रांची। झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने SIR फॉर्म भरने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने सावन महीने में लोगों की व्यस्तता और कई जिलों में चल रहे धार्मिक आयोजनों का हवाला देते हुए समय बढ़ाने की मांग की। कांग्रेस शिष्टमंडल ने चुनाव आयोग के सामने रखी मांग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार से मिला। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संथाल समेत कई जिलों में सावन मेले और अन्य गतिविधियों के कारण लोगों को गणना प्रपत्र भरने में परेशानी हो रही है। कांग्रेस ने मांग की कि मतदाताओं को पर्याप्त समय देने के लिए SIR फॉर्म जमा करने की समय सीमा बढ़ाई जाए। 40 लाख नामों को लेकर कांग्रेस ने जताई चिंता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि ASDD सूची में करीब 40 लाख नाम शामिल होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न हो। चुनाव आयोग ने समय बढ़ाने से किया इनकार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कांग्रेस की मांग पर स्पष्ट किया कि SIR गणना प्रपत्र भरने की अंतिम तारीख में बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 जुलाई तक फॉर्म जमा किए जाएंगे और 5 अगस्त को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने बताया कि मतदाता सूची जारी होने के बाद आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। देवघर और दुमका के लिए अलग प्रस्ताव सीईओ के रवि कुमार ने कहा कि श्रावणी मेले को देखते हुए देवघर और दुमका जिलों से प्रस्ताव मिलने के बाद इसे चुनाव आयोग के पास भेजा जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे जल्द से जल्द अपना गणना प्रपत्र भरकर संबंधित बीएलओ को जमा करें। वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने की अपील चुनाव आयोग ने कहा है कि समय पर फॉर्म जमा करने से मतदाता सूची के प्रारूप में नाम शामिल किया जा सकेगा। वहीं, कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि प्रक्रिया को लेकर लोगों को अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि किसी भी मतदाता को परेशानी का सामना न करना पड़े।
रांची। झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सत्यापन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि अब तक राज्य के 96 प्रतिशत मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध करा दिए गए हैं। केवल चार प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं, जिन्हें अभी तक यह प्रपत्र नहीं मिल सका है। इनमें अधिकांश शहरी क्षेत्रों के मतदाता शामिल हैं। शहरी मतदाताओं के लिए विशेष कैंप शहरी क्षेत्रों के शेष मतदाताओं की सुविधा को देखते हुए 18 और 20 जुलाई को सभी संबंधित मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे। इन शिविरों में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे और उन्हें भरने व जमा करने में सहायता करेंगे। कैंप में स्वयंसेवक, हेल्प डेस्क मैनेजर और बीएलओ सुपरवाइजर भी मौजूद रहेंगे, ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर रही प्रगति मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंच चुके हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि गांवों में बीएलओ अपने क्षेत्र के लगभग सभी मतदाताओं से परिचित होते हैं और घर-घर जाकर आसानी से संपर्क कर लेते हैं। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में आबादी अधिक होने और लोगों के लगातार स्थान बदलने के कारण कुछ मतदाताओं तक प्रपत्र पहुंचाने में कठिनाई आई है। मतदाताओं से बीएलओ से संपर्क करने की अपील के. रवि कुमार ने कहा कि यदि कोई मतदाता किसी कारणवश अपने मतदान क्षेत्र से बाहर रह रहा है, तो वह अपने मतदाता पहचान पत्र में दर्ज मतदान केंद्र के बीएलओ से संपर्क कर गणना प्रपत्र प्राप्त कर सकता है। इस संबंध में बुधवार को सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से समय पर प्रपत्र भरकर जमा करने की अपील की है, ताकि मतदाता सूची का पुनरीक्षण समय पर पूरा किया जा सके।
गिरिडीह। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) अभियान के तहत मंगलवार को गिरिडीह जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट-2 (BLA-2) की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसके साथ ही चुनाव पाठशाला के दूसरे चरण का भी सफल आयोजन हुआ। इस अभियान का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में शामिल हो और अपात्र नामों को हटाया जा सके। जिला निर्वाचन पदाधिकारी जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर जिले के सभी वरीय पदाधिकारियों, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (ERO) और सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (AERO) ने अपने-अपने क्षेत्रों के मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बैठकों की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए बीएलओ को गणना प्रपत्रों का शत-प्रतिशत सत्यापन, त्रुटिरहित संधारण और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान बैठक के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत एवं डुप्लीकेट (ASDD) श्रेणी के मतदाताओं के सत्यापन पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बीएलओ और बीएलए-2 के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के सहयोग से मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा उपायुक्त रामनिवास यादव ने अधिकारियों को नियमित रूप से मतदान केंद्रों का निरीक्षण करने और पूरे अभियान की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए शुद्ध मतदाता सूची सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि SIR-2026 के तहत सभी प्रखंडों में अभियान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ संचालित किया जा रहा है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
