वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु को बेहद प्रभावशाली और रहस्यमयी ग्रह माना जाता है। साल 2026 के अंत में राहु एक बड़ा राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। 5 दिसंबर 2026 को सुबह 10:32 बजे राहु Capricorn राशि में प्रवेश करेंगे और करीब 18 महीने तक यहीं रहेंगे। राहु हमेशा वक्री चाल चलते हैं, इसलिए वे Aquarius से निकलकर वापस मकर राशि में आएंगे। इस दौरान राहु और शनि के बीच विशेष ज्योतिषीय योग बनेंगे, जिनका असर देश-दुनिया के साथ कई राशियों पर भी देखने को मिल सकता है। देश-दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है? ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार राहु और शनि के बीच बनने वाले योग: त्रिएकादश योग चतुर्थ-दशम योग दुनियाभर में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता बढ़ा सकते हैं। संभावित प्रभाव: कई देशों में सत्ता परिवर्तन वैश्विक तनाव और संघर्ष आर्थिक अस्थिरता प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं की आशंका हालांकि व्यक्तिगत राशियों पर इसका असर अलग-अलग रहेगा। कुछ राशियों के लिए यह गोचर बेहद शुभ साबित हो सकता है। Leo: मेहनत का मिलेगा पूरा फल राहु का गोचर सिंह राशि से छठे भाव में होगा। यह समय लंबे समय से रुके कार्यों में सफलता दिला सकता है। संभावित लाभ: करियर में अच्छी प्रगति प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता रिश्तों में सुधार परिवार के साथ संबंध बेहतर होंगे यात्राओं से लाभ मिलने के योग जो लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे, उन्हें अब राहत मिल सकती है। Libra: विदेश जाने के बन सकते हैं योग तुला राशि वालों के लिए राहु चौथे भाव में गोचर करेंगे। इस दौरान: आय के नए स्रोत बन सकते हैं विदेश यात्रा या विदेश में बसने के अवसर मिल सकते हैं प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में लाभ संभव है करियर में नई दिशा मिल सकती है हालांकि कुछ संघर्ष भी रहेगा, लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत रहने के संकेत हैं। Scorpio: धन लाभ और करियर ग्रोथ वृश्चिक राशि के लिए राहु तीसरे भाव में रहेंगे, जिसे साहस और प्रयास का भाव माना जाता है। संभावित प्रभाव: नए बिजनेस अवसर करियर में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी पुराने निवेश से फायदा आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हालांकि खर्च भी बढ़ सकते हैं, इसलिए आर्थिक प्लानिंग जरूरी होगी। Pisces: बिगड़े काम बनने लगेंगे मीन राशि वालों के लिए राहु 11वें भाव में गोचर करेंगे, जो लाभ और इच्छापूर्ति का भाव माना जाता है। इस दौरान: रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं जमीन या वाहन खरीदने के योग सामाजिक सम्मान बढ़ सकता है मानसिक तनाव में कमी आएगी हालांकि खर्च लगातार बने रह सकते हैं, इसलिए समझदारी से फैसले लेने होंगे। क्या सावधानी रखनी चाहिए? राहु का प्रभाव अचानक बदलाव और भ्रम भी पैदा करता है। इसलिए इस अवधि में: जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें निवेश सोच-समझकर करें मानसिक तनाव को नजरअंदाज न करें रिश्तों में संवाद बनाए रखें ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार सही योजना और धैर्य से इस गोचर के सकारात्मक परिणाम बेहतर तरीके से प्राप्त किए जा सकते हैं।
हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार का विशेष महत्व माना गया है। सनातन परंपरा के अनुसार प्रत्येक धार्मिक कार्य को विधि-विधान और निर्धारित नियमों के साथ करना जरूरी माना जाता है। यही वजह है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार भी पूरी श्रद्धा और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाता है। Garuda Purana में मृत्यु, आत्मा और मोक्ष से जुड़े कई नियमों और मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। इन्हीं मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करना अशुभ माना गया है। अंतिम संस्कार का क्या है धार्मिक महत्व? हिंदू मान्यता के अनुसार मृत्यु केवल शरीर का अंत है, जबकि आत्मा अमर मानी जाती है। अंतिम संस्कार को आत्मा की मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। धार्मिक विश्वास है कि यदि दाह संस्कार सही विधि-विधान, मंत्रों और परंपराओं के अनुसार न किया जाए, तो आत्मा को शांति नहीं मिलती और उसे मोक्ष प्राप्त करने में बाधा आ सकती है। सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता? Garuda Purana और अन्य धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार: सूर्य देव प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता के प्रतीक माने जाते हैं। दिन के समय किए गए संस्कारों को शुभ और देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त माना जाता है। रात का समय नकारात्मक शक्तियों और अशुभ प्रभावों से जुड़ा माना गया है। इसी वजह से माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। यही कारण है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु रात में हो जाए, तो शव को अगले दिन सूर्योदय तक सुरक्षित रखा जाता है। इसके पीछे वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी हैं धार्मिक मान्यताओं के अलावा इसके पीछे कुछ व्यावहारिक वजहें भी बताई जाती हैं। प्राचीन समय में: रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होती थी जंगलों और श्मशान घाटों में सुरक्षा का खतरा रहता था अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सही ढंग से पूरी करना कठिन होता था इन्हीं कारणों से दिन के समय अंतिम संस्कार करने की परंपरा विकसित हुई, जो आज भी कई परिवारों में निभाई जाती है। परंपरा और आस्था का प्रतीक सनातन धर्म में अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और मोक्ष से जुड़ा पवित्र संस्कार माना जाता है। इसलिए आज भी अधिकांश लोग सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार करने से बचते हैं और पारंपरिक मान्यताओं का पालन करते हैं।
