गुमला। झारखंड के गुमला जिले में सरकारी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। घाघरा और पालकोट थाना क्षेत्रों में समय पर 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण दो युवकों की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी है। सड़क हादसे के बाद दो घंटे तक नहीं मिली एंबुलेंस पहली घटना घाघरा थाना क्षेत्र के सलगी भुड़ियाटोली गांव की है। 22 वर्षीय मंगलेश्वर उरांव सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे सदर अस्पताल गुमला रेफर किया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि करीब दो घंटे तक एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इलाज के लिए ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने घाघरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चौबीसों घंटे एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की है। जहर खाने के बाद भी नहीं पहुंची मदद दूसरी घटना पालकोट थाना क्षेत्र के मरदा गांव की है, जहां 34 वर्षीय कृष्णा लोहरा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, कृष्णा की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन काफी देर तक कोई वाहन नहीं पहुंचा। आखिरकार परिजन ऑटो से उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक आशंका जहर सेवन की जताई जा रही है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल दोनों घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होने से गंभीर मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से ग्रामीण इलाकों में एंबुलेंस सेवा मजबूत करने और हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे आपातकालीन वाहन उपलब्ध कराने की मांग की है।
गुमला। बरसात के मौसम के साथ झारखंड के गुमला जिले में सर्पदंश के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1 मार्च से 3 जुलाई 2026 के बीच 125 दिनों में जिले में सर्पदंश के 83 मामले सामने आए हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराया है तथा लोगों से सर्पदंश की स्थिति में बिना देर किए अस्पताल पहुंचने की अपील की है। बिशुनपुर में सबसे अधिक मामले स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिशुनपुर प्रखंड में सबसे अधिक 19 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद बसिया में 15 मामले सामने आए, जबकि गुमला सदर अस्पताल में 35 सर्पदंश पीड़ितों का इलाज किया गया। भरनो में तीन, रायडीह, सिसई और पालकोट में दो-दो, जबकि चैनपुर और घाघरा में एक-एक मामला दर्ज हुआ है। वर्तमान में जिले में कुल 1,380 एंटी स्नेक वेनम वायल उपलब्ध हैं। इनमें 595 वायल जिला अस्पताल गुमला में सुरक्षित रखी गई हैं, जबकि पालकोट, बिशुनपुर, भरनो, बसिया, सिसई, कामडारा, रायडीह, घाघरा, चैनपुर और डुमरी के स्वास्थ्य केंद्रों में भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने बताया सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने बताया कि बरसात के मौसम में सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में सभी स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें, क्योंकि समय पर एंटी स्नेक वेनम मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। शुक्रवार को पालकोट और घाघरा प्रखंड में चार लोग जहरीले सांप के काटने से घायल हो गए। सभी को गुमला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रिम्स रेफर किया गया। अन्य तीन मरीजों का इलाज जारी है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
गुमला। गुमला जिले के कचहरी परिसर स्थित रिकॉर्ड रूम की जर्जर हालत ने लाखों लोगों की जमीन-जायदाद से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों पुराने समाहरणालय भवन में संचालित इस रिकॉर्ड रूम में रखे अभिलेख बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के बीच असुरक्षित पड़े हैं। बरसात के मौसम में भवन की टूटी छत, सीलन और नमी के कारण दस्तावेजों के खराब होने का खतरा लगातार बना हुआ है। जमीन पर बिखरे पड़े हैं महत्वपूर्ण अभिलेख रिकॉर्ड रूम में भूमि स्वामित्व, दाखिल-खारिज, पंजीकरण और अन्य राजस्व मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण रजिस्टर और दस्तावेज सुरक्षित अलमारियों में रखने के बजाय कई जगह जमीन पर बिखरे पड़े हैं। ये अभिलेख हजारों परिवारों के भूमि अधिकारों का आधार हैं और किसी भी कानूनी विवाद या नकल निर्गत करने के लिए इन्हीं पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके बावजूद इनके