अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए NASA का Artemis II मिशन अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। इस मिशन के तहत Orion स्पेसक्राफ्ट सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा से निकलकर चंद्रमा की ओर बढ़ चुका है।
ट्रांस-लूनर इंजेक्शन (TLI) बर्न के सफल होने के बाद अब यह मिशन डीप स्पेस में प्रवेश कर चुका है और पूरी दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं।
मिशन लॉन्च के तुरंत बाद अंतरिक्ष यात्रियों को सीधे चांद की ओर नहीं भेजा गया। वैज्ञानिकों ने पहले पृथ्वी की कक्षा में ही स्पेसक्राफ्ट के सभी सिस्टम-जैसे लाइफ सपोर्ट, नेविगेशन और पावर-की गहन जांच की।
सभी सिस्टम सुरक्षित पाए जाने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।
मिशन की योजना के अनुसार, ओरियन स्पेसक्राफ्ट अपनी यात्रा के छठे दिन यानी लगभग 6–7 अप्रैल 2026 को चांद के सबसे करीब पहुंचेगा।
इस दौरान इसकी दूरी चांद से करीब 7,500 किलोमीटर होगी।
यह वही क्षण होगा जब अंतरिक्ष यात्री चांद के ‘फार साइड’ (पिछले हिस्से) को देखेंगे और ‘अर्थराइज’ यानी चांद से उगती पृथ्वी का अद्भुत दृश्य अनुभव करेंगे।
इस मिशन के दौरान स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से लगभग 4 लाख किलोमीटर दूर तक जाएगा।
यह 1972 के Apollo 17 के बाद पहली बार होगा जब इंसान इतनी दूरी तक जाएगा।
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, लेकिन कोई भी चांद की सतह पर लैंड नहीं करेगा।
यह मिशन चांद की परिक्रमा कर वापस लौटने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि भविष्य के मानव मिशनों के लिए तकनीक का परीक्षण किया जा सके।
पूरा मिशन लगभग 10 दिनों का है:
यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो मिशन 11 अप्रैल 2026 तक समाप्त हो जाएगा।
वापसी के दौरान स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वातावरण में करीब 25,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से प्रवेश करेगा।
यह मिशन का सबसे जोखिम भरा चरण माना जाता है, जहां हीट और स्पीड दोनों ही बड़ी चुनौती होती हैं।
Artemis-II एक टेस्ट मिशन है, जो भविष्य में इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी का अहम हिस्सा है।
इस मिशन के जरिए NASA स्पेसक्राफ्ट, तकनीक और अंतरिक्ष यात्रियों की क्षमता का परीक्षण कर रहा है।
इसकी सफलता ही आने वाले बड़े मिशनों-खासतौर पर मानव लैंडिंग-की नींव तय करेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मध्य अमेरिकी देश Honduras में गुरुवार को हुई दो बड़ी हिंसक घटनाओं ने पूरे देश को हिला दिया। कुछ ही घंटों के अंतराल में हुए दो अलग-अलग हमलों में बंदूकधारियों ने खेतों में काम कर रहे मजदूरों और गैंग विरोधी अभियान पर निकले पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। इन हमलों में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 19 मजदूर और 6 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। खेत में घुसकर मजदूरों पर बरसाईं गोलियां पहला हमला उत्तरी होंडुरास के Trujillo इलाके में हुआ। यहां एक प्लांटेशन (खेती क्षेत्र) में काम कर रहे मजदूरों पर अज्ञात बंदूकधारियों ने अचानक हमला कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कम से कम 19 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि यह इलाका लंबे समय से जमीन विवाद, अवैध कब्जों और ड्रग तस्करी से जुड़ी हिंसा के लिए बदनाम रहा है। हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। गैंग विरोधी मिशन पर निकले पुलिसकर्मी भी बने निशाना दूसरा हमला Omoa नगर पालिका में हुआ, जो ग्वाटेमाला सीमा के पास स्थित है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गैंग विरोधी ऑपरेशन पर जा रही पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया। इस हमले में एक वरिष्ठ अधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। बताया गया कि पुलिस दल राजधानी Tegucigalpa से ऑपरेशन के लिए रवाना हुआ था, तभी रास्ते में हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया। हिंसा और ड्रग तस्करी से जूझ रहा है होंडुरास होंडुरास लंबे समय से गैंग वॉर, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और संगठित अपराध की समस्या से जूझ रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में हत्या की दर में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन हिंसा की घटनाएं अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अपराध से निपटने के लिए सरकार की सख्त सैन्य रणनीति के बावजूद हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सके हैं। कई संगठनों ने सुरक्षा बलों पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए भी खतरनाक देश गैर-सरकारी संगठन Global Witness के अनुसार, होंडुरास पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में यहां पांच पर्यावरण कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 18 थी। लगातार बढ़ती हिंसा ने एक बार फिर होंडुरास की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Donald Trump ने ईरान संकट और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अपने बेटे Donald Trump Jr. की शादी में शामिल होने को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए शादी में जाना आसान नहीं है और चाहे वह जाएं या नहीं, दोनों ही हालात में मीडिया उन्हें निशाना बनाएगा। पत्रकारों से क्या बोले