रांची। झारखंड, बिहार और ओडिशा क्षेत्र का मोस्ट वांटेड और एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में सफल रहा है। लगभग 3000 सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बावजूद वह सारंडा के जंगलों से निकलकर कोल्हान क्षेत्र के घने जंगलों में पहुंच गया है। उसके साथ उसके करीबी सहयोगी अजय महतो के भी होने की सूचना है। नई खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने अब अभियान का दायरा सारंडा से बढ़ाकर दलमा और आसपास के इलाकों तक विस्तारित कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले एक महीने से केंद्रीय सुरक्षा बलों, झारखंड पुलिस और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम ने सारंडा के जराइकेला, गोइलकेरा और बलिबा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अभियान चला रखा था। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और लैंडमाइंस के खतरे के बीच नक्सलियों की घेराबंदी की गई थी। हालांकि, रात के समय सुरक्षा बलों की सीमित गतिविधियों का फायदा उठाकर मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ छोटे-छोटे समूहों में बंट गया और अलग-अलग रास्तों से जंगल से निकलने में सफल रहा। बताया जा रहा है कि बेसरा सबसे पहले केवल एक सहयोगी के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंचा, जबकि अन्य नक्सली बाद में अलग-अलग समूहों में उससे जा मिले।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, नक्सली नेटवर्क अब तीन हिस्सों में बंट चुका है। पहला और सबसे अहम समूह मिसिर बेसरा का कोर ग्रुप है, जिसमें अजय महतो सहित दो हार्डकोर नक्सली शामिल हैं। दूसरा समूह 10 से 15 नक्सलियों का है, जो सारंडा-ओडिशा सीमा क्षेत्र में सक्रिय है, जबकि तीसरा समूह करीब नौ नक्सलियों के साथ पोड़ाहाट के जंगलों में मौजूद बताया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार अभियानों के कारण नक्सलियों की लॉजिस्टिक सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है और उनके बड़े ठिकाने भी ध्वस्त किए जा चुके हैं। पहले की तुलना में मिसिर बेसरा के पास न तो पर्याप्त कैडर शक्ति बची है और न ही स्थानीय स्तर पर मजबूत समर्थन। अधिकारियों का मानना है कि जंगल से बाहर निकलने के बाद उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखना आसान होगा और उसके सामने आत्मसमर्पण के अलावा विकल्प सीमित रह गए हैं।
चाईबासा के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने बताया कि कोल्हान के जंगलों में भी घेराबंदी तेज कर दी गई है। ड्रोन निगरानी, ग्राउंड इंटेलिजेंस और संयुक्त सुरक्षा अभियान के जरिए नक्सलियों की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में नक्सलियों की मुश्किलें और बढ़ेंगी तथा सुरक्षा बल उन्हें जल्द पकड़ने या आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की दिशा में लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तैयारियां जोरों पर हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज जमा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया कि किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो। फर्जी प्रमाणपत्र बनाने की मिल रही सूचनाएं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि कई जिलों से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जाने की सूचनाएं मिल रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत तत्काल कार्रवाई की जाए। गलत जानकारी देकर घोषणा पत्र जमा करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। 30 जून से घर-घर जाएंगे BLO एसआईआर का कार्य 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर आंशिक रूप से पहले से भरे हुए इन्यूमरेशन फॉर्म दो प्रतियों में वितरित करेंगे। यदि कोई घर बंद मिलता है तो BLO को कम से कम तीन बार जाना अनिवार्य होगा। इन पांच श्रेणियों के नाम होंगे बाहर प्रारूप मतदाता सूची में एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ, डुप्लीकेट और रिफ्यूज टू साइन इन पांच श्रेणियों के मतदाताओं का नाम शामिल नहीं किया जाएगा। विदेशी नागरिकता ले चुके और झूठी घोषणा देकर सूची में नाम दर्ज कराने वाले लोगों का पंजीकरण रद्द किया जाएगा। एससी, एसटी और PVTG के लिए विशेष व्यवस्था बुजुर्गों, बीमारों और विशेष रूप से एससी, एसटी और पीवीटीजी समुदाय की सहायता के लिए मतदान केंद्रों पर विशेष स्वयंसेवक तैनात रहेंगे। 30 जून को सुबह 11 से 12 बजे तक व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। अंतिम सूची 7 अक्टूबर को 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी। इस पर 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। सभी प्रक्रियाओं के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सुनिश्चित किया गया है। के. रवि कुमार ने सभी राजनीतिक दलों से SIR में सक्रिय सहयोग की अपील करते हुए कहा कि लक्ष्य है एक पूर्णतः शुद्ध, त्रुटिहीन और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना।
