हेमंत सोरेन

Hemant Soren
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक को दी श्रद्धांजलि

रांची। झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मन्नान मल्लिक के निधन पर पूरे राज्य में शोक की लहर है। मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन विधानसभा पहुंचे, जहां उन्होंने दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने मन्नान मल्लिक के निधन को झारखंड की राजनीति और जनजीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि राज्य ने एक अनुभवी जनप्रतिनिधि और समाज के प्रति समर्पित नेता को खो दिया है।   विधानसभा में दी अंतिम श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें अंतिम नमन किया। इस दौरान विधायक कल्पना सोरेन भी उनके साथ मौजूद रहीं। दोनों ने दिवंगत नेता के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।   परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढ़स श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री और विधायक कल्पना सोरेन ने मन्नान मल्लिक के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार के सदस्यों को इस कठिन समय में ढांढ़स बंधाया और गहरी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईश्वर शोक संतप्त परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।   'जनता की आवाज बुलंद करने वाले नेता थे मन्नान मल्लिक' मुख्यमंत्री ने कहा कि मन्नान मल्लिक लंबे समय तक जनसेवा और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। उन्होंने विशेष रूप से धनबाद सहित पूरे झारखंड की जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाया और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई। उनका योगदान राज्य की राजनीति में हमेशा याद रखा जाएगा।   लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन गौरतलब है कि 83 वर्षीय मन्नान मल्लिक पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और रांची के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Hemant Soren
सीएम हेमंत ने विश्वविद्यालयों में रिक्तियां भरने, ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने और तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने के दिए निर्देश

रांची। झारखंड में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कई अहम फैसले लिए हैं। सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में आयोजित उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को भरने, झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग को 15 दिनों के भीतर प्रभावी बनाने और शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लाइव ऑनलाइन क्लास शुरू करने के निर्देश दिए। बैठक में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।   ऑनलाइन शिक्षा और छात्रावासों पर विशेष जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को माइनिंग आधारित पहचान से आगे बढ़ाकर ज्ञान आधारित राज्य बनाना होगा। इसके लिए विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की रिक्तियां शीघ्र भरने के निर्देश दिए गए। साथ ही छात्रावासों की स्थिति की समीक्षा कर उन्हें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित करने की पहल करने को कहा गया। पायलट प्रोजेक्ट के तहत झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय और बीबीएमके, धनबाद से लाइव ऑनलाइन क्लास की शुरुआत की जाएगी।   बीआईटी सिंदरी को मिलेगा विश्वविद्यालय का दर्जा बैठक में मुख्यमंत्री ने बीआईटी सिंदरी को यूनिटरी विश्वविद्यालय के रूप में अपग्रेड करने पर सहमति दी। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही संबंधित विधेयक लाएगी। साथ ही कोचिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी को अगले 15 दिनों में पूरी तरह कार्यरत करने और राज्य में रोबोटिक्स फेस्टिवल शुरू करने की भी घोषणा की गई।   तकनीकी शिक्षा क्लस्टर और नए पाठ्यक्रम होंगे शुरू मुख्यमंत्री ने पलामू, गिरिडीह, रामगढ़, गुमला, रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा और साहिबगंज सहित नौ जिलों में तकनीकी शिक्षा क्लस्टर विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों को बीआईटी सिंदरी की तर्ज पर उन्नत बनाने तथा इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स एंड शिपिंग और टेक्सटाइल डिजाइन जैसे आधुनिक विषय शुरू करने पर जोर दिया। इसके अलावा गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने और दुमका फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के छात्रों को भी इस योजना से जोड़ने के निर्देश दिए गए।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Jharkhand Government Recruitment
झारखंड में बड़े पैमाने पर सरकारी नियुक्तियों की तैयारी, 25 हजार पदों पर जल्द भर्ती संभव

रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़ी पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सभी विभागों में रिक्तियों का आकलन कर भर्ती प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को अधिक से अधिक सरकारी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।   सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 3,51,968 नियमित पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 1,87,610 पदों पर ही कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं। यानी बड़ी संख्या में पद अब भी खाली पड़े हैं। सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में हैं, जिससे सरकारी सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।   जेपीएससी और जेएसएससी को मिली तेजी लाने की जिम्मेदारी सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को पहले से विज्ञापित पदों की परीक्षाएं जल्द कराने और चयन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया है। विभागों से प्राप्त रिक्तियों के आधार पर नई अधियाचनाएं भी भेजी जाएंगी।   इन पदों पर होगी नियुक्ति भर्ती अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में सहायक शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सक, नर्स और मेडिकल स्टाफ, तथा सड़क, पुल और पुलिया निर्माण कार्यों के लिए अभियंता और तकनीकी कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ी तो स्वतंत्रता दिवस के आसपास करीब 25 हजार नई नियुक्तियां की घोषणा की जा सकती है।   वित्त मंत्री ने क्या कहा वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य गठन के बाद पहली बार किसी सरकार ने मानव संसाधन की कमी दूर करने पर इतने बड़े स्तर पर ध्यान दिया है। उनके अनुसार वर्तमान कार्यकाल में 40 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं और सरकार आने वाले वर्षों में स्वीकृत पदों को अधिकतम संख्या में भरने के लिए तेजी से काम करेगी।   सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर होने वाली यह भर्ती न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी।

abhishek singh जुलाई 12, 2026 0
Jharkhand ACB Trap
रांची में एसीबी का बड़ा ट्रैप, घूस लेते सीओ समेत तीन अधिकारी गिरफ्तार