20 मई 2026 का दिन भावनाओं, संतुलन और जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बनाने का संदेश दे रहा है। आज का मुख्य अंक 2 माना जा रहा है, जो शांति, संवेदनशीलता और रिश्तों में सामंजस्य का प्रतीक है। वहीं दिन की कुल ऊर्जा का अंक 8 है, जो मेहनत, अनुशासन और आर्थिक मजबूती से जुड़ा माना जाता है। आज का दिन उन लोगों के लिए खास रह सकता है जो धैर्य के साथ फैसले लेते हैं और रिश्तों को महत्व देते हैं। आइए जानते हैं सभी मूलांकों का आज का भविष्यफल। मूलांक 1 (1, 10, 19, 28 तारीख को जन्मे लोग) आज आपको टीम के साथ मिलकर काम करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में अनुशासन बनाए रखने से लाभ मिलेगा। व्यापार और आर्थिक योजनाओं के लिए दिन अनुकूल है। गुस्से पर नियंत्रण रखें और परिवार की भावनाओं को समझने की कोशिश करें। शुभ अंक: 1, 8 शुभ रंग: लाल, भूरा मूलांक 2 (2, 11, 20, 29 तारीख को जन्मे लोग) आज का दिन आपके लिए बेहद शुभ रहने वाला है। करियर में मजबूती मिलेगी और साझेदारी वाले कामों में फायदा हो सकता है। आर्थिक मामलों में अच्छी खबर मिलने के संकेत हैं। भावुकता में कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। शुभ अंक: 2, 8 शुभ रंग: सफेद, मलाईदार मूलांक 3 (3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे लोग) आज अनुशासन और समझदारी आपके लिए सफलता की कुंजी बनेगी। कार्यक्षेत्र में फालतू बातों से दूरी बनाए रखें। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें। परिवार में शांति बनाए रखने की कोशिश करें। शुभ अंक: 3, 8 शुभ रंग: पीला, भूरा मूलांक 4 (4, 13, 22, 31 तारीख को जन्मे लोग) आज आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। जमीन, प्रॉपर्टी और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। मेहनत का पूरा फल मिलेगा, लेकिन व्यवहार में नरमी बनाए रखें। शुभ अंक: 4, 8 शुभ रंग: हरा, सलेटी मूलांक 5 (5, 14, 23 तारीख को जन्मे लोग) आज जल्दबाजी से नुकसान हो सकता है। पैसों के लेनदेन में सावधानी रखें। जीवनसाथी या परिवार को समय देने की जरूरत पड़ सकती है। बातचीत में मिठास बनाए रखें। शुभ अंक: 5, 8 शुभ रंग: हल्का नीला, भूरा मूलांक 6 (6, 15, 24 तारीख को जन्मे लोग) करियर और आर्थिक मामलों में दिन सकारात्मक रहेगा। व्यापार बढ़ाने और निवेश करने के लिए समय अच्छा है। शिक्षा, फैशन और सलाहकारी काम से जुड़े लोगों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। शुभ अंक: 6, 8 शुभ रंग: गुलाबी, भूरा मूलांक 7 (7, 16, 25 तारीख को जन्मे लोग) नई योजनाएं बनाने और रिसर्च से जुड़े कार्यों के लिए दिन अनुकूल है। मन की आवाज पर भरोसा रखें। अकेले समय बिताने की इच्छा हो सकती है, लेकिन अपनों को अपनी भावनाएं जरूर बताएं। शुभ अंक: 7, 8 शुभ रंग: जामुनी, सलेटी मूलांक 8 (8, 17, 26 तारीख को जन्मे लोग) आज का दिन आपके लिए बेहद प्रभावशाली साबित हो सकता है। व्यापार में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है। लंबे समय से अटके आर्थिक मामलों में राहत मिलने के संकेत हैं। परिवार को समय देना न भूलें। शुभ अंक: 8, 2 शुभ रंग: काला, भूरा मूलांक 9 (9, 18, 27 तारीख को जन्मे लोग) आज अधूरे काम पूरे हो सकते हैं। समाज सेवा और लोगों की मदद से सम्मान बढ़ सकता है। रिश्तों में संतुलन बनाए रखें और पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ने की कोशिश करें। शुभ अंक: 9, 8 शुभ रंग: लाल, सफेद
Padmini Ekadashi हिंदू धर्म में भगवान Vishnu को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह एकादशी अधिक मास में आती है, इसलिए इसका महत्व सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक माना गया है। इसे पुरुषोत्तमी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है, पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साल 2026 में अधिक मास के कारण कुल 26 एकादशी पड़ेंगी। लगभग तीन साल बाद आने वाले इस विशेष संयोग में अधिक ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को पद्मिनी एकादशी के रूप में मनाया जाएगा। पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 मई 2026, सुबह 05:10 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, सुबह 06:21 बजे उदयातिथि के अनुसार व्रत: 27 मई 2026, बुधवार पारण का समय: 28 मई 2026, सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान पुरुषोत्तम विष्णु माने जाते हैं। इसलिए इस माह में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। Skanda Purana में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को बड़े यज्ञों और कठोर तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत संचित पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु और माता Lakshmi की पूजा करने से घर में धन, वैभव और खुशहाली बनी रहती है। पद्मिनी एकादशी पूजा विधि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा करें। विष्णु मंत्रों का जाप और पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी की रात जागरण करना भी बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। व्रत पारण कैसे करें? द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और दान-दक्षिणा देने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
Narada Purana में जीवन, मृत्यु, कर्म और परलोक से जुड़े कई गूढ़ रहस्यों का विस्तार से वर्णन मिलता है। पुराणों के अनुसार मनुष्य को मृत्यु के बाद अपने कर्मों के आधार पर फल प्राप्त होता है। अच्छे कर्म करने वाले जीव जहां सुखपूर्वक धर्मलोक की यात्रा करते हैं, वहीं पाप कर्म करने वालों को कठोर यातनाएं सहनी पड़ती हैं। नारद पुराण में यमलोक के मार्ग और वहां मिलने वाले दंड एवं सुखों का अत्यंत विस्तृत और रहस्यमयी वर्णन किया गया है। छियासी हजार योजन लंबा बताया गया है यमलोक का मार्ग नारद पुराण के अनुसार यमलोक का मार्ग लगभग 86,000 योजन तक फैला हुआ है। मान्यता के अनुसार एक योजन लगभग 13 किलोमीटर के बराबर माना जाता है। इस हिसाब से यह दूरी करीब 11 लाख किलोमीटर से भी अधिक बताई गई है। कहा गया है कि: धर्म और दान-पुण्य करने वाले लोग इस मार्ग को सुखपूर्वक पार कर लेते हैं पाप कर्म करने वाले जीव अत्यंत कष्ट झेलते हुए यात्रा करते हैं पापी जीवों के बारे में वर्णन मिलता है कि उनके कंठ सूख जाते हैं, वे भय और पीड़ा से रोते-चिल्लाते हैं और Yamdoot उन्हें चाबुक और अस्त्रों से दंडित करते हुए आगे ले जाते हैं। यमलोक के मार्ग में मिलती हैं भयानक यातनाएं पुराण में यमलोक के रास्ते को बेहद कठिन और भयावह बताया गया है। मार्ग में: जलती हुई अग्नि तपती रेत कांटेदार वृक्ष तीखी धार वाली चट्टानें अंधेरी गुफाएं सुई जैसे कांटे मौजूद रहते हैं। कहीं बाघों की डरावनी गर्जना सुनाई देती है तो कहीं जीवों को रस्सियों और अंकुशों से खींचा जाता है। पाप कर्म करने वाले जीव इन यातनाओं को सहते हुए अपने कर्मों पर पछतावा करते हैं। पुराणों के अनुसार इस यात्रा में न छाया मिलती है और न पानी। पुण्यात्माओं को मिलते हैं दिव्य सुख नारद पुराण में यह भी बताया गया है कि जिन्होंने जीवन में धर्म, दया और दान किया हो, उन्हें यमलोक की यात्रा में विशेष सुख प्राप्त होते हैं। उदाहरण के तौर पर: अन्न दान करने वालों को स्वादिष्ट भोजन मिलता है जल दान करने वालों को उत्तम पेय प्राप्त होते हैं वस्त्र दान करने वालों को दिव्य वस्त्र मिलते हैं दीपदान करने वालों के मार्ग प्रकाशित रहते हैं गोदान करने वालों को विशेष सुख प्राप्त होते हैं जो व्यक्ति माता-पिता की सेवा करता है, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों की सहायता करता है तथा सभी जीवों के प्रति दया भाव रखता है, उसे धर्मराज के लोक में सम्मान प्राप्त होता है। धर्मराज पुण्यात्माओं का करते हैं