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5kg LPG Without Address Proof: Govt Relief

बिना एड्रेस प्रूफ के मिलेगा 5 किलो LPG सिलेंडर: सरकार का बड़ा फैसला, लाखों लोगों को राहत

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Small 5kg LPG cylinder available without address proof under new government policy in India.
5kg LPG Cylinder Without Address Proof India

ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों के लिए बड़ा राहत भरा कदम उठाया है। अब 5 किलोग्राम का छोटा एलपीजी सिलेंडर खरीदने के लिए एड्रेस प्रूफ की जरूरत नहीं होगी। यह नई व्यवस्था खासतौर पर प्रवासी मजदूरों, छात्रों और अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने Free Trade LPG (FTL) cylinder की बिक्री के नियमों को सरल बना दिया है। अब कोई भी व्यक्ति सिर्फ एक वैध फोटो पहचान पत्र दिखाकर यह सिलेंडर आसानी से खरीद सकता है।

एड्रेस प्रूफ का झंझट खत्म

अब तक गैस कनेक्शन लेने के लिए पते का प्रमाण देना अनिवार्य था, जिससे कई लोगों को परेशानी होती थी। खासकर वे लोग जो काम या पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहते हैं, उनके लिए यह प्रक्रिया काफी जटिल थी। नई व्यवस्था के तहत यह बाध्यता पूरी तरह खत्म कर दी गई है।

किन डॉक्यूमेंट्स से मिलेगा सिलेंडर?

अब 5 किलो LPG सिलेंडर लेने के लिए आपको सिर्फ इनमें से कोई एक आईडी दिखानी होगी:

  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड
  • वोटर आईडी
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी कोई भी फोटो पहचान पत्र

क्यों लिया गया यह फैसला?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के चलते ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में सरकार छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाकर आम लोगों पर पड़ने वाले असर को कम करना चाहती है।

23 मार्च से अब तक देशभर में 6.6 लाख से ज्यादा छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। अकेले 4 अप्रैल को ही करीब 90,000 सिलेंडर की बिक्री हुई, जो इसकी बढ़ती मांग को दर्शाता है।

किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

  • स्टूडेंट्स और बैचलर: जो अकेले रहते हैं और कम मात्रा में खाना बनाते हैं
  • प्रवासी मजदूर: जिनके पास स्थायी पता नहीं होता
  • बैकअप यूजर: बड़े सिलेंडर खत्म होने पर इमरजेंसी उपयोग
  • ट्रैवलर्स: पिकनिक या यात्रा के दौरान आसानी से ले जाने योग्य

रिफिल पर भी कोई रोक नहीं

इस योजना की खास बात यह है कि ग्राहक साल में कितनी भी बार सिलेंडर रिफिल करवा सकते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट्स पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है, जिससे सप्लाई में किसी तरह की कमी न हो।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Petrol Pump Rule
अब पेट्रोल पंप से नहीं खरीद सकेंगे ज्यादा तेल! सरकार ने लागू किए नए नियम

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद को लेकर नई गाइडलाइन जारी करते हुए बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए आदेश के तहत ऐसे उपभोक्ता अब सामान्य पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट्स) से ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल और डीजल केवल अधिकृत बल्क सेल प्वाइंट्स (थोक बिक्री केंद्रों) से ही खरीदना होगा। यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है।   मध्य-पूर्व संकट के बीच लिया गया फैसला सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की, जबकि थोक ग्राहकों के लिए ईंधन महंगा कर दिया गया। इसी वजह से कई बड़े उद्योग और संस्थान सस्ता ईंधन पाने के लिए पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने लगे, जिससे कई क्षेत्रों में आम लोगों के लिए आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई।   200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा नई गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी संदिग्ध ग्राहक या वाहन को एक पेट्रोल पंप से एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। इससे अधिक मात्रा में ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा डीजल की बिक्री केवल वाहन के मुख्य ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से प्रमाणित कंटेनरों में ही की जाएगी।   नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल को दोबारा मुनाफे के लिए बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, संस्थानों या पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राज्य सरकारों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।   जांच और जब्ती का अधिकार भी बढ़ाया गया नए निर्देशों के तहत अधिकृत अधिकारी, डीएसपी स्तर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी तथा तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी पेट्रोल पंपों की जांच कर सकेंगे। यदि कहीं अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो वे ईंधन और संबंधित सामग्री जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।

