नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में CKYC 2.0 (Central Know Your Customer 2.0) की नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को बार-बार KYC दस्तावेज जमा करने की परेशानी से राहत देना है। इस नई प्रणाली में ग्राहक की सत्यापित जानकारी एक केंद्रीय रजिस्ट्री में सुरक्षित रहेगी और उनकी सहमति के बाद बैंक, बीमा कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थान इसका उपयोग कर सकेंगे। एक ही KYC से कई वित्तीय सेवाओं का लाभ अभी तक अलग-अलग बैंक, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थानों में खाता खोलने या सेवा लेने के लिए अलग-अलग KYC प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। CKYC 2.0 के लागू होने के बाद ग्राहक की जानकारी केंद्रीय रिकॉर्ड से प्राप्त की जा सकेगी। इससे नया बैंक खाता खोलने, बीमा लेने या निवेश शुरू करने की प्रक्रिया तेज और आसान होने की उम्मीद है। ग्राहक की सहमति से साझा होगी जानकारी CKYC 2.0 में ग्राहक की गोपनीयता को ध्यान में रखा गया है। वित्तीय संस्थान ग्राहक की जानकारी तभी प्राप्त कर पाएंगे, जब ग्राहक इसकी अनुमति देगा। नई व्यवस्था में डेटा की गुणवत्ता जांचने के लिए रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़ा सिस्टम भी शामिल किया जा रहा है, जिससे गलत जानकारी और धोखाधड़ी की संभावना कम करने में मदद मिलेगी। बैंक और बीमा कंपनियां पहले जुड़ेंगी नई CKYC 2.0 व्यवस्था में शुरुआत में बैंक और बीमा कंपनियों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद म्यूचुअल फंड, ब्रोकरेज और कैपिटल मार्केट से जुड़े संस्थानों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इस पहल को RBI, SEBI और IRDAI जैसी वित्तीय नियामक संस्थाओं के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है। डिजिटल दस्तावेज सत्यापन भी होगा आसान CKYC 2.0 में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। DigiLocker जैसी सुविधाओं के साथ दस्तावेजों के सत्यापन को आसान बनाने की योजना है, जिससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और KYC अपडेट तेजी से हो सकेगा। ग्राहकों को क्या फायदा होगा? बार-बार KYC दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम होगी खाता खोलने और वित्तीय सेवाएं लेने की प्रक्रिया तेज होगी फर्जी पहचान और धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान होगी CKYC 2.0 को भारत की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह बैंकिंग, बीमा और निवेश सेवाओं को अधिक सरल और तेज बना सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में सुधार के बीच स्मॉलकैप म्यूचुअल फंडों पर लिक्विडिटी का दबाव मार्च 2024 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालिया बाजार तेजी और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते फंड हाउसों के लिए नकदी प्रबंधन की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। बाजार में तेजी से सुधरी स्थिति विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में स्मॉलकैप शेयरों में आई रिकवरी और निवेशकों के सकारात्मक रुख से फंडों को राहत मिली है। इससे पोर्टफोलियो में मौजूद शेयरों की खरीद-बिक्री पहले की तुलना में आसान हुई है और नकदी का दबाव कम हुआ है। निवेशकों का भरोसा लौटा म्यूचुअल फंड उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, स्मॉलकैप योजनाओं में निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ रही है। नियमित निवेश (SIP) और नए निवेश प्रवाह ने फंड मैनेजरों को बेहतर लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद की है। SEBI की निगरानी का भी दिखा असर विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार नियामक SEBI द्वारा जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो पारदर्शिता को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। फंड हाउस अब लिक्विडिटी जोखिम का पहले से अधिक व्यवस्थित तरीके से आकलन कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने निवेशकों को दी सलाह बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि लिक्विडिटी में सुधार सकारात्मक संकेत है, लेकिन स्मॉलकैप फंड अभी भी अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले निवेश विकल्प हैं। उन्होंने निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिए और संतुलित पोर्टफोलियो रणनीति के साथ निवेश करने की सलाह दी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए जून 2026 उत्साहजनक रहा। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश बढ़कर ₹31,781 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। यह मई की तुलना में लगभग 3% अधिक है और निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश में जोरदार उछाल जून के दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंडों में शुद्ध निवेश 26% बढ़कर ₹28,973 करोड़ पहुंच गया। खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी, जिससे इक्विटी योजनाओं में मजबूत निवेश देखने को मिला। रिटेल निवेशकों का भरोसा कायम बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने SIP के जरिए नियमित निवेश जारी रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की रणनीति और वित्तीय जागरूकता बढ़ने से SIP निवेश लगातार मजबूत हो रहा है। डेट फंडों से निकासी जारी जहां इक्विटी फंडों में निवेश बढ़ा, वहीं डेट म्यूचुअल फंडों से लगातार दूसरे महीने निकासी दर्ज की गई। इससे साफ है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल इक्विटी आधारित योजनाओं की ओर अधिक बना हुआ है। बाजार के लिए सकारात्मक संकेत विशेषज्ञों का कहना है कि SIP में लगातार बढ़ता निवेश भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी से बाजार को स्थिरता मिल रही है और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव का असर कुछ हद तक संतुलित हो रहा है।
लॉस एंजिल्स, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के रोमांचक क्वार्टर फाइनल मुकाबले में स्पेन ने बेल्जियम को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। 2010 में विश्व चैंपियन बनने के बाद यह पहला मौका है, जब स्पेन की टीम वर्ल्ड कप के अंतिम चार में पहुंची है। अब 15 जुलाई को उसका सामना मजबूत फ्रांस से होगा, जिसे टूर्नामेंट का सबसे बड़ा मुकाबला माना जा रहा है। मैच की शुरुआत मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक खेल दिखाया। स्पेन ने 30वें मिनट में पहला गोल कर बढ़त बनाई, लेकिन बेल्जियम ने 41वें मिनट में चार्ल्स डे केटेलेरे के शानदार हेडर की बदौलत बराबरी कर ली। टिमोथी कास्टाग्ने के सटीक क्रॉस पर आए इस गोल ने स्पेन की लगातार छह क्लीन शीट का सिलसिला भी समाप्त कर दिया। गोलकीपर उनाई सिमोन का कतर वर्ल्ड कप से चला आ रहा 650 मिनट तक बिना गोल खाए रहने का रिकॉर्ड भी इसी मैच में टूट गया। पहले हाफ के बाद मुकाबला 1-1 से बराबरी पर था और दूसरे हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। ऐसा लग रहा था कि मैच अतिरिक्त समय में जाएगा, लेकिन 88वें मिनट में स्पेन के कोच का दांव सफल साबित हुआ। मैदान पर आने के महज दो मिनट बाद सब्स्टीट्यूट मिकेल मेरिनो ने बेल्जियम के रिजर्व गोलकीपर सेने लैमेंस की गलती का फायदा उठाते हुए विजयी गोल दाग दिया। पाउ कुबारसी के दूर से लगाए गए शॉट को लैमेंस ठीक से नियंत्रित नहीं कर सके और मेरिनो ने ढीली गेंद को गोल में बदल दिया। स्पेन और फ्रांस इस जीत के साथ स्पेन ने रेगुलर टाइम में मार्च 2023 से अपना अजेय अभियान 37 मैचों तक बढ़ा दिया, जबकि बेल्जियम की लगातार 18 मैचों की अजेय लय टूट गई। टूर्नामेंट का तीसरा क्वार्टर फाइनल इंग्लैंड और नॉर्वे के बीच 12 जुलाई को भारतीय समयानुसार रात 2:30 बजे खेला जाएगा। अब सभी की निगाहें स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल पर टिकी हैं।
मुंबई: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ महीनों से भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित और लंबे समय तक किया गया निवेश बाजार की अस्थिरता के असर को काफी हद तक कम कर देता है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड की कई इक्विटी स्कीमों ने पिछले 15 वर्षों में निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया है। कुछ योजनाओं में सालाना कंपाउंड ग्रोथ रेट (CAGR) 18.5 प्रतिशत तक पहुंचा है। 1. ICICI Prudential Midcap Fund यह फंड मिड-कैप कंपनियों में निवेश करता है, जिनमें भविष्य में बड़े बाजार लीडर बनने की क्षमता होती है। AUM: ₹7,789 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 18.50% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹48.41 लाख 2. ICICI Prudential Value Fund यह स्कीम वैल्यू इन्वेस्टिंग रणनीति अपनाती है और ऐसी कंपनियों में निवेश करती है जिनकी बाजार कीमत उनकी वास्तविक क्षमता से कम मानी जाती है। AUM: ₹58,954 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 16.44% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹39.14 लाख 3. ICICI Prudential Multicap Fund यह फंड लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों में संतुलित निवेश करता है। AUM: ₹17,675.80 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 15.65% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹36.12 लाख 4. ICICI Prudential Large & Mid Cap Fund यह स्कीम बड़ी और उभरती कंपनियों के मिश्रण में निवेश करती है। AUM: ₹30,147 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: 15.36% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹35.08 लाख 5. ICICI Prudential Focused Equity Fund यह फंड सीमित लेकिन मजबूत कंपनियों के पोर्टफोलियो पर आधारित है। AUM: ₹16,147 करोड़ 15 साल का CAGR रिटर्न: लगभग 15% ₹5,000 मासिक SIP का अनुमानित मूल्य: ₹32.81 लाख SIP क्या है? SIP यानी Systematic Investment Plan म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक अनुशासित तरीका है। इसके जरिए निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि निवेश कर सकते हैं। यह छोटी रकम से निवेश शुरू करने और लंबे समय में संपत्ति बनाने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अस्थायी गिरावट के दौरान भी नियमित SIP जारी रखने से निवेशकों को लंबे समय में बेहतर औसत लागत और कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है।