सम्मान Yama पुण्यात्माओं का स्वागत मित्र की तरह करते हैं। पुराण के अनुसार धर्मराज कहते हैं कि मानव जीवन पाकर भी जो व्यक्ति धर्म और पुण्य नहीं करता, उससे बड़ा पापी कोई नहीं। नारद पुराण में धर्म, दान और भगवान के स्मरण को जीवन का सबसे बड़ा साधन बताया गया है। चित्रगुप्त याद दिलाते हैं कर्मों का हिसाब वहीं पाप कर्म करने वाले जीवों को यमदूत भयावह रूप में दिखाई देते हैं। पुराण में वर्णन है कि उनकी आंखें लाल होती हैं और वे प्रलयकाल के बादलों जैसी गर्जना करते हैं। इसके बाद Chitragupta जीवों को उनके कर्मों का पूरा हिसाब याद दिलाते हैं और उसी अनुसार उन्हें नरक की यातनाएं भोगनी पड़ती हैं। पुराणों के अनुसार पापों का फल भोगने के बाद जीव फिर पृथ्वी पर विभिन्न योनियों में जन्म लेते हैं। क्या संदेश देता है नारद पुराण? नारद पुराण का मुख्य संदेश यह है कि: मनुष्य को हमेशा धर्म और सद्कर्म करने चाहिए दया, सेवा और दान जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं हर कर्म का फल अवश्य मिलता है मानव जीवन को केवल भौतिक सुखों में नहीं गंवाना चाहिए पुराणों के अनुसार धर्म का मार्ग ही अंततः जीव को सुख, सम्मान और मोक्ष की ओर ले जाता है।
जून 2026 का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस महीने कई बड़े ग्रह गोचर होने जा रहे हैं, जिनसे कई शुभ राजयोगों का निर्माण होगा। Astrology के अनुसार जून में बनने वाले ये ग्रह योग कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। इस महीने Jupiter Transit के कर्क राशि में प्रवेश से हंस राजयोग बनेगा, जबकि शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होगा। वहीं शुक्र के कर्क राशि में गोचर से गजलक्ष्मी राजयोग भी बनेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन ग्रह स्थितियों का सबसे अधिक लाभ मेष, मिथुन, कर्क, कन्या और वृश्चिक राशि के लोगों को मिल सकता है। जून में बनेंगे कई शुभ राजयोग जून 2026 में ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी: गुरु का कर्क राशि में गोचर — हंस राजयोग शुक्र और बुध की मिथुन राशि में युति — लक्ष्मी नारायण राजयोग 8 जून को शुक्र का कर्क राशि में प्रवेश — गजलक्ष्मी राजयोग सूर्य का मध्य जून में मिथुन राशि में प्रवेश मंगल का वृषभ राशि में गोचर इन ग्रह परिवर्तनों का असर करियर, परिवार, धन और भाग्य पर देखने को मिल सकता है। मेष राशि वालों को मिलेगा रुके कामों में लाभ Aries zodiac sign वालों के लिए जून का महीना ऊर्जा और उत्साह से भरा रह सकता है। रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना आत्मविश्वास में वृद्धि करियर में नई गति हालांकि 20 जून के बाद पारिवारिक तनाव और व्यवसाय में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। परिवार से जुड़े मामलों में समझदारी से काम लेने की सलाह दी गई है। मिथुन राशि वालों को मिलेगा मान-सम्मान Gemini zodiac sign वालों के लिए गुरु का शुभ प्रभाव लाभदायक माना जा रहा है। समाज में सम्मान बढ़ सकता है भाग्य का साथ मिलेगा संतान सुख की संभावना धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी हालांकि शादीशुदा लोगों को जीवनसाथी की सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होगी। कर्क राशि वालों के लिए अध्यात्म और यात्रा के योग Cancer zodiac sign वालों के लिए जून का महीना आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण रह सकता है। धार्मिक और आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी तीर्थ यात्रा के योग बन सकते हैं आय के साधन बने रहेंगे लेकिन शनि की ढैय्या के कारण मानसिक अशांति महसूस हो सकती है और काम में मन कम लग सकता है। कन्या राशि वालों को मिलेगा परिवार का सहयोग Virgo zodiac sign वालों पर गुरु की शुभ दृष्टि रहने से: परिवार का सहयोग मिलेगा आय में बढ़ोतरी हो सकती है उन्नति के अवसर मिलेंगे हालांकि जीवन में कुछ बदलाव और उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकते हैं। वृश्चिक राशि वालों को मिल सकती है खुशखबरी Scorpio zodiac sign वालों के लिए मंगल और गुरु की शुभ दृष्टि लाभकारी मानी जा रही है। परिवार में शुभ समाचार मिल सकता है आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा यात्रा के योग बन सकते हैं क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य? ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार जून 2026 में बनने वाले राजयोग कई राशियों के लिए करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इसलिए किसी भी बड़े निर्णय से पहले व्यक्तिगत ज्योतिषीय सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
वैदिक ज्योतिष में “कारकत्व” एक बेहद महत्वपूर्ण सिद्धांत माना जाता है। सरल शब्दों में समझें तो कारकत्व का अर्थ है किसी ग्रह की जिम्मेदारी या उसका विशेष विभाग। जैसे किसी सरकार में अलग-अलग मंत्रालय होते हैं और हर मंत्री को एक खास विभाग सौंपा जाता है, उसी प्रकार ब्रह्मांड की व्यवस्था में भी प्रत्येक ग्रह को जीवन के कुछ विशेष क्षेत्रों का स्वामी बनाया गया है। जिस विषय, वस्तु या संबंध का अधिकार जिस ग्रह के पास होता है, वह ग्रह उस विषय का “कारक” कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र में सटीक भविष्यवाणी के लिए केवल भाव और भावेश को देखना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि उस विषय के कारक ग्रह की स्थिति को समझना भी उतना ही आवश्यक होता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सुख-सुविधा और संपत्ति का चौथा भाव अत्यंत मजबूत हो, लेकिन उस भाव का नैसर्गिक कारक चंद्रमा पीड़ित अवस्था में हो, तो व्यक्ति के पास भौतिक सुख-साधन तो भरपूर होंगे, लेकिन मानसिक शांति और संतोष की कमी बनी रहेगी। यही वजह है कि अनुभवी ज्योतिषी ग्रहों के कारकत्व का विशेष अध्ययन करते हैं। सूर्य का कारकत्व सूर्य को आत्मा, आत्मविश्वास, यश, प्रतिष्ठा, शक्ति और ऊर्जा का कारक माना जाता है। इसके अलावा यह पिता, राजनीति, शासन, सरकारी नौकरी, नेतृत्व क्षमता, चिकित्सा विज्ञान, स्वास्थ्य, दाहिने नेत्र और सामाजिक गौरव का भी प्रतिनिधित्व करता है। किसी व्यक्ति के आत्मबल और समाज में सम्मान का आकलन मुख्य रूप से सूर्य की स्थिति देखकर किया जाता है। चंद्रमा का कारकत्व चंद्रमा मन, भावनाओं, संवेदनशीलता और मानसिक स्थिति का कारक है। यह व्यक्ति की सोच, रुझान, प्रसन्नता, नींद, चेहरे की आभा, माता और प्रसिद्धि से जुड़ा होता है। जल तत्व, दूर की यात्राएं तथा मानसिक शांति का भी संबंध चंद्रमा से माना जाता है। यदि चंद्रमा शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति मानसिक रूप से संतुलित और खुश रहता है। मंगल का कारकत्व मंगल साहस, शक्ति, पराक्रम और संघर्ष का ग्रह माना जाता है। यह भूमि, संपत्ति, सेना, पुलिस, युद्धक क्षमता, इंजीनियरिंग, डॉक्टर, वैज्ञानिक और नेतृत्व क्षमता से जुड़ा होता है। क्रोध, दुर्घटना, चोट, शत्रु और विवादों का विचार भी मंगल से किया जाता है। मजबूत मंगल व्यक्ति को निर्भीक और ऊर्जावान बनाता है। बुध का कारकत्व बुध बुद्धिमत्ता, वाणी, तर्कशक्ति और व्यापार का प्रतिनिधि ग्रह है। शिक्षा, गणित, लेखन, प्रकाशन, ज्योतिष, लेखा-जोखा, संचार, मित्रता और व्यवसायिक कौशल का अध्ययन बुध के माध्यम से किया जाता है। जिन लोगों का बुध मजबूत होता है, वे आमतौर पर अच्छे वक्ता, लेखक और व्यापारी माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र को गहराई से समझने के लिए ग्रहों के कारकत्व का ज्ञान अत्यंत आवश्यक माना गया है। सूर्य, चंद्रमा, मंगल और बुध की तरह बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु भी जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के कारक होते हैं। इनके विस्तृत प्रभाव और महत्व की चर्चा अगले भाग में की जाएगी।