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होर्मुज क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के बाद भारत की चिंता बढ़ी, तीन भारतीयों की मौत पर अमेरिका से उठाया नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

  नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी में बढ़ते समुद्री एवं सैन्य तनाव के बीच जहाजों पर हुई हालिया घटनाओं में तीन भारतीय नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है। इसके बाद भारत सरकार ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में कुछ विदेशी ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुई सैन्य कार्रवाइयों के दौरान भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। भारत ने इस मुद्दे को अमेरिका के सामने उठाते हुए क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटना के बाद अमेरिकी अधिकारियों को भारत की चिंताओं से अवगत कराया गया और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध और सुरक्षित आवागमन वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रभावित जहाजों में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अधिकारियों के अनुसार, हालिया घटनाओं में शामिल जहाज विदेशी ध्वज वाले थे, लेकिन उनमें भारतीय चालक दल के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद थे। कुछ जहाजों से चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि कुछ मामलों में भारतीय नागरिकों की मौत की सूचना मिली है। सरकार ने कहा है कि वह प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है। मृतकों के परिवारों को सहायता बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि मृत भारतीय नाविकों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। हालिया घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत ने दोहराया है कि वह पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों के पक्ष में है तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाता रहेगा।  

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रूसी तेल पर सवाल उठाने वाले यूरोप को जयशंकर का जवाब, बोले- भारत ने हमेशा राष्ट्रीय हित में लिए फैसले

  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की नीति का मजबूती से बचाव करते हुए कहा कि देश ने हमेशा कीमत, उपलब्धता और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी है। फिनलैंड में आयोजित ‘कुलतरांता टॉक्स’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यूरोपीय देशों के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वैश्विक मुद्दों पर नैतिकता की बात करने वाले देशों को अपने आचरण पर भी नजर डालनी चाहिए। ‘उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा’ विषय पर आयोजित चर्चा में जयशंकर से रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बढ़ाने को लेकर सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उस समय वैश्विक बाजार की परिस्थितियों ने भारत को व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत तेल की खरीद उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव आया, तब रूस का तेल अधिक उपलब्ध था, जबकि यूरोपीय देश मध्य पूर्व से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे थे, जो पारंपरिक रूप से भारत का प्रमुख स्रोत रहा है। यूरोप के रवैये पर उठाए सवाल ऊर्जा नीति पर भारत का पक्ष रखने के बाद जयशंकर ने यूरोप के दृष्टिकोण पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे किसी यूरोपीय देश की सुरक्षा प्रभावित हुई हो, लेकिन भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले कई हथियार यूरोप से आए हैं। जब उनसे इस टिप्पणी पर और स्पष्टता मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि वर्षों से ऐसे हथियारों की आपूर्ति होती रही है जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। ‘राष्ट्रीय हित सर्वोपरि’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। उनके अनुसार, वैश्विक संकट के दौर में हर देश अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है और भारत ने भी वही किया। जयशंकर ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और उससे जुड़े ऊर्जा संबंधी फैसलों को केवल नैतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अधिकांश देश अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के आधार पर निर्णय लेते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में संतुलन का मुद्दा विदेश मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि रूस पर प्रतिबंधों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका थी। ऐसे समय में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए, जिससे घरेलू आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस से तेल आयात को लेकर भारत और पश्चिमी देशों के बीच समय-समय पर चर्चा होती रही है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी विदेश और ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों तथा व्यावहारिक आवश्यकताओं पर आधारित है।  

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