स्वास्थ्य

फोन की लत से बढ़ी गर्दन की समस्या, ₹3 लाख की सर्जरी के बाद अभिनेत्री शकीला ने दी चेतावनी

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0
Shakeela
Shakeela's Neck Problem

चेन्नई, एजेंसियां। अभिनेत्री शकीला ने हाल ही में अपनी सेहत को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक मोबाइल पर गेम खेलने और वीडियो देखने की आदत के कारण उन्हें गर्दन में गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा और आखिरकार करीब ₹3 लाख की सर्जरी करानी पड़ी। शकीला ने अस्पताल से घर लौटने के बाद अपने YouTube चैनल पर वीडियो साझा कर इसकी जानकारी दी।

 

घंटों करवट लेकर खेलती थीं मोबाइल गेम

 

शकीला के मुताबिक वह बिस्तर पर करवट लेकर लगातार करीब चार घंटे तक मोबाइल गेम खेलती थीं। गेमिंग के बाद वह YouTube और Instagram पर घंटों रील्स और वीडियो भी देखती थीं। लंबे समय तक गर्दन को एक ही स्थिति में रखने के कारण उनकी समस्या गंभीर होती चली गई।

 

₹3 लाख में करानी पड़ी गर्दन की सर्जरी

 

समस्या बढ़ने के बाद शकीला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी गर्दन की बड़ी सर्जरी की गई। रिपोर्टों के अनुसार इस ऑपरेशन पर करीब ₹3 लाख खर्च हुए। सर्जरी के बाद उन्हें नेक कॉलर पहनने की सलाह दी गई है और फिलहाल उन्हें रोजमर्रा के कुछ कामों में भी मदद की जरूरत पड़ रही है।

 

बच्चों और फोन यूजर्स को दी चेतावनी

 

शकीला ने अपने अनुभव के बाद लोगों से मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करने की अपील की। उन्होंने खास तौर पर माता-पिता को बच्चों को लंबे समय तक मोबाइल न देने की सलाह दी। उनका कहना है कि फोन उपयोगी है, लेकिन इसका इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक ही किया जाना चाहिए।

 

विशेषज्ञों ने भी सही पोस्चर पर दिया जोर

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार समस्या सिर्फ फोन से नहीं, बल्कि लंबे समय तक गलत पोस्चर में फोन इस्तेमाल करने से बढ़ सकती है। स्क्रीन को आंखों के करीब ऊंचाई पर रखना, लगातार एक ही मुद्रा में न रहना और बीच-बीच में ब्रेक लेना गर्दन पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकता है।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

स्वास्थ्य

View more
Magadh Medical Hospital
मगध मेडिकल अस्पताल में बनेगा नया ब्लॉक, मरीजों को मिलेंगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं

गया, एजेंसियां। अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में नया ब्लॉक विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।    अस्पताल में बढ़ाया जा रहा स्वास्थ्य ढांचा   मगध मेडिकल अस्पताल गया समेत आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्र है। अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। हाल ही में यहां कैथ लैब शुरू करने की तैयारी की जानकारी सामने आई थी।   मरीजों का बढ़ता दबाव   अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसी वजह से अतिरिक्त भवन और सुविधाओं की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। जुलाई में डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए अस्पताल में 100 बेड का विशेष वार्ड भी तैयार किया गया था।   नई सुविधाओं से इलाज की क्षमता बढ़ने की उम्मीद   नए ब्लॉक के निर्माण से अस्पताल में मरीजों के लिए अतिरिक्त स्थान और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है। इससे गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार मिलने और दूसरे बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0
AIIMS Patna

पटना AIIMS में पहली बार जीवित दाता से सफल लिवर ट्रांसप्लांट, 18 घंटे चली जटिल सर्जरी

Shakeela

फोन की लत से बढ़ी गर्दन की समस्या, ₹3 लाख की सर्जरी के बाद अभिनेत्री शकीला ने दी चेतावनी

पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से मांगा जवाब, पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लागू करने में देरी पर सख्ती

used syringe prick
HIV Risk: इस्तेमाल की हुई सिरिंज लग जाए तो तुरंत क्या करें? जानें HIV से बचाव के जरूरी कदम