रांची। झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) रांची ने बुढ़मू अंचल कार्यालय में बड़ी कार्रवाई की है। जमीन के म्यूटेशन के नाम पर रिश्वत मांगने के मामले में एसीबी ने पहले एक आरोपी को 10 हजार रुपये की घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। इसके बाद जांच में आरोप सही पाए जाने पर राजस्व कर्मचारी और अंचल अधिकारी (सीओ) को भी गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।   म्यूटेशन के लिए मांगी गई थी मोटी रकम एसीबी के अनुसार, मांडर थाना क्षेत्र के ब्रांबे निवासी सुबोध कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बुढ़मू प्रखंड के मौजा सासम स्थित उनकी 3 एकड़ 20 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री पत्नी और अन्य परिजनों के नाम हो चुकी थी। रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन के लिए आवेदन भी जमा कर दिया गया, लेकिन लंबे समय तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।   शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अंचल कार्यालय में संपर्क करने पर उन्हें भू-राजस्व कर्मचारी राजेश कुमार के पास भेजा गया। राजेश कुमार ने म्यूटेशन कराने के लिए 80 से 90 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। बाद में उसके भाई गौतम कुमार ने पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये देने को कहा और आश्वासन दिया कि इसके बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी जाएगी।   ट्रैप में रंगेहाथ गिरफ्तारी, फिर सीओ भी गिरफ्तार रिश्वत देने के बजाय शिकायतकर्ता ने एसीबी से संपर्क किया। सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद एसीबी ने जाल बिछाकर गौतम कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर राजस्व उप-निरीक्षक राजेश कुमार और बुढ़मू के अंचल अधिकारी सच्चिदानंद कुमार वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया।   एसीबी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7(ए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। ब्यूरो का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
Jamshedpur Nuclear Plant
झारखंड में 70 हजार करोड़ का निवेश, जमशेदपुर बनेगा न्यूक्लियर पावर हब

रांची। झारखंड के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने जा रही है। दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन के दौरान नवीन जिंदल ग्रुप ने झारखंड सरकार के साथ 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया है। यह निवेश स्टील, न्यूक्लियर एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्रों में किया जाएगा। इस परियोजना से राज्य में 11 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।   जमशेदपुर में लगेगा राज्य का पहला न्यूक्लियर प्लांट एमओयू के तहत झारखंड में 1400 मेगावाट क्षमता का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने की योजना है। राज्य सरकार ने इसके लिए जमशेदपुर को उपयुक्त स्थान के रूप में सुझाया है। इसके अलावा गोड्डा के जीतपुर में 140 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा, जहां कंपनी के पास पहले से लगभग 400 एकड़ भूमि उपलब्ध है। वहीं पतरातू स्थित स्टील प्लांट के विस्तार पर 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।   सीएम बोले- आत्मनिर्भर झारखंड की दिशा में बड़ा कदम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस निवेश को राज्य के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि झारखंड अब केवल संसाधन उपलब्ध कराने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि आत्मनिर्भर और औद्योगिक रूप से मजबूत राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जनहित और राज्य के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर निवेश को बढ़ावा दे रही है।   पर्यटन और हरित ऊर्जा पर भी फोकस नवीन जिंदल ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि यह समझौता झारखंड के उज्ज्वल भविष्य में उनके विश्वास का प्रतीक है। वहीं परामर्श बैठक में राज्य को पर्यटन और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने पर भी चर्चा हुई। वर्ष 2024 में झारखंड में 5.85 करोड़ पर्यटक पहुंचे, जिनमें 4.40 करोड़ श्रद्धालु शामिल थे। फिक्की ने रांची में गोल्फ पर्यटन विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जबकि सीआईआई ने सौर एवं पवन ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग की पेशकश की। सरकार ने निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
National Stakeholders Consultation-2026
दिल्ली में राष्ट्रीय मंच पर छाया सरायकेला छऊ, पारंपरिक मुखौटों ने जीता देश-विदेश के प्रतिनिधियों का दिल

रांची। नई दिल्ली के ताज पैलेस में 8 और 9 जुलाई को आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 में झारखंड की विश्व प्रसिद्ध सरायकेला छऊ कला ने अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई। जहां एक ओर देश-विदेश के उद्योगपति और निवेशक झारखंड में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर सरायकेला के युवा मुखौटा शिल्पकार सुमित महापात्र और उनकी टीम ने पारंपरिक छऊ मुखौटों के प्रदर्शन से सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।   कार्यक्रम में प्रदर्शित रंग-बिरंगे हस्तनिर्मित छऊ मुखौटे प्रतिनिधियों, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे। सुमित महापात्र ने आगंतुकों को सरायकेला छऊ नृत्य की समृद्ध परंपरा, मुखौटा निर्माण की जटिल प्रक्रिया तथा इसके सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिनिधियों ने मुखौटों की बारीक शिल्पकारी और पारंपरिक रंग-संयोजन की जमकर सराहना की।   150 पारंपरिक मुखौटों ने छोड़ी अमिट छाप   सम्मेलन में देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को भगवान श्रीकृष्ण स्वरूप के 150 पारंपरिक छऊ मुखौटे स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट किए गए। सुमित महापात्र और उनकी टीम द्वारा तैयार इन मुखौटों ने झारखंड की लोक कला की उत्कृष्टता को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कई प्रतिनिधियों ने मुखौटों की निर्माण तकनीक और सरायकेला छऊ की ऐतिहासिक विरासत के बारे में विशेष रुचि दिखाई।   मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में आयोजित इस दो दिवसीय समिट का मुख्य उद्देश्य झारखंड में निवेश को बढ़ावा देना था, लेकिन इसके साथ राज्य की कला और संस्कृति को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे राष्ट्रीय आयोजनों में सरायकेला छऊ जैसी लोक कला को मंच मिलने से स्थानीय कलाकारों को नई पहचान मिलेगी, हस्तशिल्प को बाजार मिलेगा और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि झारखंड केवल खनिज और औद्योगिक संसाधनों का ही नहीं, बल्कि समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Khel Gaon
रांची का खेल गांव बदहाली की मार: इंडोर स्टेडियम की छत टपकी, बाहर भरा पानी