संरक्षण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। टूटी खिड़की से सुरक्षा पर बड़ा खतरा रिकॉर्ड रूम की वह खिड़की, जहां से जमीन संबंधी नकल जारी की जाती है, लंबे समय से टूटी हुई है। स्थानीय लोगों और समाजसेवियों का कहना है कि यदि कोई असामाजिक तत्व इस रास्ते ज्वलनशील पदार्थ अंदर फेंक दे, तो वर्षों पुराने दस्तावेज कुछ ही मिनटों में नष्ट हो सकते हैं। इससे हजारों लोगों के भूमि रिकॉर्ड हमेशा के लिए खत्म होने का खतरा है। सुरक्षित भवन में स्थानांतरण की उठी मांग स्थानीय अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिला प्रशासन रिकॉर्ड रूम की बदहाल स्थिति से पूरी तरह अवगत है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अधिवक्ता अरुण कुमार ने मांग की है कि रिकॉर्ड रूम को जल्द किसी सुरक्षित, आधुनिक और व्यवस्थित भवन में स्थानांतरित किया जाए। उनका कहना है कि जमीन से जुड़े अभिलेख आम नागरिकों के अधिकारों का आधार हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी दुर्घटना की स्थिति में अपूरणीय क्षति हो सकती है।
गुमला। झारखंड के गुमला जिले से एक बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। घाघरा थाना क्षेत्र के मनातू गांव में एक महिला ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ कथित रूप से आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और स्तब्धता का माहौल है। मृतकों की पहचान परदेशनी कुमारी (27 वर्ष), उनके पांच वर्षीय पुत्र अंश उरांव और चार वर्षीय पुत्री आशमानी कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार परिजनों के अनुसार, परदेशनी कुमारी पिछले लगभग आठ महीनों से मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं और उनका इलाज रांची के कांके स्थित संस्थान में चल रहा था। महिला के पति जगन्नाथ उरांव ने बताया कि बुधवार दोपहर उनकी पत्नी दोनों बच्चों को साथ लेकर घर से निकली थीं। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वे वापस नहीं लौटीं तो परिवार के लोगों को चिंता हुई और उनकी तलाश शुरू की गई। खोजबीन के दौरान हुआ दर्दनाक खुलासा परिजनों और ग्रामीणों द्वारा आसपास खोजबीन की गई। इसी दौरान महिला के पति ने घर के पास स्थित कुएं में झांककर देखा, जहां पानी में कपड़े जैसा कुछ दिखाई दिया। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से कुएं की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान सबसे पहले एक बच्चे का शव दिखाई दिया। बाद में महिला और दूसरे बच्चे के शव भी कुएं से बाहर निकाले गए। घटना की जानकारी मिलते ही घाघरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया है। जांच में जुटी पुलिस एसडीपीओ ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर छानबीन की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही घटना के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। गांव में मातम का माहौल है और लोग इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं।
गुमला। झारखंड के गुमला जिले में शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। पालकोट थाना क्षेत्र के काली मंदिर के समीप बारात से लौट रही एक ब्रेजा कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसे में दूल्हे के पिता समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज गुमला सदर अस्पताल में जारी है। चालक को झपकी आने से हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, बसिया प्रखंड के लोंगा गांव से गुरुवार रात बारात कुम्हारी गांव गई थी। शनिवार सुबह करीब छह से सात बजे के बीच बारात लौटते समय पालकोट के काली मंदिर के पास चालक को झपकी आ गई। इससे वाहन अनियंत्रित होकर तेज रफ्तार में पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। दूल्हे के पिता की मौके पर मौत हादसे में कार चला रहे दूल्हे के पिता कलेश्वर साहू, जो घाघरा प्रखंड में पंचायत सेवक के पद पर कार्यरत थे, की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल दीनबंधु साहू को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया गया, लेकिन भरनो के पास रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। चार घायलों का इलाज जारी दुर्घटना में बालमुकुंद साहू, मनोज ठाकुर, रामदरस पांडेय और संदीप साहू घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को पहले पालकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें गुमला सदर अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद दोनों परिवारों में शादी की खुशियां पलभर में गहरे शोक में बदल गईं।