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सिरिंज साझा करने से जुड़े HIV संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की खबरों के बीच इस्तेमाल की हुई सुई से संक्रमण के जोखिम को लेकर भी चिंता बढ़ी है। संक्रमित रक्त के संपर्क में आने पर HIV के साथ हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C जैसे संक्रमण का खतरा भी हो सकता है।   संक्रमित सिरिंज से कैसे फैल सकता है HIV?   यदि किसी HIV संक्रमित व्यक्ति पर इस्तेमाल की गई सुई या सिरिंज किसी दूसरे व्यक्ति की त्वचा में चुभ जाती है, तो संक्रमित रक्त के जरिए वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। हालांकि, हर इस्तेमाल की हुई सुई से HIV संक्रमण नहीं होता। जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि सुई किस व्यक्ति पर इस्तेमाल हुई थी, उसमें संक्रमित रक्त मौजूद था या नहीं और घटना कितनी देर पहले हुई।   सिरिंज लग जाए तो सबसे पहले क्या करें?   ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत ये कदम उठाने चाहिए: चोट वाली जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। घाव को जोर से रगड़ें या दबाएं नहीं। घटना के बारे में तुरंत डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को बताएं। यदि संभव हो तो यह जानकारी दें कि सुई कब लगी और पहले किस व्यक्ति पर इस्तेमाल हुई थी। डॉक्टर की सलाह के अनुसार HIV, हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C की जांच कराएं। PEP से कम हो सकता है HIV का जोखिम   संभावित HIV एक्सपोजर के बाद डॉक्टर पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) की सलाह दे सकते हैं। यह HIV संक्रमण को रोकने के लिए दी जाने वाली आपातकालीन दवा है। इसे जितनी जल्दी शुरू किया जाए उतना बेहतर, और आमतौर पर इसे एक्सपोजर के 72 घंटे के भीतर शुरू करना जरूरी माना जाता है। PEP डॉक्टर की सलाह से ही लें।   कभी साझा न करें सुई और सिरिंज   HIV समेत रक्त से फैलने वाले संक्रमण से बचने के लिए हर बार नई और स्टेराइल सुई व सिरिंज का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। किसी इस्तेमाल की हुई या सार्वजनिक स्थान पर पड़ी सुई को हाथ से नहीं उठाना चाहिए।   ध्यान दें: अगर अभी-अभी इस्तेमाल की हुई सुई चुभी है, तो PEP के लिए समय महत्वपूर्ण है—इंतजार न करें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

anjali kumari अगस्त 14, 2026 0
Woman practicing relaxing yoga poses at home to reduce stress, calm the mind and promote physical relaxation.

तनाव और स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकते हैं ये 7 योगासन, शरीर को भी मिलेगा सुकून

Coconut water and electrolyte drinks compared for hydration after fever, diarrhea, vomiting, exercise and heavy sweating

बुखार, दस्त या एक्सरसाइज के बाद क्या पिएं? नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक, जानिए किस स्थिति में कौन बेहतर

दिल्ली एनसीआर में अंगदान की धीमी रफ्तार और प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा

World Organ Donation Day: दिल्ली-NCR में अंगदान की रफ्तार बेहद धीमी, राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे

सुप्रीम कोर्ट में कैंसर को नोटिफिएबल बीमारी घोषित करने का मामला
कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने का निर्देश, सुप्रीम कोर्ट ने 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मांगा जवाब

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की शुरुआती पहचान और मरीजों के बेहतर उपचार के लिए 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कैंसर को ‘नोटिफिएबल बीमारी’ घोषित करने की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा है।   कैंसर के मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग पर जोर   सुप्रीम कोर्ट के सामने दायर याचिका में कैंसर को नोटिफिएबल बीमारी घोषित करने की मांग की गई थी। इसका उद्देश्य देश में कैंसर के मामलों का ज्यादा सटीक आंकड़ा तैयार करना और बीमारी की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है। नोटिफिएबल बीमारी घोषित होने के बाद संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों के लिए बीमारी के मामलों की जानकारी सरकारी स्वास्थ्य अधिकारियों को देना अनिवार्य हो जाता है। इससे सरकार को बीमारी के प्रसार, अलग-अलग क्षेत्रों में मरीजों की संख्या और उपचार की जरूरतों का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है।   19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर नजर   रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कैंसर को नोटिफिएबल बीमारी घोषित करने पर विचार करने को कहा है। अदालत ने इस मामले में केंद्र से भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। बताया गया है कि देश के कई राज्यों में कैंसर की रिपोर्टिंग और निगरानी की व्यवस्था पहले से लागू है। तेलंगाना ने भी 2026 में कैंसर को नोटिफिएबल बीमारी घोषित करते हुए मामलों की रिपोर्टिंग की व्यवस्था शुरू की है।   जल्दी पहचान और इलाज में मिल सकती है मदद   कैंसर के मामलों की नियमित और अनिवार्य रिपोर्टिंग से बीमारी के वास्तविक बोझ का आकलन करने में मदद मिल सकती है। इससे सरकार को कैंसर स्क्रीनिंग, उपचार केंद्रों, दवाओं और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की योजना बनाने में बेहतर आंकड़े मिलेंगे। याचिका में भी तर्क दिया गया था कि कैंसर की जल्दी पहचान और समय पर उपचार के लिए देशभर में बेहतर निगरानी व्यवस्था जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर की निगरानी और स्वास्थ्य नीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
Fenugreek seeds and water in a glass, commonly consumed as a home remedy for blood sugar management.

ब्लड शुगर कम करने में कितना असरदार है मेथी का पानी? रिसर्च में क्या आया सामने, जानें सेवन का सही तरीका

Woman experiencing chronic lower back pain and morning stiffness, possible signs of axial arthritis affecting spinal mobility.

लगातार कमर दर्द को सामान्य न समझें, एक्सियल अर्थराइटिस हो सकता है कारण; चलने-फिरने में भी आ सकती है परेशानी

Cold Plunge और Ice Bath के फायदे और नुकसान

Ice Therapy Trend: भारत में तेजी से बढ़ रहा Cold Plunge का क्रेज, जानें फायदे और नुकसान

0 Comments

Top week

Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
राष्ट्रीय

संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

surbhi अगस्त 11, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?