पटना, एजेंसियां। बिहार के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में गरीब एवं दलित परिवारों की किशोरियां एक बेहद सुनियोजित और क्रूर त्रिस्तरीय मानव तस्करी यानी थ्री-टियर ट्रैफिकिंग नेटवर्क के निशाने पर हैं। यह नेटवर्क केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित सिस्टम के रूप में काम करता है, जो गांवों से लड़कियों को बहला-फुसलाकर, धोखे से या दबाव में लेकर देश के बड़े शहरों तक पहुंचाता है। वहां उन्हें घरेलू काम, बंधुआ मजदूरी या जबरन विवाह जैसे अमानवीय हालात में धकेल दिया जाता है। हालिया आंकड़े इस भयावह सच्चाई की पुष्टि करते हैं कि बिहार अब देश के प्रमुख “सोर्स स्टेट” में शामिल हो चुका है। चौंकाने वाले आंकड़े: बिहार में गुमशुदगी का बढ़ता संकट बिहार में हर साल हजारों बच्चे लापता हो रहे हैं। यहां हर वर्ष औसतन 12,000 से 14,000 बच्चे लापता हो रहे हैं। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 14,699 तक पहुंच गया। किशोरियां सबसे अधिक निशाने पर गायब होने वाले कुल बच्चों में लगभग 60 प्रतिशत संख्या 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की है। 2023 के आंकड़े और भी चिंताजनक साल 2023 में कुल 12,299 लापता बच्चों में से लगभग 75 प्रतिशत केवल लड़कियां थीं, यानी हर चार में से तीन बच्चियां थी। रेस्क्यू ऑपरेशन के आंकड़े पिछले दो वर्षों में पुलिस और सामाजिक संगठनों ने मिलकर हजारों बेटियों को बचाया है। 2024-25 में 1,970 लड़कियों को सुरक्षित निकाला गया और 2025-26 में 1,492 लड़कियों का रेस्क्यू किया गया। कैसे काम करता है त्रिस्तरीय मानव तस्करी नेटवर्क यह पूरा सिंडिकेट तीन अलग-अलग स्तरों पर बेहद संगठित तरीके से काम करता है। लेवल-1: लोकल ट्रैपर्स (स्थानीय एजेंट) गांवों में स्थानीय युवाओं को एजेंट बनाकर लड़कियों को निशाना बनाया जाता है। दोस्ती, प्रेम, शादी या नौकरी का लालच दिया जाता है। 1 से 2 महीने के भीतर टारगेट पूरा करने का दबाव होता है। परिवार से दूर कर भरोसे में लेकर लड़कियों को गांव से बाहर निकालना होता है। लेवल-2: ट्रांजिट एजेंट (परिवहन गिरोह) जैसे ही लड़की गांव से बाहर निकलती है, उसे दूसरे नेटवर्क को सौंप दिया जाता है। रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर हैंडओवर कर दिया जाता है। फिर उन्हें नशा देकर या धमकी देकर नियंत्रण में रखा जाता है। इसके बाद लंबी दूरी की ट्रेनों के जरिए अन्य राज्यों में भेज दिया जाता है। लेवल-3: खरीद-बिक्री करने वाला नेटवर्कः महानगरों में यह अंतिम और सबसे खतरनाक स्तर सक्रिय होता है। लड़कियों को अज्ञात स्थानों पर कैद रखा जाता है एवं मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता है। फिर पहचान मिटाकर जबरन शादी या बंधुआ मजदूरी के लिए बेच दिया जाता है। हाल की घटनाएं: कैसे रची गई तस्करी की साजिशः केस-1: हैदराबाद कनेक्शन रूपा (बदला हुआ नाम) साहेबगंज की 19 वर्षीय रूपा (बदला हुआ नाम) 9 फरवरी 2026 को आधार कार्ड सुधरवाने घर से निकली थी। सहेली के ननिहाल से उसे हैदराबाद पहुंचा दिया गया, जहां पार्किंग में नौकरी के बहाने उसे शादी के लिए बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने समय रहते काजीगुड़ा से बचाया। केस-2: सिकंदराबाद तक अपहरणः प्रीति (बदला हुआ नाम) कोचस की 15 वर्षीय छात्रा प्रीति (बदला हुआ नाम) 1 जून 2026 को कोचिंग जाते समय लापता हो गयी। दोस्त ने झांसा देकर उसे सासाराम स्टेशन पर अपने जीजा को सौंप दिया। नशा देकर उसे सिकंदराबाद ले जाया गया। बाद में स्टेशन से उसका रेस्क्यू हुआ। केस-3: मोबाइल नंबर का जालः संजना (बदला हुआ नाम) मोतिहारी के पिपरा की 18 वर्षीय संजना (बदला हुआ नाम) सहेली से मिले मोबाइल नंबर के झांसे में आकर सिकंदराबाद भाग गयी। वहां उससे 12 घंटे बंधुआ मजदूरी करायी गयी। जबरन शादी की तैयारी थी, पर पुलिस ने उसे बचा लिया। केस-4: कोलकाता में बेचने की कोशिशः गोपालगंज के महम्मदपुर की 22 वर्षीय रीतु (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को दवा लेने निकली थी। इसके बाद नहीं लौटी। आरोपी उसे शादी व नौकरी का झांसा देकर कोलकाता ले गया, जहां बेचने की तैयारी थी। 15 दिन बाद बरामद हुई। केस-5: हैदराबाद से रेस्क्यूः सीवान जामो बाजार की 21 वर्षीय रश्मि (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को फॉर्म भरने निकली और गायब हो गयी। मानव तस्करी नेटवर्क के जरिये उसे भी हैदराबाद पहुंचाया गया, जहां से पुलिस ने उसे मुक्त कराया। हैदराबाद-सिकंदराबाद से रेस्क्यू की गयी 6 लड़किया पिछले छह माह में सिर्फ हैदराबाद-सिकंदराबाद से ही छह से अधिक लड़कियों को बराबद किया गया है। ये लड़कियां बिहार के विभिन्न जिलों से आयी थीं। उन्हें शादी या स्थायी नौकरी देने का झांसा दिया गया था। पहले उन्हें 12-12 घंटे का काम दिया गया और बाद में शादी के लिए बेचने की तैयारी की जा रही थी।
पटना, एजेंसियां। बिहार के प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 को भव्य और आधुनिक स्वरूप देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष मेला 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित होगा। सुल्तानगंज स्थित बाबा अजगैबीनाथ धाम से लेकर बिहार सीमा के दुम्मा तक पूरे कांवर पथ को शिवमय बनाने की योजना तैयार की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा और आकर्षण के लिए पर्यटन विभाग ने कई नई व्यवस्थाओं का खाका तैयार किया है। ड्रोन, लेजर और लाइट शो होंगे मुख्य आकर्षण इस बार मेले में श्रद्धालुओं को पारंपरिक धार्मिक माहौल के साथ आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। कांवर पथ पर भव्य प्रवेश द्वार, आकर्षक लाइटिंग और शिव मंत्रों की गूंज माहौल को भक्तिमय बनाएगी। वहीं, ड्रोन शो, लेजर शो, लाइट एंड साउंड शो और फाउंटेन शो मेले की खास पहचान बनेंगे। इन आयोजनों के जरिए श्रद्धालुओं को एक नया अनुभव देने की तैयारी है। कांवरियों के लिए बढ़ाई गई सुविधाएं मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थानों पर टेंट सिटी बनाई जाएगी। सुल्तानगंज में 500 बेड, अबरखा में 600 बेड, गोड़ियारी में 250 बेड और पहली बार धौरी में 200 बेड की व्यवस्था होगी। इसके अलावा असरगंज, तारापुर, संग्रामपुर, खैरा और धोबई में भी टेंट सिटी तैयार की जाएगी। सभी टेंट सिटी में शुद्ध पेयजल, बिजली, शौचालय, स्नानघर, स्वास्थ्य सेवाएं और जीविका दीदी की रसोई की सुविधा उपलब्ध रहेगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा मेला श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का भी केंद्र बनेगा। उद्घाटन और समापन समारोह में राष्ट्रीय स्तर के कलाकार प्रस्तुति देंगे। प्रत्येक सोमवार को राज्य स्तरीय कलाकारों के कार्यक्रम होंगे, जबकि अन्य दिनों में जिला स्तरीय कलाकार सांस्कृतिक रंग बिखेरेंगे। 