Gold Investment

Gold and silver jewellery displayed in a jewellery shop as precious metal prices rise for the third straight day
Aaj Ka Sona Chandi Bhav 22 May 2026: लगातार तीसरे दिन बढ़े सोने-चांदी के दाम, जानें आज का ताजा रेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब भारतीय सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। 22 मई 2026 को लगातार तीसरे दिन सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ने से बाजार में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि रुपये में हल्की मजबूती के कारण घरेलू बाजार में कीमतों में बहुत बड़ी छलांग नहीं देखने को मिली है। आज 24 कैरेट सोने की कीमत में मामूली बढ़त हुई है, जबकि चांदी भी हल्की तेजी के साथ कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव जारी रहने पर आने वाले दिनों में कीमती धातुओं के दाम और ऊपर जा सकते हैं। आज कितना महंगा हुआ सोना? भारतीय बाजार में आज 24 कैरेट सोने का भाव 15,994 रुपये प्रति ग्राम पहुंच गया है। वहीं 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने में भी 1 रुपये प्रति ग्राम की बढ़त दर्ज की गई है। आज का गोल्ड रेट सोने का प्रकार आज का रेट कल का रेट बदलाव 24 कैरेट ₹15,994 प्रति ग्राम ₹15,993 +₹1 22 कैरेट ₹14,661 प्रति ग्राम ₹14,660 +₹1 18 कैरेट ₹11,996 प्रति ग्राम ₹11,995 +₹1 प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव लखनऊ ₹16,024 ₹16,023 +₹1 पटना ₹16,014 ₹16,013 +₹1 रांची ₹15,994 ₹15,993 +₹1 New Delhi ₹16,024 ₹16,023 +₹1 Mumbai ₹15,994 ₹15,993 +₹1 Kolkata ₹15,994 ₹15,993 +₹1 गौरतलब है कि इस महीने 14 मई को सोने ने 16,233 रुपये प्रति ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ था। मौजूदा कीमतें उस रिकॉर्ड स्तर से थोड़ी नीचे बनी हुई हैं। चांदी में भी जारी है तेजी सोने की तरह चांदी के बाजार में भी मजबूती बनी हुई है। आज चांदी की कीमत में 100 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़त दर्ज की गई है। इसके बाद देश में 1 किलो चांदी का भाव 2,85,100 रुपये पहुंच गया है। आज का सिल्वर रेट चांदी आज का रेट कल का रेट बदलाव 1 ग्राम ₹285.10 ₹285.00 +₹0.10 10 ग्राम ₹2,851 ₹2,850 +₹1 1 किलो ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 शहरवार चांदी का रेट (1 किलो) शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव लखनऊ ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 पटना ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 रांची ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 New Delhi ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 Mumbai ₹2,85,100 ₹2,85,000 +₹100 Chennai ₹2,90,100 ₹2,90,000 +₹100 बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि सोना और चांदी लगातार मजबूती दिखा रहे हैं।  

surbhi मई 22, 2026 0
Young shoppers exploring lab-grown diamond and silver jewelry amid rising gold prices in India
सोने की बढ़ती कीमतों के बीच बदल रहा ज्वेलरी ट्रेंड, 2026 में लोग अपना रहे ये नए विकल्प

