जून 2026 सिनेप्रेमियों के लिए किसी फिल्मी त्योहार से कम नहीं होने वाला है। इस महीने बड़े सितारों और बहुप्रतीक्षित फिल्मों का ऐसा लाइनअप तैयार है, जो हर हफ्ते दर्शकों को थिएटर तक खींचने की पूरी क्षमता रखता है। एक्शन, रोमांस, इमोशनल ड्रामा और कॉमेडी—हर जॉनर की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार हैं।
जून की शुरुआत 4 जून को रिलीज होने वाली Toxic: A Fairy Tale for Grownups से होगी। इस फिल्म में Yash लीड रोल में नजर आएंगे। पहले यह फिल्म मार्च में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसे जून में शिफ्ट किया गया है। फिल्म में Kiara Advani, Nayanthara, Huma Qureshi और Tara Sutaria जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। यह एक स्टाइलिश पीरियड गैंगस्टर ड्रामा बताया जा रहा है, जो दर्शकों को नया सिनेमाई अनुभव देगा।
19 जून को रिलीज होगी Cocktail 2, जिसमें Shahid Kapoor, Kriti Sanon और Rashmika Mandanna की फ्रेश केमिस्ट्री देखने को मिलेगी। Homi Adajania के निर्देशन में बनी यह फिल्म आधुनिक रिश्तों और इमोशंस की कहानी को नए अंदाज में पेश करेगी।
12 जून को रिलीज होने वाली Main Wapas Aaunga को Imtiaz Ali ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में Diljit Dosanjh, Naseeruddin Shah, Vedang Raina और Sharvari Wagh मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी प्रेम, जुदाई और भावनात्मक संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का वादा करती है।
महीने के अंत में 26 जून को रिलीज होगी Welcome to the Jungle। इस मल्टीस्टारर फिल्म में Akshay Kumar, Sanjay Dutt, Suniel Shetty, Arshad Warsi और Paresh Rawal जैसे दिग्गज नजर आएंगे। Ahmed Khan के निर्देशन में बनी यह फिल्म दर्शकों को भरपूर हंसी का डोज देने वाली है।
जून 2026 की खासियत यह है कि हर हफ्ते अलग जॉनर की फिल्म रिलीज हो रही है। इससे न केवल दर्शकों के पास विकल्प बढ़ेंगे, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। बड़े सितारों की मौजूदगी और विविध कंटेंट इस महीने को साल के सबसे अहम सिनेमाई फेज में बदल सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। दिग्गज निर्देशक मणिरत्नम की आगामी फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। फिल्म के सेट से कुछ तस्वीरें लीक हुई हैं, जिनमें अभिनेता विजय सेतुपति और अभिनेत्री साई पल्लवी साथ शूटिंग करते नजर आ रहे हैं। तस्वीरें सामने आते ही फैंस में फिल्म को लेकर उत्साह बढ़ गया है। कोलकाता के हावड़ा ब्रिज पर शूट हुआ गाना लीक हुई तस्वीरों को कोलकाता के मशहूर हावड़ा ब्रिज की बताया जा रहा है, जहां फिल्म के एक गाने की शूटिंग चल रही थी। तस्वीरों में विजय सेतुपति क्लीन शेव लुक में नजर आ रहे हैं, जबकि साई पल्लवी अपने सादगी भरे और नेचुरल अंदाज में दिखाई दे रही हैं। विजय और साई की जोड़ी ने खींचा फैंस का ध्यान तस्वीरों में दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री देखकर सोशल मीडिया पर फैंस जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे विजय सेतुपति की सुपरहिट फिल्म '96' की याद दिलाने वाला बताया और कहा कि फिल्म में भी वैसा ही इमोशनल और रोमांटिक फील देखने को मिल सकता है। फैंस को याद आई मणिरत्नम की रोमांटिक फिल्में कुछ दर्शकों ने इस फिल्म की तुलना मणिरत्नम की चर्चित फिल्म 'ओके कनमनी' से भी की है। फैंस का मानना है कि निर्देशक एक बार फिर अपनी खास शैली वाली सादगी भरी प्रेम कहानी लेकर आ सकते हैं। फिल्म के टाइटल और कहानी पर अभी सस्पेंस फिलहाल मणिरत्नम की इस फिल्म का टाइटल और कहानी से जुड़ी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, सेट से लीक हुई तस्वीरों ने दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। मणिरत्नम की फिल्मों से जुड़ी हैं बड़ी उम्मीदें मणिरत्नम अपनी फिल्मों में रिश्तों, भावनाओं और प्रेम कहानियों को अलग अंदाज में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में विजय सेतुपति और साई पल्लवी की जोड़ी को लेकर फैंस को इस फिल्म से काफी उम्मीदें हैं।
टीवी अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब, केरल और कर्नाटक के शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की भी मांग की है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। देवोलीना की प्रतिक्रिया एक सोशल मीडिया पोस्ट पर आई, जिसमें दावा किया गया था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अन्य राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को भी जवाबदेही तय करते हुए पद छोड़ना चाहिए। इस विषय पर संबंधित राज्य सरकारों या शिक्षा मंत्रियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पोस्ट पर दिया जवाब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने जवाबदेही की एक मिसाल पेश की है और अब पंजाब, केरल तथा कर्नाटक के शिक्षा मंत्रियों को भी इस्तीफा देना चाहिए। पोस्ट में कुछ प्रमुख राजनीतिक नेताओं को भी टैग किया गया था। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए देवोलीना भट्टाचार्जी ने लिखा, "उल्टी गिनती शुरू हो गई है... शुभ काम में और देरी नहीं होनी चाहिए... इसे अपनाइए और इस्तीफा दीजिए।" उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इस पर पक्ष-विपक्ष दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। श्वेता तिवारी ने भी दी थी प्रतिक्रिया देवोलीना से पहले अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर टिप्पणी की गई थी। पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर भी सवाल उठाए थे। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और NEET-UG विवाद को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन हुए थे। इन्हीं घटनाक्रमों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। कई सार्वजनिक हस्तियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग राज्यों की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों और संबंधित सरकारों की ओर से इस विषय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा देवोलीना भट्टाचार्जी की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने उनकी राय का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने इसे व्यक्तिगत राजनीतिक दृष्टिकोण बताया। फिलहाल संबंधित राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की ओर से देवोलीना की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मुंबई, एजेंसियां। निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'स्पिरिट' को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि दीपिका पादुकोण के फिल्म से अलग होने के बाद अब कैटरीना कैफ को मुख्य भूमिका के लिए अप्रोच किया गया है। हालांकि, फिल्म निर्माताओं की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। दीपिका के बाहर होने के बाद शुरू हुई नई चर्चाएं कुछ समय पहले खबरें आई थीं कि रचनात्मक मतभेद और शूटिंग शेड्यूल को लेकर बनी परिस्थितियों के कारण दीपिका पादुकोण इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं रहीं। इसके बाद से ही फिल्म में नई अभिनेत्री की तलाश को लेकर कई नाम सामने आए। अब कैटरीना कैफ का नाम सबसे अधिक चर्चा में है, लेकिन फिलहाल यह केवल मीडिया रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी है। निर्माताओं ने किसी भी अभिनेत्री के नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है। प्रभास की बड़ी फिल्मों में शामिल है 'स्पिरिट' 'स्पिरिट' को प्रभास के करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में गिना जा रहा है। फिल्म में प्रभास एक दमदार पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाते नजर आएंगे। संदीप रेड्डी वांगा के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह है। ऐसे में मुख्य अभिनेत्री को लेकर हर नई खबर तेजी से वायरल हो रही है। फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर अंतिम फैसला आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगा।