झारखंड

सीएम हेमंत और विधायक कल्पना ने भरा SIR फॉर्म, राज्यवासियों से समय पर सत्यापन कराने की अपील

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Kalpana Soren Hemant Soren
Kalpana Soren Hemant Soren SIR Form

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत स्वयं एन्यूमरेशन (गणना) प्रपत्र भरकर राज्यवासियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, कांके रोड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं से समय पर एसआईआर प्रपत्र भरने और मतदाता सूची में दर्ज अपनी जानकारी का सत्यापन कराने की अपील की। इस अवसर पर उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपना एसआईआर फॉर्म भरकर अभियान में भागीदारी निभाई।

 

हर पात्र मतदाता निभाए अपनी जिम्मेदारी


मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदान का अधिकार सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है और शुद्ध, अद्यतन तथा त्रुटिरहित मतदाता सूची स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव की आधारशिला होती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे स्वयं सत्यापन कराने के साथ अपने परिवार, पड़ोस और समाज के अन्य पात्र मतदाताओं को भी एसआईआर अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।

 

घर-घर पहुंच रहे हैं बीएलओ


कार्यक्रम के दौरान 64-हटिया विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या-290 की बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने अपना प्रपत्र भरा। निर्वाचन आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत राज्यभर में बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं और मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए।

 

निर्वाचन अधिकारियों की रही मौजूदगी


कार्यक्रम में रांची के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रजत, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ)-सह-अपर समाहर्ता धनंजय, उप निर्वाचन पदाधिकारी विवेक कुमार सुमन तथा बीएलओ वेरोनिका देवी सहित निर्वाचन विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाना है, जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सके।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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Jharkhand Student Protest
देवेंद्र महतो को नहीं मिली अस्पताल से छुट्टी, डॉक्टरों ने कहा- अभी हालत ठीक नहीं; धरना स्थल लौटे छात्र

रांची। जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत में अभी सुधार नहीं हुआ है। रांची सदर अस्पताल में उनका इलाज जारी है और डॉक्टरों ने फिलहाल उन्हें डिस्चार्ज करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद उन्हें लेने पहुंचे रामअवतार महतो समेत अन्य छात्र धरना स्थल वापस लौट गए। अब आंदोलनकारी छात्र आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।   डॉक्टरों की निगरानी में जारी है इलाज   सोमवार को कई छात्र देवेंद्र नाथ महतो को अस्पताल से धरना स्थल वापस लाने पहुंचे थे। हालांकि, सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें छुट्टी देने से इनकार कर दिया।   अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश ने बताया कि देवेंद्र महतो की तबीयत अभी पूरी तरह ठीक नहीं है। ऐसी स्थिति में उन्हें डिस्चार्ज करना संभव नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखना जरूरी है।   डॉक्टरों के इस फैसले के बाद छात्र अस्पताल से वापस धरना स्थल लौट गए।   लंबे अनशन से बिगड़ी तबीयत   देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की थी।   लंबे समय तक अनशन के कारण उनकी सेहत प्रभावित हुई है। हाल की चिकित्सकीय जांच में डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर कम होने जैसी स्थिति सामने आने की बात कही गई है। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।   आंदोलन जारी रखने पर अड़े छात्र   देवेंद्र महतो के अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। छात्र जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।   देवेंद्र महतो को अस्पताल से छुट्टी नहीं मिलने के बाद अब आंदोलनकारी छात्र धरना स्थल पर बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। छात्रों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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जमशेदपुर में भारतीय मजदूर संघ के धरना प्रदर्शन में पांच दिन कार्य दिवस की मांग
5 दिन ही काम करेंगे बैंक कर्मचारी? मजदूर संघ ने उठाई मांग, सरकार को सौंपा ज्ञापन