महंगे गोल्ड ज्वेलरी से हटकर नए विकल्पों की ओर बढ़ रहे लोग भारत में सोना हमेशा से निवेश और पारंपरिक शान का प्रतीक माना जाता रहा है, लेकिन 2026 में लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की पसंद बदलनी शुरू कर दी है। हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी लोगों से फिलहाल गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी। ऐसे में अब नई पीढ़ी पारंपरिक गोल्ड ज्वेलरी के बजाय दूसरे विकल्पों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रही है। लैब-ग्रोउन डायमंड्स बने नया स्टेटस सिंबल 2026 में ज्वेलरी इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव लैब-ग्रोउन डायमंड्स को लेकर देखा जा रहा है। युवा वर्ग अब प्राकृतिक हीरों की बजाय लैब में तैयार किए गए डायमंड्स को पसंद कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह कम कीमत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लैब-ग्रोउन डायमंड्स की कीमत प्राकृतिक हीरों की तुलना में लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक कम होती है। दिखने में ये बिल्कुल असली हीरों जैसे लगते हैं और इन्हें अधिक टिकाऊ और एथिकल विकल्प माना जा रहा है। सिल्वर ज्वेलरी की फिर बढ़ी डिमांड एक समय बजट विकल्प मानी जाने वाली सिल्वर ज्वेलरी अब फैशन ट्रेंड बन चुकी है। ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर नेकलेस, झुमके और विंटेज डिजाइन वाले आभूषण युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इंडो-वेस्टर्न आउटफिट्स के साथ सिल्वर ज्वेलरी का कॉम्बिनेशन लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है। फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ती गोल्ड कीमतों के बीच सिल्वर एक स्टाइलिश और किफायती विकल्प बनकर उभरा है। पुरानी विरासत वाली ज्वेलरी को मिल रहा नया महत्व अब लोग नई भारी-भरकम गोल्ड ज्वेलरी खरीदने के बजाय परिवार की पुरानी ज्वेलरी को दोबारा इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। पुराने कुंदन सेट, मंदिर ज्वेलरी और पारंपरिक चूड़ियों को नया डिजाइन देकर दोबारा पहना जा रहा है। इस ट्रेंड को सिर्फ फैशन नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और टिकाऊ लाइफस्टाइल से भी जोड़ा जा रहा है। परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही ज्वेलरी अब फिर से खास बनती जा रही है। रेंटल ज्वेलरी का बढ़ा क्रेज भारतीय शादियों में भारी गोल्ड ज्वेलरी पहनने का चलन लंबे समय से रहा है, लेकिन अब युवा पीढ़ी शादी के लिए ज्वेलरी किराए पर लेना ज्यादा पसंद कर रही है। कई ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफॉर्म अब ब्राइडल ज्वेलरी रेंट पर उपलब्ध करा रहे हैं। इससे लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती और लोग ट्रेंडिंग डिजाइन भी आसानी से पहन सकते हैं। बदलती सोच के साथ बदल रहा ज्वेलरी मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय ज्वेलरी बाजार में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब लोग केवल निवेश नहीं बल्कि स्टाइल, सुविधा और टिकाऊ विकल्पों को ध्यान में रखकर खरीदारी कर रहे हैं।  

surbhi मई 13, 2026 0
Gold and silver jewellery displayed in Indian market amid rising bullion prices and wedding season demand
सोना-चांदी फिर हुए बेकाबू, क्या आज गहना खरीदना पड़ेगा महंगा?

8 मई 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार दूसरे दिन बाजार में तेजी देखने को मिली है और उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक के बड़े शहरों में सोना नए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है। शादी-विवाह के सीजन और वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर सोने-चांदी की ओर बढ़ता दिख रहा है। जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव, महंगाई को लेकर बनी आशंकाएं और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग की वजह से सोना लगातार मजबूत बना हुआ है। यही कारण है कि घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतें ऊंचाई पर बनी हुई हैं। सोना फिर चमका, कीमतों में लगातार तेजी कल की बड़ी बढ़त के बाद आज 24 कैरेट सोने की कीमत में फिर उछाल दर्ज किया गया है। कई शहरों में सोना 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार कारोबार कर रहा है। यूपी और बिहार जैसे राज्यों में मांग ज्यादा होने की वजह से यहां रेट राष्ट्रीय औसत से थोड़े ऊपर बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार में हल्का उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में सोने की कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है। आपके शहर में आज 24 कैरेट सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम) शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव Lucknow ₹1,53,160 ₹1,53,000 + ₹160 Patna ₹1,53,060 ₹1,53,000 + ₹60 Delhi ₹1,53,160 ₹1,53,000 + ₹160 Mumbai ₹1,53,010 ₹1,53,000 + ₹10 Kolkata ₹1,53,010 ₹1,53,000 + ₹10 चांदी की चमक भी लगातार बढ़ी सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेजी का सिलसिला जारी है। आज चांदी 100 रुपये की बढ़त के साथ 2,70,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। खास बात यह है कि कुछ शहरों में चांदी ने बाकी बाजारों की तुलना में ज्यादा उछाल दिखाया है। विशेष रूप से Chennai में चांदी की कीमतों में बड़ी छलांग देखने को मिली, जहां रेट करीब 4,900 रुपये तक बढ़ गया। आपके शहर में आज चांदी का भाव (प्रति किलोग्राम) शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव Lucknow ₹2,70,100 ₹2,70,000 + ₹100 Patna ₹2,70,100 ₹2,70,000 + ₹100 Delhi ₹2,70,100 ₹2,70,000 + ₹100 Mumbai ₹2,70,100 ₹2,70,000 + ₹100 Chennai ₹2,74,900 ₹2,70,000 + ₹4,900 आखिर क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम? विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों का भरोसा सुरक्षित निवेश विकल्पों पर बढ़ा है। इसके अलावा– वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता डॉलर और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता शादी और त्योहारों के सीजन में बढ़ती मांग निवेशकों की गोल्ड ETF और बुलियन में रुचि इन सभी कारणों से सोना और चांदी दोनों मजबूत बने हुए हैं। क्या अभी गहना खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या जरूरी जरूरत के लिए खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार पर नजर बनाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शॉर्ट टर्म में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में सोना निवेशकों के लिए मजबूत विकल्प बना रह सकता है।  

