नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने भारत में डिजिटल पेमेंट अनुभव को बेहतर बनाने के लिए ‘Ask Google Pay’ नाम से नया AI चैटबॉट लॉन्च किया है। यह फीचर Google Pay ऐप के अंदर काम करेगा और Gemini AI तकनीक पर आधारित है। इसका उद्देश्य यूजर्स को अपने UPI लेनदेन समझने, खर्च का विश्लेषण करने और वित्तीय जानकारी हासिल करने में मदद करना है।
Ask Google Pay यूजर्स के खर्च करने के तरीके को समझकर जानकारी दे सकता है। यूजर अपने लेनदेन से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं, जैसे महीने में कितना खर्च हुआ, किन कैटेगरी में ज्यादा पैसे गए और खर्च को कैसे बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
Google के अनुसार, नया AI असिस्टेंट टेक्स्ट और वॉयस दोनों माध्यमों से इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह फीचर 10 भारतीय भाषाओं में वित्तीय जानकारी को आसान भाषा में समझाने में मदद करेगा, जिससे ज्यादा से ज्यादा यूजर्स डिजिटल वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा सकें।
यह AI चैटबॉट यूजर्स को जटिल वित्तीय विषयों को सरल तरीके से समझाने में मदद करेगा। इसमें कंपाउंड इंटरेस्ट, निवेश से जुड़े सामान्य सवाल और टैक्स से जुड़े बेसिक कॉन्सेप्ट को समझाने की क्षमता भी शामिल है।
Google ने कहा है कि AI फीचर को यूजर डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कंपनी के अनुसार, वित्तीय जानकारी से जुड़े फीचर्स में यूजर की अनुमति और डेटा प्राइवेसी को प्राथमिकता दी जाएगी।
Google का यह कदम दिखाता है कि कंपनियां अब पेमेंट ऐप्स को सिर्फ पैसे भेजने और लेने के साधन से आगे ले जाकर AI आधारित वित्तीय सलाहकार बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। आने वाले समय में AI और UPI का मेल डिजिटल बैंकिंग अनुभव को और आसान बना सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
AI चैटबॉट से आगे बढ़कर काम करने वाला एजेंट, Gmail, Docs और अन्य Google सेवाओं के साथ करेगा काम नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने भारत में अपने नए Gemini Spark AI एजेंट को पेश किया है। यह एक ऐसा 24/7 पर्सनल AI असिस्टेंट है, जो सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूजर के निर्देश पर कई डिजिटल काम खुद पूरा करने में मदद करेगा। फोन और लैपटॉप बंद होने पर भी करता रहेगा काम Gemini Spark की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बैकग्राउंड में काम कर सकता है। Google के अनुसार, यूजर कोई टास्क देने के बाद इसे छोड़ सकता है और यह क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम जारी रखता है, भले ही फोन लॉक हो या लैपटॉप बंद हो। Gmail, Docs, Sheets और Calendar से होगा कनेक्शन Gemini Spark को Google Workspace सेवाओं के साथ जोड़ा गया है। यह Gmail से जरूरी जानकारी ढूंढने, Docs तैयार करने, Sheets में काम करने और डिजिटल कार्यों को व्यवस्थित करने में सहायता कर सकता है। हालांकि, बड़े बदलाव करने से पहले यूजर की अनुमति लेना इसकी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। AI असिस्टेंट से AI एजेंट की ओर बढ़ रहा Google Google का कहना है कि Gemini Spark का उद्देश्य AI को सिर्फ बातचीत करने वाले टूल से आगे ले जाकर ऐसा डिजिटल साथी बनाना है, जो लंबे समय वाले कामों को पूरा करने में मदद करे। इसमें टास्क, स्किल्स और शेड्यूल जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जिससे यूजर नियमित कामों को ऑटोमेट कर सकता है। भारत में धीरे-धीरे होगा रोलआउट Gemini Spark की उपलब्धता चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जा रही है। शुरुआती दौर में यह चुनिंदा Google AI सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। Google आने वाले समय में इसके फीचर्स और ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है।