25 स्विस कॉटेज भी बनेंगे भागलपुर में सोनपुर मेले की तर्ज पर पहली बार 25 स्विस कॉटेज तैयार किए जाएंगे। इन आधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉटेज में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर आवासीय सुविधा मिलेगी। प्रशासन का लक्ष्य इस वर्ष के श्रावणी मेले को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से अब तक का सबसे भव्य आयोजन बनाना है।
रोहिणी का भावुक संदेश— हर मुश्किल में आप मेरी ढाल बनकर खड़े रहें... पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का आज 11 जून को 79वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर राबड़ी आवास में बुधवार देर रात पारिवार के बीच लालू यादव ने केक काटा और सभी ने जन्मदिन सेलिब्रेट किया। इस दौरान राबड़ी देवी ने अपने हाथों से लालू यादव को केक खिलाकर जन्मदिन की बधाई दी। रोहिणी ने किया भावुक पोस्ट इधर, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने पिता के जन्मदिन पर भावुक संदेश सोशल मीडिया पर साझा किया। रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा- हर मुश्किल में आप मेरी ढाल बनकर खड़े रहें... रोहिणी ने लिखा कि उनकी जिंदगी में पिता का स्थान कोई और नहीं ले सकता। उनके पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया, उन्हें संभलना और आगे बढ़ना सिखाया। हर मुश्किल घड़ी में ढाल बनकर खड़े रहे। अपने संदेश में रोहिणी ने पिता के प्रेम, त्याग और आशीर्वाद को अपनी सबसे बेशकीमती धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि पिता का स्नेह और मार्गदर्शन ही उनकी ताकत है, जिसने जीवन के हर मोड़ पर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इसके बाद आगे रोहिणी ने ईश्वर से पिता के लिए लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि उनके सिर पर पिता के आशीर्वाद का हाथ हमेशा बना रहे, यही उनकी सबसे बड़ी इच्छा है। मुख्यमंत्री सम्राट ने लालू यादव के जन्मदिन पर दी बधाई बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पूर्व सीएम लालू यादव के जन्मदिन पर ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं दीं हैं। सीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए राजद सुप्रीमो को बर्थडे की बधाई दी। राजद कार्यकर्ता मना रहे जश्न इस मौके को लेकर राजद कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी कार्यालय को खूबसुरत और आकर्षक ढंग से सजाया गया है। पूरे बिहार में लालू के समर्थक अलग-अलग जगह केक काटकर, मिठाईय़ां बांटकर अपने नेता का जन्मदिन मना रहे हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 16 जून को कैमूर जिले के दौरे पर आ सकते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला कैमूर दौरा होगा, जिसे जिले के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संभावित कार्यक्रम की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं और विभिन्न विभागों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। मुंडेश्वरी धाम में करेंगे पूजा-अर्चना प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सबसे पहले Mundeshwari Temple पहुंचेंगे, जहां वे मां मुंडेश्वरी की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद मंदिर परिसर स्थित धर्मशाला में संचालित सहयोग शिविर का निरीक्षण करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री स्थानीय लोगों और अधिकारियों से भी संवाद कर सकते हैं। सभा को करेंगे संबोधित पूजा-अर्चना और निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके लिए प्रशासन ने सभा स्थल के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही मुख्यमंत्री के संभावित हेलीकॉप्टर आगमन को देखते हुए हेलीपैड निर्माण की तैयारियां भी की जा रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी हो सकती है। प्रशासन युद्धस्तर पर कर रहा तैयारी जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मुंडेश्वरी धाम पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। बैठक में सुरक्षा, यातायात, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। सभी विभागों को समय पर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। कैमूर के बाद रोहतास जाएंगे मुख्यमंत्री जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री का 16 जून को कैमूर और रोहतास दोनों जिलों का दौरा प्रस्तावित है। कैमूर में कार्यक्रम पूरा करने के बाद वे रोहतास के लिए रवाना होंगे। हालांकि अभी तक कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन को टेलीफोनिक सूचना के आधार पर संभावित कार्यक्रम प्राप्त हुआ है। विकास योजनाओं की घोषणाओं की उम्मीद मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह है। माना जा रहा है कि वे जिले के विकास से जुड़ी नई योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं। इससे पहले उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में हाई सिक्योरिटी जेल निर्माण की घोषणा की थी। ऐसे में लोगों को इस बार भी बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि लाभार्थियों के खातों में पहुंचने के साथ ही राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से 3662 करोड़ रुपये निकाले जाने पर राज्य सरकार को घेरते हुए बिहार की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को भ्रामक और राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। 