टेक्नोलॉजी

Oppo Find X9 Series Specs Leaked Before Launch

लॉन्च से पहले लीक हुए Oppo Find X9 Ultra और X9s के फीचर्स, जानिए कीमत और स्पेसिफिकेशन

surbhi मई 12, 2026 0
Oppo Find X9 Ultra smartphone with premium camera setup and AMOLED display leaked before India launch
Oppo Find X9 Ultra and X9s Leak

चीनी स्मार्टफोन कंपनी OPPO जल्द ही भारत में अपनी नई फ्लैगशिप सीरीज लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि Oppo Find X9 Ultra और Oppo Find X9s इस महीने भारतीय बाजार में एंट्री करेंगे। लॉन्च से पहले दोनों स्मार्टफोन्स के फीचर्स, कैमरा डिटेल्स और संभावित कीमत ऑनलाइन लीक हो गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों स्मार्टफोन्स प्रीमियम डिजाइन, हाई-एंड कैमरा सेटअप और बड़ी बैटरी के साथ लॉन्च किए जाएंगे। कंपनी ने इससे पहले इन डिवाइसेज को चीन और अन्य ग्लोबल मार्केट्स में पेश किया था और अब भारतीय यूजर्स के लिए इन्हें उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।

Oppo Find X9 Ultra में मिलेगा प्रीमियम कैमरा और पावरफुल परफॉर्मेंस

Oppo Find X9 Ultra को कंपनी का सबसे प्रीमियम फ्लैगशिप मॉडल माना जा रहा है। स्मार्टफोन में फ्लैट मेटल फ्रेम और साइड में नया ऑरेंज शॉर्टकट बटन देखने को मिल सकता है।

फोन में 6.82 इंच का 2K AMOLED डिस्प्ले दिए जाने की उम्मीद है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करेगा। इससे गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग का अनुभव काफी स्मूद हो सकता है।

कैमरा सेक्शन इसकी सबसे बड़ी खासियत माना जा रहा है। स्मार्टफोन में Hasselblad के साथ मिलकर तैयार किया गया क्वाड रियर कैमरा सेटअप मिल सकता है। इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • 200MP प्राइमरी कैमरा
  • 200MP पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा (3x ऑप्टिकल जूम)
  • 50MP टेलीफोटो लेंस (10x ऑप्टिकल जूम)
  • 50MP अल्ट्रावाइड सेंसर

सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 50MP फ्रंट कैमरा मिलने की संभावना है। रियर और फ्रंट दोनों कैमरे 4K वीडियो रिकॉर्डिंग सपोर्ट कर सकते हैं।

परफॉर्मेंस के लिए इसमें Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर दिया जा सकता है। फोन में 7050mAh की बड़ी बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

Oppo Find X9s में भी मिलेंगे फ्लैगशिप फीचर्स

वहीं Oppo Find X9s को भी प्रीमियम फीचर्स के साथ पेश किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें Hasselblad-ट्यून ट्रिपल 50MP कैमरा सेटअप मिलेगा।

फोन में MediaTek का Dimensity 9500s प्रोसेसर दिए जाने की संभावना है। इसके अलावा 7025mAh की बैटरी और 80W वायर्ड फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिल सकता है।

डिस्प्ले की बात करें तो इसमें 6.59 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और बेहद पतले 1.15mm बेजल्स के साथ आ सकता है।

भारत में संभावित कीमत और लॉन्च डेट

लीक्स के अनुसार, OPPO दोनों स्मार्टफोन्स को भारत में 15 मई को लॉन्च कर सकती है। हालांकि कंपनी ने अभी तक लॉन्च डेट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

संभावित कीमत की बात करें तो:

  • Oppo Find X9 Ultra की कीमत 1,49,999 रुपये से अधिक हो सकती है
  • Oppo Find X9s की शुरुआती कीमत करीब 70,000 रुपये रहने की उम्मीद है

