How to Make Moong Dal Dhokla: अगर आप मानसून के मौसम में हल्का, हेल्दी और प्रोटीन से भरपूर नाश्ता तलाश रहे हैं, तो इस बार बेसन की जगह मूंग दाल से बना ढोकला जरूर ट्राई करें। यह रेसिपी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ डाइट और फिटनेस फॉलो करने वालों के लिए भी बेहतरीन विकल्प है। इसकी खासियत है कि यह बिना ज्यादा तेल के तैयार होता है, आसानी से पचता है और सॉफ्ट व जालीदार बनता है। बारिश के मौसम में अक्सर तली-भुनी चीजें खाने का मन करता है, लेकिन अधिक ऑयली फूड पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। ऐसे में मूंग दाल ढोकला एक ऐसा हेल्दी विकल्प है, जो स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संतुलन देता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर और आवश्यक पोषक तत्व लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं और शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। यह रेसिपी बच्चों, ऑफिस जाने वालों, फिटनेस लवर्स और वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है। इसे सुबह के नाश्ते, शाम के स्नैक या टिफिन में भी शामिल किया जा सकता है। आवश्यक सामग्री 1 कप धुली मूंग दाल (4–5 घंटे भिगोई हुई) 1 इंच अदरक 2 हरी मिर्च 2 बड़े चम्मच दही (वैकल्पिक) 1 छोटा चम्मच नमक 1 छोटा चम्मच चीनी (वैकल्पिक) 1 छोटा चम्मच नींबू का रस 1 छोटा चम्मच ईनो या ½ छोटा चम्मच बेकिंग सोडा 1 बड़ा चम्मच तेल तड़के के लिए 1 बड़ा चम्मच तेल 1 छोटा चम्मच राई 8–10 करी पत्ते 2 हरी मिर्च (लंबाई में कटी हुई) 1 बड़ा चम्मच सफेद तिल थोड़ा हरा धनिया आवश्यकता अनुसार पानी बनाने की विधि 1. बैटर तैयार करें भीगी हुई मूंग दाल का पानी निकालकर अदरक, हरी मिर्च और थोड़ा पानी मिलाकर स्मूद बैटर तैयार करें। इसमें दही, नमक, नींबू का रस और चीनी मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें। 2. बैटर को फुलाएं स्टीम करने से ठीक पहले बैटर में ईनो डालें और ऊपर से थोड़ा पानी डालकर हल्के हाथ से मिलाएं। बैटर तुरंत फूलने लगेगा। 3. स्टीम करें ग्रीस की हुई प्लेट या ढोकला ट्रे में बैटर डालें। पहले से गर्म स्टीमर में 15–20 मिनट तक मध्यम आंच पर पकाएं। टूथपिक डालकर जांच लें। साफ निकलने पर ढोकला तैयार है। 4. तड़का लगाएं पैन में तेल गर्म करें। राई चटकाएं, फिर करी पत्ता, हरी मिर्च और तिल डालें। थोड़ा पानी डालकर एक मिनट उबालें और तैयार तड़का ढोकले के ऊपर डाल दें। 5. सर्व करें ऊपर से हरा धनिया डालकर हरी चटनी या धनिया-पुदीना डिप के साथ गरमागरम परोसें। अनुमानित पोषण (प्रति सर्विंग) कैलोरी: 180–220 kcal प्रोटीन: 10–12 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 22–25 ग्राम फाइबर: 5–6 ग्राम फैट: 4–6 ग्राम (पोषण सामग्री उपयोग की गई सामग्री के अनुसार बदल सकती है।) तैयार होने में कितना समय लगेगा? तैयारी का समय: 10 मिनट (दाल भिगोने का समय अलग) स्टीमिंग समय: 20 मिनट कुल समय: लगभग 30 मिनट डाइट और फिटनेस के लिए क्यों है अच्छा? हाई प्रोटीन और हाई फाइबर कम तेल में तैयार होने वाली रेसिपी लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार वर्कआउट के बाद या हेल्दी ब्रेकफास्ट के लिए उपयुक्त मानसून में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन ध्यान रखें :- ढोकला सॉफ्ट बनाने के लिए बैटर ज्यादा पतला न रखें और ईनो मिलाने के तुरंत बाद स्टीम करें। बेहतर स्वाद के लिए ताजा मूंग दाल और कम तेल का उपयोग करें।
