भारत में आंत के स्वास्थ्य पर नई खोज, आदिवासी समुदायों में मिलीं 14 नई बैक्टीरिया प्रजातियां पुणे, एजेंसियां। भारत में आंत के स्वास्थ्य और माइक्रोबायोम को लेकर वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। पुणे स्थित BRIC-नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस (NCCS) के शोधकर्ताओं ने भारत के अलग-अलग आदिवासी समुदायों के आंत माइक्रोबायोम का अध्ययन किया। शोध में करीब 200 ऐसे माइक्रोबियल स्ट्रेन सामने आए, जिनका पहले दस्तावेजीकरण नहीं हुआ था। इनमें 14 नई बैक्टीरियल प्रजातियां भी शामिल हैं। आठ आदिवासी समुदायों पर किया गया अध्ययन शोधकर्ताओं ने भारत के चार अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले आठ आदिवासी समुदायों के 76 स्वस्थ वयस्कों के आहार और मल के नमूनों का अध्ययन किया। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि पारंपरिक खान-पान और जीवनशैली आंत में मौजूद सूक्ष्मजीवों की संरचना को किस तरह प्रभावित करते हैं। अध्ययन से पता चला कि अलग-अलग समुदायों के पारंपरिक आहार के अनुसार उनके आंत माइक्रोबायोम में भी उल्लेखनीय अंतर पाया जाता है। पारंपरिक आहार का आंत के बैक्टीरिया पर असर वैज्ञानिकों के अनुसार लंबे समय से चले आ रहे पारंपरिक आहार का आंत के माइक्रोबायोम पर महत्वपूर्ण प्रभाव दिखाई देता है। अलग-अलग क्षेत्रों में दूध, अनाज, जड़ वाली सब्जियों, कंद और अन्य स्थानीय खाद्य पदार्थों की खपत के साथ आंत में मौजूद बैक्टीरिया की संरचना भी अलग पाई गई। शोध इस बात की ओर भी संकेत करता है कि आधुनिक और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन से अलग पारंपरिक आहार मानव माइक्रोबायोम की विविधता को समझने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। भविष्य में स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत के विभिन्न समुदायों के माइक्रोबायोम को समझना भविष्य में पोषण, प्रोबायोटिक्स और व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े शोध के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, नई बैक्टीरिया प्रजातियों की खोज का मतलब यह नहीं है कि वे सभी सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। उनके स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को समझने के लिए आगे विस्तृत प्रयोगशाला और चिकित्सकीय शोध की जरूरत होगी। भारत सरकार की Indian Human Microbiome Initiative भी विभिन्न भारतीय समुदायों के माइक्रोबायोम का डेटाबेस तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
अक्सर शराब के नुकसान की बात होती है तो सबसे पहले लिवर का नाम सामने आता है। लेकिन शराब का असर सिर्फ लिवर तक सीमित नहीं रहता। शराब पीने के बाद इसका संपर्क मुंह, गले और खाने की नली से होता है, जबकि इसके घटक और शरीर में बनने वाले विषैले पदार्थ पाचन तंत्र के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकते हैं। National Institute on Alcohol Abuse and Alcoholism (NIAAA) के अनुसार, शराब का अत्यधिक या लंबे समय तक सेवन शरीर के कई अंगों और सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। इसका संबंध गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सूजन और ब्लीडिंग, पैंक्रियाटाइटिस तथा कई तरह के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से भी है। आइए समझते हैं कि शराब शरीर के पाचन तंत्र में किस तरह नुकसान पहुंचा सकती है। मुंह और गले से शुरू हो सकता है नुकसान शराब का संपर्क सबसे पहले मुंह और गले की अंदरूनी सतह से होता है। लंबे समय तक शराब का सेवन मुंह और गले की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। National Cancer Institute के अनुसार शराब का सेवन मुंह, गले और स्वरयंत्र समेत कई हिस्सों के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है। शराब की मात्रा बढ़ने के साथ कुछ कैंसर का जोखिम भी बढ़ता है। शराब के साथ तंबाकू का सेवन स्थिति को और गंभीर बना सकता है। NCI के मुताबिक शराब और तंबाकू दोनों का इस्तेमाल करने वालों में मुंह, गले, स्वरयंत्र और एसोफैगस के कैंसर का जोखिम अकेले शराब या तंबाकू की तुलना में काफी अधिक हो सकता है। खाने की नली पर भी पड़ सकता है असर मुंह से शराब खाने की नली यानी एसोफैगस के रास्ते पेट तक पहुंचती है। शराब का सेवन गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज यानी GERD के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है। इससे सीने में जलन और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे भी गंभीर चिंता कैंसर के जोखिम को लेकर है। NCI के अनुसार शराब एसोफैगस कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले ज्ञात कारकों में शामिल है। शराब की मात्रा बढ़ने पर जोखिम भी बढ़ सकता है। पेट में बढ़ सकती है जलन और सूजन शराब पेट और पूरे GI tract की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकती है। NIAAA के अनुसार शराब पाचन तंत्र की epithelial lining को नुकसान पहुंचाने, सूजन बढ़ाने और GI bleeding से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसी वजह से कुछ लोगों में पेट की जलन, दर्द, उल्टी या पाचन संबंधी परेशानी देखने को मिल सकती है। शराब का सेवन GERD के जोखिम से भी जुड़ा है। छोटी आंत और गट हेल्थ पर असर शराब का असर छोटी आंत और आंतों की अंदरूनी सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। NIAAA के अनुसार शराब intestinal barrier को प्रभावित कर सकती है और आंतों में मौजूद माइक्रोबायोटा की संरचना में बदलाव से जुड़ी है। इसे आम भाषा में गट हेल्थ बिगड़ना कहा जा सकता है। लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन पाचन तंत्र में सूजन और पोषक तत्वों के इस्तेमाल से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकता है। ऐसे में व्यक्ति के पोषण और सामान्य स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। पैंक्रियाज के लिए भी खतरनाक हो सकती है शराब पैंक्रियाज पाचन एंजाइम और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन से जुड़ा महत्वपूर्ण अंग है। लंबे समय तक शराब का अत्यधिक सेवन पैंक्रियाटाइटिस यानी पैंक्रियाज में सूजन का कारण बन सकता है। एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस अचानक शुरू हो सकता है, जबकि बार-बार होने वाली सूजन क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस में बदल सकती है। क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस से पाचन और ब्लड शुगर नियंत्रण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बड़ी आंत और कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम शराब का संबंध कोलोरेक्टल यानी बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से भी पाया गया है। NCI के अनुसार मध्यम से अधिक मात्रा में शराब पीने वालों में कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम शराब न पीने वालों की तुलना में बढ़ सकता है। यानी शराब का असर सिर्फ पेट या लिवर तक सीमित समझना सही नहीं है। इसके प्रभाव पाचन तंत्र के कई हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। शराब शरीर को नुकसान कैसे पहुंचाती है? शराब शरीर में पहुंचने के बाद कई रासायनिक प्रक्रियाओं से गुजरती है। NIAAA के अनुसार शराब के metabolism के दौरान acetaldehyde नाम का एक विषैला और carcinogenic पदार्थ बनता है। यह DNA और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। यही कारण है कि शराब से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम को केवल नशे या लिवर की समस्या तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें अगर शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति को लगातार इनमें से कोई समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है: लगातार पेट दर्द या जलन बार-बार सीने में जलन या एसिड रिफ्लक्स लगातार उल्टी उल्टी या मल में खून काला मल बिना वजह वजन कम होना लगातार कमजोरी या थकान लंबे समय से दस्त या कब्ज बार-बार पाचन संबंधी परेशानी खास तौर पर खून की उल्टी, काला मल, तेज पेट दर्द या अचानक गंभीर कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। शराब छोड़ने से क्या फायदा हो सकता है? शराब का सेवन बंद करना स्वास्थ्य जोखिम कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। NCI के अनुसार शराब छोड़ने के बाद समय के साथ मुंह और एसोफैगस के कैंसर का जोखिम कम हो सकता है, हालांकि जोखिम को कभी-कभी सामान्य स्तर तक आने में वर्षों लग सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से नियमित या ज्यादा मात्रा में शराब पी रहा है, तो अचानक बंद करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि कुछ लोगों में withdrawal गंभीर हो सकता है।
बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार, मुंह में कड़वाहट या शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस होना आम समस्या लग सकती है, लेकिन अगर ये लक्षण लगातार बने रहें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद में ऐसी कई परेशानियों को पित्त दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है। वहीं आधुनिक चिकित्सा में सीने की जलन और खट्टी डकार जैसे लक्षण एसिड रिफ्लक्स या गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज यानी GERD से जुड़े हो सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात, पित्त और कफ तीन दोषों का संतुलन महत्वपूर्ण माना जाता है। पित्त को पाचन और शरीर की गर्मी से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में बहुत ज्यादा मसालेदार, खट्टा और गर्म प्रकृति वाला भोजन, अनियमित दिनचर्या, तनाव और पर्याप्त आराम न मिलने को पित्त बढ़ाने वाले कारकों में गिना जाता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर बार होने वाली एसिडिटी को केवल 'पित्त बढ़ना' मान लेना सही नहीं है। GERD में समस्या सिर्फ पेट में ज्यादा एसिड बनने की वजह से नहीं होती, बल्कि पेट की सामग्री का बार-बार भोजन नली में ऊपर आना भी इसका कारण हो सकता है। पित्त बढ़ने पर कौन से लक्षण दिख सकते हैं? आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार पित्त असंतुलन के दौरान कुछ लोगों में शरीर में गर्मी, जलन और पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। इनमें शामिल हैं: सीने या पेट में जलन खट्टी डकार या मुंह में कड़वा स्वाद शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस होना अत्यधिक पसीना मुंह में छाले त्वचा पर लालिमा या जलन चिड़चिड़ापन और बेचैनी सिरदर्द या आंखों में जलन दूसरी ओर, सीने में जलन और मुंह में पेट की सामग्री या एसिड आने जैसा महसूस होना GERD के आम लक्षण हैं। लगातार या बार-बार होने वाले लक्षणों की सही वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। खानपान में इन बदलावों से मिल सकती है मदद एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या में हर व्यक्ति के ट्रिगर अलग हो सकते हैं। आम तौर पर बहुत मसालेदार, अम्लीय, अधिक वसा वाले भोजन, कॉफी, चॉकलेट और शराब कुछ लोगों में लक्षण बढ़ा सकते हैं। इसलिए अपने उन खाद्य पदार्थों की पहचान करना जरूरी है जिनके बाद जलन बढ़ती है। गाय का घी: आयुर्वेद में क्यों माना जाता है उपयोगी? दिए गए आयुर्वेदिक सुझाव में सुबह गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच गाय का घी लेने की सलाह दी गई है और इसे पित्त शांत करने वाला उपाय बताया गया है। हालांकि, इसे एसिडिटी या GERD का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। खासकर यह दावा कि घी लेने से जलन तुरंत ठीक हो जाएगी, सभी लोगों पर लागू नहीं होता। उल्टा, अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ कुछ लोगों में रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ा सकते हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को घी लेने के बाद जलन या खट्टी डकार बढ़ती है, तो इसका सेवन जारी रखने के बजाय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खीरा, लौकी और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ आयुर्वेदिक आहार पद्धति में खीरा, लौकी, तरबूज, खरबूजा और अनार जैसे खाद्य पदार्थों को पित्त संतुलित करने वाले आहार में शामिल किया जाता है। व्यावहारिक तौर पर भी पर्याप्त पानी पीना और संतुलित भोजन करना पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन किसी एक खाद्य पदार्थ को एसिडिटी का इलाज मानने के बजाय अपनी समस्या के ट्रिगर को