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Stock Market: शेयर बाजार में हल्की तेजी, Sensex 200 अंक चढ़ा; Nifty 24,600 के ऊपर

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को कारोबार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 200 अंक चढ़कर 78,782 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 करीब 0.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,641 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में यह तेजी अमेरिका-ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक प्रगति और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों के बीच आई है।   वैश्विक संकेतों से बाजार को मिला सहारा   बाजार में शुरुआती तेजी के पीछे वैश्विक स्तर पर बने सकारात्मक संकेतों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता को लेकर उम्मीद बढ़ने से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावना बनी है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है और Brent crude 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।   9:15 बजे तक Sensex-Nifty की स्थिति   शुरुआती कारोबार में Nifty 50 करीब 24,641 और Sensex करीब 78,782 के स्तर पर पहुंचा। Reuters के अनुसार 9:15 बजे तक Nifty में करीब 0.07% और Sensex में करीब 0.26% की बढ़त थी। इस दौरान 16 प्रमुख सेक्टरों में से 9 सेक्टर बढ़त में रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी शुरुआती कारोबार में मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार की तेजी कुछ हद तक व्यापक नजर आई।   तिमाही नतीजों पर निवेशकों की नजर   बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के जून तिमाही के वित्तीय नतीजों की भी अहम भूमिका है। अब तक आए कई नतीजों ने निवेशकों की धारणा को सहारा दिया है। हालांकि, ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली से बाजार में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतें भी आज के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगी।   आगे बाजार की चाल पर नजर   विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में फिलहाल सकारात्मक रुख है, लेकिन Nifty के ऊपरी स्तरों पर टिके रहने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के नतीजों से दिन के दौरान बाजार की दिशा बदल सकती है।

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
Indian stock market rises sharply as Sensex gains 500 points and rupee strengthens ahead of RBI policy decision
Share Market Update: RBI के फैसले से पहले शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 500 अंक उछला; रुपया भी मजबूत

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 5 अगस्त को शुरुआती कारोबार में जोरदार तेजी देखने को मिली। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के फैसले से पहले निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 500 अंक चढ़ गया, जबकि निफ्टी 24,600 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। दूसरी ओर, विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये ने मजबूती दिखाई और डॉलर के मुकाबले यह 95 के स्तर से नीचे खुला। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब निवेशकों की नजर आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले पर थी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा इस बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करने वाले थे। ब्याज दरों और केंद्रीय बैंक के रुख को लेकर बाजार में पहले से ही काफी उम्मीदें बनी हुई थीं। सेंसेक्स करीब 500 अंक चढ़ा सुबह 9:17 बजे बीएसई सेंसेक्स 483.53 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,912.48 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई का निफ्टी 24.90 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 24,639.80 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि, उससे पहले लगातार चार कारोबारी सत्रों तक शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रहा था। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे बाजार में व्यापक रूप से सकारात्मक माहौल का संकेत मिला। इंडिगो समेत इन शेयरों में तेजी सेंसेक्स के शेयरों में इंडिगो सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में रहा। शुरुआती कारोबार में इसमें करीब 2.94 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, एसबीआई, टेक महिंद्रा, इटरनल, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी जैसे शेयर भी मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं दूसरी तरफ टाइटन, सन फार्मा, टीसीएस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और एचडीएफसी बैंक में दबाव देखने को मिला। रुपये में भी मजबूती शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये ने भी बुधवार को मजबूत शुरुआत की। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.92 के स्तर पर खुला। यह 8 जुलाई के बाद पहली बार था जब रुपया 95 के स्तर से नीचे खुला। रुपये में मजबूती को भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, आगे की दिशा वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुझान से प्रभावित हो सकती है। ब्रॉडर मार्केट में भी खरीदारी बड़े शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दी। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.32 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 0.72 प्रतिशत ऊपर रहा। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी रियल्टी में करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। ऑटो और पीएसयू बैंक इंडेक्स ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, एफएमसीजी और फार्मा क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर रहे। RBI की पॉलिसी पर टिकी बाजार की नजर बाजार में बुधवार की तेजी का सबसे बड़ा कारण आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक को माना जा रहा था। निवेशक यह जानना चाहते थे कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर आगे किस दिशा में बढ़ेगा। बाजार में पहले से उम्मीद थी कि आरबीआई रेपो रेट में तत्काल कोई बदलाव नहीं करेगा। ऐसे में निवेशकों का ध्यान केवल दरों पर ही नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंक के भविष्य के रुख और अर्थव्यवस्था को लेकर उसकी टिप्पणियों पर भी था। ब्याज दरों में स्थिरता बाजार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कंपनियों और कारोबारों की उधारी लागत पर अचानक दबाव बढ़ने की संभावना कम रहती है। साथ ही होम लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों के लिए भी यह राहत का संकेत हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी बाजार को सहारा जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी शेयर बाजार में रिकॉर्ड क्लोजिंग भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी से भारत के आयात बिल और व्यापक अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। FIIs की खरीदारी भी बनी सकारात्मक खबर बाजार के लिए विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की गतिविधियां भी अहम हैं। लगातार छठे कारोबारी दिन विदेशी निवेशकों की खरीदारी को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना गया। इसके अलावा अर्थव्यवस्था में मजबूत ग्रोथ और कॉरपोरेट मुनाफे में सुधार की उम्मीद भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत कर रही है। आगे बाजार की दिशा किन चीजों से तय होगी? बुधवार की शुरुआती तेजी के बाद बाजार की आगे की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें आरबीआई की मौद्रिक नीति का रुख, वैश्विक बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख हैं। फिलहाल शुरुआती संकेत बाजार के पक्ष में नजर आ रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक तेज उछाल के बाद निवेशकों को सावधानी बरतना जरूरी है। केवल बाजार की तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना अधिक महत्वपूर्ण है।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
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Stock Market: Sensex में शुरुआती तेजी के बाद नरमी, Nifty 24,600 के आसपास; RBI के फैसले पर बाजार की नजर