94 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिली पेंशन बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 94.29 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की राशि हस्तांतरित की। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर महीने की 10 तारीख तक लाभार्थियों के खातों में पेंशन राशि समय पर पहुंचनी चाहिए। तेजस्वी ने पूछा- क्या बिहार आर्थिक संकट में है? कैबिनेट द्वारा आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये निकालने की मंजूरी के बाद तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इस निधि का उपयोग सामान्यतः प्राकृतिक आपदा, आपात स्थिति या अप्रत्याशित संकट के समय किया जाता है। ऐसे में नियमित पेंशन भुगतान के लिए इस फंड का इस्तेमाल राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े करता है। तेजस्वी ने दावा किया कि कई विकास योजनाओं का भुगतान लंबित है, ठेकेदारों के बिल अटके हुए हैं और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। भाजपा ने बताया संवैधानिक प्रक्रिया तेजस्वी के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि आकस्मिकता निधि से राशि लेना पूरी तरह संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया है। बाद में इस राशि का बजटीय समायोजन कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत है और विकास कार्य लगातार जारी हैं। राजनीतिक बहस तेज पेंशन भुगतान को लेकर शुरू हुई यह बहस अब बिहार की आर्थिक स्थिति और सरकार की वित्तीय नीति पर केंद्रित हो गई है। विपक्ष जहां इसे आर्थिक संकट का संकेत बता रहा है, वहीं सरकार और भाजपा इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गर्मा सकता है।
पटना, एजेंसियां । जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के क्षेत्र में उच्च शिक्षा और करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) ने एमएससी इन क्लाइमेट चेंज कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसके साथ ही इग्नू इस विषय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने वाली देश की पहली ओपन यूनिवर्सिटी बन गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 15 जुलाई 2026 तक इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। दो वर्षीय कोर्स, 80 क्रेडिट की संरचना विश्वविद्यालय के अनुसार यह दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम है, जिसमें कुल 80 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं। प्रवेश के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक (Graduation) होना आवश्यक है। खास बात यह है कि पहले वर्ष की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थी चाहें तो पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लाइमेट चेंज भी प्राप्त कर सकते हैं। जलवायु संकट से निपटने के लिए तैयार होंगे विशेषज्ञ इग्नू ने बताया कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का वैज्ञानिक, व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान विकसित करने वाले प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करना है। दुनिया भर में बढ़ते तापमान, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय संकटों को देखते हुए इस कार्यक्रम को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। पाठ्यक्रम में शामिल होंगे महत्वपूर्ण विषय एमएससी क्लाइमेट चेंज कोर्स में विद्यार्थियों को जलवायु विज्ञान, जलवायु जोखिम, अनुकूलन एवं शमन रणनीतियां, पर्यावरण प्रबंधन और सतत विकास जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके अलावा जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा प्रणाली, कृषि, जैव विविधता संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, कचरा प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, पर्यावरण कानून और जलवायु आकलन जैसे महत्वपूर्ण विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे। छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के लिए अवसर इग्नू ने छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों से इस पाठ्यक्रम में नामांकन लेने की अपील की है। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह कार्यक्रम युवाओं को जलवायु परिवर्तन की वास्तविक चुनौतियों को समझने और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रभावी योगदान देने के लिए तैयार करेगा।
बेतिया/पटना, एजेंसियां। बिहार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। अब सरकारी स्कूलों के शिक्षक केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्हाट्सएप चैनलों के माध्यम से विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और मेंटर की भूमिका भी निभाएंगे। विभाग का उद्देश्य बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार लाना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। सभी शिक्षकों को व्हाट्सएप चैनलों से जुड़ने का निर्देश प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर द्वारा जारी निर्देश के अनुसार प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को विभाग द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप चैनलों से अनिवार्य रूप से जुड़ना होगा। इन चैनलों के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहायता, मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करेंगे। कक्षावार बनाए गए चार अलग-अलग चैनल शिक्षा विभाग ने कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए चार अलग-अलग व्हाट्सएप चैनल तैयार किए हैं। इनमें फाउंडेशनल स्टेज (कक्षा 1-2), प्रिपरेटरी स्टेज (कक्षा 3-5), मिडिल स्टेज (कक्षा 6-8) तथा कॉम्प्लेक्स रिसोर्स सेंटर के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म शामिल हैं। जिला और प्रखंड स्तर के शिक्षा पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और नोडल अधिकारियों को इन चैनलों से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशिक्षण सामग्री और शैक्षणिक संसाधन होंगे उपलब्ध इन डिजिटल चैनलों के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षण सामग्री, शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी, विभागीय दिशा-निर्देश और मेंटरिंग से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे शिक्षकों को समय पर संसाधन मिलेंगे और वे विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से सहयोग कर सकेंगे। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कदम शिक्षा विभाग का मानना है कि तकनीक के बेहतर उपयोग से विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम में गुणात्मक सुधार लाया जा सकता है। सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को कार्यक्रम की नियमित समीक्षा और शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। विभाग को उम्मीद है कि यह पहल बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि बिहार में नए उद्योगों को अब 30 दिनों के भीतर आवश्यक मंजूरियां मिलेंगी। सिंगल विंडो सिस्टम और SIPB सचिवालय को मजबूत कर निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की तैयारी की गई है। नये उद्योगों के लिए सारी प्रक्रिया आसान बना दी गई हैं। यह निर्णय मंत्रीपरिषद की बैठक में लिया गया। इससे राज्य् में निवेश को बढ़ावा, रोजगार सृजन, आर्थिक आत्मनिर्भरता औऱ तीव्र औद्य़ोगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौघरी ने सोशल मीडिया पर साझा की। निवेशकों को मिलेगी तेज और पारदर्शी सेवा मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेशकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से सिंगल विंडो प्रणाली को और मजबूत किया गया है। इसके तहत स्टेट इंवेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड (SIPB) सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है। उनका मानना है कि इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा। साथ ही अनुमोदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी। रोजगार बढ़ेगा और आर्थिक विकास होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नई व्यवस्था से राज्य में निवेश आकर्षित होगा। नए उद्योगों की स्थापना को गति मिलेगी। इससे रोजगार के नए-नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि निवेश, उद्योग और रोजगार के विस्तार के साथ बिहार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से अग्रसर होगा।
पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने खनिज परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 10 जून से अन्य राज्यों से आने वाले पत्थर, गिट्टी, बालू और अन्य लघु खनिजों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) अनिवार्य कर दिया है। इस नई व्यवस्था का सबसे अधिक असर झारखंड के पाकुड़, साहिबगंज और संताल परगना क्षेत्र के पत्थर कारोबारियों पर पड़ने की संभावना है, जहां से बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री बिहार भेजी जाती है। नई व्यवस्था के तहत बिहार में प्रवेश करने वाले प्रत्येक खनिज वाहन को ऑनलाइन पंजीकरण कर इंटर स्टेट ट्रांजिट पास प्राप्त करना होगा। बिना वैध पास के राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों पर कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इससे खनिज परिवहन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने का दावा किया जा रहा है। सरकार ने तय किया शुल्क बिहार के खान एवं भूतत्व विभाग ने ट्रांजिट पास के लिए शुल्क भी निर्धारित कर दिया है। यदि खनिज की मात्रा वजन के आधार पर दर्ज है तो 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन शुल्क देना होगा। वहीं आयतन के आधार पर दर्ज खनिजों पर 85 रुपये प्रति घनमीटर शुल्क लागू होगा। कारोबारियों का कहना है कि इस अतिरिक्त शुल्क से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर बाजार में पत्थर और गिट्टी की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। पत्थर कारोबारियों पर दोहरी मार संताल परगना क्षेत्र के कारोबारी पहले से ही विक्रमशिला सेतु की खराब स्थिति के कारण व्यापार में भारी गिरावट झेल रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार, पुल पर यातायात प्रभावित होने से उनके कारोबार पर लगभग 70 प्रतिशत तक असर पड़ा है। अब नई व्यवस्था लागू होने से अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है। जागरूकता अभियान शुरू बांका जिला प्रशासन ने झारखंड के सीमावर्ती जिलों के खनन अधिकारियों को पत्र भेजकर कारोबारियों को नई व्यवस्था की जानकारी देने का अनुरोध किया है। जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि बिहार में प्रवेश से पहले ऑनलाइन आईएसटीपी लेना अनिवार्य होगा और निर्धारित शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से खनिज परिवहन में निगरानी बढ़ेगी, लेकिन इससे निर्माण सामग्री की कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है।
पटना, एजेंसियां। फायरिंग मामले में खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को पटना सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने खान सर की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही, पुलिस से केस डायरी की भी मांग की है। कोई कठोर या दबावपूर्ण कार्रवाई न की जाए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अगले आदेश या अगली सुनवाई तक संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई कठोर या दबावपूर्ण कार्रवाई न की जाए। सोमवार को खान ग्लोबल स्टडीज के डायरेक्टर खान सर की ओर से पटना के जिला एवं सत्र कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई। खान सर पर हत्या की कोशिश और हथियारों के अवैध इस्तेमाल का मामला दर्ज है। रोशन की बेल याचिका पर आज फैसला संभव इधर, खान सर की कोचिंग पर हमला मामले में जेल में बंद ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद की जमानत पर भी आज फैसला आ सकता है। जेल में बंद सिक्योरिटी गार्ड मामले में कोर्ट ने सबूत मांगे इसी मामले में जेल में बंद खान सर के दो सिक्योरिटी गार्ड