इस सप्ताह ग्रहों की चाल करियर, कम्युनिकेशन, नेटवर्किंग और फाइनेंशियल प्लानिंग पर गहरा असर डाल सकती है। Astrology के अनुसार 18 मई से चंद्रमा मिथुन, फिर कर्क और सप्ताह के अंत तक सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे अलग-अलग राशियों पर करियर और आर्थिक मामलों में अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है। जहां वृष और कर्क राशि वालों को भाग्य का साथ मिल सकता है, वहीं सिंह राशि वालों के करियर में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। मेष राशि इस सप्ताह आपके अंदर कॉन्फिडेंस बना रहेगा। नेटवर्किंग और टीमवर्क से फायदा हो सकता है। मीडिया, सेल्स और ऑनलाइन काम से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा रहेगा। 20 मई के बाद वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर मानसिक दबाव बढ़ सकता है। सप्ताहांत में सीनियर्स से तारीफ मिलने के योग हैं। वृषभ राशि यह सप्ताह आर्थिक स्थिरता और प्रैक्टिकल फैसलों के लिए अच्छा रहेगा। सेविंग्स और फाइनेंशियल प्लानिंग पर फोकस बढ़ेगा। काम के सिलसिले में ट्रैवल के योग बन सकते हैं। परिवार और काम के बीच संतुलन बनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। मिथुन राशि Communication और नेटवर्किंग इस सप्ताह आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। इंटरव्यू, मीटिंग और प्रेजेंटेशन में सफलता मिलने के संकेत हैं। सोशल कॉन्टैक्ट्स से आर्थिक अवसर मिल सकते हैं। हालांकि सप्ताह के बीच में खर्चों को लेकर सतर्क रहना जरूरी होगा। कर्क राशि सप्ताह की शुरुआत थोड़ी मानसिक उलझन के साथ हो सकती है। खर्च और करियर को लेकर चिंता बढ़ सकती है। 20 मई के बाद स्थिति बेहतर होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। टीमवर्क से फायदा मिलेगा और फाइनेंशियल फैसलों में स्थिरता आएगी। सिंह राशि यह सप्ताह आपके लिए करियर ग्रोथ लेकर आ सकता है। नेटवर्किंग और प्रोफेशनल बातचीत से लाभ होगा। 23 मई के बाद आपका आत्मविश्वास और लीडरशिप क्वालिटी मजबूत होगी। सीनियर्स से पहचान मिलने और करियर में बड़ा अवसर मिलने के योग हैं। कन्या राशि काम का दबाव ज्यादा रह सकता है लेकिन प्रोफेशनल पहचान मजबूत होगी। नेटवर्किंग और सोशल कॉन्टैक्ट्स से फायदा मिलेगा। सप्ताह के अंत में मानसिक तनाव से बचने के लिए आराम और संतुलन जरूरी रहेगा। तुला राशि ट्रैवल, नेटवर्किंग और नई सीख इस सप्ताह करियर में मदद कर सकती है। शिक्षण, मीडिया और कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों को फायदा हो सकता है। सप्ताह के बीच में काम का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन अंत तक सहयोग मिलने लगेगा। वृश्चिक राशि फाइनेंस, टैक्स और जिम्मेदारियों को लेकर तनाव रह सकता है। जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें। 20 मई के बाद वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा और करियर में प्रगति के संकेत मजबूत होंगे। धनु राशि पार्टनरशिप और टीमवर्क इस सप्ताह आपकी सफलता की कुंजी बनेंगे। बिजनेस और प्रोफेशनल चर्चाओं में फायदा होगा। सप्ताहांत तक आत्मविश्वास बढ़ेगा और करियर फैसलों में स्पष्टता मिलेगी। मकर राशि काम का दबाव और जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। खर्चों पर कंट्रोल रखना जरूरी होगा। 20 मई के बाद साझेदारी और टीमवर्क से फायदा होगा। ओवरथिंकिंग से बचना बेहतर रहेगा। कुंभ राशि रचनात्मकता और कम्युनिकेशन इस सप्ताह आपको आगे बढ़ाएंगे। लेखन, डिजाइन और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा रहेगा। काम का दबाव बीच में बढ़ सकता है, लेकिन सप्ताहांत में सहयोग से राहत मिलेगी। मीन राशि करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। 20 मई के बाद आत्मविश्वास और क्रिएटिविटी बढ़ेगी। काम में सराहना मिलने के योग हैं, हालांकि सप्ताह के अंत तक व्यस्तता बढ़ सकती है।
जैन धर्म में रोहिणी व्रत को बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान वासुपूज्य की आराधना को समर्पित होता है और मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में रोहिणी व्रत 18 मई, सोमवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहता है। रोहिणी व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त रोहिणी व्रत किसी निश्चित तिथि पर नहीं बल्कि रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव के अनुसार रखा जाता है। जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र विद्यमान रहता है, तब यह व्रत किया जाता है। मुख्य व्रत तिथि: 18 मई 2026, सोमवार रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 17 मई 2026, रात 9:43 बजे रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 18 मई 2026, शाम 5:55 बजे विशेष पूजा मुहूर्त: सुबह 08:00 बजे से 10:00 बजे तक व्रत पारण का समय: 18 मई को सुबह 11:32 बजे के बाद क्या है रोहिणी व्रत का महत्व? रोहिणी व्रत मुख्य रूप से जैन समुदाय द्वारा रखा जाता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान वासुपूज्य की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत आत्मिक शुद्धि, संयम और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। रोहिणी व्रत के प्रमुख नियम यह व्रत लगातार 3, 5 या 7 वर्षों तक किया जाता है। हर महीने रोहिणी नक्षत्र के दिन उपवास रखा जाता है। व्रत के दौरान सात्विक जीवनशैली और धार्मिक नियमों का पालन जरूरी माना जाता है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद विधि-विधान से ‘उद्यापन’ किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, बिना उद्यापन के लंबे समय तक किए गए व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता।
