स्वास्थ्य

Best Dinner Time for Better Metabolic Health

बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए रात का खाना कब खाना चाहिए? विशेषज्ञ ने बताया सही समय

surbhi मई 18, 2026 0
Healthy early dinner setup with vegetables and balanced meal supporting better metabolic and circadian health
Best Dinner Time for Metabolic Health

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर देर रात खाना खाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि डिनर का समय हमारी मेटाबॉलिक हेल्थ, नींद और लंबी उम्र पर बड़ा असर डाल सकता है। हाल ही में longevity और regenerative medicine विशेषज्ञ Dr Saranya Wyles ने बताया कि शाम को जल्दी खाना खाना शरीर की प्राकृतिक circadian rhythm के साथ बेहतर तालमेल बनाता है और इससे overall health को फायदा मिल सकता है।

शाम 6 बजे से पहले डिनर को माना बेहतर

Mayo Clinic में cellular ageing और regenerative medicine विशेषज्ञ डॉ. सारन्या वायल्स का कहना है कि वह अपने परिवार के साथ नियमित समय पर डिनर करने को प्राथमिकता देती हैं। उनके अनुसार, आदर्श रूप से शाम का खाना 6 बजे से पहले खा लेना चाहिए। वहीं रविवार को उनके घर में डिनर का समय और जल्दी, यानी करीब 4:30 बजे रखा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी खाना खाने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी circadian rhythm सही तरीके से काम करती है, जिससे digestion और metabolic health बेहतर बनी रहती है।

क्या है Circadian Rhythm?

Circadian rhythm शरीर की 24 घंटे चलने वाली जैविक प्रक्रिया है, जो सूरज की रोशनी और दिन-रात के चक्र से प्रभावित होती है। यही प्रक्रिया तय करती है कि शरीर में कौन-से हार्मोन कब रिलीज होंगे, नींद कैसी होगी और ऊर्जा का स्तर कैसा रहेगा।

Nutritionist और hormone विशेषज्ञ Hannah Alderson के अनुसार cortisol hormone, जिसे stress hormone भी कहा जाता है, सुबह सबसे अधिक सक्रिय होता है और दिनभर धीरे-धीरे कम होता जाता है। ऐसे में देर रात भारी भोजन करना शरीर को भ्रमित कर सकता है, क्योंकि उस समय शरीर आराम की तैयारी कर रहा होता है, न कि digestion की।

देर रात खाना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?

विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • देर रात भारी भोजन करने से digestion प्रभावित हो सकता है
  • नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है
  • इंसुलिन sensitivity कम हो सकती है
  • शरीर का metabolic balance बिगड़ सकता है

हालांकि बहुत ज्यादा भूखे पेट सोना भी नींद को प्रभावित कर सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी माना जाता है।

हेल्दी डिनर के लिए अपनाती हैं ‘Modular Dinner’ तरीका

डॉ. सारन्या वायल्स ने अपने व्यस्त शेड्यूल में healthy eating बनाए रखने के लिए “Modular Dinner” strategy अपनाई हुई है। इसका मतलब है कि सप्ताहांत में खाने की बेसिक तैयारी कर ली जाए और फिर सप्ताह के दिनों में कुछ ही मिनटों में भोजन तैयार किया जा सके।

इसके तहत वह पहले से तैयार रखती हैं:

  • कटे हुए गाजर, खीरा, टमाटर और सेलरी
  • स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसे फल
  • चिकन या टोफू जैसे प्रोटीन स्रोत
  • क्विनोआ जैसे whole grains

उनका कहना है कि slow cooker का इस्तेमाल समय बचाने में काफी मदद करता है।

रंग-बिरंगे भोजन को देती हैं प्राथमिकता

एक dermatologist और longevity expert होने के नाते डॉ. वायल्स खाने में रंगों की विविधता को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनके अनुसार अलग-अलग रंगों वाली सब्जियां और फल शरीर को phytonutrients प्रदान करते हैं, जो कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद करते हैं।

वह खास तौर पर इन खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने की सलाह देती हैं:

  • बैंगनी शकरकंद
  • ब्रोकली
  • कद्दू
  • हरी पत्तेदार सब्जियां

Gut Health पर भी ध्यान जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी metabolic health के लिए gut health भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए डॉ. वायल्स प्रोबायोटिक और fermented foods को डाइट में शामिल करती हैं, जैसे:

  • दही
  • Kimchi
  • Sauerkraut

इसके अलावा Omega-3 से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे:

  • Salmon
  • Sardines
  • Avocado

और olive oil, turmeric, salt और pepper जैसे मसालों और healthy dressings को भी वह जरूरी मानती हैं।

क्या कहती है यह रिसर्च?

विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक सख्त नियमों से ज्यादा जरूरी है consistency यानी नियमितता। समय पर भोजन करना, संतुलित डाइट लेना और शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी के अनुसार जीवनशैली अपनाना metabolic health को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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सिर्फ शराब ही नहीं, ये 5 आदतें भी चुपचाप खराब कर सकती हैं आपका लिवर; पेनकिलर से लेकर जंक फूड तक रहें सतर्क