पहचानना ज्यादा जरूरी है। जीरा, धनिया और सौंफ का इस्तेमाल आयुर्वेद में जीरा, धनिया और सौंफ का इस्तेमाल पाचन से जुड़ी परेशानियों में किया जाता है। भोजन के बाद सौंफ लेना या जीरा-धनिया पानी जैसे पारंपरिक उपाय कुछ लोगों को आरामदायक लग सकते हैं। लेकिन इन उपायों को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अगर जलन बार-बार हो रही है तो इसकी मूल वजह की जांच जरूरी है। नारियल पानी कितना फायदेमंद? नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है और इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं। गर्मी के मौसम में यह एक उपयोगी पेय हो सकता है। हालांकि, इसे एसिडिटी या पित्त दोष का निश्चित इलाज बताने के लिए पर्याप्त चिकित्सकीय प्रमाण नहीं हैं। किसी भी खाद्य या पेय का असर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। एसिडिटी से बचने के लिए दिनचर्या में क्या बदलें? बार-बार होने वाले एसिड रिफ्लक्स में जीवनशैली में कुछ बदलाव मददगार हो सकते हैं। डॉक्टर भोजन और सोने के बीच कम से कम 3 घंटे का अंतर रखने की सलाह दे सकते हैं, खासकर रात में लक्षण होने पर। इसके अलावा: बहुत ज्यादा मसालेदार और तला-भुना भोजन सीमित करें। अपने व्यक्तिगत फूड ट्रिगर्स पहचानें। रात में खाना खाने के तुरंत बाद न लेटें। जरूरत से ज्यादा भोजन करने से बचें। पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने की कोशिश करें। अगर वजन अधिक है तो डॉक्टर की सलाह से वजन नियंत्रित करें। धूम्रपान से बचें। बार-बार होने वाली जलन के लिए खुद से लंबे समय तक दवाएं न लेते रहें। कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है? अगर सीने में जलन सप्ताह में दो या उससे अधिक बार होती है, या बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार एसिडिटी की दवा लेनी पड़ रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। लगातार GERD का उपचार न होने पर भोजन नली में सूजन और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। अगर सीने में तेज दर्द, निगलने में परेशानी, लगातार उल्टी, खून की उल्टी, काले रंग का मल या बिना वजह वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
Morning Health Tips: सुबह का पहला भोजन पूरे दिन की पाचन क्रिया और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है। इसलिए दिन की शुरुआत सही खानपान से करना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खाली पेट कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन करने से एसिडिटी, पेट में जलन, गैस और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं, सही और संतुलित नाश्ता शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने के साथ पाचन तंत्र को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। सुबह खाली पेट किन 3 चीजों से बचें? 1. खट्टे फल और नींबू पानी डॉक्टरों के अनुसार, खाली पेट अत्यधिक खट्टे फल या नींबू पानी पीने से पेट में एसिड का स्तर बढ़ सकता है। इससे कुछ लोगों में एसिडिटी, जलन और पेट की अंदरूनी परत में असहजता हो सकती है, खासकर जिन लोगों को पहले से गैस्ट्रिक समस्या हो। 2. ब्लैक कॉफी खाली पेट ब्लैक कॉफी पीने से पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ सकता है। इससे गैस, पेट फूलना, जलन और बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। यदि कॉफी पीनी हो तो बेहतर है कि हल्का नाश्ता करने के बाद लें। 3. ज्यादा मसालेदार और तला-भुना भोजन सुबह-सुबह कचौड़ी, छोले-भटूरे, पाव भाजी या अन्य मसालेदार और तले हुए खाद्य पदार्थ खाने से पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे एसिडिटी, अपच और पेट में भारीपन की शिकायत हो सकती है। सुबह खाली पेट क्या खाना बेहतर रहेगा? डॉक्टरों के अनुसार, दिन की शुरुआत हल्के, पौष्टिक और आसानी से पचने वाले भोजन से करनी चाहिए। आप इन विकल्पों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं— भीगे हुए बादाम, अखरोट या अन्य नट्स ओट्स या दलिया केला या सेब इडली-सांभर डोसा-सांभर ब्रेड ऑमलेट 2 उबले अंडे दही के साथ फल (यदि आपको एसिडिटी की समस्या न हो) मूंग दाल चीला पोहा या उपमा अंकुरित मूंग सलाद सुबह स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये आदतें उठने के बाद सबसे पहले पर्याप्त मात्रा में सादा या गुनगुना पानी पिएं। नाश्ता कभी भी स्किप न करें। प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन को प्राथमिकता दें। अत्यधिक मीठे, प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचें। भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं। ध्यान रखें: हर व्यक्ति की पाचन क्षमता अलग होती है। यदि आपको गैस्ट्रिक अल्सर, एसिडिटी, IBS या कोई अन्य पाचन संबंधी बीमारी है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या पंजीकृत डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।
बारिश के मौसम में लोग अक्सर गरमा-गरम दाल-चावल, खिचड़ी, पराठे या सादा खाने के साथ कुछ चटपटा परोसना पसंद करते हैं। ऐसे में अगर आप पारंपरिक अचार से हटकर कोई हल्का और हेल्दी विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो फर्मेंटेड बांस की कोंपल (Bamboo Shoot) का अचार आपकी डाइट का हिस्सा बन सकता है। पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से लोकप्रिय यह पारंपरिक अचार अब देश के अन्य हिस्सों में भी तेजी से पसंद किया जा रहा है। इसका हल्का खट्टा स्वाद, कुरकुरा टेक्सचर और प्राकृतिक फर्मेंटेशन इसे सामान्य अचार से अलग बनाते हैं। खासकर मानसून के दौरान इसे दाल-चावल, खिचड़ी और रोटी के साथ परोसा जा सकता है। क्या होती है बांस की कोंपल? बांस की कोंपल (Bamboo Shoot) बांस के पौधे का कोमल और खाने योग्य हिस्सा होता है। इसका स्वाद हल्का मिट्टी जैसा और टेक्सचर कुरकुरा होता है। इसे नमक और चुनिंदा मसालों के साथ कुछ दिनों तक प्राकृतिक रूप से फर्मेंट किया जाता है। फर्मेंटेशन के दौरान इसमें लाभकारी बैक्टीरिया विकसित होते हैं, जो इसे प्राकृतिक प्रोबायोटिक फूड बनाते हैं। यही कारण है कि यह अचार स्वाद के साथ-साथ गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। साधारण अचार से क्यों है अलग? सामान्य अचारों में अक्सर तेल और सिरके की मात्रा