बिहार

SVU Raid on BMSICL Officer in Patna

पटना में स्वास्थ्य विभाग के DGM पंकज कुमार के घर SVU की छापेमारी, 96 लाख से अधिक अवैध संपत्ति का आरोप

surbhi मार्च 12, 2026 0
SVU officials conduct raid at BMSICL DGM Pankaj Kumar’s residence in Patna over disproportionate assets case
SVU Raid on BMSICL DGM in Patna

 

बिहार की राजधानी Patna में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) के डीजीएम (प्रोजेक्ट) Pankaj Kumar के ठिकानों पर छापेमारी की। गुरुवार सुबह उनके आवास और कार्यालय में एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया।

 

सुबह 8 बजे शुरू हुई छापेमारी

SVU की टीम ने गुरुवार सुबह करीब 8 बजे कदमकुंआ इलाके के कनिका मैहर अपार्टमेंट स्थित पंकज कुमार के आवास पर छापा मारा। उस समय वे अपने परिवार के साथ घर पर मौजूद थे।

तलाशी के दौरान टीम को लगभग 96 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। इसमें नकदी, गहने, जमीन से संबंधित दस्तावेज और अन्य कीमती सामान बरामद किए गए हैं। फिलहाल SVU की जांच प्रक्रिया जारी है।

 

आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज

निगरानी इकाई ने पंकज कुमार के खिलाफ कांड संख्या-10/2026 दर्ज किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक उन्होंने करीब 11 वर्षों की सेवा अवधि के दौरान विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है।

SVU का आरोप है कि एक लोक सेवक होने के बावजूद उन्होंने भ्रष्टाचार के जरिए लगभग 96 लाख 46 हजार 666 रुपये की अवैध संपत्ति बनाई, जो उनके ज्ञात आय स्रोतों से काफी ज्यादा है।

 

कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई

इस मामले में विशेष न्यायाधीश (निगरानी) पटना द्वारा तलाशी वारंट जारी किया गया था। उसी के आधार पर SVU की टीम ने छापेमारी की कार्रवाई शुरू की।

अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन का DBT भुगतान
बिहार में 94 लाख से ज्यादा पेंशनधारियों के खाते में DBT से पहुंची राशि, अब हर महीने 10 तारीख को होगा भुगतान

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत दी है। 10 अगस्त 2026 को राज्य के 94 लाख से अधिक पेंशनधारियों के बैंक खातों में DBT के जरिए पेंशन की राशि भेजी गई। सरकार ने अब पेंशन भुगतान के लिए हर महीने की 10 तारीख तय कर दी है, जिससे लाभार्थियों को भुगतान की तारीख को लेकर इंतजार नहीं करना पड़ेगा।   किन लोगों के खाते में पहुंची राशि     यह भुगतान बिहार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को किया गया है। इनमें वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन सहित सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं।   सरकार की नई व्यवस्था के तहत पात्र लाभार्थियों को राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और भुगतान को सीधे लाभार्थी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।   पूर्णिया में 2.5 लाख पेंशनधारियों को करीब ₹32 करोड़     पूर्णिया जिले में करीब 2.5 लाख पेंशनधारियों के खातों में लगभग ₹32 करोड़ की पेंशन राशि DBT के माध्यम से भेजी गई। जिले के लाभार्थियों के लिए यह भुगतान 10 अगस्त को किया गया। वहीं नालंदा जिले में करीब 3.54 लाख पेंशनधारियों को लगभग ₹40 करोड़ की राशि भेजी गई। यहां लाभार्थियों को बढ़ी हुई पेंशन का लाभ मिला है।     अब हर महीने 10 तारीख को मिलेगा पैसा     बिहार सरकार ने पेंशन भुगतान को नियमित बनाने के लिए हर महीने की 10 तारीख को भुगतान करने की व्यवस्था लागू की है। इसका मतलब है कि लाभार्थियों को अब पेंशन आने की तारीख को लेकर अलग-अलग विभागीय प्रक्रिया या लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।   हालांकि, बैंक खाते में राशि दिखाई देने का समय बैंक की प्रक्रिया पर निर्भर कर सकता है। यदि किसी लाभार्थी के खाते में राशि नहीं पहुंची है तो उसे अपना बैंक खाता, आधार सीडिंग और DBT स्थिति जांचनी चाहिए।   लाभार्थियों के लिए जरूरी बात     अगर 10 अगस्त को आपके खाते में पेंशन की राशि नहीं आई है, तो सबसे पहले बैंक खाते का विवरण और DBT की स्थिति जांचें। खाते में आधार लिंक होने तथा बैंक खाता सक्रिय होने की स्थिति भी महत्वपूर्ण है।   सरकार की इस नई भुगतान व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन को समय पर और सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचाना है। आने वाले महीनों में भी प्रत्येक माह की 10 तारीख को पेंशन भुगतान किए जाने की योजना है।

