स्किनकेयर

Amahvas Ocean of Milk Retinal Serum bottle displayed with skincare essentials for acne-prone and sensitive skin.
रेटिनल सीरम का रिव्यू: क्या एक्ने-प्रोन स्किन के लिए Amahvas का Ocean of Milk है सही? जानें एक्सपर्ट्स की राय

एक्ने-प्रोन और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए रेटिनॉइड्स का इस्तेमाल अक्सर चुनौतीपूर्ण माना जाता है। जलन, लालिमा और स्किन पर्जिंग जैसी समस्याओं के कारण कई लोग इनसे दूरी बना लेते हैं। हालांकि, हाल ही में लॉन्च हुआ Amahvas Ocean of Milk Nocturnal Renewal Concentrate अपनी हल्की और बैरियर-फ्रेंडली फॉर्मूलेशन की वजह से चर्चा में है। शुरुआती अनुभव बताते हैं कि यह सीरम प्रभावी होने के साथ-साथ अपेक्षाकृत सौम्य भी है। क्या है Ocean of Milk रेटिनल सीरम? Amahvas का Ocean of Milk एक नाइट सीरम है, जिसमें 0.1% Encapsulated Retinaldehyde (रेटिनल) के साथ बायो-फर्मेंट्स, नायसिनामाइड, पीएचए, पेप्टाइड्स, ह्यूमेक्टेंट्स और अश्वगंधा जैसे तत्व शामिल किए गए हैं। ब्रांड का दावा है कि यह फॉर्मूला त्वचा की मरम्मत, टेक्सचर सुधारने और स्किन बैरियर को मजबूत बनाने में मदद करता है। रेटिनल और रेटिनॉल में क्या अंतर है? रेटिनल और रेटिनॉल दोनों ही विटामिन-A के डेरिवेटिव हैं, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली अलग होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रेटिनल (Retinaldehyde) त्वचा में सक्रिय रूप लेने के लिए केवल एक चरण से गुजरता है, जबकि रेटिनॉल को दो चरणों से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि रेटिनल कम मात्रा में भी बेहतर परिणाम दे सकता है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता के कारण सही फॉर्मूलेशन बेहद जरूरी माना जाता है ताकि त्वचा में जलन या अत्यधिक संवेदनशीलता न हो। एक्ने-प्रोन स्किन पर कैसा रहा अनुभव? रिव्यू के अनुसार, पहली बार इस्तेमाल करने पर सीरम की बनावट हल्की महसूस हुई और अगले दिन त्वचा में न तो लालिमा दिखी और न ही किसी तरह की जलन हुई। लगातार कुछ दिनों तक उपयोग करने के बाद स्किन पहले से अधिक स्मूद और संतुलित नजर आई। सबसे खास बात यह रही कि सीरम ने त्वचा पर बिना अधिक इरिटेशन के असर दिखाया, जो संवेदनशील और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए राहत की बात हो सकती है। एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं? त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि 0.1% Encapsulated Retinaldehyde एक संतुलित विकल्प माना जा सकता है, जो सामान्य रेटिनॉल और प्रिस्क्रिप्शन रेटिनॉइड्स के बीच का स्तर प्रदान करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल एक्टिव इंग्रीडिएंट ही नहीं बल्कि पूरी फॉर्मूलेशन महत्वपूर्ण होती है। यदि रेटिनल के साथ त्वचा को हाइड्रेट और शांत रखने वाले तत्व भी मौजूद हों, तो स्किन बैरियर को बेहतर सुरक्षा मिल सकती है। कैसे करें इस्तेमाल? अगर आप पहली बार रेटिनल का उपयोग कर रहे हैं, तो विशेषज्ञ इन बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं। शुरुआत सप्ताह में केवल 2 रात करें। धीरे-धीरे त्वचा की सहनशीलता के अनुसार उपयोग बढ़ाएं। हर बार मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं। दिन में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। शुरुआत में तेज एसिड या अन्य एक्टिव्स के साथ इसे एक साथ न लगाएं। क्या यह सभी के लिए सही विकल्प है? हालांकि शुरुआती अनुभव सकारात्मक रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति की त्वचा एक जैसा प्रतिक्रिया दे। कुछ लोगों को शुरुआती दिनों में हल्की पर्जिंग या छोटे ब्रेकआउट का अनुभव हो सकता है। इसलिए किसी भी नए एक्टिव स्किनकेयर प्रोडक्ट को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना और जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा। क्या है निष्कर्ष? Amahvas का Ocean of Milk उन लोगों के लिए एक दिलचस्प विकल्प बनकर सामने आया है जो रेटिनल के फायदे चाहते हैं लेकिन अत्यधिक जलन या स्किन इरिटेशन से बचना चाहते हैं। यह सीरम रातोंरात चमत्कारी बदलाव का दावा नहीं करता, बल्कि नियमित और संतुलित स्किनकेयर रूटीन के साथ धीरे-धीरे त्वचा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर देता है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Collection of lightweight SPF 50 sunscreens designed for Indian skin that blend without leaving a white cast.
