैंग सेंग फ्यूचर्स, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स भी हरे निशान में रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में दिनभर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली और आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना रहा। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स ने 74,544.24 अंक का उच्चतम और 73,807.30 अंक का न्यूनतम स्तर छुआ। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 13.84 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 74,360.01 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 10.95 अंक या 0.05 प्रतिशत चढ़कर 23,416.55 अंक पर बंद होने में सफल रहा। इन शेयरों ने संभाला बाजार सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाइटन, आईटीसी, टेक महिंद्रा, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक और इटरनल के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों ने बाजार को गिरावट से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएल टेक और अदाणी पोर्ट्स जैसे शेयर दबाव में रहे और नुकसान के साथ बंद हुए। एफआईआई की बिकवाली बनी चिंता बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को एफआईआई ने 5,616.56 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटी की बिक्री की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। आरबीआई के फैसले पर टिकी निगाहें विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार ने निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी दिखाई है, लेकिन निवेशकों की नजर अब शुक्रवार को आने वाले आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले पर है। यही फैसला आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और किसी बड़े संकेत का इंतजार कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।