अधिक होती है, जबकि बांस की कोंपल का फर्मेंटेड अचार कम तेल में तैयार किया जाता है। प्राकृतिक फर्मेंटेशन की वजह से यह हल्का माना जाता है और इसे पचाना भी अपेक्षाकृत आसान होता है। इसका हल्का खट्टा स्वाद भारतीय भोजन के साथ आसानी से मेल खाता है और मानसून में रोजमर्रा के खाने का स्वाद बढ़ा सकता है। बांस की कोंपल का अचार बनाने के लिए सामग्री 500 ग्राम ताजी बांस की कोंपल 2 बड़े चम्मच नमक 1 छोटा चम्मच हल्दी 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1 छोटा चम्मच सरसों के दाने ½ छोटा चम्मच मेथी दाना 2–3 हरी मिर्च (वैकल्पिक) 1–2 बड़े चम्मच सरसों का तेल (वैकल्पिक) ऐसे बनाएं फर्मेंटेड Bamboo Shoot Pickle सबसे पहले बांस की कोंपलों को अच्छी तरह धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें और हल्का उबाल लें। पानी पूरी तरह निकालने के बाद इन्हें नमक और मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाएं। अब इस मिश्रण को साफ और सूखे कांच के जार में भर दें। चाहें तो ऊपर से थोड़ा सरसों का तेल डाल सकते हैं। जार को 2–3 दिनों तक कमरे के तापमान पर रखें ताकि प्राकृतिक फर्मेंटेशन हो सके। इसके बाद अचार खाने के लिए तैयार हो जाएगा। परफेक्ट अचार बनाने की कुकिंग टिप्स हमेशा ताजी और कोमल बांस की कोंपलों का इस्तेमाल करें। कांच के साफ और सूखे जार का ही उपयोग करें। गीले चम्मच से अचार न निकालें। सीधी धूप से बचाकर रखें। स्वाद के अनुसार मसालों की मात्रा कम या ज्यादा कर सकते हैं। किसके साथ करें सर्व? दाल-चावल खिचड़ी पराठा रोटी सादा चावल मिलेट रोटी प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 40–60 kcal कार्बोहाइड्रेट: 6–8 ग्राम प्रोटीन: 1–2 ग्राम फैट: 1–2 ग्राम फाइबर: 2–3 ग्राम संभावित फायदे प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत। पाचन और गट हेल्थ को सपोर्ट करने में मददगार। कम कैलोरी वाला विकल्प। फाइबर से भरपूर। भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ हल्का महसूस कराने में सहायक। मानसून के मौसम में दाल-चावल और खिचड़ी के साथ बेहतरीन कॉम्बिनेशन। ध्यान दें: यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर, नमक सीमित करने की सलाह या फर्मेंटेड फूड से एलर्जी है, तो इसका सेवन सीमित मात्रा में करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।
नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में रात के खाने के बाद ठंडी और मीठी आइसक्रीम खाना कई लोगों की पसंद होती है। कुछ लोग इसे दिनभर की थकान दूर करने का तरीका मानते हैं, तो कुछ के लिए यह डेजर्ट का अहम हिस्सा होती है। लेकिन क्या रोजाना डिनर के बाद आइसक्रीम खाना सेहत के लिए सही है? विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना नुकसानदायक नहीं माना जाता, लेकिन अगर इसे रोजाना और अधिक मात्रा में खाया जाए तो इससे पाचन, वजन, ब्लड शुगर और नींद पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। डिनर के बाद आइसक्रीम खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? आइसक्रीम में शुगर, सैचुरेटेड फैट और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। जब भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन किया जाता है, तो शरीर को एक साथ ज्यादा फैट और शुगर को पचाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म दिन की तुलना में थोड़ा धीमा हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त कैलोरी और शुगर शरीर में जमा होने लगती है, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पाचन प्रक्रिया हो सकती है धीमी अगर आपने ऑयली या भारी भोजन किया है और उसके तुरंत बाद आइसक्रीम खा लेते हैं, तो इससे: पेट भारी लगना गैस बनना ब्लोटिंग एसिडिटी पेट दर्द सुस्ती महसूस होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फैट और शुगर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे भोजन को पूरी तरह पचने में अधिक समय लग सकता है। ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर सामान्य आइसक्रीम में मौजूद अधिक शुगर ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती है। खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए रात में मीठी आइसक्रीम का सेवन जोखिम बढ़ा सकता है। ब्लड शुगर अचानक बढ़ने और फिर गिरने की वजह से: देर रात भूख लगना थकान महसूस होना सुस्ती बढ़ना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नींद की गुणवत्ता भी हो सकती है प्रभावित रात में हाई-फैट और हाई-शुगर फूड खाने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। पेट में गैस, एसिडिटी या भारीपन की वजह से नींद बार-बार टूट सकती है। कुछ लोगों में ठंडी चीजें खाने के बाद शरीर की अलर्टनेस भी बढ़ जाती है, जिससे आसानी से नींद नहीं आती। किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए? रात में आइसक्रीम खाने से इन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए: लैक्टोज इनटॉलरेंस से पीड़ित लोग डायबिटीज के मरीज मोटापे से परेशान लोग एसिडिटी या गैस की समस्या वाले लोग कमजोर पाचन वाले लोग क्या पूरी तरह आइसक्रीम छोड़ देनी चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, डिनर के बाद कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना सामान्य रूप से सुरक्षित माना जा सकता है। लेकिन रोजाना और ज्यादा मात्रा में इसका सेवन पाचन, वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अगर आपको पहले से डायबिटीज, मोटापा या पाचन संबंधी समस्या है, तो रात में हाई-कैलोरी और अधिक मीठे डेजर्ट से दूरी बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप, पसीना और खानपान में बदलाव के कारण कई लोगों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तरबूज एक ऐसा मौसमी फल है, जो न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि गट हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में सहायता करते हैं। गर्मियों में क्यों खास है तरबूज? तरबूज को समर सुपरफूड माना जाता है। यह हल्का, ताजगी देने वाला और आसानी से पचने वाला फल है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है। गट हेल्थ के लिए तरबूज के 5 बड़े फायदे 1. पाचन तंत्र को रखता है बेहतर तरबूज में मौजूद भरपूर पानी पाचन क्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायक होता है। 