झारखंड

JPSC गड़बड़ी मामले में ED की एंट्री, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
ED JPSC Case
ED JPSC Case

रांची। झारखंड में JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो गई है। ED ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की है। एजेंसी ने राज्य में दर्ज प्राथमिकी और उससे जुड़े तथ्यों को आधार बनाकर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच आगे बढ़ाई है।

 

FIR के आधार पर ED ने शुरू की जांच

 

रिपोर्टों के मुताबिक ED ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में दर्ज FIR को संज्ञान में लिया है। अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित परीक्षा गड़बड़ी के पीछे किसी तरह का आर्थिक लेन-देन, अवैध कमाई या धन के हस्तांतरण का मामला तो नहीं है।

 

ED की जांच का दायरा केवल परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा। यदि जांच में वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो एजेंसी संबंधित लोगों और संस्थाओं के आर्थिक नेटवर्क की भी पड़ताल कर सकती है।

 

पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद मामला और गरम

 

ED की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को झारखंड CID ने कथित परीक्षा अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया है। उन पर परीक्षा संचालन से जुड़ी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोप हैं।

 

CID की जांच के दौरान कई ठिकानों पर छापेमारी की गई और दस्तावेज तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी ने परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी के कार्यालयों पर भी कार्रवाई की है।

 

छात्रों की CBI जांच की मांग के बीच ED की जांच

 

JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन कई दिनों से जारी है। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

 

छात्र संगठनों की ओर से मामले की CBI जांच की मांग भी उठाई जा रही है। इसी बीच ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू होने से यह पूरा मामला और गंभीर हो गया है।

 

अब वित्तीय लेन-देन पर होगी नजर

 

ED की जांच में अब यह महत्वपूर्ण होगा कि कथित भर्ती अनियमितताओं से किसी प्रकार का अवैध आर्थिक लाभ जुड़ा था या नहीं। एजेंसी संबंधित दस्तावेजों, बैंकिंग लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती है।

 

यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल ED की जांच शुरुआती चरण में है और एजेंसी के निष्कर्षों का इंतजार है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड बंद आज, JPSC-JSSC अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में BJP का राज्यव्यापी बंद

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आज 11 अगस्त को भाजपा ने राज्यव्यापी झारखंड बंद बुलाया है। यह बंद रांची में सोमवार को विधानसभा मार्च कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में किया जा रहा है। बंद के दौरान राज्य के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की खबर है।   विधानसभा मार्च के दौरान हुआ था हंगामा   सोमवार को JPSC-JSSC अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारी विधानसभा के गेट नंबर-1 के पास पहुंचकर धरने पर बैठ गए। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। घटना में प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।   अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना और कथित अनियमितताओं की CBI जांच शामिल है।   पुलिस कार्रवाई के विरोध में भाजपा का बंद   छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बाद भाजपा ने सरकार पर प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि पार्टी छात्रों के साथ खड़ी है और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।   बंद के दौरान भाजपा कार्यकर्ता कई स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ इलाकों में सड़क पर टायर जलाकर विरोध जताने की भी खबरें सामने आई हैं। प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है।   रांची में सुरक्षा बढ़ाई गई   बंद को देखते हुए रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में पुलिस और प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। सोमवार की घटना को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था विशेष रूप से कड़ी की गई है।   प्रशासन की कोशिश है कि बंद के दौरान किसी तरह की हिंसा, तोड़फोड़ या जबरन दुकानें बंद कराने की स्थिति पैदा न हो। वहीं, बंद के कारण परिवहन, बाजार और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर असर पड़ने की संभावना बनी हुई है।   आंदोलन के बीच देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ी   JPSC-JSSC आंदोलन के बीच JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत भी बिगड़ गई। रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय से चल रहे अनशन के बीच उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। छात्रों का आंदोलन अब कई दिनों से जारी है और सरकार तथा आंदोलनकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है।   अब नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार छात्र संगठनों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और बंद के बाद JPSC-JSSC विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत का अगला दौर कब शुरू होता है।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
Devendra Nath Mahto

रांची में छात्र आंदोलन के बीच देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ी, सदर अस्पताल में भर्ती

Rahul Gandhi Statement

रांची में छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी का बयान, बोले- बल प्रयोग गलत, सरकार तुरंत समाधान निकाले

Babulal Marandi Statement

JPSC-JSSC विवाद पर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, छात्रों के समर्थन में उठाई आवाज

Hazaribagh Ranchi Bus Service
हजारीबाग से रांची जाने वाली बसों पर लगी रोक हटी, शाम 6 बजे के बाद फिर शुरू हुआ परिचालन