surbhi मई 8, 2026 0
Gold and silver jewelry displayed in market after Akshaya Tritiya as prices see slight dip
अक्षय तृतीया के बाद ठंडा पड़ा सर्राफा बाजार, 20 अप्रैल 2026 को सोना-चांदी में हल्की गिरावट

अक्षय तृतीया के दौरान जबरदस्त खरीदारी के बाद सर्राफा बाजार में अब सुस्ती के संकेत दिखाई देने लगे हैं। 20 अप्रैल 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहार के बाद मांग में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों का असर घरेलू कीमतों पर साफ नजर आ रहा है। सोने की कीमतों में आज मामूली गिरावट देखने को मिली है। 24 कैरेट सोना, जो पिछले कारोबारी सत्र में ₹1,55,780 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, आज ₹10 घटकर ₹1,55,770 पर आ गया है। इसी तरह 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम में भी ₹10 की हल्की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन संकेत देती है कि फिलहाल बाजार स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो निवेशक लंबे समय के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह समय अनुकूल हो सकता है। कीमतों में स्थिरता अक्सर निवेश के लिए अच्छा अवसर मानी जाती है, खासकर तब जब बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो। आज के सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम): 24 कैरेट: ₹1,55,770 (₹10 की गिरावट) 22 कैरेट: ₹1,42,790 (₹10 की गिरावट) 18 कैरेट: ₹1,16,830 (₹10 की गिरावट) शहरों की बात करें तो पटना और रांची में 24 कैरेट सोना ₹15,741 प्रति ग्राम पर बिक रहा है, जबकि मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में यह ₹15,577 प्रति ग्राम है। दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव ₹15,592 प्रति ग्राम दर्ज किया गया है। वहीं चांदी की कीमतों में भी हल्की नरमी देखने को मिली है। आज चांदी ₹100 प्रति किलो सस्ती होकर ₹2,74,900 प्रति किलोग्राम पर आ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव पड़ता है। आज के चांदी के दाम: 1 ग्राम: ₹274.90 100 ग्राम: ₹27,490 1 किलोग्राम: ₹2,74,900 (₹100 की गिरावट) शहरों के हिसाब से पटना और रांची में चांदी ₹2,80,000 प्रति किलो के स्तर पर है, जबकि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में यह ₹2,74,900 प्रति किलो पर बनी हुई है। कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया के बाद बाजार में आई यह हल्की गिरावट खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है। आने वाले दिनों में कीमतें वैश्विक संकेतों और घरेलू मांग के आधार पर तय होंगी।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Gold jewellery and coins displayed for Akshaya Tritiya with traditional Indian festive decorations.
500 ग्राम या 5 किलो? अक्षय तृतीया से पहले जानिए घर में कितना सोना रखना सुरक्षित है और कब हो सकती है जब्ती

