झारखंड

3000 जवानों को चमका देकर फरार हुआ मोस्ट वांटेड इनामी नक्सली मिसिर बेसरा

abhishek singh जून 26, 2026 0
Misir Besra
Most Wanted Naxal Misir Besra

रांची। झारखंड, बिहार और ओडिशा क्षेत्र का मोस्ट वांटेड और एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में सफल रहा है। लगभग 3000 सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बावजूद वह सारंडा के जंगलों से निकलकर कोल्हान क्षेत्र के घने जंगलों में पहुंच गया है। उसके साथ उसके करीबी सहयोगी अजय महतो के भी होने की सूचना है। नई खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने अब अभियान का दायरा सारंडा से बढ़ाकर दलमा और आसपास के इलाकों तक विस्तारित कर दिया है।

 

सूत्रों के अनुसार,


सूत्रों के अनुसार, पिछले एक महीने से केंद्रीय सुरक्षा बलों, झारखंड पुलिस और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम ने सारंडा के जराइकेला, गोइलकेरा और बलिबा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अभियान चला रखा था। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और लैंडमाइंस के खतरे के बीच नक्सलियों की घेराबंदी की गई थी। हालांकि, रात के समय सुरक्षा बलों की सीमित गतिविधियों का फायदा उठाकर मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ छोटे-छोटे समूहों में बंट गया और अलग-अलग रास्तों से जंगल से निकलने में सफल रहा। बताया जा रहा है कि बेसरा सबसे पहले केवल एक सहयोगी के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंचा, जबकि अन्य नक्सली बाद में अलग-अलग समूहों में उससे जा मिले।

 

खुफिया एजेंसियों के अनुसार


खुफिया एजेंसियों के अनुसार, नक्सली नेटवर्क अब तीन हिस्सों में बंट चुका है। पहला और सबसे अहम समूह मिसिर बेसरा का कोर ग्रुप है, जिसमें अजय महतो सहित दो हार्डकोर नक्सली शामिल हैं। दूसरा समूह 10 से 15 नक्सलियों का है, जो सारंडा-ओडिशा सीमा क्षेत्र में सक्रिय है, जबकि तीसरा समूह करीब नौ नक्सलियों के साथ पोड़ाहाट के जंगलों में मौजूद बताया जा रहा है।


पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार अभियानों के कारण नक्सलियों की लॉजिस्टिक सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है और उनके बड़े ठिकाने भी ध्वस्त किए जा चुके हैं। पहले की तुलना में मिसिर बेसरा के पास न तो पर्याप्त कैडर शक्ति बची है और न ही स्थानीय स्तर पर मजबूत समर्थन। अधिकारियों का मानना है कि जंगल से बाहर निकलने के बाद उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखना आसान होगा और उसके सामने आत्मसमर्पण के अलावा विकल्प सीमित रह गए हैं।

 

पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने बताया 


चाईबासा के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने बताया कि कोल्हान के जंगलों में भी घेराबंदी तेज कर दी गई है। ड्रोन निगरानी, ग्राउंड इंटेलिजेंस और संयुक्त सुरक्षा अभियान के जरिए नक्सलियों की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में नक्सलियों की मुश्किलें और बढ़ेंगी तथा सुरक्षा बल उन्हें जल्द पकड़ने या आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की दिशा में लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड

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Amba Prasad Reaction
JPSC-JSSC विवाद पर अंबा प्रसाद का अपनी ही सरकार पर हमला, बोलीं- CBI जांच होनी चाहिए

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने परीक्षा विवाद की CBI से जांच कराने की मांग की है। अंबा प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस सरकार का हिस्सा जरूर है, लेकिन कथित परीक्षा घोटाले में पार्टी की कोई भूमिका नहीं है।   छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन   अंबा प्रसाद ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए रांची में प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग करने के बजाय उनकी समस्याओं को बातचीत के जरिए सुना जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं और मामला अब राजनीतिक रूप से भी काफी गरमा चुका है।   CBI जांच की मांग क्यों उठी?   अंबा प्रसाद के मुताबिक, परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। छात्रों की ओर से भी लंबे समय से CBI जांच की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि केंद्रीय एजेंसी से जांच होने पर पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है और दोषियों की पहचान हो सकेगी।   राज्य सरकार पहले ही कुछ भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर चुकी है। वहीं 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए ED की जांच का रास्ता भी खुल चुका है। इसके बावजूद छात्र CBI जांच की मांग पर कायम हैं।   JPSC के पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल   मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी जारी है। JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार किया है। इसके अलावा परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TSR Data Processing Limited (TDPL) को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिस कंपनी को पहले JSSC ने कथित अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया था, उसे JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा काम दिया गया।   सरकार और छात्रों के बीच बढ़ा टकराव   JPSC-JSSC विवाद अब सिर्फ परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है। विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद छात्र आंदोलन और तेज हो गया है। इसके विरोध में भाजपा ने 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया है।   ऐसे माहौल में अंबा प्रसाद का CBI जांच की मांग करना सरकार के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार छात्रों की इस प्रमुख मांग पर क्या रुख अपनाती है और आंदोलन को समाप्त करने के लिए आगे कौन-सा कदम उठाया जाता है।

abhishek singh अगस्त 11, 2026 0
Jharkhand bandh 2026

झारखंड बंद का कई जिलों में मिलाजुला असर, लाठीचार्ज के विरोध में सड़कों पर उतरे BJP कार्यकर्ता

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झारखंड परीक्षा धांधली पर CM हेमंत सोरेन का बड़ा आरोप, यूपी की कंपनी से जोड़ा कनेक्शन

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JSSC Recruitment
हाईकोर्ट ने सरकार और JSSC को 70 पद रिक्त रखने का दिया निर्देश, दो वर्षीय B.Ed अभ्यर्थियों को राहत