Vat Savitri Vrat हिंदू धर्म का एक बेहद महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। इस व्रत से जुड़ी कई परंपराएं हैं, लेकिन इनमें सबसे खास मानी जाती है बहू द्वारा अपनी सास को “बायना” देने की रस्म। पूजा के बाद बहुएं अपनी सास को श्रृंगार सामग्री, मिठाई, फल और वस्त्र भेंट कर उनका आशीर्वाद लेती हैं। क्यों दिया जाता है बायना? Savitri और Satyavan की कथा के अनुसार, माता सावित्री ने अपने पतिव्रता धर्म, बुद्धिमानी और समर्पण से यमराज को प्रसन्न किया था। उन्होंने अपने पति सत्यवान के प्राण मांगने से पहले अपने अंधे सास-ससुर की आंखों की रोशनी और उनका खोया हुआ राजपाट वापस मांगा था। इसी प्रसंग को आदर्श बहू के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। माना जाता है कि सास-ससुर का सम्मान और सेवा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाती है। यही कारण है कि वट सावित्री के दिन बहुएं अपनी सास को बायना देकर सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करती हैं। यह परंपरा सास-बहू के रिश्ते में प्रेम, सम्मान और अपनापन बढ़ाने का प्रतीक भी मानी जाती है। बायने की थाली में क्या-क्या रखें? वट सावित्री के बायने की थाली में शुभ और पारंपरिक वस्तुएं रखने का विशेष महत्व माना जाता है। मुख्य प्रसाद भीगे हुए काले चने पूड़ी हलवा गुलगुले सुहाग सामग्री सिंदूर बिंदी लाल चूड़ियां मेहंदी काजल आलता शीशा और कंघी वस्त्र और फल सास के लिए नई साड़ी लाल, पीला या गुलाबी रंग शुभ माना जाता है आम, केला, तरबूज, खरबूजा पानी वाला नारियल दक्षिणा श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार नकद राशि बायना देते समय किन बातों का रखें ध्यान? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बायना देते समय कुछ सावधानियां रखना बेहद जरूरी माना जाता है। इस्तेमाल किया हुआ सुहाग सामान न दें काले, सफेद और गहरे नीले रंग के कपड़े न दें थाली में कैंची, सुई या सेफ्टी पिन जैसी धारदार चीजें न रखें कैसे दी जाती है बायने की थाली? वट वृक्ष की 7 या 108 परिक्रमा और कथा सुनने के बाद महिलाएं घर लौटती हैं। इसके बाद वे बांस के पंखे से अपने पति को हवा करती हैं और उनका आशीर्वाद लेती हैं। फिर बायने की थाली को पल्लू से ढककर सास को सम्मानपूर्वक भेंट किया जाता है। यदि सास मौजूद न हों, तो यह बायना घर की किसी बड़ी महिला, जेठानी या मंदिर के पुजारी की पत्नी को भी दिया जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा करती हैं, कथा सुनती हैं और पारंपरिक सात्विक भोजन से सजी पूजा थाली भगवान को अर्पित करती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत परिवार में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। पूजा थाली में क्या-क्या रखें? वट सावित्री पूजा की थाली पूरी तरह सात्विक होनी चाहिए। इसमें प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। पारंपरिक रूप से थाली में पूड़ी, आलू की सूखी सब्जी, दही, पंचामृत, मौसमी फल और खीर शामिल की जाती है। पूजा के बाद यही भोजन प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटा जाता है। इसके अलावा पूजा में वट वृक्ष की परिक्रमा करना, सूत बांधना, जल अर्पित करना और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना भी जरूरी माना जाता है। महिलाएं इस दिन नई साड़ी पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। मिठाई का विशेष महत्व वट सावित्री व्रत में घर की बनी मिठाई का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि सात्विक मिठाई का भोग लगाने से देवी सावित्री प्रसन्न होती हैं। कई घरों में सूजी का हलवा, बेसन के लड्डू, मालपुआ और चावल की खीर बनाई जाती है। इनमें खीर को सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। अगर आप पूजा थाली को खास बनाना चाहती हैं तो घर में बने मालपुए या बेसन के लड्डू भी शामिल कर सकती हैं। ताजे फल और पंचामृत के साथ यह थाली और भी पवित्र मानी जाती है। ऐसे बनाएं स्वादिष्ट सूजी का हलवा सूजी का हलवा बनाने के लिए आधा कप सूजी, आधा कप घी, आधा कप चीनी और डेढ़ कप पानी की जरूरत होती है। सबसे पहले कड़ाही में घी गर्म करें और धीमी आंच पर सूजी को सुनहरा होने तक भूनें। जब सूजी से खुशबू आने लगे और रंग हल्का भूरा हो जाए, तब उसमें पानी डालें। इसके बाद चीनी मिलाकर लगातार चलाते रहें। हलवा गाढ़ा होने लगे तो उसमें इलायची पाउडर और सूखे मेवे डालें। आखिर में ऊपर से थोड़ा घी डालने से हलवे में चमक और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं। सात्विक भोजन से जुड़ी है आस्था धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री पूजा में सात्विक भोजन और घर की बनी मिठाइयों का विशेष महत्व होता है। श्रद्धा और भक्ति से सजाई गई पूजा थाली न केवल परंपरा का हिस्सा है, बल्कि परिवार में प्रेम, सुख और समृद्धि का प्रतीक भी मानी जाती है।
Vat Savitri Vrat हिंदू धर्म का बेहद महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत वैवाहिक सुख और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। वट सावित्री व्रत 2026 कब है? पंचांग के अनुसार Vat Savitri Vrat ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष व्रत की तिथि: व्रत: 16 मई 2026, शनिवार अमावस्या तिथि प्रारंभ: सुबह 05:12 बजे अमावस्या तिथि समाप्त: देर रात 01:31 बजे पूजा का शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार, वट वृक्ष की पूजा सुबह के समय करना विशेष फलदायी माना गया है। शुभ योग: सुबह 10:26 बजे तक सौभाग्य योग रहेगा इस दौरान पूजा और व्रत संबंधी धार्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ माना जा रहा है। वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार: वट वृक्ष में Brahma, Vishnu और Shiva का वास माना जाता है। इसे “अक्षय वट” भी कहा जाता है। वट वृक्ष की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन महिलाएं: व्रत रखती हैं वट वृक्ष की पूजा करती हैं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं पति की लंबी आयु की कामना करती हैं वट सावित्री व्रत पूजा विधि Vat Savitri Vrat के दिन: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें स्वच्छ वस्त्र धारण करें वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें रोली, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटें सावित्री-सत्यवान कथा का पाठ करें पति की लंबी आयु की प्रार्थना करें दान का भी है विशेष महत्व धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन: भोजन वस्त्र फल जरूरत की वस्तुएं दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 की पहली शनिश्चरी अमावस्या 16 मई, शनिवार को पड़ रही है। जब अमावस्या तिथि शनिवार के दिन आती है, तो उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शनि देव की पूजा, तर्पण और दान-पुण्य से न केवल पितृ दोष शांत होता है, बल्कि जीवन की बाधाएं भी कम होती हैं। शुभ योगों का विशेष संयोग ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 16 मई 2026 को कई शुभ योग बन रहे हैं: सुबह से 10:26 बजे तक सौभाग्य योग इसके बाद शोभन योग का प्रारंभ इन योगों को सुख, समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन समयों