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 5 अगस्त 2026 को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई, लेकिन बाद में प्रमुख सूचकांकों में नरमी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 450 अंक चढ़ा, जबकि Nifty 50 ने 24,600 का स्तर पार किया। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर आज होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के फैसले पर टिकी हुई है।   शुरुआत में Sensex और Nifty में तेजी   सुबह के शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 0.8 फीसदी बढ़कर 79,055 के आसपास पहुंच गया था। वहीं Nifty 50 करीब 0.22 फीसदी की बढ़त के साथ 24,669 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। हालांकि बाद के अपडेट में Nifty करीब 24,606 के आसपास आ गया, जिससे शुरुआती तेजी कुछ कम हुई।   RBI के फैसले से पहले निवेशक सतर्क   आज बाजार के लिए सबसे बड़ा घरेलू ट्रिगर RBI की MPC बैठक का फैसला है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे। बाजार में फिलहाल रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की उम्मीद है, लेकिन निवेशक गवर्नर के रुख और आगे की ब्याज दरों को लेकर संकेतों पर खास नजर रखेंगे।   कच्चे तेल और वैश्विक संकेतों का भी असर   कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी भारतीय बाजार की धारणा को कुछ सहारा दिया है। शुरुआती कारोबार के दौरान Brent crude करीब 1.1 फीसदी गिरकर 78.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। इसके अलावा वैश्विक बाजारों के सकारात्मक संकेतों का भी घरेलू शेयर बाजार पर असर देखने को मिला।   आगे बाजार की दिशा RBI के फैसले से तय होगी   निवेशकों की नजर अब RBI के फैसले के साथ-साथ महंगाई, आर्थिक विकास और मौद्रिक नीति के भविष्य के रुख पर रहेगी। आज के कारोबार में Sensex और Nifty में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। इसलिए फिलहाल बाजार में शुरुआती तेजी के बाद सावधानीपूर्ण कारोबार देखने को मिल रहा है।

anjali kumari अगस्त 5, 2026 0
Stock Market
Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स हरे निशान में

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में आज शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स में तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 0.2% बढ़कर 78,762.54 के स्तर पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 50 में शुरुआती गिरावट दर्ज की गई।   सेंसेक्स में बढ़त, निफ्टी पर दबाव   आज के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों की चाल अलग-अलग रही। सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला, जबकि निफ्टी 50 करीब 0.67% गिरकर 24,607.90 पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी में जोरदार तेजी आई थी।   वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल पर नजर   बाजार की दिशा पर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के संकेतों का असर बना हुआ है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से भारतीय बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली थी।   LIC के शेयर में तेज गिरावट   आज LIC के शेयर में करीब 8% की गिरावट ने बाजार का ध्यान खींचा। सरकार की कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने की योजना की खबर के बाद LIC के शेयर पर दबाव बढ़ा।

anjali kumari अगस्त 4, 2026 0
Indian stock market opens higher as Sensex gains 500 points and Nifty crosses 24,500 amid falling crude oil prices
Share Market Opening: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार में रौनक, सेंसेक्स 500 अंक उछला; निफ्टी 24,500 के पार

नई दिल्ली: अगस्त के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बीच घरेलू बाजार में खरीदारी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 500 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि NSE Nifty 50 ने 24,500 का स्तर पार कर लिया। बाजार में यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र है जब प्रमुख सूचकांकों में तेजी देखने को मिली है। निवेशकों के सेंटीमेंट को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये की मजबूती से भी सहारा मिला। सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी सुबह करीब 9:25 बजे सेंसेक्स 491.33 अंक यानी 0.63 फीसदी की बढ़त के साथ 78,585.97 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 150.40 अंक यानी 0.62 फीसदी चढ़कर 24,534 अंक के आसपास पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर बढ़त के साथ खुले। इससे बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत मिला। IndiGo समेत इन शेयरों में तेजी शुरुआती कारोबार में IndiGo सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले सेंसेक्स शेयरों में रहा। इसके अलावा ITC, Tata Steel, TCS, Bajaj Finance, Infosys, Bajaj Finserv, Asian Paints और BEL जैसे प्रमुख शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी तरफ Titan और Sun Pharma दबाव में रहे। बाद के शुरुआती कारोबार में Maruti Suzuki और Sun Pharma में भी कमजोरी दर्ज की गई। ITC, Bajaj Finance और IndiGo टॉप गेनर्स में सुबह करीब 9:30 बजे के आंकड़ों के मुताबिक Sensex में ITC करीब 3.88 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे आगे था। Bajaj Finance में करीब 2.60 फीसदी, Bajaj Finserv में 2.59 फीसदी और IndiGo में करीब 2.49 फीसदी तेजी रही। TCS, L&T, Asian Paints, Eternal, Infosys और Mahindra & Mahindra समेत कई बड़े शेयर भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। वहीं Sun Pharma करीब 2.31 फीसदी और Maruti Suzuki करीब 1.93 फीसदी नीचे था। Broader Market में भी खरीदारी सिर्फ बड़े शेयरों तक ही तेजी सीमित नहीं रही। शुरुआती कारोबार में Nifty Midcap करीब 0.42 फीसदी और Nifty Smallcap करीब 0.54 फीसदी मजबूत रहा। सेक्टर की बात करें तो FMCG और Metal शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जबकि Media सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में निवेशकों की भागीदारी केवल चुनिंदा लार्ज-कैप शेयरों तक सीमित नहीं थी। रुपये को भी मिला सहारा शेयर बाजार की तेजी के साथ भारतीय रुपये में भी मजबूती देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.25 फीसदी मजबूत होकर 95.1450 के स्तर पर खुला। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.38 के स्तर पर बंद हुआ था। रुपये की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल में करीब 5 फीसदी की गिरावट बाजार की तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट एक अहम वजह रही। अमेरिका की ओर से ईरान के साथ बातचीत शुरू होने की उम्मीद के बीच तेल बाजार में दबाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, Brent crude करीब 5 फीसदी गिरकर 83.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं WTI crude करीब 5.67 फीसदी गिरकर 79.87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और चालू खाते पर दबाव कम होने की संभावना रहती है। निवेशकों की नजर अब आगे के संकेतों पर हालांकि शुरुआती तेजी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन निवेशकों के लिए आगे भी कई वैश्विक और घरेलू कारक महत्वपूर्ण रहेंगे। पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के नतीजे बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए शुरुआती तेजी को देखते हुए निवेशकों के लिए बाजार में जल्दबाजी के बजाय जोखिम और अपनी निवेश रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी है।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
Vedanta Aluminium reports record quarterly profit of Rs 6,597 crore and announces Rs 8 interim dividend
Vedanta Aluminium Q1 Results: अनिल अग्रवाल की कंपनी को बड़ी कामयाबी, मुनाफा तीन गुना बढ़कर ₹6,597 करोड़; ₹8 डिविडेंड का ऐलान