रांची। झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता गणना प्रपत्रों के वितरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य के छह विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा सभी पात्र मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचा दिए गए हैं। इनमें चतरा, मझगांव, मनोहरपुर, चक्रधरपुर, गुमला और लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस उपलब्धि पर उन्होंने संबंधित बीएलओ, ईआरओ और एईआरओ को बधाई दी। गुरुवार तक सभी क्षेत्रों में वितरण पूरा करने का लक्ष्य सोमवार को जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि राज्य के शेष विधानसभा क्षेत्रों में भी गुरुवार तक शत-प्रतिशत मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे प्रपत्र भरकर और हस्ताक्षर कर जल्द से जल्द बीएलओ को सौंप दें, ताकि उनका डिजिटाइजेशन समय पर पूरा किया जा सके। बीएलओ को घर-घर जाकर करना होगा सत्यापन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार बीएलओ का दायित्व है कि वे घर-घर जाकर मतदाताओं को प्रपत्र उपलब्ध कराएं और उन्हें वापस भी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में कैंप लगाकर या मतदाताओं को एक स्थान पर बुलाकर सत्यापन करने की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि एसआईआर अभियान में किसी प्रकार की लापरवाही या खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अनधिकृत कैंप को बताया अवैध के. रवि कुमार ने यह भी कहा कि कुछ गैर-सरकारी संस्थानों, साइबर कैफे और अन्य संगठनों द्वारा एसआईआर से जुड़े कैंप लगाए जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी कैंप को निर्वाचन आयोग की अनुमति नहीं है और इन्हें पूरी तरह अवैध माना जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के रंका प्रखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फॉर्म भरने के नाम पर ग्रामीणों से अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। खपरो पंचायत की बीएलओ जमीला बीबी पर प्रति फॉर्म 20 से 50 रुपये तक लेने और पैसे नहीं देने पर आवेदन स्वीकार नहीं करने का आरोप लगा था। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और प्रशासनिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने उन्हें आंगनबाड़ी सेविका के पद से चयन मुक्त करने का निर्देश दिया है। ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप ग्रामीणों का कहना है कि फॉर्म जमा करने के लिए उनसे जबरन पैसे मांगे जा रहे थे। तसौउर अंसारी ने आरोप लगाया कि 50 रुपये नहीं देने पर उनका फॉर्म लेने से इनकार कर दिया गया। उन्होंने आशंका जताई कि यदि फॉर्म जमा नहीं हुआ तो उनकी नागरिकता संबंधी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। वहीं, ग्यासुद्दीन अंसारी ने बताया कि चार फॉर्म जमा करने के लिए उनसे 80 रुपये लिए गए। अन्य ग्रामीणों ने भी 50-50 रुपये की मांग किए जाने की शिकायत प्रशासन से की। पहले एआई से फर्जी वीडियो होने का किया था दावा मामला सामने आने के बाद बीएलओ जमीला बीबी ने सभी आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार किया गया है और उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने किसी भी प्रकार की अवैध वसूली से इंकार किया था। जांच में आरोप सही, प्रशासन ने की कार्रवाई मामले के तूल पकड़ने पर रंका के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शुभम बेला टोपनो ने जांच कराई। जांच के दौरान वायरल वीडियो और ग्रामीणों की शिकायतों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जमीला बीबी को आंगनबाड़ी सेविका के पद से चयन मुक्त कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी ऐसी शिकायत सामने आती है तो उसकी तत्काल सूचना प्रशासन को दें, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
गढ़वा। मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 को निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित तरीके से संपन्न कराने के लिए गढ़वा प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में 80-गढ़वा विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कुमार मयंक भूषण की अध्यक्षता में अनुमंडल कार्यालय में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न दलों के अध्यक्ष, सचिव और बीएलए-1 (Booth Level Agent) शामिल हुए। मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ : एसडीओ बैठक को संबोधित करते हुए एसडीओ कुमार मयंक भूषण ने कहा कि मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो, जबकि मृत, स्थानांतरित या अपात्र व्यक्तियों के नाम नियमानुसार हटाए जाएं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से विशेष पुनरीक्षण अभियान में सक्रिय सहयोग करने और मतदाताओं को जागरूक करने की अपील की। एसडीओ ने दलों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने बूथों पर नियुक्त बीएलए-2 को बीएलओ के साथ नियमित समन्वय बनाए रखने के लिए प्रेरित करें, ताकि सत्यापन कार्य सुचारु रूप से पूरा हो सके। सभी प्रमुख दलों ने लिया हिस्सा बैठक में आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू), बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा कार्यपालक दंडाधिकारी और अनुमंडल कार्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। जानिए SIR-2026 का पूरा कार्यक्रम बैठक में निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की समय-सीमा भी साझा की गई। इसके तहत 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक घर-घर जाकर सत्यापन होगा। 29 जुलाई को मतदान केंद्रों का युक्तिकरण किया जाएगा, जबकि 5 अगस्त को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित होगा। 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी तथा 5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक उनका निपटारा होगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत स्वयं एन्यूमरेशन (गणना) प्रपत्र भरकर राज्यवासियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, कांके रोड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं से समय पर एसआईआर प्रपत्र भरने और मतदाता सूची में दर्ज अपनी जानकारी का सत्यापन कराने की अपील की। इस अवसर पर उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपना एसआईआर फॉर्म भरकर अभियान में भागीदारी निभाई। हर पात्र मतदाता निभाए अपनी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदान का अधिकार सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है और शुद्ध, अद्यतन तथा त्रुटिरहित मतदाता सूची स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव की आधारशिला होती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे स्वयं सत्यापन कराने के साथ अपने परिवार, पड़ोस और समाज के अन्य पात्र मतदाताओं को भी एसआईआर अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। घर-घर पहुंच रहे हैं बीएलओ कार्यक्रम के दौरान 64-हटिया विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या-290 की बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने अपना प्रपत्र भरा। निर्वाचन आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत राज्यभर में बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं और मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए। निर्वाचन अधिकारियों की रही मौजूदगी कार्यक्रम में रांची के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रजत, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ)-सह-अपर समाहर्ता धनंजय, उप निर्वाचन पदाधिकारी विवेक कुमार सुमन तथा बीएलओ वेरोनिका देवी सहित निर्वाचन विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाना है, जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सके।
रांची। झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) 2026 अभियान मंगलवार से शुरू हो गया है। इस अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) राज्यभर में 30 जून से 29 जुलाई तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे और मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए एन्यूमरेशन (Enumeration) फॉर्म भरवाएंगे। हर मतदाता को भरना होगा फॉर्म निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार प्रत्येक मतदाता को अपना एन्यूमरेशन फॉर्म भरकर BLO को देना होगा। जिन मतदाताओं की पहले से सफल मैपिंग हो चुकी है, उन्हें सामान्यतः अतिरिक्त दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, जिन मामलों में जानकारी अधूरी होगी, उनसे आवश्यक दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। 5 अगस्त को जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार: 30 जून–29 जुलाई: घर-घर सत्यापन और फॉर्म संग्रह 5 अगस्त: ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन 5 अगस्त–4 सितंबर: दावे और आपत्तियां दर्ज करने का समय इसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। फर्जी दस्तावेजों पर होगी सख्त कार्रवाई झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा है कि अभियान के दौरान यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज जमा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मतदाताओं से केवल सही जानकारी देने और BLO के साथ सहयोग करने की अपील की है।
रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तैयारियां जोरों पर हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज जमा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया कि किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो। फर्जी प्रमाणपत्र बनाने की मिल रही सूचनाएं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि कई जिलों से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जाने की सूचनाएं मिल रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत तत्काल कार्रवाई की जाए। गलत जानकारी देकर घोषणा पत्र जमा करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। 30 जून से घर-घर जाएंगे BLO एसआईआर का कार्य 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर आंशिक रूप से पहले से भरे हुए इन्यूमरेशन फॉर्म दो प्रतियों में वितरित करेंगे। यदि कोई घर बंद मिलता है तो BLO को कम से कम तीन बार जाना अनिवार्य होगा। इन पांच श्रेणियों के नाम होंगे बाहर प्रारूप मतदाता सूची में एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ, डुप्लीकेट और रिफ्यूज टू साइन इन पांच श्रेणियों के मतदाताओं का नाम शामिल नहीं किया जाएगा। विदेशी नागरिकता ले चुके और झूठी घोषणा देकर सूची में नाम दर्ज कराने वाले लोगों का पंजीकरण रद्द किया जाएगा। एससी, एसटी और PVTG के लिए विशेष व्यवस्था बुजुर्गों, बीमारों और विशेष रूप से एससी, एसटी और पीवीटीजी समुदाय की सहायता के लिए मतदान केंद्रों पर विशेष स्वयंसेवक तैनात रहेंगे। 