रांची। झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मन्नान मल्लिक के निधन पर पूरे राज्य में शोक की लहर है। मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन विधानसभा पहुंचे, जहां उन्होंने दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने मन्नान मल्लिक के निधन को झारखंड की राजनीति और जनजीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि राज्य ने एक अनुभवी जनप्रतिनिधि और समाज के प्रति समर्पित नेता को खो दिया है। विधानसभा में दी अंतिम श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें अंतिम नमन किया। इस दौरान विधायक कल्पना सोरेन भी उनके साथ मौजूद रहीं। दोनों ने दिवंगत नेता के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढ़स श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री और विधायक कल्पना सोरेन ने मन्नान मल्लिक के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार के सदस्यों को इस कठिन समय में ढांढ़स बंधाया और गहरी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईश्वर शोक संतप्त परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें। 'जनता की आवाज बुलंद करने वाले नेता थे मन्नान मल्लिक' मुख्यमंत्री ने कहा कि मन्नान मल्लिक लंबे समय तक जनसेवा और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। उन्होंने विशेष रूप से धनबाद सहित पूरे झारखंड की जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाया और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई। उनका योगदान राज्य की राजनीति में हमेशा याद रखा जाएगा। लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन गौरतलब है कि 83 वर्षीय मन्नान मल्लिक पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और रांची के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत स्वयं एन्यूमरेशन (गणना) प्रपत्र भरकर राज्यवासियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय, कांके रोड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सभी पात्र मतदाताओं से समय पर एसआईआर प्रपत्र भरने और मतदाता सूची में दर्ज अपनी जानकारी का सत्यापन कराने की अपील की। इस अवसर पर उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपना एसआईआर फॉर्म भरकर अभियान में भागीदारी निभाई। हर पात्र मतदाता निभाए अपनी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदान का अधिकार सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है और शुद्ध, अद्यतन तथा त्रुटिरहित मतदाता सूची स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव की आधारशिला होती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे स्वयं सत्यापन कराने के साथ अपने परिवार, पड़ोस और समाज के अन्य पात्र मतदाताओं को भी एसआईआर अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। घर-घर पहुंच रहे हैं बीएलओ कार्यक्रम के दौरान 64-हटिया विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या-290 की बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने अपना प्रपत्र भरा। निर्वाचन आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत राज्यभर में बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं और मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए। निर्वाचन अधिकारियों की रही मौजूदगी कार्यक्रम में रांची के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रजत, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ)-सह-अपर समाहर्ता धनंजय, उप निर्वाचन पदाधिकारी विवेक कुमार सुमन तथा बीएलओ वेरोनिका देवी सहित निर्वाचन विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाना है, जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सके।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को रांची से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जोन्हा फॉल पहुंचे। इस दौरान उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी उनके साथ मौजूद रहीं। हरी-भरी वादियों, घने जंगलों और कल-कल बहती जलधारा के बीच मुख्यमंत्री ने कुछ समय प्रकृति की गोद में बिताया। उन्होंने जोन्हा फॉल की मनमोहक सुंदरता का आनंद लिया, स्थानीय फलों का स्वाद चखा और वहां मौजूद लोगों से आत्मीयता से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनीं। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रकृति से जुड़ाव और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। 'झारखंड प्रकृति का अनुपम उपहार' जोन्हा फॉल की प्राकृतिक छटा की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां की हरियाली, झरने तथा शांत वातावरण पूरे देश के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उन्होंने कहा कि जोन्हा फॉल की निर्मल जलधारा और प्राकृतिक सौंदर्य यह एहसास कराता है कि झारखंड वास्तव में प्रकृति का अनुपम उपहार है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि राज्य की प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनका आनंद ले सकें। पर्यटकों का स्वागत, मानसून में और बढ़ी जोन्हा फॉल की रौनक मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का हर कोना अपनी अलग प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है और राज्य आने वाले सभी पर्यटकों का खुले दिल से स्वागत करता है। उन्होंने लोगों से झारखंड के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने की अपील भी की। रांची से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित जोन्हा फॉल, जिसे गौतमधारा के नाम से भी जाना जाता है, राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। करीब 140 फीट की ऊंचाई से गिरता यह झरना, चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है। मानसून के मौसम में इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, जिससे यह झारखंड पर्यटन की प्रमुख पहचान बन जाता है।