2. आसानी से पच जाता है यह फल हल्का होता है और शरीर इसे जल्दी पचा लेता है। इसलिए जिन लोगों को अपच, पेट फूलना या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह फायदेमंद माना जाता है। 3. फाइबर का अच्छा स्रोत तरबूज में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है। 4. शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने पर एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तरबूज का कूलिंग इफेक्ट शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है। 5. हल्की ऊर्जा भी देता है इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए? हालांकि तरबूज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने, गैस या दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे सीमित मात्रा में खाएं और भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचें।
गर्मी बढ़ते ही ज्यादातर लोग फ्रिज का ठंडा या बर्फ वाला पानी पीकर राहत महसूस करते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक ठंडा पानी, खासकर भोजन के तुरंत बाद पीना, पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इससे कुछ लोगों को गैस, अपच, पेट भारी लगना या असहजता जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। ठंडा पानी पाचन पर कैसे असर डालता है? विशेषज्ञों के अनुसार शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस होता है। जब बहुत ठंडा पानी पेट में पहुंचता है, तो कुछ समय के लिए पाचन तंत्र का तापमान कम हो सकता है। इससे भोजन को पचाने वाले एंजाइमों की कार्यक्षमता अस्थायी रूप से धीमी पड़ सकती है, जिसके कारण भोजन को पचने में अधिक समय लग सकता है। फैट पचाने में हो सकती है दिक्कत पाचन विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत ठंडा पानी वसायुक्त (फैटी) भोजन के बाद पीने से कुछ लोगों में फैट के टूटने और पाचन की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। हालांकि यह कोई स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन अपच और भारीपन की शिकायत बढ़ सकती है। ब्लड सर्कुलेशन पर भी पड़ सकता है असर अत्यधिक ठंडा पानी पीने से पेट और आंतों के आसपास की रक्त वाहिकाएं कुछ समय के लिए सिकुड़ सकती हैं। इससे पाचन अंगों तक रक्त प्रवाह अस्थायी रूप से कम हो सकता है, जिसके कारण पाचन की गति प्रभावित हो सकती है। किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत? एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux) से पीड़ित लोग Irritable Bowel Syndrome (IBS) के मरीज बार-बार अपच की समस्या वाले लोग भोजन के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने वाले लोग भारी वर्कआउट के तुरंत बाद बर्फ वाला पानी पीने वाले लोग क्या करें? सामान्य तापमान का पानी पीने की आदत डालें। भोजन के तुरंत बाद बहुत ठंडा पानी पीने से बचें। गर्मियों में घड़े का पानी बेहतर विकल्प हो सकता है। अदरक, पुदीना और सौंफ जैसी हर्बल ड्रिंक्स पाचन में मदद कर सकती हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर पिएं, लेकिन अत्यधिक बर्फ वाला पानी नियमित आदत न बनाएं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग प्रोटीन पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन फाइबर को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग रोजाना जितना फाइबर लेना चाहिए, उससे काफी कम मात्रा में इसका सेवन करते हैं। फाइबर न सिर्फ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है, बल्कि दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करने में मदद करता है। फाइबर आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे शरीर में सूजन कम होती है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। फाइबर क्यों है जरूरी? पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है कब्ज की समस्या कम करता है ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है वजन नियंत्रण में सहायक होता है हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है विशेषज्ञों के मुताबिक एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। फाइबर से भरपूर 13 बेहतरीन खाद्य पदार्थ 1. हरी मटर (Green Peas) उबली हुई एक कप मटर में लगभग 9 ग्राम फाइबर और 8.5 ग्राम प्रोटीन होता है। यह शाकाहारियों के लिए शानदार विकल्प है। 2. नाशपाती (Pear) एक मध्यम आकार की नाशपाती में 6 ग्राम से अधिक फाइबर होता है। यह पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज से राहत देने में मदद कर सकती है। 3. सेब (Apple) सेब को छिलके सहित खाने से अधिक फाइबर मिलता है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। 4. मसूर दाल (Lentils) एक कप पकी हुई मसूर दाल में लगभग 15.5 ग्राम फाइबर और 18 ग्राम प्रोटीन होता है। 5. प्रीबायोटिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ लहसुन, प्याज, लीक, शतावरी (Asparagus), आर्टिचोक और बीन्स जैसे खाद्य पदार्थ आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। 6. राई ब्रेड (Pumpernickel Rye Bread) इसकी एक स्लाइस में लगभग 6 ग्राम फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। 7. ब्लैक बीन्स फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत। यह आंतों के माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में मदद करता है। 8. रास्पबेरी (Raspberries) फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल पाचन और इम्युनिटी दोनों के लिए लाभकारी है। 9. साबुत अनाज (Whole Grains) क्विनोआ, जौ, बाजरा, बकव्हीट और स्पेल्ट जैसे साबुत अनाज फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत हैं। 10. एवोकाडो (Avocado) स्वस्थ वसा और फाइबर से भरपूर एवोकाडो लंबे समय तक पेट भरा रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करता है। 11. चिया सीड्स (Chia Seeds) 100 ग्राम चिया सीड्स में लगभग 34 ग्राम फाइबर पाया जाता है। यह वजन नियंत्रण और पाचन दोनों के लिए फायदेमंद है। 12. क्रूसिफेरस सब्जियां ब्रोकली, फूलगोभी, पत्ता गोभी, केल और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्जियां घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर से भरपूर होती हैं। 13. पॉपकॉर्न बिना ज्यादा तेल के बनाया गया पॉपकॉर्न एक हेल्दी होल ग्रेन स्नैक है और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। क्या फाइबर सप्लीमेंट लेना चाहिए? अगर आपकी डाइट में पर्याप्त फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल नहीं हैं, तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह पर फाइबर सप्लीमेंट लिया जा सकता है। हालांकि प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला फाइबर हमेशा बेहतर माना जाता है।