Vedanta Aluminium Q1 Results: अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता समूह की एल्युमीनियम कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। जून तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 6,597 करोड़ रुपये पहुंच गया। मजबूत राजस्व, एल्युमीनियम की कीमतों में तेजी और बेहतर परिचालन दक्षता ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी। कंपनी के लिए यह नतीजे इसलिए भी अहम हैं क्योंकि हालिया डिमर्जर के बाद यह स्वतंत्र कंपनी के तौर पर उसका पहला तिमाही प्रदर्शन है। नतीजों के साथ ही बोर्ड ने शेयरधारकों के लिए 8 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा राजस्व जून तिमाही में वेदांता एल्युमीनियम का समेकित राजस्व सालाना आधार पर 45 फीसदी बढ़कर 21,105 करोड़ रुपये हो गया। यह कंपनी का अब तक का सबसे ऊंचा तिमाही राजस्व है। वैश्विक बाजार में एल्युमीनियम की कीमतों में करीब 46 फीसदी की तेजी और बिक्री में बढ़ोतरी को राजस्व में इस उछाल की प्रमुख वजह बताया गया है। कंपनी की कमाई में भी जबरदस्त सुधार देखने को मिला। तिमाही में EBITDA सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर 10,499 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसका असर EBITDA मार्जिन पर भी पड़ा, जो एक साल पहले के 31 फीसदी से बढ़कर 50 फीसदी हो गया। उत्पादन लागत में भी आई कमी वेदांता एल्युमीनियम ने सिर्फ बिक्री और मुनाफे में ही मजबूती नहीं दिखाई, बल्कि उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में भी कामयाबी हासिल की है। जून तिमाही में एल्युमीनियम उत्पादन की लागत सालाना आधार पर 4 फीसदी और पिछली तिमाही की तुलना में 3 फीसदी घटकर 1,698 डॉलर प्रति टन रही। कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2027 के लिए उत्पादन लागत को 1,650 से 1,700 डॉलर प्रति टन के दायरे में रखने का अनुमान जताया है। वहीं, एल्युमीनियम के प्रति टन उत्पादन पर EBITDA बढ़कर 1,804 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। FY27 के लिए बड़ा उत्पादन लक्ष्य कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए एल्युमीनियम और एल्युमिना उत्पादन को लेकर भी अपना लक्ष्य तय किया है। वेदांता एल्युमीनियम का लक्ष्य इस वित्त वर्ष में 26 से 27 लाख टन एल्युमीनियम और 40 से 41 लाख टन एल्युमिना का उत्पादन करना है। कंपनी के सीईओ राजेश कुमार के मुताबिक, स्वतंत्र कंपनी के रूप में शुरुआत मजबूत परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन के साथ हुई है। उन्होंने इस प्रदर्शन को व्यावसायिक लचीलेपन, अनुशासित तरीके से काम करने और लंबे समय की रणनीति का परिणाम बताया। डिमर्जर के बाद स्वतंत्र कंपनी बनी वेदांता एल्युमीनियम वेदांता एल्युमीनियम के लिए यह तिमाही नतीजे डिमर्जर के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। जून में Vedanta Ltd से अलग होने के बाद चार नई कंपनियां स्वतंत्र रूप से शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थीं। इनमें Vedanta Aluminium Metal, Vedanta Power, Vedanta Oil & Gas और Vedanta Iron & Steel शामिल हैं। डिमर्जर का उद्देश्य अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र कंपनियों के तौर पर संचालित करना और उनके कारोबार की क्षमता के हिसाब से विकास के अवसरों को बढ़ाना है। शेयर में मामूली गिरावट शानदार तिमाही नतीजों के बावजूद शुक्रवार को वेदांता एल्युमीनियम मेटल के शेयर में मामूली गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स पर कंपनी का शेयर 0.47 फीसदी गिरकर 454.20 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले पांच कारोबारी सत्रों में शेयर में करीब 3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई थी। कंपनी के मजबूत मुनाफे, रिकॉर्ड राजस्व, लागत में कमी और अंतरिम डिविडेंड के ऐलान के बीच अब निवेशकों की नजर आगे के तिमाही प्रदर्शन और एल्युमीनियम की वैश्विक कीमतों पर रहेगी।  

surbhi अगस्त 1, 2026 0
फेड के फैसले के बाद शेयर बाजार की सपाट शुरुआत और आईटी शेयरों में तेजी
फेड के फैसले के बाद शेयर बाजार की सपाट शुरुआत, आईटी शेयरों में खरीदारी से सेंसेक्स-निफ्टी संभले

वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों ने बरती सतर्कता   मुंबई, एजेंसियां। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रही। कारोबार के शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट स्तर पर कारोबार करते दिखे। हालांकि, आईटी शेयरों में अच्छी खरीदारी के चलते बाजार को सहारा मिला और प्रमुख सूचकांक गिरावट से बच गए।   फेड के फैसले का दिखा असर   बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फेडरल रिजर्व के ताजा नीति निर्णय और उसके भविष्य के संकेतों को लेकर निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला, जिसके कारण शुरुआती कारोबार में उतार-चढ़ाव बना रहा।   आईटी सेक्टर बना बाजार का सहारा   सुबह के कारोबार में आईटी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी ने बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में हल्की कमजोरी की भरपाई की। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयरों में मजबूती दर्ज की गई।   निवेशकों की नजर अहम आंकड़ों पर   बाजार की चाल अब कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर रहेगी। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कॉर्पोरेट आय अनुमान के अनुरूप रहती है, तो बाजार में आगे भी सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 800 अंक से अधिक उछला; IT शेयरों की खरीदारी से निफ्टी 24,200 के करीब

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शानदार तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से अधिक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,200 के करीब पहुंच गया। आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने बाजार को मजबूती दी। निवेशकों की खरीदारी से बाजार का माहौल पूरे दिन सकारात्मक बना रहा।   आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी   बाजार की तेजी में आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों का सबसे अहम योगदान रहा। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा बैंकिंग, ऑटो और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया।    वैश्विक संकेतों से मिला समर्थन   विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसके चलते बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी देखने को मिली।    निवेशकों की नजर तिमाही नतीजों पर   अब बाजार की नजर प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक रहे तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में मजबूती का रुख जारी रह सकता है।

anjali kumari जुलाई 29, 2026 0
पांच दिनों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में तेजी और सेंसेक्स में उछाल
Stock Market Today: पांच दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 569 अंक उछला

नई दिल्ली, एजेंसियां । भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को लगातार पांच कारोबारी सत्रों की गिरावट पर विराम लगाते हुए मजबूत शुरुआत की। वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 569 अंक से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि एनएसई निफ्टी 23,950 के करीब पहुंच गया।   वैश्विक संकेतों से बढ़ा निवेशकों का भरोसा   विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। इन सकारात्मक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया और प्रमुख सूचकांकों में अच्छी तेजी दर्ज की गई।   रुपये में भी आई मजबूती   शेयर बाजार में तेजी के साथ-साथ भारतीय मुद्रा में भी सुधार देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे मजबूत होकर 96.25 पर पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों की धारणा को भी बल मिला।   निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम   बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निकट अवधि में निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। जब तक सूचकांक इस स्तर के ऊपर स्थायी बढ़त नहीं बनाता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यदि गिरावट आती है तो 23,600 से 23,500 का दायरा मजबूत सपोर्ट ज़ोन माना जा रहा है।   निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर   विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सोमवार की शुरुआत ने निवेशकों को राहत जरूर दी है, लेकिन आगे बाजार की चाल वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगी।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 27, 2026 0
Stock market display showing Sensex and Nifty surging after five days of losses as investors return to buying.
Share Market Opening: 5 दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 600 अंक उछला, निफ्टी 23,900 के पार

लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक दबाव में रहने के बाद सप्ताह के पहले दिन भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी की। सोमवार सुबह कारोबार की शुरुआत जोरदार तेजी के साथ हुई, जहां बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक तक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 23,900 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बाजार ने पकड़ी रफ्तार सुबह लगभग 9:23 बजे बीएसई सेंसेक्स 565.08 अंक यानी 0.74 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,624.85 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स 163.75 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,931.20 अंक पर पहुंच गया। यह तेजी ऐसे समय आई है जब पिछले सप्ताह शेयर बाजार लगातार पांचों कारोबारी दिनों में गिरावट दर्ज कर चुका था। ऐसे में सप्ताह की शुरुआत निवेशकों के लिए राहत भरी रही। सेंसेक्स के लगभग सभी शेयरों में खरीदारी शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के लगभग सभी प्रमुख शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा तेजी एविएशन कंपनी इंडिगो के शेयर में देखने को मिली, जिसमें 3 प्रतिशत से अधिक उछाल दर्ज किया गया। इसके अलावा इंफोसिस, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, इटरनल, टीसीएस, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, ट्रेंट, मारुति सुजुकी, एचसीएल टेक, एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एसबीआई, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, शुरुआती कारोबार में आईसीआईसीआई बैंक का शेयर हल्की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। निफ्टी के सेक्टरों में भी रही हरियाली एनएसई पर निफ्टी 50 इंडेक्स में इंटरग्लोबल एविएशन, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और इटरनल सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स में सबसे मजबूत तेजी देखने को मिली। वहीं, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 1 प्रतिशत तक की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर, ऑयल एंड गैस सेक्टर में अपेक्षाकृत सीमित बढ़त दर्ज की गई। रुपये में भी आई मजबूती शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा में भी मजबूती देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 0.4 प्रतिशत मजबूत होकर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में जहां रुपया 96.5625 के स्तर पर बंद हुआ था, वहीं सोमवार सुबह यह 96.1475 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बढ़ा बाजार का भरोसा बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दो सप्ताह तक चली सैन्य कार्रवाई के बाद हमले रुकने से पश्चिम एशिया में तनाव कम हुआ है। इससे कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद बढ़ी और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4.5 प्रतिशत गिरकर लगभग 92.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि पिछले सप्ताह यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई थी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे महंगाई और आयात लागत पर दबाव कम हो सकता है। निवेशकों के लिए राहत भरी शुरुआत लगातार पांच दिनों की गिरावट के बाद सोमवार की तेजी ने निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक बहाल किया है। हालांकि, आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कॉरपोरेट नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।  

surbhi जुलाई 27, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में लगातार पांचवें दिन गिरावट, सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूटा; निफ्टी 23,700 के नीचे फिसला

