फाइनेंस

31 जुलाई तक 5.9 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल, आयकर विभाग ने जारी किए नए आंकड़े

abhishek singh अगस्त 2, 2026 0
ITR Filing
5.9 crore Income Tax Returns Filed

नई दिल्ली, एजेंसियां। वित्त वर्ष 2025-26 की आय पर आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई को समाप्त हो गई। आयकर विभाग के अनुसार, निर्धारित समय सीमा तक 5.9 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए गए। यह आंकड़ा उन व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) से जुड़ा है, जिनके खातों के ऑडिट की आवश्यकता नहीं थी।

 

31 जुलाई रही ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख

 

आयकर रिटर्न दाखिल करने की सामान्य समय सीमा 31 जुलाई 2026 थी। इस तारीख तक बड़ी संख्या में करदाताओं ने ऑनलाइन माध्यम से अपना ITR दाखिल किया। अंतिम दिनों में रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में तेजी देखने को मिली। आयकर विभाग ने करदाताओं को समय पर रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी थी, ताकि अंतिम समय में तकनीकी समस्या या अन्य परेशानी से बचा जा सके।

 

5.9 करोड़ से ज्यादा रिटर्न हुए दाखिल

 

आयकर विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से अधिक ITR दाखिल किए गए। यह संख्या देश में डिजिटल टैक्स फाइलिंग के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को भी दर्शाती है। इस साल भी अधिकांश करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी हुई, जिससे आयकर विभाग के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में रिटर्न दर्ज हुए।

 

समय सीमा के बाद भी ITR दाखिल करने का विकल्प

 

जिन करदाताओं ने 31 जुलाई की समय सीमा तक अपना ITR दाखिल नहीं किया है, उनके लिए बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का विकल्प उपलब्ध रहता है। हालांकि, समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर लागू नियमों के अनुसार लेट फीस और ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है। करदाताओं को अपनी आय, कटौती और कर देनदारी से संबंधित जानकारी सही तरीके से दर्ज करने की सलाह दी जाती है।

 

टैक्स अनुपालन में डिजिटल व्यवस्था की बड़ी भूमिका

 

आयकर रिटर्न की ऑनलाइन फाइलिंग से प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी हुई है। करोड़ों रिटर्न का डिजिटल माध्यम से दाखिल होना देश में टैक्स अनुपालन और डिजिटल कर प्रशासन के विस्तार को दिखाता है। आयकर विभाग अब दाखिल किए गए रिटर्न की प्रक्रिया, सत्यापन और संबंधित कर विवरणों के मिलान का काम आगे बढ़ाएगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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RBI की डॉलर स्वैप योजना से विदेशी मुद्रा जुटाव $40 अरब के पार, FCNR(B) जमा का बड़ा योगदान

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा को बड़ी सफलता मिली है। 31 जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत कुल 40.81 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा जुटाई गई है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, इसमें सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक (FCNR-B) जमा का रहा है।   FCNR(B) जमा से आए 36.72 अरब डॉलर   RBI की विशेष सुविधा के तहत जुटाई गई विदेशी मुद्रा में FCNR(B) जमा से करीब 36.72 अरब डॉलर आए हैं। यह कुल जुटाव का 90 फीसदी से अधिक है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा में बाहरी वाणिज्यिक उधारी और अन्य माध्यमों से भी रकम जुटाई गई है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार और देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए इस विशेष सुविधा को शुरू किया था।   जून में शुरू हुई थी विशेष सुविधा   RBI की यह रियायती स्वैप सुविधा 8 जून 2026 से लागू हुई थी। इसका उद्देश्य बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना और देश में डॉलर के प्रवाह को बढ़ाना है। जुलाई के अंत तक इस योजना के तहत विदेशी मुद्रा जुटाव 40 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया।   विदेशी मुद्रा भंडार को मिलेगा सहारा   विदेशी मुद्रा का यह मजबूत प्रवाह भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा दे सकता है। इससे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच देश की बाहरी भुगतान क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। RBI की इस पहल में बैंकों की मजबूत भागीदारी को विदेशी मुद्रा जुटाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे भी इस सुविधा के जरिए विदेशी मुद्रा प्रवाह पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