बेहतर पाचन और लंबी उम्र के लिए जापानी खानपान बना प्रेरणा दुनियाभर में जापान को लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ अच्छी आनुवंशिकता नहीं, बल्कि उनकी संतुलित जीवनशैली और पोषण से भरपूर खानपान भी बड़ी वजह है। जापान के लोग वर्षों से ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते आ रहे हैं जो एंटीऑक्सीडेंट्स, प्रोबायोटिक्स और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये न केवल आंतों की सेहत को बेहतर बनाते हैं बल्कि शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं उन 5 खास जापानी सुपरफूड्स के बारे में जो गट हेल्थ और माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं। 1. फर्मेंटेड पत्ता गोभी (सॉकरक्राउट) जापानी भोजन में फर्मेंटेड फूड्स का महत्वपूर्ण स्थान है। फर्मेंटेड पत्ता गोभी, जिसे सॉकरक्राउट भी कहा जाता है, प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बढ़ावा देती है। साथ ही इसमें विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो इसे एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट बनाती है। इसे भोजन से पहले छोटी मात्रा में सलाद या साइड डिश के रूप में खाया जा सकता है। 2. कुजु (Kuzu) कुजु एक पारंपरिक जापानी आटा है जो कुडज़ू पौधे की जड़ से तैयार किया जाता है। इसे प्राकृतिक थिकनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पाचन तंत्र को आराम पहुंचाने, रक्त शर्करा को संतुलित रखने और शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। कुजु का उपयोग सूप, सॉस और हर्बल पेय बनाने में किया जाता है। 3. उमेबोशी पेस्ट उमेबोशी एक विशेष प्रकार के जापानी फल से तैयार किया गया फर्मेंटेड पेस्ट है। यह प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर माना जाता है। कम कैलोरी और कम वसा वाला यह खाद्य पदार्थ पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है। कई लोग इसे भोजन से पहले थोड़ी मात्रा में लेते हैं, जबकि कुछ इसे हर्बल ड्रिंक या चाय में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। 4. कुकिचा चाय जापान में लोकप्रिय कुकिचा चाय साधारण चाय की पत्तियों से नहीं, बल्कि पौधे की टहनियों और डंठलों से बनाई जाती है। इसमें कैफीन की मात्रा बेहद कम होती है, जबकि विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चाय पाचन में मदद करती है और शरीर के एसिड-बेस संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकती है। 5. मिसो सूप मिसो सूप जापान के सबसे लोकप्रिय पारंपरिक खाद्य पदार्थों में से एक है। कई जापानी परिवार इसे नाश्ते में भी शामिल करते हैं। फर्मेंटेड सोयाबीन, समुद्री नमक और कोजी से तैयार मिसो प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने और पाचन तंत्र को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, विटामिन और कई आवश्यक खनिज भी पाए जाते हैं। क्यों जरूरी है स्वस्थ माइक्रोबायोम? विशेषज्ञों के अनुसार, आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया केवल पाचन ही नहीं बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को भी प्रभावित करते हैं। संतुलित माइक्रोबायोम सूजन को कम करने, पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण और शरीर की समग्र कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। डाइट में धीरे-धीरे करें शामिल हालांकि ये सभी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्यवर्धक माने जाते हैं, लेकिन किसी भी नए फर्मेंटेड या विशेष खाद्य पदार्थ को डाइट में धीरे-धीरे शामिल करना बेहतर होता है। जिन लोगों को विशेष स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें आहार में बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। जापानी खानपान से जुड़े ये सुपरफूड्स दिखाते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली केवल महंगे सप्लीमेंट्स से नहीं, बल्कि सही और संतुलित भोजन से भी हासिल की जा सकती है।
Gut Microbiome से जुड़ी समस्याएं आजकल तेजी से बढ़ रही हैं। खाने के बाद पेट फूलना, गैस बनना या भारीपन महसूस होना आम बात लग सकती है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो यह शरीर की ओर से मिलने वाला गंभीर संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार ब्लोटिंग यानी पेट फूलना फूड इंटॉलरेंस, खराब पाचन, बैक्टीरियल इन्फेक्शन या आंतों की दूसरी समस्याओं का संकेत हो सकता है। ऐसे में समय रहते सही जांच करवाना बेहद जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार होने वाली ब्लोटिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि सही टेस्ट के जरिए इसकी असली वजह पता लगाकर लंबे समय तक राहत पाई जा सकती है। पेट फूलने की वजह जानने के लिए जरूरी 5 टेस्ट 1. फूड इंटॉलरेंस टेस्ट कई लोगों को कुछ खास चीजें जैसे दूध, ग्लूटेन या अन्य फूड कॉम्पोनेंट्स सूट नहीं करते। ऐसे में फूड इंटॉलरेंस टेस्ट यह पता लगाने में मदद करता है कि कौन-सा खाना पेट फूलने और गैस की वजह बन रहा है। इसके बाद डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से खानपान में बदलाव किया जा सकता है। 2. गट माइक्रोबायोम टेस्ट यह टेस्ट आंतों में मौजूद अच्छे और खराब बैक्टीरिया का संतुलन जांचता है। जब खराब बैक्टीरिया ज्यादा बढ़ जाते हैं, तो इसे गट डिस्बायोसिस कहा जाता है। यह स्थिति पाचन को खराब कर सकती है और बार-बार ब्लोटिंग की समस्या पैदा कर सकती है। 