कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक नई रिसर्च ने उम्मीद जगाई है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई HER-2 वैक्सीन ने न सिर्फ मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स दिखाया है, बल्कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी के साथ भी प्रभावी बनी रही है। यह खोज खासतौर पर HER-2 पॉजिटिव कैंसर–जैसे कुछ प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर–के इलाज के लिए अहम मानी जा रही है।
यह नई वैक्सीन, ES2B-C001, वायरस जैसे कणों (Virus-like particles) पर आधारित है, जो HER-2 प्रोटीन के पूरे बाहरी हिस्से को प्रदर्शित करती है। प्रीक्लिनिकल (प्रयोगशाला) अध्ययनों में इस वैक्सीन ने शरीर में मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया पैदा की, जो ट्यूमर और मेटास्टेसिस (फैलाव) को खत्म करने में सक्षम रही।
शोध में पाया गया कि इस वैक्सीन से शरीर में एंटी-HER-2 इम्यूनोग्लोबुलिन G (IgG) का स्तर काफी ऊंचा रहा और यह प्रभाव 6 महीने से अधिक समय तक बना रहा।
साथ ही, T-सेल्स की सक्रियता भी बढ़ी, जो कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सबसे अहम बात यह रही कि जब इस वैक्सीन को एंटी-HER-2 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (जैसे 4D5) के साथ दिया गया, तब भी इसकी प्रभावशीलता कम नहीं हुई।
इसका मतलब है कि पहले से चल रहे इलाज के साथ भी यह वैक्सीन असरदार बनी रह सकती है।
माउस मॉडल (चूहों पर किए गए अध्ययन) में:
यह दर्शाता है कि वैक्सीन अकेले और कॉम्बिनेशन दोनों में प्रभावी है।
यह वैक्सीन अब क्लिनिकल डेवलपमेंट के चरण में पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंसानों पर भी इसके परिणाम सकारात्मक रहते हैं, तो यह HER-2 पॉजिटिव कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है।
खासतौर पर उन मरीजों के लिए, जो पहले से एंटी-HER-2 थेरेपी जैसे ट्रास्टुजुमैब ले रहे हैं, यह एक अतिरिक्त और प्रभावी विकल्प बन सकता है।
यह रिसर्च इस दिशा में एक बड़ा कदम है कि भविष्य में कैंसर इलाज सिर्फ दवाओं तक सीमित न रहकर वैक्सीन आधारित इम्यून थेरेपी तक भी विस्तारित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। रात में एक-दो बार पेशाब के लिए उठना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि लगभग हर रात कई बार बाथरूम जाना पड़े तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को नोक्ट्यूरिया (Nocturia) कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल नींद में खलल डालने वाली समस्या नहीं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। नोक्ट्यूरिया क्या है और क्यों है चिंता का विषय? लगातार रात में पेशाब आने से नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेकर इसकी वजह की जांच कराना जरूरी है। डायबिटीज बढ़ा सकती है रात में पेशाब की समस्या डायबिटीज में रक्त में शुगर का स्तर बढ़ने पर किडनी अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। इस प्रक्रिया में अधिक पानी भी शरीर से निकलता है, जिससे बार-बार पेशाब आता है। यदि इसके साथ अधिक प्यास, भूख, थकान या वजन कम होने जैसे लक्षण हों तो ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। ओवरएक्टिव ब्लैडर भी हो सकता है कारण ओवरएक्टिव ब्लैडर की स्थिति में मूत्राशय समय से पहले सिकुड़ने लगता है, जिससे बार-बार और अचानक पेशाब की इच्छा होती है। बढ़ती उम्र, मोटापा, नसों की समस्या या ब्लैडर की मांसपेशियों की कमजोरी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। यूटीआई में भी बार-बार पेशाब आने की शिकायत यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के कारण भी रात में कई बार पेशाब आ सकता है। इसके साथ पेशाब में जलन, दर्द, दुर्गंध, धुंधला पेशाब या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। समय पर इलाज न होने पर संक्रमण किडनी तक फैल सकता है। किडनी की बीमारी का भी हो सकता है संकेत किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने का काम करती है। यदि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही हो तो पेशाब की आदतों में बदलाव आ सकता है। पैरों में सूजन, थकान, भूख कम लगना और हाई ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण भी इसके साथ दिखाई दे सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर और दवाओं का असर भी जिम्मेदार हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में दी जाने वाली कुछ डाययूरेटिक दवाएं शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर निकालती हैं। यदि इन्हें शाम या रात में लिया जाए तो रात में बार-बार पेशाब की जरूरत पड़ सकती है। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी को प्रभावित कर सकता है। लगातार समस्या होने पर डॉक्टर से करें संपर्क विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ अन्य लक्षण भी हों, तो स्वयं इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और सही उपचार से कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है।
रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसाले न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। लेकिन अगर इन्हीं मसालों में स्टार्च की मिलावट हो जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए Food Safety and Standards Authority of India ने पाउडर मसालों में संभावित स्टार्च की मिलावट पहचानने का एक आसान घरेलू तरीका बताया है। घर पर ऐसे करें स्टार्च की मिलावट की जांच FSSAI के अनुसार, पाउडर मसालों में स्टार्च की संभावित मिलावट की जांच के लिए यह आसान टेस्ट किया जा सकता है: कांच की साफ प्लेट या कटोरी में थोड़ा-सा पाउडर मसाला लें। उस पर लगभग 0.5 ml आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें डालें। यदि मसाले का रंग नीला या नीला-काला हो जाता है, तो यह स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। यदि रंग में कोई बदलाव नहीं होता, तो स्टार्च की मिलावट की संभावना कम मानी जाती है। ध्यान दें: यह एक प्रारंभिक स्क्रीनिंग टेस्ट है। केवल इस परीक्षण के आधार पर किसी उत्पाद को मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। यदि किसी मसाले पर संदेह हो, तो उसकी जांच अधिकृत प्रयोगशाला में कराना उचित रहेगा। मिलावटी मसाले क्यों हो सकते हैं नुकसानदायक? मसाले सामान्यतः पाचन में सहायता करते हैं, लेकिन मिलावटी उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक निम्न गुणवत्ता या मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। विशेष रूप से, जिन लोगों को मधुमेह (डायबिटीज) है, उन्हें अपने भोजन की सामग्री और गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देना चाहिए। हालांकि, केवल स्टार्च की थोड़ी मात्रा अपने आप में "जानलेवा" नहीं मानी जाती। जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि मिलावट किस प्रकार की है, कितनी मात्रा में है और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति क्या है। मसालों में मिलावट क्यों की जाती है? खाद्य पदार्थों में मिलावट अक्सर लागत कम करने, वजन बढ़ाने या उत्पाद को अधिक आकर्षक दिखाने के उद्देश्य से की जाती है। स्टार्च मिलाने से कुछ पाउडर मसालों की मात्रा और बनावट बढ़ी हुई दिखाई दे सकती है, जिससे उपभोक्ता को वास्तविक गुणवत्ता का पता नहीं चल पाता।
नई दिल्ली, एजेंसियां। बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम, गले में खराश और हल्की खांसी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में कई लोग राहत के लिए घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। आयुर्वेद में काढ़े को एक पारंपरिक पेय माना जाता है, जिसे प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और मसालों से तैयार किया जाता है। हालांकि, काढ़ा किसी बीमारी का इलाज नहीं है, लेकिन सामान्य सर्दी-जुकाम में यह आराम देने वाला घरेलू उपाय हो सकता है। आयुर्वेदिक काढ़ा बनाने के लिए जरूरी सामग्री घर पर काढ़ा बनाने के लिए आपको इन चीजों की जरूरत होगी— 1 गिलास पानी 5-6 तुलसी के पत्ते 1 इंच अदरक का टुकड़ा 2-3 काली मिर्च 1 छोटी दालचीनी की छड़ी 2 लौंग 1 चम्मच शहद (स्वाद के अनुसार) काढ़ा बनाने की आसान विधि सबसे पहले एक पैन में पानी गर्म करें। इसमें तुलसी के पत्ते, अदरक, काली मिर्च, दालचीनी और लौंग डालकर धीमी आंच पर उबालें। जब पानी घटकर लगभग आधा रह जाए तो गैस बंद कर दें। इसके बाद काढ़े को छान लें और हल्का गुनगुना होने पर इसमें शहद मिलाकर सेवन किया जा सकता है। सर्दी-जुकाम में कैसे मदद कर सकता है काढ़ा? काढ़े में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे अदरक, तुलसी और मसाले गले की खराश, बंद नाक और हल्की खांसी में आराम देने में मदद कर सकते हैं। गर्म पेय गले को राहत पहुंचाता है और ठंड के मौसम में शरीर को गर्माहट देने में सहायक हो सकता है। काढ़ा पीने के संभावित फायदे गले की खराश में राहत: गर्म काढ़ा गले की जलन और खराश को कम करने में मदद कर सकता है। शरीर को गर्माहट देता है: ठंड के मौसम में काढ़ा शरीर को अंदर से गर्म रखने में सहायक हो सकता है। इम्यूनिटी को सपोर्ट करता है: तुलसी और मसालों में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं। पाचन के लिए फायदेमंद: अदरक और दालचीनी जैसे मसाले पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। सावधानी भी जरूरी काढ़ा सामान्य सर्दी-जुकाम में राहत देने वाला घरेलू उपाय हो सकता है, लेकिन तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लंबे समय तक खांसी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। किसी भी घरेलू उपाय का सेवन अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही करें।