Redmi ने K100 सीरीज को किया टीज, Snapdragon फ्लैगशिप चिप और हाई-एंड फीचर्स मिलने की उम्मीद नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Redmi ने अपनी अगली फ्लैगशिप स्मार्टफोन सीरीज Redmi K100 का पहला टीजर जारी कर दिया है। कंपनी ने अभी डिवाइस का पूरा नाम और स्पेसिफिकेशन आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किए हैं, लेकिन टीजर से संकेत मिल रहे हैं कि Redmi K100 Pro को हाई-परफॉर्मेंस फ्लैगशिप फोन के रूप में पेश किया जाएगा। 'Demon King' टैगलाइन के साथ टीजर जारी Redmi ने अपने आगामी फ्लैगशिप प्रोडक्ट को "Demon King arrives" टैगलाइन के साथ टीज किया है। कंपनी इसे ChinaJoy 2026 में Qualcomm Snapdragon के बूथ पर पेश करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Redmi K100 सीरीज की पहली झलक इसी इवेंट में दिखाई जा सकती है। Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिप मिलने की उम्मीद लीक्स के अनुसार, Redmi K100 Pro में Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर दिया जा सकता है। यह फोन गेमिंग और हाई-परफॉर्मेंस यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी प्रोसेसर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। 200MP कैमरा और बड़ी बैटरी की चर्चा रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Redmi K100 Pro में 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा, हाई रिफ्रेश रेट OLED डिस्प्ले और बड़ी क्षमता वाली बैटरी मिल सकती है। कुछ लीक्स में 8,000mAh से ज्यादा बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट का भी दावा किया गया है। गेमिंग और प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार पर नजर Redmi K सीरीज को कंपनी लंबे समय से "फ्लैगशिप किलर" कैटेगरी में पेश करती रही है। नए K100 Pro के जरिए कंपनी प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में Samsung और अन्य फ्लैगशिप डिवाइसों को चुनौती देने की कोशिश कर सकती है।
हैदराबाद, एजेंसियां। Zoho Corporation के मैसेजिंग और VoIP कॉलिंग ऐप Arattai ने यूज़र्स के लिए नया आधार-आधारित वैकल्पिक पहचान सत्यापन (Identity Verification) फीचर लॉन्च किया है। कंपनी का कहना है कि इस सुविधा का उद्देश्य फर्जी अकाउंट, पहचान की धोखाधड़ी और इंपर्सोनेशन पर रोक लगाना है। पहचान सत्यापित होने के बाद यूज़र्स को उनके प्रोफाइल पर परमानेंट ग्रीन बैज मिलेगा, जिससे अन्य लोग उनकी प्रोफाइल की विश्वसनीयता आसानी से पहचान सकेंगे। प्रोफाइल सेटिंग्स से होगा आधार वेरिफिकेशन यूज़र्स ऐप की प्रोफाइल सेटिंग्स में जाकर 'Get Verified' विकल्प के माध्यम से आधार ऐप का उपयोग कर अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक है और Arattai किसी भी यूज़र का आधार डेटा अपने सर्वर पर स्टोर नहीं करता। सिर्फ वेरिफाइड यूज़र्स से मैसेज लेने का विकल्प नए फीचर के तहत यूज़र्स यह भी तय कर सकेंगे कि उन्हें केवल सत्यापित (Verified) प्रोफाइल से ही संदेश प्राप्त हों। इससे स्पैम और फर्जी मैसेजों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। यह सुविधा Android, iOS, Windows और Mac सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई है। नए प्राइवेसी और सिक्योरिटी फीचर्स भी शामिल आधार वेरिफिकेशन के साथ Arattai ने कई नए सुरक्षा फीचर्स भी पेश किए हैं। इनमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, Google Drive और iCloud पर एन्क्रिप्टेड क्लाउड चैट बैकअप तथा पब्लिक ग्रुप्स में फोन नंबर छिपाने (Hide Phone Number) की सुविधा शामिल है। ब्लू और ग्रे बैज सिस्टम रहेगा जारी कंपनी ने बताया कि Arattai में पहले से मौजूद वेरिफिकेशन सिस्टम भी जारी रहेगा, जिसमें सामान्य सत्यापित प्रोफाइल को ब्लू बैज और सरकारी संस्थाओं के आधिकारिक अकाउंट्स को ग्रे बैज दिया जाता है। नया आधार-आधारित ग्रीन बैज सिस्टम प्लेटफॉर्म पर भरोसा और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।