जमशेदपुर। भारतीय मजदूर संघ, पूर्वी सिंहभूम की ओर से सोमवार को उपायुक्त कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान संघ ने श्रमिकों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रमुख मांगों में बैंकों में सप्ताह में पांच दिन कार्य दिवस लागू करने और स्कीम वर्कर्स के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग शामिल रही।   श्रमिक समस्याओं के समाधान की मांग   धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व श्रमिक प्रतिनिधि अमरेंद्र कुमार सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों से जुड़े मुद्दों का जल्द समाधान जरूरी है। सरकार को संबंधित मंत्रालयों, विभागों और प्राधिकरणों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। संघ ने सरकार से श्रमिक प्रतिनिधियों के साथ समयबद्ध बातचीत शुरू करने की भी मांग की।   स्कीम वर्कर्स का मानदेय बढ़ाने की मांग   मजदूर संघ ने आंगनबाड़ी, आशा, मिड-डे मील, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और अन्य स्कीम वर्कर्स के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग की है। संघ का कहना है कि श्रमिकों की समस्याएं केवल वेतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक न्याय और श्रम की गरिमा से भी जुड़ी हैं।   बैंकों में 5 दिन कार्य दिवस की मांग   संघ ने बैंकों में सप्ताह में केवल पांच दिन काम करने की व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई। इसके अलावा लेबर कोड में मौजूद मजदूर-विरोधी प्रावधानों को हटाने और आवश्यक संशोधन करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है।   HEC और टेक्सटाइल मिलों के लंबित मामलों का समाधान   भारतीय मजदूर संघ ने रांची स्थित हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) के कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग की। इसके साथ ही आठ राज्यों में स्थित 23 नेशनल टेक्सटाइल मिलों के कर्मचारियों के मामलों को भी जल्द निपटाने की मांग की गई।   LIC अधिकारियों की नौकरी सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया   संघ ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में कार्यरत डेवलपमेंट अफसरों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही वेतन में कटौती या बर्खास्तगी जैसे कदमों पर रोक लगाने की मांग भी की गई। धरना-प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई और सरकार से जल्द सकारात्मक पहल करने की अपील की। संघ ने संकेत दिया कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आगे भी आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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देवघर में ऑनलाइन दवा ऑर्डर के दौरान साइबर ठगी का मामला
ऑनलाइन दवा मंगाना पड़ा महंगा, साइबर ठगों ने खाते से उड़ाए 40,600 रुपये

देवघर। पालोजोरी थाना क्षेत्र के चौधरी नवाडीह गांव निवासी जायद शेख ऑनलाइन दवा मंगाने के दौरान साइबर ठगी के शिकार हो गए। साइबर ठगों ने उन्हें झांसे में लेकर बैंक खाते से 40,600 रुपये निकाल लिए। घटना 12 अगस्त की बताई जा रही है।   दवा ऑर्डर करने के बाद ठगों ने किया संपर्क     जानकारी के अनुसार, जायद शेख ने ऑनलाइन दवा मंगाने के लिए ऑर्डर किया था। इसके बाद साइबर ठगों ने उनसे संपर्क किया और ऑर्डर से जुड़ी प्रक्रिया के नाम पर उन्हें अपने झांसे में ले लिया। इसके बाद अलग-अलग प्रक्रियाओं के जरिए उनके खाते से 40,600 रुपये की अवैध निकासी कर ली गई।   खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से मामले की जांच कर ठगों के खिलाफ कार्रवाई करने और ठगी गई राशि वापस कराने की मांग की है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।   फर्जी कस्टमर केयर के जरिए भी हो सकती है ठगी     ऑनलाइन दवा खरीदने वालों को साइबर ठग कई तरीकों से निशाना बना सकते हैं। फर्जी वेबसाइट, नकली कस्टमर केयर नंबर, डिस्काउंट ऑफर या भुगतान से जुड़े फर्जी मैसेज के जरिए लोगों को जाल में फंसाया जा सकता है।   कई मामलों में ठग खुद को दवा कंपनी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का कर्मचारी बताकर फोन करते हैं। ऑर्डर कैंसल होने, पेमेंट फेल होने या रिफंड के नाम पर लिंक भेजकर या बैंकिंग जानकारी मांगकर ठगी की जा सकती है।   OTP और UPI PIN कभी साझा न करें     ऑनलाइन खरीदारी के दौरान OTP, ATM PIN, UPI PIN और बैंकिंग पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर QR कोड स्कैन करने या भुगतान अनुरोध स्वीकार करने से भी बचें।   ध्यान रखें कि पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती।   खाते से पैसे निकलें तो तुरंत करें शिकायत     अगर बैंक खाते से अनधिकृत रकम निकल जाए तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दें और खाते या कार्ड को सुरक्षित कराने के लिए जरूरी कदम उठाएं। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत भी दर्ज कराएं।   शिकायत करते समय ट्रांजेक्शन की तारीख, रकम, बैंक से मिले मैसेज, संदिग्ध मोबाइल नंबर, लिंक और स्क्रीनशॉट जैसी जानकारी सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। ऑनलाइन दवा खरीदते समय केवल कीमत और डिलीवरी पर ध्यान देने के बजाय वेबसाइट या ऐप की विश्वसनीयता भी जांचें। किसी अनजान लिंक या फोन कॉल के जरिए भुगतान करने से बचें। डिजिटल सुविधा के साथ सतर्कता रखना ही साइबर ठगी से बचने का सबसे बेहतर तरीका है।

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JPSC-JSSC आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की अपील

JPSC-JSSC Protest: देवेंद्र महतो की अपील- सिर्फ परीक्षा रद्द नहीं, पूरी भर्ती प्रक्रिया हो दुरुस्त

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