रांची। रांची के होटवार स्थित करीब 650 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित खेल गांव की बदहाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 34वें राष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार किए गए इस विश्वस्तरीय खेल परिसर पर हर साल 15 करोड़ रुपये से अधिक रखरखाव का खर्च किया जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में इसकी वास्तविक स्थिति चिंताजनक नजर आ रही है। मुख्य एथलेटिक्स स्टेडियम के बाहर जलजमाव ने पूरे परिसर को तालाब में तब्दील कर दिया है, जबकि हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम की छत से बारिश का पानी झरने की तरह टपकता रहा। इससे वुडेन कोर्ट पर पानी भर गया और खेल गतिविधियां प्रभावित हुईं।   खिलाड़ियों ने जताई चिंता, खेल सुविधाओं को नुकसान का खतरा खिलाड़ियों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी और मरम्मत की व्यवस्था नहीं की गई तो सिंथेटिक ट्रैक, वुडेन कोर्ट और अन्य खेल सुविधाओं को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। खेल गांव का रखरखाव सीसीएल के अधीन गठित लोकल मैनेजमेंट कमेटी (एलएमसी) करती है, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सुविधाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पिछले कई वर्षों से जल निकासी, टूटती संरचनाओं और रखरखाव में लापरवाही को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका।   मुख्यमंत्री की फटकार के बाद भी नहीं सुधरे हालात हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने टिकैत उमराव सिंह शूटिंग रेंज के निरीक्षण के दौरान खेल परिसरों के खराब रखरखाव पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी और व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद खेल गांव की मौजूदा स्थिति बताती है कि निर्देशों का अपेक्षित असर जमीन पर नहीं दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड की सबसे बड़ी खेल परिसंपत्ति को बचाने के लिए रखरखाव पर होने वाले खर्च की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि करोड़ों रुपये की इस खेल अधोसंरचना को उपेक्षा के कारण नुकसान से बचाया जा सके।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Ranchi Hospital News
रांची के निजी अस्पताल में किशोर की मौत पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सख्त, ₹22 लाख के बिल और लापरवाही के आरोपों की जांच के आदेश

रांची। रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक किशोर की मौत और परिजनों से करीब ₹22 लाख का बिल वसूले जाने के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और यदि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।    परिजनों ने लगाया लापरवाही और अधिक बिल वसूलने का आरोप   मृतक किशोर के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने इलाज में लापरवाही बरती और कई दिनों तक भर्ती रखने के बाद करीब 22 लाख रुपये का बिल थमा दिया। उनका कहना है कि उचित इलाज नहीं मिलने के कारण किशोर की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने विरोध प्रदर्शन भी किया।    स्वास्थ्य विभाग को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश   मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को अस्पताल के इलाज, बिलिंग प्रक्रिया और चिकित्सकीय रिकॉर्ड की समीक्षा कर जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या मेडिकल प्रोटोकॉल के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।    निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर फिर उठे सवाल   इस घटना के बाद राज्य में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और इलाज की लागत को लेकर बहस तेज हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मामलों में पारदर्शिता, समय पर इलाज और उचित बिलिंग सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि दोषी पाए जाने पर किसी भी स्तर पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
Hemant Soren Babulal Marandi
जमशेदपुर घटना पर गरजे बाबूलाल, बोले - इसके जिम्मेदार हेमंत सरकार

गिरिडीह। झारखंड में कानून व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) व्यवस्था पर प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके सामने बेबस नजर आते हैं।   जमशेदपुर हत्याकांड को लेकर सरकार पर निशाना बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में जमशेदपुर में हुई करणी सेना के एक नेता की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। उनके अनुसार, मामले में सिर्फ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) का तबादला कर देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की मौजूदगी में हत्या होती है तो जवाबदेही भी पुलिस की तय होनी चाहिए।   एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल मरांडी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद होटल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। उनका कहना था कि केवल प्रशासनिक बदलाव से कानून व्यवस्था में सुधार नहीं होगा।   सरकार से जवाबदेही की मांग नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की है। उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पुलिस की जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।   गौरतलब है कि हाल ही में जमशेदपुर में एक बार के बाहर चाकूबाजी की घटना में घायल हुए हिमांशु की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Kalpana Soren Hemant Soren
सीएम हेमंत और विधायक कल्पना ने भरा SIR फॉर्म, राज्यवासियों से समय पर सत्यापन कराने की अपील

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत स्वयं एन्यूमरेशन (गणना) प्रपत्र भरकर राज्यवासियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, कांके रोड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं से समय पर एसआईआर प्रपत्र भरने और मतदाता सूची में दर्ज अपनी जानकारी का सत्यापन कराने की अपील की। इस अवसर पर उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपना एसआईआर फॉर्म भरकर अभियान में भागीदारी निभाई।   हर पात्र मतदाता निभाए अपनी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदान का अधिकार सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है और शुद्ध, अद्यतन तथा त्रुटिरहित मतदाता सूची स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव की आधारशिला होती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे स्वयं सत्यापन कराने के साथ अपने परिवार, पड़ोस और समाज के अन्य पात्र मतदाताओं को भी एसआईआर अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।   घर-घर पहुंच रहे हैं बीएलओ कार्यक्रम के दौरान 64-हटिया विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या-290 की बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने अपना प्रपत्र भरा। निर्वाचन आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत राज्यभर में बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं और मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए।   निर्वाचन अधिकारियों की रही मौजूदगी कार्यक्रम में रांची के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रजत, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ)-सह-अपर समाहर्ता धनंजय, उप निर्वाचन पदाधिकारी विवेक कुमार सुमन तथा बीएलओ वेरोनिका देवी सहित निर्वाचन विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाना है, जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सके।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
East Singhbhum SSP Saraikela SP
अपराध पर जीरो टॉलरेंस! हेमंत सोरेन ने पूर्वी सिंहभूम के SSP और सरायकेला SP को हटाया