Healthy High Protein Breakfast Recipe: अगर आप ऐसा नाश्ता चाहते हैं जो 15 मिनट से भी कम समय में तैयार हो जाए, स्वादिष्ट भी हो और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद करे, तो स्क्रैम्बल्ड एग ब्रेड और टोफू ब्रेड बेहतरीन विकल्प हैं। एक सर्विंग में लगभग 270–340 कैलोरी मिलती है, जो संतुलित और एनर्जी देने वाला नाश्ता बन सकती है। Breakfast Protein Special: हाई-प्रोटीन नाश्ते के लिए ट्राई करें ये 2 आसान रेसिपीज दिन की अच्छी शुरुआत पौष्टिक नाश्ते से होती है। अगर सुबह का भोजन प्रोटीन से भरपूर हो, तो लंबे समय तक पेट भरा रहने में मदद मिल सकती है और अनहेल्दी स्नैकिंग की संभावना कम हो सकती है। यही वजह है कि न्यूट्रिशन एक्सपर्ट भी दिन की शुरुआत हाई-प्रोटीन ब्रेकफास्ट से करने की सलाह देते हैं। अगर आप रोजाना पोहा, पराठा या ब्रेड-बटर खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार स्क्रैम्बल्ड एग ब्रेड और हाई-प्रोटीन टोफू ब्रेड ट्राई करें। ये दोनों रेसिपीज स्वादिष्ट होने के साथ-साथ अच्छी मात्रा में प्रोटीन और संतुलित कैलोरी भी प्रदान करती हैं। 1. स्क्रैम्बल्ड एग ब्रेड (10–12 मिनट) आवश्यक सामग्री 2 अंडे 2 मल्टीग्रेन या ब्राउन ब्रेड स्लाइस 1 छोटा प्याज 1 छोटा टमाटर 1 हरी मिर्च नमक और काली मिर्च 1 छोटा चम्मच ऑलिव ऑयल या घी हरा धनिया बनाने की विधि हल्के तेल में प्याज, टमाटर और हरी मिर्च भूनें। फेंटे हुए अंडे डालकर स्क्रैम्बल तैयार करें। ऊपर से काली मिर्च और हरा धनिया डालें और टोस्टेड ब्राउन ब्रेड के साथ परोसें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 310–340 kcal प्रोटीन: 18–20 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 28 ग्राम फैट: 12–15 ग्राम 2. हाई-प्रोटीन टोफू ब्रेड (12–15 मिनट) आवश्यक सामग्री 100 ग्राम फर्म टोफू 2 ब्राउन ब्रेड स्लाइस 1 छोटा प्याज शिमला मिर्च नमक काली मिर्च चिली फ्लेक्स 1 छोटा चम्मच ऑलिव ऑयल ओरिगेनो (वैकल्पिक) बनाने की विधि टोफू को क्रम्बल करें। हल्के तेल में प्याज और शिमला मिर्च भूनें। टोफू और मसाले डालकर 3–4 मिनट पकाएं। तैयार मिश्रण को टोस्टेड ब्रेड पर रखें और गर्मागर्म परोसें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 270–300 kcal प्रोटीन: 16–18 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 26 ग्राम फैट: 9–11 ग्राम हाई-प्रोटीन नाश्ता क्यों है जरूरी? लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। बार-बार भूख लगने और ओवरईटिंग को कम करने में सहायक हो सकता है। मांसपेशियों की रिकवरी और विकास में मदद करता है। दिनभर के लिए स्थिर ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है। संतुलित और एक्टिव लाइफस्टाइल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। किसे कौन-सी रेसिपी चुननी चाहिए? स्क्रैम्बल्ड एग ब्रेड नॉन-वेज खाने वालों के लिए बेहतर विकल्प। वर्कआउट के बाद भी खाया जा सकता है। टोफू ब्रेड शाकाहारी लोगों के लिए हाई-प्रोटीन विकल्प। हल्का और लो-फैट नाश्ता पसंद करने वालों के लिए उपयुक्त। कब खाएं? सुबह नाश्ते में वर्कआउट के 30–60 मिनट बाद शाम के हेल्दी स्नैक के रूप में ध्यान दें: केवल हाई-प्रोटीन नाश्ता खाने से वजन कम या मसल्स नहीं बनते। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद भी जरूरी है। यदि आपको किडनी, लिवर या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह लें।
