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Divyanka Sirohi passes away at 30

हरियाणवी एक्ट्रेस दिव्यांका सिरोही की अचानक मौत से सदमे में फैंस, पुराना पोस्ट बना चर्चा का केंद्र

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Haryanvi actress Divyanka Sirohi smiling in traditional attire, viral post resurfaces after sudden death
Divyanka Sirohi Death News Viral Post

 

हरियाणवी फिल्म इंडस्ट्री की उभरती अभिनेत्री दिव्यांका सिरोही की अचानक मौत ने फैंस और परिवार दोनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। महज 30 साल की उम्र में उनका यूं अचानक दुनिया से चले जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।

वायरल हुआ पुराना पोस्ट, फैंस हुए भावुक

दिव्यांका की मौत के बाद उनका साल 2023 का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में उन्होंने नीली जैकेट और पगड़ी पहने तस्वीर साझा करते हुए लिखा था–“शिव मुझे अपने साथ ले चलो।”

यह पोस्ट उनके प्रोफाइल पर पिन था, जिसके कारण अब फैंस इसे उनका आखिरी संदेश मान रहे हैं। इस पोस्ट को देखकर कई लोग भावुक हो गए हैं और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में हुई मौत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 अप्रैल को दिव्यांका अपने घर पर थीं, जब अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। वह बेहोश होकर गिर पड़ीं, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

प्रारंभिक तौर पर हार्ट अटैक को मौत की वजह माना जा रहा है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

परिवार ने बताई उस दिन की पूरी कहानी

परिवार के मुताबिक, जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन दिव्यांका पूरी तरह सामान्य थीं। उन्होंने अपने भाई के साथ खाना भी खाया था।

हालांकि, उन्होंने हल्की तबीयत खराब होने की बात कही थी। इसके बाद उनका भाई काम से बाहर चला गया और दिव्यांका घर पर अकेली थीं। जब परिवार के अन्य सदस्य लौटे, तो उन्होंने दिव्यांका को मृत अवस्था में पाया।

परिजनों ने यह भी बताया कि उनका शरीर अकड़ा हुआ था और हल्की सूजन भी दिखाई दे रही थी।

फैंस के मन में उठे सवाल

दिव्यांका की अचानक मौत के बाद सोशल मीडिया पर फैंस कई सवाल उठा रहे हैं, खासकर कम उम्र में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों को लेकर। कई लोगों ने इसे चिंताजनक ट्रेंड बताया है और इसकी वजह जानने की मांग की है।

कौन थीं दिव्यांका सिरोही?

दिव्यांका सिरोही का जन्म 1996 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुआ था। उन्होंने बीसीए की पढ़ाई की, लेकिन बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TikTok पर उनके वीडियोज वायरल होने के बाद उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने हरियाणवी फिल्मों और म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा और तेजी से लोकप्रियता हासिल की।

उनकी असामयिक मौत ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरी इंडस्ट्री को झकझोर कर रख दिया है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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मनोज बाजपेयी की 'गवर्नर' को मिला शानदार रिस्पॉन्स, X पर फैंस बोले- देसी धुरंधर

मुंबई, एजेंसियां। मनोज बाजपेयी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' सिनेमाघरों में रिलीज होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। वास्तविक घटनाओं से प्रेरित यह राजनीतिक और वित्तीय थ्रिलर भारत के 1990 के दशक के आर्थिक संकट और उससे देश को उबारने में भारतीय रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर की भूमिका को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।   मनोज बाजपेयी की दमदार एक्टिंग ने जीता दिल फिल्म में मनोज बाजपेयी के अभिनय की दर्शक खुलकर सराहना कर रहे हैं। एक यूजर ने फिल्म को "देसी धुरंधर" बताते हुए लिखा कि मनोज बाजपेयी ने अपने शानदार प्रदर्शन से किरदार में जान डाल दी है। कई दर्शकों का कहना है कि यह फिल्म इतिहास, नेतृत्व और एक गुमनाम नायक की प्रेरणादायक कहानी को प्रभावशाली तरीके से सामने लाती है। वहीं कुछ लोगों ने निर्देशक चिन्मय डी. मंडलेकर और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की विषय चयन की भी प्रशंसा की है।   मार्केटिंग पर उठे सवाल जहां फिल्म की कहानी और अभिनय को सराहा जा रहा है, वहीं कुछ दर्शकों ने इसकी मार्केटिंग रणनीति पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि बेहतर प्रचार-प्रसार नहीं होने की वजह से फिल्म को रिलीज से पहले वह चर्चा नहीं मिल सकी, जिसकी वह हकदार थी। हालांकि दर्शकों का मानना है कि मजबूत कंटेंट के दम पर फिल्म अपनी पहचान बनाने में सफल हो सकती है।   कम चर्चित नायक की कहानी पर आधारित है फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर एस. वेंकिटारमनन के जीवन और 1990 के आर्थिक संकट के दौरान उनके नेतृत्व पर आधारित है। फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ अदा शर्मा, मधु और नौशाद मोहम्मद कुंजू भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह ने किया है। दर्शकों का मानना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक थ्रिलर नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण और कम चर्चित अध्याय को समझने का अवसर भी है।