रांची। मोहर्रम पर्व के अवसर पर 27 जून (शनिवार) को रांची जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताजिया और अखाड़ा जुलूस निकाले जाएंगे। बड़ी संख्या में धार्मिक जुलूसों के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए जिले के सभी सरकारी, गैर-सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में एक दिन का अवकाश घोषित किया है। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर जारी आदेश के अनुसार, स्कूली बच्चों की सुरक्षा और सुगम यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि जुलूस के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों में भारी भीड़ और ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी हो सकती है। जरूरी परीक्षाओं को मिली सशर्त अनुमति जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में पहले से निर्धारित परीक्षाएं आयोजित की जानी अत्यंत आवश्यक हैं, वे जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) रांची को पूर्व सूचना देकर परीक्षा आयोजित कर सकते हैं। इसके अलावा सभी शैक्षणिक गतिविधियां 27 जून को स्थगित रहेंगी। ट्रैफिक व्यवस्था में रहेगा बदलाव मोहर्रम के अवसर पर शहर के कई प्रमुख मार्गों से ताजिया और अखाड़ा जुलूस गुजरेंगे। इसे देखते हुए यातायात पुलिस द्वारा विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाएगा। कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित या डायवर्ट की जा सकती है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे आवश्यक होने पर ही घर से निकलें तथा वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। शांति और भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील इस बीच शिया समुदाय के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री से मुलाकात कर उन्हें मुख्य जुलूस में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन मोहर्रम को शांतिपूर्ण और गरिमामय ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। मौलाना तहजीब उल हसन रिजवी समेत शिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि मोहर्रम का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शांति, भाईचारे और धार्मिक अनुशासन के साथ किया जाएगा। प्रशासन ने सभी नागरिकों, विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों से सहयोग बनाए रखने तथा सामाजिक सौहार्द कायम रखने की अपील की है।
रांची। झारखंड सरकार ने स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने और छात्राओं के स्वास्थ्य एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दो बड़ी योजनाओं को मंजूरी दे दी है। विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई योजना प्राधिकर की बैठक में सरकारी स्कूलों की छात्राओं को नि:शुल्क सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने और राज्य में 100 नए मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय खोलने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इन दोनों योजनाओं पर कुल 845 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नवंबर से 8.50 लाख छात्राओं को मिलेगा मुफ्त सेनेटरी पैड नई योजना के तहत राज्य के करीब 13 हजार सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12वीं तक की छात्राओं को नवंबर 2026 से मुफ्त सेनेटरी पैड दिए जाएंगे। झारखंड के सरकारी विद्यालयों में लगभग 12 लाख छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन शुरुआती चरण में औसत दैनिक उपस्थिति के आधार पर करीब 8.50 लाख छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा। प्रत्येक छात्रा को हर महीने 10 सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएंगे। इस योजना पर 124 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष यह प्रस्ताव वापस कर दिया गया था, जिसे संशोधित कर दोबारा भेजने के बाद अब मंजूरी मिली है। 100 नए मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय होंगे शुरू राज्य सरकार ने अगले वर्ष 100 नए मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय खोलने का भी फैसला लिया है। इनमें 59 प्रखंड स्तरीय और 41 पंचायत स्तरीय विद्यालय शामिल होंगे। इन स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध कराया जाएगा और इनके निर्माण व आधारभूत संरचना के विकास पर लगभग 721 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे नए स्कूल नए उत्कृष्ट विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी। स्कूलों में आईसीटी लैब, आधुनिक लैंग्वेज लैब, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान की अलग-अलग प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा आउटडोर और इनडोर खेल सुविधाएं तथा पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने पर मल्टीपरपज हॉल का भी निर्माण कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से छात्राओं के स्वास्थ्य, शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं में व्यापक सुधार होगा।