बिहार के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब बिल्डर अपनी कंपनियों और प्रोजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन पूरे साल किसी भी समय करा सकेंगे। पहले सीमित समय की बाध्यता के कारण कई परियोजनाएं अटक जाती थीं, लेकिन अब नई व्यवस्था से प्रक्रिया अधिक सरल और तेज हो जाएगी।
नगर विकास एवं आवास विभाग के इस फैसले से बिल्डरों को बड़ी सुविधा मिलेगी। अब वे किसी तय समय का इंतजार किए बिना अपने प्रोजेक्ट्स का पंजीकरण करा सकेंगे। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में गति आने की उम्मीद है।
विवेक कुमार सिंह ने बिल्डरों से अपील की है कि वे आवेदन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज और सूचनाएं सही तरीके से जमा करें। इससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी नहीं होगी और प्रोजेक्ट्स को जल्दी मंजूरी मिल सकेगी।
अध्यक्ष ने बताया कि अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में रजिस्ट्रेशन कराने वाले प्रोजेक्ट्स की संख्या काफी कम है।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पिछले कुछ महीनों में करीब 100 आवेदन सिर्फ जरूरी कागजात की कमी के कारण रद्द कर दिए गए।
इस समस्या को दूर करने के लिए बिहार रेरा ने नया फिल्टर सिस्टम लागू किया है।
इस सिस्टम के तहत बिल्डरों को आवेदन भरते समय ही यह पता चल जाएगा कि उनके दस्तावेज पूरे हैं या नहीं। इससे अधूरे आवेदन जमा होने से पहले ही सुधार किया जा सकेगा।
हाल ही में आयोजित एक वर्कशॉप में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार सहित कई अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान बिल्डरों को नई प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेजों और आवेदन से जुड़ी सभी जानकारी विस्तार से दी गई।
बिल्डरों की मदद के लिए रेरा की ओर से काउंसलिंग सुविधा भी दी जा रही है। इसके जरिए उन्हें आवेदन प्रक्रिया और जरूरी कागजात के बारे में विस्तार से समझाया जाता है, ताकि आवेदन रद्द होने की स्थिति से बचा जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। बिहार के माफिया झारखंड में पेपर लीक करा रहे हैं। ये तकरीबन हर परीक्षा में पेपर लीक कराने का ठेका लेते है। इनके कारण झारखंड की कई परीक्षाएं विवादों के घेरे में आ चुकी हैं। अभी हाल ही में पुलिस ने इसे लेकर बड़ा खुलासा किया है। झारखंड पुलिस ने रांची के एक केंद्र पर एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान ये खुलासा किया। पुलिस ने कथित तौर पर उच्च तकनीक की मदद से नकल करने के आरोप में 20 वर्षीय एक अभ्यर्थी समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी बिहार के रहने वाले हैं। कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में नकल के आरोप में 4 गिरफ्तार पुलिस के अनुसार कंप्यूटर सिस्टम को हैक करने के प्रयास की सूचना मिलने के बाद बीते गुरुवार को टाटिसिलवे थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऑनलाइन परीक्षा केंद्र पर गिरफ्तारियां की गईं। आरोपियों की पहचान सीवान जिले के अभ्यर्थी मृत्युंजय कुमार यादव (20), नालंदा जिले के पर्यवेक्षक संजीत कुमार (25), केंद्र अधीक्षक विकाश कुमार (29) और आईटी कर्मचारी मुन्ना राज (29) के रूप में की गई है और ये सभी बिहार के रहने वाले हैं। हाईटेक तरीके से की जा रही थी नकल रांची के ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने केंद्र का निरीक्षण करते समय पाया कि एक अभ्यर्थी ने परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले कंप्यूटर सिस्टम को फिर से चालू किया था, जो मानक प्रक्रिया का उल्लंघन था। उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि सिस्टम तक दूर से पहुंच बनाई जा रही थी। सिस्टम को कर लिया था हैक जांच में पता चला कि केंद्र अधीक्षक और आईटी कर्मचारी ने कथित तौर पर परीक्षा केंद्र से लगभग 50 मीटर दूर एक घर में एक कंप्यूटर सिस्टम लगाया था और इंटरनेट तथा आईपी एक्सेस के माध्यम से सिस्टम को हैक करके प्रश्नों को हल किया जा रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने खुलासा किया कि बिहार के एक बिचौलिए ने केंद्र संचालक और कर्मचारियों की मदद से अभ्यर्थी के लिए छह लाख रुपये में यह व्यवस्था की थी। 6 से 10 लाख तक की वसूली उन्होंने बताया कि झारखंड में बिचौलिए ने कथित तौर पर अभ्यर्थी के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को जमानत के तौर पर अपने पास रखा था। आरोपी ने यह भी खुलासा किया कि इस तरह की व्यवस्था के लिए छह लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की रकम वसूली जा रही थी। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस को संदेह है कि ऑनलाइन परीक्षाओं में धांधली कराने में एक संगठित गिरोह शामिल है। उन्होंने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है। फिलहाल टाटिसिलवे थाने में मामला दर्ज कर आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पटना, एजेंसियां। प्रशांत किशोर एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। बिहार चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब उनके महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय होने की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि उन्होंने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली Nationalist Congress Party (NCP) के नेताओं से मुलाकात की है। दो घंटे की बैठक से बढ़ी सियासी चर्चा सूत्रों के अनुसार, हाल ही में प्रशांत किशोर और सुनेत्रा पवार के बीच करीब दो घंटे तक बैठक हुई। बताया जा रहा है कि इस दौरान महाराष्ट्र में पार्टी संगठन को मजबूत करने और नई रणनीति पर चर्चा हुई। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि प्रशांत किशोर जल्द ही महाराष्ट्र में एनसीपी के लिए रणनीतिक भूमिका निभा सकते हैं। सुनेत्रा पवार ने दी सफाई हालांकि, इन अटकलों पर सुनेत्रा पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति साफ करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर उनके पुराने पारिवारिक मित्र हैं और उन्हें “दादा” के समय से जानती हैं। उन्होंने बताया कि प्रशांत किशोर शहर में थे, इसलिए उन्हें घर पर भोजन और बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था। सुनेत्रा पवार ने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार प्रशांत किशोर कई साल पहले राजनीतिक सलाहकार की भूमिका छोड़ चुके हैं और फिलहाल किसी पार्टी के लिए रणनीतिकार के रूप में काम करने की संभावना नहीं दिखती। NCP के लिए अहम हो सकता है साथ इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर प्रशांत किशोर एनसीपी के साथ जुड़ते हैं तो यह पार्टी के लिए बड़ा सहारा साबित हो सकता है। अजित पवार के निधन के बाद पार्टी संगठनात्मक चुनौतियों और अंदरूनी कलह से जूझ रही है। ऐसे में आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले अनुभवी रणनीतिकार का साथ पार्टी को नई दिशा दे सकता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पहली कैबिनेट बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में कुल 18 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। सबसे बड़ा फैसला राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को बढ़ाने को लेकर लिया गया। वित्त विभाग के अनुसार, सातवें वेतनमान के तहत वेतन और पेंशन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं पांचवें वेतनमान के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए DA 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले से लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा। पटना मेट्रो और स्वास्थ्य सुविधाओं को मिली मजबूती कैबिनेट बैठक में Patna Metro परियोजना के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने कॉरिडोर-1 और कॉरिडोर-2 के निर्माण हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹768.12 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले के तहत राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के लिए 121 नए एम्बुलेंस खरीदने की मंजूरी दी गई। ALS और BLS श्रेणी के इन एम्बुलेंसों की खरीद पर ₹42.50 करोड़ खर्च होंगे। इससे मरीजों को बेहतर और तेज आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी। उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने की तैयारी सरकार ने “मुख्यमंत्री सूक्ष्म एवं लघु उद्योग क्लस्टर विकास योजना” का नाम बदलकर “मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्लस्टर विकास योजना” करने को मंजूरी दी है। इसके तहत उद्योगों के लिए सामान्य सुविधा केंद्र (CFC) स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा पटना जिले के फतुहा में डेयरी उत्पादन इकाई लगाने के लिए ₹97.17 करोड़ के निजी निवेश को स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना में फुल क्रीम दूध, दही, छाछ और मक्खन का उत्पादन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे करीब 170 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। कानून-व्यवस्था और निवेश पर भी जोर कैबिनेट ने पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सीवान जैसे संवेदनशील जिलों में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पांच नए पदों के सृजन को मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इससे अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था मजबूत होगी। इसके साथ ही बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (BIIPP) 2025 की अवधि 30 जून 2026 तक बढ़ा दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।