मुंबई, एजेंसियां। आज के समय में SIP (Systematic Investment Plan) निवेश का एक लोकप्रिय जरिया बन चुका है। कम रकम से शुरुआत और लंबे समय में बड़ा फंड बनाने की क्षमता के कारण बड़ी संख्या में लोग आज SIP की ओर अपना रुख कर रहे हैं। SIP है क्या? SIP यानी Systematic Investment Plan, म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक तरीका है, जिसमें निवेशक हर महीने एक तय राशि निवेश करता है। यह तरीका एकमुश्त निवेश की तुलना में काफी आसान माना जाता है और नियमित निवेश की आदत को भी विकसित करता है। SIP में कैसे निवेश करें? किसी म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म, बैंक या निवेश ऐप पर अपना अकाउंट बनाएं KYC प्रक्रिया पूरी करें अपनी जरूरत और जोखिम के अनुसार फंड चुनें मासिक निवेश राशि तय करें Auto Debit सेट करके नियमित निवेश शुरू करें SIP के फायदे कम रकम से निवेश की शुरुआत Compounding Effect का लाभ बाजार के उतार-चढ़ाव का असर औसत हो जाता है निवेश की अनुशासित आदत बनती है लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना क्या है Compounding Effect? SIP में सबसे बड़ा फायदा Compounding Effect को माना जाता है। इसका मतलब है कि आपके निवेश पर मिलने वाला ब्याज भी आगे चलकर रिटर्न देने लगता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति हर महीने ₹5,000 निवेश करता है और लंबे समय तक निवेश जारी रखता है, तो समय के साथ सिर्फ मूल राशि ही नहीं, बल्कि उस पर मिला ब्याज भी बढ़ता रहता है। इसी वजह से Compounding को अक्सर “पैसे से पैसा बनाने की प्रक्रिया” कहा जाता है। लंबी अवधि में निवेश करने वाले लोगों को Compounding का सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है। SIP के नुकसान रिटर्न की कोई गारंटी नहीं बाजार जोखिम हमेशा बना रहता है गलत फंड चुनने पर आर्थिक नुकसान संभव कम समय में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद पूरी नहीं हो सकती
नई दिल्ली: मार्च 2026 में बाजार की तेज गिरावट के बीच म्यूचुअल फंड हाउसों ने बड़ी रणनीतिक चाल चलते हुए अपने कैश रिजर्व का इस्तेमाल शेयर बाजार में निवेश के लिए किया। इसका असर यह हुआ कि म्यूचुअल फंड्स की कुल कैश होल्डिंग 16 महीनों के निचले स्तर पर आ गई। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में म्यूचुअल फंड्स की कैश होल्डिंग घटकर 1.86 लाख करोड़ रुपये रह गई, जो फरवरी के 2.1 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 24,319 करोड़ रुपये या 12 प्रतिशत कम है। यह स्तर दिसंबर 2024 के बाद सबसे निचला है। गिरते बाजार में खरीदारी का मौका वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भारतीय बाजारों में दबाव बना रहा। इस दौरान कई शेयर 52 हफ्तों के निचले स्तर तक पहुंच गए। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों में करीब 11.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 10 प्रतिशत तक टूटे। इस गिरावट को म्यूचुअल फंड्स ने अवसर के रूप में देखा। करीब 60 प्रतिशत फंड हाउसों ने अपने कैश का इस्तेमाल कर शेयरों में निवेश बढ़ाया, जबकि बाकी ने अपनी कैश पोजिशन को बनाए रखा या थोड़ा बढ़ाया। कैश अनुपात भी घटा एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के मुकाबले कैश का अनुपात भी घटकर 4.73 प्रतिशत रह गया, जो फरवरी में 4.86 प्रतिशत और पिछले साल 5.76 प्रतिशत था। यह चार महीने का निचला स्तर है। किन फंड हाउसों ने घटाई कैश होल्डिंग बाजार में खरीदारी के चलते कई बड़े फंड हाउसों ने अपने कैश रिजर्व में कटौती की: SBI Mutual Fund: ₹34,704 करोड़ से घटकर ₹27,464 करोड़ ICICI Prudential Mutual Fund: ₹23,876 करोड़ से ₹17,290 करोड़ Motilal Oswal Mutual Fund: ₹6,722 करोड़ से ₹3,124 करोड़ HDFC Mutual Fund: ₹23,579 करोड़ से ₹21,352 करोड़ Quant Mutual Fund: ₹13,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ इसके अलावा Aditya Birla Mutual Fund, Tata Mutual Fund, Invesco Mutual Fund और DSP Mutual Fund जैसे फंड हाउसों ने भी कैश घटाया। किन्होंने बढ़ाई कैश पोजिशन हालांकि कुछ फंड हाउस सतर्क नजर आए और उन्होंने कैश होल्डिंग बढ़ाई: Nippon India Mutual Fund: ₹6,158 करोड़ से ₹7,811 करोड़ Axis Mutual Fund: ₹15,296 करोड़ से ₹16,470 करोड़ Edelweiss Mutual Fund: ₹1,147 करोड़ से ₹1,505 करोड़ इसके अलावा Baroda BNP Paribas, Canara Robeco, Abakkus और LIC Mutual Fund ने भी अपनी कैश पोजिशन में इजाफा किया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।