MV Hondius जहाज पर संक्रमण के बाद एहतियात बढ़ाए गए
हंटावायरस संक्रमण के खतरे को देखते हुए MV Hondius जहाज के दो भारतीय क्रू मेंबर्स को नीदरलैंड में क्वारंटीन किया गया है। स्पेन स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, जहाज पर मौजूद सभी यात्रियों और कर्मचारियों को सुरक्षित तरीके से उतार दिया गया है। यह जहाज हाल ही में सामने आए हंटावायरस संक्रमण के मामलों के कारण चर्चा में आया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की जानकारी के मुताबिक जहाज पर अब तक आठ संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से पांच संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इस संक्रमण से अब तक तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है।
हंटावायरस एक ऐसा वायरस है जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों से इंसानों में फैलता है। संक्रमित जानवरों के पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से यह संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा संक्रमित कण हवा में फैल जाएं और व्यक्ति उन्हें सांस के जरिए अंदर ले ले, तब भी संक्रमण का खतरा रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बंद और कम हवादार जगहों में इसका खतरा अधिक होता है। जहाज, गोदाम और स्टोरेज एरिया जैसी जगहों पर संक्रमण फैलने की आशंका ज्यादा रहती है।
डॉक्टरों के मुताबिक हंटावायरस की incubation period यानी शरीर में वायरस प्रवेश करने और लक्षण दिखने के बीच का समय एक से आठ सप्ताह तक हो सकता है। ज्यादातर मामलों में लक्षण दो से छह सप्ताह के बीच दिखाई देते हैं।
इसी वजह से संक्रमित व्यक्ति शुरुआत में पूरी तरह सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन कई हफ्तों बाद अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ सकता है। यही कारण है कि संक्रमित लोगों को लंबे समय तक निगरानी में रखा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार, शरीर दर्द, थकान, सिरदर्द और कमजोरी शामिल हैं। लेकिन गंभीर मामलों में यह तेजी से फेफड़ों और किडनी को प्रभावित कर सकता है।
कुछ मरीजों में सांस लेने में तकलीफ, लो ब्लड प्रेशर और respiratory failure जैसी स्थिति बन सकती है। वहीं कुछ मामलों में Haemorrhagic Fever with Renal Syndrome (HFRS) भी विकसित हो सकता है, जिससे किडनी फेल होने और अंदरूनी रक्तस्राव का खतरा रहता है।
डॉक्टरों के अनुसार हंटावायरस का इंसानों के बीच फैलना बेहद दुर्लभ है। अधिकांश मामलों में यह सीधे संक्रमित कृंतकों के संपर्क से ही फैलता है। केवल दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले Andes strain में व्यक्ति से व्यक्ति संक्रमण के कुछ मामले सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य संपर्क से संक्रमण का खतरा बहुत कम है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
फिलहाल हंटावायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज करते हैं। गंभीर मामलों में ऑक्सीजन सपोर्ट, ICU निगरानी और किडनी प्रभावित होने पर डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति को संक्रमित क्षेत्र या जहाज से संपर्क के बाद कई दिनों तक बुखार, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी या तेज सिरदर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल भारत और एशिया में आम लोगों के लिए इसका खतरा काफी कम माना जा रहा है। इसे अभी व्यापक सामुदायिक संक्रमण नहीं बल्कि यात्रा और पर्यावरण से जुड़ा जोखिम माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हर महीने होने वाला मासिक धर्म महिलाओं के शरीर की सामान्य जैविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि पीरियड्स के दौरान दर्द असहनीय हो जाए और रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित होने लगें, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक दर्द कई बार एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है, जो समय पर इलाज न मिलने पर प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को भी प्रभावित कर सकती है। क्या है एंडोमेट्रियोसिस? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में प्रजनन आयु की लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं और किशोरियां एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं। इस स्थिति में गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) जैसे ऊतक गर्भाशय के बाहर अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या पेट के अन्य हिस्सों में विकसित होने लगते हैं। मासिक चक्र के दौरान इन ऊतकों में भी रक्तस्राव और सूजन होती है, जिससे तेज दर्द, स्कारिंग और कई बार सिस्ट बनने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि हर माह पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द हो, बार-बार दर्द निवारक दवाओं की जरूरत पड़े, पेल्विक हिस्से में लगातार दर्द बना रहे, संभोग, पेशाब या शौच के समय दर्द महसूस हो, अत्यधिक रक्तस्राव, थकान, पेट फूलना, कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। कई मामलों में बीमारी की पहचान वर्षों बाद हो पाती है क्योंकि इसके लक्षणों को सामान्य पीरियड्स का हिस्सा मान लिया जाता है। बांझपन का बढ़ सकता है खतरा अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं में बांझपन के प्रमुख कारणों में शामिल है। यह बीमारी अंडाणु और शुक्राणु के मिलन की प्रक्रिया में बाधा डाल सकती है, जिससे गर्भधारण कठिन हो जाता है। हालांकि समय पर जांच, उचित दवाओं, हार्मोनल उपचार और जीवनशैली में सुधार के जरिए इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय पर जांच है सबसे बड़ा बचाव विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स के दौरान होने वाले अत्यधिक दर्द को सामान्य समझकर अनदेखा करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए ऐसे किसी भी लक्षण के दिखने पर बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लेना और आवश्यक जांच कराना ही सुरक्षित विकल्प है।
आज की व्यस्त जीवनशैली में महिलाएं अक्सर अपनी सेहत से जुड़े कई संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं। खासतौर पर पीरियड्स में होने वाली अनियमितता को तनाव, काम के दबाव या बदलती दिनचर्या का असर मानकर टाल दिया जाता है। लेकिन अगर आपकी पीरियड्स साइकिल लगातार 35 दिनों से ज्यादा लंबी हो रही है या मासिक धर्म कई महीनों तक नहीं आ रहा है, तो यह पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) का शुरुआती संकेत हो सकता है। महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पहले जिसे PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) के नाम से जाना जाता था, अब कई विशेषज्ञ इसे PMOS के रूप में भी संदर्भित कर रहे हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हार्मोनल असंतुलन महिलाओं की प्रजनन क्षमता, मेटाबॉलिज्म और संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। क्या है PMOS? PMOS एक हार्मोनल और मेटाबोलिक समस्या है, जिसमें ओवरीज में कई छोटे फॉलिकल्स विकसित हो जाते हैं और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, वजन बढ़ सकता है और शरीर में कई अन्य बदलाव दिखाई देने लगते हैं। नई दिल्ली स्थित कैपिटल हेल्थ क्लिनिक की डायरेक्टर और महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. बिमलप्रीत मोहन के अनुसार, कई युवा महिलाएं पीरियड्स की अनियमितता को सामान्य मान लेती हैं, जबकि यह शरीर में चल रहे हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। PMOS के प्रमुख लक्षण 1. 35 दिनों से लंबी पीरियड्स साइकिल यह PMOS का सबसे सामान्य और शुरुआती संकेत माना जाता है। पीरियड्स के बीच का अंतर 35 दिनों से अधिक होना, महीनों तक मासिक धर्म न आना या ब्लीडिंग का पैटर्न अनियमित होना हार्मोनल गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। 2. बिना वजह वजन बढ़ना विशेष रूप से पेट और कमर के आसपास तेजी से वजन बढ़ना PMOS से जुड़ा आम लक्षण है। कई बार डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद वजन कम नहीं होता। 3. लगातार मुंहासे होना अगर टीनएज के बाद भी चेहरे पर बार-बार मुंहासे निकल रहे हैं, खासकर ठुड्डी और जॉलाइन के आसपास, तो यह हार्मोनल असंतुलन की ओर इशारा कर सकता है। 4. चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल होंठों के ऊपर, ठुड्डी, छाती, पेट या पीठ पर अत्यधिक बाल उगना शरीर में एंड्रोजन हार्मोन के बढ़े स्तर का संकेत हो सकता है। 5. बालों का झड़ना सिर के बाल पतले होना, हेयरलाइन चौड़ी होना या जरूरत से ज्यादा बाल झड़ना भी PMOS से जुड़ा महत्वपूर्ण लक्षण माना जाता है। 