Gold और Silver खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए आज राहत भरी खबर है। 25 मई 2026 को भारतीय बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार फिलहाल स्थिर बना हुआ है, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।
अगर आप आज ज्वेलरी या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो बाजार निकलने से पहले अपने शहर के ताजा रेट जरूर जान लें।
आज भारतीय बाजार में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव लगभग ₹15,905 प्रति ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1,59,050 दर्ज की गई, जो कल ₹1,59,060 थी। यानी आज सोना ₹10 सस्ता हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में जारी अनिश्चितताओं के कारण इस सप्ताह सोने की कीमतें इसी दायरे में बनी रह सकती हैं।
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आज चांदी के दाम में भी मामूली राहत देखने को मिली है। घरेलू बाजार में चांदी ₹100 प्रति किलो तक सस्ती हुई है। आज चांदी का भाव ₹2,84,900 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि कल यह ₹2,85,000 था।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती और एनर्जी कीमतों में बढ़ोतरी के चलते आने वाले दिनों में चांदी में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिल रही है। ऐसे में शादी, निवेश या ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए यह अच्छा मौका माना जा सकता है। हालांकि, निवेश करने से पहले बाजार की चाल और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर नजर रखना जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
सुरक्षित निवेश और गारंटीड रिटर्न की बात हो तो India Post की स्मॉल सेविंग स्कीम्स आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई हैं। अगर आप बिना किसी जोखिम के अपनी बचत को तेजी से बढ़ाना चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की Kisan Vikas Patra यानी KVP स्कीम आपके लिए शानदार विकल्प हो सकती है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश किया गया पैसा तय समय में दोगुना हो जाता है और इसकी गारंटी भारत सरकार देती है। मौजूदा समय में इस स्कीम पर 7.5% सालाना ब्याज मिल रहा है। Kisan Vikas Patra (KVP) स्कीम की खास बातें 1. 7.5% का गारंटीड ब्याज सरकार फिलहाल KVP स्कीम पर 7.5% वार्षिक ब्याज दे रही है। यह ब्याज कम्पाउंडिंग के आधार पर जुड़ता है, यानी आपको ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। 2. पैसा तय समय में हो जाता है डबल इस स्कीम में निवेश की गई रकम करीब 9 साल 7 महीने में दोगुनी हो जाती है। 3. ₹1,000 से शुरू कर सकते हैं निवेश न्यूनतम निवेश: ₹1,000 अधिकतम निवेश: कोई सीमा नहीं यानी आप अपनी क्षमता के अनुसार जितना चाहें निवेश कर सकते हैं। 4. एक से ज्यादा अकाउंट खोलने की सुविधा सिंगल अकाउंट जॉइंट अकाउंट बच्चों के नाम पर अकाउंट सभी विकल्प उपलब्ध हैं। 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों के नाम पर भी KVP अकाउंट खोला जा सकता है। ₹5 लाख कैसे बनेंगे ₹10 लाख? अगर कोई निवेशक Kisan Vikas Patra में ₹5 लाख निवेश करता है, तो 7.5% कम्पाउंड ब्याज के हिसाब से उसकी रकम इस तरह बढ़ेगी: समय अनुमानित राशि शुरुआती निवेश ₹5,00,000 1 साल बाद ₹5,37,500 2 साल बाद ₹5,77,812 5 साल बाद ₹7,17,814 8 साल after ₹8,91,745 9 साल 7 महीने (मैच्योरिटी) ₹10,00,000 यानी मैच्योरिटी पर आपकी रकम पूरी तरह दोगुनी हो जाएगी। क्यों पसंद की जाती है KVP स्कीम? सरकार की गारंटी सुरक्षित निवेश फिक्स्ड और स्थिर रिटर्न लंबी अवधि में अच्छा फंड तैयार करने का मौका ग्रामीण और मध्यम वर्ग के बीच भरोसेमंद विकल्प यह स्कीम खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहतर मानी जाती है जो शेयर बाजार के जोखिम से दूर रहकर सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं। निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान? यह लंबी अवधि की स्कीम है बीच में पैसे निकालने पर नियम लागू होते हैं ब्याज दर सरकार समय-समय पर बदल सकती है निवेश से पहले पोस्ट ऑफिस या वित्तीय सलाहकार से पूरी जानकारी जरूर लें