गुमला। झारखंड सरकार के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री Chamra Linda ने अपने विधानसभा क्षेत्र बिशुनपुर के विभिन्न गांवों में विकास कार्यों को गति देने के लिए गुमला के उपायुक्त को पत्र लिखा है। मंत्री ने गुमला और घाघरा प्रखंड के कई गांवों में सड़क, पेयजल, जलमीनार और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को जल्द स्वीकृति देकर क्रियान्वित करने का अनुरोध किया है। पत्र में मंत्री ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। ऐसे में विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को बेहतर आवागमन, स्वच्छ पेयजल और रोशनी की सुविधा मिल सके। कई गांवों में सड़क निर्माण का प्रस्ताव मंत्री ने बसुआ पंचायत में महेश उरांव के घर से बाजार टांड़ स्थित धनु उरांव के घर तक पीसीसी सड़क निर्माण की अनुशंसा की है। इसके अलावा घाघरा प्रखंड की गोया-बेलागड़ा पंचायत में बिरसाई उरांव के घर से मस्जिद तक और जिलानी के घर से आंगनबाड़ी केंद्र तक पीसीसी सड़क बनाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। वहीं गुमला प्रखंड की अंबवा पंचायत में सेमर मोड़ से होदा मास्टर के घर तक सड़क निर्माण कराने की मांग की गई है। जलमीनार, चापाकल और स्ट्रीट लाइट पर भी जोर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट दूर करने के लिए अंबवा पंचायत और टोटो पंचायत में चापाकल लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही कोटाम पंचायत के बाजार टांड़ में जलमीनार निर्माण की अनुशंसा की गई है। इसके अलावा टोटो पंचायत स्थित हेरा मस्जिद के पास तथा घाघरा प्रखंड के गोया गांव में रऊफ मिस्त्री के घर के समीप स्ट्रीट लाइट लगाने की भी मांग की गई है। मंत्री चमरा लिंडा ने उपायुक्त से इन सभी योजनाओं पर शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है। पत्र सामने आने के बाद संबंधित गांवों के लोगों में विकास कार्यों को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की पहल और योजनाओं के जल्द धरातल पर उतरने पर टिकी है।
गुमला। झारखंड के गुमला जिले के सदर थाना क्षेत्र के मुरकुंडा पंचायत अंतर्गत कोटेनगसेरा गांव में अंधविश्वास से जुड़ी एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां डायन-बिसाही के आरोप में 65 वर्षीय पालु खड़िया की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस दौरान उनकी पत्नी सुगी देवी पर भी हमला किया गया, लेकिन वह किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहीं। पूरी रात उन्होंने गांव के आसपास छिपकर बिताई और सुबह घर लौटने पर पति को मृत पाया। जानकारी के अनुसार, पड़ोसी बहुरा उरांव के परिवार के कुछ सदस्य बीमार चल रहे थे। बीमारी का कारण जानने के लिए एक भगत को बुलाया गया, जिसने कथित तौर पर पालु खड़िया और उनकी पत्नी पर डायन-बिसाही का आरोप लगाया। इसके बाद मामला हिंसक हो गया और उन्हें घर बुलाकर मारपीट की गई। घर बुलाकर की गई बेरहमी से पिटाई ग्रामीणों के मुताबिक, बहुरा उरांव ने दंपति को अपने घर बुलाया और डायन होने का आरोप लगाते हुए बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान पालु खड़िया को दीवार पर पटक दिया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और वे बेहोश हो गए। सुगी देवी के साथ भी मारपीट की गई, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर वह भाग निकलीं। रातभर लाश के पास रहा माहौल, आरोपी फरार महिला के भागने के बाद गंभीर रूप से घायल पालु खड़िया को घर लाकर छोड़ दिया गया। समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। सुबह जब सुगी देवी वापस लौटीं, तो उन्होंने अपने पति को मृत पाया। घटना के बाद मुख्य आरोपी बहुरा उरांव गांव से फरार हो गया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। गांव में दहशत, अंधविश्वास पर उठे सवाल इस घटना के बाद गांव में तनाव और भय का माहौल है। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मामला एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास और डायन-बिसाही जैसी कुप्रथा की भयावह सच्चाई को उजागर करता है, जिसमें आज भी निर्दोष लोगों को जान गंवानी पड़ती है।