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BSEB की मुफ्त JEE NEET कोचिंग और डिजिटल लर्निंग पहल

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मुकेश कुमार और आकाश दीप बिहार पुलिस में DSP नियुक्त
टीम इंडिया की जर्सी से पुलिस की वर्दी तक, मुकेश कुमार और आकाश दीप बने DSP; बिहार पुलिस में की जॉइनिंग

पटना, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार और आकाश दीप को बिहार सरकार ने पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर नियुक्त किया है। दोनों खिलाड़ियों ने अब बिहार पुलिस में औपचारिक रूप से जॉइनिंग भी कर ली है। यह नियुक्ति बिहार सरकार की उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में सीधे नियुक्त करने वाली ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ नीति के तहत की गई है।   मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सौंपा था नियुक्ति पत्र     24 जुलाई को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुकेश कुमार और आकाश दीप को DSP पद का नियुक्ति पत्र सौंपा था। इस समारोह में दोनों क्रिकेटरों के अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने वाले कुल 19 खिलाड़ियों को अलग-अलग सरकारी पदों पर नियुक्ति दी गई थी।   बिहार सरकार के अनुसार, इस साल अब तक 106 खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्ति दी जा चुकी है। सरकार का उद्देश्य खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में सम्मानजनक अवसर देना है।   आकाश दीप और मुकेश कुमार का क्रिकेट करियर     आकाश दीप बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले हैं और भारतीय टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके हैं। उन्होंने भारत के लिए 10 टेस्ट मैचों में 28 विकेट लिए हैं।   वहीं मुकेश कुमार बिहार के गोपालगंज जिले से आते हैं। उन्होंने भारतीय टीम के लिए तीन टेस्ट मैच खेले हैं और सात विकेट हासिल किए हैं। दोनों तेज गेंदबाजों ने घरेलू क्रिकेट और भारतीय टीम में अपने प्रदर्शन के दम पर पहचान बनाई है। दोनों खिलाड़ी 2023 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा भी रहे हैं। इसी तरह की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें खेल कोटे के तहत DSP पद के लिए चुना।   खेल से प्रशासन तक नई जिम्मेदारी     DSP बनने के बाद दोनों खिलाड़ियों की भूमिका अब केवल क्रिकेट के मैदान तक सीमित नहीं रहेगी। बिहार पुलिस में उन्हें कानून-व्यवस्था और प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी।   मुकेश कुमार और आकाश दीप ने इस नियुक्ति को बड़ी जिम्मेदारी बताया है। आकाश दीप ने नियुक्ति के बाद युवाओं और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने वाली इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी नई जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाने की बात कही।   बिहार की खेल नीति के तहत खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी     बिहार सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी देने के लिए ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ नीति लागू की है। इसके तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर सरकारी पद दिए जा रहे हैं।   मुकेश कुमार और आकाश दीप को DSP बनाया जाना इसी नीति का बड़ा उदाहरण है। इससे पहले भी बिहार सरकार कई खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त कर चुकी है। सरकार का कहना है कि इस तरह की पहल से युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को करियर सुरक्षा भी मिलेगी।

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Over 2,000 Bihar mukhiyas face scrutiny over alleged irregularities in development schemes, with action initiated against 12.
बिहार के 2 हजार से अधिक मुखिया जांच के घेरे में, 12 पर पद से हटाने की कार्रवाई शुरू; विकास योजनाओं में अनियमितता के आरोप

