झारखंड

झारखंड एटीएस के टारगेट पर गैंगस्टर, 150 लिस्टेड

abhishek singh जून 10, 2026 0
Jharkhand ATS News
Jharkhand ATS

रांची। झारखंड में लगातार बढ़ रहे गैंगस्टरों के कारनामे के बाद एटीएस एक्शन में है। झारखंड एटीएस के टारगेट पर राज्य में सक्रिय गैंग और उनसे जुड़े गैंगस्टर हैं। फिलहाल एटीएस ने ऐसे 150 गैंगस्टरों की लिस्ट तैयार की है, जो उसके टारगेट पर हैं।

बता दें कि हाल के दिनों में प्रिसं खान, राहुल दुबे और राहुल सिंह के कारनामों के कारण राज्य के व्यवसायी और कारोबारी दहशत में हैं। प्रिसं खान ने तो बीते 5-6 दिनों में रांची के व्यवसायियों से कुल 5 करोड़ से ज्यादा की रंगदारी की मांग कर डाली है। इसके बाद से ही कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं।


5 जिलों पर खास फोकस


झारखण्ड के पांच जिलों में संगठित अपराध के खिलाफ एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी एटीएस ने कार्रवाई शुरू की है। यह कार्रवाई सीधे तौर पर गैंगस्टर नेटवर्क, उनके गुर्गों और आर्थिक सपोर्ट सिस्टम को खत्म करने को लेकर शुरू हुई हैं। रामगढ़, चतरा, हजारीबाग और लातेहार के साथ-साथ राजधानी रांची में भी एटीएस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। करीब एक दर्जन से ज्यादा एसटीएस की टीमें पिछले 20 दिनों से इन जिलों में सक्रिय हैं और घर-घर जाकर संदिग्धों की जानकारी जुटा रही हैं।


150 से ज्यादा गैंगस्टर टारगेट पर


एटीएस द्वारा अब तक लगभग 150 गैंगस्टरों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार की जा चुकी है, जो कुख्यात अपराधी गिरोहों से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच के दायरे में प्रमुख गैंग नेटवर्क शामिल हैं, जिनमें प्रिंस खान गैंग, राहुल सिंह गैंग, राहुल दुबे नेटवर्क, सुजीत सिन्हा गैंग और अमन साव का नेटवर्क तथा पांडेय गिरोह शामिल हैं। इनमें गुर्गों के साथ-साथ संरक्षण देने वाले लोग और कई मामलों में पारिवारिक सदस्य भी जांच के घेरे में हैं। एटीएस की टीमें सीधे वर्तमान और पूर्व अपराधियों के घर पहुंचकर भौतिक सत्यापन कर रही हैं, ताकि गैंगस्टर नेटवर्क की आर्थिक जड़ों तक पहुंचा जा सके।


2 दर्जन से ज्यादा संदिग्ध गायब


जांच के दौरान करीब दो दर्जन लोग अभी तक एटीएस के संपर्क में नहीं आए हैं, जिस पर एजेंसी गंभीर है। उनकी लोकेशन और गतिविधियों को लेकर अलग से ट्रैकिंग की जा रही है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रिम्स में मेडिकल शिक्षा का बड़ा विस्तार, MBBS से सुपर स्पेशियलिटी में बढ़ेगी सीटें

रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान रिम्स (RIMS), रांची में मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने एमबीबीएस (UG), पीजी और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने रिम्स प्रबंधन को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है।   MBBS, PG और सुपर स्पेशियलिटी सीटों में होगा इजाफा प्रस्तावित योजना के तहत रिम्स में एमबीबीएस सीटों की संख्या 180 से बढ़ाकर 250 करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं पीजी सीटें 176 से बढ़ाकर 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटें 11 से बढ़ाकर 100 करने की तैयारी है। यह विस्तार केंद्र प्रायोजित योजना के तहत किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक अतिरिक्त सीट पर 1.5 करोड़ रुपये तक की सहायता उपलब्ध होगी। खर्च का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी।   नए भवन और आधुनिक सुविधाओं का होगा विकास स्वास्थ्य विभाग ने रिम्स प्रशासन को सीट विस्तार के लिए आवश्यक भवन, उपकरण, मानव संसाधन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का आकलन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का निर्देश दिया है। जिन पुराने भवनों का जीर्णोद्धार संभव नहीं है, उन्हें हटाकर नए शैक्षणिक और चिकित्सा भवन बनाने की भी योजना है।   PPP मॉडल पर बनेंगे छात्रावास रिम्स-2 परियोजना के तहत छात्रावासों का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर करने का प्रस्ताव है। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा और छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही मौजूदा छात्रावासों के उन्नयन की भी योजना बनाई जा रही है।   झारखंड को मिलेगा बड़ा लाभ इस महत्वाकांक्षी योजना के लागू होने से झारखंड में डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी। छात्रों को उच्च चिकित्सा शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। साथ ही राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