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,700 के स्तर से नीचे फिसल गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।   आईटी और एविएशन शेयरों में दबाव, सभी सेक्टर लाल निशान में   शुक्रवार के कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। आईटी कंपनी इन्फोसिस और एविएशन कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के कमजोर तिमाही नतीजों के बाद उनके शेयरों में गिरावट आई, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ा। बैंकिंग, ऑटो, मेटल और फार्मा सेक्टर में भी बिकवाली हावी रही, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी नुकसान के साथ कारोबार करते रहे।   कच्चे तेल और वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता   विशेषज्ञों के अनुसार ईरान-अमेरिका तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली, रुपये में कमजोरी और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू बाजार की धारणा को प्रभावित किया। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं होते और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स 350 अंकों से अधिक टूटा और निफ्टी 23,900 के नीचे फिसला

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 350 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 23,900 के नीचे फिसल गया। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और आईटी तथा वित्तीय शेयरों में बिकवाली के चलते बाजार पर दबाव बना रहा।   आईटी और बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली   कारोबार के दौरान आईटी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ऑटो सेक्टर के कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली की, जिससे बाजार का रुख कमजोर हो गया। हालांकि एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर के कुछ शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा देने की कोशिश की।   वैश्विक संकेतों का पड़ा असर   एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। वहीं, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके चलते विदेशी निवेशकों का रुख भी सतर्क बना हुआ है।   रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी नजर   विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव का भी घरेलू बाजार पर असर पड़ रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है।   कॉरपोरेट नतीजों का रहेगा असर   बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे, आरबीआई की नीतिगत दिशा, वैश्विक आर्थिक आंकड़े और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि प्रमुख कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं, तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।   निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह   विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों पर ध्यान देने और बाजार की अस्थिरता के दौरान संयम बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

anjali kumari जुलाई 23, 2026 0
Investment chart showing long-term stock market growth and why staying invested beats trying to time the market.
Share Market Investment: बाजार को टाइम करने की कोशिश पड़ सकती है महंगी, 21 साल के आंकड़ों ने बताया निवेश का बड़ा मंत्र

Share Market Investment Tips: शेयर बाजार में अक्सर निवेशक यह सोचते हैं कि गिरावट में खरीदें और तेजी आने पर बेच दें। लेकिन क्या वास्तव में मार्केट टाइमिंग से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है? एक नए अध्ययन के मुताबिक इसका जवाब 'नहीं' है। आंकड़े बताते हैं कि बाजार के कुछ बेहतरीन दिनों से चूकना आपके लंबे समय के रिटर्न को काफी कम कर सकता है। 21 साल के अध्ययन में क्या सामने आया? Abakkus Mutual Fund द्वारा अप्रैल 2005 से मई 2026 तक के 21 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें Nifty 50 TRI, Nifty Midcap 150 TRI और Nifty Smallcap 250 TRI के प्रदर्शन का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि जिन निवेशकों ने पूरे समय बाजार में निवेश बनाए रखा, उन्हें सबसे अधिक फायदा मिला। पूरे समय निवेशित रहने पर औसत रिटर्न इंडेक्स औसत रिटर्न Nifty 50 TRI 13.6% Nifty Midcap 150 TRI 17.18% Nifty Smallcap 250 TRI 15.8% सिर्फ 10 अच्छे दिन मिस किए तो कितना असर? यदि कोई निवेशक बाजार के केवल 10 सबसे अच्छे कारोबारी दिनों में निवेशित नहीं रहा, तो उसके रिटर्न में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडेक्स रिटर्न Nifty 50 TRI 9.67% Nifty Midcap 150 TRI 13.58% Nifty Smallcap 250 TRI 12.44% 50 अच्छे दिन छूटे तो रिटर्न लगभग खत्म यदि निवेशक बाजार के 50 सबसे अच्छे दिन मिस कर देता है, तो रिटर्न और भी तेजी से घट जाता है। इंडेक्स रिटर्न Nifty 50 TRI 0.89% Nifty Midcap 150 TRI 5.65% Nifty Smallcap 250 TRI 4.87% मार्केट टाइमिंग क्यों मुश्किल है? विशेषज्ञों का मानना है कि मार्केट टाइमिंग आसान नहीं है, क्योंकि इसमें दो फैसले बिल्कुल सही होने चाहिए— कब बाजार में निवेश करना है। कब निवेश निकालना है। यदि इनमें से कोई एक फैसला भी गलत हो जाए, तो लंबे समय का रिटर्न काफी प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों की राय Money Honey Financial Services के एमडी और सीईओ अनूप भैया के अनुसार, मार्केट टाइमिंग करने वाले निवेशकों को एंट्री और एग्जिट दोनों सही समय पर करने होते हैं। इनमें से एक भी निर्णय गलत होने पर कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा छूट सकता है। वहीं SIFT Capital के फाउंडर विनीत नंदा का कहना है कि निवेशक अक्सर यह मान लेते हैं कि वे बाजार की चाल को समझ सकते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बाजार हमेशा तर्क या अनुमान के मुताबिक नहीं चलता। यही कारण है कि लॉन्ग टर्म निवेश की रणनीति अधिक प्रभावी मानी जाती है। लॉन्ग टर्म निवेश क्यों बेहतर माना जाता है? कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिलता है। बाजार की अस्थायी गिरावट का असर कम होता है। बार-बार खरीद-बिक्री की जरूरत नहीं पड़ती। भावनात्मक फैसलों से बचाव होता है। लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ती है।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
NSE launches the Nifty 500 Ahimsa Index to promote ethical investing based on non-violence and responsible business practices.
NSE ने लॉन्च किया Nifty 500 Ahimsa Index, रिलायंस ग्रुप और बैंकिंग शेयरों की नो एंट्री, जानें क्या है नया इंडेक्स

