दुमका। झारखंड के दुमका और गोड्डा व्यवहार न्यायालयों पर 3 जुलाई को संभावित हमले की धमकी मिलने के बाद पुलिस-प्रशासन हाई अलर्ट पर है। स्पीड पोस्ट के जरिए भेजे गए एक संदिग्ध पत्र में दोनों कोर्ट परिसरों को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई थी। पत्र मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। एसपी ने किया कोर्ट परिसर का निरीक्षण धमकी भरे पत्र की सूचना मिलते ही दुमका के पुलिस अधीक्षक पीताम्बर सिंह खेरवार व्यवहार न्यायालय पहुंचे। उन्होंने कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। एहतियात के तौर पर न्यायालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वर्दीधारी जवानों के साथ सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। स्पीड पोस्ट से भेजा गया था धमकी भरा पत्र जानकारी के अनुसार, व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक पत्र मिला था, जिसमें 3 जुलाई को दुमका और गोड्डा कोर्ट पर हमले की आशंका जताई गई थी। पत्र पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान जिले के भातार थाना क्षेत्र निवासी चंचल राय के नाम और पते से भेजा गया था। इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। पश्चिम बंगाल तक पहुंची जांच मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पूर्वी बर्धमान निवासी चंचल राय से पूछताछ की। उन्होंने पत्र भेजने से साफ इनकार करते हुए कहा कि किसी ने उनके नाम और पते का दुरुपयोग किया है। इसके बाद दुमका पुलिस की टीम पश्चिम बंगाल पहुंचकर स्थानीय पुलिस और डाक विभाग के सहयोग से स्पीड पोस्ट की बुकिंग, डाकघर और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। डॉग स्क्वॉड की जांच, सुरक्षा बढ़ाई गई कोर्ट परिसर में डॉग स्क्वॉड की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमकी वास्तविक थी या फिर प्रशासन को गुमराह करने की साजिश। जांच पूरी होने तक दुमका और गोड्डा दोनों व्यवहार न्यायालयों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त रहेगी।
दुमका। झारखंड के दुमका जिले के सरैयाहाट थाना क्षेत्र स्थित चीलरा गांव में 15 वर्षीय किशोरी पूजा कुमारी का शव घर के पास स्थित एक कुएं से बरामद होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। किशोरी पिछले 18 जून से लापता थी। परिजनों ने काफी तलाश के बाद 20 जून को सरैयाहाट थाना में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कई दिनों तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। बुधवार को ग्रामीणों ने गांव के समीप स्थित कुएं में शव देखा और इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रेम प्रसंग की चर्चा के बीच ऑनर किलिंग की आशंका मामले ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया जब जांच के दौरान किशोरी के एक युवक के साथ प्रेम संबंध होने की बात सामने आई। इसके बाद क्षेत्र में ऑनर किलिंग की आशंका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिस स्थान से शव बरामद हुआ, वह मृतका के घर और गांव के बेहद करीब है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शव की स्थिति भी संदिग्ध थी और किशोरी की जीभ बाहर निकली हुई थी। इससे दम घुटने या हत्या की आशंका और गहरा गई है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है। हर पहलू से जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलने पर एसआई विकेश मेहरा और एएसआई मनोज सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लिया। थाना प्रभारी राजेंद्र यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस प्रेम प्रसंग, पारिवारिक विवाद और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। साथ ही कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दुमका। जिले के सरैयाहाट प्रखंड अंतर्गत बनियारा पंचायत में विभिन्न जनसमस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को पंचायत सचिवालय परिसर में जन-प्रदर्शन किया। तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री तथा दुमका उपायुक्त के नाम 10 सूत्री मांगपत्र पंचायत सचिव और मुखिया के माध्यम से सौंपा। ग्रामीणों ने प्रशासन से लंबित योजनाओं का लाभ शीघ्र उपलब्ध कराने और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की। पेंशन, आवास और शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, वृद्धा पेंशन, दिव्यांग पेंशन और मंईयां सम्मान योजना की लंबित राशि का जल्द भुगतान करने की मांग की। इसके अलावा अबुआ आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना की बकाया किस्त जारी करने की भी मांग उठाई गई। ग्रामीणों ने जोंकी बांध के नाला (डांड) के जीर्णोद्धार, पंचायत सचिवालय परिसर में चापाकल लगाने तथा बनियारा बेसिक स्कूल को उत्क्रमित कर वहां कक्षा 9 और 10 की पढ़ाई शुरू कराने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी। स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी और मानदेय पर भी जोर ज्ञापन में पंचायत के विभिन्न टोलों में आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण, सेविका और सहायिकाओं के लंबित मानदेय के भुगतान तथा पंचायत में स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित करने की मांग शामिल की गई। साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों को नियमित मानदेय देने और पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी की गई। जल्द कार्रवाई की मांग ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से कई बुनियादी समस्याएं लंबित हैं, जिससे लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांगपत्र में शामिल सभी मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई करने और पंचायत की विकास योजनाओं को गति देने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करेगी और पंचायत में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
दुमका। झारखंड के दुमका जिले में एक सरकारी स्कूल में शिक्षक द्वारा छात्रा की कथित पिटाई का मामला सामने आया है। सदर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बनकाठी में कक्षा छह की छात्रा अनु मुर्मू को पढ़ाई के दौरान सवाल का जवाब नहीं देने पर प्रधानाध्यापक रणधीर मल्लाह द्वारा पीटने का आरोप है। पिटाई के बाद छात्रा की तबीयत बिगड़ गई और वह अर्धमूर्छित हो गई। परिजनों ने उसे तत्काल फूलो झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। बीमार होने के बावजूद स्कूल पहुंची थी छात्रा जानकारी के अनुसार, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के केंदपानी गांव की रहने वाली अनु मुर्मू पिछले कुछ दिनों से बीमार थी। इसके बावजूद वह गुरुवार को स्कूल गई थी। कक्षा के दौरान प्रधानाध्यापक ने उससे पढ़ाई से संबंधित सवाल पूछा। छात्रा के जवाब नहीं देने पर शिक्षक नाराज हो गए और उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि पिटाई के बाद छात्रा की हालत बिगड़ गई और वह बेहोश जैसी हो गई। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने परिजनों को सूचना दी। शिक्षक ने छड़ी से पिटाई से किया इनकार सूचना मिलने पर छात्रा के पिता उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में छात्रा ने बताया कि शिक्षक ने उसे छड़ी से पीटा था। हालांकि, प्रधानाध्यापक रणधीर मल्लाह ने छड़ी से मारने के आरोप से इनकार किया। उनका कहना है कि उन्होंने केवल हाथ से मारा था और छात्रा पहले से बीमार होने के कारण बेहोश हो गई। जांच के बाद होगी कार्रवाई मामले की जानकारी मिलने पर जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार हेम्ब्रम ने प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO) को जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में शिक्षक दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल छात्रा का इलाज जारी है और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है।
दुमका। झारखंड के दुमका जिले की मसलिया थाना पुलिस ने दो वर्षों से फरार चल रहे पॉक्सो एक्ट के आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में फरार आरोपी उस्मान शेख को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और मोबाइल में सिम कार्ड का इस्तेमाल भी नहीं करता था, लेकिन सोशल मीडिया पर उसकी गतिविधियां ही पुलिस के लिए अहम सुराग बन गईं। नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण का था मामला मसलिया थाना में दर्ज मामले के अनुसार आरोपी के खिलाफ नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया था। घटना के बाद से वह फरार था और गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग स्थानों पर छिपकर रह रहा था। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी थी, लेकिन उसके मोबाइल सिम का इस्तेमाल नहीं करने के कारण उसकी लोकेशन ट्रेस करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। इंस्टाग्राम से मिला अहम सुराग पुलिस ने तकनीकी सेल की मदद से आरोपी की सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच शुरू की। इसी दौरान इंस्टाग्राम से मिले इनपुट के आधार पर पता चला कि आरोपी पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के पायकर थाना क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के संपर्क में रहता है। इसके बाद पुलिस ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी। तीन दिन तक चली छापेमारी मसलिया थाना प्रभारी राजेश रंजन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लगातार तीन दिनों तक पश्चिम बंगाल में छापेमारी अभियान चलाया। आखिरकार बीरभूम जिले के अमुदा गांव स्थित उसकी बुआ के घर से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। तकनीकी जांच से मिली सफलता डीएसपी संदीप भगत ने बताया कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच, सोशल मीडिया विश्लेषण और पुलिस टीम की सतर्कता के कारण दो वर्षों से फरार आरोपी को कानून के शिकंजे में लाया जा सका। इस अभियान में मसलिया थाना पुलिस, तकनीकी सेल और अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दुमका। दुमका स्थित बासुकिनाथ धाम में बुधवार को श्रद्धा और भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिला। शिवगंगा कुंड की सफाई के दौरान वर्षों से जलमग्न रहने वाले स्वयंभू पाताल महादेव (पाताल बाबा) के दर्शन होने पर हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए उमड़ पड़े। ज्येष्ठ माह के अधिकमास की दशमी तिथि पर दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे भक्तों ने कतारबद्ध होकर बाबा के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ विशेष पूजन पाताल बाबा के प्रकट होने के बाद मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार और षोडशोपचार विधि से विशेष पूजा-अर्चना एवं भव्य श्रृंगार किया। सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने शिवगंगा कुंड में उतरकर जलार्पण किया। भक्तों का कहना था कि यह दुर्लभ अवसर वर्षों बाद मिला है, क्योंकि शिवगंगा में जल भर जाने के बाद पाताल महादेव फिर लंबे समय तक जलमग्न हो जाते हैं। 300 वर्ष पुरानी है पाताल बाबा की मान्यता स्थानीय मान्यताओं के अनुसार शिवगंगा कुंड की तलहटी में स्थित स्वयंभू शिवलिंग का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना है। श्रद्धालु इन्हें ‘पाताल बाबा’ के नाम से जानते हैं। यह शिवलिंग सामान्यतः पूरे वर्ष जल में डूबा रहता है और केवल सफाई या जलस्तर कम होने पर ही दर्शन देता है। लोगों की मान्यता है कि वर्षों तक पानी में रहने के बावजूद बाबा पर चढ़ाए गए बिल्वपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री सुरक्षित रहती है और खराब नहीं होती, जिसे श्रद्धालु भगवान की दिव्य महिमा मानते हैं। हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा धाम पाताल बाबा के दर्शन के साथ-साथ प्रसिद्ध बाबा फौजदारीनाथ मंदिर में भी दिनभर भक्तों की भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, धतूरा और पुष्प अर्पित किए। महाआरती के दौरान शंखनाद, डमरू और घंटियों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से बासुकिनाथ धाम का वातावरण पूरी तरह शिवमय नजर आया।
दुमका। 16 साल पुराने सड़क जाम के एक मामले में सोमवार को एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पोड़ैयाहाट से कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 225 के तहत दोषी मानते हुए 1 साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत के फैसले के तुरंत बाद ही विधायक प्रदीप यादव को सशर्त जमानत भी दे दी गई, जिससे उन्हें फिलहाल राहत मिल गई है। पूर्व भाजपा विधायक समेत अन्य आरोपी बरी इस मामले में साक्ष्य के अभाव के चलते पूर्व भाजपा विधायक रणधीर सिंह सहित सभी अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया। यह मामला करीब 16 साल पहले हुए सड़क जाम से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सार्वजनिक मार्ग को बाधित किया गया था। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद अब जाकर इस पर अदालत का फैसला आया है।