भारतीय स्किन के लिए बिना व्हाइट कास्ट वाले 7 बेहतरीन सनस्क्रीन, गर्मियों और मानसून में भी देंगे दमदार सुरक्षा

तेज धूप हो या बादलों से भरा मानसून, त्वचा को सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल बेहद जरूरी माना जाता है। हालांकि, कई लोग इस वजह से सनस्क्रीन लगाने से बचते हैं क्योंकि कुछ उत्पाद चेहरे पर सफेद परत (व्हाइट कास्ट) छोड़ देते हैं, जिससे त्वचा का रंग असमान या फीका दिखाई देने लगता है। आजकल बाजार में ऐसे कई सनस्क्रीन उपलब्ध हैं, जिन्हें खासतौर पर भारतीय त्वचा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनकी हल्की बनावट त्वचा में आसानी से समा जाती है और व्हाइट कास्ट की समस्या भी नहीं होती। व्हाइट कास्ट क्या होता है? व्हाइट कास्ट वह सफेद परत होती है जो सनस्क्रीन लगाने के बाद चेहरे पर दिखाई देती है। यह समस्या आमतौर पर जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड वाले कुछ मिनरल सनस्क्रीन में अधिक देखने को मिलती है। हालांकि नई तकनीक से बने कई आधुनिक सनस्क्रीन अब इस समस्या से काफी हद तक राहत देते हैं। भारतीय त्वचा के लिए 7 अच्छे सनस्क्रीन विकल्प 1. The Derma Co 1% Hyaluronic Sunscreen Aqua Gel SPF 50 PA++++ यह जेल-बेस्ड सनस्क्रीन हल्का और नॉन-ग्रीसी है। इसमें हायलूरोनिक एसिड मौजूद है, जो त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। यह अधिकांश भारतीय स्किन टोन पर बिना व्हाइट कास्ट के आसानी से ब्लेंड हो जाता है। 2. Mamaearth Vitamin C Daily Glow Sunscreen SPF 50 विटामिन C और हल्दी से युक्त यह सनस्क्रीन त्वचा को सूरज से बचाने के साथ प्राकृतिक ग्लो देने में भी मदद करता है। इसकी हल्की बनावट रोजाना इस्तेमाल के लिए उपयुक्त मानी जाती है। 3. Bioderma Photoderm Crème Claire SPF 50+ PA++++ संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसका टिंटेड फॉर्मूला त्वचा की रंगत को समान दिखाने में मदद करता है और सफेद परत भी नहीं छोड़ता। 4. RE' EQUIL Ultra Matte Dry Touch Sunscreen SPF 50 PA++++ ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के बीच यह सनस्क्रीन काफी लोकप्रिय है। इसका मैट फिनिश लंबे समय तक त्वचा को ऑयल-फ्री रखने में मदद करता है। 5. Beauty of Joseon Relief Sun Aqua-fresh SPF 50+ PA++++ कोरियन स्किनकेयर का यह सनस्क्रीन राइस एक्सट्रैक्ट और विटामिन B5 से भरपूर है। यह त्वचा को नमी देने के साथ बिना व्हाइट कास्ट के प्राकृतिक फिनिश देता है। 6. ASAYA Spot Light Depigmenting Sunscreen SPF 50 PA++++ इसमें नियासिनामाइड और लिकोरिस एक्सट्रैक्ट जैसे तत्व शामिल हैं, जो सूरज से सुरक्षा के साथ पिग्मेंटेशन की समस्या को कम करने में भी सहायक माने जाते हैं। 7. Plum SPF 50 PA++++ Sunscreen हल्की बनावट वाला यह सनस्क्रीन सभी प्रकार की त्वचा के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह आसानी से त्वचा में समा जाता है और रोजाना इस्तेमाल के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। सनस्क्रीन खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? कम से कम SPF 30 या SPF 50 वाला सनस्क्रीन चुनें। PA+++ या PA++++ रेटिंग वाले उत्पाद को प्राथमिकता दें। अपनी त्वचा के प्रकार (ऑयली, ड्राई या सेंसिटिव) के अनुसार सनस्क्रीन चुनें। बाहर रहने पर हर 2 से 3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाएं। केवल महंगे ब्रांड पर नहीं, बल्कि उत्पाद की सामग्री और