Akshaya Tritiya के अवसर पर सोना खरीदना भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन इससे पहले यह समझना जरूरी है कि घर में कितना सोना रखना सुरक्षित है और किन परिस्थितियों में आयकर विभाग कार्रवाई कर सकता है। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, भारत में सोना रखने की कोई तय सीमा नहीं है, लेकिन इसके स्रोत और दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। कितना सोना रख सकते हैं आप? भारत में कानून के तहत आप ज्वेलरी, सिक्के या गोल्ड बिस्किट के रूप में जितना चाहें सोना रख सकते हैं। कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है, बशर्ते आपने यह सोना कानूनी तरीके से खरीदा हो और जरूरत पड़ने पर उसके स्रोत को साबित कर सकें। आयकर विभाग की ‘सेफ लिमिट’ Central Board of Direct Taxes (CBDT) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आयकर छापेमारी के दौरान एक निश्चित मात्रा तक सोने के आभूषण जब्त नहीं किए जाते, भले ही आपके पास उनके बिल मौजूद न हों: विवाहित महिला: 500 ग्राम तक अविवाहित महिला: 250 ग्राम तक पुरुष सदस्य: 100 ग्राम तक यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सीमा केवल ‘जब्ती से सुरक्षा’ के लिए है, न कि सोना रखने की अधिकतम सीमा। यदि आपके पास वैध बिल और दस्तावेज हैं, तो आप इससे कहीं अधिक सोना रख सकते हैं। नए प्रकटीकरण नियम (FY 2025-26) सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कुछ नियम सख्त किए हैं: यदि आपकी सालाना आय ₹1 करोड़ से अधिक है, तो आपको ITR के Schedule AL (Assets and Liabilities) में सोने और अन्य संपत्तियों का विवरण देना अनिवार्य होगा। विरासत, शादी के गिफ्ट या पुराने निवेश के रूप में मिले सोने के लिए वसीयत, गिफ्ट डीड या पुराने बिल संभालकर रखना जरूरी है। टैक्स और पेनाल्टी का गणित सोना बेचने पर होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन्स टैक्स देना होता है। यदि छापेमारी के दौरान तय ‘सेफ लिमिट’ से अधिक सोना मिलता है और उसका स्रोत स्पष्ट नहीं होता, तो इसे अघोषित आय माना जा सकता है, जिस पर भारी टैक्स और जुर्माना लगाया जा सकता है। स्पष्ट है कि सोना रखने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, लेकिन सही दस्तावेज और आय का स्पष्ट स्रोत ही आपको किसी भी कार्रवाई से सुरक्षित रख सकता है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
limiting funds in financial markets
भारतीय घरों में ‘खजाना’ बंद! 950 लाख करोड़ रुपये सोना-जमीन में अटका, शेयर बाजार तक नहीं पहुंच रही बचत

  भारत में परिवारों की बड़ी पूंजी अभी भी सोना और रियल एस्टेट जैसी पारंपरिक संपत्तियों में फंसी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वजह है कि देश के वित्तीय बाजारों को वह पूंजी नहीं मिल पा रही है, जिससे निवेश और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिल सकती है।   सोने और रियल एस्टेट में भारी पूंजी क्रिश्नन के अनुसार भारतीय परिवारों के पास अनुमानित 30,000 से 35,000 टन सोना मौजूद है। इसकी कुल कीमत करीब 450 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा आवासीय रियल एस्टेट में भी लगभग 500 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति निवेशित है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 950 लाख करोड़ रुपये की पूंजी भौतिक परिसंपत्तियों में बंद है, जो आमतौर पर सीमित वित्तीय रिटर्न देती है।   बचत का छोटा हिस्सा ही पहुंचता है बाजार तक विशेषज्ञों के मुताबिक देश में घरेलू बचत का सिर्फ 5.3 प्रतिशत हिस्सा ही वित्तीय उत्पादों में निवेश किया जाता है। बाकी बचत सोना, जमीन या अन्य गैर-वित्तीय संपत्तियों में रहती है, जिससे वह पूंजी आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाती। भारत की घरेलू बचत दर लगभग 18 प्रतिशत है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर ही बना रहता है।   निवेशकों की संख्या बढ़ी, मगर सक्रियता सीमित हाल के वर्षों में शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। National Securities Depository Limited और Central Depository Services Limited के आंकड़ों के अनुसार देश में डिमैट खातों की संख्या 21 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। हालांकि इनमें से केवल करीब 4.5 करोड़ खाते ही सक्रिय रूप से निवेश या ट्रेडिंग कर रहे हैं। इसी तरह म्यूचुअल फंड सेक्टर में भी तेजी देखी गई है। कुल फोलियो की संख्या लगभग 26.6 करोड़ तक पहुंच चुकी है, लेकिन वास्तविक निवेशकों की संख्या करीब 6 करोड़ ही है, जो देश की आबादी का लगभग 4 प्रतिशत है।   पूंजी बाजार के लिए बड़ी संभावना क्रिश्नन का कहना है कि यदि देश की आबादी का सिर्फ 10 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सा भी अपनी बचत को सोना और रियल एस्टेट से निकालकर वित्तीय बाजारों में निवेश करना शुरू कर दे, तो भारतीय पूंजी बाजार के लिए जबरदस्त अवसर पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को वित्तीय साक्षरता और निवेश के बेहतर विकल्पों के बारे में जागरूक करना जरूरी है, ताकि बचत को उत्पादक निवेश में बदला जा सके और इससे लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण को भी बढ़ावा मिल सके।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0