गुमला। गुमला जिले में करीब 25 वर्षों से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी रामदेव उरांव आखिरकार मुख्यधारा में लौट आया है। हत्या, अपहरण, रंगदारी, गोलीबारी और आगजनी जैसे गंभीर मामलों में वांछित रामदेव उरांव ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस इसे एक बड़ी सफलता मान रही है। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी और वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था। दो दर्जन से अधिक मामलों में था आरोपी जानकारी के अनुसार, रामदेव उरांव के खिलाफ विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर हत्या, रंगदारी वसूलने, अपहरण और अन्य संगीन अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। वर्ष 2002 के आसपास से वह आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था और गुमला सहित आसपास के कई क्षेत्रों में उसका प्रभाव माना जाता था। उसके नाम से लोगों में भय का माहौल बना रहता था। पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद लिया फैसला सूत्रों के मुताबिक, लगातार पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव के कारण रामदेव उरांव ने सरेंडर करने का निर्णय लिया। पिछले कुछ समय से पुलिस उसके नेटवर्क को कमजोर करने और उसके सहयोगियों पर नजर रखने में जुटी हुई थी। इसी दौरान उसने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई और अंततः पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रामदेव उरांव से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। उसके नेटवर्क, सहयोगियों और पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना है। जांच एजेंसियां अब उससे जुड़े मामलों की विस्तृत पड़ताल करने की तैयारी में हैं। लोगों ने ली राहत की सांस रामदेव उरांव के सरेंडर के बाद स्थानीय लोगों ने राहत महसूस की है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लंबे समय से उसके नाम का खौफ बना हुआ था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उसके आत्मसमर्पण के बाद इलाके में कानून-व्यवस्था और मजबूत होगी तथा शांति और सुरक्षा का माहौल बेहतर बनेगा।
गुमला। गुमला में बीती देर रात एक सड़क हादसे में बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो गई। घटना चैनपुर थाना क्षेत्र के डढ़गांव की है। यहां बाइक के सड़क किनारे पेड़ से टकराने की वजह से हादसा हुआ। मृतकों की हुई पहचान मृतकों की पहचान उजड़ा गांव निवासी अक्षय केरकेट्टा (19), आर्यन टोप्पो 18) और संजीत केरकेट्टा (18) के रूप में हुई है। अक्षय ने 2026 में संत अन्ना विद्यालय से इंटर प्रथम श्रेणी में पास किया था, जबकि आर्यन संत पैट्रिक स्कूल में 11वीं का छात्र था। वहीं, संजीत ने 10वीं पास करने के बाद दो साल पहले पढ़ाई छोड़ दी थी। बाइक की रफ्तार थी तेज परिजनों के अनुसार, तीनों युवक बाइक से एक शादी समारोह में गए थे। रात में चैनपुर से अपने घर लौट रहे थे। इसी बीच डढ़गांव के पास उनकी तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक आम के पेड़ से जा टकराई। बाइक के परखच्चे उड़ गये टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। तीनों ने हेलमेट भी नहीं पहना था। इधर, दुर्घटना की सूचना मिलते ही चैनपुर थाना के एसआई धर्मपाल संतोष लगून मौके पर पहुंचे। उन्होंने गुरुवार को तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया।
गुमला। गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड के केड़ग गांव में जमीन सीमांकन के दौरान अंचल कर्मियों पर ग्रामीणों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना में एक राजस्व कर्मचारी घायल हो गया, जबकि अन्य कर्मियों को मौके से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। बताया जा रहा है कि स्थिति उस समय बिगड़ी जब कर्मचारी सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, गांव निवासी शिव प्रसाद साहू के आवेदन पर अंचलाधिकारी के निर्देश के बाद चैनपुर अंचल की टीम जमीन का सीमांकन करने के लिए गांव पहुंची थी। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने सीमांकन का विरोध शुरू कर दिया। विरोध धीरे-धीरे उग्र हो गया और ग्रामीणों ने कर्मचारियों पर हमला कर दिया। इस दौरान एक महिला ने राजस्व कर्मचारी सुजीत कुमार सिंह को चप्पल से पीट दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि कर्मचारियों को वहां से भागना पड़ा, जबकि कुछ ग्रामीणों ने उनका पीछा कर मारपीट भी की। मौके पर पहुंची पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि विवाद के कारण सीमांकन कार्य पूरा नहीं हो सका और टीम को बिना काम किए लौटना पड़ा। इस घटना के बाद राजस्व कर्मियों ने संबंधित थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।इस घटना के बाद अंचल कर्मियों में आक्रोश और भय का माहौल है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं सरकारी कार्यों में बाधा उत्पन्न करती हैं और दूरदराज क्षेत्रों में काम करना जोखिम भरा हो गया है। कर्मियों ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।