6. गर्भधारण में परेशानी अनियमित ओव्यूलेशन के कारण कई महिलाओं को कंसीव करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। हालांकि समय पर उपचार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? यदि आपको निम्न में से कोई समस्या लगातार दिखाई दे रही है, तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए— तीन महीने से अधिक समय तक अनियमित पीरियड्स लगातार मुंहासों की समस्या चेहरे या शरीर पर अत्यधिक बाल बिना कारण तेजी से वजन बढ़ना बालों का अत्यधिक झड़ना गर्भधारण में कठिनाई क्या PMOS को रोका जा सकता है? हालांकि आनुवंशिक और हार्मोनल कारणों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम करें संतुलित और पौष्टिक भोजन लें प्रोसेस्ड फूड्स से दूरी बनाएं तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें पर्याप्त नींद लें समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं विशेषज्ञों का मानना है कि PMOS का समय पर पता लगने और सही इलाज मिलने पर महिलाएं सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकती हैं। इसलिए पीरियड्स से जुड़े किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हार्ट अटैक (Heart Attack) दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। अच्छी बात यह है कि कई मामलों में शरीर हार्ट अटैक आने से पहले कुछ चेतावनी संकेत देता है। यदि इन लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाए, तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और कुछ लोगों में बिना स्पष्ट चेतावनी के भी हार्ट अटैक हो सकता है। हार्ट अटैक क्या होता है? हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों (Coronary Arteries) में रुकावट आ जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और उनका नुकसान शुरू हो जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। Heart Attack से पहले दिखने वाले 10 प्रमुख संकेत 1. सीने में दर्द या दबाव यह हार्ट अटैक का सबसे सामान्य लक्षण है। सीने में भारीपन, जकड़न या दबाव महसूस होना। दर्द कुछ मिनट तक रह सकता है या बार-बार आ-जा सकता है। कई लोग इसे गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। 2. सांस लेने में तकलीफ यदि बिना किसी विशेष कारण के सांस फूलने लगे या हल्का काम करने पर भी सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे गंभीरता से लें। 3. बाएं हाथ, कंधे, गर्दन या जबड़े में दर्द हार्ट अटैक का दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। दर्द फैल सकता है: बाएं हाथ में दोनों कंधों में गर्दन जबड़े पीठ 4. अत्यधिक पसीना आना यदि ठंडे वातावरण में भी अचानक बहुत ज्यादा पसीना आने लगे और उसके साथ बेचैनी महसूस हो, तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। 5. अचानक कमजोरी या थकान कई लोगों, विशेषकर महिलाओं में, हार्ट अटैक से कुछ दिन या हफ्ते पहले असामान्य थकान महसूस हो सकती है। 6. मतली, उल्टी या अपच जैसा महसूस होना कुछ मरीजों को लगता है कि उन्हें गैस या एसिडिटी है, जबकि वास्तव में यह हार्ट अटैक का शुरुआती संकेत हो सकता है। 7. चक्कर आना अचानक चक्कर आना, बेहोशी जैसा महसूस होना या संतुलन बिगड़ना भी चेतावनी संकेत हो सकता है। 8. बेचैनी या घबराहट कुछ लोगों को हार्ट अटैक से पहले बिना किसी स्पष्ट कारण के बहुत ज्यादा बेचैनी या घबराहट महसूस होती है। 9. पीठ में दर्द महिलाओं में कभी-कभी हार्ट अटैक का दर्द पीठ या कंधे में भी महसूस हो सकता है। 10. नींद में परेशानी कुछ अध्ययनों के अनुसार हार्ट अटैक से पहले कई लोगों को लगातार नींद न आने या बेचैनी की समस्या हो सकती है। महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग हो सकते हैं महिलाओं में हमेशा सीने में तेज दर्द नहीं होता। इन लक्षणों पर भी ध्यान दें: अत्यधिक थकान सांस फूलना मतली गर्दन या जबड़े में दर्द पीठ दर्द इसी कारण महिलाओं में हार्ट अटैक की पहचान कई बार देर से होती है। किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है? हाई ब्लड प्रेशर डायबिटीज हाई कोलेस्ट्रॉल धूम्रपान मोटापा नियमित व्यायाम न करना तनाव परिवार में हृदय रोग का इतिहास बढ़ती उम्र हार्ट अटैक से बचने के उपाय रोज़ कम से कम 30 मिनट पैदल चलें। धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें। संतुलित आहार लें। ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं। पर्याप्त नींद लें। तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान करें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। कब तुरंत अस्पताल जाएं? यदि इनमें से कोई लक्षण 5–10 मिनट से अधिक समय तक बना रहे या बढ़ता जाए, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सेवा लें। स्वयं वाहन चलाकर अस्पताल जाने के बजाय एम्बुलेंस बुलाना अधिक सुरक्षित हो सकता है।