त्वचा के अनुसार उसकी उपयुक्तता पर ध्यान दें। क्या सिर्फ गर्मियों में ही सनस्क्रीन जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार, यूवी किरणें केवल गर्मियों में ही नहीं बल्कि बादलों वाले मौसम और मानसून में भी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए मौसम चाहे कोई भी हो, रोजाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। नोट: किसी भी नए स्किनकेयर उत्पाद का उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट करना और अपनी त्वचा की जरूरत के अनुसार उत्पाद चुनना बेहतर रहता है। यदि त्वचा संबंधी कोई गंभीर समस्या है, तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Woman applying sunscreen indoors near a window to protect skin from harmful UVA rays
घर के अंदर भी जरूरी है सनस्क्रीन! एक्सपर्ट्स ने बताया खिड़की के पीछे भी कैसे पहुंचती हैं UV किरणें

क्या आप भी घर में सनस्क्रीन लगाना छोड़ देते हैं? अधिकांश लोग मानते हैं कि सनस्क्रीन केवल बाहर धूप में निकलने, बीच पर जाने या आउटडोर गतिविधियों के दौरान ही जरूरी होती है। लेकिन त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। अगर आप घर के अंदर हैं, ऑफिस में काम कर रहे हैं या खिड़की के पास लंबे समय तक बैठते हैं, तब भी आपकी त्वचा हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों के संपर्क में आ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सनस्क्रीन केवल गर्मियों या धूप वाले दिनों के लिए नहीं, बल्कि हर मौसम और हर दिन की स्किनकेयर रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए। खिड़की के शीशे भी नहीं रोक पाते सभी UV किरणें त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य कांच की खिड़कियां अधिकांश UVB किरणों को रोक देती हैं, जो सनबर्न का कारण बनती हैं। लेकिन UVA किरणें आसानी से कांच के आर-पार होकर त्वचा तक पहुंच सकती हैं। यही UVA किरणें समय से पहले झुर्रियां, पिग्मेंटेशन, डार्क स्पॉट्स और त्वचा की उम्र बढ़ने जैसी समस्याओं के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से त्वचा कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। घर के अंदर भी क्यों बढ़ सकता है स्किन डैमेज? यदि आपका कार्यस्थल खिड़की के पास है, आप लंबे समय तक प्राकृतिक रोशनी वाले कमरे में बैठते हैं या अक्सर कार चलाते हैं, तो आपकी त्वचा पूरे दिन धीरे-धीरे UVA एक्सपोजर प्राप्त कर सकती है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट लंबे समय में पिग्मेंटेशन और फोटोएजिंग की समस्या को बढ़ा सकती है। ऐसे में ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का उपयोग अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकता है। किन लोगों के लिए घर के अंदर सनस्क्रीन ज्यादा जरूरी? कुछ लोगों को घर के अंदर भी नियमित रूप से सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे: जो लोग खिड़की के पास लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं। जिनकी त्वचा पर पिग्मेंटेशन, मेलाज्मा या एक्ने के निशान हैं। जो रेटिनॉल, AHA या BHA जैसे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। जो समय से पहले त्वचा की उम्र बढ़ने के संकेतों को कम करना चाहते हैं। घर के अंदर UV एक्सपोजर कम करने के आसान उपाय 1. सीधे धूप वाले स्थान से दूरी बनाएं जहां तक संभव हो, खिड़कियों से कुछ दूरी पर बैठें। इससे UV किरणों का प्रभाव काफी कम हो सकता है। 