दीपक कुमार और तालेबर सिंह की जमानत पर भी सुनवाई हुई। उनके वकील अरविंद मउआर ने जज अनुराग वर्मा की अदालत में दलीलें पेश कीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुलिस से मामले में सबूत मांगे। दोनों सुरक्षा गार्डों की जमानत याचिका पर भी आज फैसला आ सकता है। कल कोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षिात रख लिया था। दोनों गार्ड्स को 4 जून को गिरफ्तार किया गया था। खान सर पर हत्या की कोशिश का केस दर्ज पुलिस ने खान सर के गार्ड्स के बयान पर उनके ऊपर हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट का केस दर्ज किया है। FIR में बताया गया है कि खान सर ने गार्ड्स से कहा था- तुम गोली चलाओ, बाकी मैं देख लूंगा। छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च उधर, ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद की रिहाई की मांग को लेकर पटना में सोमवार को छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला था। छात्रों ने रौशन आनंद के समर्थन में नारेबाजी और खान सर की गिरफ्तारी की मांग की। कुछ छात्र हाथों में पोस्टर लिए नजर आए। इनमें लिखा था- ‘झूठे केस में हमारा जीवन मत बर्बाद करो’, 'मैं निर्दोष हूं'।
पटना, एजेंसियां। राजधानी पटना को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में पटना नगर निगम ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। नागरिक सुविधाओं को बेहतर और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने अपने मोबाइल ऐप में बड़ा डिजिटल अपडेट किया है। अब शहरवासी केवल एक क्लिक में अपने वार्ड पार्षद से लेकर संबंधित अधिकारियों तक की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। नगर निगम द्वारा ऐप में जोड़े गए नए “फाइंड योर वार्ड” फीचर के माध्यम से नागरिक अपने क्षेत्र से जुड़े वार्ड पार्षद, कार्यपालक पदाधिकारी, सिटी मैनेजर और इंजीनियरों के मोबाइल नंबर आसानी से देख सकेंगे। इससे किसी भी समस्या या शिकायत के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से सीधे संपर्क करना आसान हो जाएगा। व्हाट्सएप चैटबॉट से दर्ज होगी शिकायत नई व्यवस्था के तहत नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ऐप में उपलब्ध व्हाट्सएप चैटबॉट सुविधा के जरिए लोग घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उसकी स्थिति की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। नगर निगम का मानना है कि इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होगी। डिजिटल मैप से मिलेगी वार्ड की पूरी जानकारी पटना नगर निगम ने शहर का विस्तृत डिजिटल मैप भी तैयार किया है। इस मैप में प्रत्येक वार्ड की सीमा को लाल रंग से चिन्हित किया गया है। नागरिक जूम इन और जूम आउट की मदद से अपने इलाके की सटीक स्थिति और वार्ड की सीमा को आसानी से समझ सकेंगे। सार्वजनिक सुविधाओं की जानकारी भी होगी उपलब्ध स्मार्ट ऐप के माध्यम से अब शहर की सड़कों, नालों, पार्कों, पार्किंग स्थलों और सार्वजनिक शौचालयों की जानकारी भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा नजदीकी निगम कार्यालय, श्मशान घाट और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुविधाओं की लोकेशन भी आसानी से देखी जा सकेगी। नगर निगम के इस डिजिटल कदम को स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है, जिससे नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद और सेवाओं की पहुंच पहले से अधिक आसान और प्रभावी होगी।
पटना, एजेंसियां। पटना में चर्चित फायरिंग मामले को लेकर शिक्षक और कोचिंग संचालक Khan Sir ने सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) याचिका दायर की है। अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और गोलीबारी की घटना से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। मामले में अब मंगलवार को सुनवाई होगी। वकील ने सरेंडर की अटकलों पर लगाया विराम एफआईआर दर्ज होने के बाद यह चर्चा तेज थी कि खान सर अदालत में आत्मसमर्पण कर सकते हैं। हालांकि उनके अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे सरेंडर नहीं करेंगे, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अग्रिम जमानत की मांग करेंगे। इसी क्रम में सोमवार को पटना सिविल कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई। गार्ड्स की जमानत पर फैसला सुरक्षित मामले में गिरफ्तार दोनों सुरक्षा गार्डों की जमानत याचिका पर भी अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। दूसरी ओर, ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रोशन आनंद की रिहाई को लेकर भी अदालत में बहस हुई, लेकिन इस मामले में भी फैसला सुरक्षित रखा गया है। 2 जून की रात हुई थी फायरिंग पूरा मामला 2 जून की रात का है, जब खान सर की कोचिंग के बाहर फायरिंग, पथराव और मारपीट की घटना सामने आई थी। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रोशन आनंद को गिरफ्तार किया था। बाद में एक वीडियो सामने आया, जिसमें खान सर के दो गार्ड कथित तौर पर फायरिंग करते दिखाई दिए। गार्ड्स के बयान के बाद बढ़ीं मुश्किलें पुलिस पूछताछ में दोनों गार्डों ने कथित रूप से कहा कि उन्होंने खान सर के निर्देश पर गोली चलाई थी। इसी आधार पर पुलिस ने खान सर के खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि खान सर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना के दानापुर थाना क्षेत्र स्थित ताराचक इलाके में रविवार देर रात आपसी रंजिश को लेकर हुई गोलीबारी ने एक किशोर की जान ले ली, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है। मृतक की पहचान 16 वर्षीय नितिन कुमार के रूप में हुई है, जो बिहटा के मुस्तफापुर का रहने वाला था। वह अपनी मां के साथ दानापुर स्थित ननिहाल में किराये के मकान में रहता था। परिजनों के अनुसार, बदमाशों ने घर से कुछ दूरी पर नितिन को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दो अन्य लोग भी हुए घायल गोलीबारी में आनंद बाजार निवासी 68 वर्षीय विजय कुमार और सन्नी कुमार भी घायल हो गए। विजय कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच भेजा गया, जबकि सन्नी कुमार का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है। दोनों की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुबह के विवाद ने शाम को लिया हिंसक रूप पुलिस के अनुसार, दोनों गुटों के बीच सुबह भी मारपीट हुई थी। पुरानी दुश्मनी और तनाव के कारण शाम होते-होते विवाद और बढ़ गया तथा दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग हुई, जिसमें नितिन की जान चली गई। घटनास्थल से मिले कई अहम साक्ष्य पुलिस ने मौके से आठ खोखे, शराब की बोतलें, लाठी और लोहे की रॉड बरामद की हैं। बरामद सामग्री से यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष पहले से टकराव की तैयारी में थे। घटना के बाद एफएसएल टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। एसआईटी का गठन, आरोपियों की तलाश जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। सिटी एसपी पश्चिमी ने बताया कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वहीं बेटे की मौत से नितिन की मां सदमे में हैं। परिवार का कहना है कि एक साल पहले सड़क दुर्घटना में बड़े बेटे की भी मौत हो चुकी थी और अब नितिन के निधन से परिवार पूरी तरह टूट गया है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की तबीयत खराब होने की खबर के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शनिवार को उनके बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव पटना स्थित राबड़ी आवास पहुंचे और अपनी मां का हालचाल जाना। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए राबड़ी देवी की सेहत और परिवार की सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी। मां की तबीयत जानने पहुंचे तेज प्रताप राबड़ी आवास से बाहर निकलने के बाद तेज प्रताप यादव ने बताया कि उनकी मां अस्वस्थ हैं, इसलिए वह उनसे मिलने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए मां की सेहत सबसे महत्वपूर्ण है और इसी कारण वह उनका हाल जानने आए थे। हालांकि, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से अब तक राबड़ी देवी की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सुरक्षा हटाने के दावे को बताया गलत तेज प्रताप यादव ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा जा रहा था कि लालू परिवार ने अपनी सरकारी सुरक्षा वापस कर दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परिवार ने सुरक्षा हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उनके अनुसार, सुरक्षा कर्मियों ने दबाव में होने और अपना कमांड हटाए जाने की जानकारी दी थी, लेकिन परिवार की ओर से सुरक्षा लौटाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तेज प्रताप ने कहा कि बिहार में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए। आरजेडी ने लगाया सरकार पर आरोप दूसरी ओर, आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि लालू परिवार ने सरकार द्वारा किए जा रहे कथित अपमान के विरोध में सुरक्षा वापस करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अब पार्टी कार्यकर्ता और नेता ही लालू परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। इस बयान के बाद राबड़ी आवास के बाहर बड़ी संख्या में आरजेडी समर्थकों की मौजूदगी भी देखी गई। सुरक्षा व्यवस्था में हाल ही में हुआ बदलाव गौरतलब है कि दो दिन पहले बिहार सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को दी गई जेड प्लस सुरक्षा में बदलाव करते हुए उन्हें बिहार पुलिस की विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई थी। वहीं तेज प्रताप यादव की वाई श्रेणी सुरक्षा भी समाप्त कर दी गई थी और उनकी सुरक्षा में केवल एक बॉडीगार्ड तैनात किया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद से बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब राबड़ी देवी की तबीयत और सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने इस विवाद को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।
सीवान, एजेंसियां। जिले के आंदर नगर पंचायत में सफाई व्यवस्था की निगरानी कर रहे दो सुपरवाइजरों के साथ कथित मारपीट, अपहरण और लूटपाट का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। पीड़ितों ने पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के परिजनों समेत 8 से 10 लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से सख्त कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है। पीड़ित अमृत कुमार ने आंदर थाना में दिए आवेदन में बताया कि वह और उनके सहयोगी शुभम कुमार पाठक नगर पंचायत में सफाई सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत हैं। 5 जून को दोनों वार्ड संख्या-6 में सफाई कार्य का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों के साथ कहासुनी हुई। अमृत का आरोप है कि शिकायत लिखित रूप में देने की बात कहने के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति अचानक बिगड़ गई। हथियारों से हमला करने का आरोप शिकायत के अनुसार, कुछ लोग रॉड, चाकू और पिस्टल लेकर उनके कमरे में पहुंचे और दोनों पर हमला कर दिया। आरोप है कि पिस्टल की बट और अन्य हथियारों से की गई मारपीट में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के बाद उन्हें जबरन एक घर ले जाया गया, जहां दोबारा मारपीट की गई। 