मॉस्को, एजेंसियां। रूस के भीतर यूक्रेन के एक बड़े ड्रोन हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई है। हमला रूस के तातारस्तान गणराज्य के निज़नेकाम्स्क शहर में हुआ, जहां यूक्रेनी ड्रोन ने तेल और पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। हमले में एक बच्चे समेत कई लोगों की मौत हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। रूस के अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। तानेको तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना यूक्रेनी सेना ने निज़नेकाम्स्क क्षेत्र में स्थित तानेको तेल रिफाइनरी को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की है। यह रूस के प्रमुख तेल शोधन और पेट्रोकेमिकल केंद्रों में शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार यह प्रतिष्ठान मॉस्को से करीब 800 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। हमले के बाद रिफाइनरी परिसर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में धुआं उठता दिखाई दिया। रूसी अधिकारियों के अनुसार ड्रोन हमले का असर शहर के कुछ रिहायशी इलाकों पर भी पड़ा। 13 लोगों की मौत, दर्जनों घायल रूसी अधिकारियों के अनुसार हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है, जिसमें एक बच्चा भी शामिल है। कई लोग घायल हुए हैं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या 39 से अधिक बताई गई है, जबकि बाद के स्थानीय अपडेट में इससे ज्यादा लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार मृतकों में मध्य एशियाई देशों के नागरिक भी शामिल हैं। उज्बेकिस्तान ने बताया है कि उसके सात नागरिकों की इस हमले में मौत हुई। रूस ने शुरू की जांच, तातारस्तान में शोक हमले के बाद रूसी अधिकारियों ने इसे गंभीर सुरक्षा घटना माना है और जांच शुरू कर दी है। तातारस्तान के अधिकारियों ने मृतकों के सम्मान में शोक दिवस घोषित किया है। यह हमला रूस के अंदर यूक्रेन की बढ़ती ड्रोन क्षमता को भी दर्शाता है। यूक्रेन लंबे समय से रूस की तेल और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाकर उसकी सैन्य और आर्थिक क्षमता पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। निज़नेकाम्स्क पर हुआ हमला इसी अभियान की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के लिए गौरव का क्षण है। बरियातू हाउसिंग कॉलोनी निवासी और भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी अंजनी कुमार सहाय को यूक्रेन में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में उन्हें औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपा। विदेश मंत्रालय ने अंजनी कुमार सहाय की नियुक्ति की घोषणा 7 जुलाई 2026 को की थी। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें राष्ट्रपति की ओर से नियुक्ति पत्र दिया गया। अब वह यूक्रेन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। शनिवार को परिवार के साथ यूक्रेन होंगे रवाना नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद अंजनी कुमार सहाय शनिवार को अपने परिवार के साथ यूक्रेन के लिए रवाना होंगे। वहां वह भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर काम करने के साथ भारत के हितों का प्रतिनिधित्व करेंगे। माली और मॉरिटानिया में रह चुके हैं राजदूत अंजनी कुमार सहाय भारतीय विदेश सेवा के अनुभवी अधिकारी हैं। इससे पहले वह माली और मॉरिटानिया में भारत के राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें यूक्रेन जैसे महत्वपूर्ण देश में राजदूत की जिम्मेदारी दी गई है। रांची और पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात रांची के बरियातू हाउसिंग कॉलोनी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने तक का अंजनी कुमार सहाय का सफर झारखंड के लिए गौरव की बात है। उनकी नियुक्ति को राज्य के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है।
कीव, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमले में कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है, जबकि 44 लोग घायल हुए हैं। हमले के बाद राजधानी के कई इलाकों में आग लग गई और राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। मिसाइल और ड्रोन से बड़े पैमाने पर हमला रूस ने रात के दौरान कीव और उसके आसपास के क्षेत्रों को निशाना बनाया। हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, कई नागरिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े स्थान भी हमले की चपेट में आए। हमले के बाद राजधानी के कई हिस्सों में आग लग गई। आपातकालीन सेवाओं ने प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत और बचाव अभियान