Share Market News: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने निवेशकों के लिए एक नया और अनोखा इंडेक्स Nifty 500 Ahimsa Index लॉन्च किया है। यह भारत का पहला ऐसा इंडेक्स है, जिसका उद्देश्य एथिकल (नैतिक) और जिम्मेदार निवेश को बढ़ावा देना है। इस इंडेक्स में केवल उन कंपनियों को शामिल किया गया है, जो अपने कारोबार के दौरान जानबूझकर जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचातीं और जिनकी कार्यप्रणाली अहिंसा के सिद्धांतों के अनुरूप मानी जाती है। क्या है Nifty 500 Ahimsa Index? NSE ने इस इंडेक्स को Ahimsagain Foundation के सहयोग से उसके Ahimsa Investment Movement (AIM) फ्रेमवर्क के तहत विकसित किया है। यह फ्रेमवर्क कंपनियों का मूल्यांकन इन आधारों पर करता है: कंपनी के प्रोडक्ट्स दी जाने वाली सर्विस बिजनेस मॉडल संचालन की प्रक्रिया इन सभी पहलुओं को देखकर तय किया जाता है कि कंपनी अहिंसा और नैतिक कारोबारी सिद्धांतों के कितनी करीब है। निवेशकों को क्या होगा फायदा? Nifty 500 Ahimsa Index भविष्य में कई नए निवेश उत्पादों का आधार बनेगा। इसके आधार पर तैयार किए जा सकेंगे: Exchange Traded Funds (ETF) Index Funds अन्य थीम आधारित निवेश उत्पाद इससे उन निवेशकों को विकल्प मिलेगा जो ESG (Environmental, Social and Governance) और Ethical Investing में रुचि रखते हैं। किन कंपनियों को मिली जगह? NSE के अनुसार, इस इंडेक्स में कई प्रमुख सेक्टरों की कंपनियों को शामिल किया गया है, जैसे: आईटी और सॉफ्टवेयर ऑटोमोबाइल रियल एस्टेट अन्य गैर-विवादित सेक्टर इन कंपनियों का चयन AIM फ्रेमवर्क के तहत किया गया है। रिलायंस ग्रुप और बैंकिंग सेक्टर क्यों बाहर? NSE Indices की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार: रिलायंस ग्रुप की कोई भी कंपनी इस इंडेक्स में शामिल नहीं है। किसी भी बैंकिंग शेयर को भी इसमें जगह नहीं मिली है। हालांकि, एक्सचेंज ने इनके बाहर रहने का अलग से विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। चयन AIM फ्रेमवर्क के निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया है। कैसे होता है कंपनियों का चयन? Ahimsagain Framework कंपनियों को तीन श्रेणियों में बांटता है: Green Band – अहिंसा के मानकों पर बेहतर प्रदर्शन Orange Band – मध्यम स्तर Red Band – निर्धारित मानकों पर कमजोर केवल Green Band में आने वाली कंपनियों को इंडेक्स में शामिल किया जाता है, जबकि Orange और Red श्रेणी की कंपनियां बाहर रहती हैं। क्या है Ahimsagain Foundation का उद्देश्य? Ahimsagain Foundation का कहना है कि इस पहल का मकसद निवेशकों की पूंजी को ऐसी कंपनियों की ओर आकर्षित करना है जो करुणा, दया और नैतिक कारोबारी मूल्यों को प्राथमिकता देती हैं। संस्था का मानना है कि नैतिक निवेश करना चाहने वाले निवेशकों के पास अब तक स्पष्ट विकल्पों की कमी थी और यह इंडेक्स उस कमी को पूरा करेगा।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Stock Market Crash
ईरान-अमेरिका तनाव से शेयर बाजार धड़ाम: सेंसेक्स 600+ अंक टूटा, निफ्टी 24,200 के नीचे

मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-अमेरिका तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स 600 अंक से अधिक की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 24,200 के नीचे आ गया। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।   कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बढ़ा दबाव   विश्लेषकों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ा।   बैंकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली   कारोबार के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, TCS और इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव बना रहा, जिससे बाजार का व्यापक रुख कमजोर रहा।   विदेशी निवेशकों का रुख भी चिंता का कारण   बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया है। इससे भारतीय बाजारों में पूंजी निकासी का दबाव बढ़ा है और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हुई है।   आगे बाजार की दिशा इन कारकों पर निर्भर   विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है तो बाजार में फिर से रिकवरी देखने को मिल सकती है।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
Stock Market
Stock Market: आज शेयर बाजार में इन शेयरों पर रहेगी नजर, पहली तिमाही के नतीजों और कॉरपोरेट अपडेट्स से बढ़ सकती है हलचल