60 हजार रुपये लूटने का दावा पीड़ितों का कहना है कि हमलावरों ने सफाई कर्मियों के भुगतान के लिए रखे गए करीब 60 हजार रुपये भी छीन लिए। साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल शुभम कुमार पाठक को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया है। पुलिस जांच में जुटी पीड़ित पक्ष ने नामजद आरोपियों के खिलाफ अपहरण, लूट, जानलेवा हमला और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। आंदर थाना पुलिस ने आवेदन मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार में सड़क संपर्क और आर्थिक विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार ने तीन बड़े रिवरफ्रंट एक्सप्रेस-वे बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। गंगा और गंडक नदी के किनारे करीब 220 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़कों के निर्माण की योजना तैयार की जा रही है। बिहार राज्य पथ विकास निगम (BSRDC) ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना के तहत बनने वाले तीन एक्सप्रेस-वे का नाम विश्वामित्र पथ, अंबिका पथ और नारायणी पथ रखा गया है। पहले बनेगी डीपीआर, फिर शुरू होगा निर्माण पथ निर्माण विभाग के अनुसार, परियोजना के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों का चयन किया जाएगा जो सड़क की डिजाइन, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करेंगी। अगले 12 महीनों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होने के बाद निर्माण लागत तय की जाएगी और काम शुरू होगा। इन परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। तीनों एक्सप्रेस-वे की खासियत विश्वामित्र पथ लगभग 90 किलोमीटर लंबा होगा और मनेर से आरा होते हुए बक्सर तक जाएगा। यह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़कर बिहार की कनेक्टिविटी को उत्तर प्रदेश, लखनऊ और दिल्ली तक मजबूत करेगा। अंबिका पथ 56 किलोमीटर लंबा होगा और बिदुपुर, सोनपुर तथा दिघवारा को जोड़ेगा। इससे पटना के ट्रैफिक दबाव में कमी आएगी और प्रमुख पुलों व प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंच आसान होगी। नारायणी पथ 74 किलोमीटर लंबा फोरलेन मार्ग होगा, जो सोनपुर के दरिहारा से गोपालगंज के डुमरिया तक गंडक नदी के किनारे विकसित किया जाएगा। यह पटना को ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जोड़ते हुए व्यापार और माल परिवहन को नई गति देगा। रोजगार, निवेश और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र ने कहा कि आधुनिक सड़क नेटवर्क विकसित बिहार के लक्ष्य की आधारशिला है। इन परियोजनाओं से निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। सरकार को उम्मीद है कि ये एक्सप्रेस-वे बिहार की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर एनडीए के भीतर नए राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का निर्विरोध एमएलसी बनना अब लगभग असंभव माना जा रहा है। चर्चा है कि जिस सीट पर उनके निर्विरोध निर्वाचन की संभावना थी, वह अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खाते में चली गई है। पार्टी ने इस सीट के लिए अपने कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस घटनाक्रम का संबंध राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से जोड़ा जा रहा है। एनडीए सूत्रों का दावा है कि भाजपा नेतृत्व ने पहले उपेंद्र कुशवाहा से उनकी पार्टी के भाजपा में विलय को लेकर बातचीत की थी, लेकिन इस पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी। इसी वजह से दीपक प्रकाश का नाम निर्विरोध सीट के लिए आगे नहीं बढ़ाया गया। बदला चुनावी गणित अशरफ अंसारी के उम्मीदवार घोषित होने के बाद अब विधान परिषद की बची हुई सीटों पर मुकाबला और रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब दीपक प्रकाश को चुनावी मैदान में उतरना पड़ सकता है, जहां जीत का गणित पहले जितना आसान नहीं रहेगा। महागठबंधन के पास भी पर्याप्त संख्या बल होने के कारण मुकाबला चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। भविष्य में फिर खुल सकता है रास्ता हालांकि राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि दीपक प्रकाश के लिए संभावनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। यदि भविष्य में उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के बीच राजनीतिक समीकरण बेहतर होते हैं, तो मार्च 2027 में राज्यपाल कोटे से होने वाले मनोनयन के दौरान उन्हें विधान परिषद भेजा जा सकता है। फिलहाल बिहार की राजनीति में इस मुद्दे ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और एनडीए के भीतर की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार में जमीन की ई-मापी (ऑनलाइन मापी) से जुड़े लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ई-मापी प्रक्रिया को गति देने के लिए सरकारी अमीनों की डेपुटेशन पर तैनाती करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य हजारों लंबित आवेदनों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना और जमीन से जुड़े विवादों को कम करना है। विभाग के अनुसार विभाग के अनुसार, राज्य में वर्तमान में लगभग 45 हजार ई-मापी आवेदन लंबित हैं। कई जिलों में आवेदकों को अपनी जमीन की मापी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसी समस्या को देखते हुए विभाग ने कम आवेदन वाले अंचलों और अधिक आवेदन वाले अंचलों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की है। जहां ज्यादा आवेदन, वहां भेजे जाएंगे अतिरिक्त अमीन नई व्यवस्था के तहत जिन अंचलों में ई-मापी के आवेदन कम हैं, वहां कार्यरत सरकारी अमीनों को आवश्यकता पड़ने पर अधिक आवेदन वाले क्षेत्रों में डेपुटेशन पर भेजा जाएगा। इससे उन क्षेत्रों में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है, जहां कार्यभार अधिक है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जयसवाल ने भी अधिकारियों को ई-मापी के लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। विभागीय समीक्षा बैठक में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया था। प्रशिक्षित अमीनों की आउटसोर्सिंग से होगी नियुक्ति सरकार केवल डेपुटेशन व्यवस्था तक सीमित नहीं रहना चाहती। विभाग प्रशिक्षित अमीनों की आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्ति की भी तैयारी कर रहा है। इससे ई-मापी कार्य के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध होंगे और आवेदनों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि जमीन की मापी से जुड़े मामलों का त्वरित समाधान न केवल लोगों को राहत देगा, बल्कि भूमि विवादों में भी कमी लाएगा। ई-मापी व्यवस्था को प्रभावी बनाकर राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पटना, एजेंसियां। पटना से बड़ी खबर आ रही है। ग्लोबल स्टडीज के संचालक खान सर ने पटना सिविल कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। इसके साथ ही उनके वकील ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। खान सर पर हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट का आरोप लगा है। आत्मरक्षा में की गई थी फायरिंग कोर्ट में खान सर के वकील ने कहा कि खान सर के गार्डस ने किसी को हानि पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि आत्मरक्षा में फायरिंग की थी। फायरिंग में किसी को भी कोई चोट नहीं आई थी। फिलहाल सरेंडर का प्रोसेस किया जा रहा है। इसके बाद एंट्रीसिपेट्री बेल के लिए आवेदन दिया जाएगा।
