विमान हादसा

Air India A320 हादसे में फ्लाइट कंट्रोल फेल होने की जांच
Air India A320 हादसा: 300 फीट नीचे गिरने से पहले 4 सेकंड तक फेल रहे फ्लाइट कंट्रोल, Airbus की जांच में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली, एजेंसियां। एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान AI2379 से जुड़े 4 अगस्त के गंभीर विमानन हादसे की जांच में नया खुलासा हुआ है। Airbus के शुरुआती फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर विश्लेषण के मुताबिक, विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में एक साथ दबाव खत्म होने के कारण करीब 4 सेकंड तक महत्वपूर्ण फ्लाइट कंट्रोल काम नहीं कर रहे थे। इसी दौरान Airbus A320 करीब 300 फीट नीचे गिर गया। घटना में 24 यात्री और चालक दल के सदस्य घायल हुए थे।   चार सेकंड तक काम नहीं कर रहे थे अहम कंट्रोल     Airbus के शुरुआती विश्लेषण में सामने आया है कि विमान के एलेवेटर और एलेरॉन कुछ सेकंड के लिए प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। ये विमान की ऊंचाई और दिशा नियंत्रित करने वाले बेहद महत्वपूर्ण फ्लाइट कंट्रोल होते हैं। तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम—Green, Blue और Yellow—में एक साथ दबाव कम होने से यह स्थिति बनी।     पायलट के कंट्रोल इनपुट का भी तुरंत असर नहीं हुआ     रिपोर्ट के अनुसार, विमान के तेजी से नीचे जाने के दौरान फर्स्ट ऑफिसर ने नाक नीचे करने का पूरा कंट्रोल इनपुट दिया, लेकिन फ्लाइट कंट्रोल सतहों ने तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी। करीब चार सेकंड बाद सिस्टम दोबारा काम करने लगा और चालक दल विमान को स्थिर करने में सफल रहा। इसके बाद विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतरा।     हादसे की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं     Airbus की शुरुआती जांच से तकनीकी खराबी की जानकारी सामने आई है, लेकिन तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक साथ क्यों प्रभावित हुए, इसका मूल कारण अभी तय नहीं हुआ है। Airbus ने एयर इंडिया से विमान के विस्तृत मेंटेनेंस रिकॉर्ड और अतिरिक्त तकनीकी जानकारी मांगी है। भारत की Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) इस मामले की जांच Airbus और फ्रांस की BEA की मदद से कर रही है।     24 लोग हुए थे घायल     AI2379 विमान 4 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली जा रहा था। उड़ान के दौरान विमान ने अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी, जिससे यात्रियों और चालक दल को चोटें आईं। विमान बाद में सुरक्षित दिल्ली पहुंचा। जांच एजेंसियों ने इसे गंभीर विमानन घटना के तौर पर लिया है और अंतिम निष्कर्ष आने तक तकनीकी कारणों की जांच जारी है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
US Air Force B-52 Stratofortress bomber crashes during takeoff, killing all eight crew members onboard.
अमेरिकी वायुसेना का B-52 बॉम्बर टेकऑफ के दौरान क्रैश, सभी 8 क्रू मेंबर्स की मौत; बोइंग के दो कर्मचारी भी शामिल

  वॉशिंगटन: अमेरिकी वायुसेना का एक B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर विमान टेकऑफ के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी आठ क्रू मेंबर्स की मौत हो गई। हादसे के बाद अमेरिकी वायुसेना और संबंधित एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतकों में विमान निर्माता कंपनी बोइंग के दो कर्मचारी भी शामिल हैं। अमेरिकी वायुसेना ने अभी तक मृतकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। हादसे के बाद सैन्य और नागरिक उड्डयन विशेषज्ञों की टीम को घटनास्थल पर भेजा गया है। बोइंग ने की कर्मचारियों की मौत की पुष्टि एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने एक बयान जारी कर पुष्टि की कि दुर्घटना में उसके दो कर्मचारियों की भी जान गई है। कंपनी ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वह जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग देगी। अमेरिकी रणनीतिक शक्ति की रीढ़ है B-52 बॉम्बर B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस को अमेरिकी रणनीतिक बॉम्बर फोर्स की रीढ़ माना जाता है। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली और लंबे समय से सेवा में मौजूद सैन्य विमानों में से एक है। लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम यह बॉम्बर पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के हथियार ले जा सकता है। B-52 बॉम्बर की प्रमुख विशेषताएं लगभग 70,000 पाउंड (करीब 31,750 किलोग्राम) तक हथियार ले जाने की क्षमता। क्लस्टर बम, गाइडेड मिसाइलें और परमाणु हथियारों से लैस होने में सक्षम। बिना ईंधन भरे 8,000 मील (करीब 12,875 किलोमीटर) से अधिक दूरी तय कर सकता है। लंबी दूरी के रणनीतिक हमलों और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के लिए अमेरिकी वायुसेना का प्रमुख प्लेटफॉर्म। जांच जारी अमेरिकी वायुसेना ने कहा है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी और परिचालन दोनों पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक दुर्घटना के कारणों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी। इस हादसे ने अमेरिकी सैन्य विमानन सुरक्षा और दुनिया के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले रणनीतिक बॉम्बरों में से एक B-52 की परिचालन सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Turkish Airlines aircraft at Kathmandu airport after landing gear fire during emergency landing evacuation
काठमांडू एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला, लैंडिंग के दौरान Turkish Airlines विमान में लगी आग

नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित Tribhuvan International Airport पर सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब Turkish Airlines के एक विमान के लैंडिंग के दौरान टायर में आग लग गई। हादसे के समय विमान में 277 यात्री और 11 क्रू मेंबर सवार थे। राहत की बात यह रही कि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लैंडिंग के दौरान लगी आग अधिकारियों के अनुसार, Turkish Airlines की फ्लाइट TK726 इस्तांबुल से काठमांडू पहुंची थी। सुबह करीब 6:45 बजे विमान जैसे ही रनवे पर उतरा, उसके दाएं लैंडिंग गियर से धुआं और आग की लपटें दिखाई देने लगीं। स्थिति गंभीर होते देख एयरपोर्ट प्रशासन ने तुरंत इमरजेंसी अलर्ट जारी किया और फायर ब्रिगेड तथा रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई। इमरजेंसी दरवाजों से निकाले गए यात्री नेपाल सिविल एविएशन अथॉरिटी के सूचना अधिकारी Gyanendra Bhul ने बताया कि आग लगने के तुरंत बाद विमान के इमरजेंसी एग्जिट खोले गए और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। निकासी के दौरान कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आईं, लेकिन किसी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है। विमान में कुछ United Nations अधिकारी भी सवार बताए गए हैं। कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ एयरपोर्ट संचालन घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। सुरक्षा जांच और रनवे क्लियर होने के बाद एयरपोर्ट सेवाओं को सामान्य किया गया। 2015 में भी हुआ था बड़ा हादसा यह पहला मौका नहीं है जब Turkish Airlines का विमान काठमांडू एयरपोर्ट पर हादसे का शिकार हुआ हो। साल 2015 में घने कोहरे के बीच एयरलाइन का एक विमान रनवे से फिसल गया था। उस घटना के बाद एयरपोर्ट कई दिनों तक बंद रहा था, हालांकि तब भी कोई बड़ा जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था।  

surbhi मई 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
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संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

surbhi अगस्त 11, 2026 0