मुंबई,एजेंसियां। भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री आम्रपाली दुबे इन दिनों रियलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' को लेकर चर्चा में हैं। शो के दौरान उन्होंने अपनी निजी जिंदगी, करियर और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बातचीत की। इसी दौरान आम्रपाली ने अपनी एक बड़ी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वह जीवन में कभी मां बनने का अनुभव करना चाहती हैं। उनकी इस बात पर परिवार की प्रतिक्रिया ने भावुक माहौल बना दिया। परिवार की बात सुनकर भावुक हुईं आम्रपाली शो में बातचीत के दौरान आम्रपाली दुबे ने बताया कि परिवार के साथ रिश्ते उनके लिए बेहद खास हैं। जब उन्होंने मां बनने की इच्छा के बारे में बात की तो परिवार के सदस्यों की भावनात्मक प्रतिक्रिया ने उन्हें काफी प्रभावित किया। इस पल ने शो में मौजूद लोगों और दर्शकों का भी ध्यान खींचा। करियर के साथ निजी जिंदगी पर भी खुलकर बोलीं अभिनेत्री आम्रपाली दुबे ने हमेशा अपने करियर को प्राथमिकता दी है और भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि, इस बार उन्होंने पहली बार अपनी निजी जिंदगी की इच्छाओं और भावनाओं को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जिंदगी में परिवार और रिश्तों की अपनी अलग अहमियत होती है। 'भोजपुरी बवाल' में सितारों की निजी जिंदगी पर चर्चा रियलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' में भोजपुरी इंडस्ट्री के कई बड़े कलाकार अपनी जिंदगी से जुड़े अनुभव साझा कर रहे हैं। आम्रपाली दुबे के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर भी उनके फैंस लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं और अभिनेत्री की भावनाओं को समझते हुए उनका समर्थन कर रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। भोजपुरी इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री काजल राघवानी इन दिनों रियलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' को लेकर सुर्खियों में हैं। शो के दौरान उन्होंने अपने करियर के पुराने विवादों और मुश्किल दौर को याद करते हुए कहा कि कई बार इंडस्ट्री में कलाकारों की स्थिति ऐसी होती है जहां बड़े सितारों के सामने अपनी बात रखना आसान नहीं होता। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा- "हीरो के सामने किसी की चलती है क्या?" पुराने विवादों पर छलका दर्द काजल राघवानी ने बातचीत के दौरान अपने पुराने विवादों का जिक्र किया और बताया कि भोजपुरी इंडस्ट्री में कई बार कलाकारों को परिस्थितियों के अनुसार समझौते करने पड़ते हैं। हालांकि उन्होंने किसी एक व्यक्ति का नाम लेकर सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन उनके बयान को इंडस्ट्री में पहले से चले आ रहे विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है। 'भोजपुरी बवाल' में सितारों की निजी जिंदगी पर चर्चा 'भोजपुरी बवाल' में भोजपुरी सिनेमा के कई बड़े चेहरे नजर आ रहे हैं, जिनमें पवन सिंह, दिनेश लाल यादव (निरहुआ), आम्रपाली दुबे और काजल राघवानी जैसे कलाकार शामिल हैं। शो में कलाकार अपनी निजी जिंदगी, संघर्ष और करियर से जुड़े अनुभव साझा कर रहे हैं, जिसके कारण यह शो लगातार चर्चा में बना हुआ है। बयान के बाद सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा काजल राघवानी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर फैंस के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं, जबकि कुछ दर्शक इसे भोजपुरी इंडस्ट्री के पुराने विवादों से जोड़कर देख रहे हैं।
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता Khesari Lal Yadav और अभिनेत्री Anjana Singh से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में गीतकार Akhilesh Kashyap के बयान के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई। इसके जवाब में अंजना सिंह ने इंस्टाग्राम लाइव के दौरान कई तीखी बातें कहीं और पुराने घटनाक्रम का भी जिक्र किया, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। अखिलेश कश्यप के बयान पर अंजना सिंह का पलटवार कुछ समय पहले अखिलेश कश्यप ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए अंजना सिंह पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि यदि उन्होंने "पोल खोल दी" तो काफी चर्चा होगी। साथ ही उन्होंने लखनऊ आने की बात भी कही थी। इन बयानों के बाद अंजना सिंह ने लाइव आकर अखिलेश कश्यप को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें डराने या दबाव बनाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए और यदि जरूरत पड़ी तो वह भी कई पुराने मामलों का खुलासा कर सकती हैं। पुराने घटनाक्रम का किया जिक्र लाइव वीडियो के दौरान अंजना सिंह ने दावा किया कि अतीत में एक ऐसी घटना हुई थी, जब खेसारी लाल यादव अपनी पत्नी के पहुंचने पर एक अभिनेत्री के साथ मौजूद थे। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया और न ही खेसारी लाल यादव की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सोशल मीडिया पोस्ट में भी साधा निशाना अंजना सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कई पोस्ट साझा करते हुए बिना सीधे नाम लिए एक "कंट्रोवर्सी स्टार" पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाद खड़ा कर सुर्खियां बटोरने की कोशिश की जा रही है और नए गानों के प्रमोशन के लिए विवादों का सहारा लिया जाता है। उन्होंने यह भी लिखा कि संबंधित कलाकार के गानों और फिल्मों को पहले जैसी सफलता नहीं मिल रही है। हालांकि, पोस्ट में किसी का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया गया। अभी तक नहीं आया खेसारी लाल यादव का जवाब इस पूरे विवाद पर खेसारी लाल यादव की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक लगातार अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। जब तक किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण या ठोस साक्ष्य सामने नहीं आते, तब तक इन दावों को केवल सार्वजनिक आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में एक नया विवाद चर्चा का विषय बन गया है। गीतकार और लेखक अखिलेश कश्यप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री अंजना सिंह को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव के करीबी माने जाने वाले अखिलेश कश्यप के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। 'अगर पोल खोल दी तो काफी चर्चा हो जाएगी' अखिलेश कश्यप ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो वीडियो साझा किए हैं। पहले वीडियो में उन्होंने बिना किसी का नाम लिए नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कुछ लोग लगातार उनसे जवाब देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता। इसके बाद दूसरे वीडियो में उन्होंने कहा कि, "अगर मैंने पोल खोल दी तो फ्री में ही काफी चर्चा हो जाएगी।" साथ ही उन्होंने लखनऊ आने का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कुछ दिखाने की बात भी कही। हालांकि, इन बयानों में उन्होंने किसी आरोप के समर्थन में कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया है और न ही विवाद के पूरे कारण का खुलासा किया है। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चाएं अखिलेश कश्यप के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स उनके बयान पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल इस मामले पर अभिनेत्री अंजना सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कौन हैं अंजना सिंह? अंजना सिंह भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने कम उम्र में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की और शुरुआती वर्षों में ही कई फिल्मों में अभिनय कर अपनी पहचान बना ली। उन्होंने अपने करियर में दिनेश लाल यादव 'निरहुआ', पवन सिंह, रवि किशन समेत भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारों के साथ काम किया है। उनकी चर्चित फिल्मों में दिल ले गई ओढ़नियावाली, दिलदार सांवरिया, बिहारी रिक्शावाला, सांकी दरोगा, नागराज और खून भरी हमार मांग जैसी फिल्में शामिल हैं। निजी जीवन भी रहा चर्चा में अंजना सिंह ने वर्ष 2013 में अभिनेता यश कुमार मिश्रा से विवाह किया था। बाद में दोनों ने वर्ष 2018 में आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। दोनों की एक बेटी भी है। फिलहाल अखिलेश कश्यप के वायरल वीडियो और अंजना सिंह को लेकर दिए गए बयान चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि, पूरे विवाद को लेकर दोनों पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
