भोजपुर, एजेंसियां। लेह-लद्दाख की खूबसूरत वादियों में घूमने और अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने की तैयारी कर रहे भोजपुर के दो होनहार युवकों की जिंदगी एक दर्दनाक हादसे में खत्म हो गई। खारदुंगला दर्रे के पास अचानक हुए भूस्खलन की चपेट में आने से एक ही बाइक पर सवार अभिजीत आनंद और सोनू कुमार की मौत हो गई। दोनों अपने दोस्तों के साथ लद्दाख घूमने गए थे।
अभिजीत और सोनू अकेले लद्दाख नहीं गए थे। कुल 10 युवकों का ग्रुप इस यात्रा पर निकला था। इनमें चार युवक बिहिया के रहने वाले थे, जबकि छह दिल्ली से उनके साथ जुड़े थे। सभी पहले जम्मू पहुंचे और वहां से पांच बाइक किराये पर लेकर लेह-लद्दाख के लिए रवाना हुए।
यात्रा के दौरान सभी दोस्तों ने कई जगहों पर तस्वीरें खींचीं और लद्दाख की खूबसूरत वादियों का आनंद लिया। उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह यात्रा उनके दो दोस्तों के जीवन की आखिरी यात्रा बन जाएगी।
मंगलवार को ग्रुप खारदुंगला दर्रे के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान अचानक पहाड़ से भूस्खलन हुआ और भारी मलबा व पत्थर सड़क पर आ गिरे।
चार बाइकों पर सवार आठ युवक किसी तरह सुरक्षित निकल गए, लेकिन एक बाइक पर सवार अभिजीत और सोनू मलबे की चपेट में आ गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि दोनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मलबे और भारी पत्थरों की चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
बिहिया के जज बाजार निवासी थोक किराना व्यवसायी विकास कुमार केशरी के 22 वर्षीय इकलौते बेटे अभिजीत आनंद की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। अभिजीत ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी से BCA की पढ़ाई कर रहा था।
अभिजीत का सपना कंप्यूटर साइंस और तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाने का था। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं और वह अपने भविष्य को लेकर गंभीरता से तैयारी कर रहा था।
21 वर्षीय सोनू कुमार भी अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देख रहा था। मझौली पंचायत के खाखोबांध इलाके के रहने वाले सोनू के पिता संजय प्रसाद बिहिया टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में चतुर्थ वर्ग कर्मचारी हैं।
सोनू जगदीशपुर के वीर कुंवर सिंह कॉलेज में बीए का छात्र था। उसका सपना सिविल सर्विसेज की तैयारी कर प्रशासनिक सेवा में जाने का था। बेटे की मौत की खबर के बाद मां राधिका देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।
अभिजीत और सोनू करीबी दोस्त थे। दोनों अलग-अलग जगह पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन दोस्ती ने उन्हें जोड़े रखा। इसी दोस्ती और घूमने की योजना के तहत दोनों लद्दाख पहुंचे थे।
एक युवक कंप्यूटर साइंस में करियर बनाना चाहता था, जबकि दूसरा प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और समाज की सेवा करने का सपना देख रहा था। दोनों की मंजिल अभी दूर थी, लेकिन एक अचानक हुए भूस्खलन ने उनके सारे सपने अधूरे छोड़ दिए।
परिजनों के अनुसार, लद्दाख में जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस से दिल्ली लाया जाएगा। इसके बाद दिल्ली से पटना और फिर बिहिया स्थित उनके पैतृक आवास लाया जाएगा। परिजनों को गुरुवार तक शव पहुंचने की उम्मीद है।
दोनों युवकों की मौत की खबर से बिहिया में शोक की लहर है। जिस यात्रा को दोस्त जिंदगी की खूबसूरत याद बनाने निकले थे, वही सफर अभिजीत और सोनू के परिवारों के लिए कभी न भूल पाने वाला दर्द बन गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हाजीपुर, एजेंसियां। कर्नाटक के बीदर में एसबीआई की मुख्य शाखा के पास करीब 83 लाख रुपये की डकैती और हत्या के मामले में कर्नाटक पुलिस ने बिहार के वैशाली जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई कर्नाटक पुलिस और वैशाली के सराय थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने की। दामोदरपुर के पास छापेमारी पुलिस को सूचना मिली थी कि मामले में शामिल दोनों आरोपी वैशाली के सराय थाना क्षेत्र के दामोदरपुर गांव के पास छिपे हुए हैं। इसके बाद