शिक्षा

जम्मू में नौवीं की NCERT किताबों का संकट बरकरार, सोशल स्टडीज और मैथ्स की पुस्तकें अब भी गायब

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
NCERT
NCERT Book

श्रीनगर, एजेंसियां।  नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के कई महीने बाद भी जम्मू में नौवीं कक्षा की एनसीईआरटी (NCERT) की सभी किताबें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल दोबारा खुल चुके हैं और पढ़ाई नियमित रूप से शुरू हो गई है, लेकिन सोशल स्टडीज और गणित की कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकें अब भी बाजार से नदारद हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

 

कुछ विषयों की किताबें उपलब्ध, लेकिन जरूरी पुस्तकें अब भी नहीं


जम्मू शहर के विभिन्न बुक स्टोर्स पर पहले की तुलना में स्थिति में सुधार जरूर आया है। नौवीं कक्षा के अधिकांश विषयों की किताबें अब उपलब्ध हैं, लेकिन सोशल स्टडीज पार्ट-1, सोशल स्टडीज पार्ट-2 और मैथ्स पार्ट-2 की पुस्तकें अभी भी अधिकांश दुकानों पर नहीं मिल रही हैं। इन किताबों की कमी के कारण छात्रों को पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

 

सिलेबस में बदलाव बना बड़ी वजह


इस वर्ष एनसीईआरटी ने नौवीं कक्षा के लगभग सभी विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। नए सिलेबस के अनुरूप नई किताबें जारी की गईं, जिसके चलते अप्रैल और मई में अधिकांश विषयों की पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं थीं। हालांकि समय के साथ कई किताबों की आपूर्ति सामान्य हुई है, लेकिन कुछ प्रमुख विषयों की पुस्तकें अब भी पर्याप्त संख्या में नहीं पहुंच पाई हैं।

 

खाली हाथ लौट रहे अभिभावक


बुक स्टोर्स पर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों के लिए किताबें खरीदने पहुंच रहे हैं, लेकिन जरूरी किताबें उपलब्ध नहीं होने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। कई दुकानदार अभिभावकों का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर रहे हैं ताकि नई खेप आने पर उन्हें सूचना दी जा सके।

 

शिक्षा सत्र आगे बढ़ने के साथ किताबों की कमी छात्रों की पढ़ाई पर असर डाल रही है। अभिभावकों का कहना है कि समय पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से बच्चों को नए सिलेबस के अनुसार पढ़ाई करने में परेशानी हो रही है। ऐसे में जल्द से जल्द सभी विषयों की किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की मांग तेज हो गई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड की यूनिवर्सिटियों में बड़ा बदलाव: कुलपतियों के अधिकार सीमित, नियुक्ति और खरीद प्रक्रिया होगी पूरी तरह पारदर्शी

रांची। झारखंड सरकार राज्य के विश्वविद्यालयों की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत कुलपतियों (वीसी) के कई महत्वपूर्ण अधिकार सीमित कर दिए जाएंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कुलपति चपरासी तक की नियुक्ति नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में होने वाली खरीद, टेंडर और आउटसोर्सिंग की पूरी प्रक्रिया भी एक समान नियमों के तहत संचालित होगी।   राज्य सरकार ने 'स्टैच्यूट्स फॉर फाइनेंस एंड अकाउंट मैनेजमेंट इन स्टेट यूनिवर्सिटीज ऑफ झारखंड-2026' का मसौदा तैयार किया है। पहली बार सभी राज्य विश्वविद्यालयों के लिए अलग प्रोक्योरमेंट मैनुअल और मैनपावर प्रोक्योरमेंट (आउटसोर्सिंग) मैनुअल बनाया गया है। इसका उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना, अनियमितताओं पर रोक लगाना और सभी विश्वविद्यालयों में एक जैसी व्यवस्था लागू करना है।   कुलपतियों के अधिकारों में होगी बड़ी कटौती   वर्तमान व्यवस्था में कुलपतियों को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी नियुक्ति करने का अधिकार प्राप्त है। वे विश्वविद्यालय मुख्यालय और अंगीभूत कॉलेजों में संविदा पर नियुक्तियां कर सकते हैं तथा कई प्रशासनिक और वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी भी देते हैं। इसके अलावा सूचीबद्ध एजेंसियों के अलावा अन्य एजेंसियों को भी आउटसोर्सिंग का काम देने और भवन निर्माण, मरम्मत व विकास कार्यों के लिए राशि स्वीकृत करने का अधिकार उनके पास होता है।   नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित नियमों के दायरे में लाया जाएगा। नियुक्ति, आउटसोर्सिंग और वित्तीय फैसले तय प्रक्रिया के अनुसार ही लिए जा सकेंगे।   खरीद और आउटसोर्सिंग के लिए बनेगा डिजिटल सिस्टम नए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों की बहाली के लिए मैनपावर प्रोक्योरमेंट मैनुअल लागू किया जाएगा। वहीं कंप्यूटर, लैब उपकरण, फर्नीचर, पुस्तकें, वाहन या अन्य सामग्री की खरीद के लिए अलग प्रोक्योरमेंट मैनुअल होगा।   सुरक्षा गार्ड, सफाईकर्मी, डेटा एंट्री ऑपरेटर और तकनीकी कर्मचारियों जैसी सभी आउटसोर्सिंग सेवाओं के लिए एजेंसियों का चयन केवल राज्य सरकार के अधिकृत ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल या निर्धारित आउटसोर्सिंग प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। किसी एजेंसी को सीधे काम देने की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।   हर खरीद और भुगतान का रहेगा डिजिटल रिकॉर्ड नई व्यवस्था के तहत किसी भी सामग्री की खरीद से पहले उसकी आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। इसके बाद प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति, निविदा, तकनीकी मूल्यांकन, आपूर्ति, गुणवत्ता जांच और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज होगी।   साथ ही संबंधित अधिकारी को यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि सामान या सेवा वास्तव में प्राप्त हुई है। इसके बाद ही भुगतान जारी किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से फर्जी आपूर्ति, बिना काम के भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे विश्वविद्यालयों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगी।