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'Welcome To The Jungle' का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज, कॉमेडी का लगेगा फुल डोज

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CBFC का बड़ा फैसला: ‘भारत भाग्य विधाता’ समेत 3 फिल्मों को मिला Zero Cut सर्टिफिकेट

मुंबई, एजेंसियां। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने इस सप्ताह फिल्म इंडस्ट्री को बड़ा सरप्राइज दिया है। हाल के दिनों में कई फिल्मों में कटौती को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे बोर्ड ने तीन प्रमुख फिल्मों को बिना किसी कट या बदलाव के सर्टिफिकेट जारी किया है। इनमें कंगना रनौत की बहुचर्चित फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’, विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म ‘हॉन्टेड – इकोज़ ऑफ द पास्ट’ और हॉलीवुड साइकोलॉजिकल हॉरर फिल्म ‘बैकरूम्स’ शामिल हैं।   ‘भारत भाग्य विधाता’ को मिला U/A 16+ सर्टिफिकेट 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित कंगना रनौत की थ्रिलर फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को CBFC ने U/A 16+ रेटिंग के साथ मंजूरी दी है। संवेदनशील और हिंसात्मक विषय होने के बावजूद फिल्म में किसी भी दृश्य या संवाद पर कैंची नहीं चलाई गई। फिल्म का रनटाइम लगभग 2 घंटे 7 मिनट (127 मिनट) है और यह 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।   विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म भी बिना कट पास विक्रम भट्ट की 3D हॉरर फिल्म ‘हॉन्टेड – इकोज़ ऑफ द पास्ट’ को भी बिना किसी कट के ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है। फिल्म में मिमोह चक्रवर्ती मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। आमतौर पर हॉरर फिल्मों में डरावने या संवेदनशील दृश्यों पर सेंसर बोर्ड आपत्तियां जताता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। फिल्म का रनटाइम 2 घंटे 19 मिनट है।   हॉलीवुड फिल्म ‘बैकरूम्स’ को भी मिली क्लीन चिट साइ-फाई साइकोलॉजिकल हॉरर फिल्म ‘बैकरूम्स’ को भी CBFC ने बिना किसी कट के ‘A’ रेटिंग दी है। करीब 1 घंटा 51 मिनट लंबी इस फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही उत्साह बना हुआ है।   फिल्मकारों और दर्शकों को सकारात्मक संदेश विशेषज्ञों का मानना है कि CBFC का यह कदम फिल्मकारों और दर्शकों के साथ बने तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। इन फिल्मों को मूल स्वरूप में रिलीज की अनुमति देकर बोर्ड ने रचनात्मक स्वतंत्रता के प्रति अधिक संतुलित और उदार दृष्टिकोण अपनाने का संकेत दिया है।

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नई दिल्ली: राम चरण और जाह्नवी कपूर अभिनीत स्पोर्ट्स एक्शन ड्रामा फिल्म 'पेड्डी' बॉक्स ऑफिस पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। शुरुआती दिनों में जोरदार कमाई करने के बाद फिल्म सप्ताह के सामान्य दिनों में भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल रही है। सातवें दिन फिल्म ने 7.55 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया। भारत में 187 करोड़ रुपये के पार पहुंची कमाई ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, सात दिनों में 'पेड्डी' का कुल भारतीय नेट कलेक्शन 187.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 222.53 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। दर्शकों के लगातार मिल रहे समर्थन के कारण फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मजबूती से बनी हुई है। विदेशों में भी दिखा राम चरण का जलवा फिल्म को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। सातवें दिन ओवरसीज मार्केट से फिल्म ने लगभग 80 लाख रुपये की कमाई की। इसके साथ ही विदेशों में फिल्म का कुल कारोबार 48.80 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। दुनियाभर में 'पेड्डी' की कुल कमाई अब 271.33 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है। तेलुगु वर्जन बना सबसे बड़ी ताकत फिल्म के तेलुगु संस्करण को सबसे अधिक दर्शक मिल रहे हैं। सोमवार को तेलुगु भाषा में फिल्म की औसत ऑक्यूपेंसी 21 प्रतिशत से अधिक रही। शाम के शो में दर्शकों की संख्या और बेहतर देखने को मिली। वहीं, हिंदी संस्करण को भी अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, हालांकि इसकी कमाई तेलुगु बाजार से कम रही। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से मिला सबसे ज्यादा समर्थन राज्यवार आंकड़ों में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने फिल्म की कमाई में सबसे बड़ा योगदान दिया है। इसके अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु और देश के अन्य हिस्सों से भी फिल्म को अच्छा समर्थन मिला है। आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है कमाई फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की राय मिश्रित रही है, लेकिन राम चरण की लोकप्रियता और दमदार एक्शन दृश्यों ने दर्शकों को प्रभावित किया है। फिलहाल बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ी नई फिल्म रिलीज नहीं हुई है, ऐसे में 'पेड्डी' के पास अपनी कमाई बढ़ाने का अच्छा अवसर है।  

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राजनीति

तमिलनाडु बीजेपी में बढ़ी टूट, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

Deepshikha जून 6, 2026 0

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