हजारीबाग। झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन और रांची में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए हजारीबाग से रांची जाने वाली बसों के परिचालन पर लगाई गई रोक अब हटा दी गई है। रोक हटने के बाद शाम करीब 6 बजे से हजारीबाग से रांची के लिए बसों का परिचालन दोबारा शुरू हो गया। इससे रांची जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।   आंदोलन के कारण रोकी गई थी बसें   रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के विधानसभा मार्च को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए रांची की ओर जाने वाली बसों के परिचालन पर अस्थायी रोक लगाई गई थी।   इसका असर हजारीबाग के बस यात्रियों पर भी पड़ा। रांची जाने वाले यात्रियों को बस सेवा बाधित होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा और कई लोगों को अपनी यात्रा टालनी पड़ी।   शाम 6 बजे के बाद फिर शुरू हुई बस सेवा   स्थिति सामान्य होने के बाद प्रशासन की ओर से रांची की ओर बसों के परिचालन को फिर से शुरू करने की अनुमति दी गई। इसके बाद शाम करीब 6 बजे से हजारीबाग से रांची के लिए बसें रवाना होने लगीं।   बस सेवा बहाल होने से रांची जाने वाले यात्रियों को राहत मिली है। हजारीबाग से रांची के बीच नियमित रूप से बड़ी संख्या में यात्री बसों से आवागमन करते हैं।   यात्रियों को मिली बड़ी राहत   बस सेवा रुकने के कारण नौकरी, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कामों से रांची जाने वाले यात्रियों को परेशानी हो रही थी। परिचालन शुरू होने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।   हजारीबाग-रांची मार्ग पर सामान्य दिनों में भी बड़ी संख्या में बसें चलती हैं। उपलब्ध बस बुकिंग जानकारी के अनुसार इस रूट पर कई नियमित बस सेवाएं संचालित होती हैं।   रांची में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर   JPSC-JSSC आंदोलन के मद्देनजर रांची में सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। ऐसे में बस परिचालन दोबारा शुरू होने के बावजूद यात्रियों को रांची की मौजूदा स्थिति और प्रशासन की ओर से जारी यातायात निर्देशों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
ED JPSC Case

JPSC गड़बड़ी मामले में ED की एंट्री, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच

BJP Protest

रांची के हरमू चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन, टायर जलाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी

JPSC JSSC Protest

विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस-छात्रों में झड़प, JPSC-JSSC अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल

Second Sawan Monday
देवघर में आस्था का सैलाब, दूसरी सोमवारी पर 20 किमी लंबी कांवरियों की कतार

देवघर। सावन की दूसरी सोमवारी पर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलार्पण के लिए रविवार देर रात से ही कांवरियों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। सोमवार सुबह तक मुख्य अर्घा की कतार मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक पहुंच गई।   वहीं, बाय अर्घा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की कतार सरदार पंडा लाइन, शिवगंगा लेन और वीआईपी गेट के सामने तक फैली रही। प्रशासनिक अनुमान के अनुसार इस कतार में करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु शामिल रहे।   सुबह 3:05 बजे खुला मंदिर का पट   सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट सुबह 3:05 बजे खोला गया। पट खुलने के बाद सबसे पहले पुरोहित समाज की ओर से बाबा भोलेनाथ की कच्चा जल पूजा की गई। करीब 15 मिनट तक चली इस विशेष पूजा में बाबा पर जल अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की गई। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की तैयारी शुरू हुई।   सरदार पंडा ने की विशेष पूजा-अर्चना   कच्चा जल पूजा के बाद मंदिर के महंत सरदार पंडा श्री श्री गुलाब नंद ओझा ने विधि-विधान से बाबा बैद्यनाथ की विशेष पूजा की। इस दौरान बाबा को दूध, दही, घी और मधु समेत विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई। पूजा के दौरान विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना की गई।   4:10 बजे से आम श्रद्धालुओं का जलार्पण   विशेष पूजा संपन्न होने के बाद सुबह 4:10 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण शुरू किया गया। दूसरी सोमवारी को उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। कांवरिया रूट पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर लगातार निगरानी रखी गई। प्रशासन की कोशिश रही कि लंबी कतार के बावजूद श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण कराया जा सके।   दूसरी सोमवारी पर देवघर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा पेश किया।

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
JPSC-JSSC protestors gathered near barricades during the Assembly gherao in Ranchi

JPSC-JSSC विधानसभा घेराव: चौथे बैरिकेड तक पहुंचे छात्र, देवेंद्र महतो भी आंदोलन में शामिल; BJP नेता हिरासत में

JPSC-JSSC आंदोलन के बीच हिरासत में लिए गए बाबूलाल मरांडी और भाजपा नेता

JPSC-JSSC Protest: बाबूलाल मरांडी समेत BJP नेता हिरासत में, विधानसभा सत्र से दूर रहे भाजपा विधायक

मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का JPSC-JSSC छात्र आंदोलन पर बयान

JPSC-JSSC Protest: मंत्री सुदिव्य कुमार का BJP पर हमला, बोले- छात्रों के आंदोलन को ‘हाईजैक’ करने की कोशिश

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French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
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भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

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