2. UV-ब्लॉकिंग विंडो फिल्म लगाएं विशेष प्रकार की पारदर्शी विंडो फिल्म 99 प्रतिशत तक UVA और UVB किरणों को रोकने में मदद कर सकती है। 3. पीक सनलाइट के समय पर्दे बंद रखें सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप सबसे तेज होती है। इस दौरान पर्दे या ब्लाइंड्स का उपयोग लाभदायक हो सकता है। 4. सही प्रकार के ग्लास का उपयोग करें लो-ई (Low-E) या लैमिनेटेड ग्लास सामान्य कांच की तुलना में अधिक UV सुरक्षा प्रदान करते हैं। 5. सुरक्षात्मक कपड़े पहनें यदि आपको लंबे समय तक खिड़की के पास बैठना पड़ता है, तो फुल स्लीव कपड़े या UV प्रोटेक्शन वाले फैब्रिक उपयोगी हो सकते हैं। त्वचा विशेषज्ञों की सलाह विशेषज्ञों का मानना है कि SPF 30 या उससे अधिक और PA+++ या PA++++ रेटिंग वाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का नियमित उपयोग त्वचा को UVA और UVB दोनों प्रकार की किरणों से बचाने में मदद करता है। घर के अंदर हों या बाहर, त्वचा की सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन को अपनी रोजाना की आदत बनाना लंबे समय में आपकी त्वचा को स्वस्थ, युवा और सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।  

surbhi जून 16, 2026 0
Woman experiencing skin irritation and burning sensation after applying moisturizer on sensitive facial skin
मॉइश्चराइजर लगाते ही होने लगती है जलन? आपकी त्वचा दे रही है ये अहम संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

ग्लोइंग और हेल्दी स्किन के लिए मॉइश्चराइजर को स्किनकेयर रूटीन का सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है। लेकिन अगर वही मॉइश्चराइजर लगाते ही त्वचा में जलन, चुभन या तीखापन महसूस होने लगे, तो यह सामान्य बात नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में आपकी त्वचा किसी गहरी समस्या का संकेत दे रही होती है। मॉइश्चराइजर से जलन क्यों होती है? त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, जब मॉइश्चराइजर लगाने पर जलन महसूस होती है तो इसका सबसे बड़ा कारण स्किन बैरियर का कमजोर या क्षतिग्रस्त होना हो सकता है। स्किन बैरियर त्वचा की बाहरी सुरक्षा परत होती है, जो नमी को बनाए रखने और बाहरी हानिकारक तत्वों को अंदर जाने से रोकने का काम करती है। जब यह सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है, तब सामान्य और हल्के उत्पाद भी त्वचा में चुभन या जलन पैदा कर सकते हैं। पहले ठीक लगने वाले उत्पाद अचानक क्यों करने लगते हैं परेशान? स्किन बैरियर खराब होने पर कई ऐसे तत्व भी त्वचा को परेशान कर सकते हैं जो पहले किसी तरह की समस्या नहीं पैदा करते थे। इनमें रेटिनॉल, विटामिन-सी, नियासिनामाइड, लैक्टिक एसिड, एएचए, सुगंध वाले उत्पाद और कुछ केमिकल सनस्क्रीन शामिल हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये तत्व अपने आप में खराब नहीं होते, लेकिन संवेदनशील या क्षतिग्रस्त त्वचा पर इनका असर अलग हो सकता है। क्या मॉइश्चराइजर लगाने पर हल्की चुभन सामान्य है? विशेषज्ञ बताते हैं कि बहुत ज्यादा रूखी त्वचा, हाल ही में एक्सफोलिएशन कराने, शेविंग के बाद या त्वचा में पहले से मौजूद जलन की स्थिति में कुछ सेकंड की हल्की झनझनाहट महसूस हो सकती है। हालांकि अगर यह जलन बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। स्किन बैरियर खराब होने के पीछे ये आदतें हैं जिम्मेदार त्वचा की सुरक्षा परत अचानक नहीं टूटती। कई