पलामू। पलामू जिले में नवजात शिशु बिक्री के मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। National Human Rights Commission (NHRC) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत और प्रमाण सहित रिपोर्ट मांगी है। गरीबी ने मजबूर किया दर्दनाक कदम यह मामला लेस्लीगंज प्रखंड के लोटवा गांव का है, जहां पिंकी देवी नामक महिला ने कथित तौर पर आर्थिक तंगी के कारण अपने नवजात शिशु को बेच दिया। जानकारी के अनुसार परिवार के पास बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। राशन कार्ड और अन्य पहचान पत्र के अभाव में वे मंदिर के शेड में रहने को मजबूर थे। आरोप है कि प्रशासन की ओर से केवल 20 किलो चावल देकर मदद का दावा किया गया, जबकि परिवार भुखमरी की स्थिति में था। प्रशासन के दावों पर उठे सवाल इस मामले में पहले जवाब देते हुए जिला प्रशासन ने दावा किया था कि पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया है। इसमें बच्चों का स्कूल में नामांकन, आंगनवाड़ी से पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं, राशन कार्ड, बैंक खाता और मनरेगा जॉब कार्ड जैसी सुविधाएं शामिल बताई गईं। साथ ही आवास योजना के तहत जमीन देने की बात भी कही गई। NHRC ने मांगे दस्तावेजी प्रमाण हालांकि NHRC ने इन दावों को संतोषजनक नहीं माना। आयोग का कहना है कि प्रशासन द्वारा बताए गए लाभों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं। इसी कारण आयोग ने अब सभी योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन के प्रमाण मांगे हैं। 4 जून तक जवाब देने का निर्देश आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 4 जून 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट के साथ सभी प्रमाण प्रस्तुत किए जाएं। संवेदनशील मुद्दे पर बढ़ी जवाबदेही यह मामला न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि गरीबों तक योजनाओं के सही तरीके से न पहुंचने की सच्चाई भी उजागर करता है। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
गुमला। झारखंड के गुमला जिले से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां दो युवतियों के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। सदर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई इस वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरे आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िताओं में से एक युवती की पहचान एक आरोपी से पहले से थी। इसी जान-पहचान का फायदा उठाकर आरोपी ने उसे गुमला घूमने के बहाने बुलाया। युवती अपनी एक सहेली के साथ वहां पहुंची। आरोपी भी अपने एक दोस्त के साथ आया और दोनों युवतियों को बाइक पर बैठाकर सिसई क्षेत्र की ओर ले गया। कब हुआ ये मामला? बताया जा रहा है कि शाम के समय आरोपियों ने बीयर खरीदी और फिर दोनों युवतियों को जबरन एक सुनसान स्थान पर ले गए। वहां उनके साथ दुष्कर्म किया गया। घटना के दौरान एक युवती किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर भागने में सफल रही। उसने पास के पुआल में छिपकर अपने मोबाइल फोन से परिजनों को लोकेशन भेजी और मदद मांगी। वहीं दूसरी युवती आरोपियों के कब्जे में फंसी रही। आरोप है कि बाद में एक और युवक को मौके पर बुलाया गया और तीनों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने पूरी घटना की जानकारी दी किसी तरह जान बचाकर दोनों युवतियां रविवार देर रात थाना पहुंचीं और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एक आरोपी डुमरडीह पंचायत और दूसरा असनी नकटीटोली का बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है और मामले की गंभीरता से जांच जारी है।
गुमला। जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर पुलिस प्रशासन ने समीक्षा बैठक आयोजित की। पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमां ने चंदाली स्थित कार्यालय में मासिक अपराध समीक्षा बैठक की, जिसमें विभिन्न मामलों की प्रगति का आकलन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। त्योहारों के संचालन पर हुई समीक्षा बैठक में हाल ही में संपन्न हुए नगरपालिका चुनाव, होली, सरहुल, ईद और रामनवमी के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई। इन आयोजनों के शांतिपूर्ण संपन्न होने पर अधिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन किया गया। गंभीर अपराधों पर प्रगति की जांच बैठक के दौरान हत्या, दुष्कर्म, अपहरण, POCSO