3. SIBO Breath Test यह एक नॉन-इनवेसिव टेस्ट होता है, जिसमें मरीज को ग्लूकोज वाला घोल पिलाया जाता है। इसके बाद सांस में हाइड्रोजन और मीथेन गैस का स्तर जांचा जाता है। अगर गैस तेजी से बढ़ती है, तो यह Small Intestinal Bacterial Overgrowth यानी SIBO का संकेत हो सकता है, जो गैस और पेट फूलने की बड़ी वजह माना जाता है। 4. स्टूल टेस्ट अगर पेट फूलने के साथ बार-बार पेट खराब हो रहा है या लंबे समय से पाचन संबंधी दिक्कत बनी हुई है, तो डॉक्टर स्टूल टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे इन्फेक्शन, सूजन या अन्य पाचन संबंधी समस्याओं का पता लगाया जाता है। 5. एंडोस्कोपी या इमेजिंग टेस्ट लगातार गंभीर ब्लोटिंग या पेट दर्द की स्थिति में डॉक्टर एंडोस्कोपी या इमेजिंग टेस्ट कर सकते हैं। इस टेस्ट में कैमरे की मदद से आंतों और पेट के अंदर की स्थिति देखी जाती है, जिससे अल्सर, सूजन या अन्य संरचनात्मक समस्याओं का पता चलता है। कब समझें कि टेस्ट करवाना जरूरी है? अगर आपको ये लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो सकता है: बार-बार और लंबे समय तक पेट फूलना लगातार पेट दर्द अनियमित मल त्याग कुछ खास चीजें खाने के बाद हमेशा समस्या होना बिना वजह थकान महसूस होना प्राकृतिक तरीके से कैसे सुधारें Gut Health? विशेषज्ञों के अनुसार कुछ आसान आदतें अपनाकर गट हेल्थ को बेहतर बनाया जा सकता है: फाइबर युक्त भोजन बढ़ाएं पर्याप्त पानी पिएं प्रोबायोटिक फूड्स खाएं ट्रिगर फूड्स से बचें तनाव कम करें नियमित शारीरिक गतिविधि करें विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और सही इलाज से लंबे समय तक होने वाली पाचन समस्याओं से बचा जा सकता है।
आजकल “फाइबर” सिर्फ पोषण से जुड़ा शब्द नहीं रह गया है, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को स्वस्थ रखने और कई गंभीर बीमारियों से बचाने में पर्याप्त फाइबर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद ज्यादातर लोग अपनी रोजाना की जरूरत के अनुसार फाइबर का सेवन नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त फाइबर लेने से: पाचन तंत्र बेहतर रहता है ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद मिलती है दिल स्वस्थ रहता है लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा कम हो सकता है US Food and Drug Administration के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना लगभग 28 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। लेकिन कई शोध बताते हैं कि अधिकतर लोग इस लक्ष्य से काफी पीछे हैं। आइए जानते हैं रोजाना फाइबर बढ़ाने के 7 आसान और असरदार तरीके। 1. फलों और सब्जियों का छिलका न हटाएं विशेषज्ञों का कहना है कि कई फलों और सब्जियों के छिलकों में अंदरूनी हिस्से से ज्यादा फाइबर होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर सेब को छिलके सहित खाया जाए तो लगभग 2 ग्राम अतिरिक्त फाइबर मिलता है। जहां संभव हो, पूरे फल खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। 2. दाल और बीन्स को भोजन में शामिल करें मसूर दाल, राजमा, चना और दूसरी दालें फाइबर का बेहतरीन स्रोत मानी जाती हैं। इन्हें: सलाद सूप चावल पास्ता जैसे भोजन में मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है। इससे खाना ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला बनता है। 3. बीज और मेवे का सेवन बढ़ाएं Chia seed, अलसी के बीज और दूसरे पौष्टिक बीज फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक: चिया सीड्स में लगभग 10 ग्राम फाइबर अलसी में करीब 8 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इन्हें दही, दलिया, सलाद या स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है। 4. मिठाई के साथ फल खाएं अगर आपको मीठा पसंद है तो मिठाई के साथ ताजे फल खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। कुछ ज्यादा फाइबर वाले फल: नाशपाती सेब रसभरी ये शरीर को विटामिन और खनिज भी प्रदान करते हैं। 5. ज्यादा फाइबर वाले स्नैक्स चुनें तले-भुने और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह ऐसे विकल्प चुनें जिनमें प्राकृतिक फाइबर ज्यादा हो, जैसे: भुना चना पॉपकॉर्न मेवे बीज उदाहरण के तौर पर, बिना ज्यादा तेल वाला पॉपकॉर्न फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। 6. “पकाएं और ठंडा करें” तरीका अपनाएं विशेषज्ञों के अनुसार आलू, चावल, पास्ता और कुछ दालों को पकाकर ठंडा करने से उनमें “रेजिस्टेंट स्टार्च” बनता है। यह तरीका: ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करता है कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक हो सकता है पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है 7. जूस की बजाय पूरा फल खाएं फलों के रस की तुलना में पूरा फल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि उसमें फाइबर सुरक्षित रहता है। पूरा फल: पाचन को धीमा करता है ज्यादा देर तक पेट भरा रखता है अचानक शुगर बढ़ने की संभावना कम करता है इसीलिए विशेषज्ञ जूस की जगह पूरे फल खाने की सलाह देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे बदलाव करके भी रोजाना फाइबर का सेवन काफी बढ़ाया जा सकता है। संतुलित आहार के साथ फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर देर रात खाना खाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि डिनर का समय हमारी मेटाबॉलिक हेल्थ, नींद और लंबी उम्र पर बड़ा असर डाल सकता है। हाल ही में longevity और regenerative medicine विशेषज्ञ Dr Saranya Wyles ने बताया कि शाम को जल्दी खाना खाना शरीर की प्राकृतिक circadian rhythm के साथ बेहतर तालमेल बनाता है और इससे overall health को फायदा मिल सकता है। शाम 6 बजे से पहले डिनर को माना बेहतर Mayo Clinic में cellular ageing और regenerative medicine विशेषज्ञ डॉ. सारन्या वायल्स का कहना है कि वह अपने परिवार के साथ नियमित समय पर डिनर करने को प्राथमिकता देती हैं। उनके अनुसार, आदर्श रूप से शाम का खाना 6 बजे से पहले खा लेना चाहिए। वहीं रविवार को उनके घर में डिनर का समय और जल्दी, यानी करीब 4:30 बजे रखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी खाना खाने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी circadian rhythm सही तरीके से काम करती है, जिससे digestion और metabolic health बेहतर बनी रहती है। क्या है Circadian