में किए गए कार्य कई गुना अधिक फल देते हैं। पूजा और स्नान के शुभ मुहूर्त इस दिन कई महत्वपूर्ण मुहूर्त बताए गए हैं: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:07 से 4:48 बजे तक शनि पूजा का शुभ समय: सुबह 7:19 से 8:59 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:45 बजे तक इस दौरान स्नान, ध्यान और मंत्र जाप को अत्यंत शुभ माना गया है। शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या पर किए गए उपाय विशेष फलदायी माने जाते हैं: पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना काले तिल और नीले फूल अर्पित करना जरूरतमंदों को काले वस्त्र, उड़द दाल और लोहे की वस्तुएं दान करना इन उपायों से शनि दोष में कमी आती है और आर्थिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है। पितृ दोष निवारण के लिए तर्पण का महत्व इस दिन पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करना अत्यंत शुभ माना गया है। माना जाता है कि इससे पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन: चावल की खीर बनाकर पितरों के नाम से अग्नि में अर्पित करना तर्पण और श्राद्ध करना इन उपायों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। धार्मिक महत्व और मान्यता शनिश्चरी अमावस्या को शनि देव की कृपा प्राप्त करने का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियों को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।
Masik Shivratri हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी पर्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली यह शिवरात्रि भगवान Shiva की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यही कारण है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है। मई 2026 में कब है मासिक शिवरात्रि? पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। निशिता काल को ध्यान में रखते हुए मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा 15 मई, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन शिव भक्त उपवास रखकर भगवान शिव का अभिषेक और रात्रि पूजा करते हैं। दूध और सफेद वस्तुओं का दान मासिक शिवरात्रि पर दूध, दही, चावल, मिश्री और सफेद वस्त्रों का दान बेहद शुभ माना जाता है। सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से मानसिक तनाव कम होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अन्न और भोजन का दान इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन, फल और अन्न दान करना पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि भूखे लोगों को भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ऐसे दान से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। तिल और घी का दान काले तिल और घी का दान भी मासिक शिवरात्रि पर विशेष महत्व रखता है। शिव मंदिर में घी का दीपक जलाना और तिल का दान करना जीवन की नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे जीवन में शांति और स्थिरता आती है। वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान जरूरतमंद लोगों को कपड़े, कंबल और दैनिक उपयोग की वस्तुएं दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता, सुख और संतोष बढ़ता है। धार्मिक दृष्टि से दान को केवल पुण्य का माध्यम नहीं बल्कि मानव सेवा का भी प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया दान भगवान शिव को प्रसन्न करता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। इस दिन शिव पूजा के साथ दान-पुण्य करने को विशेष फलदायी माना गया है।
अपरा एकादशी पर बढ़ जाता है इस प्राचीन मंदिर का महत्व झारखंड के Itkhori स्थित प्रसिद्ध Bhadrakali Temple धार्मिक आस्था, तांत्रिक साधना और प्राचीन इतिहास का अनोखा संगम माना जाता है। अपरा एकादशी के अवसर पर इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि यहां मां भद्रकाली के दर्शन और पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। रांची से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म की ऐतिहासिक विरासत को अपने भीतर समेटे हुए है। पांचवीं-छठी शताब्दी की मानी जाती है प्रतिमा मां भद्रकाली का यह प्राचीन मंदिर चतरा जिले के भदुली गांव में स्थित है। कहा जाता है कि गांव का नाम भी मंदिर के कारण पड़ा। मंदिर में स्थापित मां भद्रकाली की प्रतिमा एक विशाल शिलाखंड पर उकेरी गई है। यह प्रतिमा करीब साढ़े चार फीट ऊंची, ढाई फीट चौड़ी और लगभग 30 मन वजनी बताई जाती है। इतिहासकारों और विद्वानों के अनुसार यह प्रतिमा पाल काल यानी पांचवीं-छठी शताब्दी की मानी जाती है। 196 एकड़ में फैला है मंदिर परिसर Bhadrakali Temple का विशाल परिसर लगभग 196 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां बनी यज्ञशाला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। इसका निर्माण वर्ष 1980 में कराया गया था। मंदिर परिसर में एक संग्रहालय भी मौजूद है, जहां खुदाई में मिली 418 प्राचीन मूर्तियों और भग्नावशेषों को सुरक्षित रखा गया है। यह संग्रहालय क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है यह स्थल मां भद्रकाली मंदिर तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां स्थापित मां तारा की प्रतिमा विशेष ढंग से बनाई गई है, जिससे साधक को मां के पैर का अंगूठा सीधे आज्ञाचक्र के सामने दिखाई देता है। मान्यता है कि मगध के प्रसिद्ध शाक्त साधक भैरवनाथ ने इस स्थान को साधना के लिए चुना था। इसी कारण यह क्षेत्र तंत्र साधना से जुड़े लोगों के बीच विशेष महत्व रखता है। मंदिर परिसर में मौजूद हैं कई दुर्लभ धरोहरें मंदिर परिसर में स्थित कोठेश्वरनाथ स्तूप भी काफी प्रसिद्ध है। इसके चारों ओर भगवान Gautama Buddha की मूर्तियां उकेरी गई हैं। स्तूप के ऊपर बने छोटे गड्ढे में हमेशा पानी भरा रहने की मान्यता भी लोगों को आकर्षित करती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस जल को पूरी तरह खाली नहीं किया जा सकता। इसके अलावा यहां सहस्रलिंगी शिवलिंग भी स्थापित है, जिसमें 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग बने हुए हैं। यह अद्भुत शिवलिंग श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता है। भगवान बुद्ध और जैन धर्म से भी जुड़ी हैं मान्यताएं स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ज्ञान की खोज में निकले युवराज सिद्धार्थ ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। कहा जाता है कि जब उनकी माता उन्हें वापस ले जाने आईं और उनका ध्यान नहीं टूटा, तब उनके मुख से “इत खोई” शब्द निकला। बाद में यही नाम बदलकर इटखोरी पड़ गया। जैन धर्म के अनुयायी भी इस स्थान को पवित्र मानते हैं। मान्यता है कि जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर Sheetalnath की जन्मभूमि यही क्षेत्र है। खुदाई में मिले प्राचीन मठ और मंदिरों के अवशेष भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वर्ष 2011-12 और 2012-13 में यहां खुदाई कराई गई थी। इस दौरान नौवीं और दसवीं शताब्दी के कई मठों और मंदिरों के अवशेष मिले थे। आज इन ऐतिहासिक धरोहरों को संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। मंदिर प्रबंधन समिति भी इस प्राचीन स्थल को उसके पुराने वैभव के साथ सुरक्षित रखने का प्रयास कर रही है।
आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है। खासतौर पर नई दुल्हनों के लिए शादी के बाद पहला वट सावित्री व्रत बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। नई नवेली दुल्हनें इस अवसर पर अपने लुक, पूजा की तैयारी और पारंपरिक रीति-रिवाजों को लेकर काफी उत्साहित रहती हैं। सही तैयारी और कुछ आसान फैशन व ब्यूटी टिप्स अपनाकर इस दिन को और भी खास बनाया जा सकता है। ट्रेडिशनल साड़ी से पाएं रॉयल लुक वट सावित्री पूजा में साड़ी पहनना शुभ माना जाता है। नई दुल्हनों के लिए लाल, मरून, पीला, नारंगी या हरा रंग खास माना जाता है। सिल्क, बनारसी या चंदेरी साड़ी पहनकर आप पारंपरिक और एलिगेंट लुक पा सकती हैं। यदि शादी की साड़ी बहुत भारी हो, तो हल्की एम्ब्रॉयडरी वाली साड़ी चुनना बेहतर रहेगा, ताकि गर्मी में आराम बना रहे। कई महिलाएं अपने पहले व्रत पर शादी का जोड़ा पहनना भी पसंद करती हैं। सोलह श्रृंगार से निखरेगा लुक नई दुल्हनों के लिए सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है। मांग में सिंदूर, हाथों में चूड़ियां, माथे पर बड़ी बिंदी, पैरों में बिछिया और आलता या महावर आपके लुक को और आकर्षक बना सकते हैं। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं नथ, मांगटीका और पारंपरिक ज्वेलरी भी पहन सकती हैं। फूलों का गजरा भी ट्रेडिशनल लुक में चार चांद लगा देता है। मेहंदी और स्किन केयर का रखें ध्यान वट सावित्री व्रत में मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है। बेहतर होगा कि मेहंदी एक दिन पहले ही लगा लें, ताकि उसका रंग अच्छे से चढ़ जाए। ब्राइडल डिजाइन या पूजा थीम वाली मेहंदी हाथों की खूबसूरती बढ़ा सकती है। गर्मियों में पड़ने वाले इस व्रत के दौरान स्किन केयर भी जरूरी है। स्क्रब और फेस पैक से चेहरे पर निखार लाया जा सकता है। मेकअप से पहले एलोवेरा जेल या आइस क्यूब लगाने से चेहरा फ्रेश और ग्लोइंग दिखता है। हल्का मेकअप और सेहत का रखें ख्याल गर्मी को ध्यान में रखते हुए हल्का और नेचुरल मेकअप चुनें। न्यूड लिपस्टिक और कम मेकअप चेहरे को ज्यादा फ्रेश लुक देता है। यदि निर्जला व्रत रख रही हैं, तो पूजा के बाद नारियल पानी और हल्का भोजन जरूर लें, ताकि शरीर में कमजोरी महसूस न हो।
Bada Mangal के अवसर पर आज 12 मई को भक्त पूरे श्रद्धा भाव से Hanuman की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवारों को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है और हिंदू धर्म में इनका विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवारों में हनुमान जी की पूजा करने से मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियां और स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। भक्त इस दिन व्रत रखकर पूजा-पाठ करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। दूसरे बड़े मंगल का शुभ मुहूर्त आज दूसरे बड़े मंगल पर पूजा के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:08 बजे से 4:50 बजे तक विशेष पूजा मुहूर्त: सुबह 9:07 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक शाम पूजा मुहूर्त: शाम 7:03 बजे से रात 8:06 बजे तक मान्यता है कि इन शुभ समयों में पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है और हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे करें हनुमान जी की पूजा Hanuman की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई कर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और फूल, अक्षत, सिंदूर तथा नैवेद्य अर्पित करें। पूजा में बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके साथ तुलसी दल और पान का बीड़ा भी चढ़ाया जाता है। पूजा के दौरान घी का दीपक और धूप जलाकर Hanuman Chalisa का पाठ करें और हनुमान मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती कर अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें। बड़ा मंगल का धार्मिक महत्व Bada Mangal को Hanuman की विशेष कृपा प्राप्त करने का दिन माना जाता है। इस दिन कई भक्त मंदिरों में जाकर चोला चढ़ाते हैं, लाल ध्वजा अर्पित करते हैं और प्रसाद वितरण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से बजरंगबली भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अहमदाबाद , एजेंसियां। सोमनाथ मंदिर की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध Surya Kiran Aerobatic Team (SKAT) एक शानदार एयर शो प्रस्तुत करेगी। यह कार्यक्रम 11 मई को सुबह 11 बजे आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। एयर शो के दौरान छह हॉक एमके-132 विमान मंदिर परिसर के ऊपर रोमांचक एरोबेटिक फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। 800 से अधिक शो कर चुकी है सूर्य किरण टीम विंग कमांडर जनमीत शर्मा ने बताया कि यह प्रदर्शन सोमनाथ मंदिर के ऊपर अपनी तरह का पहला आयोजन होगा। टीम की कमेंटेटर फ्लाइट लेफ्टिनेंट कंवल संधू के अनुसार, इस एयर शो का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन Ajay Dashrathi करेंगे, जो सुखोई-30 एमकेआई के अनुभवी पायलट हैं। टीम में कुल 13 प्रशिक्षित पायलट शामिल हैं। सूर्य किरण एरोबेटिक टीम को भारतीय वायुसेना का “राजदूत” माना जाता है। यह टीम भारत सहित कई देशों में 800 से अधिक एयर शो कर चुकी है। चीन, श्रीलंका, थाईलैंड, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी टीम ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। तेज रफ्तार और सटीक फॉर्मेशन बनेगा आकर्षण एयर शो के दौरान हॉक एमके-132 विमान 800 से 900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सभी छह विमानों के संयुक्त उड़ान प्रदर्शन से होगी, जिसके बाद वे अलग-अलग समूहों में बंटकर कई हैरतअंगेज करतब दिखाएंगे। खास बात यह है कि कई बार विमानों के बीच की दूरी पांच मीटर से भी कम होगी, जो पायलटों के उच्च स्तर के तालमेल और सटीकता को दर्शाती है। सुरक्षा के रहेंगे विशेष इंतजाम कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। स्क्वाड्रन लीडर Aman Goyal जमीन से लगातार पायलटों को मौसम, दूरी और सुरक्षा संबंधी निर्देश देंगे। वहीं, पक्षियों की आवाजाही रोकने के लिए “बर्ड हैजर्ड कंट्रोल यूनिट” भी पूरी तरह सतर्क रहेगी।