नई दिल्ली। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोना और चांदी दोनों में दबाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर दिल्ली के सर्राफा बाजार तक कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। चांदी में सबसे तेज गिरावट देखी गई, जबकि सोना भी कमजोरी के साथ बंद हुआ। MCX पर सोना-चांदी में गिरावट शुक्रवार को MCX पर जून डिलीवरी वाला सोना 1,018 रुपये टूटकर 1,58,588 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र में यह 1,58,104 रुपये तक फिसल गया था। वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। चांदी 3,283 रुपये टूटकर 2,71,600 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। दिन के दौरान यह 2,69,500 रुपये तक गिर गई थी। शनिवार को MCX बाजार बंद रहने के कारण आज कीमतें शुक्रवार के बंद स्तर पर ही स्थिर हैं। सर्राफा बाजार में क्या रहा रुख? इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,58,117 रुपये प्रति 10 ग्राम (बिना टैक्स और मेकिंग चार्ज) पर आ गई। वहीं चांदी का भाव 2,66,000 रुपये प्रति किलो के आसपास रहा। दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 600 रुपये गिरकर 1,64,900 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) पर पहुंच गया। वहीं चांदी 2,71,000 रुपये प्रति किलो पर स्थिर रही। प्रमुख शहरों में आज का सोने का रेट (23 मई 2026) दिल्ली: 24K ₹159210, 22K ₹145950, 18K ₹119440 मुंबई: 24K ₹159060, 22K ₹145800, 18K ₹119290 कोलकाता: 24K ₹159060, 22K ₹145800, 18K ₹119290 चेन्नई: 24K ₹160690, 22K ₹147300, 18K ₹123600 पटना: 24K ₹159530, 22K ₹146240, 18K ₹119660 लखनऊ: 24K ₹159630, 22K ₹146240, 18K ₹119660 विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और रुपये की कमजोरी है। अमेरिका-ईरान वार्ता और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े विवाद ने भी निवेशकों को सतर्क रखा है। विश्लेषकों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4,522 डॉलर प्रति औंस और चांदी 75 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है, जिससे घरेलू बाजार पर भी दबाव बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब भारतीय सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। 22 मई 2026 को लगातार तीसरे दिन सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ने से बाजार में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि रुपये में हल्की मजबूती के कारण घरेलू बाजार में कीमतों में बहुत बड़ी छलांग नहीं देखने को मिली है। आज 24 कैरेट सोने की कीमत में मामूली बढ़त हुई है, जबकि चांदी भी हल्की तेजी के साथ कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव जारी रहने पर आने वाले दिनों में कीमती धातुओं के दाम और ऊपर जा सकते हैं। आज कितना महंगा हुआ सोना? भारतीय बाजार में आज 24 कैरेट सोने का भाव 15,994 रुपये प्रति ग्राम पहुंच गया है। वहीं 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने में भी 1 रुपये प्रति ग्राम की बढ़त दर्ज की गई है। आज का गोल्ड रेट सोने का प्रकार आज का रेट कल का रेट बदलाव 24 कैरेट ₹15,994 प्रति ग्राम ₹15,993 +₹1 22 कैरेट ₹14,661 प्रति ग्राम ₹14,660 +₹1 18 कैरेट ₹11,996 प्रति ग्राम ₹11,995 +₹1 प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव लखनऊ ₹16,024 ₹16,023 +₹1 पटना ₹16,014 ₹16,013 +₹1 रांची ₹15,994 ₹15,993 +₹1 New Delhi ₹16,024 ₹16,023 +₹1 Mumbai ₹15,994 ₹15,993 +₹1 Kolkata ₹15,994 ₹15,993 +₹1 गौरतलब है कि इस महीने 14 मई को सोने ने 16,233 रुपये प्रति ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ था। मौजूदा कीमतें उस रिकॉर्ड स्तर से थोड़ी नीचे बनी हुई हैं। चांदी में भी जारी है तेजी सोने की तरह चांदी के बाजार में भी मजबूती बनी हुई है। आज चांदी की कीमत में 100 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़त दर्ज की गई है। इसके बाद देश में 1 किलो चांदी का भाव 2,85,100 रुपये पहुंच गया है। आज का सिल्वर रेट चांदी आज का रेट कल का रेट बदलाव 1 ग्राम ₹285.10 ₹285.00 +₹0.10 10 ग्राम ₹2,851 ₹2,850 +₹1 1 किलो ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 शहरवार चांदी का रेट (1 किलो) शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव लखनऊ ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 पटना ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 रांची ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 New Delhi ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 Mumbai ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 Chennai ₹2,90,100 ₹2,90,000 +₹100 बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि सोना और चांदी लगातार मजबूती दिखा रहे हैं।