रांची। दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मिलने वाला पद्मभूषण सम्मान पत्नी रूपी सोरेन और बहू कल्पना सोरेन ग्रहण करेंगी। ये जानकारी झामुमो को केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने दी। दिशोम गुरु शिबू सोरेन को यह नागरिक सम्मान सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे सार्थक योगदान और झारखंड राज्य के गठन में ऐतिहासिक भूमिका निभाने के लिए दिया जा रहा है। 4 अगस्त 2025 को हुआ था निधन बता दें कि 4 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी के बाद शिबू सोरेन का निधन हो गया था। वह लगातार 8 बार लोकसभा सांसद रहे और यूपीए सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी काम किया। जब उनका निधन हुआ वह राज्यसभा सांसद थे। झारखंड के लोगों का शिबू सोरेन से भावनात्मक जुड़ाव झारखंड के लोगों का शिबू सोरेन से भावनात्मक जुड़ाव है और इस वजह से उनको दिशोम गुरु कहा जाता है। शिबू सोरेन ने महाजनी और साहूकारी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष से सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। उन्होंने आदिवासियों को शिक्षित करने के लिए रात्रि पाठशालाओं का संचालन किया। शराबबंदी के खिलाफ अभियान चलाया। वह ना केवल एक राजनेता थे बल्कि सामाजिक सुधारक भी थे। भारत रत्न देने की है मांग जब शिबू सोरेन का निधन हुआ तो झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत अन्य पार्टी के नेताओं ने उनके लिए भारत रत्न की मांग की। उनके मोरहाबादी स्थित सरकारी आवास को म्यूजियम में तब्दील करने की मांग उठी। धुर्वा में उनका स्मृति स्थल बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने गुरुजी को भारत रत्न देने पर तो सहमति नहीं दी, लेकिन पद्म भूषण से सम्मानित करने का फैसला किया।
मुंबई, एजेंसियां। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन महाराष्ट्र दौरे के दौरान परिवार के साथ शिरडी में साईं बाबा मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने साईं बाबा के दर्शन कर राज्यवासियों की सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों पर जाने से मन को शांति मिलती है, कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति मिलती है और समाज के लिए बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्राप्त होती है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने मुख्यमंत्री का शॉल और साईं बाबा की प्रतिमा भेंट दर्शन के बाद साईं बाबा संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Goraksh Gadilkar ने मुख्यमंत्री का शॉल और साईं बाबा की प्रतिमा भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पहले भी कई बार शिरडी आ चुके हैं और झारखंड में भी साईं बाबा के मंदिरों में समय-समय पर दर्शन के लिए जाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि साईं बाबा के आशीर्वाद से ही उन्हें जनता की सेवा करने की प्रेरणा और शक्ति मिलती है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि वे साईं बाबा के चरणों में अच्छे विचार, सही निर्णय और भविष्य में अधिक से अधिक जनहित के कार्य करने का आशीर्वाद लेने आए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि इंसान से गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन ईश्वर का आशीर्वाद सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। सोशल मीडिया संदेश में मुख्यमंत्री ने लिखा अपने सोशल मीडिया संदेश में मुख्यमंत्री ने लिखा कि उन्होंने परिवार सहित साईं बाबा के चरणों में नमन कर झारखंडवासियों की खुशहाली, समृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य की प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने झारखंड में जल संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में पेयजल व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी पानी की समस्या बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की अपील करते हुए कहा कि झारखंड प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और विकास की अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसे देशभर के लोगों को अवश्य देखना चाहिए।
रांची। झारखंड से नव निर्वाचित राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैद्यनाथ राम को राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बैद्यनाथ राम संसद के उच्च सदन राज्यसभा में झारखंड की जनता की भावनाओं, अपेक्षाओं तथा राज्य के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे। पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने का जताया भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसभा में झारखंड के हितों की प्रभावी पैरवी और राज्य के विकास से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर रखने में बैद्यनाथ राम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वहीं, नव निर्वाचित सांसद बैद्यनाथ राम ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनका धन्यवाद किया और राज्य के हितों के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने का भरोसा जताया।
