एक नई रिसर्च में सामने आया है कि Rheumatoid Arthritis के इलाज में इस्तेमाल होने वाले लो-डोज ग्लूकोकॉर्टिकोइड ट्रीटमेंट से रीढ़ की हड्डी यानी लम्बर स्पाइन की बोन डेंसिटी पर असर पड़ सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि इससे फ्रैक्चर का खतरा सामान्य इलाज की तुलना में ज्यादा नहीं पाया गया।
यह निष्कर्ष एक बड़े मेटा-एनालिसिस में सामने आया है, जिसमें कई क्लिनिकल ट्रायल्स के डेटा का विश्लेषण किया गया।
ग्लूकोकॉर्टिकोइड दवाएं आमतौर पर Rheumatoid Arthritis के मरीजों में सूजन और दर्द को नियंत्रित करने के लिए दी जाती हैं। इन्हें अक्सर Disease-Modifying Antirheumatic Drugs (DMARDs) के साथ इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि लंबे समय से यह सवाल बना हुआ था कि इन दवाओं का हड्डियों की सेहत पर कितना असर पड़ता है।
रिसर्चर्स ने 1,112 मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया। इसमें उन मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें प्रतिदिन 7.5 mg या उससे कम प्रेडनिसोन समकक्ष ग्लूकोकॉर्टिकोइड दिया गया था।
दो साल तक किए गए अध्ययन में पाया गया कि ग्लूकोकॉर्टिकोइड लेने वाले मरीजों में लम्बर स्पाइन की बोन मिनरल डेंसिटी में हल्की कमी देखी गई।
हालांकि फीमर यानी जांघ की हड्डी पर कोई बड़ा असर नहीं पाया गया।
स्टडी के दौरान कुल 35 मरीजों में क्लिनिकल फ्रैक्चर दर्ज किए गए, लेकिन ग्लूकोकॉर्टिकोइड ट्रीटमेंट लेने वाले और सामान्य इलाज पाने वाले मरीजों के बीच फ्रैक्चर के खतरे में कोई बड़ा अंतर नहीं मिला।
रिसर्चर्स का कहना है कि बोन लॉस की गंभीरता हर मरीज में अलग हो सकती है और यह व्यक्ति की पहले से मौजूद ऑस्टियोपोरोसिस रिस्क पर भी निर्भर करती है।
विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य में लंबी अवधि के प्रभावों को समझने और हड्डियों को नुकसान से बचाने के उपायों पर और रिसर्च की जरूरत है।
डॉक्टरों का मानना है कि इलाज के फायदे और संभावित जोखिमों के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों को बेहतर राहत मिलने के साथ हड्डियों की सेहत भी सुरक्षित रह सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आज की खराब लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान और बाहर का ज्यादा खाना पेट से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा रहा है। गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और भारीपन जैसी दिक्कतें अब आम हो गई हैं। ऐसे में कुछ नेचुरल हर्बल चाय पेट को आराम पहुंचाने और पाचन बेहतर करने में मददगार साबित हो सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, नियमित रूप से सही मात्रा में इन चाय का सेवन शरीर को हल्का और फ्रेश महसूस कराने में मदद कर सकता है। अदरक की चाय से मिल सकती है राहत Ginger Tea पेट से जुड़ी समस्याओं के लिए सबसे लोकप्रिय घरेलू उपायों में से एक मानी जाती है। अदरक में मौजूद गुण गैस, सूजन और पेट में होने वाली जलन को कम करने में सहायक हो सकते हैं। यह पाचन प्रक्रिया को तेज करने और ब्लोटिंग कम करने में मदद कर सकती है। पुदीना की चाय पेट को देती है ठंडक Mint Tea पेट के मसल्स को रिलैक्स करने में मदद करती है। इससे गैस, पेट दर्द और भारीपन जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर को अंदर से ठंडक और ताजगी देने में भी सहायक माना जाता है। सौंफ की चाय पाचन के लिए फायदेमंद Fennel Tea लंबे समय से पाचन सुधारने के लिए इस्तेमाल की जाती रही है। यह पेट में जमा अतिरिक्त गैस को बाहर निकालने और एसिडिटी कम करने में मदद कर सकती है। खाना खाने के बाद इसका सेवन पेट हल्का महसूस कराने में सहायक माना जाता है। कैमोमाइल और ग्रीन टी भी असरदार Chamomile Tea तनाव कम करने और बेहतर नींद में मदद कर सकती है, जिससे पाचन भी सुधरता है। वहीं Green Tea शरीर को डिटॉक्स करने और मेटाबॉलिज्म बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है। हालांकि ग्रीन टी को खाली पेट पीने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं, खासकर ओवरी से जुड़ी बीमारियों के इलाज और पहचान में बड़ी भूमिका निभा सकता है। एक नई सिस्टमेटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में पाया गया है कि AI तकनीक ओवेरियन कैंसर और अन्य ओवेरियन कंडीशंस की पहचान और इलाज को ज्यादा सटीक और पर्सनलाइज्ड बना सकती है। रिसर्च के अनुसार, AI आधारित मॉडल्स ने ओवेरियन कैंसर की पहचान में काफी बेहतर प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बना सकती है। ओवेरियन कैंसर पहचानने में AI की बड़ी सफलता स्टडी में पाया गया कि AI मॉडल्स ने अल्ट्रासाउंड स्कैन और ब्लड टेस्ट डेटा को मिलाकर ओवेरियन कैंसर की पहचान लगभग 90 प्रतिशत मामलों में सही तरीके से की। रिपोर्ट के मुताबिक, AI सिस्टम्स ने कैंसर की मौजूदगी पहचानने में 89 से 94 प्रतिशत तक की सटीकता दिखाई। वहीं जिन मरीजों में कैंसर नहीं था, उन्हें सही तरीके से पहचानने की क्षमता भी 85 से 91 प्रतिशत तक रही। सर्जरी और IVF में भी मददगार AI सिर्फ कैंसर की पहचान तक सीमित नहीं है। रिसर्च में बताया गया कि Explainable AI टूल्स एडवांस ओवेरियन कैंसर में सर्जिकल प्लानिंग में भी प्रभावी साबित हुए। इन टूल्स ने यह अनुमान लगाने में मदद की कि सर्जरी के दौरान सभी दिखाई देने वाले कैंसर सेल्स को पूरी तरह हटाया जा सकेगा या नहीं। इसके अलावा IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया में भी AI उपयोगी साबित हुआ। AI एल्गोरिद्म ने ओवेरियन स्टिम्युलेशन प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने और फॉलिकल ग्रोथ का अनुमान लगाने में डॉक्टरों की मदद की। PCOS जैसी समस्याओं में भी संभावनाएं रिसर्चर्स के मुताबिक, AI तकनीक Polycystic Ovary Syndrome जैसी जटिल हार्मोनल समस्याओं की पहचान और इलाज को भी अधिक सटीक बना सकती है। AI की मदद से मरीज की स्थिति के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार करना संभव हो सकता है। अभी भी मौजूद हैं कई चुनौतियां हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी माना कि रिसर्च के अच्छे नतीजों के बावजूद AI को रोजमर्रा की क्लिनिकल प्रैक्टिस में लागू करना अभी आसान नहीं है। 81 स्टडीज के विश्लेषण में पाया गया कि कई रिसर्च अलग-अलग AI सिस्टम्स और रेट्रोस्पेक्टिव डेटा पर आधारित थीं। सिर्फ 22 प्रतिशत स्टडीज में मल्टीसेंटर और प्रॉस्पेक्टिव वैलिडेशन किया गया था। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने मजबूत वैलिडेशन, स्टैंडर्ड रिपोर्टिंग सिस्टम और क्लिनिकल वर्कफ्लो में बेहतर इंटीग्रेशन की जरूरत बताई है। जिम्मेदार AI उपयोग पर जोर रिसर्चर्स ने कहा कि हेल्थकेयर सेक्टर में AI का उपयोग करते समय एथिकल और जिम्मेदार गवर्नेंस बेहद जरूरी है। मरीजों की प्राइवेसी, डेटा सुरक्षा और मेडिकल फैसलों की पारदर्शिता को प्राथमिकता देना अहम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकता है, खासकर ओवेरियन कैंसर, IVF और हार्मोनल डिसऑर्डर्स के इलाज में।