पटना, एजेंसियां। बिहार के साहेबगंज से बीजेपी विधायक राजू सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने दोष सिद्ध होने के बाद उन्हें तत्काल हिरासत में लेने का आदेश भी जारी किया है। यह मामला वर्ष 2018 की एक न्यू ईयर पार्टी में हुई फायरिंग से जुड़ा है, जिसमें एक महिला डॉक्टर की जान चली गई थी। अदालत ने राजू सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) और शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी माना है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह फैसला सुनाया। सजा की अवधि पर फैसला अलग से सुनाया जा सकता है। पत्नी समेत तीन अन्य आरोपियों को मिली राहत इस मामले में कोर्ट ने राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर उन्हें राहत प्रदान की। जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2018 को दिल्ली के फतेहपुर बेरी क्षेत्र में आयोजित एक न्यू ईयर पार्टी के दौरान जश्न में फायरिंग की गई थी। इस दौरान चली गोली से डॉ. अर्चना गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिनकी बाद में मौत हो गई। घटना के बाद फतेहपुर बेरी थाने में मामला दर्ज किया गया था। राजनीतिक सफर भी रहा चर्चा में राजू सिंह बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वे विभिन्न राजनीतिक दलों—जेडीयू, लोजपा और वीआईपी—से जुड़ने के बाद बीजेपी में शामिल हुए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था। उनकी पत्नी रेणु सिंह भी राजनीति में सक्रिय हैं और पूर्वी चंपारण से एमएलसी रह चुकी हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजू सिंह के राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
पटना, एजेंसियां। पटना के मशहूर कोचिंग टीचर और यूट्यूबर खान सर के कोचिंग सेंटर के बहार हुए मामले में रोज नया ट्विस्ट सामने आ रहा है। दरअसल 2 जून 2026 की रात उनके कोचिंग संस्थान के बाहर हुई हिंसक घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती तौर पर मामला कोचिंग सेंटर पर हमले का बताया गया था, लेकिन बाद में एक वायरल वीडियो और पुलिस जांच के बाद खुद खान सर के खिलाफ भी मामला दर्ज हो गया है। क्या है मामला? बात दे 2 जून की रात पटना के कदमकुआं-मुसल्लहपुर इलाके में स्थित खान सर के कोचिंग संस्थान के बाहर हंगामा हुआ। आरोप है कि कुछ लोगों ने कोचिंग सेंटर पर हमला किया, पत्थरबाजी की और एक सुरक्षा गार्ड को घायल कर दिया। शुरुआती बयान में खान सर ने दावा किया था कि उनके संस्थान के बाहर 8 –10 राउंड फायरिंग हुई और इसके पीछे प्रतिद्वंद्वी कोचिंग से जुड़े लोगों का हाथ बताया गया।पुलिस ने शुरुआती जांच में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया, जिनमें एक प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान का संचालक भी शामिल था। लेकिन बाद में 3 जून की सुबह खान सर मीडिया से बातचीत के दौरान फायरिंग की बात से पलट गए। और कहा कि बीते रात मौके पर बहुत अफरा तफरी मच गई थी इसलिए वे स्तिथि को समझ नहीं पाए। लेकिन बड़ा ट्विस्ट तब आया जब घटना के कुछ समय बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें कथित तौर पर खान सर के दो गार्ड हवा में फायरिंग करते दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने दोनों गार्डों को हिरासत में लेकर पूछताछ कि। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ में दोनों गार्डों ने बताया कि फायरिंग उन्होंने खान सर के कहने पर की थी। पुलिस के अनुसार गार्डों ने बयान दिया कि खान सर ने उनसे कहा था, "तुम फायर करो, बाकी मैं संभाल लूंगा।" इसी बयान के आधार पर पुलिस ने खान सर के खिलाफ FIR दर्ज की। खान सर पर कौन-कौन से आरोप लगे हैं? हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) से संबंधित धाराएं, आर्म्स एक्ट के प्रावधान, और कथित रूप से उकसाने/निर्देश देने से जुड़े आरोप लगाए हैं। हालांकि अंतिम दोष सिद्ध होना अदालत और जांच पर निर्भर करेगा। फिलहाल यह आरोप हैं, साबित अपराध नहीं। फिलहाल क्या है स्तिथि? वर्तमान स्तिथि की बात करे तो खान सर पर आर्म्स एक्ट और हत्या की कोशिश के तहत केस दर्ज किया गया है। इस बीच माना जा रहा है कि कभी भी खान सर की गिरफ्तारी हो सकती है। शुक्रवार को मामला दर्ज होने के बाद ही उनकी गिरफ्तारी होने की संभावना थी। लेकिन शुक्रवार को पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी। जानकारी के मुताबिक जानकारी के मुताबिक, खान सर की कोचिंग के बाहर शुक्रवार रात 10 बजे से शनिवार की सुबह तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला। लेकिन पुलिस अब तक खान सर को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। खान सर की कोचिंग के बाहर शुक्रवार की रात ही बड़ी संख्या में छात्र पहुंचे। इस दौरान कदमकुआं थाने की पुलिस भी पहुंची थी। पुलिस ने छात्रों से घर जाने की अपील की। लेकिन छात्र कोचिंग के बाहर सुबह तक डटे रहे। रातभर में 4 से 5 बार कदमकुआं थाने की पुलिस आई। लेकिन खान सर की गिरफ्तारी के लिए नहीं बल्कि छात्रों को समझाने के लिए। कई बार पुलिस ने आकर अनाउंसमेंट किया- हट जाइए, लौट जाइए। लेकिन छात्र नहीं माने। इससे पहले भी शुक्रवार को लॉ एंड ऑर्डर को लेकर आईजी ऑफिस में हाई लेवल मीटिंग हुई थी। इसके बाद छात्रों से अपील की गई थी कि वे किसी के भी बहकावे में ना आएं। ऐसे में आज मामले में क्या कुछ एक्शन लिया जाता है, यह देखने वाली बात होगी
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।