शुरू किया। कुछ स्थानों पर मलबे में लोगों के फंसे होने की भी सूचना सामने आई है। यूक्रेन की वायु रक्षा के सामने चुनौती हमले के दौरान यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती देखने को मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेन ने कई ड्रोन को मार गिराया, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यूक्रेन के पास पैट्रियट जैसी वायु रक्षा प्रणालियों के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी बताई जा रही है। जेलेंस्की ने सहयोगी देशों से मांगी मदद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हमले के बाद सहयोगी देशों से अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां और मिसाइलें उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल अतिरिक्त क्षमता की जरूरत है। इस हमले के बाद रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में तनाव और बढ़ गया है। यूक्रेन ने भी रूस के खिलाफ ड्रोन हमलों को तेज किया है, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव लगातार गंभीर बना हुआ है।
गेलेंदझिक, एजेंसियां। रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र में गेलेंदझिक के पास एक भीड़भाड़ वाले समुद्र तट पर ड्रोन का मलबा गिरने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 40 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल हैं। घटना के बाद समुद्र तट पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। समुद्र तट पर मौजूद थे बड़ी संख्या में लोग यह घटना ब्लैक सी के लोकप्रिय रिसॉर्ट क्षेत्र अर्किपो-ओसिपोव्का में हुई, जहां घटना के समय बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग समुद्र तट पर मौजूद थे। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, लोगों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिला और ड्रोन का मलबा गिरने से कई लोग इसकी चपेट में आ गए। रूस ने यूक्रेन पर लगाया आरोप रूसी अधिकारियों ने घटना को यूक्रेनी ड्रोन हमले से जोड़ते हुए यूक्रेन पर आरोप लगाया है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन को हवा में रोकने की कोशिश के बाद उसका मलबा समुद्र तट पर गिरा। हालांकि, ड्रोन वास्तव में रूसी हवाई सुरक्षा की कार्रवाई से गिरा या किसी अन्य कारण से दुर्घटनाग्रस्त हुआ, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यूक्रेन की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। 40 लोग घायल, कई अस्पताल में भर्ती स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हादसे में करीब 40 लोग घायल हुए हैं। इनमें से कई घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई और राहत एवं बचाव दलों ने मौके पर कार्रवाई शुरू की। यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नागरिक इलाकों में ड्रोन हमलों और उनके मलबे से पैदा हो रहे खतरे को लेकर चिंता बढ़ाती है।
कीव, एजेंसियां। यूक्रेन की राजधानी कीव में रूस ने शनिवार रात बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। हमले में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हमले के बाद राजधानी के कई इलाकों में इमारतों में आग लग गई और बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। 35 मिसाइल और 185 ड्रोन से हमला यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के अनुसार, रूस ने रातभर में यूक्रेन पर 35 मिसाइलें और 185 ड्रोन लॉन्च किए। इनमें 27 बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं। कीव इस हमले का मुख्य निशाना रहा, हालांकि द्निप्रो, सुमी, खारकीव और पोल्तावा क्षेत्रों में भी हमले हुए। पांच जिलों में भारी तबाही कीव के मेयर विताली क्लित्स्को के मुताबिक, रूसी हमलों से राजधानी के कम से कम पांच जिलों में इमारतों को नुकसान पहुंचा और कई जगह आग लग गई। आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी Kyivmedspetstrans संस्था की कई इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुईं और पांच एंबुलेंस पूरी तरह जल गईं। मलबे में फंसे लोगों को बचाने का अभियान हमले के बाद राहत और बचाव दल ने क्षतिग्रस्त इमारतों में फंसे लोगों को निकालने का अभियान चलाया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि राहत और मलबा हटाने का काम जारी रहा। जेलेंस्की ने मांगी और एयर डिफेंस सहायता जेलेंस्की ने हमले के बाद यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमता मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए अतिरिक्त पैट्रियट इंटरसेप्टर की आवश्यकता बताई। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में इस ताजा हमले ने नागरिक इलाकों पर बढ़ते हवाई हमलों को लेकर चिंता फिर बढ़ा दी है।