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CBSE कक्षा 10 सेकेंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जल्द, लाखों छात्रों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कक्षा 10 की सेकेंड बोर्ड परीक्षा (फेज-2) का परिणाम जल्द जारी कर सकता है। हालांकि बोर्ड ने अभी तक रिजल्ट की आधिकारिक तारीख और समय की घोषणा नहीं की है। छह लाख से अधिक छात्र अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।   जल्द जारी हो सकता है रिजल्ट   मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE किसी भी समय सेकेंड बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित कर सकता है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपना स्कोरकार्ड CBSE की आधिकारिक वेबसाइट, DigiLocker और UMANG ऐप के माध्यम से देख सकेंगे।   'बेटर मार्क्स रूल' से छात्रों को मिलेगा फायदा   इस वर्ष लागू नई व्यवस्था के तहत यदि किसी छात्र ने दोनों बोर्ड परीक्षाओं में हिस्सा लिया है, तो जिस विषय में अधिक अंक होंगे, वही अंतिम परिणाम में जोड़े जाएंगे। इससे छात्रों को अपने प्रदर्शन में सुधार का बेहतर अवसर मिलेगा।   मार्कशीट पर नहीं होगा 'कंपार्टमेंट' का उल्लेख   CBSE ने स्पष्ट किया है कि सेकेंड बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों के पास प्रमाणपत्र या अंतिम मार्कशीट पर 'कंपार्टमेंट' का उल्लेख नहीं किया जाएगा। इससे कक्षा 11 में प्रवेश या आगे की पढ़ाई पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।   अभिभावकों और कर्मचारियों को सलाह   बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे रिजल्ट से जुड़ी किसी भी अपुष्ट जानकारी या सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर भरोसा न करें। केवल CBSE के आधिकारिक पोर्टल पर जारी सूचना को ही सही माना जाए।

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CBSE ने तीन-भाषा नीति पर जारी किए नए दिशा-निर्देश, मौजूदा कक्षा 10 के छात्रों को बड़ी राहत

नई दिल्ली, एजेंसियां। Central Board of Secondary Education (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तीन-भाषा नीति को लागू करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान कक्षा 10 (2026 बोर्ड बैच) के छात्रों पर नया नियम लागू नहीं होगा, ताकि उनकी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो सके।   छात्रों को क्या राहत मिली?   CBSE ने कहा है कि जो छात्र अभी कक्षा 10 में हैं, उन्हें बीच सत्र में भाषा बदलने या तीसरी भाषा का नया नियम अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यह फैसला छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।   कक्षा 7 से 9 के लिए भी मिली राहत   बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 7, 8 और 9 के वर्तमान छात्रों को भी सत्र के बीच में अपनी भाषा बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी मौजूदा भाषा व्यवस्था जारी रख सकेंगे और उन्हें तत्काल बदलाव नहीं करना होगा।   नई नीति का उद्देश्य   CBSE के अनुसार, तीन-भाषा नीति का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी दक्षता विकसित करना है। नई व्यवस्था के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन प्रोत्साहित किया जाएगा, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि किसी छात्र को नुकसान न हो।   स्कूलों को दिए गए निर्देश   बोर्ड ने संबद्ध स्कूलों से कहा है कि वे नई भाषा नीति को लागू करते समय छात्रों के हितों का विशेष ध्यान रखें और किसी भी छात्र को बीच सत्र में भाषा बदलने के लिए मजबूर न करें। विस्तृत क्रियान्वयन संबंधी दिशा-निर्देश स्कूलों को अलग से उपलब्ध कराए गए हैं।

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