दुमका। झारखंड के दुमका जिले में क्रिकेट में करियर बनाने का सपना दिखाकर एक सरकारी शिक्षक से एक करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने शिक्षक के बेटे को भारतीय अंडर-19 टीम और रणजी ट्रॉफी में खेलने का झांसा देकर मोटी रकम ऐंठी थी। करीब छह महीने की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी किसलय पल्लव को पकड़कर जेल भेज दिया है। क्या है मामला? मामला दुमका नगर थाना क्षेत्र का है। सरकारी स्कूल के शिक्षक बुलबुल कुमार ने 12 अक्टूबर 2025 को थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, दुमका के बख्शी बांध निवासी किसलय पल्लव ने उनके बेटे आशुतोष आनंद को भारतीय अंडर-19 टीम और रणजी ट्रॉफी में चयन दिलाने का वादा किया था। आरोपी ने भरोसा दिलाया कि उसके संपर्कों के जरिए खिलाड़ी का चयन संभव है। इसी विश्वास में आकर शिक्षक ने आरोपी को किस्तों में कुल 1 करोड़ रुपये दे दिए। इनमें 50 लाख रुपये नकद और 50 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए थे। बीसीसीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर आरोपी ने ठगी को असली साबित करने के लिए बीसीसीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर के नाम से एक कथित चयन पत्र भी दिया, जिस पर बीसीसीआई का लोगो लगा हुआ था। पत्र में आशुतोष आनंद के अंडर-19 टीम में चयन का दावा किया गया था। हालांकि, जब परिवार ने इसकी पुष्टि की, तो पता चला कि वह पत्र पूरी तरह फर्जी था और खिलाड़ी का नाम कहीं भी दर्ज नहीं था। शिकायत के बाद नगर थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने तकनीकी और दस्तावेजी जांच के आधार पर रविवार को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। शिकायतकर्ता शिक्षक बुलबुल कुमार की मौत हो चुकी है। इस मामले का दुखद पहलू यह है कि शिकायतकर्ता शिक्षक बुलबुल कुमार की बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। दुमका एसपी Pitamber Singh Kherwar ने कहा कि मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं और लोग भी इस ठगी के शिकार तो नहीं हुए।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। इस बार राजस्थान के 25 वर्षीय Anuj Agnihotri ने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर देशभर में टॉप किया है। वहीं झारखंड के दुमका की रहने वाली Sudipa Dutta ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 41वां स्थान प्राप्त किया है। सुदीपा दत्ता एक सामान्य परिवार से आती हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने अपनी पढ़ाई मुख्य रूप से दुमका के स्टेट लाइब्रेरी में रहकर की। यह उनका तीसरा प्रयास था और इसी प्रयास में उन्होंने 41वीं रैंक हासिल कर अपना सपना पूरा किया। सुदीपा दत्ता की शुरुआती पढ़ाई बिहार के बांका जिले में हुई थी। इसके बाद उन्होंने झारखंड के Dumka से ग्रेजुएशन किया। यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने किसी बड़े शहर का रुख नहीं किया, बल्कि अपने होम टाउन में रहकर ही तैयारी की। सुदीपा के पिता सच्चिदानंद दत्ता असिस्टेंट पोस्टमास्टर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। इससे पहले सुदीपा का चयन Jharkhand Public Service Commission (JPSC) के जरिए सीडीपीओ पद पर भी हो चुका है। सीमित संसाधनों से भी मिल सकती है सफलता सुदीपा दत्ता ने यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि सफलता के लिए संसाधनों से ज्यादा जरूरी सही रणनीति और मेहनत है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट आज एक बड़ा संसाधन है और इसका सही उपयोग करके भी छात्र अपनी तैयारी मजबूत कर सकते हैं। देशभर में 958 उम्मीदवार सफल इस साल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में कुल 958 उम्मीदवारों को सफलता मिली है। टॉपर्स की सूची में दूसरे स्थान पर Rajeshwari Suve M और तीसरे स्थान पर Akanksha Dhul हैं। चौथे स्थान पर Raghav Jhunjhunwala और पांचवें स्थान पर Ishan Bhatnagar हैं। कैटेगरी के अनुसार सफल उम्मीदवार यूपीएससी 2025 में कुल 958 उम्मीदवार सफल हुए हैं। इनमें 317 सामान्य वर्ग, 104 ईडब्ल्यूएस, 306 ओबीसी, 158 एससी और 73 एसटी वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।