पटना,एजेंसियां। भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव इन दिनों किसी फिल्म या गाने नहीं, बल्कि अपने बेटे ऋषभ यादव की वजह से सुर्खियों में हैं। महज 11 साल की उम्र में ऋषभ ने अपनी कमाई से एक नई बुलेट बाइक खरीदकर अपने पिता को गिफ्ट की है। इस खास पल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे फैंस खूब पसंद कर रहे हैं और पिता-पुत्र की इस खूबसूरत बॉन्डिंग की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वीडियो में दिखा भावुक कर देने वाला पल वायरल वीडियो में खेसारी लाल यादव अपने बेटे के साथ नई बुलेट बाइक के पास खड़े नजर आते हैं। इस दौरान उन्होंने बताया कि बाइक ऋषभ ने अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी है और उन्हें उपहार में दी है। खेसारी ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह उनके बेटे का प्यार है और वह चाहते हैं कि लोग ऋषभ को खूब आशीर्वाद दें, ताकि वह आगे और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब फैंस का प्यार मिला तो बेटा आगे चलकर फॉर्च्यूनर भी खरीद लेगा। व्लॉगिंग से कर रहे हैं अच्छी कमाई कम उम्र में ही ऋषभ यादव सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो चुके हैं। उनके व्लॉग्स को लाखों लोग देखते हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। इसी के जरिए वह अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। उनके वीडियो में कई बार खेसारी लाल यादव और परिवार के अन्य सदस्य भी नजर आते हैं, जिससे दर्शकों का जुड़ाव और बढ़ जाता है। फिल्मों में भी रख चुके हैं कदम सोशल मीडिया के अलावा ऋषभ अभिनय की दुनिया में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने भोजपुरी फिल्म 'रंग दे बसंती' से अभिनय की शुरुआत की थी, जिसमें उनके पिता खेसारी लाल यादव मुख्य भूमिका में थे। कम उम्र में ही डिजिटल प्लेटफॉर्म और फिल्मों में सक्रिय ऋषभ लगातार अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। पिता को अपनी कमाई से बुलेट गिफ्ट करने के बाद वह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं और फैंस उनके इस कदम को मेहनत, संस्कार और पारिवारिक प्रेम का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। भोजपुरी अभिनेत्री संभावना सेठ और उनके पति अविनाश दवेदी के घर आखिरकार खुशियों ने दस्तक दे दी है। शादी के 10 साल बाद यह कपल जुड़वा बच्चों के माता-पिता बना है। 4 जून को संभावना ने सोशल मीडिया के जरिए यह खुशखबरी अपने प्रशंसकों के साथ साझा की। कपल ने बताया कि उन्होंने सरोगेसी के माध्यम से जुड़वा बच्चों का स्वागत किया है। इस खास मौके पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों में अस्पताल के भावुक पल भी देखने को मिले। डिलीवरी के दौरान संभावना की आंखें नम हो गईं, जबकि अविनाश उन्हें संभालते नजर आए। एक तस्वीर में दोनों अपने नवजात बच्चों के साथ बेहद खुश दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर साझा की खुशखबरी अपने पोस्ट के कैप्शन में संभावना और अविनाश ने लिखा, “इस साल महा दिवाली जल्दी आ गई। लक्ष्मी और गणेश दोनों घर आ गए। हमारा हृदय कृतज्ञता से भरा है। हर हर महादेव।” इस भावुक संदेश ने फैंस का दिल जीत लिया। सेलेब्स ने दी शुभकामनाएं खुशखबरी सामने आते ही मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने कपल को बधाई दी। सुनीता आहूजा, गौहर खान, उर्फी जावेद, अक्षरा सिंह और पाखी हेगड़े समेत कई सितारों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। संघर्ष से सफलता तक का सफर संभावना सेठ लंबे समय से मां बनने की अपनी इच्छा और फर्टिलिटी से जुड़ी चुनौतियों के बारे में खुलकर बात करती रही हैं। उन्होंने अपने व्लॉग्स और सोशल मीडिया के माध्यम से इस सफर के कई उतार-चढ़ाव साझा किए थे। अब वर्षों के इंतजार के बाद उनके घर आई यह खुशी उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है। फैंस भी इस नए सफर के लिए कपल को लगातार बधाइयां दे रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।