गुमला। गुमला जिले के बरगांव बरवाटोली गांव में डायन-बिसाही के आरोप में एक बुजुर्ग परिवार को प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने गांव के एक व्यक्ति पर लगातार अंधविश्वास फैलाने और सामाजिक रूप से बदनाम करने का आरोप लगाया है। मामला बढ़ने के बाद गांव में पंचायत बुलाई गई, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हो सका। अब पीड़ित परिवार ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। बुजुर्ग ने थाना में दिया आवेदन गांव निवासी 63 वर्षीय विजय गोप ने गुमला थाना में आवेदन देकर बताया कि गांव के महतो उरांव अपनी बेटी और नाती की पूर्व में हुई मौत के लिए उन्हें और उनके परिवार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आरोप है कि महतो उरांव लगातार उन्हें “डायन-बिसाही” कहकर प्रताड़ित करते हैं। विजय गोप ने यह भी कहा कि पड़ोसी माडु सिंह और उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी को भी इस मामले में बेवजह बदनाम किया जा रहा है। पीड़ित परिवार के अनुसार, बार-बार डायन कहे जाने से समाज में उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है और गांव में तनाव का माहौल बन गया है। पंचायत में नहीं बनी सहमति मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में ग्राम सभा की बैठक आयोजित की गई। पंचायत में दोनों पक्षों को बुलाकर समझौता कराने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों ने डायन-बिसाही जैसी कुप्रथा को अंधविश्वास बताते हुए आरोपी को भविष्य में ऐसी बातें नहीं करने की सलाह दी। हालांकि आरोप है कि पंचायत के दौरान महतो उरांव भड़क गए और ग्रामीणों के साथ गाली-गलौज करने लगे। उन्होंने पंचायत की बात मानने से इनकार करते हुए दावा किया कि उनकी बेटी की मौत “जादू-टोना” के कारण हुई थी। पुलिस जांच में जुटी पंचायत विफल होने के बाद विजय गोप ने थाना पहुंचकर कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है। घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है।
रांची। झारखंड के गढ़वा जिले के सदर अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। पुरुष नसबंदी ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना के जवान सर्वजीत उपाध्याय की हालत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दोबारा ऑपरेशन कराना पड़ा। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और संबंधित चिकित्सक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना एनेस्थीसिया ऑपरेशन करने का आरोप गढ़वा जिले के कुड़ी गांव निवासी सर्वजीत उपाध्याय ने बताया कि उनका नसबंदी ऑपरेशन सदर अस्पताल में डॉ. कुश कुमार द्वारा किया गया था। मरीज का आरोप है कि ऑपरेशन शुरू करने से पहले उन्हें बेहोशी या सुन्न करने वाली दवा यानी एनेस्थीसिया नहीं दिया गया। बिना दवा दिए ही चीरा लगाने से उन्हें असहनीय दर्द हुआ। परिजनों के अनुसार किसी तरह ऑपरेशन पूरा कर टांका लगाया गया और जवान को घर भेज दिया गया। लेकिन घर पहुंचने के कुछ ही देर बाद अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। हालत बिगड़ने पर परिजन तुरंत उन्हें दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे। दोबारा करना पड़ा ऑपरेशन मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए बुधवार सुबह डॉ. मनीष लाल की टीम ने दोबारा ऑपरेशन किया। परिजनों का कहना है कि अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज का हीमोग्लोबिन तेजी से गिर गया। ऑपरेशन से पहले जहां हीमोग्लोबिन 16.5 ग्राम था, वहीं बाद में यह घटकर 13 ग्राम रह गया। परिजनों ने कहा कि सरकार लोगों को परिवार नियोजन और नसबंदी के लिए जागरूक कर रही है, लेकिन अस्पतालों में ऐसी लापरवाही लोगों का भरोसा तोड़ रही है। जांच में जुटा अस्पताल प्रशासन मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन Dr. John F. Kennedy ने कहा कि फिलहाल मरीज की स्थिति सामान्य है और चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गढ़वा। गढ़वा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी और निजी अस्पतालों को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले समय में मरीजों के रजिस्ट्रेशन से लेकर जांच, दवा, इलाज और डिस्चार्ज तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इस योजना की समीक्षा को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों ने डिजिटल हेल्थ सिस्टम को जल्द लागू करने पर जोर दिया। ‘आभा’ ऐप में सुरक्षित रहेगा मरीजों का रिकॉर्ड सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने बताया कि Ayushman Bharat Digital Mission के तहत मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड ‘आभा’ ऐप और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सिस्टम में सुरक्षित रखा जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को कागजी फाइलें और पुराने मेडिकल दस्तावेज साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉक्टर किसी भी अस्पताल में मरीज की पुरानी बीमारी, जांच रिपोर्ट और दवाओं की जानकारी तुरंत ऑनलाइन देख सकेंगे, जिससे इलाज अधिक सटीक और तेज होगा। 