नई दिल्ली, एजेंसियां। रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खबर है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की ओर से Level-1 यानी Group D के करीब 30 हजार पदों पर नई भर्ती की तैयारी शुरू कर दी गई है। रेलवे बोर्ड ने देशभर के जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों से खाली पदों की जानकारी मांगी है। रेलवे ने मांगा खाली पदों का ब्योरा नई Group D भर्ती के लिए रेलवे पहले अलग-अलग जोन और उत्पादन इकाइयों में मौजूद रिक्तियों का आकलन कर रहा है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि किस जोन में Level-1 के कितने पद खाली हैं। इस प्रक्रिया के बाद पदों की वास्तविक संख्या तय की जाएगी। इसलिए 30 हजार पदों का आंकड़ा फिलहाल संभावित है, अंतिम नहीं। सितंबर-अक्टूबर में आ सकता है नोटिफिकेशन मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रिक्तियों का आकलन पूरा होने के बाद सितंबर-अक्टूबर 2026 के आसपास भर्ती का आधिकारिक विज्ञापन जारी होने की संभावना है। आवेदन प्रक्रिया वर्ष के अंत से पहले शुरू होने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है। हालांकि, आवेदन की अंतिम तारीख, परीक्षा की तारीख और पदों की जोनवार संख्या अभी RRB के आधिकारिक नोटिफिकेशन से तय नहीं हुई है। 10वीं पास युवाओं के लिए बड़ा मौका Group D Level-1 भर्ती रेलवे की सबसे लोकप्रिय सरकारी भर्तियों में से एक है। इसमें ट्रैक मेंटेनर और विभिन्न तकनीकी एवं सहायक श्रेणियों के पद शामिल हो सकते हैं। पिछली भर्तियों के आधार पर 10वीं पास और निर्धारित तकनीकी योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर मिलने की उम्मीद है। उम्मीदवारों को सलाह है कि वे भर्ती की अंतिम जानकारी के लिए केवल RRB के आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार करें और सोशल मीडिया पर चल रहे अपुष्ट पदों या तारीखों पर भरोसा न करें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने ग्रुप-डी लेवल-1 भर्ती परीक्षा 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 32,438 पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। परिणाम जारी होने के साथ ही विभिन्न जोन की मेरिट लिस्ट और कटऑफ भी प्रकाशित कर दी गई है। उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने रोल नंबर के जरिए जोनवार सूची और व्यक्तिगत परिणाम देख सकते हैं। CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) में प्रदर्शन के आधार पर अभ्यर्थियों को अगले चरण PET (शारीरिक दक्षता परीक्षा) के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षण होगा। चयनित उम्मीदवारों की सूची रोल नंबर के आधार पर जारी की गई है, जो मेरिट क्रम में नहीं है। जोनवार कटऑफ में अंतर, प्रयागराज से चेन्नई तक अलग-अलग अंक जारी आंकड़ों के अनुसार अलग-अलग जोन में कटऑफ में अंतर देखने को मिला है। प्रयागराज जोन में सामान्य वर्ग (UR) का कटऑफ 78.12 रहा, जबकि एससी के लिए 72.40 और एसटी के लिए 66.65 अंक दर्ज किए गए। ओबीसी और ईडब्ल्यूएस का कटऑफ क्रमशः 77.31 और 74.14 रहा। रांची जोन में UR कटऑफ 72.85, एससी 58.93, एसटी 61.96 और ओबीसी 71.82 रहा। वहीं चेन्नई में UR कटऑफ 78.00 और भोपाल में 77.73 तक पहुंचा, जो अन्य जोनों की तुलना में अधिक रहा। भुवनेश्वर में UR कटऑफ 76.68 और अजमेर में 79.70 दर्ज किया गया। PET के लिए तीन गुना उम्मीदवार चयनित RRB ने रिक्तियों के लगभग तीन गुना उम्मीदवारों को PET के लिए शॉर्टलिस्ट किया है। उदाहरण के तौर पर चेन्नई जोन से 5130, प्रयागराज से 3736, भोपाल से 3383 और रांची से 2195 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। भुवनेश्वर में सबसे कम 1706 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट हुए हैं। दिव्यांग (PWBD), पूर्व सैनिक (ExSM) और CCAA श्रेणी के उम्मीदवारों को PET से छूट दी गई है और उनकी अलग सूची जारी की जाएगी। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह चयन केवल प्रारंभिक चरण है और अंतिम नियुक्ति PET, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षा के बाद ही होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने टेक्नीशियन ग्रेड-I और टेक्नीशियन ग्रेड-III के कुल 6,557 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 30 जून 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 29 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। कौन कर सकता है आवेदन? टेक्नीशियन ग्रेड-I पद के लिए उम्मीदवार की आयु 18 से 33 वर्ष और टेक्नीशियन ग्रेड-III के लिए 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। एससी/एसटी वर्ग को 5 वर्ष और ओबीसी वर्ग को 3 वर्ष की छूट प्रदान की जाएगी। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार का 10वीं पास होना अनिवार्य है। संबंधित पद के अनुसार अभ्यर्थियों के पास निर्धारित तकनीकी योग्यता या इंजीनियरिंग से जुड़ी डिग्री/डिप्लोमा होना भी आवश्यक है। विस्तृत योग्यता की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में देखी जा सकती है। कितनी है आवेदन फीस? सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग: ₹500 एससी, एसटी, महिला, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर, ईबीसी और पूर्व सैनिक: ₹250 आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। चयन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (CBT) के माध्यम से किया जाएगा। परीक्षा में 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जो सामान्य जागरूकता, गणित, जनरल इंटेलिजेंस एवं रीजनिंग और कंप्यूटर ज्ञान जैसे विषयों पर आधारित होंगे। प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू होगी। रेलवे में टेक्नीशियन के पदों पर भर्ती युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा अवसर है। इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें और परीक्षा की तैयारी शुरू कर दें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के हजारों पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 14 जून 2026 निर्धारित की गई है। ऐसे में जो उम्मीदवार अभी तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, उन्हें अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। इस भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता के तौर पर उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही अभ्यर्थी के पास संबंधित ट्रेड में आईटीआई प्रमाणपत्र होना चाहिए। जिन उम्मीदवारों ने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या डिग्री हासिल की है, वे भी आवेदन करने के पात्र हैं। आयु सीमा और आरक्षण का लाभ भर्ती में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। ऑनलाइन माध्यम से करें आवेदन इच्छुक उम्मीदवार रेलवे भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए सबसे पहले पोर्टल पर जाकर नया अकाउंट बनाना होगा। इसके बाद लॉगिन कर आवेदन पत्र भरना, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना और निर्धारित शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट करना होगा। आवेदन पूरा होने के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रखना जरूरी है। आवेदन शुल्क सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 500 रुपये आवेदन शुल्क जमा करना होगा। वहीं एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए शुल्क 250 रुपये निर्धारित किया गया है। रेलवे की ओर से सीबीटी-1 परीक्षा में शामिल होने के बाद सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 400 रुपये तथा एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को पूरी फीस वापस कर दी जाएगी। रेलवे में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए यह एक शानदार अवसर है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) समेत तकनीकी पदों पर बड़ी भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के तहत कुल 11,127 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। कब से शुरू होंगे आवेदन? इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 मई 2026 से शुरू होगी और इच्छुक उम्मीदवार 14 जून 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। आवेदन करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाना होगा। पदों का विवरण * पद का नाम: असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) * कुल पद: 11,127 योग्यता क्या होनी चाहिए? * उम्मीदवार का 10वीं पास होना जरूरी है * संबंधित ट्रेड में ITI (NCVT/SCVT) सर्टिफिकेट होना चाहिए * मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या ऑटोमोबाइल में डिप्लोमा भी मान्य है * संबंधित क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग होना आवश्यक आयु सीमा * न्यूनतम आयु: 18 वर्ष * अधिकतम आयु: 30 वर्ष(आयु की गणना 1 अप्रैल 2026 के आधार पर होगी) कैसे करें आवेदन? * सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं * Recruitment सेक्शन में जाकर “Apply Online” पर क्लिक करें * जरूरी दस्तावेज, फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें * आवेदन शुल्क जमा करें * फॉर्म सबमिट कर प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें जरूरी जानकारी यह भर्ती उन युवाओं के लिए बड़ा मौका है जो रेलवे में सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं। 10वीं और ITI पास उम्मीदवारों के लिए यह सुनहरा अवसर माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।