Kuzhi Paniyaram को लेकर फिर बढ़ी चर्चा दक्षिण भारतीय पारंपरिक नाश्ता Kuzhi Paniyaram एक बार फिर चर्चा में है। अभिनेता R. Madhavan ने हाल ही में खुलासा किया कि यह उनकी पसंदीदा ब्रेकफास्ट डिश में से एक है। इसके बाद सेहत विशेषज्ञों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स ने भी इस डिश को हेल्दी मॉर्निंग मील बताया है। उनका कहना है कि यह पारंपरिक फर्मेंटेड डिश पाचन सुधारने, गट हेल्थ बेहतर रखने और वजन नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। क्या है Kuzhi Paniyaram? Kuzhi Paniyaram चावल और उड़द दाल के फर्मेंटेड बैटर से बनाया जाता है। इसे खास तरह के पैन में पकाया जाता है, जिससे इसका बाहरी हिस्सा कुरकुरा और अंदर से नरम रहता है। यह डिश स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर मानी जाती है। फर्मेंटेशन कैसे करता है गट हेल्थ बेहतर? विशेषज्ञों के अनुसार इस डिश का सबसे बड़ा फायदा इसका फर्मेंटेशन प्रोसेस है। डॉक्टरों का कहना है कि फर्मेंटेशन जटिल कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को आंशिक रूप से तोड़ देता है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है। यह शरीर में अच्छे बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा उड़द दाल में मौजूद फाइबर कब्ज और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माना जाता है। वजन घटाने में भी मिल सकती है मदद विशेषज्ञों के मुताबिक Kuzhi Paniyaram वजन नियंत्रित करने में भी मददगार हो सकता है, खासकर जब इसे कम तेल में बनाया जाए। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से भी रोकने में मदद करता है। पैकेज्ड फूड से बेहतर माने जाते हैं पारंपरिक नाश्ते डॉक्टरों का कहना है कि पारंपरिक भारतीय नाश्ते पैकेज्ड और प्रोसेस्ड ब्रेकफास्ट फूड की तुलना में ज्यादा पौष्टिक होते हैं। जहां पैकेज्ड फूड में अधिक चीनी, मैदा और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, वहीं पारंपरिक व्यंजन प्राकृतिक सामग्री और घरेलू तरीके से बनाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे नाश्ते ऊर्जा बनाए रखने के साथ पाचन तंत्र पर भी कम दबाव डालते हैं। इन हेल्दी ब्रेकफास्ट विकल्पों को भी माना गया फायदेमंद विशेषज्ञों ने कुछ अन्य पारंपरिक और गट-फ्रेंडली नाश्तों की भी सलाह दी है, जिनमें शामिल हैं: Idli और सांभर Dosa Moong Dal Cheela Besan Chilla Ragi Dosa वेजिटेबल उपमा दही, फल और नट्स Dhokla खानपान में संतुलन जरूरी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि एसिडिटी, IBS, ब्लोटिंग या डायबिटीज जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपने शरीर के अनुसार भोजन चुनना चाहिए और बहुत ज्यादा तेल वाला या भारी नाश्ता करने से बचना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक सामग्री और फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल करना लंबे समय में बेहतर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।