उफा, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस के अंदर तक बड़ा ड्रोन हमला किया है। यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) के अनुसार, उसके लंबी दूरी के ड्रोन ने रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य के उफा में स्थित तीन प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया। ये हमले यूक्रेन से करीब 1,600 किलोमीटर दूर किए गए। उफा की तीन रिफाइनरियां बनीं निशाना यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन हमले में Bashneft-UNPZ, Bashneft-Novoil और Bashneft-Ufaneftekhim रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। ये तीनों रिफाइनरियां उफा के बड़े तेल-प्रसंस्करण परिसर का हिस्सा हैं। यूक्रेन की ओर से दावा किया गया है कि हमले का उद्देश्य रूस की तेल प्रसंस्करण और ईंधन आपूर्ति क्षमता को प्रभावित करना था। रिफाइनरी में आग लगने की खबर हमले के बाद उफा में तेल रिफाइनरी क्षेत्र से धुआं उठने और आग लगने की खबरें सामने आईं। स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो और रिपोर्टों में भी औद्योगिक क्षेत्र से धुएं का गुबार दिखाई देने की बात कही गई है। हमले से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। रूस के अंदर तक पहुंचा यूक्रेन का ड्रोन हमला इस हमले की खास बात इसकी दूरी है। उफा यूक्रेन से करीब 1,600 किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूर स्थित ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से यूक्रेन की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता एक बार फिर चर्चा में आ गई है। तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है असर रूस की तेल रिफाइनरियां देश की ईंधन आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों पर लगातार हमले होने से तेल प्रसंस्करण, ईंधन उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, तीनों रिफाइनरियों को हुए वास्तविक नुकसान और उनके संचालन पर पड़े असर की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मामले में आगे की जानकारी का इंतजार है।
ड्रोन हमले के बाद ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ी हलचल कीव, एजेंसियां। यूक्रेन ने दावा किया है कि उसकी सेना ने रूस की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर सफल ड्रोन हमला किया है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले से रिफाइनरी के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है, जिससे रूस के ऊर्जा ढांचे पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, रूस ने हमले की पुष्टि करते हुए नुकसान के दावों को कमतर बताया है। ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर बढ़े हमले रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा और सैन्य ठिकानों को लगातार निशाना बना रहे हैं। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों और ईंधन भंडारण केंद्रों पर ड्रोन हमले किए हैं, जबकि रूस भी यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए है। रूस ने शुरू की जांच रूसी अधिकारियों ने बताया कि हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों और आपातकालीन सेवाओं को मौके पर भेजा गया। आग पर काबू पाने और नुकसान का आकलन करने का काम जारी है। साथ ही, वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। युद्ध के बीच बढ़ा ऊर्जा संकट विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लगातार हो रहे हमले दोनों देशों की ईंधन आपूर्ति और औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, इन घटनाओं का असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा कीमतों पर भी पड़ सकता है। तनाव कम होने के आसार नहीं रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में फिलहाल किसी बड़े समाधान के संकेत नहीं दिख रहे हैं। दोनों देशों की ओर से सैन्य अभियान जारी हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।