छोटी-छोटी गलतियां धीरे-धीरे इसे नुकसान पहुंचाती हैं। इनमें शामिल हैं: जरूरत से ज्यादा एक्सफोलिएशन करना एक साथ कई एक्टिव इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल बार-बार चेहरा धोना कठोर फेसवॉश का उपयोग लगातार नए-नए स्किनकेयर उत्पाद बदलना पर्याप्त सनस्क्रीन न लगाना बहुत गर्म पानी से चेहरा धोना विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतर लोगों के लिए क्लेंजिंग, मॉइश्चराइजिंग और सन प्रोटेक्शन पर आधारित सरल स्किनकेयर रूटीन ही पर्याप्त होता है। स्किन बैरियर को कैसे करें रिपेयर? अगर आपकी त्वचा मॉइश्चराइजर से जलन महसूस करा रही है, तो सबसे पहले स्किनकेयर रूटीन को सरल बनाना जरूरी है। कुछ दिनों के लिए रेटिनॉल, विटामिन-सी, ग्लाइकोलिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड, स्क्रब और केमिकल पील जैसे एक्टिव उत्पादों का इस्तेमाल बंद कर दें। इसके बजाय: माइल्ड क्लेंजर का उपयोग करें सेरामाइड्स युक्त बैरियर-रिपेयर मॉइश्चराइजर लगाएं मिनरल सनस्क्रीन चुनें सुगंध वाले उत्पादों से दूरी बनाएं गर्म पानी की जगह गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है? यदि मॉइश्चराइजर लगाने पर लगातार जलन बनी रहती है, तो यह एक्जिमा, रोसैशिया या डर्मेटाइटिस जैसी त्वचा संबंधी बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। कम उत्पाद, ज्यादा फायदा आजकल लंबी और जटिल स्किनकेयर रूटीन का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि हर त्वचा को दर्जनों उत्पादों की जरूरत नहीं होती। कई बार कम उत्पादों वाला संतुलित रूटीन ही त्वचा को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका साबित होता है। यदि आपका मॉइश्चराइजर अचानक चुभने लगे, तो नया प्रोडक्ट खरीदने से पहले अपनी त्वचा की वास्तविक जरूरतों को समझना ज्यादा जरूरी है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Collection of popular Korean sunscreens suitable for Indian skin with SPF 50+ protection
भारतीय त्वचा के लिए 11 बेहतरीन कोरियाई सनस्क्रीन, न चिपचिपाहट की परेशानी और न सफेद परत की चिंता

भारतीय मौसम में सही सनस्क्रीन चुनना आसान नहीं होता। तेज धूप, उमस, पसीना और प्रदूषण के बीच ऐसा उत्पाद चाहिए जो त्वचा को प्रभावी सुरक्षा दे और चेहरे पर भारी भी न लगे। भारतीय त्वचा के लिए सनस्क्रीन सिर्फ धूप से बचाव का साधन नहीं है, बल्कि यह टैनिंग, पिग्मेंटेशन, मुंहासों के निशान और असमान त्वचा रंगत जैसी समस्याओं को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में कोरियाई ब्यूटी उत्पादों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। इनके सनस्क्रीन हल्के, त्वचा में आसानी से घुलने वाले और त्वचा की देखभाल करने वाले तत्वों से भरपूर होते हैं। सनस्क्रीन चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान? एसपीएफ 50+ और पीए++++ सुरक्षा को प्राथमिकता दें। तैलीय और मुंहासे वाली त्वचा के लिए रोमछिद्र बंद न करने वाला फॉर्मूला चुनें। संवेदनशील त्वचा के लिए खुशबू रहित या मिनरल आधारित सनस्क्रीन बेहतर विकल्प हो सकते हैं। ऐसा सनस्क्रीन चुनें जो चेहरे पर सफेद परत न छोड़े। गर्म और उमस भरे मौसम के लिए नॉन-स्टिकी यानी बिना चिपचिपाहट वाला फिनिश जरूरी है। भारतीय त्वचा के लिए 11 बेहतरीन कोरियाई सनस्क्रीन 1. मैरी एंड मे सिका सूदिंग सन क्रीम एसपीएफ 50+ पीए++++ संवेदनशील और जल्दी प्रतिक्रिया देने वाली त्वचा के लिए यह बेहतरीन विकल्प माना जाता है। इसमें सिका कॉम्प्लेक्स और नियासिनामाइड मौजूद हैं, जो त्वचा को शांत रखने में मदद करते हैं। खासियत: हल्की बनावट और रोजाना उपयोग के लिए उपयुक्त। 