रांची। झारखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। देर रात जारी आदेश में पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक (SP) को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने दोनों अधिकारियों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।   वरिष्ठ अधिकारियों को दिए विशेष निर्देश मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने चाईबासा आयुक्त और रांची के एडीजी को संबंधित क्षेत्र में कैंप कर प्रतिदिन हालात की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा जमशेदपुर के डीआईजी को भी शहर में रहकर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई की लगातार निगरानी करने के आदेश दिए गए हैं।   जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के लिए जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी और कानून तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही या जवाबदेही से बचने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   कानून-व्यवस्था मजबूत करने पर सरकार का जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अपराध नियंत्रण और बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों को जवाबदेह बनाते हुए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई को राज्य में पुलिस प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाने और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी यदि किसी जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
Hemant Soren
झारखंड में 1,042 नए शिक्षकों की होगी नियुक्ति, 29 जून को सीएम हेमंत सोरेन देंगे नियुक्ति पत्र

रांची। झारखंड के सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में राज्य सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 29 जून को राजधानी रांची के खेलगांव में आयोजित समारोह में 1,042 नवनियुक्त सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। दोपहर एक बजे होने वाले इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित अभ्यर्थी शामिल होंगे। सभी जिला स्थापना समितियों ने अपनी अनुशंसाएं प्राथमिक शिक्षा निदेशालय को भेज दी हैं, जिसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।   कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में होगी नियुक्ति इस चरण में कक्षा 1 से 5 तक के लिए 274 सहायक आचार्यों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि कक्षा 6 से 8 तक के लिए 768 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलेगा। सरकार का मानना है कि इन नियुक्तियों से लंबे समय से रिक्त पड़े पद भरेंगे और सरकारी विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी।   सामाजिक विज्ञान में सबसे ज्यादा शिक्षक कक्षा 6 से 8 के लिए विषयवार नियुक्तियों में सामाजिक विज्ञान के 387 शिक्षकों की नियुक्ति होगी, जो सबसे अधिक है। इसके अलावा गणित एवं विज्ञान के 231 तथा भाषा विषय के 150 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। इससे विद्यालयों में सभी प्रमुख विषयों के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।   पलामू में सबसे अधिक, रामगढ़ में सबसे कम नियुक्तियां जिलावार आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 123 शिक्षकों की नियुक्ति पलामू में होगी। इसके बाद गिरिडीह (92), कोडरमा (81), साहिबगंज (63), पश्चिमी सिंहभूम (61), देवघर (59), दुमका (54), गोड्डा (53) और पाकुड़ (51) में नियुक्तियां होंगी। वहीं रामगढ़ में केवल चार शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।   26 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जारी राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में करीब 26 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। अब तक लगभग 12,500 शिक्षकों को नियुक्ति मिल चुकी है। 29 जून को 1,042 और शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद यह संख्या और बढ़ जाएगी। शिक्षा विभाग का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से सभी रिक्त पदों को भरकर सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।

abhishek singh जून 26, 2026 0
India One Air
इंडिया वन एयर ने जमशेदपुर-कोलकाता उड़ान सेवा की स्थगित, वीजीएफ सपोर्ट खत्म होने से बढ़ी मुश्किलें

जमशेदपुर। झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच हवाई संपर्क को बड़ा झटका लगा है। इंडिया वन एयर ने जमशेदपुर-कोलकाता के बीच संचालित अपनी सीधी उड़ान सेवा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। एयरलाइन ने इस फैसले के पीछे पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) बंद किए जाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने को प्रमुख वजह बताया है। इस निर्णय से दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।   तीन साल बाद खत्म हुआ वीजीएफ सपोर्ट एयरलाइन के अनुसार यह उड़ान केंद्र सरकार की उड़ान (UDAN)-रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) के तहत शुरू की गई थी। इस योजना में चयनित क्षेत्रीय मार्गों पर तीन वर्षों तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद एयरलाइन को बिना सरकारी सहायता के सेवा संचालित करनी थी। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वीजीएफ सहायता आगे नहीं बढ़ाने और परिचालन लागत बढ़ने के कारण इस रूट पर उड़ान जारी रखना आर्थिक रूप से कठिन हो गया।   व्यापार, शिक्षा और इलाज के लिए बढ़ेगी परेशानी जमशेदपुर-कोलकाता सीधी उड़ान का सबसे अधिक लाभ व्यवसायियों, छात्रों, मरीजों और पर्यटकों को मिलता था। यह सेवा झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर को पूर्वी भारत के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र कोलकाता से जोड़ती थी। उड़ान बंद होने से नियमित यात्रियों को अब सड़क या रेल मार्ग का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे।   फरवरी 2023 में हुई थी शुरुआत इस उड़ान सेवा की शुरुआत फरवरी 2023 में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की थी। इसे झारखंड के क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया था। फिलहाल एयरलाइन ने सेवा दोबारा शुरू करने की कोई समयसीमा घोषित नहीं की है। इस बीच क्षेत्रीय हवाई मार्गों के लिए सरकारी वित्तीय सहायता जारी रखने की मांग फिर से तेज हो गई है।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Hemant Soren Fathers Day Special
फादर्स डे पर सीएम हेमंत का भावुक संदेश-पिता संघर्ष और संस्कार की पाठशाला

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फादर्स डे पर भावुक संदेश पोस्ट किया। सीएम ने अपने पिता और झारखंड आंदोलनकारी दिशोम गुरु स्व शिबू सोरेन को याद करते लिखा कि उनके पिता ने उन्हें सिर्फ मार्गदर्शक ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का स्वाभिमान बताया है। जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत मुख्यमंत्री ने लिखा कि पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस, संकल्प और संस्कार की ऐसी पाठशाला हैं, जहां जीवन जीने का सबसे बड़ा ज्ञान मिलता है। उन्होंने कहा कि बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने हमेशा सिखाया कि जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत होती है और अपने राज्य व लोगों के अधिकारों के लिए हर परिस्थिति में डटकर खड़ा रहना ही सच्ची जनसेवा है। भावुक कविता साझा की हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में एक भावुक कविता भी साझा की, जिसमें उन्होंने अपने पिता को तपती धूप में बरगद जैसी छाया, संघर्ष की राह में अटूट हौसला और समाज का स्वाभिमान बताया।   संघर्ष, त्याग, विचार और आशीर्वाद से ही उन्हें जनसेवा का मार्ग मिला सीएम ने अपने पोस्ट में एक खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली कविता भी साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा है- “तपती धूप में बरगद-सी छाया हैं बाबा, संघर्ष की राह में अटूट हौसला हैं बाबा। हमारी सोच, हमारे संस्कार, हमारी पहचान हैं बाबा, एक पिता ही नहीं, पूरे समाज का स्वाभिमान हैं बाबा।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिता के संघर्ष, त्याग, विचार और आशीर्वाद से ही उन्हें जनसेवा का मार्ग मिला। फादर्स डे पर किया गया यह भावनात्मक पोस्ट लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और बड़ी संख्या में लोग इसे साझा कर रहे हैं।

abhishek singh जून 22, 2026 0
Saryu Roy Hemant Soren
झारखंडः हेमंत को सरयू राय के ऑफर पर भड़की कांग्रेस