मुंबई, एजेंसियां। आज के कारोबारी सत्र में कई बड़े शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे। पहली तिमाही के नतीजे, कॉरपोरेट घोषणाएं और सेक्टर से जुड़े अपडेट्स के चलते इन कंपनियों के शेयरों में अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है। बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को इन शेयरों पर खास नजर रखने की सलाह दी है।   इन शेयरों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर   आज दिवीज़ लैबोरेट्रीज़ , बजाज फिनसर्व, भारत फोर्ज और कोफोर्ज प्रमुख फोकस में रहेंगे। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इन कंपनियों में तकनीकी संकेत और कारोबारी संभावनाएं बेहतर दिखाई दे रही हैं।   कॉरपोरेट अपडेट वाले शेयर भी चर्चा में   इसके अलावा टाटा एलेक्सी , एचसीएल टेक , ICICI Prudential AMC, बायोकॉन, और स्पाइसजेट भी आज निवेशकों की निगाह में रहेंगे। इन कंपनियों से जुड़े ताज़ा कॉरपोरेट घटनाक्रम और कारोबारी अपडेट्स के कारण इनमें उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।   अदाणी समूह के शेयरों पर भी फोकस   बाजार में अदाणी एंटरप्राइजेज भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हाल के दिनों में कंपनी के शेयरों में तेजी देखने को मिली है और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज भी इस शेयर में अच्छी गतिविधि बनी रह सकती है।   बाजार की दिशा पर इन कारकों की नजर   विश्लेषकों के अनुसार आज के कारोबार में अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और पहली तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले बाजार की चाल और कंपनियों के ताज़ा अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

anjali kumari जुलाई 14, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 500 अंक टूटा; निफ्टी 24,100 के नीचे फिसला

मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 500 अंक तक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 24,100 के नीचे फिसल गया। बाजार पर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर साफ दिखाई दिया।   तेल की कीमतों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता   विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे कच्चे तेल से महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसी वजह से निवेशकों ने बाजार खुलते ही बिकवाली शुरू कर दी।   इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट   शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। वहीं फार्मा सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ दवा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी दर्ज की गई। आईटी शेयरों में भी मिला-जुला रुख रहा।   आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर   बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि वैश्विक तनाव कम होता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है, लेकिन फिलहाल उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

anjali kumari जुलाई 14, 2026 0
Rising crude oil prices displayed alongside a falling stock market chart highlighting pressure on aviation and energy-related stocks.
Crude Oil Price Rise: महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में दबाव, इंडिगो, एशियन पेंट्स और BPCL समेत कई शेयर टूटे

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कच्चे तेल पर निर्भर कई कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जबकि तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। क्यों बढ़ीं कच्चे तेल की कीमतें? अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहांत में बढ़े सैन्य तनाव के बाद वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमतों पर पड़ा, जो बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनियों की लागत बढ़ने और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इन सेक्टरों के शेयरों में आई गिरावट कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा, जिनकी परिचालन लागत ईंधन या पेट्रोलियम उत्पादों पर अधिक निर्भर करती है। सोमवार के कारोबार में इन सेक्टरों के शेयरों में कमजोरी रही: एविएशन पेंट्स टायर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इन प्रमुख शेयरों में रही गिरावट शुरुआती कारोबार में कई बड़े शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। इनमें शामिल हैं: IndiGo Asian Paints BPCL अन्य ऑयल मार्केटिंग और क्रूड-सेंसिटिव कंपनियां इनमें से कई शेयरों में करीब 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। तेल उत्पादक कंपनियों को मिला फायदा जहां कच्चे तेल का महंगा होना कई कंपनियों के लिए चिंता का कारण बना, वहीं तेल उत्पादन और खोज से जुड़ी कंपनियों को इसका फायदा मिला। बाजार में ऐसी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली क्योंकि ऊंचे कच्चे तेल के दाम से उनकी आय और मुनाफे में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। निवेशकों की बढ़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर महंगाई, परिवहन लागत, कंपनियों के खर्च और देश के आयात बिल पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क रहा और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Stock market screen showing Sensex and Nifty falling sharply amid rising crude oil prices and Middle East tensions.
Stock Market Today: सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,000 के करीब; इंडिगो समेत बैंकिंग और मेटल शेयरों में गिरावट

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। सुबह कारोबार के दौरान BSE Sensex 626.40 अंक यानी 0.81% गिरकर 76,942.99 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 184 अंक यानी 0.76% टूटकर 24,022.90 पर कारोबार करता दिखा। मध्य पूर्व तनाव से बाजार पर दबाव बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, सप्ताहांत में दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, जिसके बाद ईरान ने एक बार फिर Strait of Hormuz को बंद करने का दावा किया। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बंद होने की आशंका से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा उछाल तनाव बढ़ने के बाद: Brent Crude 4% से अधिक बढ़कर 79.12 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। WTI Crude भी 4% से ज्यादा चढ़कर 74.33 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा। भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। सभी सेक्टर लाल निशान में सोमवार सुबह बाजार में बिकवाली लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिली। सभी 16 सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा दबाव इन सेक्टरों पर रहा: बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज मेटल मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले थोड़ी कम रही। वहीं India VIX, जिसे बाजार का "फियर इंडेक्स" कहा जाता है, 10% से ज्यादा उछल गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता का संकेत है। इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट सेंसेक्स के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे: टाटा स्टील इंडिगो बजाज फाइनेंस BEL अल्ट्राटेक सीमेंट लार्सन एंड टुब्रो (L&T) टाइटन HDFC बैंक मारुति सुजुकी बजाज फिनसर्व इंडिगो के शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 3% तक टूट गए। आईटी शेयरों ने दिखाई मजबूती बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों में बढ़त दर्ज की गई: TCS HCLTech Tech Mahindra NTPC विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीद से आईटी सेक्टर को समर्थन मिल रहा है। विशेषज्ञों की क्या राय है? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे अहम संकेतक कच्चे तेल की कीमत है। उनका कहना है कि यदि Brent Crude 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहता है, तो बाजार पर दबाव सीमित रह सकता है। लेकिन यदि कीमतें 90 डॉलर के ऊपर जाती हैं, तो बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिल सकता है।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Investors monitor stock market screens as Sensex surges on strong TCS earnings and rally in IT stocks.
Sensex Today: सेंसेक्स 800 अंक उछला, TCS के शानदार नतीजों और IT शेयरों की तेजी से बाजार में लौटी रौनक

भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ा दिया। वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी TCS के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में राहत ने बाजार की तेजी को मजबूती दी। सुबह करीब 9:20 बजे बीएसई सेंसेक्स 676.12 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,417.94 पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 50 196.30 अंक यानी 0.82 प्रतिशत चढ़कर 24,159.10 के स्तर पर पहुंच गया। TCS के शानदार नतीजों से IT सेक्टर में जबरदस्त खरीदारी बाजार की तेजी का सबसे बड़ा कारण आईटी शेयरों में आई मजबूती रही। जून तिमाही के नतीजों में TCS ने बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे पूरे आईटी सेक्टर में सकारात्मक माहौल बन गया। निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत से अधिक उछल गया। Tech Mahindra, TCS, HCLTech और Infosys जैसे प्रमुख शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा L&T Technology Services और Coforge के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। मुनाफे और ऑर्डर बुक दोनों में मजबूत प्रदर्शन TCS ने जून तिमाही में 13,349 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की आय बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड ने 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम लाभांश देने का भी ऐलान किया। कंपनी की ऑर्डर बुक 9.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। वहीं AI कारोबार का वार्षिक रन रेट बढ़कर 2.6 अरब डॉलर हो गया, जो इस क्षेत्र में बढ़ती मांग का संकेत माना जा रहा है। 9 हजार से ज्यादा नई भर्तियों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा TCS ने जून तिमाही के दौरान 9,279 नए कर्मचारियों की नियुक्ति की, जो पिछले एक साल से अधिक समय में सबसे ज्यादा तिमाही भर्ती है। इसे भविष्य की मांग को लेकर कंपनी के भरोसे का संकेत माना जा रहा है। कंपनी के सीईओ के. कृतिवासन ने भी आने वाली तिमाहियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। उनका कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग और लाइफ साइंस सेक्टर में टेक्नोलॉजी खर्च बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि AI कारोबार के लिए खतरा नहीं बल्कि नए अवसर लेकर आ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों से भी मिली राहत बाजार को एक और बड़ी राहत कच्चे तेल की कीमतों से मिली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद ब्रेंट क्रूड करीब 76.52 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड लगभग 72.29 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चा तेल 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचता तो भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता था। फिलहाल कीमतों के नियंत्रण में रहने से निवेशकों की चिंता कम हुई है। लगभग सभी सेक्टरों में लौटी तेजी आईटी के अलावा बैंकिंग और अन्य सेक्टरों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, पीएसयू बैंक, ऑटो, एफएमसीजी, मीडिया और रियल्टी इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी रही। वहीं बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया VIX 5 प्रतिशत से अधिक गिर गया, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार की दिशा दो अहम कारकों पर निर्भर करेगी। पहला, अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक घटनाक्रम और दूसरा, जून तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे। TCS ने कमाई के सीजन की सकारात्मक शुरुआत की है। अब निवेशकों की नजर अन्य बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो आने वाले दिनों में शेयर बाजार की अगली चाल तय कर सकते हैं। नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह अवश्य लें।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Investors monitor Sensex and Nifty as Indian stock market rebounds despite US-Iran tensions and global uncertainty.
US-ईरान तनाव के बीच शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी, सेंसेक्स 500 अंक उछला; जानिए क्यों लौटी निवेशकों की खरीदारी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वापसी की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में तीन महीनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज की गई थी। सुबह करीब 9:40 बजे सेंसेक्स 516.15 अंक (0.67%) की बढ़त के साथ 77,019.75 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 139.90 अंक (0.59%) चढ़कर 24,021.95 पर पहुंच गया। बुधवार की गिरावट के बाद क्यों लौटा बाजार? बुधवार को अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी। इससे वैश्विक बाजारों में बिकवाली देखने को मिली और भारतीय बाजार भी 2% से अधिक टूट गया। हालांकि गुरुवार को निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल हालात उतने गंभीर नहीं हैं, जितनी आशंका पहले जताई जा रही थी। इसी वजह से निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू कर दी। कच्चे तेल की कीमत अभी चिंता का बड़ा कारण नहीं विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 79–80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। यह स्तर भारत के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन फिलहाल अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जातीं, तो भारतीय बाजार पर इसका बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिला बाजार को सहारा बाजार में मजबूती का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी भी रही है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 3,954 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी आगे भी बनी रह सकती है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी दिखी तेजी गुरुवार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Smallcap 100 में 1% से अधिक की बढ़त Nifty Midcap 50 और Midcap 100 में लगभग 1% की तेजी India VIX में 7% से अधिक की गिरावट, जिससे बाजार में घबराहट कम होने के संकेत मिले किन सेक्टरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती? गुरुवार के कारोबार में कई सेक्टरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। सबसे ज्यादा तेजी इन सेक्टरों में रही— कंज्यूमर ड्यूरेबल्स रियल्टी प्राइवेट बैंक फार्मा हेल्थकेयर ऑटो एफएमसीजी पीएसयू बैंक वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा। निवेशकों ने TCS के तिमाही नतीजों से पहले मुनाफावसूली की, जिससे Infosys, HCLTech, TCS और Tech Mahindra के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और लूजर्स शुरुआती कारोबार में Eternal सबसे ज्यादा बढ़त वाला शेयर रहा। इसके अलावा Sun Pharma, Titan, Bharti Airtel, ICICI Bank, Asian Paints, Larsen & Toubro, HDFC Bank, Power Grid, UltraTech Cement और BEL में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर Infosys में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जबकि HCLTech, TCS और Tech Mahindra भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। रुपये में स्थिरता से भी मिला समर्थन भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में 95.55 प्रति डॉलर के स्तर पर लगभग स्थिर रहा। मुद्रा बाजार में स्थिरता ने भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। क्या कहते हैं बाजार के जानकार? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और नहीं बढ़ता तथा तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में आगे भी रिकवरी जारी रह सकती है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana अगस्त 14, 2026 0