2. क्लेयर्स ऑल-डे एयरी मिनरल सनस्क्रीन एसपीएफ 50+ पीए++++ जिंक ऑक्साइड आधारित यह मिनरल सनस्क्रीन मुंहासे वाली और संवेदनशील त्वचा के लिए अच्छा विकल्प है। खासियत: रोमछिद्र बंद नहीं करता और हल्का टोन-अप प्रभाव देता है। 3. टॉरिडेन डाइव-इन मॉइस्चर सन क्रीम एसपीएफ 50+ पीए++++ रूखी और नमी की कमी वाली त्वचा के लिए तैयार इस सनस्क्रीन में हायलूरोनिक एसिड, एलांटोइन और पैंथेनॉल शामिल हैं। खासियत: मॉइस्चराइजर जैसा एहसास और मेकअप के नीचे भी आसानी से लगाया जा सकता है। 4. बिलीफ यूवी प्रोटेक्टर लेपोर्ट्स सनस्क्रीन एसपीएफ 50+ पीए++++ यह बाहर अधिक समय बिताने वाले लोगों और खेल गतिविधियों के लिए उपयुक्त है। खासियत: पसीने और पानी के प्रति प्रतिरोधी फॉर्मूला। 5. एक्सिस-वाई कम्प्लीट नो-स्ट्रेस फिजिकल सनस्क्रीन एसपीएफ 50+ पीए++++ मिनरल सनस्क्रीन पसंद करने वालों के लिए यह हल्का और त्वचा के अनुकूल विकल्प है। खासियत: नियासिनामाइड, स्क्वालेन और हायलूरोनिक एसिड से भरपूर। 6. द फेस शॉप वीटा ड्रॉप सनक्विड एसपीएफ 50+ पीए++++ अत्यंत हल्की तरल बनावट वाला यह सनस्क्रीन त्वचा पर लगभग महसूस ही नहीं होता। खासियत: सफेद परत नहीं छोड़ता और त्वचा को निखारने वाले तत्वों से भरपूर है। 7. लेनिज रेडियन-सी सन क्रीम एसपीएफ 50+ पीए++++ बेजान और थकी हुई त्वचा में चमक लाने के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जाता है। खासियत: विटामिन सी, विटामिन ई और हायलूरोनिक एसिड का मिश्रण। 8. इनिसफ्री यूवी एक्टिव पोरलेस सनस्क्रीन यह सनस्क्रीन मेकअप प्राइमर जैसा मुलायम फिनिश देता है। खासियत: रोमछिद्रों को स्मूद दिखाने में मदद और एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा। 9. राउंड लैब बर्च जूस मॉइस्चराइजिंग सनस्क्रीन दुनियाभर में लोकप्रिय यह सनस्क्रीन सामान्य और रूखी त्वचा वालों की पसंद है। खासियत: मॉइस्चराइजर और धूप से सुरक्षा का बेहतरीन संयोजन। 10. स्किन1004 मेडागास्कर सेंटेला हायलू-सिका वॉटर-फिट सन सीरम एसपीएफ 50+ पीए++++ यदि आपको सीरम जैसी हल्की बनावट पसंद है, तो यह विकल्प आपके लिए उपयुक्त है। खासियत: सेंटेला और हायलूरोनिक एसिड से भरपूर तथा अल्कोहल-रहित फॉर्मूला। 11. ब्यूटी ऑफ जोसियन रिलीफ सन राइस + प्रोबायोटिक्स एसपीएफ 50+ पीए++++ यह दुनिया के सबसे लोकप्रिय कोरियाई सनस्क्रीन में से एक माना जाता है। खासियत: चावल के अर्क, प्रोबायोटिक्स, नियासिनामाइड और विटामिन ई के साथ बिना सफेद परत वाला फॉर्मूला। आपकी त्वचा के लिए कौन सा विकल्प बेहतर? तैलीय त्वचा: ब्यूटी ऑफ जोसियन, द फेस शॉप वीटा ड्रॉप सनक्विड, स्किन1004 रूखी त्वचा: राउंड लैब बर्च जूस, टॉरिडेन डाइव-इन संवेदनशील त्वचा: मैरी एंड मे सिका, क्लेयर्स एयरी मिनरल बाहरी गतिविधियों के लिए: बिलीफ यूवी प्रोटेक्टर लेपोर्ट्स पिग्मेंटेशन की समस्या के लिए: ब्यूटी ऑफ जोसियन और लेनिज रेडियन-सी सनस्क्रीन केवल एक सौंदर्य उत्पाद नहीं है, बल्कि त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने, टैनिंग और पिग्मेंटेशन से बचाने का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है। इसलिए अपनी त्वचा के प्रकार और मौसम को ध्यान में रखते हुए सही सनस्क्रीन का चयन करना बेहद जरूरी है।  

surbhi जून 3, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0