और एससी-एसटी से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। साथ ही लूट और गृहभेदन जैसे मामलों में अब तक की कार्रवाई का आकलन करते हुए लंबित मामलों को शीघ्र निष्पादित करने के निर्देश दिए गए। नशा और लंबित वारंट पर कार्रवाई की समीक्षा अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही लंबित वारंट, कुर्की और इस्तेहार के निष्पादन की प्रगति पर चर्चा हुई और इसे तेज करने के निर्देश दिए गए। जनसेवा से जुड़े मामलों के निपटारे पर जोर सूचना अधिकार, जन शिकायत, पासपोर्ट और चरित्र सत्यापन से संबंधित लंबित आवेदनों के निष्पादन की समीक्षा की गई। अधिकारियों को इन मामलों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा गया। सामाजिक अपराधों पर जागरूकता अभियान की समीक्षा डायन प्रथा, मानव तस्करी, पलायन और महिलाओं से जुड़े अपराधों की रोकथाम को लेकर चल रहे जागरूकता अभियानों की समीक्षा की गई और इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। सड़क सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर चर्चा बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा की गई। हेलमेट जांच, नशे में ड्राइविंग और लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर की गई कार्रवाई का आकलन किया गया। साथ ही जमानत पर छूटे अपराधियों की निगरानी व्यवस्था को सख्त रखने पर जोर दिया गया। नक्सल गतिविधियों और अवैध खनन पर नजर नक्सल गतिविधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई, खुफिया तंत्र की स्थिति और अवैध खनन पर नियंत्रण को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को इन मामलों में सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन पिछले महीने के कार्यों के आधार पर थाना प्रभारियों और अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। कमजोर प्रदर्शन करने वालों को चेतावनी दी गई, जबकि बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया गया।
झारखंड के गुमला में सनसनीखेज मामला झारखंड के गुमला जिले से दोस्ती और भरोसे को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला शिक्षक ने अपनी ही करीबी दोस्त पर 32 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और लोग हैरान हैं कि किस तरह भरोसे का फायदा उठाकर इतनी बड़ी धोखाधड़ी की गई। साधारण पहचान से गहरी दोस्ती, फिर हुआ धोखा पीड़िता (परिवर्तित नाम प्रमिला) एक आर्मी स्कूल में शिक्षिका हैं। उन्होंने सदर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी रेखा मिंज मूल रूप से गुमला की रहने वाली है और फिलहाल रांची के अरगोड़ा इलाके में रहती है। दोनों के बीच पहले सामान्य जान-पहचान थी, जो समय के साथ गहरी दोस्ती में बदल गई। कोयला कारोबार में निवेश का दिया झांसा आरोप है कि रेखा मिंज ने प्रमिला को कोयला कारोबार में निवेश करने का लालच दिया। उसने कम समय में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा दिलाया। भरोसे में आकर प्रमिला ने अलग-अलग किस्तों में पैसे देना शुरू किया, जो बढ़ते-बढ़ते 32 लाख रुपये तक पहुंच गया। कर्ज लेकर और जमीन बेचकर जुटाई रकम इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़िता ने इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए कर्ज लिया और अपनी जमीन तक बेच दी। उसे उम्मीद थी कि निवेश से उसे अच्छा मुनाफा मिलेगा, लेकिन न तो कोई फायदा मिला और न ही मूल रकम वापस हुई। पैसे मांगने पर आरोपी ने तोड़ा संपर्क जब पीड़िता ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए, तो आरोपी लगातार टालमटोल करती रही। बाद में उसने संपर्क भी बंद कर दिया। इससे पीड़िता को यकीन हो गया कि वह ठगी का शिकार हो चुकी है, जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जांच में जुटी, पूछताछ जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर थाना पुलिस ने आरोपी को पूछताछ के लिए बुलाया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह तो शामिल नहीं है। लोगों के लिए चेतावनी यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि आर्थिक मामलों में बिना जांच-पड़ताल के किसी पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी निवेश से पहले पूरी जानकारी लें और जल्दबाजी में फैसला न करें।