13.5 लाख लोगों को आभा आईडी से जोड़ने का लक्ष्य जिले में करीब 13.5 लाख लोगों को आभा आईडी से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक लगभग 5.5 लाख लोगों का पंजीकरण किया जा चुका है। लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को भी मरीजों का आभा रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सभी अस्पतालों को हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री से जोड़ा जा रहा है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके। प्रशिक्षण और जागरूकता बनी बड़ी चुनौती समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने माना कि डिजिटल सिस्टम को सफल बनाने के लिए अस्पताल कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देना जरूरी है। वहीं, राशन कार्ड नहीं होने के कारण कई जरूरतमंद लोग आयुष्मान कार्ड से वंचित हैं, जिससे उन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
गढ़वा। गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र के बहेरवा गांव में जंगली हाथियों के लगातार आतंक ने 17 परिवारों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। पिछले दो वर्षों से हाथियों की आवाजाही और हमलों के कारण ग्रामीणों ने अपना सब कुछ छोड़कर सुरक्षित स्थान की तलाश में गांव से बाहर शरण ले ली। जंगल से भागे, अब खुले आसमान के नीचे जिंदगी हाथियों के डर से ये परिवार मेराल प्रखंड के गेरूवासोती गांव के पास चट्टानों के किनारे प्लास्टिक की झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। अस्थायी आश्रय में रहने के कारण उनके सामने रोजमर्रा की समस्याएं खड़ी हो गई हैं। न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही सुरक्षित वातावरण। भीषण गर्मी ने बढ़ाई परेशानी अब इन परिवारों के सामने नई चुनौती हीट वेव के रूप में खड़ी हो गई है। क्षेत्र में तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे झोपड़ियों में रहना बेहद कठिन हो गया है। खासकर छोटे बच्चे गर्मी की चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं। सुबह 10 बजे के बाद ही लू चलने लगती है, जिससे हालात और गंभीर हो जाते हैं। बेबसी में जी रहे ग्रामीण ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ हाथियों का डर है और दूसरी ओर भीषण गर्मी की मार। “घर छोड़ा तो जान बची, लेकिन अब यहां रहना भी मुश्किल हो गया है,” यह कहते हुए कई ग्रामीण भावुक हो उठते हैं। उनकी स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। प्रशासन ने दिया आश्वासन इस मामले पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मेडिकल टीम भेजी जाएगी और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। साथ ही, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भी आश्वासन दिया गया है।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के महुलिया मोड़ पर गुरुवार शाम एक सड़क हादसे के बाद हालात बेकाबू हो गए। ट्रैक्टर की चपेट में आने से दो लोगों की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया। देखते ही देखते आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग जुट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस पर पथराव, 25 से अधिक जवान घायल सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इसी दौरान कुछ लोगों ने अचानक पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में 25 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिन्हें तुरंत सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई जवानों को गंभीर चोटें आई हैं। लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग से हालात काबू स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पहले हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। लेकिन जब भीड़ और उग्र हो गई, तो लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद भी स्थिति नहीं संभलने पर पुलिस ने हवाई फायरिंग की, जिसके बाद भगदड़ मच गई और भीड़ तितर-बितर हो गई। 80 नामजद, 400 अज्ञात के खिलाफ केस घटना के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए 80 लोगों को नामजद और 400 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही घटनास्थल से 24 बाइक जब्त की गई हैं, जिनके आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। एसपी ने संभाला मोर्चा, हालात सामान्य घटना की जानकारी मिलते ही एसपी अमन कुमार मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। फिलहाल इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि वीडियो फुटेज के आधार पर जल्द ही और गिरफ्तारियां की जाएंगी।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले में मानवता और बेटे के समर्पण की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। रेलवे स्टेशन के पास सड़क पार करते समय इंजोरिया कुंवर नामक महिला को तेज रफ्तार मोटरसाइकिल ने टक्कर मार दी। इस हादसे में उनके हाथ में गंभीर चोट आई और वह दर्द से तड़पने लगीं। मौके पर मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई, लेकिन समय पर कोई वाहन या एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। बेटे ने दिखाई मिसाल, ठेले पर मां को पहुंचाया अस्पताल अपनी मां की हालत गंभीर देख बेटे ने बिना देर किए खुद ही जिम्मेदारी उठाई। उसने अपनी घायल मां को ठेले पर बैठाया और करीब दो किलोमीटर का सफर तय कर गढ़वा सदर अस्पताल पहुंचाया। रास्ते भर मां दर्द से कराहती रहीं, लेकिन बेटे ने हिम्मत नहीं हारी और उन्हें सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाया। इस घटना ने मां-बेटे के रिश्ते की गहराई को एक बार फिर उजागर कर दिया। अस्पताल में हुआ इलाज, हालत स्थिर सदर अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने तुरंत महिला का इलाज शुरू किया। जांच के बाद उनके हाथ पर बैंडेज किया गया। फिलहाल महिला की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। एम्बुलेंस सेवा पर उठे सवाल इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि एम्बुलेंस की कमी नहीं है, लेकिन संभव है कि 108 एम्बुलेंस उस समय व्यस्त रही हो, जिससे समय पर सहायता नहीं मिल पाई। मानवता और सिस्टम दोनों पर चर्चा यह घटना जहां एक ओर बेटे के समर्पण और साहस को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत भी सामने लाती है। स्थानीय लोगों ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग की है।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के डंडा थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। 22 वर्षीय छात्रा ने आरोप लगाया है कि उसके साथ पिस्तौल की नोक पर दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के अनुसार, वह पलामू जिले में रहकर पढ़ाई कर रही थी, जहां उसके पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने उसे अकेला पाकर जबरन संबंध बनाए। विरोध करने पर आरोपी ने उसे शादी का झांसा देकर चुप रहने को कहा। अपहरण और जबरन शादी का नाटक पीड़िता ने बताया कि घटना के बाद वह डर के कारण अपने गांव लौट आई थी, लेकिन आरोपी ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। 4 अप्रैल को जब उसके माता-पिता घर पर नहीं थे, तब आरोपी अपने बहनोई के साथ आया और उसे अगवा कर लिया। उसे पलामू के बिश्रामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव ले जाया गया, जहां आरोपी की बहन और बहनोई की मौजूदगी में जबरन सिंदूर भरकर शादी का ढोंग रचाया गया। गैंगरेप का आरोप पीड़िता के मुताबिक, इसके बाद आरोपी और उसका बहनोई उसे एक सुनसान जगह तहले नदी के पुल के नीचे ले गए, जहां दोनों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद जब वे उसे वापस गांव लाए, तो ग्रामीणों को शक हुआ और उन्होंने दोनों को घेर लिया। हालांकि, आरोपी का बहनोई मौके से फरार हो गया। दोनों पक्षों से FIR दर्ज गढ़वा के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज की गई है और जांच जारी है। पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि पिछले चार वर्षों से उसके साथ शोषण हो रहा था। पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। समाज में आक्रोश इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मामला महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गढ़वा। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ट्रेजरी घोटाले को लेकर कहा है कि साल 2000 से 2026 तक हुए सभी ट्रेजरी घोटालों की जांच कराई जाएगी और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार का एक-एक रुपया वापस लिया जाएगा, चाहे उसके लिए दोषियों की चल-अचल संपत्ति ही क्यों न जब्त करनी पड़े। घोटाले का आंकड़ा पहुंचा 30-40 करोड़ तक वित्त मंत्री ने बताया कि झारखंड में अब तक ट्रेजरी घोटाले का आंकड़ा 30 से 40 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इनमें सबसे ज्यादा मामले बोकारो और हजारीबाग से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से भी चर्चा हुई है और सरकार इसे लेकर पूरी तरह गंभीर है। 