Bihar Mukhiya News: बिहार की ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं ने पंचायती राज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य की 2,000 से अधिक पंचायतों के मुखिया जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। वहीं, गंभीर आरोपों के चलते 12 मुखियाओं के खिलाफ पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जांच का दायरा मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना, नल-गली, नल-जल और स्वच्छता समेत विभिन्न विकास योजनाओं तक फैला हुआ है। प्रमंडलीय आयुक्तों के स्तर पर हुई जांच में कई पंचायतों में निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी, दस्तावेजों की कमी और सरकारी राशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, जांच के दायरे में आने का अर्थ दोषी साबित होना नहीं है। संबंधित मामलों में अंतिम कार्रवाई जांच और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी। सोलर स्ट्रीट लाइट योजना में भी उठे सवाल जांच के दौरान कुछ पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइट की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री नहीं लगाई गई और कुछ स्थानों पर सोलर लाइट, बैटरी तथा पोल की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं थी। कुछ मामलों में लगाए गए उपकरण थोड़े समय बाद खराब होने की बात भी सामने आई। इसके अलावा खरीद प्रक्रिया और संबंधित भुगतान को लेकर भी जांच अधिकारियों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों और वार्ड सदस्यों को योजना से संबंधित पर्याप्त जानकारी नहीं दिए जाने के आरोप भी जांच का हिस्सा हैं। एस्टीमेट और मेजरमेंट बुक नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी जांच में कई पंचायतों में विकास कार्यों से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। इनमें एस्टीमेट, मेजरमेंट बुक यानी एमबी और अन्य संबंधित अभिलेख शामिल हैं। कुछ मामलों में आरोप है कि काम पूरा होने से पहले ही राशि की निकासी कर ली गई। वहीं, कुछ योजनाओं में कागजों पर काम पूरा दिखाकर भुगतान किए जाने की शिकायत भी जांच में सामने आई है। यदि जांच में ऐसे आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। ग्राम सभा की प्रक्रिया पर भी सवाल पंचायत स्तर पर योजनाओं की स्वीकृति और क्रियान्वयन में ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन जांच के दौरान कुछ पंचायतों में ग्राम सभा नहीं कराने या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना राशि खर्च करने के आरोप सामने आए हैं। कुछ मामलों में वार्ड सदस्यों को जरूरी सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने और पंचायत बैठकों से लगातार अनुपस्थित रहने की शिकायत भी दर्ज की गई है। यही वजह है कि विभागीय स्तर पर केवल योजनाओं की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया और वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। समस्तीपुर में ललिता देवी पर कार्रवाई की सिफारिश समस्तीपुर जिला प्रशासन ने मुखिया ललिता देवी के खिलाफ पद से हटाने की कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, समस्तीपुर के डीएम रोशन कुशवाहा ने लोक प्रहरी-सह-प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र भेजकर बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 18(5) के तहत कार्रवाई का अनुरोध किया है। यह कार्रवाई जांच में सामने आए आरोपों और प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। इन 12 मुखियाओं के खिलाफ शुरू हुई प्रक्रिया गंभीर अनियमितताओं, पंचायत बैठकों से लगातार अनुपस्थित रहने और ग्राम सभा नहीं कराने समेत अलग-अलग आरोपों में जिन 12 मुखियाओं के खिलाफ पदमुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी गई है, उनमें शामिल हैं: इम्तियाज अंसारी — काजीपुर सिमरी, बक्सर दीपनारायण सिंह — पहरी सिमरी, बक्सर बटोरन कुमार — डोमा, बख्तियारपुर, पटना अजय कुमार — बरिसवन, शाहपुर, भोजपुर शिवशंकर सिंह — रामपुर डीह, हनुमान नगर, दरभंगा रमेश मांझी — श्रीपुर गाहर पश्चिमी, खानपुर, समस्तीपुर मोहम्मद नदीमुर रहमान — ठिकही, कटरा, मुजफ्फरपुर किरण बाला — अखलासपुर, कैमूर अखिलेश रजक — भीखनपुरा, देसरी, वैशाली रामानंद सिंह — पिंजौरा, जहानाबाद अंजली कुमारी — सहाजितपुर, सारण आजाद शाह — मोकरमपुर, मधुबनी इन मामलों में विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय सामने आएगा। दोष साबित हुआ तो क्या हो सकता है? पंचायती राज विभाग ने विकास योजनाओं में सरकारी धन के दुरुपयोग को गंभीर मामला माना है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित जनप्रतिनिधि को पद से हटाने की कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा नियमों के तहत दोषी पाए जाने वाले जनप्रतिनिधियों पर पंचायत चुनाव लड़ने से पांच साल तक रोक लग सकती है। यदि सरकारी राशि के गबन या दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित रकम की वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है। 2 हजार से अधिक मुखियाओं की जांच क्यों महत्वपूर्ण? बिहार में पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या में विकास योजनाओं का संचालन होता है और इनके लिए सरकारी धन आवंटित किया जाता है। ऐसे में योजनाओं की गुणवत्ता, भुगतान की पारदर्शिता और ग्राम सभा की प्रक्रिया का पालन सीधे तौर पर ग्रामीण विकास से जुड़ा विषय है। 2,000 से अधिक मुखियाओं का जांच के दायरे में आना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पंचायतों में योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन की व्यापक समीक्षा का संकेत मिलता है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि जांच में कितने मामलों में आरोप प्रमाणित होते हैं और कितने मामलों में संबंधित जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट मिलती है। अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।  

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