दोनों स्मार्टफोन्स के लिए माइक्रोसाइट्स पहले ही Flipkart, Amazon India और OPPO India पर लाइव हो चुकी हैं। फिलहाल इन्हें “Coming Soon” टैग के साथ दिखाया जा रहा है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Close-up of a vehicle key with a metal key-code tag used for duplicate key replacement
99% लोग नहीं जानते चाबी के साथ मिलने वाले मेटल टैग का असली काम, गलती से भी न फेंकें

नई कार या बाइक खरीदते समय चाबी के साथ एक छोटा सा मेटल या एल्युमीनियम टैग जरूर मिलता है। ज्यादातर लोग इसे बेकार समझकर तुरंत हटा देते हैं या कहीं फेंक देते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह छोटा सा टैग आपकी गाड़ी की सुरक्षा और सुविधा से सीधे जुड़ा होता है। असल में इस टैग पर लिखा हुआ कोड आपकी गाड़ी की चाबी का बेहद महत्वपूर्ण “की-कोड” होता है। अगर कभी आपकी गाड़ी की चाबी खो जाए, चोरी हो जाए या खराब हो जाए, तो यही छोटा सा कोड आपको बड़ी परेशानी और भारी खर्च से बचा सकता है। क्या होता है इस मेटल टैग पर लिखा कोड? वाहन कंपनियां हर चाबी के साथ एक यूनिक अल्फान्यूमेरिक कोड देती हैं। यह कोड उस चाबी की तकनीकी पहचान माना जाता है। यह कोड चाबी की कटिंग डिजाइन और लॉक सिस्टम से जुड़ी जानकारी स्टोर करता है। इसी वजह से सर्विस सेंटर या अधिकृत डीलर उसी कोड के आधार पर आपकी गाड़ी की नई चाबी तैयार कर सकते हैं। नई चाबी बनवाने में कैसे करता है मदद? अगर आपकी गाड़ी की दोनों चाबियां खो जाएं, तो आमतौर पर लोग सोचते हैं कि पूरा लॉक सिस्टम बदलवाना पड़ेगा। पहले ऐसा ही होता था, लेकिन अब आधुनिक तकनीक ने यह काम आसान कर दिया है। अधिकृत सर्विस सेंटर में मौजूद मशीन इस की-कोड को पढ़कर बिल्कुल वैसी ही नई चाबी तैयार कर देती है जैसी कंपनी ने मूल रूप से दी थी। इससे समय भी बचता है और लॉक किट बदलने का भारी खर्च भी नहीं उठाना पड़ता। स्मार्ट की और की-फोब में भी है बेहद जरूरी आजकल कई आधुनिक कारों में स्मार्ट की और की-फोब सिस्टम दिया जाता है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम के साथ एक छोटी इमरजेंसी फिजिकल चाबी भी मौजूद रहती है। अगर यह इमरजेंसी चाबी खो जाए या फोब खराब हो जाए, तब भी यही की-कोड नई चाबी बनाने में काम आता है। इतना ही नहीं, अगर चाबी चोरी हो जाए तो सर्विस सेंटर इसी कोड की मदद से पुरानी चाबी को सिस्टम से हटाकर नई चाबी को रजिस्टर कर सकता है। क्यों नहीं रखना चाहिए इसे चाबी के साथ? विशेषज्ञों के मुताबिक इस टैग को चाबी के साथ लटकाकर रखना सुरक्षित नहीं माना जाता। अगर किसी गलत व्यक्ति के हाथ आपकी चाबी और यह कोड दोनों लग जाएं, तो वह आसानी से डुप्लीकेट चाबी बनवा सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि इस टैग को वाहन के दस्तावेजों के साथ सुरक्षित जगह पर रखें। साथ ही इसके कोड की फोटो मोबाइल या ईमेल में सेव करके रखना भी समझदारी माना जाता है। छोटी सी चीज, लेकिन बड़े काम की दिखने में मामूली लगने वाला यह छोटा मेटल टैग आपकी गाड़ी की सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इसे फेंकना या नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए अगली बार नई गाड़ी खरीदें तो इस टैग को संभालकर जरूर रखें।  

surbhi मई 9, 2026 0
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