मॉस्को/सेंट पीटर्सबर्ग, एजेंसियां। रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के पास यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद एक बड़े गोदाम में भीषण आग लग गई। रूसी अधिकारियों के अनुसार, हमला लेनिनग्राद क्षेत्र में स्थित प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी वाइल्डबेरीज़ (Wildberries) के विशाल वेयरहाउस पर हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया। ड्रोन हमले के बाद धधका वेयरहाउस लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर ने बताया कि यूक्रेनी ड्रोन के हमले के तुरंत बाद गोदाम में आग भड़क उठी। दमकल की कई टीमें घंटों तक आग बुझाने में जुटी रहीं। सुरक्षा कारणों से आसपास के इलाके को खाली कराया गया और हवाई सुरक्षा प्रणाली को अलर्ट पर रखा गया। लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को निशाना बनाने का आरोप रूसी प्रशासन का आरोप है कि यूक्रेन अब केवल ऊर्जा प्रतिष्ठानों ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और सप्लाई नेटवर्क को भी निशाना बना रहा है। वाइल्डबेरीज़ रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों में से एक है और उसका वेयरहाउस देशभर में सामान की आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यूक्रेन की रणनीति में बदलाव विश्लेषकों का मानना है कि हाल के सप्ताहों में यूक्रेन ने रूस के भीतर गहराई तक ड्रोन हमले बढ़ाए हैं। इन हमलों का उद्देश्य रूस की आपूर्ति व्यवस्था और युद्ध से जुड़े लॉजिस्टिक्स ढांचे को प्रभावित करना बताया जा रहा है। हालांकि यूक्रेन ने इस विशेष हमले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। तीसरी बार बना निशाना रिपोर्टों के अनुसार, यह एक सप्ताह के भीतर वाइल्डबेरीज़ के गोदामों पर तीसरा बड़ा हमला है। लगातार हो रहे हमलों से कंपनी के परिचालन और हजारों छोटे कारोबारियों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई हमले के बाद सेंट पीटर्सबर्ग और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि कई अन्य यूक्रेनी ड्रोन को भी हवाई रक्षा प्रणाली ने मार गिराया, जबकि घटना की विस्तृत जांच जारी है।
कीव/मॉस्को, एजेंसियां। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। यूक्रेन ने रातभर में 400 से अधिक ड्रोन रूस की ओर भेजे, जिनका मुख्य निशाना मॉस्को क्षेत्र, तेल डिपो और सैन्य लॉजिस्टिक्स ठिकाने रहे। रूसी अधिकारियों ने दावा किया कि अधिकांश ड्रोन मार गिराए गए, लेकिन कई स्थानों पर आग और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। मॉस्को के आसपास तेल डिपो और औद्योगिक क्षेत्र प्रभावित यूक्रेन के हमले के बाद मॉस्को के आसपास स्थित एक औद्योगिक क्षेत्र और संभावित तेल भंडारण केंद्र में आग लगने की खबर है। रूस ने कई हवाई अड्डों पर उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया, जबकि सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया। ओडेसा में रूस का जवाबी हमला, कई लोगों की मौत यूक्रेनी ड्रोन हमलों के जवाब में रूस ने ओडेसा क्षेत्र पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। एक नागरिक मालवाहक जहाज और अन्य ठिकानों पर हुए हमलों में कई लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। ओडेसा प्रशासन ने हालात को गंभीर बताते हुए राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। काला सागर में बढ़ा तनाव यूक्रेन ने दावा किया कि उसने रूस की तेल आपूर्ति और सैन्य लॉजिस्टिक्स को बाधित करने के उद्देश्य से ब्लैक सी क्षेत्र में भी कार्रवाई की। वहीं रूस ने इसे नागरिक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए खतरा बताते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कही। युद्धविराम की उम्मीदें फिर कमजोर लगातार बढ़ते हमलों के बीच युद्धविराम की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों की सैन्य कार्रवाई जारी है।
कीव, एजेंसियां। यूक्रेन की प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार को यूक्रेनी संसद ने उनके इस्तीफे को मंजूरी दे दी, जिसके साथ ही पूरे मंत्रिमंडल का कार्यकाल समाप्त हो गया। यह फैसला राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की द्वारा प्रस्तावित बड़े सरकारी फेरबदल का हिस्सा माना जा रहा है। एक साल के कार्यकाल के बाद इस्तीफा 40 वर्षीय अर्थशास्त्री यूलिया स्विरिडेंको ने लगभग एक वर्ष तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। अपने विदाई संबोधन में उन्होंने कहा कि युद्धकाल में सरकार चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा और आने वाले महीनों में रूस की ओर से ऊर्जा ढांचे पर हमलों की आशंका के बीच सर्दियों की तैयारी नई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। जेलेंस्की के फैसले पर उठे सवाल हालांकि राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सरकार में बदलाव की जरूरत बताई है, लेकिन विपक्षी दलों और कई सांसदों ने इस फेरबदल के उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार बदलने के पीछे स्पष्ट कारण नहीं बताए गए हैं और केवल चेहरों के बदलाव से युद्धकालीन चुनौतियों का समाधान नहीं होगा। नए प्रधानमंत्री के नाम पर जल्द फैसला इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अब यूक्रेन में नए प्रधानमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी सेरही कोरेट्स्की को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। संसद जल्द ही नए प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल पर मतदान कर सकती है।
