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HUL Gets Bullish ₹2800 Target

HUL पर ICICI सिक्योरिटीज की बुलिश रिपोर्ट: ₹2800 का टारगेट, निवेशकों के लिए बड़ा संकेत

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
HUL stock gains attention as ICICI Securities sets ₹2800 target amid FMCG sector outlook
HUL Stock Target ICICI Securities

देश की प्रमुख FMCG कंपनी Hindustan Unilever (HUL) को लेकर ICICI Securities ने सकारात्मक रुख अपनाया है। 20 अप्रैल 2026 को जारी अपनी ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट में ब्रोकरेज हाउस ने HUL पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखते हुए शेयर का टारगेट प्राइस ₹2800 तय किया है, जो पहले ₹2700 था।

महंगाई के दौर में HUL की मजबूत स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, FMCG सेक्टर में एक बार फिर कमोडिटी महंगाई के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ऐसे माहौल में HUL जैसी बड़ी कंपनियां बेहतर स्थिति में रहती हैं क्योंकि उनके पास कीमतों में बढ़ोतरी (pricing power) करने की क्षमता होती है।
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो महंगाई के समय बड़ी कंपनियां कीमतों के जरिए ग्रोथ हासिल करती हैं, जिससे उनका रेवेन्यू मजबूत रहता है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कमोडिटी महंगाई और प्राइस हाइक के बीच समय अंतर होने के कारण निकट अवधि में मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। लेकिन HUL के पास ऑपरेटिंग लीवरेज बढ़ाने के विकल्प मौजूद हैं, जैसे विज्ञापन खर्च में रणनीतिक कटौती।

छोटे खिलाड़ियों पर दबाव, HUL को फायदा

महंगाई का सबसे ज्यादा असर छोटे और क्षेत्रीय FMCG कंपनियों पर पड़ता है, जिससे उनकी यूनिट इकॉनॉमिक्स प्रभावित होती है। ऐसे में HUL जैसी बड़ी कंपनियों के लिए बाजार हिस्सेदारी (market share) बढ़ाने का मौका बनता है।

किन बातों पर रहेगी नजर

ICICI Securities ने कुछ प्रमुख संकेतकों पर ध्यान देने की सलाह दी है:

  • उपभोक्ता मांग (consumer volume growth)
  • कीमत बढ़ने के बाद मांग की लोच (demand elasticity)
  • रिटेल स्तर पर प्राइस हाइक का असर

ग्रोथ अनुमान और वैल्यूएशन

ब्रोकरेज ने FY27 और FY28 के लिए EPS अनुमान में मामूली बदलाव किया है।

  • रेवेन्यू CAGR: 10%
  • EBITDA CAGR: 11%
  • PAT CAGR: 10% (FY25–28E)

टारगेट प्राइस ₹2800 पर HUL का वैल्यूएशन FY28 के अनुमानित EPS पर 49x P/E के आसपास बैठता है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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कीमती धातुओं में नरमी बरकरार: 23 अप्रैल को सोना-चांदी सस्ते, क्या अभी खरीदना फायदेमंद?

  वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू बाजार में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में नरमी का रुख जारी है। निवेशकों के बदलते मूड और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव में कमी की खबरों का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। 23 अप्रैल को भी कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे खरीदारों को थोड़ी राहत मिली है। सोने की कीमतों में हल्की गिरावट आज सोने के दाम में प्रति ग्राम लगभग 1 रुपये की गिरावट देखने को मिली है। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से जारी गिरावट के सिलसिले को आगे बढ़ाती है। दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोना करीब 15,475 रुपये प्रति ग्राम के आसपास बना हुआ है। प्रति 10 ग्राम सोने के ताजा रेट: 24 कैरेट: ₹1,54,740 (– ₹10) 22 कैरेट: ₹1,41,840 (– ₹10) 18 कैरेट: ₹1,16,050 (– ₹10) 18 अप्रैल को बने हालिया उच्च स्तर की तुलना में सोने की कीमतों में अब अच्छी-खासी नरमी आ चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं आता, तब तक कीमतें इसी दायरे में बनी रह सकती हैं। प्रमुख शहरों में सोने के दाम (प्रति ग्राम) पटना: 24K ₹15,638 | 22K ₹14,335 दिल्ली: 24K ₹15,489 | 22K ₹14,199 मुंबई: 24K ₹15,474 | 22K ₹14,184 चेन्नई: 24K ₹15,545 | 22K ₹14,249 चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। आज चांदी करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हुई है। चांदी के ताजा रेट: 1 ग्राम: ₹264.90 100 ग्राम: ₹26,490 1 किलोग्राम: ₹2,64,900 अप्रैल की शुरुआत में जहां चांदी 2.55 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास थी, वहीं 18 अप्रैल को यह 2.75 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। अब इसमें मुनाफावसूली देखने को मिल रही है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है। क्या यह खरीदारी का सही समय है? विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच हालात कुछ सामान्य होने से सोने की मांग पर दबाव पड़ा है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक अवसर के रूप में देखी जा सकती है। हालांकि, गहने खरीदते समय ग्राहकों को जीएसटी और मेकिंग चार्ज जैसी अतिरिक्त लागतों को ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि ये कीमतें बेस रेट होती हैं।  