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मुंबई, एजेंसियां। मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज के करीब ₹8,000 करोड़ से अधिक के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। कंपनी के IPO को बोली प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह सब्सक्राइब कर लिया गया, जिससे भारतीय प्राथमिक बाजार में निवेशकों के मजबूत भरोसे का संकेत मिला है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की इस बड़ी कंपनी के सार्वजनिक निर्गम पर संस्थागत और अन्य निवेशकों की नजर बनी हुई है।   IPO को निवेशकों से मिली मजबूत प्रतिक्रिया   मणिपाल हेल्थ के IPO में निवेशकों ने कंपनी के शेयर खरीदने में अच्छी दिलचस्पी दिखाई। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कंपनी की मजबूत मौजूदगी को देखते हुए बाजार विशेषज्ञों की नजर इस निर्गम पर बनी हुई है। कंपनी के व्यापक अस्पताल नेटवर्क और स्वास्थ्य सेवा कारोबार को निवेशकों के बीच सकारात्मक धारणा का प्रमुख कारण माना जा रहा है।   स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बड़ी मौजूदगी   मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज भारत की प्रमुख स्वास्थ्य सेवा कंपनियों में शामिल है और देश के कई शहरों में अस्पतालों का संचालन करती है। कंपनी की सेवाओं में अस्पताल, चिकित्सा उपचार और विभिन्न विशेषज्ञता वाले स्वास्थ्य सेवा केंद्र शामिल हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच कंपनी का विस्तार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   IPO बाजार में फिर बढ़ा भरोसा   मणिपाल हेल्थ के IPO को मिली प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय प्राथमिक बाजार में बड़े सार्वजनिक निर्गमों को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत कारोबार वाली कंपनियों के IPO में निवेशकों की भागीदारी बाजार में दीर्घकालिक निवेश के भरोसे को दर्शाती है। अब निवेशकों की नजर शेयर आवंटन और कंपनी की बाजार में सूचीबद्धता पर रहेगी।

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पतंजलि ने बीमा कारोबार में रखा कदम
IRDAI से मिली मंजूरी, ₹4,500 करोड़ के सौदे के साथ जनरल इंश्योरेंस कारोबार में उतरी पतंजलि

नई दिल्ली, एजेंसियां। योग गुरु बाबा रामदेव से जुड़ी पतंजलि आयुर्वेद ने इंश्योरेंस सेक्टर में औपचारिक प्रवेश कर लिया है। बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने पतंजलि आयुर्वेद और डीएस ग्रुप (Dharampal Satyapal Group) को करीब ₹4,500 करोड़ के सौदे के तहत मग्मा जनरल इंश्योरेंस के अधिग्रहण की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के साथ ही पतंजलि ने एफएमसीजी और आयुर्वेदिक उत्पादों के बाद वित्तीय सेवा क्षेत्र में भी कदम रख दिया है।   मग्मा जनरल इंश्योरेंस के जरिए कारोबार का विस्तार   इस अधिग्रहण के बाद मग्मा जनरल इंश्योरेंस का स्वामित्व पतंजलि आयुर्वेद और डीएस ग्रुप के पास होगा। कंपनी अब स्वास्थ्य, मोटर, यात्रा, संपत्ति और अन्य सामान्य बीमा उत्पादों के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा भारतीय बीमा उद्योग के हाल के वर्षों के सबसे बड़े अधिग्रहणों में शामिल है।   एफएमसीजी के बाद वित्तीय सेवाओं पर फोकस   पतंजलि ने पिछले कुछ वर्षों में खाद्य उत्पाद, आयुर्वेदिक दवाओं, व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों और खाद्य तेल जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया है। अब बीमा कारोबार में प्रवेश के साथ कंपनी अपने व्यवसाय को वित्तीय सेवाओं तक विस्तारित कर रही है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि पतंजलि अपने व्यापक ग्राहक नेटवर्क का लाभ उठाकर बीमा क्षेत्र में भी मजबूत पहचान बनाने की कोशिश करेगी।   बीमा बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा   विशेषज्ञों के अनुसार, पतंजलि और डीएस ग्रुप की एंट्री से भारतीय जनरल इंश्योरेंस बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। नए निवेश और विस्तारित वितरण नेटवर्क से ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह सौदा भारत के बीमा क्षेत्र में निजी निवेश और कारोबार विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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