30 जून को सुबह 11 से 12 बजे तक व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। अंतिम सूची 7 अक्टूबर को 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी। इस पर 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। सभी प्रक्रियाओं के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सुनिश्चित किया गया है। के. रवि कुमार ने सभी राजनीतिक दलों से SIR में सक्रिय सहयोग की अपील करते हुए कहा कि लक्ष्य है एक पूर्णतः शुद्ध, त्रुटिहीन और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना।
रांची। भारतीय पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान के बाद देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि यदि पासपोर्ट केवल यात्रा (ट्रैवल) दस्तावेज है और नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, तो विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में इसे सबसे पहले स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों में क्यों शामिल किया गया है। JMM ने सोशल मीडिया पर उठाए सवाल जेएमएम ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि एक ओर विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को केवल ट्रैवल डॉक्यूमेंट बता रहा है, वहीं दूसरी ओर SIR प्रक्रिया में इसे नागरिकता संबंधी प्रमुख दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। पार्टी ने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्टता देने की मांग की है। कांग्रेस और विपक्ष ने भी घेरा इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली पुलिस सत्यापन और दस्तावेजों की जांच का औचित्य क्या है। साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज अंतिम रूप से मान्य माना जाएगा। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन यह भारतीय नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम निर्धारण संबंधित कानूनों और वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है। नागरिकता का अंतिम प्रमाण क्या है? कानूनी विशेषज्ञों और पूर्व न्यायिक फैसलों के अनुसार, पासपोर्ट, आधार कार्ड या वोटर आईडी अपने-आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं। भारतीय नागरिकता का निर्धारण मुख्य रूप से नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण, जन्म प्रमाणपत्र, नागरिकता प्रमाणपत्र तथा अन्य वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।
गिरिडीह। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की गिरिडीह जिला कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को शहर के उत्सव उपवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने की। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान और मतदाता सूची सत्यापन को लेकर पार्टी की रणनीति तय करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। बैठक में झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू मुख्य रूप से उपस्थित रहे। भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा पर एसआईआर के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है, इसलिए झामुमो कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक सक्रिय होने और गांव-गांव, घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया। सोनू ने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं कटना चाहिए। इसके लिए कार्यकर्ताओं को सतर्क रहकर लोगों को मतदाता सूची के महत्व और सत्यापन प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना जरूरी है। शिविर लगाकर लोगों की मदद करने का निर्देश मंत्री ने सभी प्रखंड अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित करें और लोगों को आवश्यक फॉर्म भरने में सहायता प्रदान करें। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखी जाए और लोगों को भ्रमित करने की किसी भी कोशिश का तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम बने रहें, इसके लिए जमीनी स्तर पर सक्रियता और जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। गरीबों और आदिवासियों का नाम नहीं कटने देंगे : संजय सिंह जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि झामुमो कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी गरीब, आदिवासी और जरूरतमंद व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रत्येक बूथ पर निगरानी और सतर्कता जरूरी है। 14 जून को होगा कार्यकर्ता सम्मेलन बैठक में 14 जून को एक बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन के आयोजन का निर्णय भी लिया गया। इस सम्मेलन में गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन मुख्य रूप से शामिल होंगी। वह कार्यकर्ताओं को पार्टी की नीतियों, संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर मार्गदर्शन देंगी। इसके अलावा बूथ लेवल एजेंटों को प्रशिक्षण देने तथा एसआईआर के दौरान फर्जी दावों और आपत्तियों पर विशेष नजर रखने की योजना भी बनाई गई। पार्टी ने इसे संगठन को मजबूत करने और मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।