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Asthenopia (Eye Strain) Symptoms: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन लगातार स्क्रीन देखने की आदत आंखों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग एस्थेनोपिया (Asthenopia) यानी आई स्ट्रेन (Eye Strain) की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि उन्हें इसका पता भी नहीं होता। मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पंचशील पार्क की सीनियर आई सर्जन (कैटरेक्ट, LASIK एवं कॉर्निया) और एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. सोनिका गुप्ता के अनुसार, एस्थेनोपिया आंखों के अत्यधिक उपयोग के कारण होने वाली एक सामान्य समस्या है। हालांकि यह आमतौर पर आंखों की रोशनी को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाती, लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह दैनिक जीवन, काम करने की क्षमता और आंखों के आराम को प्रभावित कर सकती है। क्या है एस्थेनोपिया? एस्थेनोपिया या आई स्ट्रेन वह स्थिति है, जब लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट, किताब या अन्य नजदीकी वस्तुओं पर लगातार ध्यान केंद्रित करने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं। यह समस्या विशेष रूप से उन लोगों में अधिक देखी जाती है जो कई घंटों तक स्क्रीन के सामने काम करते हैं या लगातार पढ़ाई करते हैं। एस्थेनोपिया के सामान्य लक्षण यदि आपकी आंखों पर लगातार अधिक दबाव पड़ रहा है, तो निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं: धुंधला दिखाई देना आंखों में थकान या भारीपन आंखों में जलन या चुभन ड्राई आई (आंखों का सूखना) आंखों में खुजली सिरदर्द फोकस करने में कठिनाई तेज रोशनी से परेशानी (Light Sensitivity) लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद असहज महसूस होना किन कारणों से होती है आई स्ट्रेन? विशेषज्ञों के अनुसार, एस्थेनोपिया के पीछे कई कारण हो सकते हैं: लंबे समय तक बिना ब्रेक लिए स्क्रीन देखना मोबाइल या कंप्यूटर इस्तेमाल करते समय कम पलक झपकना लगातार पढ़ाई या टाइपिंग करना कम या अधिक तेज रोशनी में काम करना स्क्रीन पर पड़ने वाली चमक (Glare) स्क्रीन से उचित दूरी न रखना आंखों का नंबर बदल जाना या बिना जांच के पुराना चश्मा इस्तेमाल करना बिना इलाज के दृष्टि संबंधी समस्याएं किन लोगों को अधिक खतरा? आई स्ट्रेन किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन जोखिम सबसे अधिक इन लोगों में देखा जाता है: ऑफिस में कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने वाले ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्र गेमर्स मोबाइल का अधिक उपयोग करने वाले लंबे समय तक वाहन चलाने वाले बच्चे और बुजुर्ग, जिनका स्क्रीन टाइम बढ़ गया है क्या एस्थेनोपिया से आंखों की रोशनी चली जाती है? विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में एस्थेनोपिया से आंखों की रोशनी स्थायी रूप से नहीं जाती। हालांकि लगातार आई स्ट्रेन रहने पर आंखों की थकान, असुविधा और कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बढ़ जाएं, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। बचाव के आसान उपाय आंखों को स्वस्थ रखने के लिए विशेषज्ञ निम्नलिखित सुझाव देते हैं: 20-20-20 नियम अपनाएं हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है।  

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Diabetes Care: सिर्फ मीठा ही नहीं, आपकी ये रोजमर्रा की आदतें भी बढ़ा सकती हैं ब्लड शुगर, जानें कैसे करें बचाव

डायबिटीज (मधुमेह) आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। अक्सर लोग मानते हैं कि केवल मीठा खाने से ही ब्लड शुगर बढ़ता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कई ऐसी दैनिक आदतें भी हैं जो शुगर लेवल को असंतुलित कर सकती हैं और बीमारी को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकती हैं। डायबिटीज को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने के लिए दवाओं के साथ-साथ संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी बेहद जरूरी है। सिर्फ चीनी नहीं, फास्ट फूड भी बढ़ा सकता है परेशानी डायबिटीज में केवल मिठाइयों से दूरी बनाना पर्याप्त नहीं होता। कई फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ भी ब्लड शुगर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इनमें शामिल हैं: बर्गर और पिज्जा फ्रेंच फ्राइज पैकेज्ड स्नैक्स प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड इन खाद्य पदार्थों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अस्वास्थ्यकर वसा और अतिरिक्त शर्करा अधिक हो सकती है। इनके नियमित सेवन से वजन बढ़ने, इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होने और ब्लड शुगर नियंत्रण में कठिनाई आ सकती है। लंबे समय तक बैठे रहना भी हो सकता है नुकसानदायक शारीरिक निष्क्रियता डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक मानी जाती है। जब शरीर सक्रिय रहता है, तो मांसपेशियां ग्लूकोज का बेहतर उपयोग करती हैं और इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) में सुधार होता है। वहीं लंबे समय तक बैठे रहने से ब्लड शुगर नियंत्रित रखना कठिन हो सकता है। विशेषज्ञ आमतौर पर रोज कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करने की सलाह देते हैं। अनियमित दिनचर्या बढ़ा सकती है जोखिम समय पर भोजन न करना, देर रात तक जागना और अनियमित दिनचर्या अपनाना भी ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इन आदतों से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (Body Clock) प्रभावित होती है, जिससे ग्लूकोज नियंत्रण पर असर पड़ सकता है। तनाव को नजरअंदाज न करें लगातार तनाव रहने पर शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। तनाव कम करने के लिए: पर्याप्त नींद लें। योग और ध्यान करें। नियमित व्यायाम करें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं। डायबिटीज में अपनाएं ये अच्छी आदतें संतुलित और पौष्टिक भोजन करें। नियमित समय पर खाना खाएं। रोजाना शारीरिक गतिविधि करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और जांच समय पर कराएं। ब्लड शुगर की नियमित मॉनिटरिंग करें। ध्यान रखें डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल मीठे से दूरी बनाना काफी नहीं है। स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है। यदि ब्लड शुगर बार-बार बढ़ रहा हो या कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।  

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