गुमला: झारखंड के गुमला शहर के रामनगर इलाके में चोरी की एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां अज्ञात चोरों ने एक बंद घर को निशाना बनाकर लाखों की संपत्ति उड़ा ली। इस वारदात के बाद पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। दरवाजा तोड़कर घर में घुसे चोर पीड़िता मधुछन्दा सेनगुप्ता, जो एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं, ने बताया कि घटना के समय घर के सभी सदस्य बाहर गए हुए थे। इसी मौके का फायदा उठाकर चोरों ने मुख्य दरवाजा तोड़ दिया और घर के अंदर घुस गए। इसके बाद उन्होंने अलमारी और अन्य जगहों को खंगालते हुए कीमती सामान चोरी कर लिया। घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने सदर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। गहनों से लेकर नकदी तक सब कुछ गायब चोरी किये गए सामानों में सोने के दो नेकलेस, पांच लॉकेट, कंगन, झुमका, बाली, टॉप्स, पांच अंगूठियां और पांच मंगलसूत्र सेट शामिल हैं। इसके अलावा चांदी के चार चैन, पांच जोड़ी पायल, तीन सिंदूरदानी और चांदी का बिछिया भी चोर ले गए। पीड़िता के अनुसार, इन आभूषणों की कुल कीमत करीब 18 लाख रुपये है। वहीं, चोर लगभग डेढ़ लाख रुपये नकद भी साथ ले गए। किसान विकास पत्र भी चुरा ले गए बदमाश चोरों ने सिर्फ गहनों और नकदी तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि घर में रखे डाकघर के किसान विकास पत्र (KVP) भी अपने साथ ले गए। यह प्रमाणपत्र वर्ष 2018 में ही परिपक्व हो चुका था, जिससे साफ है कि चोरों ने पूरे घर की बारीकी से तलाशी ली। इलाके में दहशत, लोगों ने बढ़ाई सुरक्षा की मांग घटना के बाद रामनगर क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हाल के दिनों में चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों ने पुलिस प्रशासन से गश्त बढ़ाने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। सीसीटीवी फुटेज के सहारे जांच तेज मामले की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही चोरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पीड़िता ने प्रशासन से चोरी किये गए सामान की जल्द बरामदगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
झारखंड के गुमला जिले को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने का मुद्दा एक बार फिर संसद में जोर-शोर से उठा। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने केंद्रीय बजट सत्र के दौरान लोकसभा में रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। गुमला के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ का आरोप सांसद ने केंद्र सरकार पर गुमला जिले की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह क्षेत्र आज भी रेलवे सुविधा से वंचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बावजूद गुमला को अब तक रेल कनेक्टिविटी क्यों नहीं दी गई। शहीद अल्बर्ट एक्का की धरती, फिर भी उपेक्षित अपने संबोधन में भगत ने याद दिलाया कि गुमला, अल्बर्ट एक्का की जन्मस्थली है, जिन्होंने 1971 के युद्ध में अद्वितीय वीरता दिखाई थी। इसके बावजूद यह जिला आज भी रेलवे नेटवर्क से जुड़ नहीं पाया है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। धार्मिक और पर्यटन स्थलों का किया जिक्र सांसद ने गुमला की समृद्ध धार्मिक विरासत को भी रेखांकित किया। उन्होंने अंजनी धाम, टांगीनाथ धाम और सिरसी-ता नाले जैसे महत्वपूर्ण आस्था केंद्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर रेल संपर्क से यहां पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। खनिज संसाधनों के बावजूद विकास बाधित भगत ने कहा कि गुमला बॉक्साइट जैसे खनिज संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण इसका समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रेलवे लाइन का निर्माण इस क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। रेल बजट पर भी साधा निशाना केंद्र सरकार की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए सांसद ने कहा कि रेलवे में भारी बजट आवंटन के बावजूद जमीनी स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “घोषणाएं तो सुपरफास्ट ट्रेन की तरह दौड़ रही हैं, लेकिन असल ट्रेन अभी भी प्लेटफॉर्म पर ही खड़ी है।” नई रेल लाइन को प्राथमिकता देने की मांग सुखदेव भगत ने रेल मंत्री से गुमला में नई रेलवे लाइन निर्माण को प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे न केवल क्षेत्रीय विकास होगा बल्कि रोजगार, व्यापार और पर्यटन को भी गति मिलेगी। यात्रियों के हितों की भी उठाई आवाज सांसद ने आम यात्रियों की समस्याओं को भी उठाया। उन्होंने छात्रों, खिलाड़ियों और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रेल छूट को फिर से लागू या मजबूत करने की मांग की, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।