Rhythm? Circadian rhythm शरीर की 24 घंटे चलने वाली जैविक प्रक्रिया है, जो सूरज की रोशनी और दिन-रात के चक्र से प्रभावित होती है। यही प्रक्रिया तय करती है कि शरीर में कौन-से हार्मोन कब रिलीज होंगे, नींद कैसी होगी और ऊर्जा का स्तर कैसा रहेगा। Nutritionist और hormone विशेषज्ञ Hannah Alderson के अनुसार cortisol hormone, जिसे stress hormone भी कहा जाता है, सुबह सबसे अधिक सक्रिय होता है और दिनभर धीरे-धीरे कम होता जाता है। ऐसे में देर रात भारी भोजन करना शरीर को भ्रमित कर सकता है, क्योंकि उस समय शरीर आराम की तैयारी कर रहा होता है, न कि digestion की। देर रात खाना क्यों हो सकता है नुकसानदायक? विशेषज्ञों के मुताबिक: देर रात भारी भोजन करने से digestion प्रभावित हो सकता है नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है इंसुलिन sensitivity कम हो सकती है शरीर का metabolic balance बिगड़ सकता है हालांकि बहुत ज्यादा भूखे पेट सोना भी नींद को प्रभावित कर सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी माना जाता है। हेल्दी डिनर के लिए अपनाती हैं ‘Modular Dinner’ तरीका डॉ. सारन्या वायल्स ने अपने व्यस्त शेड्यूल में healthy eating बनाए रखने के लिए “Modular Dinner” strategy अपनाई हुई है। इसका मतलब है कि सप्ताहांत में खाने की बेसिक तैयारी कर ली जाए और फिर सप्ताह के दिनों में कुछ ही मिनटों में भोजन तैयार किया जा सके। इसके तहत वह पहले से तैयार रखती हैं: कटे हुए गाजर, खीरा, टमाटर और सेलरी स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसे फल चिकन या टोफू जैसे प्रोटीन स्रोत क्विनोआ जैसे whole grains उनका कहना है कि slow cooker का इस्तेमाल समय बचाने में काफी मदद करता है। रंग-बिरंगे भोजन को देती हैं प्राथमिकता एक dermatologist और longevity expert होने के नाते डॉ. वायल्स खाने में रंगों की विविधता को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनके अनुसार अलग-अलग रंगों वाली सब्जियां और फल शरीर को phytonutrients प्रदान करते हैं, जो कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद करते हैं। वह खास तौर पर इन खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने की सलाह देती हैं: बैंगनी शकरकंद ब्रोकली कद्दू हरी पत्तेदार सब्जियां Gut Health पर भी ध्यान जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी metabolic health के लिए gut health भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए डॉ. वायल्स प्रोबायोटिक और fermented foods को डाइट में शामिल करती हैं, जैसे: दही Kimchi Sauerkraut इसके अलावा Omega-3 से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे: Salmon Sardines Avocado और olive oil, turmeric, salt और pepper जैसे मसालों और healthy dressings को भी वह जरूरी मानती हैं। क्या कहती है यह रिसर्च? विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक सख्त नियमों से ज्यादा जरूरी है consistency यानी नियमितता। समय पर भोजन करना, संतुलित डाइट लेना और शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी के अनुसार जीवनशैली अपनाना metabolic health को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
Kuzhi Paniyaram को लेकर फिर बढ़ी चर्चा दक्षिण भारतीय पारंपरिक नाश्ता Kuzhi Paniyaram एक बार फिर चर्चा में है। अभिनेता R. Madhavan ने हाल ही में खुलासा किया कि यह उनकी पसंदीदा ब्रेकफास्ट डिश में से एक है। इसके बाद सेहत विशेषज्ञों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स ने भी इस डिश को हेल्दी मॉर्निंग मील बताया है। उनका कहना है कि यह पारंपरिक फर्मेंटेड डिश पाचन सुधारने, गट हेल्थ बेहतर रखने और वजन नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। क्या है Kuzhi Paniyaram? Kuzhi Paniyaram चावल और उड़द दाल के फर्मेंटेड बैटर से बनाया जाता है। इसे खास तरह के पैन में पकाया जाता है, जिससे इसका बाहरी हिस्सा कुरकुरा और अंदर से नरम रहता है। यह डिश स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर मानी जाती है। फर्मेंटेशन कैसे करता है गट हेल्थ बेहतर? विशेषज्ञों के अनुसार इस डिश का सबसे बड़ा फायदा इसका फर्मेंटेशन प्रोसेस है। डॉक्टरों का कहना है कि फर्मेंटेशन जटिल कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को आंशिक रूप से तोड़ देता है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है। यह शरीर में अच्छे बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा उड़द दाल में मौजूद फाइबर कब्ज और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माना जाता है। वजन घटाने में भी मिल सकती है मदद विशेषज्ञों के मुताबिक Kuzhi Paniyaram वजन नियंत्रित करने में भी मददगार हो सकता है, खासकर जब इसे कम तेल में बनाया जाए। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से भी रोकने में मदद करता है। पैकेज्ड फूड से बेहतर माने जाते हैं पारंपरिक नाश्ते डॉक्टरों का कहना है कि पारंपरिक भारतीय नाश्ते पैकेज्ड और प्रोसेस्ड ब्रेकफास्ट फूड की तुलना में ज्यादा पौष्टिक होते हैं। जहां पैकेज्ड फूड में अधिक चीनी, मैदा और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, वहीं पारंपरिक व्यंजन प्राकृतिक सामग्री और घरेलू तरीके से बनाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे नाश्ते ऊर्जा बनाए रखने के साथ पाचन तंत्र पर भी कम दबाव डालते हैं। इन हेल्दी ब्रेकफास्ट विकल्पों को भी माना गया फायदेमंद विशेषज्ञों ने कुछ अन्य पारंपरिक और गट-फ्रेंडली नाश्तों की भी सलाह दी है, जिनमें शामिल हैं: Idli और सांभर Dosa Moong Dal Cheela Besan Chilla Ragi Dosa वेजिटेबल उपमा दही, फल और नट्स Dhokla खानपान में संतुलन जरूरी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि एसिडिटी, IBS, ब्लोटिंग या डायबिटीज जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपने शरीर के अनुसार भोजन चुनना चाहिए और बहुत ज्यादा तेल वाला या भारी नाश्ता करने से बचना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक सामग्री और फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल करना लंबे समय में बेहतर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।