33 ट्रेजरी की होगी जांच मंत्री ने साफ किया कि राज्य के सभी 24 जिलों के 33 ट्रेजरी की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां-जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां सख्त कार्रवाई होगी और दोषियों से पूरी राशि वसूली जाएगी। संपत्ति जब्त कर होगी रिकवरी वित्त मंत्री ने दो टूक कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो दोषियों की जमीन, मकान और अन्य संपत्ति जब्त कर सरकार का पैसा वापस लिया जाएगा। इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ परिजनों की एक छोटी सी चूक एक मासूम की जान पर भारी पड़ गई। जिले के रमना थाना क्षेत्र अंतर्गत गम्हरिया गाँव में एक 9 वर्षीय बालक ने अनजाने में कीटनाशक युक्त दूध और रोटी का सेवन कर लिया। इस घटना के बाद बालक की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, जिससे घर में कोहराम मच गया। आनन-फानन में पीड़ित बच्चे को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ से उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। चूहों को मारने की योजना मासूम पर पड़ी भारी जानकारी के अनुसार, गम्हरिया निवासी इस परिवार के घर में पिछले काफी समय से चूहों का भारी आतंक था। घर में रखे अनाज और कीमती सामानों को चूहों द्वारा नष्ट किए जाने से परेशान होकर परिजनों ने उन्हें खत्म करने के लिए एक घातक कदम उठाया। परिजनों ने एक कटोरे में दूध लिया और उसमें चूहे मारने वाली तीव्र कीटनाशक दवा मिला दी। यह जहरीला मिश्रण घर के एक कोने में रख दिया गया था ताकि रात के समय चूहे उसे पीकर मर जाएं। अनजाने में मासूम ने खाया 'जहरीला' निवाला घर में खेल रहे 9 साल के मासूम शिवम कुमार यादव को इस बात का बिल्कुल भी आभास नहीं था कि सामने रखा दूध मौत का जाल हो सकता है। भूख लगने पर शिवम की नजर उस कटोरे पर पड़ी और उसने अनजाने में उसी जहरीले दूध के साथ रोटी खा ली। कुछ समय बाद जब घर के बड़े सदस्यों ने देखा कि कीटनाशक वाला दूध कटोरे में काफी कम हो गया है, तो उन्हें किसी अनहोनी की आशंका हुई। जब परिजनों ने शिवम से इस बारे में कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने मासूमियत के साथ दूध और रोटी खाने की बात स्वीकार कर ली। यह सुनते ही पूरे परिवार के होश उड़ गए। स्वास्थ्य केंद्र से सदर अस्पताल तक की आपाधापी बच्चे द्वारा जहर सेवन की बात सुनते ही परिजन उसे तुरंत लेकर रमना स्थित स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहाँ चिकित्सकों ने स्थिति को भांपते हुए प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन जहर के असर और बच्चे की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तत्काल गढ़वा सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। सदर अस्पताल पहुँचते ही चिकित्सकों की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिवम का गहन उपचार शुरू किया। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर अस्पताल पहुँचने और त्वरित डॉक्टरी हस्तक्षेप की वजह से बालक की जान बचाई जा सकी है। स्थिति अब खतरे से बाहर, चिकित्सा निगरानी जारी राहत की बात यह है कि समय पर इलाज मिलने के कारण 9 वर्षीय शिवम की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है और वह खतरे से बाहर है। हालांकि, जहर के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने के लिए उसे अभी भी डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। यह घटना गढ़वा के ग्रामीण इलाकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि घरों में जहरीले पदार्थों या कीटनाशकों का इस्तेमाल करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसी वस्तुओं को बच्चों की पहुँच से कोसों दूर रखना चाहिए ताकि इस तरह की जानलेवा घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
गढ़वा। झारखंड सरकार के वित्त, वाणिज्य-कर, योजना विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर आज, 13 अप्रैल को गढ़वा जिले के एक दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर रहेंगे। इस प्रवास का मुख्य उद्देश्य कभी उग्रवाद का केंद्र रहे बूढ़ा पहाड़ और टेहरी पंचायत के सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति का निरीक्षण करना है। मंत्री श्री किशोर न केवल विकास कार्यों की भौतिक स्थिति का जायजा लेंगे, बल्कि स्थानीय प्रशासन के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा करेंगे। समाहरणालय में जुटेगा जिला प्रशासन, बुनियादी सुविधाओं की होगी बिंदुवार समीक्षा वित्त मंत्री के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे पूर्वाह्न 11:30 बजे कलेक्ट्रेट (समाहरणालय) स्थित सभागार में जिले के आला अधिकारियों के साथ एक विशेष समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक के दौरान मुख्य रूप से बूढ़ा पहाड़ और टेहरी पंचायत के गांवों में बिजली आपूर्ति, सड़क संपर्क, पेयजल की उपलब्धता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे बुनियादी मापदंडों पर गहन विमर्श किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मंत्री श्री किशोर इस बात पर विशेष जोर देंगे कि विकास की किरण उन अंतिम गांवों तक पहुंची है या नहीं, जो दशकों तक नक्सली गतिविधियों के कारण मुख्यधारा से कटे रहे थे। योजनाओं में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाने की संभावना है। विकास के दावों की जमीनी पड़ताल और आगामी रणनीति उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 3 अप्रैल को भी मंत्री श्री किशोर ने बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र का दौरा किया था। आज के इस अनुवर्ती दौरे (Follow-up visit) के माध्यम से वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पिछले निर्देशों का अनुपालन किस स्तर तक हुआ है। टेहरी पंचायत और इसके आसपास के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में चल रही सड़क निर्माण और जल जीवन मिशन जैसी परियोजनाओं को लेकर वे स्वयं रिपोर्ट तलब करेंगे। सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों को विकास के मॉडल के रूप में स्थापित करना है ताकि ग्रामीणों का भरोसा तंत्र पर और अधिक सुदृढ़ हो सके। प्रेस वार्ता के माध्यम से साझा करेंगे समीक्षा बैठक के निष्कर्ष समीक्षा बैठक और क्षेत्रीय निरीक्षण के समापन के बाद, दोपहर 1:00 बजे मंत्री राधाकृष्ण किशोर स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। प्रेस वार्ता के दौरान वे क्षेत्र के कायाकल्प को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और समीक्षा बैठक में सामने आए तथ्यों को सार्वजनिक करेंगे। इस दौरान वे बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए आवंटित फंड और नई परियोजनाओं की घोषणा भी कर सकते हैं। इस दौरे को गढ़वा के सीमावर्ती इलाकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शासन की इस सक्रियता का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करना है, जहां भौगोलिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण योजनाएं धीमी गति से चल रही थीं। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस दौरे को लेकर काफी उम्मीदें हैं।
गढ़वा। गढ़वा में अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां प्रेमी-प्रेमिका ने थाने से छूटते ही सड़क पर ही शादी कर ली। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, दो दिन पहले गढ़वा शहर के 4 नामचीन होटलों में एसडीएम के नेतृत्व में पुलिस ने छापेमारी की थी। इस दौरान कुल 14 जोड़ों को आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया, जिनमें से कुछ देह व्यापार से जुड़े बताए गए थे। 4 जोड़ों के अभिभावक पहुंचे पुलिस सभी को थाने लाई और कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच चार जोड़ों के अभिभावक थाने पहुंचे और पुलिस से गुहार लगाई कि उनके बेटे-बेटियों को जेल न भेजा जाए वे उनकी शादी करवाने को तैयार हैं। फिर क्या था, जैसे ही पुलिस ने बॉन्ड भरवाकर इन प्रेमी जोड़ों को छोड़ा, थाने के बाहर ही फटाफट शादी का नज़ारा देखने को मिला। प्रेमी-प्रेमिकाओं ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और दुल्हनों की मांग में सिंदूर भर दिया, और इसी के साथ शादी संपन्न हो गई।
गढ़वा। सोमवार को गढ़वा जिले में हो रहे देह व्यापार के खिलाफ प्रशासन ने शहर के तीन होटलों पर छापेमारी की। एसडीएम संजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने यह अभियान चलाया। जांच के दौरान अनैतिक गतिविधियों के संकेत मिलने पर तीनों होटलों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद शहर में हलचल तेज हो गई है। तीन होटल बंद, कई लोग हिरासत में प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान होटल आरडीएस, तिवारी रेस्ट हाउस और होटल एसएलसी को सील कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, इन होटलों में लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। छापेमारी के दौरान करीब 14 जोड़े संदिग्ध हालात में पाए गए, जिन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इनमें कुछ के नाबालिग होने की भी आशंका जताई जा रही है। मैनेजर गिरफ्तार, मालिकों पर भी होगी कार्रवाई पुलिस ने तीनों होटलों के मैनेजरों को मौके से गिरफ्तार कर लिया है। अब होटल मालिकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यदि उनकी संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई एसडीएम संजय कुमार इससे पहले भी गढ़वा में एक होटल पर छापेमारी कर कथित देह व्यापार का खुलासा कर चुके हैं। इस बार की कार्रवाई को जिले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून व्यवस्था और सामाजिक मर्यादा के खिलाफ काम करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जांच तेज, और खुलासों की उम्मीद फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ और जांच के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। शहर के होटल और लॉज संचालकों में इस कार्रवाई के बाद साफ तौर पर डर और सतर्कता देखी जा रही है।
