नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर चल रही बातचीत में प्रगति नहीं होने से वैश्विक कच्चे तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है। वार्ता में गतिरोध के बीच तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली और ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। बाजार में आशंका है कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत लंबे समय से चल रही है। बाजार की उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते से ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिल सकती है और वैश्विक बाजार में ईरानी तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है।
हालांकि, वार्ता में अपेक्षित प्रगति नहीं होने से यह संभावना कमजोर हुई है। निवेशकों ने संभावित आपूर्ति जोखिम को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के साथ प्रतिक्रिया दी है।
तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और खाड़ी क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर डाल सकता है। इसी आशंका के कारण बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के लिए चिंता बढ़ा सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल और डॉलर की मांग बढ़ सकती है।
महंगे कच्चे तेल का असर रुपये पर भी पड़ सकता है। अगर रुपया कमजोर होता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो घरेलू अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पैदा हो सकता है।
अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता की अगली गतिविधियों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है तो तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। वहीं बातचीत पूरी तरह विफल होने या क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल में और तेजी देखने को मिल सकती है।
भारत समेत दुनिया भर के बाजारों के लिए आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण संकेतक बने रहेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। ICICI Prudential Asset Management Company (AMC) ने ICICI Securities के पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) कारोबार को खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी के बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह सौदा नियामकीय मंजूरियों के अधीन रहेगा। इस अधिग्रहण से ICICI Prudential AMC के मौजूदा PMS कारोबार को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। स्लंप सेल के जरिए होगा कारोबार का हस्तांतरण ICICI Prudential AMC के मुताबिक ICICI Securities के PMS कारोबार का अधिग्रहण स्लंप सेल के जरिए किया जाएगा। इसमें किसी कारोबार को एक चालू व्यवसाय के रूप में एकमुश्त राशि के बदले दूसरी कंपनी को हस्तांतरित किया जाता है। हालांकि, दोनों कंपनियों के बोर्ड की मंजूरी के बाद भी यह सौदा तुरंत पूरा नहीं होगा। इसके लिए संबंधित नियामकीय मंजूरियां हासिल करनी होंगी। PMS कारोबार में मजबूत होगी ICICI Prudential AMC की पकड़ इस अधिग्रहण का मुख्य उद्देश्य ICICI Prudential AMC के PMS कारोबार को विस्तार देना है। PMS के तहत आमतौर पर उच्च नेटवर्थ वाले निवेशकों और अन्य पात्र ग्राहकों के लिए उनके निवेश लक्ष्यों के अनुसार शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों का पोर्टफोलियो प्रबंधित किया जाता है। ICICI Prudential AMC पहले से ही PMS और अन्य वैकल्पिक निवेश उत्पादों के क्षेत्र में मौजूद है। ऐसे में ICICI Securities का कारोबार उसके मौजूदा प्लेटफॉर्म और क्षमताओं को और बढ़ा सकता है। निवेश प्रबंधन कारोबार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा एसेट मैनेजमेंट कंपनियां लगातार म्यूचुअल फंड के अलावा PMS, AIF और अन्य वैकल्पिक निवेश क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। ICICI Prudential AMC का यह कदम भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अधिग्रहण पूरा होने के बाद कंपनी को PMS क्षेत्र में अपने उत्पादों और सेवाओं का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, सौदे की अंतिम शर्तें और नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके वास्तविक वित्तीय प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में मंगलवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। 11 अगस्त को कारोबार के दौरान सोने की कीमत करीब 4,418.59 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने और अमेरिकी महंगाई के आगामी आंकड़ों को लेकर बाजार में बनी हलचल को सोने में तेजी की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। सोने ने पार किया 4,400 डॉलर का स्तर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में करीब 0.62 प्रतिशत ऊपर रही। इससे सोना 4,400 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर पहुंच गया। पिछले एक महीने में भी सोने की कीमत में करीब 10 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। बाजार में सोने की तेजी को निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती दिलचस्पी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशक सोने को जोखिम से बचाव के विकल्प के रूप में देखते हैं। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर नजर सोने की कीमतों में तेजी ऐसे समय आई है जब निवेशकों की नजर अमेरिका के आगामी महंगाई आंकड़ों पर है। इन आंकड़ों से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं। यदि अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है तो इससे सोने को आगे भी समर्थन मिल सकता है। वहीं डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव भी अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे। भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़ने का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। हालांकि घरेलू सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय भाव पर निर्भर नहीं करती, बल्कि रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति, आयात लागत और स्थानीय मांग भी कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की तेजी बनी रहती है और रुपया कमजोर रहता है, तो भारत में सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब आगे की चाल पर सोने के 4,400 डॉलर के स्तर को पार करने के बाद अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कीमत इस स्तर के ऊपर कितनी मजबूती से टिकती है। अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, फेड की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव आने वाले दिनों में सोने की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। हालिया तेजी के बावजूद सोने में निवेश करने वालों को कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना चाहिए। केवल तेजी देखकर निवेश का फैसला करने के बजाय अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Air India सितंबर से अपनी उड़ान सेवाओं को बड़े स्तर पर बहाल करने की तैयारी में है। एयरलाइन 1 सितंबर 2026 से जुलाई और अगस्त में कम की गई अधिकांश उड़ानों को फिर से शुरू करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानों की संख्या बढ़ाने की भी तैयारी है। जुलाई-अगस्त में क्यों कम हुई थीं उड़ानें? Air India ने गर्मियों के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती की थी। इसके पीछे जेट ईंधन की ऊंची कीमत, एयरस्पेस से जुड़ी पाबंदियां और परिचालन संबंधी चुनौतियां प्रमुख कारण रहे। एयरलाइन ने मई में भी बताया था कि जून से अगस्त के बीच कुछ अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को अस्थायी रूप से कम या स्थगित किया जाएगा। न्यूयॉर्क, टोक्यो और मिलान के लिए बढ़ सकती हैं उड़ानें सितंबर से केवल बंद या कम की गई उड़ानों को बहाल करने की योजना नहीं है, बल्कि कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फ्लाइट फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की भी तैयारी है। रिपोर्टों के अनुसार न्यूयॉर्क, टोक्यो और मिलान जैसे प्रमुख शहरों के लिए सेवाओं में बढ़ोतरी की योजना है। यात्रियों को मिलेगी राहत उड़ानों की संख्या बढ़ने से भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों को सितंबर से ज्यादा विकल्प मिलने की उम्मीद है। Air India का यह कदम अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को फिर से सामान्य स्तर पर लाने और आगामी विंटर ट्रैवल सीजन के लिए क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Air India ने इससे पहले भी कहा था कि वह परिचालन परिस्थितियां बेहतर होने पर अपनी अंतरराष्ट्रीय क्षमता को पूरी तरह बहाल करने के लिए काम कर रही है।