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य शिक्षक नियुक्ति से जुड़े मामले में राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को 70 पद रिक्त रखने का निर्देश दिया है। यह आदेश दो वर्षीय B.Ed कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने से जुड़े विवाद पर सुनवाई के दौरान दिया गया।   JSSC की अपील सुनवाई के लिए स्वीकार   मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने JSSC की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। JSSC ने एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें दो वर्षीय B.Ed करने वाले अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में शामिल करने और उनका परिणाम जारी करने का निर्देश दिया गया था। एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर भी खंडपीठ ने अगले आदेश तक सुनवाई रोकने का निर्देश दिया है।   दो वर्षीय B.Ed अभ्यर्थियों का क्या है मामला   मामला उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है जिन्होंने दो वर्षीय B.Ed कोर्स किया है और सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में कक्षा छह से आठ तक गणित, विज्ञान सहित अन्य विषयों के लिए आवेदन किया था।   अभ्यर्थियों की दलील थी कि 29 जनवरी 2024 के संशोधन में दो वर्षीय B.Ed को भी मान्य योग्यता में शामिल किया गया था। इसलिए उन्हें परीक्षा के लिए योग्य मानते हुए उनका परिणाम जारी किया जाना चाहिए।   JSSC ने क्यों जताई आपत्ति   JSSC की ओर से अदालत में दलील दी गई कि इस नियुक्ति प्रक्रिया के लिए 2022 की नियुक्ति नियमावली लागू होगी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के परिमल कुमार मामले का हवाला देते हुए कहा कि 29 जनवरी 2024 का संशोधन इस भर्ती प्रक्रिया पर लागू नहीं होता।   आयोग के अनुसार वर्ष 2023 में जारी विज्ञापन में सहायक आचार्य पद के लिए एक वर्षीय B.Ed को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता माना गया था। वहीं दो वर्षीय B.Ed को बाद के संशोधन में शामिल किया गया था।   जनवरी 2027 में होगी अगली सुनवाई   हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल 70 पद रिक्त रखे जाएंगे, ताकि इस मामले का अंतिम फैसला होने पर संबंधित अभ्यर्थियों के हित प्रभावित न हों। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होने की जानकारी सामने आई है। तब तक नियुक्ति प्रक्रिया में इन 70 पदों को सुरक्षित रखना अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
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BJP MLAs protesting outside the Jharkhand Chief Minister’s residence in Ranchi
विधानसभा छोड़ CM आवास घेरने पहुंचे भाजपा विधायक,स्पीकर ने कहा- अच्छी परंपरा नहीं

रांची: झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को सदन में बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला. JPSC-JSSC विवाद को लेकर भाजपा विधायक विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने के बजाय मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पहुंच गये. इसके चलते विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष का एक भी विधायक मौजूद नहीं रहा. सोमवार सुबह मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले ही छात्रों के विधानसभा घेराव को लेकर राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं. भाजपा विधायक पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के आवास पर जुटे. इसके बाद बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायक और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकल गये. मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान भाजपा नेता हिरासत में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने छात्रों के मुद्दे और JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक दिया. इसके बाद कई भाजपा विधायकों और नेताओं को हिरासत में लेकर खेलगांव ले जाया गया. विधायकों के हिरासत में लिये जाने के कारण विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष की मौजूदगी नहीं रही. सदन में प्रश्नकाल से लेकर अनुपूरक बजट पर चर्चा तक केवल सत्ता पक्ष के विधायक ही नजर आये. राज्य गठन के बाद पहली बार विपक्षी विधायक सदन से रहे बाहर बताया गया कि राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है, जब विपक्षी विधायक हिरासत में लिये जाने के कारण सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सके. हालांकि, इससे पहले भी विपक्ष के वॉकआउट के कारण विधानसभा की कार्यवाही बिना विपक्ष के चल चुकी है. इस बार स्थिति अलग रही, क्योंकि भाजपा विधायकों ने पहले मुख्यमंत्री आवास के घेराव का कार्यक्रम किया और प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया. स्पीकर ने जतायी नाराजगी विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति पर विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने नाराजगी जतायी. उन्होंने कहा कि यह संसदीय परंपरा के लिहाज से उचित नहीं है. उनका कहना था कि विधायकों को सदन में रहकर सवाल उठाने चाहिए और सरकार से जवाब मांगना चाहिए. स्पीकर ने कहा कि सवाल पूछकर सदन में मौजूद नहीं रहना संसदीय व्यवस्था के लिए अच्छी परंपरा नहीं है. अरूप चटर्जी ने सदन में उठाया छात्रों का मुद्दा इधर, सदन में छात्रों के विधानसभा घेराव का मुद्दा भी उठा. विधायक अरूप चटर्जी ने JPSC-JSSC विवाद और छात्रों के आंदोलन का मामला सदन में रखा. उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगों को लेकर काफी हद तक कदम उठाये हैं, लेकिन JSSC CGL परीक्षा को लेकर कोर्ट का हवाला दिया जा रहा है. उन्होंने मांग की कि सरकार कोर्ट के माध्यम से मामले में हस्तक्षेप कर जांच कराये. अरूप चटर्जी ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, हालांकि आंदोलन के बीच कुछ उपद्रवी तत्वों के शामिल होने की बात भी सामने आयी है. सदन के बाहर छात्र आंदोलन, अंदर सियासी टकराव एक तरफ रांची की सड़कों पर JPSC-JSSC अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ भाजपा विधायकों ने भी मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की. भाजपा नेताओं की गैरमौजूदगी के बीच विधानसभा की कार्यवाही सत्ता पक्ष के विधायकों के साथ चलती रही. इस पूरे घटनाक्रम ने छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड की राजनीति में टकराव और बढ़ा दिया है.  

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