मॉस्को, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर एक और बड़ा हमला किया है। शनिवार देर रात यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के प्रमुख तेल टर्मिनल और आसपास के बंदरगाह क्षेत्र को निशाना बनाया। हमले के बाद तेल टर्मिनल में आग लग गई और इलाके में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। रूसी अधिकारियों ने इसे हाल के महीनों का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया। 72 ड्रोन मार गिराने का रूस का दावा रूस के लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम ने हमले के दौरान 72 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। इसके बावजूद सेंट पीटर्सबर्ग ऑयल टर्मिनल और वायसोत्स्क बंदरगाह क्षेत्र में नुकसान हुआ। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रूस की ऊर्जा आपूर्ति को निशाना बना रहा यूक्रेन विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन लगातार रूस की तेल और ईंधन आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं को निशाना बना रहा है, ताकि युद्ध के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स और आर्थिक संसाधनों पर दबाव बनाया जा सके। हाल के महीनों में रूस के कई तेल डिपो, रिफाइनरी और बंदरगाहों पर ऐसे हमले हो चुके हैं। युद्ध के बीच बढ़ा तनाव यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच हवाई हमलों और ड्रोन हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। रूस ने भी यूक्रेन के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ते हमले आने वाले दिनों में संघर्ष को और अधिक तीखा बना सकते हैं।
मॉस्को, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर इस वर्ष का सबसे बड़ा संयुक्त ड्रोन और मिसाइल हमला किया है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि 90 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हमले में कई रिहायशी इमारतें, होटल, चिकित्सा केंद्र और अन्य नागरिक ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए। 496 ड्रोन और 74 मिसाइलों से किया हमला यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर में 496 ड्रोन और 74 मिसाइलें दागीं। एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश ड्रोन और कई मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन कुछ मिसाइलें राजधानी में अपने लक्ष्य तक पहुंच गईं, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई। रिहायशी इमारतें और होटल बने निशाना हमले में कीव के कई इलाकों में आग लग गई और लगभग 130 इमारतों को नुकसान पहुंचा। एक नौ मंजिला आवासीय इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया, जबकि एक होटल और चिकित्सा संस्थान भी क्षतिग्रस्त हुए। राहत एवं बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं। रूस ने बताया जवाबी कार्रवाई, यूक्रेन ने दी प्रतिक्रिया रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि हमला यूक्रेन द्वारा रूसी क्षेत्र पर किए गए हमलों के जवाब में सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इसका जवाब दिया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने की अपील की। कीव में शोक दिवस घोषित हमले के बाद कीव प्रशासन ने मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए 3 जुलाई को शोक दिवस घोषित किया है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ सहित कई देशों ने नागरिक इलाकों पर हुए इस हमले पर चिंता जताई है और दोनों पक्षों से हिंसा कम करने की अपील की है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन के हमलों के बाद पैदा हुए ईंधन संकट के बीच भारत से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बढ़ानी शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस को घरेलू मांग पूरी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते वह भारत समेत एशियाई देशों से ईंधन आयात कर रहा है। ऊर्जा संकट के बीच बढ़ा व्यापारिक दबाव सूत्रों के अनुसार, रूस के कई रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचे पर हाल के हमलों के बाद उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसी कारण पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में कमी देखने को मिल रही है, जिसे पूरा करने के लिए रूस भारत से खरीदारी कर रहा है। भारत के ऊर्जा निर्यात पर असर की संभावना विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो भारत के ऊर्जा व्यापार और निर्यात पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि फिलहाल इसे अल्पकालिक रणनीति माना जा रहा है। वैश्विक तेल बाजार पर नजर इस घटनाक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन पर असर पड़ सकता है।