क्यों बढ़ रही है शरीर में inflammation की समस्या? आजकल खराब लाइफस्टाइल, तनाव, कम नींद, ज्यादा शुगर और प्रोसेस्ड फूड की वजह से शरीर में inflammation यानी अंदरूनी सूजन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके शुरुआती संकेत अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे लगातार थकान, पेट फूलना, स्किन पर पिंपल्स, सुस्ती या शरीर में भारीपन महसूस होना। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोजमर्रा की छोटी हेल्दी आदतें शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं। ऐसे में anti-inflammatory drinks शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ सूजन कम करने में भी सहायक मानी जाती हैं। 1. हल्दी और काली मिर्च की चाय हल्दी में मौजूद curcumin शरीर की सूजन कम करने में मदद करता है। वहीं काली मिर्च इसके असर को बढ़ाने का काम करती है। कैसे बनाएं? एक कप पानी में आधा चम्मच हल्दी, थोड़ा अदरक और एक चुटकी काली मिर्च डालकर 5-7 मिनट तक उबालें। चाहें तो इसमें शहद या थोड़ा दूध मिला सकते हैं। 2. अदरक और नींबू पानी अदरक को प्राकृतिक anti-inflammatory माना जाता है, जबकि नींबू शरीर को detox करने और hydration बनाए रखने में मदद करता है। कैसे बनाएं? पानी में अदरक उबालें और फिर उसमें नींबू का रस मिलाएं। स्वाद के लिए थोड़ा शहद भी डाल सकते हैं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 3. ग्रीन टी और पुदीना ग्रीन टी में antioxidants भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। पुदीना इसे refreshing बनाता है और पाचन में मदद करता है। कैसे बनाएं? गर्म पानी में ग्रीन टी और पुदीने की पत्तियां डालकर 2-3 मिनट तक छोड़ दें। चाहें तो नींबू भी मिला सकते हैं। गर्मियों में इसे chilled drink की तरह भी पिया जा सकता है। 4. Tart Cherry Spritzer टार्ट चेरी में ऐसे compounds पाए जाते हैं जो शरीर की सूजन और muscle soreness कम करने में मदद कर सकते हैं। कैसे बनाएं? एक गिलास में बिना शक्कर वाला tart cherry juice लें और उसमें sparkling water मिलाएं। ऊपर से थोड़ा नींबू निचोड़ें और बर्फ डालकर सर्व करें। 5. खीरा, पुदीना और चिया सीड्स वाला पानी यह ड्रिंक गर्मियों में शरीर को ठंडक और hydration देने के साथ digestion में भी मदद कर सकता है। Chia seeds में fiber और omega-3 fatty acids पाए जाते हैं। कैसे बनाएं? पानी में खीरे के टुकड़े, पुदीने की पत्तियां और चिया सीड्स डालें। 15-20 मिनट बाद इसमें नींबू का रस मिलाकर पिएं। रोजाना की छोटी आदतें दे सकती हैं बड़ा फायदा विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी ड्रिंक अकेले चमत्कार नहीं कर सकती, लेकिन रोजाना sugary beverages की जगह हेल्दी drinks अपनाने से शरीर को फायदा मिल सकता है। सही खानपान, पर्याप्त नींद और hydration के साथ ये drinks overall health बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।