ट्रंप? व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह अपने बेटे की शादी में शामिल होने की कोशिश करेंगे, लेकिन फिलहाल समय सही नहीं लग रहा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “अगर मैं शादी में जाता हूं, तो मुझे मारा जाएगा। अगर नहीं जाता हूं, तो फेक न्यूज मुझे छोड़ने वाली नहीं है।” ट्रंप ने संकेत दिया कि Iran से जुड़े मौजूदा तनाव और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात उनकी प्राथमिकता बने हुए हैं। बहामास में होगी निजी शादी रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनल्ड ट्रंप जूनियर इस सप्ताहांत Bahamas में एक निजी समारोह में मॉडल और सोशलाइट Bettina Anderson के साथ शादी के बंधन में बंध सकते हैं। बताया जा रहा है कि समारोह को बेहद निजी रखा गया है और इसमें केवल करीबी परिवार के सदस्यों तथा दोस्तों को ही आमंत्रित किया गया है। सुरक्षा और राजनीति बनी बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि उनकी मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक चर्चाएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि शादी में शामिल होने या न होने, दोनों स्थितियों में मीडिया आलोचना करेगा। ट्रंप ने इसे “ऐसी स्थिति जिसमें मैं जीत नहीं सकता” बताया। कैंप डेविड में हुई थी सगाई डोनल्ड ट्रंप जूनियर ने दिसंबर में अपनी सगाई का ऐलान किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों की सगाई Camp David में हुई थी। बाद में बेटिना एंडरसन ने Mar-a-Lago में एक ब्राइडल शावर कार्यक्रम भी आयोजित किया था। ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी यह डोनल्ड ट्रंप जूनियर की दूसरी शादी होगी। इससे पहले उनकी शादी Vanessa Trump से हुई थी, जिनसे उनके पांच बच्चे हैं। दोनों का 2018 में तलाक हो गया था। हाल ही में वैनेसा ट्रंप ने खुलासा किया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। इसके अलावा ट्रंप जूनियर की सगाई पहले Kimberly Guilfoyle से भी हुई थी, लेकिन 2024 में दोनों का रिश्ता खत्म हो गया। ईरान संकट पर टिकी दुनिया की नजर ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश नीति और सुरक्षा प्राथमिकताएं निजी कार्यक्रमों पर भारी पड़ सकती हैं।
Marco Rubio ने भारत को अमेरिका का “बेहतरीन साझीदार” बताते हुए बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत को उसकी जरूरत के मुताबिक जितना ईंधन चाहिए, उतना बेचने के लिए तैयार है। रूबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। भारत दौरे को बताया बेहद अहम मार्को रूबियो 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे Kolkata, Agra, Jaipur और New Delhi का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, “भारत हमारे सबसे बेहतरीन सहयोगियों और साझीदारों में से एक है। हम उनके साथ मिलकर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है।” रूबियो ने यह भी कहा कि इस दौरे के दौरान उन्हें क्वाड देशों के प्रतिनिधियों से मिलने का मौका मिलेगा, जो रणनीतिक रूप से काफी अहम है। क्वाड बैठक पर भी फोकस अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि इस साल के अंत में क्वाड देशों की एक और बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। Quadrilateral Security Dialogue यानी क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर अहम माना जाता है। वेनेजुएला के तेल पर भी नजर रूबियो ने संकेत दिए कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि Venezuela के तेल को लेकर भी कई अवसर मौजूद हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति Delcy Rodriguez अगले सप्ताह भारत यात्रा पर आ सकती हैं, जहां तेल व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हो सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी रिफाइनरियों में वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान को चेतावनी रूबियो ने Iran को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण या वहां से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का शुल्क लगाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेगा। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ओमान के साथ मिलकर होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर स्थायी टोल व्यवस्था को लेकर चर्चा कर रहा है। अमेरिका ने इसे वैश्विक व्यापार और समुद्री स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है। भारत पर बढ़ते तेल संकट का असर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल और गैस से पूरा करता है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल कीमतों में उछाल का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलएनजी की कीमतों में तेजी देखी गई है। बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच भारत की तेल विपणन कंपनियों ने चार दिनों के भीतर दो बार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की। पहले 3 रुपये और बाद में 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जिससे आम लोगों और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी हो सकती है मजबूत विशेषज्ञों का मानना है कि मार्को रूबियो का बयान भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दे सकता है। अगर अमेरिका भारत को बड़े पैमाने पर तेल और गैस सप्लाई बढ़ाता है, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और मध्य पूर्व पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।