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के बाद से ही सियासी हलचल जारी है। जदयू विधायक सरयू राय की ओर से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ये सुझाव दिया गया कि वो कांग्रेस से नाता तोड़ लें। सरयू राय का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा के बिना भी राज्य में गठबंधन की सरकार आराम से चल सकती है। जेएमएम के 34, राजद के 4, भाकपा-माले के 2 विधायकों को मिलाकर संख्या 40 तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा जदयू और जेएलकेएम के एक विधायक के समर्थन से ये आंकड़ा 42 तक पहुंच जाएगा, जो बहुमत से लिए पर्याप्त है।   सरयू राय ने क्या अमित शाह से अनुमति ली है? जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय के इस सुझाव के बाद जेएमएम की ओर से तो कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस भड़क गई है। कांग्रेस की ओर से सरयू राय के सुझाव के बयान पर कड़ा पलटवार किया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के महासचिव और मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि झारखंड में सरकार बनाने का जो फॉर्मूला सरयू राय दे रहे हैं, क्या उसके लिए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुमति ले ली है? झारखंड में बीजेपी का मंसूबा सफल नहीं होगा-कांग्रेस... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा और एनडीए नेताओं की सत्तालोलुपता भी साफ देखी जा सकती है, लेकिन वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड की जनता ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने का जनादेश दिया था और आने वाले समय में भी बीजेपी का नापाक मंसूबा झारखंड में सफल नहीं होगा। सरयू राय को क्या पूरे एनडीए का समर्थन है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि सरयू राय को सबसे पहले जनता को यह बताना चाहिए कि वे किस गठबंधन और किस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने कहा कि वे जिस समर्थन की बात कर रहे हैं, क्या उनके साथ पूरा एनडीए गठबंधन भी इस ओर कदम बढ़ा रहा है, या फिर यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत कल्पना मात्र है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि विपक्ष चाहे जितने हथकंडे अपना ले, चुनी हुई सरकार को गिराने की उनकी मंशा कभी कामयाब नहीं होगी। सरयू राय के फॉर्मूला की कोई विश्वसनीयता नहीं... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राजनीति में नए साथियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन क्या इंडी गठबंधन के अन्य घटक दल राजद और भाकपा-माले भी इस बात से सहमत हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहा है। लाल किशोर नाथ शाहदेव ने साफ तौर पर कहा कि सरयू राय जो फॉर्मूला पेश कर रहे हैं, उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।

abhishek singh जून 22, 2026 0
Hemant Soren Saryu Rai
क्या झारखंड में माइनस बीजेपी व माइनस कांग्रेस सरकार चलेगी?

सरयू राय ने  हेमंत सोरेन को दिया ये ऑफर  रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर सियासी हलचल और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी बीच जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन  को कांग्रेस के बिना सरकार चलाने की सलाह देकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। सरयू राय का कहना है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार के सुचारु संचालन में बाधा बन रहा है और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के बिना भी स्थिर सरकार बनाई जा सकती है।   सरयू राय ने राजनीतिक गणित भी पेश किया सरयू राय ने राज्यसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार को उनकी ही पार्टी के विधायकों का पूरा समर्थन नहीं मिला। उनके मुताबिक, मतदान के दौरान गठबंधन की अपेक्षित एकजुटता नहीं दिखी, जिससे कांग्रेस की आंतरिक स्थिति और अनुशासन पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि क्रॉस वोटिंग की घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि कांग्रेस संगठन के भीतर तालमेल की कमी है और इसका असर गठबंधन की मजबूती पर पड़ा है। सरयू राय ने सरकार गठन का नया राजनीतिक गणित भी पेश किया। उन्होंने कहा कि झामुमो के 34 विधायक, राजद के 4 विधायक और भाकपा (माले) के 2 विधायक मिलाकर कुल 40 विधायकों का समर्थन पहले से उपलब्ध है। यदि उनका समर्थन जोड़ लिया जाए तो संख्या 41 तक पहुंच जाती है, जो सरकार के लिए आवश्यक बहुमत है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जयराम महतो समर्थन देते हैं तो यह आंकड़ा 42 हो जाएगा। राय का दावा है कि जरूरत पड़ने पर अन्य विधायकों का सहयोग भी प्राप्त किया जा सकता है।   यह सरयू राय की पहली सलाह नहीं  बता दे यह पहली बार नहीं है जब सरयू राय ने हेमंत सोरेन को इस तरह की सलाह दी हो। वर्ष 2019 में भाजपा छोड़ने के बाद से वह कई बार सरकार को विभिन्न मुद्दों पर सुझाव देते रहे हैं। जुलाई 2024 में हेमंत सोरेन के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से सलाह दी थी कि सरकार को दलालों और भ्रष्ट मध्यस्थों से दूरी बनाकर काम करना चाहिए तथा सहयोगी दलों के अनावश्यक दबाव से ऊपर उठकर निर्णय लेने चाहिए।   क्या कहते है राजनीतिक विश्लेषक राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सरयू राय की इस सलाह के पीछे कई कारण हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले झामुमो और कांग्रेस के बीच उम्मीदवार चयन और सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए थे। कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद झामुमो नेतृत्व ने नाराजगी जताई थी कि उनसे पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। बाद में दोनों दलों के बीच समझौता तो हुआ, लेकिन अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं जारी रहीं। सरयू राय लंबे समय से कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक गुटबाजी को झारखंड सरकार के लिए चुनौती बताते रहे हैं। उनका मानना है कि राज्यसभा चुनाव में सामने आई क्रॉस वोटिंग ने इस धारणा को और मजबूत किया है। वहीं, झामुमो और कांग्रेस के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी सामने आती रही है, जिससे गठबंधन में तनाव की स्थिति बनी रहती है।    जयराम महतो ने क्या कहा है? इस बीच जयराम महतो ने भी पिछले कुछ महीनों में संकेत दिए हैं कि उनकी राजनीति भाजपा और कांग्रेस दोनों से अलग है। हालांकि उन्होंने खुलकर हेमंत सरकार में शामिल होने की बात नहीं कही है, लेकिन कई मौकों पर यह जरूर कहा कि यदि झारखंड के हित में कोई प्रस्ताव आता है तो उसका समर्थन करने पर विचार किया जा सकता है। यही वजह है कि सरयू राय ने अपने नए राजनीतिक समीकरण में जयराम महतो का नाम भी जोड़ा है। हालांकि इन बयानों के बावजूद झामुमो या कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Election
राज्यसभा चुनावः वोटिंग संपन्न, दोनों पक्ष कर रहे जीत का दावा