रांची। रांची में Jharkhand की दो राज्यसभा सीटों के लिए मतदान के बीच विधानसभा परिसर पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं हर पल बदलते घटनाक्रम पर नेताओं और समर्थकों की नजर टिकी हुई है। इसी बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ विधानसभा पहुंचे। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही महागठबंधन की लॉबी में हलचल तेज हो गई और गठबंधन के सभी विधायक एक जगह एकत्रित होते नजर आए। महागठबंधन के विधायक पहुंचे मतदान के लिए एनडीए विधायकों के मतदान के बाद महागठबंधन के विधायकों ने भी वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेना शुरू किया। विधानसभा परिसर से सामने आई तस्वीरों में कांग्रेस और झामुमो समेत गठबंधन के कई विधायक एक साथ मतदान कर बाहर निकलते दिखाई दिए। इस दौरान गठबंधन के नेताओं में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। हर गतिविधि पर मुख्यमंत्री की नजर राज्यसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुरुआत से ही सक्रिय दिखे हैं। उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति और मतदान के दिन की गतिविधियों तक वे लगातार पूरे घटनाक्रम की निगरानी करते दिखाई दिए। विधानसभा परिसर में भी वे विधायकों और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में रहे। एनडीए और महागठबंधन दोनों कर रहे जीत का दावा राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष में माहौल होने का दावा कर रहे हैं। मतदान के दौरान दोनों खेमों के नेताओं के हावभाव और सक्रियता से साफ है कि मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। चुनाव से पहले विधायकों की बैठकों, रणनीति और राजनीतिक गतिविधियों ने भी इस चुनाव को खास बना दिया है। शाम तक साफ हो सकती है तस्वीर विधानसभा में मतदान शाम 4 बजे तक जारी रहेगा। इसके बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू होगी और अगले कुछ घंटों में यह साफ होने की उम्मीद है कि झारखंड की दोनों राज्यसभा सीटों पर किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहा। फिलहाल पूरे राज्य की नजर विधानसभा में चल रही इस सियासी जंग पर टिकी हुई है।
रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन विधानसभा पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। दोनों नेताओं के विधानसभा पहुंचने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं। सुबह से ही विधानसभा परिसर में विधायकों की आवाजाही बनी रही और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता मतदान प्रक्रिया पर लगातार नजर रखे हुए हैं।राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान सुबह 9 बजे से शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और देर शाम तक परिणाम आने की संभावना है। चुनाव को देखते हुए विधानसभा परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
रांची। रांची से बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन आज से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थन में चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। दोनों नेता 18 से 20 अप्रैल तक विभिन्न जिलों में टीएमसी उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभाएं करेंगे। पुरुलिया से होगी प्रचार की शुरुआत 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची से हेलीकॉप्टर के जरिए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के काशीपुर सहित कई क्षेत्रों में पहुंचेंगे। यहां वे तीन अलग-अलग स्थानों पर जनसभाओं को संबोधित करेंगे और स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक परिस्थितियों पर भी अपनी बात रखेंगे। कार्यक्रम के बाद उनका शाम तक रांची लौटने का कार्यक्रम है। तीन दिन तक जारी रहेगा प्रचार अभियान पार्टी के केंद्रीय सचिव अभिषेक प्रसाद पिंटू के अनुसार, 19 और 20 अप्रैल को भी हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में टीएमसी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे। इस दौरान कई चुनावी रैलियां और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। झामुमो और टीएमसी के बीच मजबूत रणनीतिक गठबंधन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पहले ही पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी और इस बार कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। इसी रणनीति के तहत पार्टी के शीर्ष नेता सीधे चुनावी मैदान में उतरकर टीएमसी के प्रचार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रभाव वाले क्षेत्रों पर फोकस पार्टी नेताओं का मानना है कि जिन क्षेत्रों में हेमंत और कल्पना सोरेन प्रचार करेंगे, वहां झामुमो का भी प्रभाव देखा जाता है। ऐसे में इसका सीधा लाभ टीएमसी उम्मीदवारों को मिल सकता है। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी एकता और क्षेत्रीय दलों के सहयोग की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।