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Stock Market: लाल निशान में बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लुढ़के

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को गिरावट देखने को मिली, जिससे पिछले तीन दिनों से जारी तेजी थम गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आईटी सेक्टर में बिकवाली ने बाजार की दिशा बदल दी। निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल साफ नजर आया। BSE Sensex 756.84 अंक (0.95%) गिरकर 78,516.49 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 198.50 अंक (0.81%) की गिरावट के साथ 24,378.10 पर आ गया। बाजार की शुरुआत ही कमजोर रही और पूरे सत्र में दबाव बना रहा।   गिरावट की मुख्य वजहें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया। Donald Trump के ईरान को लेकर सख्त रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बयान से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी। इससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया। आईटी सेक्टर में भी भारी बिकवाली देखी गई। कमजोर तिमाही नतीजों और वैश्विक मांग में सुस्ती की आशंका के चलते निवेशकों ने इस सेक्टर से दूरी बनाई। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत रद्द होने की खबरों ने भी बाजार का सेंटीमेंट खराब किया।   मिडकैप और स्मॉलकैप में दिखी मजबूती हालांकि, व्यापक बाजार में कुछ मजबूती देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी जारी रही, जिससे संकेत मिलता है कि निवेशक चुनिंदा अवसर तलाश रहे हैं।   आगे की राह पर नजर विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,500–24,600 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। यदि यह 24,300 के सपोर्ट से नीचे जाता है, तो और गिरावट संभव है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर निर्भर करेगी।

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ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi ने आईटी सेक्टर की कंपनी Mastek पर सकारात्मक रुख बनाए रखते हुए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। अपनी 20 अप्रैल 2026 की रिसर्च रिपोर्ट में फर्म ने स्टॉक के लिए 2240 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 28% की संभावित तेजी दर्शाता है। Q4FY26 प्रदर्शन: स्थिर ग्रोथ, लेकिन मार्जिन पर दबाव कंपनी ने चौथी तिमाही में मिश्रित प्रदर्शन दिया। कॉन्स्टेंट करंसी (CC) आधार पर राजस्व में 0.3% की तिमाही दर से बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 103.5 मिलियन डॉलर तक पहुंचा। वहीं, 12 महीने का ऑर्डर बैकलॉग सालाना आधार पर 13.6% की मजबूत वृद्धि के साथ सकारात्मक संकेत दे रहा है। हालांकि, वेतन वृद्धि के पूरे तिमाही प्रभाव के कारण मार्जिन में लगभग 70 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई। इसके बावजूद, विदेशी मुद्रा से लाभ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार ने इस दबाव को कुछ हद तक कम किया। भौगोलिक प्रदर्शन: UK मजबूत, अमेरिका में सुधार के संकेत यूनाइटेड किंगडम कंपनी के लिए स्थिरता का मुख्य आधार बना रहा, जहां हेल्थ, लाइफ साइंसेज (HLS) और BFSI सेक्टर में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। उत्तरी अमेरिका अभी भी रिकवरी मोड में है, लेकिन ऑर्डर बुक और डील पाइपलाइन में सुधार से आने वाले समय में धीरे-धीरे मजबूती की उम्मीद जताई जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार FY27 से ज्यादा स्थिर टर्नअराउंड देखने को मिल सकता है। मिडिल ईस्ट और अफ्रीका (MEA) क्षेत्र में लंबित प्रोजेक्ट्स के राजस्व से सपोर्ट मिला, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण क्लाइंट्स के फैसलों में देरी से निकट अवधि में दबाव बना रह सकता है। रणनीतिक बदलाव: AI आधारित सेवाओं पर फोकस कंपनी अब AI-ड्रिवन और आउटकम-बेस्ड एंगेजमेंट मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रही है। यह रणनीति अल्पकालिक उतार-चढ़ाव ला सकती है, लेकिन लंबे समय में ग्रोथ और क्लाइंट वॉलेट शेयर बढ़ाने में मददगार मानी जा रही है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत ऑर्डर बुक, UK बाजार में स्थिरता और AI आधारित रणनीति के चलते कंपनी का लॉन्ग-टर्म आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। इसी आधार पर ब्रोकरेज ने ‘बाय’ की सलाह बरकरार रखी है।

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महिला आरक्षण पर मंथन: 16–18 अप्रैल के विशेष सत्र में क्या होगा, और क्यों नाराज़ हैं दक्षिण के राज्य?

surbhi अप्रैल 16, 2026 0

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