रांची। झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए हो रही वोटिंग खत्म हो गई। अंतिम वोट झामुमो नेता और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने डाला। वहीं, उनसे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मतदान किया। सभी 81 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया और अब नतीजों का इंतजार है। मतगणना शाम 5 बजे से होगी, जबकि 7 बजे तक नतीजे घोषित किए जाने की संभावना है। एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी और झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। हम 100 फीसदी जीतेंगे पूर्व मंत्री बैजनाथ राम ने विधानसभा परिसर में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि मुझे पूरा भरोसा है और हम 100 फीसदी जीतेंगे। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन के दोनों उम्मीदवार जीत रहे हैं। बैजनाथ राम ने कहा कि मुझे 30 वोट मिलेंगे और हमारी जीत पक्की है। बैजनाथ राम ने कहा कि एनडीए चाहे जो भी दावा करे, लेकिन उनके पास जरूरी संख्या नहीं है।  बीजेपी कर रही जीत का दावा इस बीच वोटिंग के बाद बीजेपी के वरीय विधायक सीपी सिंह ने कहा कि जीत का आत्मविश्वास इतना ज्यादा है कि आप कल्पना नहीं कर सकते। उम्मीद पर ही तो दुनिया कायम है। सीपी सिंह ने कहा कि उम्मीद के बिना तो कोई जिंदा भी नहीं रह सकता है। वोटिंग के बाद पूर्व मंत्री भानुप्रताप शाही ने कहा कि झारखंड के विकास के लिए हमने परिमल नाथवानी की जीत पक्की करने का फैसला किया है। भानुप्रताप शाही ने दावा किया कि परिमल नाथवानी को कम से कम 36 वोट तो मिल ही रहे हैं।  परिमल नाथवानी ने भी किया जीत का दावा इस बीच परिमल नाथवानी ने भी अपनी जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि मैं जीतूंगा। मुझे सभी विधायकों पर विश्वास है। यदि मौका मिला तो मैं निश्चित रूप से झारखंड की सेवा करूंगा। क्या उन्हें कांग्रेस विधायकों का समर्थन प्राप्त है, मीडियाकर्मियों के इस सवाल पर परिमल नाथवानी ने कहा कि मुझे सभी का समर्थन प्राप्त है।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Hemant Soren
राज्यसभा चुनावः गठबधन के विधायक कर रहे मतदान, हेमंत सोरेन मुस्तैद

रांची। रांची में Jharkhand की दो राज्यसभा सीटों के लिए मतदान के बीच विधानसभा परिसर पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं हर पल बदलते घटनाक्रम पर नेताओं और समर्थकों की नजर टिकी हुई है। इसी बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ विधानसभा पहुंचे। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही महागठबंधन की लॉबी में हलचल तेज हो गई और गठबंधन के सभी विधायक एक जगह एकत्रित होते नजर आए। महागठबंधन के विधायक पहुंचे मतदान के लिए एनडीए विधायकों के मतदान के बाद महागठबंधन के विधायकों ने भी वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेना शुरू किया। विधानसभा परिसर से सामने आई तस्वीरों में कांग्रेस और झामुमो समेत गठबंधन के कई विधायक एक साथ मतदान कर बाहर निकलते दिखाई दिए। इस दौरान गठबंधन के नेताओं में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।  हर गतिविधि पर मुख्यमंत्री की नजर राज्यसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुरुआत से ही सक्रिय दिखे हैं। उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति और मतदान के दिन की गतिविधियों तक वे लगातार पूरे घटनाक्रम की निगरानी करते दिखाई दिए। विधानसभा परिसर में भी वे विधायकों और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में रहे। एनडीए और महागठबंधन दोनों कर रहे जीत का दावा राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष में माहौल होने का दावा कर रहे हैं। मतदान के दौरान दोनों खेमों के नेताओं के हावभाव और सक्रियता से साफ है कि मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। चुनाव से पहले विधायकों की बैठकों, रणनीति और राजनीतिक गतिविधियों ने भी इस चुनाव को खास बना दिया है। शाम तक साफ हो सकती है तस्वीर विधानसभा में मतदान शाम 4 बजे तक जारी रहेगा। इसके बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू होगी और अगले कुछ घंटों में यह साफ होने की उम्मीद है कि झारखंड की दोनों राज्यसभा सीटों पर किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहा। फिलहाल पूरे राज्य की नजर विधानसभा में चल रही इस सियासी जंग पर टिकी हुई है।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Resort Politics
झारखंड राज्यसभा चुनाव: 'नंबर गेम' में फंसी BJP, क्रॉस-वोटिंग के डर से NDA विधायकों की होटल में बाड़ेबंदी