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BBCL आउटसोर्सिंग परियोजना को लेकर धनबाद में बवाल, फायरिंग और मारपीट के आरोप से बढ़ा तनाव

धनबाद। धनबाद के झरिया क्षेत्र स्थित घनुडीह चीनकोठी बस्ती में बुधवार को BBCL आउटसोर्सिंग परियोजना के विस्तार को लेकर विवाद गहरा गया। बस्ती के समीप ओवरबर्डन (ओबी) डंपिंग का विरोध कर रहे ग्रामीणों और कंपनी समर्थक लोगों के बीच कहासुनी के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों ने मारपीट और हवाई फायरिंग का आरोप लगाया है, हालांकि पुलिस ने अभी तक फायरिंग की पुष्टि नहीं की है।   ओबी डंपिंग का विरोध बना विवाद की वजह स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सिंह नेचुरल आउटसोर्सिंग परियोजना के तहत बस्ती के नजदीक ओबी डंपिंग की जा रही थी। ग्रामीण लंबे समय से इसका विरोध कर रहे थे। बुधवार को विरोध के दौरान कंपनी समर्थक लोगों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस हुई, जो बाद में मारपीट में बदल गई। ग्रामीणों का कहना है कि विरोध को दबाने के लिए दहशत फैलाने की नीयत से हवाई फायरिंग भी की गई।   मौके पर पहुंचे मेयर और पुलिस अधिकारी घटना की सूचना मिलते ही धनबाद के मेयर संजीव सिंह और घनुडीह ओपी पुलिस घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली। घटनास्थल से एक खोखा मिलने की भी सूचना है, जिसके आधार पर पुलिस जांच कर रही है। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से अब तक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।   मेयर ने लगाए गंभीर आरोप मेयर संजीव सिंह ने कहा कि ग्रामीणों की आपत्ति के बावजूद विवादित क्षेत्र में ओबी डंपिंग का प्रयास किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि विरोध कर रहे लोगों के साथ मारपीट हुई और समय पर पुलिस नहीं पहुंचती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठक नहीं होती, तब तक विवादित स्थल पर किसी भी प्रकार की ओबी डंपिंग या नए कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी।   पुलिस ने शुरू की जांच ग्रामीण सुनील कुमार मंडल ने आरोप लगाया कि करीब 30 लोगों ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उनका हाथ टूट गया। वहीं, सिंदरी एसडीपीओ प्रकाश चंद्र महतो ने कहा कि मारपीट की सूचना मिली है, लेकिन फायरिंग की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और शिकायत मिलने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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झारखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज, 11 जून को 14 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

रांची: झारखंड में अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, 10 जून से राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने, वज्रपात और हल्की बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, 15 से 17 जून के बीच संताल परगना क्षेत्र के रास्ते दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के झारखंड में प्रवेश करने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 10 जून को राजधानी रांची का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। कोडरमा और हजारीबाग को छोड़कर राज्य के अधिकांश जिलों में बादल छाए रहने और गरज के साथ बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। 11 जून को 14 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने 11 जून के लिए राज्य के 14 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने, वज्रपात होने और कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। ऑरेंज अलर्ट वाले जिले हैं: रांची खूंटी रामगढ़ धनबाद हजारीबाग कोडरमा गिरिडीह देवघर दुमका गोड्डा जामताड़ा पाकुड़ साहिबगंज बोकारो मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की है। 12 जून को भी जारी रहेगा असर 12 जून को भी राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहने, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसे देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि ऐसी स्थिति 15 जून तक बनी रह सकती है। मॉनसून की स्थिति क्या है? दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले चार से पांच दिनों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों में मॉनसून पहुंच सकता है। झारखंड में मॉनसून का प्रवेश संताल परगना क्षेत्र से होने की संभावना जताई गई है।  

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