विधानसभा में उठा बड़ा मुद्दा झारखंड के गढ़वा जिले से जुड़ा मंडल डैम विस्थापन का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। क्षेत्रीय विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने बजट सत्र के आखिरी दिन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए पुनर्वास योजना पर गंभीर आपत्ति जताई। जंगल उजाड़कर बसाने की योजना पर सवाल विधायक ने सरकार की उस योजना का विरोध किया, जिसमें बलीगढ़, बिरापुर और विश्रामपुर जैसे गांवों के बीच स्थित जंगल क्षेत्र में विस्थापित परिवारों को बसाने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत करीब 780 विस्थापित परिवारों को बसाया जाना प्रस्तावित है। 5000 ग्रामीणों की आजीविका पर खतरा सत्येंद्र तिवारी ने सदन में कहा कि इस फैसले से आसपास के करीब 5000 ग्रामीणों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। इन गांवों के लोग जंगल पर निर्भर हैं और महुआ फूल, तेंदूपत्ता, पत्तल-दोना, लाह और जड़ी-बूटियों से अपनी आजीविका चलाते हैं। जंगल क्षेत्र में बसावट होने से उनके जीवन पर सीधा असर पड़ेगा। पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की आशंका विधायक ने यह भी चेतावनी दी कि जंगल क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों को बसाने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। जनसंख्या का दबाव बढ़ेगा और प्राकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा, जिससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान हो सकता है। वैकल्पिक स्थान पर पुनर्वास की मांग उन्होंने सरकार से मांग की कि विस्थापित परिवारों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बसाया जाए, ताकि स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रह सकें। सड़क और पुल निर्माण की भी उठाई मांग इसके अलावा विधायक ने गैर-सरकारी संकल्प के तहत सिरोई पंचायत के ढोटी गांव तक लगभग 7 किलोमीटर पक्की सड़क और पुलिया निर्माण की मांग भी विधानसभा में रखी। इस पर संबंधित मंत्री ने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है।
गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले में मंडल डैम परियोजना के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर शनिवार को पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प हो गई। इस घटना में कई ग्रामीण घायल हो गए। घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल घायलों से मिलने उनके गांव पहुंचा और पूरे मामले की जानकारी ली। स्थल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद जानकारी के अनुसार, यह घटना रंका प्रखंड के विश्रामपुर क्षेत्र स्थित बरवाही गांव की है। यहां मंडल डैम के विस्थापितों के लिए प्रस्तावित पुनर्वास योजना के तहत प्रशासनिक टीम स्थल निरीक्षण करने पहुंची थी। निरीक्षण के लिए उपायुक्त दिनेश यादव और पुलिस अधीक्षक अमन कुमार का काफिला गांव में पहुंचा था। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने प्रशासनिक वाहनों के काफिले को रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। JMM ने प्रशासन पर लगाया आरोप घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटी ने इस पूरे मामले को प्रशासन की “बर्बर कार्रवाई” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि विस्थापितों की समस्याओं को सुनने के बजाय प्रशासन ने बल प्रयोग किया, जिससे कई आदिवासी ग्रामीण घायल हो गए। घायलों से मिलने पहुंचा प्रतिनिधिमंडल घटना की जानकारी मिलने के बाद JMM जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल बरवाही गांव पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया और पूरी घटना की जानकारी ली। इस टीम में पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रौशन कुमार पाठक, सचिव शरीफ अंसारी, युवा अध्यक्ष संजय सिंह, उपाध्यक्ष फरीद खान, मनोज तिवारी, सुनील गौत्तम, बीरेंद्र साव और धर्मेंद्र कुमार दुबे शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने घटना में घायल महिला मरियम तिर्की से भी मुलाकात की और उनसे पूरी घटना के बारे में विस्तार से जानकारी ली। पुनर्वास को लेकर पहले से नाराज हैं ग्रामीण स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडल डैम परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं, इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों और राजनीतिक दलों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।