अधिक मास के कारण इस बार खास है ज्येष्ठ महीना वैदिक पंचांग के अनुसार साल 2026 में अधिक मास पड़ने की वजह से दो ज्येष्ठ माह का संयोग बन रहा है। सनातन धर्म में अधिक मास को बेहद पुण्यदायी माना जाता है। इस विशेष संयोग के चलते इस बार भक्तों को एक नहीं बल्कि चार प्रमुख एकादशी व्रत करने का अवसर मिलेगा। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। 17 मई से अधिक मास की शुरुआत होगी और इसी दौरान अपरा, पद्मिनी, परमा और निर्जला एकादशी के व्रत किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। ज्येष्ठ माह में कब-कब पड़ेगी एकादशी? इस बार ज्येष्ठ और अधिक ज्येष्ठ मास के दौरान कुल चार एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। इनमें अपरा एकादशी, पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी और निर्जला एकादशी शामिल हैं। अपरा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026 को रखा जाएगा। एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। पद्मिनी एकादशी 2026: दुर्लभ व्रत का महत्व पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह व्रत अधिक मास में आने वाली विशेष एकादशी मानी जाती है। तिथि प्रारंभ: 26 मई सुबह 5:10 बजे तिथि समाप्त: 27 मई सुबह 6:21 बजे पारण समय: सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे तक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। परमा एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत? परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। तिथि प्रारंभ: 11 जून रात 12:57 बजे तिथि समाप्त: 11 जून रात 10:36 बजे पारण समय: सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे तक धर्म ग्रंथों में परमा एकादशी को मोक्षदायिनी और विशेष पुण्य देने वाली एकादशी बताया गया है। निर्जला एकादशी 2026: साल की सबसे कठिन एकादशी निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को पड़ेगी। इसे सबसे कठिन लेकिन सबसे फलदायी एकादशी माना जाता है क्योंकि इस व्रत में जल ग्रहण भी नहीं किया जाता। तिथि प्रारंभ: 24 जून शाम 6:12 बजे तिथि समाप्त: 25 जून रात 8:09 बजे पारण समय: 26 जून सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे तक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता क्या कहती है? हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ दिनों में गिना जाता है। भक्त इस दिन उपवास रखकर पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से एकादशी व्रत करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
11 मई 2026, सोमवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष चाल के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि सुबह 10:12 बजे तक रहेगी, इसके बाद दशमी तिथि आरंभ होगी। सबसे खास बात यह है कि आज मंगल का मेष राशि में गोचर हो रहा है, जहां पहले से सूर्य और बुध मौजूद हैं। इस त्रिग्रही योग का असर सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा। चंद्रमा आज कुंभ राशि में राहु के साथ युति बना रहे हैं, जिससे कई लोगों को मानसिक तनाव और अस्थिरता महसूस हो सकती है। वहीं शुक्र वृषभ राशि में और गुरु मिथुन राशि में रहकर सुख, ज्ञान और आर्थिक लाभ के संकेत दे रहे हैं। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है। मेष राशि आज का दिन ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी और अधिकारी आपके फैसलों की सराहना करेंगे। आर्थिक लाभ के अच्छे योग बन रहे हैं। हालांकि गुस्से पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा, वरना रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। स्वास्थ्य के मामले में सिरदर्द या ब्लड प्रेशर की समस्या परेशान कर सकती है। वृषभ राशि करियर के लिहाज से दिन अच्छा रहेगा, लेकिन खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। विदेश से जुड़े कामों में सफलता मिलने के संकेत हैं। परिवार और वैवाहिक जीवन में संतुलन बना रहेगा। निवेश करने से पहले सोच-विचार जरूर करें। मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है, लेकिन उसका परिणाम भी सकारात्मक मिलेगा। मिथुन राशि भाग्य आज आपका पूरा साथ देगा। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और आय के नए स्रोत खुलने की संभावना है। व्यापार और नौकरी दोनों में लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए दिन शुभ है और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। कर्क राशि आज मानसिक तनाव और अनजाना डर परेशान कर सकता है, लेकिन करियर में उन्नति के योग बन रहे हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में राहत मिलेगी। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और विवादों से दूर रहें। सिंह राशि भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। लंबी यात्रा लाभदायक साबित हो सकती है। व्यापारिक साझेदारी में फायदा होगा और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। हालांकि किसी भी बड़े फैसले से पहले अनुभवी लोगों की सलाह जरूर लें। कन्या राशि आज सतर्क रहने की जरूरत है। अचानक धन हानि या दुर्घटना की आशंका बन सकती है। शत्रुओं पर विजय मिलेगी, लेकिन मानसिक तनाव बना रह सकता है। खान-पान का विशेष ध्यान रखें। योग और ध्यान आपके लिए लाभकारी साबित होगा। तुला राशि प्रेम और रचनात्मकता के लिहाज से दिन शानदार रहेगा। संतान से जुड़ी कोई खुशखबरी मिल सकती है। व्यापार में लाभ के संकेत हैं और नए अनुबंध मिल सकते हैं। कला, लेखन और मीडिया से जुड़े लोगों को नई पहचान मिलने की संभावना है। भावनाओं में बहकर आर्थिक फैसले न लें। वृश्चिक राशि घर-परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और किसी शुभ कार्य की योजना बन सकती है। संपत्ति खरीदने के लिए दिन अनुकूल है। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। धनु राशि आज आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होगी। छोटे भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। पुराने निवेश से लाभ हो सकता है। प्रेम संबंध मजबूत होंगे और व्यापार में उन्नति के योग बन रहे हैं। नई योजनाओं की शुरुआत के लिए समय अनुकूल है। मकर राशि आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और धन संचय करने में सफलता मिलेगी। परिवार में किसी बात को लेकर विवाद हो सकता है, इसलिए संयम रखें। भूमि और वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। व्यापार में निवेश फायदेमंद साबित हो सकता है। आंखों से जुड़ी समस्या को नजरअंदाज न करें। कुंभ राशि आज आत्मविश्वास बढ़ा हुआ रहेगा और समाज में मान-सम्मान मिलेगा। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि मानसिक रूप से थोड़ी बेचैनी बनी रह सकती है। दोस्तों के साथ समय बिताने से राहत मिलेगी। खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। मीन राशि आज का दिन आध्यात्मिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाएगा। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिलेंगी। परिवार का सहयोग मिलेगा और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन नींद पूरी लें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।