नई दिल्ली, एजेंसियां। 18 जून को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव से पहले झारखंड की सियासत में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की एंट्री हो गई है। जहां एनडीए अपने विधायकों को गोलबंद कर रहा है, वहीं 'इंडिया' ब्लॉक ने मॉक पोल के जरिए अपनी जीत का दावा पुख्ता किया है।   झारखंड में राज्यसभा की दो खाली सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव ने राज्य के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। मतदान में महज कुछ ही घंटे बचे हैं और जीत-हार के जटिल 'नंबर गेम' को साधने के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। इस चुनावी बिसात पर सबसे ज्यादा हलचल विपक्षी खेमे यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में देखने को मिल रही है, जिसने संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को भांपते हुए अपने सभी विधायकों को राजधानी के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है।   होटल में क्यों जुटे NDA विधायक? आधिकारिक तौर पर भाजपा इसे मतदान प्रक्रिया के लिए 'प्रशिक्षण शिविर' और रणनीतिक बैठक बता रही है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट किया है कि होटल में अगले दो दिनों तक विधायकों के साथ अहम बैठकें होंगी। वहीं, भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल का कहना है कि पार्टी में कई नए विधायक हैं, जिन्हें वोटिंग की सही प्रक्रिया समझाना जरूरी है। हालांकि, सियासी हलकों में इसे सेंधमारी से बचने की कवायद के रूप में ही देखा जा रहा है।   जीत का गणित और परिमल नथवानी की राह इस बार चुनावी मैदान में तीन चेहरे हैं: झामुमो (JMM) से बैद्यनाथ राम, कांग्रेस से प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी। जीत के लिए हर उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के कम से कम 28 वोटों की दरकार है।   यहीं पर एनडीए का गणित उलझता दिख रहा है। झारखंड विधानसभा में 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के पास 56 विधायकों का मजबूत बहुमत है (झामुमो-34, कांग्रेस-16, राजद-4, भाकपा-माले-2)। दूसरी ओर, एनडीए के पास केवल 24 विधायक हैं (भाजपा-21, आजसू-1, लोजपा-रामविलास-1, जदयू-1)। इसके अलावा जेएलकेएम (JLKM) का एक विधायक है। साफ है कि विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर, बिना भारी क्रॉस-वोटिंग के भाजपा समर्थित नथवानी की जीत लगभग नामुमकिन है।   'इंडिया' ब्लॉक का मॉक पोल और JMM का तंज एनडीए की इस घेराबंदी पर सत्ता पक्ष ने तीखा तंज कसा है। झामुमो की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि विधायकों को होटल भेजना यह साबित करता है कि भाजपा को अपने ही लोगों पर भरोसा नहीं है, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने किसी विधायक पर दबाव नहीं डाला है।   अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए मंगलवार को 'इंडिया' ब्लॉक ने सीएम आवास पर एक मॉक पोल (मॉक वोटिंग) का आयोजन किया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, इस प्रशिक्षण नुमा मॉक पोल में झामुमो के बैद्यनाथ राम को 29 और कांग्रेस के प्रणव झा को 27 वोट मिले। भाकपा-माले के अरूप चटर्जी अनुपस्थित रहे, लेकिन उन्होंने इसकी पूर्व सूचना दे दी थी। कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने बताया कि चुनाव से पहले बुधवार को भी सीएम आवास पर एक अहम बैठक रखी गई है।   क्यों हो रहे हैं ये चुनाव झारखंड में राज्यसभा की ये दो सीटें हाल ही में खाली हुई हैं। इनमें से एक सीट झामुमो के दिग्गज नेता और सह-संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के कारण रिक्त हुई है। वहीं, दूसरी सीट पर भाजपा के सदस्य दीपक प्रकाश का कार्यकाल आगामी 21 जून को समाप्त हो रहा है। अब 18 जून के नतीजे ही तय करेंगे कि क्रॉस-वोटिंग का दांव सफल होता है या सत्ता पक्ष अपने दोनों उम्मीदवारों को संसद भेजने में कामयाब रहता है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Tejashwi Yadav
RJD किंग मेकर! क्या कांग्रेस से बिहार का बदला लेंगे तेजस्वी

रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए कल 19 जून को चुनाव होंगे। इसमें दो सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में हैं। इसलिए गुरुवार को वोटिंग होगी। बीजेपी के समर्थन से परिमल नाथवानी के निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक बन गया है।  नाथवानी 755 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। राजनीतिक गलियारे में माना जा रहा है कि वह ‘हिसाब-किताब’ करके मैदान में डटे हैं। उनके इस गणित को कांग्रेस हॉर्स ट्रेडिंग का नाम दे रही है। तेजस्वी के 4 विधायक सबसे अहम इंडी ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। अगर सब एकजुट रहे तो उनकी दोनों सीटों पर जीत तय है। नाथवानी या कांग्रेस के प्रणव झा जीतेंगे यह तेजस्वी के चार विधायक तय करेंगे। एक सीट जीतने के लिए चाहिए 28 विधायक राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायक चाहिए। इंडी ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। इसके अनुसार सभी ने वोट दिए और कोई क्रॉस वोटिंग नहीं हुई, तो गठबंधन के दोनों उम्मीदवार जीत जाएंगे। लेकिन, भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी की मौजूदगी ने इस खेल को इतना सीधा और आसान नहीं रहने दिया है। क्या है संख्या बल? झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत है। इंडिया ब्लॉक में शामिल झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक हैं। दूसरी ओर NDA में भाजपा के 21, आजसू के 1, जेडीयू के 1 और LJP (R) के 1 विधायक हैं। कुल संख्या 24 हुई। इस हिसाब से NDA को चार विधायकों की जरूरत है।   झामुमो के बैजनाथ राम की जीत पक्की हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली पार्टी झामुमो के उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत पक्की मानी जा रही है। उन्हें 28 वोट चाहिए और पार्टी के पास 34 विधायक हैं। मतलब जरूरत से 6 अधिक। इंडिया ब्लॉक की ओर से दूसरे उम्मीदवार कांग्रेस के प्रणव झा हैं। इनका मुकाबला परिमल नाथवानी से है।   क्यों तेजस्वी यादव के हाथ आई जीत दिलाने की ताकत? कांग्रेस के प्रणव झा को जीत तभी मिलेगी, जब उन्हें झामुमो के बचे हुए 6, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक वोट दें। दूसरी ओर नाथवानी को NDA के 24 विधायकों का वोट मिलना तय माना जा रहा है। ऐसे में इंडी ब्लॉक की पार्टियों के चार विधायक टूट जाते हैं और नाथवानी के समर्थन में वोट कर देते हैं, तो उनकी जीत हो जाएगी। बिहार में बीजेपी कर चुकी खेला तेजस्वी यादव की पार्टी राजद के चार विधायक हैं। इनके पास ताकत है कि नाथवानी या प्रणव में से किसी एक को जीत दिला दें। बिहार में भाजपा ने मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के विधायकों को तोड़कर पहले ही उदाहरण पेश कर दिया है। इधर, कांग्रेस के नेताओं ने पटना में तेजस्वी यादव से मुलाकात की है। उनसे राज्यसभा चुनाव में राजद के चारों विधायकों के वोट कांग्रेस उम्मीदवार को दिलाने की अपील की। क्या बिहार का बदला झारखंड में ले सकते हैं तेजस्वी? मार्च में बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। सत्ताधारी गठबंधन NDA के पास 4 प्रत्याशी को जीत दिलाने लायक संख्या बल था। वहीं, विपक्ष की सभी पार्टियों के विधायक वोट देते तो महागठबंधन की ओर से राजद के उम्मीदवार ए़डी सिंह जीत सकते थे। 16 मार्च 2026 को मतदान हुए, नतीजे चौंकाने वाले आए। कांग्रेस के तीन विधायक गायब रहे। राजद के एक विधायक भी वोट डालने नहीं आए। इसके चलते एनडीए के 5वें उम्मीदवार को जीत मिल गई। बिहार में कांग्रेस के 6 विधायक हैं, इनमें से 3 ने राजद उम्मीदवार को वोट नहीं दिया। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि क्या तेजस्वी बिहार में मिली हार का बदला झारखंड में कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर ले सकते हैं। राहुल गांधी ने तीन बार हेमंत सोरेन से बात की ऐसा न हो इसके लिए कांग्रेस नेतृत्व भी एक्टिव है। राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन से तीन बार बात की है। बिहार में कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह के माध्यम से कांग्रेस नेतृत्व की बात तेजस्वी यादव से हुई है। दूसरी ओर एक चर्चा यह भी है कि NDA में भी टूट हो सकती है। विधायक सरयू राय की नाराजगी की खबर आती रहती है। परिमल को जिताने के लिए NDA के पास 2 ऑप्शन 1- RJD के चारों विधायकों को तोड़ लें। ऐसा करने पर NDA के 24 और राजद के 4 विधायक मिलकर 28 हो जाएंगे। वह कांग्रेस या भाकपा माले के विधायकों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्हें किसी तरह चार विधायकों का वोट चाहिए। 2- दूसरा विकल्प है कि 10 विधायकों को वोट नहीं देने या इस तरह मतदान करने के लिए मना लें कि उनके वोट रद्द हो जाएं। ऐसे में कुल वैध वोटों की संख्या 71 हो जाएगी। जीत के लिए जरूरी संख्या बल गिरकर 24 हो जाएगा।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Rajya Sabha Election Confidence
राज्यसभा चुनावः कांग्रेस को 56 नहीं 61 का भरोसा, 5 अतिरिक्त वोट किसके ?

रांची। झारखंड में हो रहे राज्यसभा चुनाव में इंडी गठबंधन गजब का कॉन्फिडेंस दिखा रहा है। पहले 56 विधायकों को एकजुट रखने पर ही सवाल उठाए जा रहे थे, अब तो बात 61 विधायकों तक पहुंच गई है। राज्यसभा की दो सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले शह-मात का खेल शुरू हो गया है।   एक ओर सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन अपने 56 विधायकों की एकजुटता का प्रदर्शन कर जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर संख्या बल में पीछे होने के बावजूद एनडीए भी जीत का दावा कर रहा है। अपने विधायकों को रांची के एक होटल में शिफ्ट कर एनडीए ने भी मोर्चाबंदी कर रखी है। सीएम हेमंत सोरेन की देखरेख में हुआ मॉक पोल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में इंडिया गठबंधन के विधायकों की बैठक हुई। इसमें विधायकों को प्रशिक्षित कर मॉक पोल कराया गया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, मॉक पोल में झामुमो के बैद्यनाथ राम को 29 और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 27 वोट मिले। विधानसभा अध्यक्ष का वोट झामुमो को और माले विधायक अरूप चटर्जी पूर्व सूचना के आधार पर बैठक में शामिल नहीं हुए। उनका वोट भी कांग्रेस को मिलेगा। उन्होंने कहा कि मॉक पोल में हमारा एक भी वोट अमान्य नहीं हुआ। वहीं मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि दोनों सीटों पर महागठबंधन के दोनों उम्मीदवार की जीत तय है। पूरा गठबंधन एकजुट होकर मतदान करेगा। राज्यसभा चुनाव में '56 नहीं 61' का नारा इंडी गठबंधन खेमे में चर्चा तब और तेज हो गई जब झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने सोशल मीडिया पर '56 नहीं 61' का नारा उछाल दिया। सियासी गलियारों में इसे महागठबंधन के दावे से पांच अतिरिक्त वोट मिलने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के बाद कांग्रेस नेता भाजपा पर हमलावर दिखे। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि भाजपा की कारगुजारी से साबित होता है कि बीजेपी कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है।   मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि जिस पर विधायक-सांसद की खरीद-फरोख्त के आरोप लगते रहे हैं, वही अपने विधायकों को होटल में शिफ्ट कर रही है। वहीं प्रदीप यादव ने कहा कि हम बुधवार को अपनी अगली रणनीति तय करेंगे।

abhishek singh जून 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0