कर्नाटक पुलिस और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर दोनों को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आलोक उर्फ अंबानी और अमन कुमार के रूप में हुई है। फायरिंग कर लूटा था 83 लाख रुपये पुलिस के अनुसार, बीदर में एसबीआई की मुख्य शाखा से एक सीएमएस कंपनी के कर्मचारी नकदी लेकर एटीएम में जमा करने जा रहे थे। इसी दौरान अपराधियों ने फायरिंग कर करीब 83 लाख रुपये से भरा ट्रंक लूट लिया था। गोलीबारी में कंपनी के एक कर्मचारी की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ था। कर्नाटक पुलिस आरोपियों को अपने साथ ले गई गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को कर्नाटक पुलिस अपने साथ ले गई। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर डकैती में शामिल अन्य आरोपियों और पूरे आपराधिक नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है। इस मामले में पहले भी कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। सादे कपड़ों में पहुंची थी पुलिस टीम बताया गया है कि कर्नाटक पुलिस की टीम सादे कपड़ों में आरोपियों की तलाश में पहुंची थी। इसी दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस टीम के बीच गलतफहमी के कारण झड़प की स्थिति भी बनी थी। बाद में पुलिस की पहचान स्पष्ट होने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) बनाने की योजना सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में पटना को आधुनिक और वैश्विक स्तर का शहर बनाने के लिए इस परियोजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। NBCC ने पेश किया वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का प्रस्ताव बैठक के दौरान नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) की ओर से पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही शहर की कई सरकारी जमीनों के पुनर्विकास की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। 4,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद सरकार के अनुसार पटना में प्रस्तावित विभिन्न पुनर्विकास परियोजनाओं के जरिए करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सरकारी जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ आधुनिक व्यावसायिक और आधारभूत सुविधाओं का विकास करना है। इन इलाकों के विकास पर भी नजर बैठक में बिहार म्यूजियम के सामने नेहरू पथ, गर्दनीबाग, भूतनाथ सेक्टर-6 और बोरिंग कैनाल रोड स्थित सरकारी जमीन के पुनर्विकास प्रस्तावों की जानकारी दी गई। पुराने और जर्जर सरकारी भवनों की जगह जरूरत के अनुसार नए भवन और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया गया। पटना को वैश्विक व्यापार केंद्र बनाने की तैयारी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसी परियोजना से पटना में व्यापार, निवेश और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अभी परियोजना की विस्तृत लागत, निर्माण शुरू होने की तारीख और अंतिम स्थान को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
गया, एजेंसियां। बाराचट्टी थाना क्षेत्र में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए POCSO एक्ट के एक आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की यह कार्रवाई लंबित मामलों में फरार आरोपियों और वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई। POCSO मामले में आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने POCSO एक्ट के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए न्यायालय में पेश करने की तैयारी की गई। अन्य दो आरोपियों पर भी कार्रवाई बाराचट्टी पुलिस ने अभियान के दौरान दो अन्य आरोपियों को भी पकड़ा। पुलिस ने इनके खिलाफ दर्ज मामलों और वारंट से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। तीनों गिरफ्तारियों के बाद पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है। पुलिस का अभियान जारी बाराचट्टी पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में फरार आरोपियों और वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा। पुलिस की टीमें लंबित मामलों में आरोपियों की तलाश कर रही हैं।