वारसॉ/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पोलैंड और यूक्रेन के रिश्तों में नया तनाव पैदा हो गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ वापस करने की घोषणा की है। यह कदम पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी द्वारा सम्मान वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कहने के बाद उठाया गया। विवाद की जड़ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का वह फैसला है, जिसमें उन्होंने एक सैन्य इकाई का नाम यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) के नाम पर रखा। पोलैंड में UPA को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हजारों पोलिश नागरिकों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार माना जाता है। जेलेंस्की बोले- यह सम्मान यूक्रेनी जनता और सेना के लिए था जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 2023 में मिला ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि यूक्रेनी जनता और सेना के लिए था। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने यह सम्मान पोलैंड को वापस भेजने का फैसला किया है। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2023 में तत्कालीन पोलिश राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने सुरक्षा, स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा में योगदान के लिए प्रदान किया था। कई यूक्रेनी अधिकारियों ने भी लौटाए सम्मान जेलेंस्की के अलावा यूक्रेन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पोलैंड से मिले पुरस्कार लौटाने का ऐलान किया है। इनमें राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव, पोलैंड में यूक्रेन के राजदूत वासिल बोडनार और विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा शामिल हैं। क्या है UPA और उससे जुड़ा विवाद? यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) 1940 और 1950 के दशक में सक्रिय एक राष्ट्रवादी संगठन था। यूक्रेन में इसे सोवियत संघ और नाजी जर्मनी के खिलाफ संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के रूप में देखा जाता है। पोलैंड का आरोप है कि UPA ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वोल्हिनिया और पूर्वी गैलिसिया क्षेत्रों में हजारों पोलिश नागरिकों की हत्या की थी। यही ऐतिहासिक विवाद आज दोनों देशों के संबंधों में तनाव का कारण बन गया है। पोलैंड ने सम्मान वापस लेने का फैसला क्यों किया? पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने कहा कि UPA को सम्मानित करना पोलिश समाज की ऐतिहासिक संवेदनाओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अधिकांश पोलिश नागरिक UPA को ऐसे संगठन के रूप में देखते हैं, जिसने पोलैंड के नागरिकों के खिलाफ क्रूर अपराध किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेलेंस्की से सम्मान वापस लेने का फैसला इतिहास और स्मृति के सम्मान के लिए है। यूक्रेन ने फैसले को बताया ‘रूस के लिए तोहफा’ यूक्रेन ने पोलैंड के इस कदम की तीखी आलोचना की है। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव ने इसे यूक्रेनी जनता के प्रति गैर-मित्रवत कदम बताया और कहा कि इससे रूस को दोनों देशों के बीच दरार पैदा करने का मौका मिलेगा। विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने इसे एक ‘रणनीतिक गलती’ करार दिया, जबकि राजदूत वासिल बोडनार ने कहा कि रूस के हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन के लिए यह फैसला बेहद पीड़ादायक है। समर्थन जारी रखने का भरोसा राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने स्पष्ट किया है कि इस विवाद का मतलब यह नहीं है कि पोलैंड रूस के खिलाफ यूक्रेन का समर्थन कम करेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन की पोलैंड की नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। फिर भी, इतिहास से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब रूस के खिलाफ लड़ाई में पोलैंड, यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है और लाखों यूक्रेनी शरणार्थियों को शरण भी दे चुका है। अब यह देखना होगा कि दोनों देश इस कूटनीतिक तनाव को कैसे संभालते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।